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गृह मामले

नियमों और विनियमों की समीक्षा

विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) संशोधन नियम, 2026

नियमों की मुख्य विशेषताएं

  • संशोधन नियम स्वीकृत उद्देश्यों की एक सूची निर्दिष्ट करते हैं और यह अनिवार्य करते हैं कि सभी संगठनों को एफसीआरए आवेदन पत्रों में अपने उद्देश्यों को जरूर स्पष्ट करना होगा। साथ ही बताना होगा कि वे किन-किन राज्यों में काम करते हैं। 

  • एफसीआरए सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने या उसे रिन्यू करने के लिए उपयुक्त गतिविधि का प्रमाण देना होगा। नियमों में उपयुक्त गतिविधि को इस प्रकार परिभाषित किया गया है कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में न्यूनतम 10 लाख रुपए का उपयोग।

  • एक्ट में संगठन के “मुख्य पदाधिकारियों” पर कुछ बाध्यताएं निर्धारित की गई हैं। नियमों में इन शब्दों को परिभाषित करते हुए इसमें निदेशक, ट्रस्टीज़, कर्ता और संगठन के अन्य पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।

  • नियमों के तहत पंजीकरण फॉर्म्स में कुछ अन्य जानकारियों का खुलासा भी करना होगा। इसमें संगठन के पद, उनकी सेवाएं, प्रकाशन और सोशल मीडिया एकाउंट्स का विवरण शामिल है।

प्रमुख मुद्दे और विश्‍लेषण

  • एक्ट के अनुसार, विदेशी अंशदान पाने वाले संगठन का एक निश्चित सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षणिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम होना चाहिए। नए संशोधन नियमों में इन पांच श्रेणियों के तहत 105 स्वीकृत उद्देश्यों की सूची दी गई है। संगठन को अपने आवेदन पत्र में यह भी बताना होगा कि वह किन राज्यों में काम कर रहा है। ऐसा करके, संशोधन नियम ऐसे प्रतिबंध लगा रहे हैं जो उनके कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर हों।

  • संशोधन नियमों के तहत “मुख्य पदाधिकारियों” की नई परिभाषा के कारण अब उन लोगों को भी अपनी जानकारी देनी होगी, जिनका एक्ट में कोई उल्लेख नहीं है। इस नई शर्त को रखकर नियम अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र की सीमा से बाहर जा सकते हैं।

  • संशोधन नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी संगठन की उचित गतिविधि में क्या शामिल है। यह परिभाषा किसी संगठन के एफसीआरए सर्टिफिकेट के बहाल रहने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रश्न यह है कि इस प्रकार की परिभाषाओं को मूल कानून के तहत निर्दिष्ट होना चाहिए या नियमों के तहत।

विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) एक्ट, (एफसीआरए), 2010 व्यक्तियों, संगठनों या कंपनियों द्वारा विदेशी अंशदान की मंजूरी और उपयोग को रेगुलेट करता है।[1]  इसका उद्देश्य ऐसी सभी गतिविधियों में इस धनराशि के उपयोग पर रोक लगाना भी है जो राष्ट्रीय हित के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं। अपनी गतिविधियों के लिए विदेशी अंशदान हासिल करने के लिए सभी संगठनों को एफसीआरए सर्टिफिकेट हासिल करना होता है। यह सर्टिफिकेट पांच वर्षों के लिए वैध होता है। विदेशी अंशदान को निरंतर हासिल करने या विदेशी अंशदान से बने एसेट्स का इस्तेमाल करने के लिए इस सर्टिफिकेट को हर पांच वर्षों में रिन्यू करना होता है। पांच वर्षीय एफसीआरए सर्टिफिकेट के अलावा, एक्ट संगठनों की पूर्व मंजूरी के लिए आवेदन करने का विकल्प भी देता है। यह मंजूरी किसी संगठन को एक निश्चित स्रोत, उद्देश्य, राशि औऱ समयावधि के लिए विदेशी फंडिंग प्राप्त करने के लिए मान्य होती है।   

विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) नियम, 2011 को 29 अप्रैल, 2011 को अधिसूचित किया गया था।[2] नियम निम्नलिखित को निर्दिष्ट करते हैं (i) प्रशासनिक व्यय, (ii) जोखिम भरे निवेश, (iii) राजनैतिक प्रकृति के संगठनों की घोषणा के लिए दिशानिर्देश, (iv) विदेशी मेहमानवाजी में क्या शामिल है, और (v) सूचना प्रकटीकरण (संगठन की प्रकृति, उद्देश्यों की प्रकृति और सदस्यों का विवरण) के साथ एफसीआरए सर्टिफिकेट या पूर्व मंजूरी के पंजीकरण के लिए फ़ॉर्म। विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) संशोधन नियम, 2026 ने 2011 के नियमों में संशोधन किए हैं।[3]  इन संशोधन नियमों को गृह मंत्रालय ने 22 जून, 2026 को अधिसूचित किया है।

मुख्य विशेषताएं

  • विदेशी अंशदान हासिल करने के लिए स्वीकृत उद्देश्य: एक्ट के तहत केवल केंद्र सरकार के पास पंजीकृत संगठन ही विदेशी अंशदान प्राप्त कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए संगठन का एक निश्चित सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम होना अनिवार्य था। 2011 के नियमों के तहत आवेदन पत्र में संगठन की प्रकृति/उद्देश्य वाले खंड में इन पांच श्रेणियों को निर्दिष्ट किया गया है। संशोधन नियम इन श्रेणियों में से प्रत्येक के तहत उद्देश्यों की एक सूची जोड़ते हैं जिनमें से संगठनों को उन गतिविधियों का चयन करना होगा जिन्हें वे करना चाहते हैं। एक से अधिक उद्देश्यों को चुनने के लिए प्रति उद्देश्य 300 रुपए का अतिरिक्त शुल्क देय होगा।

  • पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव: उद्देश्यों को निर्दिष्ट करने के अतिरिक्त संशोधन नियम यह जोड़ते हैं कि संगठन यह भी बताना होगा कि वह किन राज्यों में काम करना चाहता है। संगठन को प्रति राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के लिए 300 रुपए की अतिरिक्त राशि चुकानी होगी, जहां वह काम करना चाहता है। अगर संगठन को किसी अन्य राज्य में काम करना है, या उसे अपने उद्देश्य में बदलाव करना है तो उसे इसके लिए सरकार की मंजूरी लेनी होगी। 

  • पंजीकरण फॉर्म में संशोधन करके, ये शर्तें जोड़ी गई हैं: (i) संगठन के सोशल मीडिया एकाउंट, और (ii) पिछले तीन वित्तीय वर्षों की गतिविधियों और उपयोग की गई धनराशि का ब्यौरा।

  • उचित गतिविधि की परिभाषा: एक्ट के तहत किसी संगठन का एफसीआरए सर्टिफिकेट या रिन्यूअल का आवेदन रद्द किया जा सकता है, अगर वह यह नहीं दिखा पाता कि उसने उचित गतिविधि की है। संशोधन नियम यह निर्दिष्ट करते हैं कि उचित गतिविधि के लिए पिछले दो वर्षों में संबंधित उद्देश्य के लिए न्यूनतम 10 लाख रुपए के विदेशी अंशदान का उपयोग आवश्यक होगा।

  • प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका: एक्ट के तहत किसी संगठन के निदेशकों, पदाधिकारियों और मुख्य पदाधिकारियों को एफसीआरए सर्टिफिकेट प्राप्त करने या उसे रिन्यू करने के लिए अपनी आधार जानकारी देनी होगी। सर्टिफिकेट को हर पांच वर्ष में रिन्यू करने क लिए उन्हें हर पांच वर्ष में यह जानकारी देनी होगी। 2026 के संशोधन नियम मुख्य पदाधिकारियों को इस प्रकार परिभाषित करते हैं:  (i) कंपनी के निदेशक, (ii) फर्म का पार्टनर, (iii) ट्रस्ट का ट्रस्टी, (iv) हिंदू अविभाजित परिवार का कर्ता, (v) कोई पदाधिकारी, गवर्निंग बॉडी का सदस्य, मैनेजिंग कमिटी का सदस्य या विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाली संस्था का प्रबंधन करने वाला कोई अधिकारी। ये सभी व्यक्ति सूचना के प्रकटीकरण के समान कर्तव्यों के लिए जिम्मेदार होंगे।

  • ऐसा संगठन जिसके प्रमुख पदाधिकारी भारतीय मूल के व्यक्तियों को छोड़कर अन्य विदेशी नागरिक हैं, वह पंजीकरण के लिए पात्र नहीं होगा। हालांकि सरकार ऐसे मामलों या परिस्थितियों को निर्दिष्ट कर सकती है जिनमें ऐसे संगठनों को विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए पंजीकरण करने की अनुमति दी जा सकती है।

प्रमुख मुद्दे और विश्लेषण

नियम एक्ट के दायरे से बाहर जा सकते हैं

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि नियम मूल कानून के दायरे, सिद्धांतों या प्रावधानों में परिवर्तन नहीं कर सकते। नियमों को एक्ट के उद्देश्यों को प्रभावी बनाने तक ही खुद को सीमित रखना चाहिए।[4], [5], [6]  इस संबंध में ऐसे मामले हैं जहां नियम कानून के दायरे से बाहर जा सकते हैं। हम यहां इन पर चर्चा कर रहे हैं। 

स्वीकृत उद्देश्यों और कार्य किए जाने वाले राज्यों का विवरण देना

एक्ट और 2011 के नियमों के अनुसार, किसी संगठन को पांच श्रेणियों में से अपने कार्यक्षेत्र को चुनना होगा: (i) सांस्कृतिक, (ii) आर्थिक, (iii) धार्मिक, (iv) शैक्षिक, और (v) सामाजिक। वर्ष 2026 के संशोधन इन श्रेणियों के अंतर्गत 105 स्वीकृत उद्देश्यों को निर्दिष्ट करते हैं। किसी भी संगठन को पंजीकरण के समय इस सूची से अपने उद्देश्य का उल्लेख करना अनिवार्य है। संशोधन नियमों के तहत संगठन को उन राज्यों की जानकारी देना भी आवश्यक है जिनमें वह अपनी गतिविधियां संचालित करने की योजना बना रहा है। किसी उद्देश्य या कार्य किए जाने वाले राज्य को बदलने या उसमें नया नाम जोड़ने के लिए, संगठन को एक अलग आवेदन करना होगा, जिसके साथ प्रति अतिरिक्त उद्देश्य या राज्य के लिए 300 रुपए का शुल्क देय होगा।

संशोधन नियम किसी संगठन की गतिविधियों को एक्ट में दी गई पांच व्यापक श्रेणियों के भीतर एक विशिष्ट सूची तक सीमित करते हैं। वे कार्य किए जाने वाले क्षेत्र को राज्यवार भी प्रतिबंधित करते हैं। नियमों के माध्यम से ऐसे प्रतिबंध लगाना संभवतः कानूनी अधिकार क्षेत्र की सीमा से बाहर जा सकता है।

मुख्य पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों को बढ़ाना

एक्ट विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाली संस्था के कुछ व्यक्तियों पर कुछ दायित्व डालता है जैसे कि उनकी आधार पहचान प्रदान करना। इन व्यक्तियों में निदेशक, पदाधिकारी और मुख्य पदाधिकारी शामिल हैं। एक्ट “मुख्य पदाधिकारी” शब्दों को परिभाषित नहीं करता है। यह विशेष रूप से इन शब्दों को परिभाषित करने की शक्ति नियमों को भी नहीं सौंपता। संशोधन नियम यह निर्दिष्ट करते हैं कि किसे मुख्य पदाधिकारी के रूप मे वर्गीकृत किया जाएगा। ऐसा करके, संशोधन नियम संभवत: उन व्यक्तियों पर कानून दायित्व डाल रहे हैं जिनके पास एक्ट के तहत ऐसी जिम्मेदारियां नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि अधीनस्थ विधान को मूल एक्ट के ढांचे के भीतर ही काम करना चाहिए। नियम अपने अधिकार क्षेत्र को इतना नहीं बढ़ा सकते कि वे उन लोगों पर भी नई शर्तें या प्रतिबंध लगा दें जिन्हें मुख्य कानून में निर्दिष्ट नहीं किया गया है।4, 5 ,6

उल्लेखनीय है कि विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 को मार्च 2026 में संसद में पेश किया गया जोकि मुख्य पदाधिकारियों की ऐसी ही परिभाषा को प्रस्तावित करता है।[7]  बिल कहता है कि ये मुख्य पदाधिकारी संगठन की तरफ से किए गए अपराधों के लिए जिम्मेदार होंगे, जब तक कि वे यह न प्रदर्शित कर पाएं कि यह अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था। अगर कोई संगठन बंद हो जाता है या काम करना बंद कर देता है, तो उन्हें केंद्र सरकार को सूचित भी करना होगा। आगे बिल की समीक्षा करने के लिए इसे ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी को भेज दिया गया।

उचित गतिविधिकी परिभाषा

एक्ट कहता है कि केंद्र सरकार संगठन का एफसीआरए सर्टिफिकेट रद्द कर सकता है, अगर उसने पिछले दो निरंतर वर्षों के दौरान अपने चुनींदा क्षेत्र में समाज के लिए लाभकारी कोई उचित गतिविधि नहीं की है। एक्ट में यह परिभाषित नहीं है कि उचित गतिविधि क्या होगी। संशोधन नियम उचित गतिविधि को इस तौर पर परिभाषित करते हैं कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में न्यूनतम 10 लाख रुपए के विदेशी अंशदान का उपयोग किया जाए। 

उचित गतिविधि की परिभाषा ही संगठन की एफसीआरए सर्टिफिकेट को बहाल रखने की क्षमता को निर्धारित करेगी। ऐसे गंभीर परिणाम के मद्देनजर, यह प्रश्न उठता है कि क्या ऐसे शब्दों को अधीनस्थ विधान की बजाय मूल कानून में परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए।


[1]. Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010.

[2]. Foreign Contribution (Regulation) Rules, 2011.

[3]. S.O. 3272(E), The Foreign Contribution (Regulation) Amendment Rules, 2026, June 22, 2026, https://fcraonline.nic.in/home/PDF_Doc/fc_gaz_23062026.pdf.

[4]. Agricultural Market Committee vs Shalimar Chemical Works Ltd, 1997 Supp (1) SCR 164, May 7, 1997.

[5]. State of Karnataka vs Ganesh Kamath, 1983 SCR (2) 665, March 31, 1983.

[6]. Kerala State Electricity Board vs Indian Aluminium Company, 1976 SCR (1) 552, September 1, 1975.

[7]. Foreign Contribution Regulation (Amendment) Bill, 2026, Lok Sabha, March 25, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Foreign_Contribution_Bill_2026_Text.pdf.

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