बिल का सारांश

भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) बिल, 2013

  • कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मामलों के मंत्री वी. नारायणसामी ने 19 अगस्त, 2013 को राज्यसभा में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) बिल, 2013 पेश किया। इसे 23 अगस्त, 2013 को कार्मिक, लोक शिकायत और कानून एवं न्याय पर गठित स्टैंडिंग कमिटी के पास विचार के लिए भेजा गया। कमिटी ने 6 फरवरी, 2014 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। बिल भ्रष्टाचार निवारण एक्ट, 1988 को संशोधित करता है।
     
  • बिल, एक्ट के तहत रिश्वत देना अपराध घोषित करता है, रिश्वत लेने की परिभाषा को व्यापक बनाता है और व्यावसायिक संगठनों को अपने दायरे में लाता है।
     
  • रिश्वत लेना : एक्ट के तहत रिश्वत लेने का अर्थ है, किसी पब्लिक सर्वेंट द्वारा सरकारी काम को करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति से इनाम लेना, उसका पक्ष लेना या उसको अपनी सेवा देना। बिल में इस प्रावधान को बदल दिया गया है। बिल में प्रावधान है कि किसी पब्लिक सर्वेंट ने रिश्वत ली है (ऐसा माना जाएगा), अगर (i) वह स्वयं या किसी अन्य द्वारा सरकारी काम को गलत तरीके से करने के बदले किसी लाभ या पारितोषिक का आग्रह करता है, उसकी अपेक्षा करता है, उसे स्वीकार करता है या उसे हासिल करने का प्रयास करता है, और (ii) उसका आग्रह, स्वीकृति या प्रयास करना ही यह साबित करेगा कि उसने सरकारी काम को गलत तरीके से किया है। एक्ट छह महीने से लेकर पांच वर्षों के कारावास के दंड का प्रावधान करता है। बिल इस कारावास को बढ़ाकर तीन से लेकर सात वर्ष तक करता है।
     
  • रिश्वत देना : बिल पब्लिक सर्वेंट को रिश्वत देने के अपराध से संबंधित नया प्रावधान प्रस्तावित करता है। बिल के तहत यह अपेक्षित है कि रिश्वत देने वाला व्यक्ति (i) किसी अन्य व्यक्ति को इस बात के लिए इनाम देने की पेशकश करता है कि वह व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी को उसका सरकारी काम गलत ढंग से करने के लिए बहकाए या पारितोषिक दे, (ii) किसी सरकारी अधिकारी को लाभ की पेशकश करता है, यह जानते हुए कि उसे स्वीकार करने से वह अधिकारी अपना सरकारी काम गलत तरीके से करेगा। इस अपराध की सजा तीन से लेकर सात वर्ष तक की सजा और जुर्माना है।
     
  • बिचौलिये और तीसरे पक्ष की भागीदारी : एक्ट में बिचौलिये और तीसरे पक्ष के जरिये रिश्वत लेना अपराध माना गया है। बिल किसी बिचौलिये या तीसरे पक्ष के जरिए रिश्वत देने को भी इसके दायरे में लाता है।
     
  • व्यावसायिक संगठन द्वारा रिश्वत देना : एक्ट में केवल ‘व्यावसायिक लेनदेन’ में रिश्वत देना शामिल है। बिल के तहत एक व्यावसायिक संगठन किसी सरकारी अधिकारी को रिश्वत देने का दोषी माना जाएगा, अगर वह व्यवसाय में लाभ हासिल करने या उसे कायम रखने के लिए इनाम की पेशकश करता है। संगठन के लिए कार्यरत व्यक्ति को रिश्वत देने का दोषी माना जाएगा। इसके अतिरिक्त संगठन के मुखिया को भी दोषी माना जाएगा और उसे तीन से सात वर्ष के कारावास एवं जुर्माने के साथ दंडित किया जाएगा। लेकिन संगठन और उसके मुखिया को इस स्थिति में उत्तरदायी नहीं माना जाएगा, अगर यह साबित हो जाता है कि मुखिया को उस काम की जानकारी नहीं थी और संगठन ने पर्याप्त उपाय किए थे।
     
  • उकसाना : एक्ट के तहत रिश्वत लेने के लिए उकसाना एक दंडनीय अपराध है जिसके लिए छह महीने से लेकर पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है। बिल ने अपने दायरे में सभी अपराधों के लिए उकसाने को दंडनीय अपराध बताया है जिसके लिए तीन से सात वर्ष के कारावास की सजा है।
     
  • आपराधिक दुर्व्यवहार और आदतन अपराधी : एक्ट किसी पब्लिक सर्वेंट द्वारा किए गए आपराधिक दुर्व्यवहार को इस प्रकार स्पष्ट करता है कि अगर वह आदतन रिश्वत लेता हो या प्रॉपर्टी पर धोखे से कब्जा करता हो। बिल इस प्रावधान को निम्नलिखित से बदलता है : (i) उसे सौंपी गई प्रॉपर्टी पर धोखे से कब्जा करना, और (ii) अवैध तरीकों से जान-बूझकर संसाधनों को रखना। इसके अतिरिक्त बिल के तहत आदतन अपराधी ऐसे दोषी पब्लिक सर्वेंट को कहा गया है जोकि एक्ट के अंतर्गत पहले भी अपराध कर चुका है। बिल इसके लिए दंड को बढ़ाकर तीन से 10 वर्ष का कारवास करता है।
     
  • रिश्वत में ली गई प्रॉपर्टी की कुर्की : बिल कहता है कि जांच करने वाला पुलिस अधिकारी ऐसे पब्लिक सर्वेंट की प्रॉपर्टी की कुर्की कर सकता है जिसके लिए यह माना जा रहा है कि उसने अपराध किया है। ऐसे करने के लिए उसे पूर्व सरकारी अनुमति के साथ स्पेशल जज के पास आवेदन करना होगा।
     
  • रिटायर्ड पब्लिक सर्वेंट्स के लिए सुरक्षा : एक्ट के तहत राज्य या केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति लिए बिना वर्तमान सरकारी अधिकारियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। बिल इसके दायरे में रिटायर्ड सरकारी अधिकारियों को लाता है, अगर वे तथाकथित अपराध के समय सरकारी सेवा में थे।
     
  • गलत काम का अनुमान लगाना : एक्ट के तहत, जब यह साबित हो जाता है कि किसी पब्लिक सर्वेंट ने अपने लिए या किसी अन्य के लिए लाभ स्वीकार किया है, तो यह माना जा सकता है कि उसने ऐसा अपने सरकारी काम को गलत ढंग से करने के बदले किया है। यह रिश्वत लेने, व्यावसायिक प्रक्रियाओं और आपराधिक दुर्व्यवहार सहित लेनदेन से संबंधित अपराधों पर लागू होता है। बिल इस प्रावधान को बदलता है और इसमें केवल रिश्वत लेने को शामिल करता है।

 

 

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