स्टेट लेजिसलेटिव ब्रीफ

राजस्थान

राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार बिल, 2022

मुख्य विशेषताएं

  • बिल राज्य के सभी व्यक्तियों को स्वास्थ्य का अधिकार और स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधाएं प्रदान करता है। इसमें राज्य के निवासियों को किसी भी क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट में मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना शामिल है।

  • बिल स्वास्थ्य के अधिकार को सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बरकरार रखने के लिए राज्य सरकार के कुछ दायित्वों को निर्धारित करता है।

  • राज्य और जिला स्तर पर स्वास्थ्य प्राधिकरणों को स्थापित किया जाएगा। ये निकाय उत्तम क्वालिटी वाली स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था तैयार, उन्हें लागू और उनका निरीक्षण करेंगे और स्वास्थ्य से संबंधित सार्वजनिक आपात स्थितियों का प्रबंधन करेंगे।

प्रमुख मुद्दे और विश्लेषण

  • मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए निजी स्वास्थ्य केंद्रों को प्रतिपूर्ति का कोई प्रावधान नहीं है। इससे इन स्वास्थ्य केंद्रों को चलाना व्यावहारिक नहीं होगा, और यह संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) का उल्लंघन हो सकता है।

  • जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण को शिकायतों के लिए वेब पोर्टल पर ऐक्शन टेकन रिपोर्ट को अपलोड करना होगा। बिल यह निर्दिष्ट नहीं करता कि वेब पोर्टल पर कौन इस रिपोर्ट को एक्सेस करेगा। यह मेडिकल मामलों में मरीज के प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

  • स्वास्थ्य के अधिकार को लागू करने से राज्य का वित्तीय दायित्व बढ़ सकता है। बिल में इस अतिरिक्त लागत के लिए प्रावधान नहीं है।

राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार बिल, 2022 को 22 सितंबर, 2022 को राजस्थान विधानसभा में पेश किया गया। इसे सिलेक्ट कमिटी को भेजा गया है (चेयर: परसादी लाल मीणा, स्वास्थ्य एवं मेडिकल सेवा मंत्री)।

भाग क: बिल की मुख्य विशेषताएं

संदर्भ

1996 में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के दायरे में स्वास्थ्य का अधिकार शामिल है और इस बात का संकेत भी दिया था कि स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना राज्य सरकार का दायित्व है।[1]  संविधान के तहत, अस्पताल और दवाखानों सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य और सैनिटेशन राज्य सूची में आने वाले विषय हैं।[2]  

2018 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने चार्टर ऑफ पेशेंट्स राइट्स का ड्राफ्ट तैयार किया था जिसे राज्य सरकारों को लागू करना था।[3] राजस्थान स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाएं चलाता है। मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राज्य के 1,550 निजी और सार्वजनिक अस्पतालों में स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाता है।[4]  योजना के तहत कुछ प्रकार के उपचार के लिए बीमा कवरेज दिया जाता है।[5] 

राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार बिल, 2022 को राजस्थान विधानसभा में 22 सितंबर, 2022 को पेश किया गया। यह स्वास्थ्य एवं कल्याण में समान अधिकारों के संरक्षण और प्राप्ति का प्रावधान करता है। बिल को सिलेक्ट कमिटी को भेजा गया है। स्वास्थ्य एवं मेडिकल सेवा मंत्री परसादी लाल मीणा इस कमिटी के अध्यक्ष हैं।  

मुख्य विशेषताएं

  • स्वास्थ्य का अधिकारराज्य के प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वास्थ्य से संबंधित कुछ अधिकार होंगे। इनमें निम्नलिखित अधिकार शामिल हैं: (i) सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त आउटडोर और इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट सेवाएं, दवा और डायग्नॉस्टिक्स की सुविधा, (ii) देरी किए बिना सभी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में इमरजेंसी उपचार और देखभाल, पूर्वभुगतान करने या पुलिसिया मंजूरी हासिल करने का इंतजार किए बिना, (iii) बीमारी की प्रकृति और कारण, नतीजों, उपचार की जटिलताओं और लागत की सूचना हासिल करना तथा रिकॉर्ड्स को एक्सेस करना, (iv) किसी खास टेस्ट या उपचार से पहले सूचित सहमति हासिल करना (यानी सहमति देने से पहले व्यक्ति को पूरी बात पता होनी चाहिए), (v) सभी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में उपचार में गोपनीयता और प्राइवेसी, (vi) रेफरल परिवहन, (vii) सुरक्षित और उत्तम क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवा, और (viii) शिकायत निवारण।

  • निवासियों के लिए अतिरिक्त अधिकारराज्य के सामान्य निवासियों को कुछ अतिरिक्त अधिकार होंगे(i) किसी क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट (जैसा कि क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट (पंजीकरण और रेगुलेशन) एक्ट, 2010 में परिभाषित है) में मुफ्त स्वास्थ्य सेवा, और (ii) सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति में सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त परिवहन, उपचार और बीमा कवरेज। इन सेवाओं को एक्सेस करने का तरीका नियमों के तहत निर्दिष्ट होगा।  

  • राज्य सरकार का दायित्व: राज्य सरकार से निम्नलिखित अपेक्षित होगा: (i) सार्वजनिक स्वास्थ्य मॉडल को तैयार और निर्दिष्ट करना, (ii) राज्य के बजट में उपयुक्त प्रावधान करना, (iii) दूरी, भौगोलिक क्षेत्र या आबादी का सघनता पर विचार करते हुए स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना, (iv) सभी स्तरों पर क्वालिटी और सुरक्षा के मानक तैयार करना, (v) सुरक्षित पेयजल, सैनिटेशन और पौष्टिक रूप से पर्याप्त सुरक्षित खाद्य की आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था तैयार करना, और (vi) महामारियों और स्वास्थ्य से संबंधित सार्वजनिक आपात स्थितियों को रोकने, उसका उपचार करने और उसे नियंत्रित करने के उपाय करना। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार को मानव संसाधन नीति विकसित और स्थापित करनी चाहिए ताकि स्वास्थ्यकर्मियों का समान वितरण सुनिश्चित हो।

  • स्वास्थ्य प्राधिकरणराज्य और जिला स्तर पर स्वतंत्र निकायों को स्थापित किया जाएगा जिन्हें क्रमशः राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) और जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण (डीएचए) कहा जाएगा। ये प्राधिकरण उत्तम क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था तैयार, उन्हें लागू और उनका निरीक्षण करेंगे और स्वास्थ्य से संबंधित सार्वजनिक आपात स्थितियों का प्रबंधन करेंगे। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की अध्यक्षता भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी करेगा, जो संयुक्त सचिव से नीचे का अधिकारी नहीं होना चाहिए। इसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। जिला कलेक्टर जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण की अध्यक्षता करेगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी मामले में राज्य प्राधिकरण सरकार को सलाह देगा। 

  • शिकायत निवारण: बिल सेवाएं न मिलने और अधिकारों के हनन से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए एक व्यवस्था प्रदान करता है। शिकायतें दर्ज कराने के लिए एक वेब पोर्टल और हेल्पलाइन सेंटर बनाया जाएगा। संबंधित अधिकारी को 24 घंटे में शिकायत का जवाब देना होगा। जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण उपरोक्त समय सीमा के बढ़ने पर अनसुलझी शिकायतों पर कार्रवाई करेगा। जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण को उपयुक्त कार्रवाई करनी होगी और 30 दिनों के भीतर वेब पोर्टल पर ऐक्शन टेकन रिपोर्ट को अपलोड करना होगा। अगर जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण 30 दिनों के भीतर शिकायत को नहीं सुलझाता तो शिकायत को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेज दिया जाएगा। राज्य प्राधिकरण जिला प्राधिकरण के फैसलों के खिलाफ अपील की सुनवाई करेगा।

भाग ख: प्रमुख मुद्दे और विश्‍लेषण

निजी क्षेत्र पर बाध्यताएं, उनके व्यवसाय करने के अधिकार का हनन कर सकती हैं

बिल के तहत राजस्थान के निवासियों को अस्पताल, क्लिनिक, लैबोरेट्रीज़ जैसे किसी भी क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट में मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने का अधिकार है। इसमें निजी इस्टैबलिशमेंट्स भी शामिल हैं। बिल में यह निर्दिष्ट नहीं है कि क्या राज्य निजी क्लिनिकल इस्टैबिशमेंट्स को ऐसी मुफ्त सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिपूर्ति करेगा। यह संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) का उल्लंघन हो सकता है जोकि किसी भी पेशे को अपनाने या कोई जीविका, व्यापार या व्यवसाय करने के अधिकार की गारंटी देता है।[6] 

निजी क्षेत्र पर मुफ्त सेवा प्रदान करने के दायित्व का अर्थ यह है कि कोई निवासी कोई भुगतान नहीं करेगा। अगर सरकार लागत की प्रतिपूर्ति नहीं करती तो निजी इस्टैबलिशमेंट के पास कोई राजस्व नहीं होगा और उसके बंद होने की आशंका हो सकती है। 2007 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि राज्य की अपने नागरिकों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की बाध्यता निजी अस्पतालों पर समान रूप से लागू होती है, अगर निजी अस्पतालों ने राज्य से रियायती जमीन ली है।[7]  ऐसे अस्पतालों पर 10% आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) और 25% इन-पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) मरीजों को मुफ्त इलाज प्रदान करने की बाध्यता है। यह बाध्यता उन निजी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों पर लागू होती है जिन्होंने रियायती जमीन ली है लेकिन जमीन पर रियायत न लेने वाले केंद्रों पर ऐसी बाध्यता नहीं है।

शिक्षा का अधिकार एक्ट, 2009 एक उदाहरण पेश करता है जिसमें निजी क्षेत्र से मुफ्त सेवा प्रदान करना अपेक्षित है।[8]  उन्हें कमजोर वर्ग को मुफ्त शिक्षा के लिए 25सीटें आरक्षित करनी होती हैं। उन्हें सरकार हर बच्चे पर खर्च होने वाली राशि की प्रतिपूर्ति करती है। 

शिकायत निवारण व्यवस्था से प्राइवेसी के अधिकार का हनन हो सकता है 

सेवाएं न मिलने और अधिकारों के हनन से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए एक वेब पोर्टल और हेल्पलाइन सेंटर बनाया जाएगा। संबंधित अधिकारी को 24 घंटे में शिकायत का जवाब देना होगा। जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण उपरोक्त समय सीमा के बढ़ने पर अनसुलझी शिकायतों पर कार्रवाई करेगा। जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण को उपयुक्त कार्रवाई करनी होगी और 30 दिनों के भीतर वेब पोर्टल पर ऐक्शन टेकन रिपोर्ट को अपलोड करना होगा। शिकायत की प्रकृति के आधार पर मरीज की मेडिकल जानकारी उस ऐक्शन टेकन रिपोर्ट का हिस्सा हो सकती है। बिल यह निर्दिष्ट नहीं करता कि क्या शिकायतकर्ता के अलावा कोई व्यक्ति भी वेब पोर्टल पर रिपोर्ट को एक्सेस कर पाएगा। यह मेडिकल मामलों में मरीज के प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

1998 में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि पेशेवर डॉक्टर-मरीज का रिश्ता गोपनीयता का मामला होता है।[9] इन निजी तथ्यों का सार्वजनिक रूप से खुलासा प्राइवेसी के अधिकार का हनन हो सकता है। इसके बाद 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि प्राइवेसी के अधिकार पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध, राज्य के हस्तक्षेप की जरूरत के अनुपात में होना चाहिए।[10] 

मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के प्रभाव 

बिल में प्रावधान है कि राजस्थान के निवासी किसी भी क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट से मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्राप्त कर सकते हैं। राज्य का कोई भी व्यक्ति निम्नलिखित की सुविधा प्राप्त कर सकता है: (i) सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त आउटडोर और इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट सेवाएं, परामर्श, दवा और डायग्नॉस्टिक्स की सुविधा, (ii) सभी स्वास्थ्य प्रदाताओं में पूर्व भुगतान किए बिना, इमरेंसी उपचार और देखभाल, और (iii)  सभी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों द्वारा रेफरल परिवहन की सुविधा। निवासी सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति में सभी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में मुफ्त परिवहन, उपचार और बीमा कवरेज भी प्राप्त कर सकते हैं। इससे कुछ मुद्दे उठते हैं।

बिल के तहत, राज्य सरकार का एक दायित्व यह है कि वह राज्य बजट में स्वास्थ्य सेवा से संबंधित उपयुक्त प्रावधान करे। वित्तीय ज्ञापन में कहा गया है कि हर वर्ष 14.5 करोड़ रुपए का आवर्ती व्यय हो सकता है। इसमें एसएचए और डीएचए के सदस्यों के भत्तों पर होने वाला व्यय और मानव संसाधन संबंधी अन्य व्यय शामिल हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि नियमित बजटीय व्यय (2022-23 में 20,111 करोड़ रुपए) के जरिए बिल के विभिन्न प्रावधानों को लागू किया जाएगा। बिल के तहत राज्य के निर्दिष्ट दायित्वों को पूरा करने के लिए मानव संस्थान की तैनाती, अवसंरचना विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य के कार्यों के लिए क्रमिक धनराशि की जरूत होगी। बिल के वित्तीय ज्ञापन में इन कारकों से संबंधित लागत का, या राज्य में प्रत्येक व्यक्ति को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की अतिरिक्त लागत का उल्लेख नहीं है।

2018-19 में राजस्थान में स्वास्थ्य पर कुल व्यय 29,905 करोड़ रुपए था।[11] इनमें से सरकार (राज्य और केंद्र, दोनों) द्वारा 43.7% खर्च किया गया और 44.9% का भुगतान व्यक्तियों द्वारा आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय से किया गया (प्रति व्यक्ति औसत खर्च 1,745 रुपए)। 2017-18 में हॉस्पिटलाइजेशन (सार्वजनिक और निजी) के दौरान इलाज के लिए किया गया औसत चिकित्सा व्यय राजस्थान में 17,435 रुपए प्रति व्यक्ति था।[12]  मुफ्त स्वास्थ्य सेवा और आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने में संभवः खर्च भी शामिल होगा, जो इस समय लोग अपने आप चुकाते हैं। इसका अर्थ यह है कि राज्य को स्वास्थ्य पर बजटीय आबंटन बढ़ाना होगा। वित्तीय वर्ष 2022-23 में राजस्थान में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए अनुमानित बजट 20,111 करोड़ रुपए है।[13] 2022-23 में राजस्थान ने अपने कुल बजट का 7.4% स्वास्थ्य पर आबंटित किया, जो सभी राज्यों के औसत 6% के आबंटन से अधिक है।

उल्लेखनीय है कि 2021-22 से राज्य के कई लोगों को पहले ही मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बीमा कवरेज प्रदान किया जा चुका है। योजना के तहत पात्र परिवारों को 10 लाख रुपए मूल्य का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा और पांच लाख रुपए का दुर्घटना कवरेज मिलता है।[14],[15] यह योजना केवल आईपीडी प्रक्रियाओं और अन्य चिन्हित प्रक्रियाओं के लिए उपलब्ध है। योजना के तहत विभिन्न रोगों के लिए 1,660 से अधिक पैकेज और प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। योजना में पैकेज में बिस्तर का खर्चएनेस्थीसिया और ब्लड ऑक्सीजन के लिए खर्च शामिल है। इस योजना में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट, 2013 के तहत लाभार्थी, (ii) सामाजिक-आर्थिक जनगणना 2011 के तहत मान्यता प्राप्त सामाजिक-आर्थिक रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायऔर (iii) अनुबंधित सरकारी कर्मचारी। जो परिवार इनमें से किसी भी श्रेणी में नहीं आते हैंवे प्रीमियम कवरेज का उपयोग करने के लिए 850 रुपए का भुगतान कर सकते हैं। बीमा में अस्पताल में भर्ती होने के पांच दिन पहले और 15 दिनों के टेस्ट्सदवा और डॉक्टर के परामर्श के खर्च को शामिल किया गया है। 2022-23 में राज्य ने इस योजना के लिए 2,228 करोड़ रुपए आबंटित किए हैं।

इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज देने के लिए आयुष्मान भारत योजना को लागू करती है।[16]  योजना के दो घटक हैं: (i) व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए हेल्थ और वेलनेस सेंटर्स (एचडब्ल्यूसीज़) की स्थापना, और (ii) प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जय), द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर के अस्पताल में भर्ती हेतु पांच लाख रुपए तक की बीमा योजना। 30 जनवरी, 2023 तक राजस्थान में 9,611 एचडब्ल्यूसीज़ थीं जोकि देश के कुल एचडब्ल्यूसी का 6है।[17]  पीएम-जय के तहत पात्रता 2011 की सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना के मुताबिक अभाव और व्यावसायिक मानदंड हैं।16  पैकेज दर (सर्जिकल लाभों के लिए) में पंजीकरण शुल्कबिस्तर का शुल्कदवाओं की लागत और रोगियों के लिए भोजन शामिल है। पीएम-जय राज्यों को यह सुविधा प्रदान करते हैं कि वे अपने लिए कार्यान्वयन का मॉडल चुन सकते हैं, जैसे(i) आश्वासन/विश्वास मॉडलया (ii) बीमा मॉडलया (iii) हाइब्रिड मॉडल।[18]  राजस्थान ने बीमा मॉडल को अपनाया है जिसमें बीमा कंपनी द्वारा दावों का भुगतान किया जाता है और राज्य स्वास्थ्य एजेंसियां बीमा कंपनियों को प्रीमियम चुकाती हैं।18  9 फरवरी, 2023 तक राजस्थान में 1,098 अस्पताल पैनल में शामिल होने के पात्र हैं।[19]  अक्टूबर 2020 तक राज्य के 58.9 लाख परिवार पीएम-जय के दायरे में शामिल हैं।[20]  मार्च 2022 तक राज्य में 1.3 करोड़ से अधिक परिवार पीएम-जय और मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के पात्र हैं।[21]  उल्लेखनीय है कि पात्रता मानदंड में कुछ मिलान होने के कारण दोनों योजनाओं के तहत लाभार्थियों के बीच ओवरलैप हो सकता है।

संस्थागत और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी  

बिल सरकार का यह दायित्व निर्धारित करता है कि वह स्वास्थ्य के लिए एक मानव संसाधन नीति बनाए ताकि स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और समान वितरण सुनिश्चित हो। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त और उत्तम क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी होगा कि सभी क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट्स में पर्याप्त मानव संसाधन और अवसंरचना मौजूद हो। डेटा बताते हैं कि राज्य में इन संसाधनों की कमी हो सकती है। इससे स्वास्थ्य के अधिकार का प्रभावी कार्यान्वयन प्रभावित हो सकता है।

2030 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के सतत विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए डब्ल्यूएचओ ने प्रति 10,000 जनसंख्या पर 44.5 स्वास्थ्यकर्मियों के पर्याप्त घनत्व का सुझाव दिया है।[22]  2016 में राजस्थान में प्रति 10,000 आबादी पर लगभग 14.4 स्वास्थ्यकर्मियों का घनत्व था, जोकि प्रति 10,000 जनसंख्या पर 20.1 स्वास्थ्यकर्मियों के राष्ट्रीय औसत से कम है।[23] स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी (2022) में कहा गया है कि 31 मार्च, 2022 तक राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 1,939 स्पेशलिस्ट्स की कमी है (सर्जन, ओबीएंडजीवाई, फिजिशियंस और पीडिएट्रीशियंस)।24

तालिका 1ग्रामीण राजस्थान में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी (31 मार्च, 2022 तक)

श्रेणी

अपेक्षित
(R)

मंजूर
(S)

वास्तविक स्थिति (P)

रिक्त
(S-P)

कमी
(R-P)

एससीज़ और पीएचसीज़ में महिला स्वास्थ्यकर्मी/एएनएम

15,656

17,937

15,483

2,454

173

सीएचसीज़ में कुल स्पेशलिस्ट्स

2,464

1,555

525

1,030

1,939

पीएचसीज़ और सीएचसीज़ में लैब टेक्नीशियंस

2,749

3,186

2,149

1,037

600

सीएचसीज़ में रेडियोग्राफर्स

616

700

356

344

260

पीएचसीज़ और सीएचसीज़ में फार्मासिस्ट्स

2,749

2,360

1,198

1,162

1,551

स्रोत: ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22पीआरएस।

राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसीज़) और सीएचसीज़ में 1,551 फार्मासिस्ट्स की कमी है। राजस्थान में 2005 के बाद से उप केंद्रों (एससी) की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है। यहां 3,011 उप केंद्र हैं।[24]  अन्य राज्यों में गुजरात (1,858), मध्य प्रदेश (1,413) और छत्तीसगढ़ (1,306) शामिल हैं। इसी तरह राजस्थान में पीएचसीज़ की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है, वहां 420 अतिरिक्त पीएचसीज़ हैं (जम्मू और कश्मीर (557), कर्नाटक (457), और गुजरात (404) के अतिरिक्त)। 2022 में राजस्थान में पीएचसीज़ और सीएचसीज़ में नर्सिंग स्टाफ का अधिशेष भी दर्ज किया गया है। 31 मार्च, 2022 तक राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के पीएचसीज़ में डॉक्टरों की कमी नहीं है। 

[1]. Civil Appeal No. 16980-81 of 1996, State of Punjab v. Mohinder Singh Chawla, Supreme Court, 1996. 

[2]. Entry 6, List II, State List, Seventh Schedule, The Constitution of India. 

[3]Charter of Patient Rights, Ministry of Health and Family Welfare, 2018. 

[4]"District Wise Empanelled Hospital List", Mukyamantri Chiranjeevi Swasthya Bima Yojana, Government of Rajasthan, as accessed on February 09, 2023.

[5]“Purpose of Scheme", Mukhyamatri Chiranjeevi Swasthya Bima Yojana, Government of Rajasthan, as accessed on January 17, 2023.

[6]. Article 19 (1)(g), The Constitution of India.

[7]. Social Jurists, A Lawyers Group v. Government of NCT of Delhi, Delhi High Court, 140 (2007 DLT 698, 2007. 

[9]. Civil Appeal No. 4641 of 1998, Mr X v. Hospital Z, Supreme Court, 1998. 

[10]. Writ Petition (Civil) No. 492 of 2012, Justice K S Puttaswamy & Anr. v. Union of India, Supreme Court, 2017.

[11]. “National Health Accounts Estimates for India for the year 2018-19”, National Health Systems Resource Centre, Ministry of Health and Family Welfare, 2022.

[12]Key Indicators of Social Consumption: Health 2017-18, Ministry of Statistics and Programme Implementation, 2019. 

[13]Revenue Expenditures: Social Services 2022-23, Government of Rajasthan, 2022. 

[14]“Scheme Registration Process”Mukhyamantri Chiranjeevi Swasthya Bima Yojana, Government of Rajasthan, as accessed on January 17, 2023.

[15]“Budget Speech 2022-23”, Government of Rajasthan, February 23, 2022. 

[16]“About Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (PM-JAY)”, National Health Authority, Ministry of Health and Family Welfare, as accessed on February 07, 2023. 

[17]State-wise Functional ABHWCs as on 30th January, Ayushman Bharat Health and Wellness Centres, Ministry of Health and Family Welfare, January 30, 2023, as accessed on February 05, 2023. 

[18]National Health Authority Annual Report for 2021-22, National Health Authority, Ministry of Health and Family Welfare, 2022. 

[19]“HEM Empanelled Hospitals”, PM-JAY, National Health Authority, Ministry of Health and Family Welfare, as accessed on February 09, 2023.

[20]“State Health Profile Rajasthan”, National Health Authority, Ministry of Health and Family Welfare, October 2020, as accessed on February 09, 2023. 

[21]“State/UTs at a Glance”, National Health Authority, Ministry of Health and Family Welfare, March 2022, as accessed on February 09, 2023. 

[23]The Health Workforce in India, World Health Organisation, 2016.

[24]Rural Health Statistics 2021-22, Ministry of Health and Family Welfare. 

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