- राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) बिल, 2026 को 10 अगस्त, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। यह बिल राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम एक्ट, 1962 में संशोधन का प्रयास करता है। यह एक्ट राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की स्थापना करता है।
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निगम के कार्य: एक्ट के अनुसार, निगम निर्दिष्ट क्षेत्रों में सहकारी समितियों के ज़रिए लागू किए जाने वाले कार्यक्रम की योजना बनाता है, उन्हें बढ़ावा देता है और उनका वित्तपोषण करता है। इनमें कृषि उपज, खाद्य पदार्थों, लघु वन उत्पाद और अन्य अधिसूचित वस्तुएं और सेवाएं शामिल हैं। इसके बजाय, बिल में यह प्रावधान है कि निगम निर्दिष्ट क्षेत्रों में सहकारी विकास के कार्यक्रमों की योजना बनाएगा, उन्हें बढ़ावा देगा और उनका वित्तपोषण करेगा। सहकारी विकास का अर्थ है, सहकारी समितियों को प्रत्यक्ष या किसी मध्यस्थ के जरिए सहायता प्रदान करना।
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इस एक्ट में खाद्य पदार्थों में अंडे, दूध, मांस और सब्ज़ियों जैसी चीज़ें शामिल हैं। बिल इस परिभाषा का दायरा बढ़ाता है और इसमें ये चीज़ें भी शामिल करता है: (i) प्रोसेस्ड फ़ूड और अन्य खाद्य पदार्थ, और (ii) केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य खाद्य सामग्री।
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यह बिल निगम को औद्योगिक वस्तुओं से जुड़ी गतिविधियों की भी अनुमति देता है। इस एक्ट के तहत, औद्योगिक वस्तुओं को ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित विशिष्ट संस्थाओं के उत्पादों के रूप में परिभाषित किया गया है: (i) औद्योगिक सहकारी समितियां, (ii) कुटीर और ग्रामीण उद्योग, या (iii) संबद्ध उद्योग। यह बिल ऐसी संस्थाओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होने की अनिवार्यता को समाप्त करता है।
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वित्त पोषण और निवेश के लिए पात्र संस्थाएं: एक्ट के तहत, निगम निम्नलिखित कार्य कर सकता है: (i) सहकारी समितियों के वित्तपोषण के लिए राज्य सरकारों को फ़ंड देना, या (ii) राष्ट्रीय स्तर पर या एक से ज़्यादा राज्यों में काम करने वाली सहकारी समितियों को सीधे ऋण और अनुदान देना। यह बिल राज्य सरकारों को यह अनुमति भी देता है कि वे निगम से मिलने वाली फ़ंडिंग को सहकारी विकास के काम में लगी किसी भी संस्था को दे सकती हैं। इसके अलावा, निगम किसी भी सहकारी समिति या सहकारी विकास के काम में लगी संस्था को सीधे ऋण और अनुदान भी दे सकता है।
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एक्ट के तहत निगम केवल राष्ट्रीय स्तर की और एक से अधिक राज्यों में काम करने वाली सहकारी समितियों की शेयर पूंजी में निवेश कर सकता है। बिल इसमें यह जोड़ता है कि निगम किसी राज्य के भीतर काम करने वाली सहकारी समितियों या सहकारी विकास में लगी संस्थाओं की शेयर पूंजी में भी निवेश कर सकता है। ऐसे निवेशों के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होगी।
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सूचना जमा करना और उसे साझा करना: बिल निगम को अपने कामों को कुशलतापूर्वक करने के लिए क्रेडिट जानकारी या अन्य जानकारी जमा करने और उपलब्ध कराने का अधिकार देता है। ऐसी जानकारी केंद्र सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंकिंग कंपनियों या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ साझा की जा सकती है।
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