सिलेक्ट कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

एनिमी प्रॉपर्टी (संशोधन और वैलिडेशन) बिल, 2016

  • राज्यसभा की सिलेक्ट कमिटी (अध्यक्ष- श्री भूपेंदर यादव) ने 6 मई, 2016 को एनिमी प्रॉपर्टी (संशोधन और वैलिडेशन) बिल, 2016 पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। लोकसभा ने इस बिल को 9 मार्च, 2016 को पारित किया और 15 मार्च, 2016 को इसे राज्यसभा की सिलेक्ट कमिटी को रेफर किया गया। यह बिल एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट, 1968 को संशोधित करने का प्रयास करता है।
     
  • केंद्र सरकार ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान पाकिस्तान और चीन के नागरिकों की कुछ प्रॉपर्टीज को एनिमी प्रॉपर्टी घोषित किया था। इसके साथ ही, सरकार ने केंद्र सरकार के कार्यालय- कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी में इन प्रॉपर्टीज को निहित कर दिया था। 1968 का एक्ट एनिमी प्रॉपर्टी को रेगुलेट करता है और कस्टोडियन के अधिकारों को निर्दिष्ट करता है। कस्टोडियन के अधिकारों का विस्तार करने के लिए बिल में इस एक्ट को 1968 से लागू करने का प्रस्ताव है। कमिटी का सुझाव है कि बिल को कुछ संशोधनों के साथ पारित कर दिया जाए। इसके अतिरिक्त उसने 1968 के एक्ट को लागू करने से जुड़े कुछ मुद्दों का उल्लेख किया है।
     
  • केंद्र सरकार द्वारा निहित की समीक्षाः बिल कहता है कि कोई भी व्यक्ति उस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार को आवेदन कर सकता है जिसके तहत कोई ऐसी प्रॉपर्टी कस्टोडियन में निहित हो गई हो जोकि एनिमी की नहीं है। यह स्पष्ट किया गया है कि आदेश मिलने के 30 दिन के अंदर उस व्यक्ति को आवेदन करना होगा। कमिटी का सुझाव है कि 30 दिन (i) आदेश मिलने की तारीख या (ii) सरकारी गैजेट में प्रकाशित होने की तारीख, जो भी पहले हो, से गिने जाने चाहिए।
     
  • अधिकार क्षेत्र की पाबंदीः बिल सिविल अदालत और दूसरी अथॉरिटीज को एनिमी प्रॉपर्टी के खिलाफ उठने वाले विवादों में शामिल होने से रोकता है। कमिटी का सुझाव है कि केंद्र सरकार के आदेश से असंतुष्ट होने वाले किसी व्यक्ति को हाई कोर्ट में इस बात की अपील करने की अनुमति दी जाए कि कोई प्रॉपर्टी एनिमी प्रॉपर्टी है अथवा नहीं। ऐसी किसी अपील को 60 दिनों के अंदर फाइल किया जाना चाहिए (जिसे 120 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है)।
     
  • कस्टोडियन का बेदखल करने का अधिकारः कमिटी ने सुझाव दिया है कि एनिमी प्रॉपर्टी पर कब्जा करने के दौरान कस्टोडियन को वहां रहने वाले लोगों और किरायेदारों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए। ऐसे लोगों को दूसरे आवास का प्रबंध करने के लिए उपयुक्त समयावधि दी जा सकती है।
     
  • एनिमी प्रॉपर्टी की पहचान और निपटाराः कमिटी ने कहा है कि एनिमी प्रॉपर्टी की पहचान करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। कमिटी ने सुझाव दिया है कि बिल के लागू होने की तारीख से दो साल के अंदर देश में मौजूद सभी एनिमी प्रॉपर्टी को चिन्हित कर लिया जाना चाहिए। उसने सुझाव दिया कि एनिमी प्रॉपर्टी की पहचान करने के लिए उचित और पारदर्शी जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, कस्टोडियन को बिना देर किए, सभी एनिमी प्रॉपर्टीज का निपटारा कर देना चाहिए (जिन पर कोई विवाद न हो)।
     
  • असंतोष के नोटः कमिटी के छह सदस्यों (के.सी.त्यागी, के.रहमान खान, डी.राजा, पी.एल.पुनिया, हुसैन दलवई और जावेद अली खान) ने कमिटी के सुझावों के संबंध में अपना असंतोष जताया और इससे जुड़े नोट दिए। उन्होंने बिल के संबंध में कई संशोधनों के सुझाव दिए। इनमें शामिल है- (i) उस प्रावधान को हटाना, जो भारतीय नागरिकों को, जोकि एनिमी के कानूनी वारिस हैं, एनिमी घोषित करता है, (ii) भारतीय नागरिकों, जोकि एनिमी के कानूनी वारिस हैं, को एनिमी प्रॉपर्टी पर हक की इजाजत देना, (iii) उस प्रावधान को हटाना, जोकि कस्टोडियन को एनिमी प्रॉपर्टी पर स्वामित्व देता है और (iv) एनिमी प्रॉपर्टी को ट्रांसफर करने के एनिमी के अधिकार को बहाल करना।

 

यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।