बिल का सारांश

परिसीमन बिल, 2026

 

  • परिसीमन बिल, 2026 को 16 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। इस बिल में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों को फिर से निर्धारित करने और उनके बंटवारे के लिए एक परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त यह बिल परिसीमन एक्ट 2002 को निरस्त करने का भी प्रयास करता है।

  • परिसीमन आयोग: केंद्र सरकार समय-समय पर परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है। इसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे: (i) एक चेयरपर्सन, जो सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश हो, (ii) मुख्य चुनाव आयुक्त या उसके द्वारा नामित एक चुनाव आयुक्त, और (iii) संबंधित राज्य का राज्य चुनाव आयुक्त। चेयरपर्सन की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी। केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए आयोग का कार्यकाल तय करेगी। वह कार्यकाल बढ़ा भी सकती है।

  • आयोग के सहयोगी सदस्य: आयोग के कार्यों में मदद के लिए प्रत्येक राज्य में 10 सहयोगी सदस्य होंगे। इनमें से पांच सदस्य, उस राज्य के लोकसभा सांसद होंगे और पांच सदस्य उस राज्य की विधानसभा के सदस्य यानी विधायक होंगे। इन सदस्यों को संबंधित सदनों के अध्यक्षों द्वारा नामित किया जाएगा। जिस राज्य में लोकसभा सदस्यों यानी सांसदों की संख्या पांच से कम है, वहां के सभी सदस्यों को सहयोगी सदस्य बना दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में उस राज्य के लिए कुल सहयोगी सदस्यों की संख्या 10 से कम होगी। सहयोगी सदस्यों के पास आयोग के किसी भी फैसले पर वोट देने या हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं होगा।

  • परिसीमन के लिए जनसंख्या का आधार: परिसीमन सबसे हाल की जनगणना पर आधारित होगा, जिसके आंकड़े आयोग के गठन की तारीख तक प्रकाशित हो चुके हों।  

  • सीटों का फिर से निर्धारण: आयोग यह तय करेगा कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को लोकसभा में कितनी सीटें दी जानी चाहिए और साथ ही वह राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या भी तय करेगा। बिल में यह अनिवार्य किया गया है कि जहां तक व्यावहारिक हो, सभी निर्वाचन क्षेत्र भौगोलिक रूप से सघन क्षेत्र (आपस में जुड़े हुए) होने चाहिए। सीटों की सीमाएं तय करते समय भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा सीमाएं, संचार की सुविधाएं और जनता की सुविधा को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को इस तरह से निर्धारित किया जाना चाहिए कि वह पूरी तरह से एक ही लोकसभा क्षेत्र के भीतर आए।

  • आरक्षण: आयोग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का भी निर्धारण करेगा। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र राज्य के विभिन्न भागों में फैले होने चाहिए। आरक्षित सीटों को उन क्षेत्रों में रखा जाना चाहिए जहां अनुसूचित जाति की जनसंख्या कुल जनसंख्या की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक हो। वहीं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों को उन क्षेत्रों में रखा जाना चाहिए जहां कुल जनसंख्या की तुलना में उनकी जनसंख्या सबसे अधिक हो।

  • परिसीमन की प्रक्रिया: आयोग निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अपना प्रस्ताव और सहयोगी सदस्यों के किसी भी असहमति वाले प्रस्तावों को प्रकाशित करेगा। इन्हें भारत के राजपत्र (गैजेट ऑफ इंडिया) और सभी राज्यों के आधिकारिक राजपत्रों में प्रकाशित किया जाएगा। आयोग किसी भी आपत्ति और सुझावों पर विचार करेगा और उन पर चर्चा करने के लिए एक या अधिक सार्वजनिक बैठकें आयोजित करेगा। अंतिम आदेश भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे।

 

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