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मानसून सत्र 2026 के दौरान संसद का कामकाज

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई, 2026 से 13 अगस्त, 2026 तक चला। दोनों सदनों की कुल 19 दिन बैठकें हुईं। यह सत्र बार-बार के व्यवधानों से भरा रहा और चर्चा में किसी भी सदस्य के भाग लिए बिना कई बिल पारित कर दिए गए। व्यवधानों का असर प्रश्न काल पर भी पड़ा; जो लोकसभा में निर्धारित समय का केवल 1% और राज्यसभा में 12% ही चल पाया। प्रस्तुत नोट में इस दौरान दोनों सदनों के कामकाज का विश्लेषण किया गया है।

 

लोकसभा निर्धारित समय का 15% और राज्यसभा 33% ही चली

 

 

नोट: दैनिक कार्यप्रणाली में कागजात पटल पर रखना, पीठ (अध्यक्ष) के निर्देश, व्यवस्था के प्रश्न, समितियों के चुनाव आदि शामिल हैं।

 

लोकसभा 28 जुलाई को दोपहर को और 29 जुलाई को दोपहर 2 बजे तक चली, जब उसने सार्वजनिक परीक्षा बिल, 2026 पर चर्चा की और उसे पारित किया। अन्य सभी अवसरों पर बार-बार स्थगित होने से पहले सदन की बैठक महज कुछ मिनटों के लिए ही हो सकी। राज्यसभा ने सीमित अवधि तक कार्य किया, जिसमें बिल तथा जनहित के विविध मुद्दों पर चर्चा की गई।

 

11 बिल पारित; इनमें से नौ बिल पर लोकसभा में कोई चर्चा नहीं हुई  

तालिका 1: बिल पारित करने में व्यतीत समय (घंटे:मिनट में) और चर्चा में भाग लेने वाले सांसदों की संख्या

 

बिल का शीर्षक

लोकसभा

राज्यसभा

पारित करने में लगा समय

सांसद

पारित करने में लगा समय

सांसद

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026

10:54

48

06:39

35

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) बिल, 2026

00:14

2

01:02

11

ट्रिब्यूनल सुधार बिल, 2026

00:12

0

01:52

15

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) बिल, 2026

00:10

0

01:42

18

बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026

00:05

0

00:52

13

केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026

00:05

0

02:16

24

खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026

00:05

0

00:40

12

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026

00:04

0

02:21

33

एमएसएमई विकास (संशोधन) बिल, 2026

00:03

0

01:19

18

कराधान और अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2026

00:03

0

02:07

15

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026

00:02

0

00:50

16

नोट: इस सूची में फाइनांस बिल और एप्रोप्रिएशन बिल शामिल नहीं हैं।

 

लोकसभा ने 11 बिल पारित किए, जिनमें से नौ बिल किसी भी सदस्य (प्रस्तावित मंत्री के अलावा) की भागीदारी या चर्चा के बिना पारित हुए। एक बिल पर दो सदस्यों ने अपनी बात रखी, लेकिन मंत्री के स्पष्टीकरण सहित इसे 14 मिनट में पारित कर दिया गया। सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने से संबंधित केवल एक बिल पर लगभग 11 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें 48 सांसदों ने भाग लिया।

राज्यसभा में भी चर्चा बहुत सीमित रही। हालांकि अधिकतर बिल पर कई सांसदों ने भागीदारी की, लेकिन उनमें से प्रत्येक को बहुत कम समय दिया गया। उदाहरण के लिए, जन्म और मृत्यु पंजीकरण एक्ट, 1969 में संशोधन करने वाले बिल पर 16 सांसदों ने अपने विचार पेश किए, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया केवल 50 मिनट में ही सिमट गई। प्रत्येक सांसद को औसतन केवल तीन मिनट ही मिले। यहां भी एकमात्र विस्तृत चर्चा सार्वजनिक परीक्षा बिल पर हुई, जिसमें 35 सांसदों ने साढ़े छह घंटे से अधिक समय तक भाग लिया।

 
पारित सभी बिल इसी सत्र में पेश किए गए थे  
 
नोट: BS– बजट सत्र; MS– मानसून सत्र; WS– शीतकालीन सत्र  
सत्र की कार्यसूची में विचार और पारित करने के लिए दो लंबित बिल सूचीबद्ध थे। ये विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) बिल, 2025 और विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) संशोधन (एफसीआरए) बिल, 2026 हैं। वीबीएसए बिल, 2025 पर संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट पेश नहीं की गई है। एफसीआरए बिल, 2026 को इसी सत्र के दौरान एक संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है। इसके साथ ही 18वीं लोकसभा के दौरान समितियों के पास भेजे गए बिल का अनुपात बढ़कर 21% हो गया है। यह आंकड़ा 17वीं लोकसभा के दौरान 16% और 16वीं लोकसभा के दौरान 28% था।  
लोकसभा में प्रश्न काल नौ मिनट के लिए हुआ, दो प्रश्नों के उत्तर मौखिक दिए गए  
 
 
न कोई बहस, न कोई चर्चा और न ही गैर-सरकारी सदस्यों का कामकाज हुआ  
 
लोकसभा में सात वर्ष से अधिक समय से कोई उपाध्यक्ष नहीं है  

  • संविधान के अनुसार लोकसभा को ‘यथाशीघ्र’ एक उपाध्यक्ष का चुनाव करना आवश्यक है। 17वीं लोकसभा ने बिना किसी उपाध्यक्ष के अपना पूरा कार्यकाल पूरा किया।   

  • फरवरी 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी किया था जिसमें उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी पर जवाब देने को कहा गया था। 18वीं लोकसभा ने अपने कार्यकाल के दो वर्ष हो जाने के बावजूद अब तक उपाध्यक्ष नहीं चुना है।

 

स्रोत: लोकसभा और राज्यसभा के बुलेटिन और कार्यवाही; स्टैटिस्टिकल हैंडबुक, संसदीय कार्य मंत्रालय, 2025; लोकसभा और राज्यसभा की वेबसाइट्स; पीआरएस।

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार की गई है। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी की मूल रिपोर्ट से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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