हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने 2 मार्च, 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट प्रस्तुत किया।

बजट के मुख्य अंश

  • 2026-27 के लिए हरियाणा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) (वर्तमान कीमतों पर) 15,18,223 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11% की वृद्धि दर्शाता है।

  • 2026-27 में व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 1,87,556 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 12% अधिक है। इसके अतिरिक्त, राज्य द्वारा 71,102 करोड़ रुपए का ऋण चुकाया जाएगा (इसमें आरबीआई से लिए गए 35,000 करोड़ रुपए के अल्पकालिक ऋणों की चुकौती शामिल है)।

  • 2026-27 के लिए प्राप्तियां (ऋण को छोड़कर) 1,47,263 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 13% अधिक है।

  • 2026-27 में राजस्व घाटा जीएसडीपी का 0.9% (13,188 करोड़ रुपए) अनुमानित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 1.3%) से कम है। 2025-26 में राजस्व घाटा बजट अनुमान से 12% कम रहने का अनुमान है।

  • 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 2.7% (40,293 करोड़ रुपए) पर रहने का लक्ष्य है।

नीतिगत विशिष्टताएं

  • बिजली क्षेत्र के सुधार: किसानों को बिजली आपूर्ति के लिए तीसरी विद्युत वितरण कंपनी, हरियाणा एग्री डिस्कॉम की स्थापना की जाएगी। यह नई कंपनी 5,084 कृषि फीडरों और 7.12 लाख कृषि उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान करेगी।

  • उद्योग: लक्षित शहरों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए 500 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ एक विशेष सक्षम कोष बनाया जाएगा। सोनीपत, हिसार, अंबाला शहर, यमुनानगर, सिरसा, फतेहाबाद, नीलोखेड़ी, बहादुरगढ़, बरवाला और पानीपत में पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए 500 करोड़ रुपए का सशक्तिकरण कोष स्थापित किया जाएगा। उद्योगों को स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु मौजूदा रोजगार सबसिडी को 48,000 रुपए प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष से बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया जाएगा।

  • किसानों को सहायता: दालों, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 2,000 रुपए का अतिरिक्त बोनस मिलेगा। स्वदेशी कपास के लिए प्रोत्साहन राशि 3,000 रुपए से बढ़ाकर 4,000 रुपए प्रति एकड़ की जाएगी। प्रमाणित प्राकृतिक और जैविक किसानों को अगले पांच वर्षों तक प्रति एकड़ 10,000 रुपए का वार्षिक अनुदान प्राप्त होगा।

  • पीएसीएस में सुधार: वर्तमान में 804 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) में से केवल 33 ही लाभ में हैं। सरकार का लक्ष्य पेट्रोल पंपों की स्थापना सहित उनके संचालन में विविधता लाकर 300 पीएसीएस को लाभ में लाना है। इनके माध्यम से 4,000 करोड़ रुपए की सरकारी परियोजनाएं पूरी की जाएंगी।

हरियाणा की अर्थव्यवस्था

  • जीएसडीपी: 2025-26 में हरियाणा की जीएसडीपी (स्थिर कीमतों पर) में पिछले वर्ष की तुलना में 9.5% की वृद्धि का अनुमान है। इसकी तुलना में 2025-26 में भारत की जीडीपी में 7.4% की वृद्धि का अनुमान है।

  • क्षेत्र: 2024-25 में हरियाणा की अर्थव्यवस्था में कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों का योगदान क्रमशः 18%, 28% और 54% रहने का अनुमान है (वर्तमान कीमतों पर)।

  • प्रति व्यक्ति जीएसडीपी: 2025-26 में, हरियाणा की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी (वर्तमान कीमतों पर) 4,41,216 रुपए होने का अनुमान है, जो 2024-25 की तुलना में 11% अधिक है। 2025-26 में, भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,51,393 रुपए होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7% अधिक है।

रेखाचित्र 1: हरियाणा में स्थिर मूल्यों पर जीएसडीपी की वृद्धि (2011-12)

नोट: ये आंकड़े स्थिर कीमतों (2011-12) के अनुसार हैं, जिसका अर्थ है कि विकास दर को मुद्रास्फीति के लिए समायोजित किया गया है। स्रोत: हरियाणा का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, एमओएसपीआई; पीआरएस।

2026-27 के बजट अनुमान

  • 2026-27 में कुल व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 1,87,556 करोड़ रुपए रहने का लक्ष्य है। यह 2025-26 के संशोधित अनुमान से 12% अधिक है। इस व्यय की पूर्ति 1,47,263 करोड़ रुपए की प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) और 40,148 करोड़ रुपए के शुद्ध ऋण से प्रस्तावित है। 2026-27 के लिए कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) में 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 13% की वृद्धि होने की उम्मीद है।
  • राज्य सरकार ने 2026-27 में जीएसडीपी के 0.9% (13,188 करोड़ रुपए) के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 1.3%) से कम है। 2025-26 में राजस्व घाटा (18,209 करोड़ रुपए) बजट अनुमान (20,600 करोड़ रुपए) से 12% कम रहने का अनुमान है।

  • 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 2.7% (40,293 करोड़ रुपए) पर लक्षित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 2.7%) के लगभग समान है।

तालिका 1: बजट 2026-27- मुख्य आंकड़े (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

कुल व्यय

1,99,031

2,40,017

2,37,817

-1%

2,58,658

9%

(-) ऋण का पुनर्भुगतान

57,540

70,789

70,893

0%

71,102

0%

जिसमें आरबीआई से प्राप्त  डब्ल्यूएमए*

23,230

35,000

35,000

0%

35,000

0%

शुद्ध व्यय (E)

1,41,491

1,69,229

1,66,923

-1%

1,87,556

12%

कुल प्राप्तियां

1,95,345

2,39,584

2,36,897

-1%

2,58,513

9%

(-) उधारियां

88,519

1,06,350

1,06,350

0%

1,11,250

5%

जिसमें आरबीआई से प्राप्त डब्ल्यूएमए*

23,230

35,000

35,000

0%

35,000

0%

    केंद्रीय कैपेक्स लोन **

1,459

2,000

2,000

0%

2,200

10%

शुद्ध प्राप्तियां (R)

1,06,826

1,33,234

1,30,547

-2%

1,47,263

13%

राजकोषीय घाटा (E-R)

34,665

35,995

36,376

1%

40,293

11%

जीएसडीपी का %

2.8%

2.7%

2.7%

-

2.7%

-

राजस्व घाटा

19,420

20,600

18,209

-12%

13,188

-28%

जीएसडीपी का %

1.6%

1.5%

1.3%

-

0.9%

-

प्राथमिक घाटा

10,446

9,764

9,879

1%

11,027

12%

जीएसडीपी का %

0.9%

0.7%

0.7%

-

0.7%

-

जीएसडीपी

12,23,904

13,47,486

13,67,769

2%

15,18,223

11%

नोट: बअ बजट अनुमान है; संअ संशोधित अनुमान है। * डब्ल्यूएमए (वेज़ एंड मीन्स एडवांसेज) आरबीआई द्वारा दिए जाने वाले अल्पकालिक अग्रिम होते हैं। ये अल्पकालिक उधार होते हैं जिन्हें वर्ष के दौरान कई बार लिया जा सकता है और आमतौर पर इनका भुगतान वर्ष के भीतर ही कर दिया जाता है।
**केंद्र सरकार 2020-21 से राज्य सरकारों को पूंजीगत व्यय के लिए 50-वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण प्रदान कर रही है। इन ऋणों को राज्य की उधार सीमा की गणना से बाहर रखा गया है।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हरियाणा बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में व्यय

  • 2026-27 के लिए राजस्व व्यय 1,59,351 करोड़ रुपए प्रस्तावित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 9% अधिक है। इसमें वेतन, पेंशन, ब्याज, अनुदान और सबसिडी पर होने वाला व्यय शामिल है।

  • 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय 21,757 करोड़ रुपए प्रस्तावित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 39% अधिक है। पूंजीगत व्यय परिसंपत्तियों के सृजन पर होने वाले व्यय को दर्शाता है। पूंजीगत व्यय के आवंटन में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि वाले क्षेत्र हैं: (i) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण (1,604 करोड़ रुपए की वृद्धि), और (ii) शहरी विकास (879 करोड़ रुपए की वृद्धि)।

तालिका 2: बजट 2026-27 में व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राजस्व व्यय

1,25,849

1,48,417

1,45,717

-2%

1,59,351

9%

पूंजीगत परिव्यय

12,480

16,164

15,656

-3%

21,757

39%

राज्य द्वारा दिए गए ऋण

3,161

4,648

5,550

19%

6,448

16%

शुद्ध व्यय

1,41,491

1,69,229

1,66,923

-1%

1,87,556

12%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हरियाणा बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

प्रतिबद्ध व्यय: राज्य के प्रतिबद्ध व्यय में आम तौर पर वेतन, पेंशन और ब्याज के भुगतान पर व्यय शामिल होता है। बजट के एक बड़े हिस्से को प्रतिबद्ध व्यय की मदों के लिए आवंटित करने से पूंजीगत परिव्यय जैसी अन्य व्यय प्राथमिकताओं पर फैसला लेने का राज्य का लचीलापन सीमित हो जाता है। 2026-27 में हरियाणा द्वारा प्रतिबद्ध व्यय पर 81,686 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान है जो उसकी अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का 56% है। इसमें वेतन (24%), पेंशन (12%), और ब्याज भुगतान (20%) पर खर्च शामिल है। 2024-25 में, वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, राजस्व प्राप्तियों का 63% प्रतिबद्ध व्यय की मदों पर खर्च किया गया।

तालिका 3: 2026-27 में प्रतिबद्ध व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

वेतन

28,553

31,975

31,054

-3%

34,989

13%

पेंशन

14,561

16,495

16,495

0%

17,430

6%

ब्याज भुगतान

24,219

26,231

26,497

1%

29,267

10%

कुल

67,333

74,701

74,047

-1%

81,686

10%

स्रोत: एफआरबीएम वक्तव्य, हरियाणा बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

सबसिडी और हस्तांतरण

16वें वित्त आयोग ने पाया कि हरियाणा ने 2025-26 में सबसिडी और हस्तांतरण पर जीएसडीपी का 2.4% खर्च करने का बजट बनाया था। यह 21 राज्यों द्वारा 2025-26 में सबसिडी और हस्तांतरण के लिए किए गए औसत आवंटन (जीएसडीपी का 2.7%) से कम था। 2018-19 और 2025-26 के बीच हरियाणा में जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में सबसिडी और हस्तांतरण में वृद्धि हुई। यह वृद्धि नकद हस्तांतरण और खाद्य एवं कृषि सबसिडी में वृद्धि के कारण हुई है। 2025 में दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना शुरू की गई, जिसके तहत पात्र महिलाओं को प्रति माह 2,100 रुपए का नकद हस्तांतरण प्रदान किया जाता है। बिजली सबसिडी में 2018-19 के स्तर की तुलना में गिरावट देखी गई।

तालिका 4: सबसिडी और हस्तांतरण पर व्यय (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2018-19 वास्तविक

2025-26 बअ

राशि

जीएसडीपी का %

राशि

जीएसडीपी का %

कुल

16,231

2.30%

32,280

2.40%

इसमें

       

सामाजिक सुरक्षा

5,713

0.81%

10,534

0.78%

नकद हस्तांतरण

214

0.03%

5,730

0.43%

ऊर्जा

7,371

1.05%

5,603

0.42%

खाद्य

135

0.02%

2,465

0.18%

कृषि

199

0.03%

1,573

0.12%

स्रोत: 16वीं वित्त आयोग रिपोर्ट खंड I; पीआरएस।

क्षेत्रवार व्यय: 2026-27 के दौरान राज्य के बजटीय व्यय का 61% हिस्सा निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए खर्च किया जाएगा। अनुलग्नक 1 में प्रमुख क्षेत्रों में हरियाणा के व्यय की तुलना, अन्य राज्यों से की गई है।

तालिका 5: हरियाणा बजट 2026-27 में क्षेत्रवार व्यय (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन

बजटीय प्रावधान
(2026-27 बअ)

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

19,011

21,295

20,342

22,736

12%

  • सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के लिए 8,387 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सामाजिक कल्याण एवं पोषण

15,544

19,828

17,812

20,110

13%

  • दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के लिए 6,500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

8,608

9,674

10,641

12,840

21%

  • चिरायु योजना के तहत 950 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत अनुदान के लिए 817 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां

6,021

8,908

8,687

9,790

13%

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 710 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ग्रामीण विकास

5,208

7,397

7,148

8,785

23%

  • राज्य वित्त आयोग के सुझावों पर पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय सहायता के रूप में 2,525 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

परिवहन

7,359

7,581

7,472

8,366

12%

  • सड़कों और पुलों पर पूंजीगत व्यय के लिए 2,817 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

पुलिस

6,488

7,588

7,248

7,705

6%

  • जिला पुलिस के लिए 5,652 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

शहरी विकास

3,984

6,227

5,562

6,963

25%

  • सड़कों और पुलों पर पूंजीगत व्यय के लिए 2,817 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • जिला पुलिस के लिए 5,652 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ऊर्जा

7,964

6,372

8,664

6,860

-21%

  • राज्य में सौर जल पंपिंग प्रणाली की स्थापना के लिए 610 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण

5,502

6,100

5,721

6,571

15%

  • प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं पर पूंजीगत व्यय के रूप में 1,485 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सभी क्षेत्रों पर कुल व्यय का %

62%

61%

62%

61%

 

 

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हरियाणा बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में प्राप्तियां

  • 2026-27 के लिए कुल राजस्व प्राप्ति 1,46,163 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 15% अधिक है। इसमें से 1,15,510 करोड़ रुपए (79%) राज्य द्वारा अपने संसाधनों से जुटाए जाएंगे, और 30,653 करोड़ रुपए (21%) केंद्र से आएंगे। केंद्र से प्राप्त संसाधन केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से (राजस्व प्राप्ति का 14%) और अनुदानों (राजस्व प्राप्ति का 7%) के रूप में होंगे।

  • हस्तांतरण: 2026-27 में, केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा 20,772 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 36% अधिक है। यह वृद्धि 16वें वित्त आयोग के सुझावों के अनुसार हरियाणा के हस्तांतरण में हिस्से में वृद्धि के कारण हो सकती है (अधिक जानकारी के लिए परिशिष्ट 2 देखें)।

  • 2026-27 में 9,881 करोड़ रुपए के केंद्रीय अनुदान का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 11% अधिक है।

  • राज्य का स्वयं कर राजस्व: हरियाणा का कुल स्वयं कर राजस्व 2026-27 में 1,04,640 करोड़ रुपए होने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 11% अधिक है। 2026-27 में जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में स्वयं कर राजस्व 6.9% होने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों के समान है। 2024-25 के वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में स्वयं कर राजस्व 6.4% था।

तालिका 6: राज्य सरकार की प्राप्तियों का ब्रेकअप (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राज्य के स्वयं कर

77,943

92,144

94,250

2%

1,04,640

11%

राज्य के स्वयं गैर कर

7,536

10,334

9,092

-12%

10,870

20%

केंद्रीय करों में हिस्सेदारी

14,066

15,547

15,225

-2%

20,772

36%

केंद्र से सहायतानुदान

6,885

9,792

8,940

-9%

9,881

11%

राजस्व प्राप्तियां

1,06,429

1,27,817

1,27,507

0%

1,46,163

15%

गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

396

5,417

3,040

-44%

1,100

-64%

शुद्ध प्राप्तियां

1,06,826

1,33,234

1,30,547

-2.0%

1,47,263

13%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हरियाणा बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

विनिवेश से प्राप्तियां

विनिवेश से प्राप्तियों का तात्पर्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री से अर्जित आय से है। 2025-26 में राज्य ने विनिवेश से 4,600 करोड़ रुपए की आय का अनुमान लगाया था। संशोधित अनुमानों के अनुसार, इस मद से आय 2,550 करोड़ रुपए (लक्ष्य का 55.4%) रहने का अनुमान है। हरियाणा ने 2020-21 के बाद से किसी भी वर्ष में अपने विनिवेश लक्ष्य को पूरा नहीं किया है।

तालिका 7: विनिवेश से प्राप्तियां (करोड़ रुपए में)

वर्ष

बजटीय

वास्तविक

बजटीय का %

2020-21

3,750

63

1.7%

2021-22

5,000

67

1.3%

2022-23

5,394

74

1.4%

2023-24

5,200

115

2.2%

2024-25

4,870

102

2.1%

2025-26*

4,600

2,550

55.4%

नोट: 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़ों के रूप में लिया गया है।
स्रोत: हरियाणा के संबंधित वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

  • 2026-27 में राज्य जीएसटी के स्वयं कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत (50% हिस्सा) होने का अनुमान है। राज्य जीएसटी राजस्व में 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 13% की वृद्धि होने का अनुमान है। 

  • स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क से होने वाली आय में 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 26% की वृद्धि होने की उम्मीद है।

  • राज्य उत्पाद शुल्क से होने वाली आय में 2026-27 में 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 6% की कमी होने का अनुमान है।

  • 2026-27 में बिक्री कर/वैट से होने वाला राजस्व 2025-26 के संशोधित अनुमान से 4% अधिक रहने की उम्मीद है।

तालिका 8: राज्य के स्वयं कर राजस्व के मुख्य स्रोत (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राज्य जीएसटी

37,739

42,021

46,200

10%

52,350

13%

स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क

10,492

16,555

15,500

-6%

19,500

26%

राज्य उत्पाद शुल्क

12,701

14,064

14,065

0%

13,155

-6%

सेल्स टैक्स/ वैट

11,517

12,750

11,965

-6%

12,445

4%

वाहन कर

5,268

6,000

6,000

0%

6,500

8%

बिजली पर टैक्स और शुल्क

202

700

450

-36%

600

33%

भूराजस्व

22

35

30

-14%

35

17%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हरियाणा बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

 
2026-27 के लिए घाटे और ऋण

हरियाणा के राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन एक्ट, 2005 में राज्य सरकार की बकाया देनदारियों, राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे को लगातार कम करने के लक्ष्यों का प्रावधान है।

वित्तीय वर्ष के अंत में खर्च करने की आपाधापी

कैग (2025) ने पाया कि व्यय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वित्तीय वर्ष के अंत में हुआ था। 2023-24 में चुनिंदा मदों के अंतर्गत हुए कुल 5,139 करोड़ रुपए के व्यय में से 2,089 करोड़ रुपए (41%) मार्च 2024 में खर्च किए गए थे।

बजटीय दिशानिर्देशों के अनुसार, संतुलित व्यय सुनिश्चित करने के लिए वार्षिक व्यय का 30% से अधिक हिस्सा अंतिम तिमाही में खर्च नहीं किया जाना चाहिए। कैग ने पाया कि इन मामलों में कुल व्यय का 63% चौथी तिमाही में खर्च किया गया था। आवास परियोजना के अंतर्गत, कुल व्यय (419 करोड़ रुपए) का 238 करोड़ रुपए (57%) चौथी तिमाही में खर्च किया गया था। इसी प्रकार, मध्यम सिंचाई परियोजना पर कुल व्यय (222 करोड़ रुपए) का 87% हिस्सा अंतिम तिमाही में खर्च किया गया था। कैग ने पाया कि वर्ष के अंत में व्यय की जल्दबाजी व्यय नियोजन में कमियों को दर्शाती है और इसे वित्तीय औचित्य का उल्लंघन माना जाता है।

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 1 वर्ष 2025, राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2023-24, कैग; पीआरएस।

राजस्व संतुलन: यह सरकार की राजस्व प्राप्तियों और राजस्व व्यय के बीच का अंतर होता है। राजस्व घाटे का यह अर्थ होता है कि सरकार को अपना व्यय पूरा करने के लिए उधार लेने की जरूरत है जोकि भविष्य में पूंजीगत परिसंपत्तियों का सृजन नहीं करेगा और न ही देनदारियों को कम करेगा। बजट में 2026-27 में 13,188 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 0.9%) के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया गया है। हरियाणा को 2020-21 से लेकर अब तक के सभी वर्षों में राजस्व घाटा हुआ है।

राजकोषीय घाटा: यह कुल व्यय और कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है। इस अंतर को सरकार द्वारा उधार लेकर पूरा किया जाता है जिससे कुल देनदारियों में वृद्धि होती है। 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.7% (40,293 करोड़ रुपए) होने का अनुमान है। 16वें वित्त आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए राज्यों के वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा जीएसडीपी का 3% निर्धारित करने का सुझाव दिया है। उधार सीमा निर्धारित करते समय केंद्र सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय के लिए दिए गए 50 वर्षों के ब्याज मुक्त ऋणों को शामिल नहीं किया जाएगा। 2026-27 में केंद्रीय पूंजीगत व्यय ऋण का बजट 2,200 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 0.14%) निर्धारित किया गया है। संशोधित अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.7% रहने की उम्मीद है जो बजट अनुमान (जीएसडीपी का 2.7%) के समान है।

बकाया देनदारियां: बकाया देनदारियां किसी वित्तीय वर्ष के अंत में कुल उधारों का संचय होता है। इसमें भविष्य निधि जैसे सार्वजनिक खातों पर कोई भी देनदारी भी शामिल है। 2026-27 के अंत में बकाया देनदारियां जीएसडीपी का 25.8% रहने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 25.7%) से थोड़ा ही अधिक है।

रेखाचित्र 2: राजस्व एवं राजकोषीय संतुलन (जीएसडीपी का %)  

  

नोट: RE संशोधित अनुमान है; BE बजट अनुमान है। (+) अधिशेष को दर्शाता है और (-) घाटे को दर्शाता है। स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, हरियाणा बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

रेखाचित्र 3: बकाया देनदारियां (जीएसडीपी का %)

नोट: RE संशोधित अनुमान है; BE बजट अनुमान है।
स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, हरियाणा बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

बकाया सरकारी गारंटी: राज्यों की बकाया देनदारियों में कुछ अन्य आकस्मिक देनदारियां शामिल नहीं होती हैं जिनका भुगतान राज्यों को कुछ मामलों में करना पड़ सकता है। राज्य सरकारें वित्तीय संस्थानों से राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (एसपीएसई) के ऋणों की गारंटी देती हैं। मार्च 2025 तक राज्य की बकाया गारंटी लगभग 23,932 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 1.96%) होने का अनुमान है

 

अनुलग्नक 1: मुख्य क्षेत्रों में राज्य के व्यय की तुलना

निम्नलिखित रेखाचित्रों में हरियाणा द्वारा 2026-27 में छह प्रमुख क्षेत्रों पर किए गए व्यय की तुलना सभी क्षेत्रों पर किए गए कुल व्यय के अनुपात से की गई है। क्षेत्र के लिए औसत, उस क्षेत्र में 31 राज्यों (हरियाणा सहित) द्वारा किए जाने वाले औसत व्यय (2025-26 के बजटीय अनुमानों के आधार पर) को इंगित करता है।[1]

  • शिक्षा: हरियाणा ने 2026-27 में अपने व्यय का 12.6% शिक्षा के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा शिक्षा के लिए आवंटित औसत राशि (14.5%) से कम है।

  • स्वास्थ्य: हरियाणा ने 2026-27 में अपने व्यय का 7.1% स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा स्वास्थ्य के लिए आवंटित औसत राशि (6.2%) से अधिक है।

  • कृषि: हरियाणा ने 2026-27 में अपने व्यय का 5.4% कृषि के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा कृषि के लिए आवंटित औसत राशि (5.7%) से कम है।

  • ग्रामीण विकास: हरियाणा ने 2026-27 में अपने व्यय का 4.9% ग्रामीण विकास के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा ग्रामीण विकास के लिए आवंटित औसत राशि (4.9%) के बराबर है।

  • पुलिस: हरियाणा ने 2026-27 में अपने व्यय का 4.3% पुलिस के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा पुलिस के लिए आवंटित औसत राशि (4%) से अधिक है।

  • शहरी विकास: हरियाणा ने 2026-27 में अपने व्यय का 3.8% शहरी विकास के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा शहरी विकास के लिए आवंटित औसत राशि (3.2%) से अधिक है।

नोट: 2024-25, 2025-26 (बअ), 2025-26 (संअ), और 2026-27 (बअ) के आंकड़े हरियाणा के हैं।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय वक्तव्य, हरियाणा बजट दस्तावेज 2026-27; विभिन्न राज्य बजट; पीआरएस।

अनुलग्नक 2: 2026-31 के लिए 16वें वित्त आयोग के सुझाव

16वें वित्त आयोग (चेयर: डॉ. अरविंद पनगढ़िया) की रिपोर्ट 1 फरवरी, 2026 को संसद में पेश की गई। उसके सुझाव 2026-27 से 2030-31 तक की पांच-वर्षीय अवधि के लिए लागू होंगे। 16वें आयोग ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों के हिस्से को 41% निर्धारित करने का सुझाव दिया है। यह हिस्सा 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-26) के समान ही अपरिवर्तित बना हुआ है। विभाज्य पूल की गणना केंद्रीय सरकार द्वारा जुटाए गए कुल कर राजस्व में से कर वसूलने की लागत, उपकर और अधिभारों को घटाने के बाद की जाती है। 16वें वित्त आयोग ने राज्यों के हिस्से के निर्धारण के लिए संशोधित मानदंड प्रस्तावित किए हैं। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का संक्षिप्त सारांश यहां देखें। 16वें वित्त आयोग के सुझावों के आधार पर, हरियाणा को 2026-31 की अवधि के लिए केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में 1.36% हिस्सा मिलेगा।

16वें वित्त आयोग ने पांच वर्षों की अवधि में 9.47 लाख करोड़ रुपए के अनुदानों का सुझाव दिया है। इनमें निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए अनुदान शामिल हैं: (i) शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकाय, और (ii) आपदा प्रबंधन। 16वें वित्त आयोग ने 15वें वित्त आयोग द्वारा सुझाए गए निम्नलिखित अनुदानों को बंद कर दिया है: (i) राजस्व घाटा अनुदान, (ii) शिक्षा, न्याय, सांख्यिकी और कृषि के लिए क्षेत्र-विशिष्ट अनुदान, और (iii) राज्य-विशिष्ट अनुदान। 2026-31 की अवधि के लिए हरियाणा के लिए प्रस्तावित अनुदानों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) शहरी स्थानीय निकायों के लिए 7,834 करोड़ रुपए, (ii) ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 8,270 करोड़ रुपए, और (iii) आपदा प्रबंधन अनुदान के रूप में 2,922 करोड़ रुपए। इसके अतिरिक्त फरीदाबाद अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली के विकास के लिए विशेष अवसंरचना अनुदान (5,000 करोड़ रुपए तक) का पात्र होगा। राज्यों को एक लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले आस-पास के बड़े शहरी स्थानीय निकाय में अर्ध-शहरी गांवों के विलय के लिए एकमुश्त अनुदान भी प्राप्त होगा।

तालिका 9: केंद्र द्वारा हस्तांतरित करों में प्रत्येक राज्य का हिस्सा (100 में से)

राज्य

ग्रामीण स्थानीय निकाय

शहरी स्थानीय निकाय

आपदा प्रबंधन

आंध्र प्रदेश

4.31

4.05

4.22

अरुणाचल प्रदेश

1.37

1.76

1.35

असम

3.31

3.13

3.26

बिहार

9.67

10.06

9.95

छत्तीसगढ़

3.08

3.41

3.30

गोवा

0.38

0.39

0.37

गुजरात

3.08

3.48

3.76

हरियाणा

1.08

1.09

1.36

हिमाचल प्रदेश

0.71

0.83

0.91

जम्मू एवं कश्मीर

1.85

-

-

झारखंड

3.14

3.31

3.36

कर्नाटक

4.71

3.65

4.13

केरल

2.50

1.93

2.38

मध्य प्रदेश

7.55

7.85

7.35

महाराष्ट्र

5.52

6.32

6.44

मणिपुर

0.62

0.72

0.63

मेघालय

0.64

0.77

0.63

मिजोरम

0.46

0.50

0.56

नागालैंड

0.50

0.57

0.48

ओड़िशा

4.64

4.53

4.42

पंजाब

1.58

1.81

2.00

राजस्थान

5.50

6.03

5.93

सिक्किम

0.37

0.39

0.34

तमिलनाडु

4.02

4.08

4.10

तेलंगाना

2.44

2.10

2.17

त्रिपुरा

0.64

0.71

0.64

उत्तर प्रदेश

17.96

17.94

17.62

उत्तराखंड

1.05

1.12

1.14

पश्चिम बंगाल

7.32

7.52

7.22

तालिका 10: 2026-31 के लिए राज्यवार अनुदान सहायता का विवरण (करोड़ रुपए में)

राज्य

ग्रामीण स्थानीय निकाय

शहरी स्थानीय निकाय

आपदा प्रबंधन

आंध्र प्रदेश

16,627

12,158

6,125

अरुणाचल प्रदेश

1,698

233

616

असम

14,580

3,249

5,243

बिहार

51,923

9,169

13,615

छत्तीसगढ़

11,664

4,990

2,481

गोवा

174

726

112

गुजरात

18,802

23,764

8,459

हरियाणा

8,270

7,834

2,922

हिमाचल प्रदेश

3,744

435

2,682

झारखंड

14,231

6,093

2,806

कर्नाटक

18,889

18,483

6,419

केरल

3,308

16,683

1,935

मध्य प्रदेश

32,033

16,016

11,697

महाराष्ट्र

32,817

46,803

29,619

मणिपुर

1,262

609

259

मेघालय

1,479

377

437

मिजोरम

567

377

284

नागालैंड

697

667

408

ओड़िशा

18,715

5,078

8,900

पंजाब

8,486

7,834

2,477

राजस्थान

31,467

12,680

9,211

सिक्किम

218

203

455

तमिलनाडु

16,930

25,069

8,486

तेलंगाना

9,968

11,548

2,774

त्रिपुरा

1,176

1,016

356

उत्तर प्रदेश

83,261

33,543

15,321

उत्तराखंड

4,047

2,497

4,954

पश्चिम बंगाल

28,203

22,023

6,869

स्रोत: 14वें, 15वें और 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट्स; पीआरएस।

तालिका 11: केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार राज्यों को हस्तांतरित कर (करोड़ रुपए में)

राज्य

2024-25 वास्तविक

2025-26 संशोधित

2026-27 बजटीय

आंध्र प्रदेश

51,564

56,374

64,362

अरुणाचल प्रदेश

22,386

24,475

20,665

असम

39,855

43,572

49,725

बिहार

1,28,151

1,40,105

1,51,832

छत्तीसगढ़

43,409

47,459

50,427

गोवा

4,918

5,377

5,571

गुजरात

44,314

48,448

57,311

हरियाणा

13,926

15,225

20,772

हिमाचल प्रदेश

10,575

11,562

13,950

झारखंड

42,135

46,066

51,236

कर्नाटक

46,467

50,802

63,050

केरल

24,527

26,815

36,355

मध्य प्रदेश

1,00,019

1,09,348

1,12,134

महाराष्ट्र

80,486

87,994

98,306

मणिपुर

9,123

9,974

9,554

मेघालय

9,773

10,684

9,631

मिजोरम

6,371

6,965

8,608

नागालैंड

7,250

7,926

7,341

ओड़िशा

57,692

63,074

67,460

पंजाब

23,023

25,171

30,464

राजस्थान

76,779

83,940

90,446

सिक्किम

4,944

5,405

5,113

तमिलनाडु

51,971

56,819

62,531

तेलंगाना

26,782

29,280

33,181

त्रिपुरा

9,021

9,862

9,783

उत्तर प्रदेश

2,28,565

2,49,885

2,68,911

उत्तराखंड

14,245

15,573

17,415

पश्चिम बंगाल

95,852

1,04,793

1,10,119

कुल

12,74,121

13,92,971

15,26,255

नोट: 2024-25 के वास्तविक आंकड़े और 2025-26 के संशोधित अनुमान पिछले वर्षों में हुए अतिरिक्त या कम हस्तांतरण को समायोजित करने के बाद केंद्रीय बजट में प्रस्तुत किए गए हैं।
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज 2026-27; पीआरएस।

अनुलग्नक 3: 2024-25 के बजटीय अनुमानों और वास्तविक के बीच तुलना

यहां तालिकाओं में 2024-25 के वास्तविक के साथ उस वर्ष के बजटीय अनुमानों के बीच तुलना की गई है।

तालिका 12: प्राप्तियों और व्यय की झलक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

शुद्ध प्राप्तियां (1+2)

1,22,198

1,06,826

-13%

1.  राजस्व प्राप्तियां (क+ख+ग+घ)

1,16,639

1,06,429

-9%

क.  स्वयं कर राजस्व

84,551

77,943

-8%

ख.  स्वयं गैर कर राजस्व

9,243

7,536

-18%

ग.  केंद्रीय करों में हिस्सा

13,332

14,066

6%

घ.  केंद्र से सहायतानुदान

9,512

6,885

-28%

2.  गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

5,559

396

-93%

3.  उधारियां

97,163

88,519

-9%

      इनमें केंद्रीय कैपेक्स लोन

-

1,459

-

शुद्ध व्यय (4+5+6)

1,55,832

1,41,491

-9%

4.  राजस्व व्यय

1,34,456

1,25,849

-6%

5.  पूंजीगत परिव्यय

16,281

12,480

-23%

6.  ऋण और अग्रिम

5,095

3,161

-38%

7.  ऋण पुनर्भुगतान

64,044

57,540

-10%

राजस्व घाटा

17,817

19,420

9%

राजस्व घाटा (जीएसडीपी का %)

1.5%

1.6%

-

राजकोषीय घाटा

33,634

34,665

3%

राजकोषीय घाटा (जीएसडीपी का %)

2.8%

2.8%

-

नोट: * (+) अधिशेष का संकेत है और (-) घाटे का संकेत है।
स्रोत: हरियाणा के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 13: राज्य के स्वयं कर राजस्व के घटक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

बिजली पर टैक्स और ड्यूटी

656

202

-69%

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क

15,101

10,492

-31%

भूराजस्व

28

22

-21%

सेल्स टैक्स/वैट

13,200

11,517

-13%

वाहन कर

5,404

5,268

-3%

राज्य उत्पाद शुल्क

12,650

12,701

0%

राज्य जीएसटी

37,498

37,739

1%

स्रोत: हरियाणा के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 14: मुख्य क्षेत्रों के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

शहरी विकास

6,225

3,984

-36%

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण

861

557

-35%

ग्रामीण विकास

7,326

5,208

-29%

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां

7,919

6,021

-24%

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण

6,323

5,502

-13%

आवास

577

512

-11%

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

9,541

8,608

-10%

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

20,774

19,011

-8%

परिवहन

7,896

7,359

-7%

जलापूर्ति एवं स्वच्छता

4,748

4,493

-5%

जिसमें सड़कें एवं पुल शामिल हैं

4,051

3,950

-2%

पुलिस

6,389

6,488

2%

सामाजिक कल्याण एवं पोषण

14,415

15,544

8%

ऊर्जा

7,053

7,964

13%

स्रोत: हरियाणा के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।


[1] 31 राज्यों में दिल्ली, जम्मू एवं कश्मीर और पुद्दूचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।