- भारतीय सांख्यिकीय संस्थान बिल, 2026 को 3 अगस्त, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। यह भारतीय सांख्यिकीय संस्थान, कोलकाता (आईएसआई) के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करता है। आईएसआई सांख्यिकी के क्षेत्र में शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण प्रदान करता है। बिल भारतीय सांख्यिकीय संस्थान एक्ट, 1959 को निरस्त करता है और उसका स्थान लेता है।
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स्थापना: आईएसआई वर्तमान में पश्चिम बंगाल सोसाइटी पंजीकरण एक्ट, 1961 के तहत एक सोसाइटी के तौर पर पंजीकृत है। बिल में यह प्रावधान है कि आईएसआई एक कॉरपोरेट बॉडी होगा और एक गैर लाभकारी कानूनी इकाई के रूप में काम करेगा।
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उद्देश्य: बिल में यह प्रावधान है कि आईएसआई के उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) सांख्यिकीय विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों के ज्ञान को आगे बढ़ाना और उसका प्रसार करना, (ii) सांख्यिकीय विज्ञान, गणित, अर्थशास्त्र, कंप्यूटर साइंस और अन्य क्षेत्रों में अंत:विषय अनुसंधान को बढ़ावा देना, (iii) ज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग (प्रैक्टिकल एप्लिकेशन) को बढ़ावा देने के लिए उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ाना, और (iv) सांख्यिकीय विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में वैश्विक उत्कृष्टता का केंद्र बनना। आईएसआई केंद्र सरकार की मंज़ूरी से नए केंद्र स्थापित कर सकता है।
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विज़िटर: यह बिल आईएसआई के प्रशासनिक ढांचे को निर्दिष्ट करता है। भारत के राष्ट्रपति इसके विज़िटर होंगे। विज़िटर एक या अधिक व्यक्तियों को निम्नलिखित कार्यों के लिए नियुक्त कर सकते हैं: (i) संस्थान के काम और प्रगति की समीक्षा करना, और (ii) इसके मामलों की जांच करना। विज़िटर जांच या समीक्षा रिपोर्ट्स के आधार पर कार्रवाई कर सकते हैं और निर्देश जारी कर सकते हैं, जो संस्थान के लिए बाध्यकारी होंगे। एक्ट के तहत केंद्र सरकार के पास ऐसी समीक्षाओं और जांचों के लिए समितियां बनाने की शक्तियां थीं।
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बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स: आईएसआई में मुख्य नीति-निर्माता कार्यकारी निकाय के रूप पर बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स होगा। बोर्ड के अध्यक्ष शिक्षाविदों, उद्योग, शिक्षा, सार्वजनिक नीति (पब्लिक पॉलिसी), सांख्यिकीय विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे। अध्यक्ष को केंद्र सरकार के सुझाव पर विज़िटर द्वारा मनोनीत किया जाएगा। बोर्ड के अन्य सदस्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय से एक नामांकित व्यक्ति, जो संयुक्त सचिव के पद से नीचे का न हो, (ii) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के संयुक्त/अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार, (iii) सांख्यिकीय विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों के चार प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिन्हें अध्यक्ष द्वारा मनोनीत किया जाएगा, और (iv) आईएसआई के चार निर्दिष्ट प्रतिनिधि। बोर्ड के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) संस्थान के प्रशासन और कामकाज से जुड़े नीतिगत मामलों पर फ़ैसला लेना, (ii) बजट और विकास योजनाओं को मंज़ूरी देना, (iii) नए विभागों और सुविधाओं की स्थापना, (iv) केंद्र सरकार को सूचित करते हुए अध्ययन केंद्रों की स्थापना, (v) डिग्रियां और अन्य शैक्षणिक उपाधियां प्रदान करना, (vi) केंद्र सरकार की पूर्व मंज़ूरी से नए पदों का सृजन करना, (vii) रेगुलेशन बनाना, और (viii) समय-समय कामकाज की समीक्षा करना (किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेषज्ञों के समूह के ज़रिए)।
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परिषद: यह बिल निम्नलिखित की स्थापना करता है: (i) पाठ्यक्रम, प्रवेश, परीक्षा और मूल्यांकन जैसे मामलों पर फ़ैसला लेने के लिए मुख्य शैक्षणिक निकाय के तौर पर एक अकादमिक परिषद, (ii) खातों और खर्चों की बारीकी से जांच करने के लिए एक वित्त समिति, और (iii) हर एक केंद्र को चलाने और दिन प्रति दिन की देखरेख के लिए एक अलग प्रबंधन परिषद।
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निदेशक: बोर्ड, विज़िटर की पूर्व मंज़ूरी से एक निदेशक नियुक्त करेगा जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी (चीफ़ एग्ज़िक्यूटिव ऑफ़िसर) होगा। निदेशक इन कार्यों के लिए ज़िम्मेदार होगा: (i) बोर्ड और अकादमिक परिषद के फ़ैसलों को लागू करना, और (ii) दिन प्रति दिन का प्रशासन। बोर्ड, विज़िटर की पूर्व मंज़ूरी से निदेशक को पद से हटा सकता है।
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केंद्र सरकार की शक्तियां: एक्ट केंद्र सरकार को जनहित में निर्देश जारी करने का अधिकार देता है, जिसके लिए कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना होगा। इसके बजाय, यह बिल केंद्र सरकार को तब निर्देश जारी करने का अधिकार देता है जब कानून के कुशल प्रशासन के लिए ऐसा करना ज़रूरी हो।
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एक्ट के तहत, केंद्र सरकार दो वर्ष के लिए आईएसआई का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकता है, अगर: (i) संस्थान उसके निर्देशों का पालन न करे, या (ii) संस्थान का प्रबंधन अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करे या हद से ज़्यादा इस्तेमाल करे। यह बिल इन शक्तियों को खत्म करता है।
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एक्ट के तहत यह जरूरी है कि नियमों और रेगुलेशंस में संशोधन के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी ली जाए। बिल के तहत पूर्व मंजूरी सिर्फ बोर्ड द्वारा बनाए जाने वाले पहले रेगुलेशंस के लिए ही जरूरी होगी।
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