बिल का सारांश

वन (संरक्षण) संशोधन बिल, 2023

  • वन (संरक्षण) संशोधन बिल, 2023 को लोकसभा में 29 मार्च, 2023 को पेश किया गया। बिल वन संरक्षण एक्ट, 1980 में संशोधन करता है जो वन भूमि के संरक्षण का प्रावधान करता है। बिल कुछ प्रकार की भूमि को कानून के दायरे से लाता और कुछ को इसके दायरे से हटाता भी है। इसके अलावा यह वन भूमि पर की जाने वाली गतिविधियों की सूची को विस्तृत करता है। बिल की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • वन में की जाने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंधएक्ट वन के डी-रिजर्वेशन या गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाता है। केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति से ऐसे प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं। गैर-वानिकी उद्देश्यों में बागवानी फसलों की खेती या रीफॉरेस्टेशन के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए भूमि का उपयोग शामिल है। एक्ट कुछ गतिविधियों को निर्दिष्ट करता है जिन्हें गैर-वानिकी उद्देश्यों से बाहर रखा जाएगायानी वन के डी-रिजर्वेशन या गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इन गतिविधियों में वन और वन्यजीवों के संरक्षणप्रबंधन और विकास से संबंधित कार्य शामिल हैं जैसे चेक पोस्टफायर लाइन बनानाबाड़ लगाना और वायरलेस संचार स्थापित करना। बिल इस सूची में कुछ और गतिविधियों को शामिल करता है, जैसे: (i) संरक्षित स्थानों के अतिरिक्त वन क्षेत्रों में वन्य जीवन (संरक्षण) एक्ट, 1972 के तहत सरकार या किसी अन्य अथॉरिटी के स्वामित्व वाले चिड़ियाघर और सफारी, (ii) इको-टूरिज्म संबंधी सुविधाएं, (iii) सिल्विकल्चरल ऑपरेशंस (वनों की वृद्धि) और (iv) केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट कोई अन्य उद्देश्य। इसके अलावा केंद्र सरकार उन नियमों और शर्तों को निर्दिष्ट कर सकती है जिनके जरिए किसी सर्वेक्षण (जैसे एक्सप्लोरेशन का काम, सेसिमिक सर्वे) को गैर वानिकी उद्देश्य के दायरे से बाहर किया जा सकता है।

  • एक्ट के तहत भूमि: बिल प्रावधान करता है कि दो प्रकार की भूमि एक्ट के तहत होगी: (i) भारतीय वन एक्ट, 1927 या किसी अन्य कानून के तहत वन के रूप में घोषित/अधिसूचित भूमि, या (ii) पहली श्रेणी में न आने वाली भूमि, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में 25 अक्टूबर, 1980 को या उसके बाद वन के रूप में अधिसूचित। इसके अलावा, एक्ट 12 दिसंबर, 1996 को या उससे पहले वन उपयोग से गैर-वानिकी उपयोग में परिवर्तित भूमि पर लागू नहीं होगा, जिसका आदेश किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा अधिकृत अथॉरिटी ने दिया है।

  • भूमि की छूट प्राप्त श्रेणियांबिल एक्ट के प्रावधानों से कुछ प्रकार की भूमि को छूट भी देता है, जैसे रेल लाइन या सार्वजनिक सड़क, जिसका रखरखाव केंद्र सरकार करती है, के पास स्थित ऐसी वन भूमि जो आवास, रेल या सड़क किनारे सुविधा केंद्र (इनका अधिकतम आकार 0.10 हेक्टेयर है) तक पहुंच प्रदान करती है। जिस वन भूमि को छूट दी जाएगी, उसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अंतरराष्ट्रीय सीमाओंनियंत्रण रेखा या वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ 100 किमी के भीतर स्थित भूमिजिसे राष्ट्रीय महत्व या सुरक्षा के लिए सामरिक लिनियर प्रॉजेक्ट के निर्माण हेतु उपयोग करने के लिए प्रस्तावित किया गया है, (ii) 10 हेक्टेयर तक की भूमिजिसे सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए उपयोग हेतु प्रस्तावित किया गया है, और (iii) रक्षा संबंधी प्रॉजेक्ट्सअर्धसैनिक बलों के लिए शिविरया केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट पब्लिक यूटिलिटी प्रॉजेक्ट्स के निर्माण के लिए प्रस्तावित भूमि (वामपंथी अतिवादी प्रभावित क्षेत्र में पांच हेक्टेयर से अधिक नहीं)। ये छूट केंद्र सरकार द्वारा दिशानिर्देशों द्वारा निर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अधीन होंगी।

  • लीज़ या अन्य किसी प्रकार से भूमि देना: एक्ट के तहत अगर राज्य सरकार या किसी अथॉरिटी को किसी संगठन (जो सरकार के स्वामित्व वाला नहीं हो) को लीज़ या किसी और प्रकार से वन भूमि सौंपने का निर्देश देता होता है तो उसे पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होती है। ये संगठन निजी व्यक्ति, एजेंसी, अथॉरिटी, निगम हो सकते हैं। बिल प्रावधान करता है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन किसी संगठन (जैसे निजी व्यक्ति, एजेंसी, अथॉरिटी, निगम) को इसे सौंपा जा सकता है।

  • निर्देश जारी करने की शक्तिबिल कहता है कि केंद्र सरकार एक्ट के कार्यान्वयन के लिए केंद्र, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के तहत या उसके द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अथॉरिटी/संगठन को निर्देश जारी कर सकती है।   

 

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