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बजट सत्र 2026 में संसद का कामकाज

संसद का बजट सत्र 28 जनवरी, 2026 को शुरू हुआ और 18 अप्रैल, 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। दोनों सदन 31 दिनों तक काम करते रहे। सत्र मूल रूप से 2 अप्रैल, 2026 को समाप्त होना था; हालांकि परिसीमन से संबंधित बिल पर चर्चा और उन्हें पारित करने के लिए सत्र को आगे बढ़ा दिया गया। इस नोट में इस अवधि के दौरान संसद के कामकाज का विश्लेषण किया गया है।

लोकसभा के अंतिम दो सत्रों में सबसे अधिक विधायी गतिविधियां

नोट: इसमें एप्रोप्रिएशन और फाइनांस बिल शामिल नहीं हैं। BS-बजट सत्र, MS-मानसून सत्र, WS- शीतकालीन सत्र। हालिया सत्र (BS’26) के आठवें सप्ताह में दो दिनों में 21 घंटे से अधिक समय तक तीन बिल पर चर्चा हुई, लेकिन एक बिल खारिज हो गया और दो निष्प्रभावी हो गए।

  • सत्र को तीन दिनों के लिए बढ़ाया गया ताकि तीन बिल- संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल- को पेश और पारित किया जा सके। इन बिल का उद्देश्य लोकसभा का आकार बढ़ाना, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना और इस परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करना था।

  • ये बिल तुरंत पेश किए गए और उन पर चर्चा शुरू हुई, जो दो दिनों में 21 घंटे 28 मिनट तक चली। संविधान 131वां संशोधन बिल 298 सदस्यों के पक्ष में और 230 सदस्यों के विपक्ष में मतदान के साथ खारिज कर दिया गया। इससे संबंधित अन्य दो बिल निष्प्रभावी हो गए और उन पर चर्चा नहीं हुई।

  • इस सत्र में पेश किए जाने के एक सप्ताह के भीतर ही दो बिल पारित हो गए। उनमें एक आईपीएस अधिकारियों के लिए सीएपीएफ में कुछ वरिष्ठ पदों को आरक्षित करने से संबंधित था, और दूसरा कुछ अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करने के लिए 80 कानूनों में संशोधन करने वाला बिल था।

  • इस सत्र में पारित बिल में से केवल एक, आईबीसी (संशोधन) बिल, 2025 की समीक्षा पार्लियामेंटरी कमिटी ने की है। कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2026, जो मौजूदा कॉरपोरेट कानूनों में संशोधन करके कुछ अपराधों को डीक्रिमिनाइज करता है, को एक कमिटी को भेजा गया है।

 

लोकसभा ने अपने निर्धारित समय के 86% तक कार्य किया, जबकि राज्यसभा ने 92% तक कार्य किया

  • नौ दिनों तक लोकसभा अपने निर्धारित समय के 20% से भी कम समय तक चली।

  • सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुई, जिस पर लोकसभा ने लगभग तीन घंटे चर्चा की, जबकि राज्यसभा ने 17 घंटे चर्चा की। इसके अतिरिक्त लोकसभा में वामपंथी अतिवाद पर एक संक्षिप्त चर्चा हुई, जो छह घंटे तक चली।

  • लोकसभा 16 अप्रैल, 2026 को 14 घंटे से अधिक समय तक चली, जिस दौरान परिसीमन से संबंधित तीनों बिल पर चर्चा की गई।

बजट सत्रों के दौरान दर्ज की गई बैठकों की संख्या में गिरावट आई है

नोट: इसमें अंतरिम बजट सत्र शामिल नहीं है।

विपक्ष ने लोकसभा में अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव पेश किया; राज्यसभा में उपसभापति पुनः निर्वाचित

  • विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव पेश किया। दो दिनों तक चले 12 घंटे से अधिक के विचार-विमर्श के बाद भी यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।

  • लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव इससे पहले 1954, 1966 और 1987 में भी पेश किए गए थे; हालांकि आज तक किसी भी अध्यक्ष को पद से नहीं हटाया गया है।

  • ऐसी कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष सदन की अध्यक्षता नहीं करते हैं। उनकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष अध्यक्षता करते हैं; लेकिन चूंकि वर्तमान में उपाध्यक्ष का पद रिक्त है, इसलिए वरिष्ठ सदस्यों ने कार्यवाही की अध्यक्षता की। संविधान के अनुसार लोकसभा के लिए यथाशीघ्र अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करना अनिवार्य है, लेकिन पिछले सात वर्षों से उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ है। इस बीच राज्यसभा ने उपसभापति को लगातार तीसरी बार निर्वाचित कर लिया है। 

केंद्रीय बजट पर लोकसभा में 10 दिनों तक चर्चा हुई

नोट: ऊपर दिया गया ग्राफ मूल्य के आधार पर चर्चा किए गए मतदान व्यय का प्रतिशत दर्शाता है।

  • लोकसभा ने केंद्रीय बजट और दो मंत्रालयों के व्यय पर लगभग 35 घंटे चर्चा की।

  • रेल, कृषि, गृह, विदेश और विद्युत मंत्रालयों के बजट चर्चा के लिए सूचीबद्ध किए गए थे। हालांकि केवल कृषि और रेल मंत्रालयों के बजट पर ही चर्चा हुई।

  • बजट का 77% हिस्सा गिलोटिन कर दिया गया, यानी इसे सदन में बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया।

लोकसभा में 12 दिनों तक प्रश्नकाल पर 15 मिनट से भी कम समय व्यतीत हुआ

लोकसभा में गैर सरकारी सदस्यों का कोई कामकाज नहीं हुआ

 

  • इस सत्र में गैर सरकारी सदस्यों की कार्यवाही के लिए तीन दिन आवंटित किए गए थे। राज्यसभा में दो दिन गैर सरकारी सदस्यों का कामकाज हुआ, जबकि लोकसभा में ऐसी कोई कार्यवाही नहीं हुई।

  • राज्यसभा में गैर सरकारी सदस्यों के 50 बिल पेश किए गए। दोनों सदनों में से किसी में भी गैर सरकारी सदस्यों के प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई।

स्रोत: लोकसभा और राज्यसभा की कार्यसूची, बुलेटिन; लोकसभा और राज्यसभा के कार्य संचालन और प्रक्रिया के नियम, संसदीय कार्य मंत्रालय का सांख्यिकी विवरण 2025; बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की रिपोर्ट; पीआरएस।

         

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