बिल का सारांश

संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) बिल, 2026 [2026 के परिसीमन बिल]

 

  • संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) बिल, 2026 को 16 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। इसका उद्देश्य परिसीमन के संबंध में संविधान में संशोधन करना है।

  • जनसंख्या के आधार पर परिसीमन: लोकसभा के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन निम्नलिखित आधार पर होगा: (क) प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें दी जाएंगी, (ख) प्रत्येक राज्य के भीतर सभी सीटों की जनसंख्या समान होगी। संविधान में यह प्रावधान है कि सीटों की संख्या का पुनर्निधारण प्रत्येक जनगणना के बाद किया जाएगा। 1976 में संविधान संशोधन के माध्यम से सीटों के इस पुनर्निधारण को 25 वर्षों के लिए टाल दिया गया था। इसके बाद 2001 में एक अन्य संविधान संशोधन द्वारा राज्यों की सीटों की हिस्सेदारी को अगले 25 वर्षों (2026 के बाद पहली जनगणना तक) तक फ्रीज कर दिया गया, लेकिन प्रत्येक राज्य के भीतर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को बदलने की अनुमति दी गई। यह बिल इस फ्रीज़ को हटाता है और इस सिद्धांत पर वापस लौटता है कि सभी राज्यों में लोकसभा के सभी निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या लगभग समान होगी।

  • किस जनगणना का इस्तेमाल होगा, संसद तय करेगी: बिल इस अनिवार्यता को हटाता है कि प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन किया जाए। इसमें यह प्रावधान है कि परिसीमन उस जनगणना से प्राप्त जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा जैसा कि संसद कानून द्वारा निर्धारित कर सकती है। शर्त यह है कि उस जनगणना के आंकड़े प्रकाशित हो चुके हों।

संविधान संशोधन बिल के साथ परिसीमन बिल, 2026 भी पेश किया गया है। इस बिल में प्रावधान है कि परिसीमन आयोग के गठन के समय तक जिस सबसे हालिया जनगणना के आंकड़े प्रकाशित हो चुके हों, उसी का प्रयोग किया जाना चाहिए। इसका तात्पर्य यह है कि अगले परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का प्रयोग किया जाएगा।

  • लोकसभा में सीटों की अधिकतम संख्या में बढ़ोतरी: संविधान के अनुसार, लोकसभा में अधिकतम 550 सदस्य होंगे, जिनमें राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य हो सकते हैं। बिल के अनुसार, सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 850 कर दी गई है, जिनमें राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्य हो सकते हैं।

  • महिला आरक्षण की शुरुआत: 2023 में पारित 106वें संवैधानिक संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं। इसमें प्रावधान है कि यह आरक्षण तब लागू होगा, जब इस उद्देश्य के लिए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, जो 2023 के कानून के लागू होने के बाद पहली जनगणना पर आधारित होगा। लेकिन यह बिल उस अनिवार्यता को हटाता है कि परिसीमन केवल 2023 के कानून के बाद की पहली जनगणना पर ही आधारित होना चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।