लेजिसलेटिव ब्रीफ

मसौदा क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल करंसी का रेगुलेशन बिल, 2019

बिल की मुख्‍य विशेषताएं

  • मसौदा बिल देश में क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग, होल्डिंग, बिक्री, व्यापार, उसे जारी, निस्तारित या इस्तेमाल करने को प्रतिबंधित करता है। क्रिप्टोकरंसी ऐसी कोई भी सूचना, कोड, या टोकन है जोकि किसी वैल्यू का डिजिटल रिप्रेजेंटेशन देता है और किसी व्यावसायिक गतिविधि में उसकी युटिलिटी है, या वह स्टोर ऑफ वैल्यू या यूनिट ऑफ एकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • मसौदा बिल के अंतर्गत क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग, होल्डिंग, बिक्री, उसे जारी, ट्रांसफर या इस्तेमाल करने पर जुर्माना भरना पड़ सकता है या 10 साल तक की कैद भुगतनी पड़ सकती है, या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।
  • कोई व्यक्ति एक्ट के लागू होने के 90 दिनों के भीतर अपने पास मौजूद क्रिप्टोकरंसी की घोषणा और उसका निस्तारण कर सकता है।
  • मसौदा बिल परीक्षण, शोध या शिक्षण के उद्देश्य से क्रिप्टोकरंसी की तकनीक या प्रक्रियाओं के इस्तेमाल की अनुमति देता है।
  • केंद्र सरकार आरबीआई की सलाह से डिजिटल रूपए को लीगल टेंडर के तौर पर जारी कर सकती है। आरबीआई विदेशी क्षेत्राधिकार में लीगल टेंडर के रूप में मान्यता प्राप्त डिजिटल करंसी को विदेशी करंसी के रूप में अधिसूचित कर सकता है।

प्रमुख मुद्दे और विश्‍लेषण

  • मसौदा बिल जोखिमों के आधार पर सभी प्रकार की क्रिप्टोकरंसियों पर प्रतिबंध लगाता है जोकि उससे जुड़े जोखिमों से संबंधित हैं जैसे मनी लॉन्ड्रिंग के लिए उसका संभावित इस्तेमाल, उपभोक्ताओं को खतरा और देश की वित्तीय स्थिरता को खतरा। हालांकि क्रिप्टोकरंसियों के लाभ भी हैं जैसे बेहतर तरीके से रिकॉर्ड रखना और अधिक कारगर सीमापारीय भुगतान। बहुत से देश रेगुलेशंस के जरिए इन जोखिमों को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
  • बिल क्रिप्टोकरंसी की परिभाषा में सूचना, कोड या टोकन को शामिल करता है जोकि किसी वैल्यू का डिजिटल रिप्रेंजेटेशन देता है और क्रिप्टोग्राफिक माध्यमों के जरिए, या दूसरी तरह से जनरेट किया जाता है। यह परिभाषा बहुत व्यापक हो सकती है, और इसमें ऐसे विभिन्न प्रकार के डिजिटल टोकन शामिल हो सकते हैं जिन्हें क्रिप्टोग्राफी के जरिए जनरेट न किया गया हो। संभव है, ऐसे टोकन क्रिप्टोकरंसियों से जुड़े जोखिम न पैदा करें। 
  • बिल के अंतर्गत कुछ अपराधों के लिए निर्दिष्ट सजा देश में अन्य आर्थिक अपराधों की तुलना में गैर अनुपातिक रूप से अधिक हो सकती है।

 

भाग क : बिल की मुख्य विशेषताएं

संदर्भ

क्रिप्टोकरंसी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम के रूप में उभरी है जोकि एक पक्ष से दूसरे पक्ष को प्रत्यक्षतः ऑनलाइन भुगतान करने की अनुमति देता है और इसके लिए किसी वित्तीय संस्थान की जरूरत नहीं होती।[1]  परंपरागत करंसियों के मामले में केंद्रीय अथॉरिटी करंसी जारी करती है। इसमें सभी पक्ष उसे भुगतान के माध्यम के रूप में स्वीकार करने को वैधानिक रूप से बाध्य होते हैं। इससे यह करंसी लीगल टेंडर बन जाती है। अधिकतर क्रिप्टोकरंसियों के लिए संप्रभु गारंटी नहीं दी जाती इसलिए उसे लीगल टेंडर नहीं माना जाता। लीगल टेंडर के लिए लेनदेन संबंधी डेटा वित्तीय संस्थानों, जैसे बैंकों द्वारा मेनटेन किया जाता है। इसके विपरीत क्रिप्टोकरंसी संबंधी लेनदेन को रिकॉर्ड किया जाता है और नेटवर्क के सभी प्रयोक्ताओं के साथ साझा किया जाता है। क्रिप्टोकरंसियां भुगतान के लिए इस्तेमाल की जाती है, अगर प्राप्तकर्ता उसे प्राप्त करने को तैयार है। चूंकि उनकी वैल्यू अन्य करंसियों जैसे यूएस डॉलर की तरह चढ़ती-उतरती है, इसलिए उनका भी व्यापार किया जाता है। उन्हें यूटिलिटी टोकन्स के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है जोकि होल्डर को कंपनी की वस्तुओं और सेवाओं का एक्सेस देता है। अक्टूबर, 2019 तक विश्व में 3,000 से अधिक क्रिप्टोकरंसियां थीं, और रोजाना उनका ग्लोबल ट्रेडिंग वॉल्यूम लगभग 50 बिलियन USD था।[2] 

पिछले कुछ वर्षों से क्रिप्टोकरंसियों से जुड़े अनेक जोखिम सामने आए हैं जैसे गैरकानूनी गतिविधियों में इसका इस्तेमाल और उपभोक्ता संरक्षण का अभाव। कई देशों ने इन्हें रेगुलेट करने के लिए अलग-अलग फ्रेमवर्क अपनाए हैं। बहुत से देश (जैसे जापान, कनाडा, स्विट्जरलैंड) एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग प्रावधानों के अंतर्गत क्रिप्टोकरंसियों को रेगुलेट करते हैं।[3]  जापान जैसे कुछ देशों में कुछ क्रिप्टोकरंसियों को लीगल भुगतान माध्यम के तौर पर स्वीकार किया गया है। इनके विपरीत कई देशों (जैसे चीन, सऊदी अरब) ने करंसी के तौर पर इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई है।3

2013 और 2017 के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्त मंत्रालय ने क्रिप्टोकरंसियों से जुड़े संभावित वित्तीय, उपभोक्ता संरक्षण और सुरक्षा संबंधी जोखिमों के खिलाफ कई एडवाइजरीज़ जारी कीं।[4]  अप्रैल 2018 में आरबीआई ने अपने द्वारा रेगुलेटेड सभी संस्थानों पर इस बात का प्रतिबंध लगाया कि वे वर्चुअल करंसियों के साथ डील नहीं करेंगे या उनकी डीलिंग में अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करेंगे।[5] वित्त मंत्रालय द्वारा गठित अंतर-मंत्रालयी कमिटी (आईएमसी) ने वर्चुअल करंसियों से संबंधित मुद्दों का अध्ययन किया। उसने क्रिप्टोकरंसियों के साथ अनेक प्रकार के जोखिमों को रेखांकित किया जैसे मूल्यों में जबरदस्त अस्थिरता, मनी लॉन्ड्रिंग के प्रति अति संवेदनशीलता और वित्तीय स्थिरता से जुड़े जोखिम।[6] इसके मद्देनजर यह सुझाव दिया गया कि सरकार द्वारा जारी क्रिप्टोकरंसी को छोड़कर, बाकी सभी को भारत में प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। उसने देश में क्रिप्टोकरंसियों को प्रतिबंधित करने और एक आधिकारिक डिजिटल करंसी के लिए मसौदा बिल प्रस्तावित किया।   

प्रमुख विशेषताएं

  • क्रिप्टोकरंसी: मसौदा बिल के अनुसार क्रिप्टोकरंसी ऐसी कोई भी सूचना, कोड, संख्या या टोकन है जोकि किसी वैल्यू का डिजिटल रिप्रेजेंटेशन देता है और किसी व्यावसायिक गतिविधि में उसकी युटिलिटी है, या वह स्टोर ऑफ वैल्यू या यूनिट ऑफ एकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

क्रिप्टोकरंसी का रेगुलेशन

  • क्रिप्टोकरंसियों पर प्रतिबंध: मसौदा बिल क्रिप्टोकरंसी के लीगल टेंडर या करंसी के रूप में प्रयोग पर प्रतिबंध लगाता है। बिल देश में क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग, खरीद, होल्डिंग, बिक्री, डीलिंग, जारी करने, निस्तारण या उपयोग को प्रतिबंधित करता है। क्रिप्टोकरंसी क्रिएट करना और/या क्रेता-विक्रेता के बीच क्रिप्टोकरंसी के लेनदेन को वैलिडेट करने वाली गतिविधियां माइनिंग कहलाती हैं।
  • क्रिप्टोकरंसी का प्रयोग विशेष रूप से निम्न के लिए प्रतिबंधित है: (i) एक्सचेंज के माध्यम, स्टोर ऑफ वैल्यू या यूनिट ऑफ एकाउंट के तौर पर इस्तेमाल, (ii) भुगतान प्रणाली के तौर पर इस्तेमाल, (iii) लोगों को रजिस्टरिंग, ट्रेडिंग, बिक्री या क्लियरिंग जैसी सेवाएं देना, (iv) दूसरी करंसी के साथ ट्रेड करना, (v) उससे संबंधित वित्तीय उत्पाद जारी करना, (vi) उसे क्रेडिट के तौर पर इस्तेमाल करना, (vii) वित्त जुटाने के माध्यम के तौर पर जारी करना, (viii) निवेश के माध्यम के रूप में जारी करना।
  • छूट: केंद्र सरकार जनहित में कुछ गतिविधियों को छूट दे सकती है। बिल प्रयोग, शोध या शिक्षण के उद्देश्य से क्रिप्टोकरंसी की तकनीक या प्रक्रिया के प्रयोग की अनुमति देता है।
  • डिजिटल रूपये: केंद्र सरकार आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की सलाह से डिजिटल करंसी के किसी प्रारूप को लीगल टेंडर के तौर पर मंजूरी दे सकती है। आरबीआई किसी विदेशी डिजिटल करंसी को विदेशी करंसी के तौर पर अधिसूचित कर सकती है। विदेशी डिजिटल मुद्रा का अर्थ है किसी विदेशी क्षेत्राधिकार में लीगल टेंडर के रूप में मान्यता प्राप्त डिजिटल करंसी।

अपराध और सजा

  • बिल के अंतर्गत क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग, होल्डिंग, बिक्री, उसे जारी, ट्रांसफर या प्रयोग करने पर जुर्माना भरना पड़ेगा, या 10 साल तक की कैद भुगतनी पड़ेगी या दोनों सजा भुगतनी होंगी।  
  • क्रिप्टोकरंसी का विज्ञापन जारी करने, उसके इस्तेमाल में हिस्सा लेने का आग्रह करने, उसमें मदद करने या उसके लिए प्रेरित करने पर जुर्माना भरना पड़ेगा, या सात साल की कैद भुगतनी पड़ेगी या दोनों सजा भुगतनी होंगी। गैर कमर्शियल उद्देश्यों के लिए प्रयोग करने के इरादे से क्रिप्टोकरंसी को हासिल करना, उसे स्टोर करना या उसका निस्तारण करने पर जुर्माना भरना पड़ेगा। 
  • बिल एक्ट के लागू होने के बाद 90 दिनों का समय देता है, जिस दौरान केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों के अनुसार क्रिप्टोकरंसी का निस्तारण किया जा सकता है।

भाग ख: प्रमुख मुद्दे और विश्‍लेषण

मसौदा बिल का तर्क

क्रिप्टोकरंसियां कैसे काम करती हैं

मुद्रा के तीन मुख्य गुण होते है: यह यूनिट ऑफ एकाउंट, एक्सचेंज के माध्यम, और स्टोर ऑफ वैल्यू के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अधिकतर देशों में मुद्रा को सरकार समर्थित अथॉरिटी (जैसे भारत में आरबीआई) द्वारा जारी किया जाता है और उसमें संप्रभु गारंटी दी जाती है। मुद्रा को रखने और उसे भुगतान योग्य बनाने के लिए अधिकृत संस्थाओं (जैसे बैंक, क्रेडिट कार्ड्स और पेमेंट वॉलेट्स) को सरकारी एजेंसी द्वारा लाइसेंस दिया जाता है। इसका अर्थ यह है कि लेनदेन को वैध बनाने और मुद्रा प्रवाह को ट्रैक करने की एक केंद्रीयकृत प्रणाली है जिसे सरकार द्वारा रेगुलेट किया जाता है।

क्रिप्टोकरंसियां अनेक प्रकार से इस प्रणाली से फर्क होती हैं। पहला, वे केवल डिजिटल प्रारूप में होती हैं। दूसरा, ऐसी कोई केंद्रीयकृत अथॉरिटी नहीं होती जो लेनदेन को वैधता और गारंटी दे। इसके स्थान पर लेनदेन को दूसरे प्रयोक्ताओं द्वारा वैध ठहराया जाता है और फिर एक सुरक्षित तरीके से स्टोर किया जाता है। हम इस प्रक्रिया को नीचे स्पष्ट कर रहे हैं।  

करंसी नोट से अलग, डिजिटल वस्तु को कॉपी करना आसान होता है। इसलिए डिजिटल करंसी में एक निहित चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि उसी करंसी पर दो बार भुगतान नहीं किया गया है। क्रिप्टोकरंसियां ‘ब्लॉकचेन’ के इस्तेमाल से इस समस्या पर काबू पाती हैं। इस सिस्टम के सभी प्रयोक्ताओं के पास दूसरे अन्य प्रयोक्ताओं के एकाउंट बैलेंस का एक्सेस होता है (प्राइवेसी की रक्षा करने के लिए कोड नेम का इस्तेमाल किया जा सकता है)। जब एक साथ कई भुगतान होते हैं, तो वे एक ‘ब्लॉक’ में इकट्ठा कर दिए जाते हैं। दूसरे प्रयोक्ता यह जांच करते हुए इस ब्लॉक का सत्यापन करते हैं कि क्या भुगतान करने वाले व्यक्ति के पास पर्याप्त बैलेंस है। ब्लॉक को तब वैध माना जाता है, जब उनके सभी लेनदेन को अधिकतर प्रयोक्ताओं ने वैध ठहराया हो। इस चरण में क्रिप्टोग्राफ का इस्तेमाल करते हुए ब्लॉक पिछले ब्लॉक से जुड़ जाता है और सिस्टम पर पब्लिश हो जाता है। लेनदेन के ऐसे ब्लॉक्स की चेन को ब्लॉकचेन कहा जाता है। चूंकि यह लेजर सभी प्रयोक्ताओं को उपलब्ध होता है और उनके द्वारा वैध मान्य होता है, यह डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (डीएलटी) का एक रूप होता है। क्रिप्टोग्राफी के इस्तेमाल के कारण वैध ब्लॉक में लेनदेन को बदलना बहुत मुश्किल होता है। इसके अतिरिक्त ब्लॉक में परिवर्तन से बाद के सभी ब्लॉक्स में परिवर्तन होगा, जोकि लगभग एक असंभव कार्य है। इसके बाद, चूंकि लेजर की कई प्रतियां रखी जाती हैं, उन सभी के साथ एक साथ छेड़छाड़ करना मुश्किल होता है। इनके कारण सिस्टम में भरोसा किया जा सकता है।  

 

बिल: क्लॉज़ 3, 6, 7

क्रिप्टोकरंसियों से जुड़े लाभ और जोखिम

 

अंतर-मंत्रालयी समिति (2019) ने कहा है कि क्रिप्टोकरंसियों से संबंधित तकनीक यानी डीएलटी से वित्तीय प्रणाली की कार्यक्षमता और समावेशन में सुधार हो सकता है।6 इससे व्यक्तिगत पहचान के लिए केवाईसी की लागत कम करने और ऋण तक पहुंच में सुधार करने में मदद मिल सकती है। विश्वव्यापी रेगुलेटर्स (जैसे आईएमएफ) ने भी क्रिप्टोकरंसियों के लाभ का उल्लेख किया है। इनसे सस्ता, तेज और अधिक कुशलतापूर्वक लेनदेन किया जा सकता है।[7],[8],[9] उदाहरण के लिए कम मूल्य वाले सीमा पारीय हस्तांतरणों में उनका इस्तेमाल किया जा सकता है जहां बिचौलियों के कारण धन प्रेषण करने की लागत बहुत अधिक होती है। क्रिप्टोकरंसियां अधिक सुरक्षित भुगतान प्रणाली प्रदान करती है (चूंकि सिंगल एंटिटी होने के कारण रिकॉर्ड्स में हेरा-फेरी नहीं की जा सकती), लेनदेन में पारदर्शिता बनी रहती है और ऑडिटिंग में आसानी होती है।8

फिर भी क्रिप्टोकरंसियों के साथ अनेक प्रकार के जोखिम जुड़े हुए हैं। पहले, इनसे उपभोक्ताओं के लिए खतरा पैदा होता है। क्रिप्टोकरंसियों की कोई संप्रभु गारंटी नहीं होती और इसलिए वे लीगल टेंडर नहीं होतीं। उसकी प्रकृति अटकलबाजी की है जिससे वे बहुत अधिक अस्थिर रहती हैं। उदाहरण के लिए दिसंबर 2017 में बिटकॉइन का मूल्य 20,000 USD से गिरकर नवंबर 2018 में 3,800 USD हो गया। अगर कोई प्रयोक्ता अपनी प्राइवेट की को गंवा देता है, तो वह अपनी क्रिप्टोकरंसी का एक्सेस भी खो देता है (परंपरागत डिजिटल बैंकिंग एकाउंट की तरह, इसके पासवर्ड को दोबारा सेट नहीं किया जा सकता)। कुछ मामलों में प्राइवेट कीज़ को टेक्निकल सर्विस प्रोवाइडर (क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंजेस या वॉलेट्स) स्टोर करते हैं जोकि मालवेयर या हैकिंग के प्रति संवेदनशील होते हैं।

दूसरा, क्रिप्टोकरंसियां आपराधिक गतिविधि या मनी लॉन्ड्रिंग के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। दूसरी भुगतान प्रणालियों के मुकाबले क्रिप्टोकरंसियां को गुमनाम रहकर इस्तेमाल किया जा सकता है, चूंकि लेनदेन में शामिल पब्लिक कीज़ को सीधे किसी व्यक्ति से लिंक नहीं किया जा सकता। तीसरा, केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में क्रिप्टोकरंसियों की सप्लाई को रेगुलेट नहीं कर सकता। अगर व्यापक स्तर पर इनका इस्तेमाल किया जाएगा तो इससे देश की वित्तीय स्थिरता पर संकट मंडरा सकता है। चौथा, लेनदेन के वैलिडेशन में बिजली की बहुत खपत होती है, जिसका देश की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है (2018 में बिटकॉइन माइनिंग में बिजली की कुल खपत, मध्यम आकार की अर्थव्यवस्थाओं, जैसे स्विट्जरलैंड, के बराबर थी)।7

दूसरे क्षेत्राधिकारों में क्रिप्टोकरंसी का रेगुलेशन

इन लाभों और जोखिमों को देखते हुए विभिन्न देश अनेक प्रकार से क्रिप्टोकरंसियों को रेगुलेट करते हैं। कनाडा में क्रिप्टोकरंसियों को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्त पोषण कानूनों के अंतर्गत रेगुलेट किया जाता है।[10] ऑपेन एक्सचेंज में डिजिटल करंसियों की ट्रेडिंग की अनुमति है और क्रिप्टोकरंसियों से प्राप्त होने वाले राजस्व पर इनकम टैक्स देना होता है।[11] उन्हें वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने और बेचने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जापान में भुगतान प्रणाली के रूप में क्रिप्टोकरंसियों के उपयोग की अनुमति है।[12] क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज पंजीकृत होते हैं और जापान की फाइनांशियल सर्विस अथॉरिटी उसे रेगुलेट करती है। न्यूयॉर्क में भुगतान प्रणाली के रूप में क्रिप्टोकरंसी के इस्तेमाल की अनुमति है जोकि लाइसेंसिंग के अधीन है।[13] प्रत्येक लाइसेंसी से एंटी-फ्रॉड, एंटी मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर सिक्योरिटी और इनफॉरमेशन सिक्योरिटी संबंधी रेगुलेशंस का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।  

चीन, थाइलैंड, इंडोनेशिया और ताइवान जैसे अनेक देशों में क्रिप्टोकरंसी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है।3  कई देशों ने क्रिप्टोकरंसियों के इस्तेमाल की अनुमति तो दी है लेकिन उससे जुड़े जोखिमों के संबंध में चेतावनी भी जारी की है। उदाहरण के लिए सिक्योरिटीज़, बैंकिंग, बीमा और पेंशन के यूरोपीय रेगुलेटर्स ने एक संयुक्त बयान जारी कर चेतावनी दी है कि वर्चुअल करंसियां जोखिमपूर्ण हैं और निवेश, बचत या रिटायरमेंट प्लानिंग प्रॉडक्ट्स के रूप में अनुपयुक्त हैं।[14]

क्रिप्टोकरंसी की परिभाषा बहुत व्यापक हो सकती है

 

बिल: क्लॉज़ 2(1)(ए)

क्रिप्टोकरंसी की परिभाषा में नॉन-क्रिप्टोग्राफिक माध्यमों के जरिए जनरेटेड टोकन या वैल्यू शामिल हो सकती है

 

मसौदा बिल के अनुसार क्रिप्टोकरंसी एक सूचना, कोड, नंबर या टोकन है जिसे क्रिप्टोग्राफी या ऐसे किसी अन्य माध्यम के जरिए जनरेट किया जाता है जोकि किसी वैल्यू का डिजिटल रिप्रेजेंटेशन देता है और किसी व्यावसायिक गतिविधि में उसकी युटिलिटी है, या वह स्टोर ऑफ वैल्यू या यूनिट ऑफ एकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। बिल ऐसी सभी क्रिप्टोकरंसियों को प्रतिबंधित करता है। यह कहा जा सकता है कि यह परिभाषा बहुत व्यापक है। इसमें ऐसे टोकन शामिल हो सकते हैं जिन्हें क्रिप्टोग्राफिक माध्यमों के जरिए जनरेट न किया गया हो और इसलिए इन्हें क्रिप्टोकरंसियों से जुड़े जोखिमों का सामना न करना पड़े। उदाहरण के लिए इसमें ऑनलाइन डिस्काउंट कूपन्स, गिफ्ट कार्ड्स और लॉयलिटी रेवॉर्ड प्वाइंट्स शामिल हो सकते हैं, जैसे फ्रीक्वेंट फ्लायर माइल्स, चूंकि ये किसी वैल्यू का डिजिटल रिप्रेजेंटेशन होते हैं और स्टोर ऑफ वैल्यू के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। उल्लेखनीय है कि मसौदा बिल के अंतर्गत अगर जनहित में जरूरी हो तो केंद्र सरकार कुछ गतिविधियों को प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची से छूट दे सकती है। 

क्रिप्टोकरंसी की परिभाषा अंतरराष्ट्रीय मानदंडों से अलग है

अन्य न्याय क्षेत्र क्रिप्टोकरंसियों को अधिक स्पष्ट तरीके से परिभाषित करते हैं। फाइनांशियल एक्शन टास्क फोर्स (मनी लॉन्ड्रिंग को काबू में करने वाला अंतरसरकारी संगठन) इसे गणित आधारित विकेंद्रित, परिवर्तनीय वर्चुअल करंसी के रूप में परिभाषित करता है जिसे क्रिप्टोग्राफी के जरिए सुरक्षित रखा जाता है।9  परिवर्तनीय वर्चुअल करंसी ऐसी करंसी होती है जिसका असल करंसी में समान मूल्य होता है और उसे असल करंसी से एक्सचेंज किया जा सकता है। न्यूयॉर्क राज्य में वर्चुअल करंसी को ऐसी डिजिटल यूनिट के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे एक्सचेंज के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, या डिजिटली स्टोर की गई वैल्यू के रूप में।13 इसमें उन डिजिटल यूनिट्स को हटाया गया है: (i) जिनका प्लेटफॉर्म के बाहर कोई एप्लिकेशन नहीं है, और (ii) जोकि रेवॉर्ड्स प्रोग्राम का हिस्सा हैं।

 

बिल: क्लॉज़ेज़ 8, 9

कुछ अपराधों के लिए सजा गैर अनुपातिक हो सकती है

बिल के अंतर्गत क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग, होल्डिंग, बिक्री, जारी, ट्रांसफर या इस्तेमाल करने पर 10 साल की कैद हो सकती है। यह अन्य आर्थिक अपराधों की तुलना में गैर अनुपातिक है। तालिका 1 में बिल के अंतर्गत निर्दिष्ट सजा की तुलना अन्य अपराधों से की गई है।

तालिका 1: विभिन्न आर्थिक अपराधों के अंतर्गत निर्दिष्ट सजाओं के बीच तुलना

अपराध

अधिकतम कैद

देश में क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग, होल्डिंग, बिक्री, उसे जारी, ट्रांसफर या इस्तेमाल करना (मसौदा बिल)

10 वर्ष

नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टांस एक्ट, 1985 के अंतर्गत अपराधों से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग से प्राप्त आय (पीएमएलए)

10 वर्ष

ऐसी गतिविधियों में शामिल होना, जोकि अपराध की आय से संबंधित हैं जैसे उसे छिपाना, उसे रखना, उसे अर्जित करना या उसे इस्तेमाल करना या उसे बेदाग संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करना (पीएमएलए)

7 वर्ष

एक करोड़ रुपए से अधिक के मूल्य की विदेशी मुद्रा रखना (फेमा)

5 वर्ष

Sources: Draft Banning of Cryptocurrency & Regulation of Official Digital Currency Bill, 2019; Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002; Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999; PRS.

 

[1].  ‘Bitcoin: A Peer-to-Peer Electronic Cash System’, https://bitcoin.org/bitcoin.pdf.

[2].  CoinMarketCap, All cryptocurrencies, as of October 30, 2019, https://coinmarketcap.com/all/views/all/.

[3].  ‘Regulation of cryptocurrency around the world’, The Law Library of Congress, June 2018.

[4].  ‘RBI cautions users of Virtual Currencies against Risks’, RBI, December 24, 2013; ‘RBI cautions regarding risk of virtual currencies including Bitcoins’, RBI, December 5,  2017; ‘Government Cautions People Against Risks in Investing in Virtual ‘Currencies’’, PIB, Ministry of Finance, December 29, 2017.

[5]  ‘Prohibition on dealing in Virtual Currencies (VCs)’, Notifications, RBI, April 6, 2018.

[6].  ‘Report of the Committee to propose specific actions to be taken in relation to Virtual Currencies’, Department of Economic Affairs, Ministry of Finance,   July 22, 2019.

[7].  ‘Cryptocurrencies: looking beyond the hype’, Bank for International Settlements Annual Economic Report, 2018.

[8].  ‘Virtual Currencies and Beyond: Initial Considerations’, IMF Staff Discussion Note, January 2016.

[9].  ‘Virtual Currencies: Key Definitions and Potential AML/CFT Risks’, Financial Action Task Force, June 2014.

[10].  Proceeds of Crime (Money Laundering) and Terrorist Financing Act (S.C. 2000, c. 17), Government of Canada.

[11].  Digital Currency, Financial Consumer Agency of Canada, Government of Canada.

[12].  Payment Services Act, Act No. 59 of 2009, Government of Japan.

[13].  Regulations of the Superintendent of Financial Services, Part 200, Department of Financial Services, New York State.

[14].  ‘ESMA, EBA and EIOPA Warn Consumers of Risks in Buying Virtual Currencies’, February 12, 2018, https://www.esma.europa.eu/press-news/esma-news/esas-warn-consumers-risks-in-buying-virtual-currencies.

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