इस अंक की झलकियां
मानसून सत्र 2026 संपन्न
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त, 2026 तक संचालित हुआ। सत्र के दौरान 12 बिल पेश, 11 बिल पारित।
2026-27 की पहली तिमाही में जीडीपी के 7.8% बढ़ने का अनुमान
2025-26 की इसी अवधि (6.9%) की तुलना में जीडीपी वृद्धि दर अधिक रहने का अनुमान है।
रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
रेपो रेट 5.25% पर बरकरार। स्टैंडिंग डिपॉज़िट फ़ैसिलिटी रेट, मार्जिनल स्टैंडिंग फ़ैसिलिटी रेट, बैंक रेट में भी बदलाव नहीं।
संसद ने एमएमडीआर एक्ट, 1957 में संशोधन पारित किए
बिल केंद्र सरकार को खनिज युक्त भूमि को रेगुलेट करने का अधिकार देता है। यह राज्य सरकारों को कुछ खास लेवी लगाने से रोकता है, सिवाय उन मामलों के, जहां केंद्र सरकार द्वारा तय की गई पाबंदियों का पालन किया गया हो।
संसद ने एमएसएमई एक्ट में संशोधन को मंज़ूरी दी
यह बिल केंद्र सरकार को एमएसएमई के तौर पर उद्यमों को वर्गीकृत करने के लिए सीमाएं तय करने का अधिकार देता है, जो (i) संयंत्र और मशीनरी या उपकरणों में निवेश और (ii) टर्नओवर पर आधारित होंगी।
संसद में कराधान कानून बिल पारित
बिल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से एफआईआई और बीआईएस की आय पर टैक्स से छूट देता है। यह हीरा और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग के कारोबार में लगी कुछ विदेशी कंपनियों को भी छूट देता है।
संसद ने ट्रिब्यूनल सुधार बिल पारित किया
बिल राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल्स आयोग का गठन करता है। यह आयोग ट्रिब्यूनल में नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया संचालित करेगा और ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन और सदस्यों के कामकाज की जांच की देखरेख करेगा।
भारतीय सांख्यिकीय संस्थान एक्ट, 1959 का स्थान लेने वाला बिल पेश
संस्थान गैर-लाभकारी कानूनी इकाई होगा। बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स नीति-निर्धारक निकाय और देश के राष्ट्रपति विज़िटर होंगे।
जेपीसी ने कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2026 पर रिपोर्ट पेश की
मुख्य सुझावों में केवल खास प्रकार की निजी कंपनियों को ऑडिटर नियुक्त करने से छूट देना और सीएसआर दायित्व के लिए मुनाफ़े की सीमा में बदलाव करने के सरकार के अधिकार को खत्म करना शामिल है।
शांति एक्ट के तहत ड्राफ्ट नियमों और रेगुलेशंस पर टिप्पणियां आमंत्रित
ड्राफ्ट नियमों में परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने, उसके स्वामित्व, उसे चलाने और बंद करने के लिए कंबाइंड लाइसेंस का प्रावधान है।
वीबी-जी राम जी के तहत ऑडिट्स से संबंधित ड्राफ्ट नियमों पर टिप्पणियां आमंत्रित
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, इस योजना के तहत खातों और खर्चों का सालाना ऑडिट ज़रूरी है। राज्यों को हर ग्राम पंचायत में छह महीने में एक बार सामाजिक ऑडिट कराना होगा।
स्टैंडिंग कमिटी ने विभिन्न विषयों पर रिपोर्ट्स सौंपी
इनमें स्वास्थ्य सेवा की किफायती सुविधा, ट्रिब्यूनल, प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और वितरण, भारत-यूएस व्यापार संबंध, सुगमता से व्यापार की सुविधा, आपदा प्रबंधन और ज़मीन के रिकॉर्ड को आधुनिक बनाने का कार्यक्रम शामिल है।
संसद
Niranjana S Menon (niranjana@prsindia.org)
मानसून सत्र 2026 संपन्न; 12 बिल पेश, 11 बिल पारित
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त, 2026 तक चला। इस सत्र के दौरान, लोकसभा अपने तय समय के 15% और राज्यसभा 33% समय तक चली।
इस सत्र में 12 बिल पेश किए गए और उनमें से 11 पारित हुए। इनमें शामिल हैं- सार्वजनिक परीक्षाओं में धोखाधड़ी के लिए सज़ा बढ़ाने वाला बिल; केंद्र सरकार को खनिज युक्त भूमि को रेगुलेट करने और राज्य सरकारों को कुछ खास लेवी (शुल्क) लगाने से रोकने की अनुमति देने वाला बिल; अलग-अलग ट्रिब्यूनल के सदस्यों को चुनने के लिए राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग बनाने वाला बिल; और बैंकर्स बुक्स के डिजिटल रिकॉर्ड को सबूत के तौर पर कानूनी रूप से मान्य करने की अनुमति देने वाला बिल।
इस सत्र में पेश किया गया एक बिल, भारतीय सांख्यिकीय संस्थान बिल, 2026, अभी लंबित है। पिछले सत्र में पेश किया गया एक बिल, विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026, एक ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी को भेजा गया है।
मानसून सत्र 2026 के दौरान हुए लेजिसलेटिव बिजनेस के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए, यहां देखें। इस सत्र के दौरान संसद के कामकाज के बारे में जानकारी के लिए, यहां देखें।
मैक्रोइकोनॉमिक विकास
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
2026-27 की पहली तिमाही में जीडीपी के 7.8% बढ़ने का अनुमान
भारत की जीडीपी (स्थिर 2022-23 कीमतों पर) के 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8% बढ़ने का अनुमान है, जो 2025-26 की इसी अवधि (6.9%) से अधिक है।[1] 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में जीडीपी के 8.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है। 2026-27 की पहली तिमाही में सांकेतिक (नॉमिनल) जीडीपी के 10.3% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले साल की इसी तिमाही (8.1%) से ज़्यादा है।
अलग-अलग आर्थिक क्षेत्रों में जीडीपी को सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के तौर पर मापा जाता है। 2026-27 की पहली तिमाही में, वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी और पेशेवर सेवा क्षेत्र में सबसे ज़्यादा वृद्धि (12.1%) का अनुमान है; इसके बाद मैन्यूफैक्चरिंग (9.2%) और बिजली, पानी की आपूर्ति व अन्य यूटिलिटीज़ (8.9%) का स्थान आता है। खनन और उत्खनन क्षेत्र में 2.4% की गिरावट आई।
रेखाचित्र 1: स्थिर (2022-23) कीमतों पर जीडीपी में वृद्धि (%, वर्ष-दर-वर्ष)
स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; पीआरएस।
तालिका 1: स्थिर (2022-23) कीमतों पर विभिन्न क्षेत्रों में जीवीए में वृद्धि (%, वर्ष-दर-वर्ष)
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क्षेत्र |
तिमाही 1 |
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2024-25 |
2025-26 |
2026-27 |
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कृषि |
2.6% |
4.4% |
3.6% |
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खनन |
15.7% |
12.4% |
-2.4% |
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मैन्यूफैक्चरिंग |
9.9% |
8.3% |
9.2% |
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बिजली |
9.8% |
-1.8% |
8.9% |
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निर्माण |
8.1% |
5.2% |
7.7% |
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व्यापार |
8.1% |
9.8% |
8.5% |
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वित्तीय सेवाएं |
8.5% |
8.8% |
12.1% |
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सार्वजनिक सेवाएं |
6.9% |
4.6% |
7.5% |
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जीवीए |
7.5% |
7.0% |
8.2% |
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जीडीपी |
7.5% |
6.9% |
7.8% |
स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; पीआरएस।
2026-27 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन में 6.2% की वृद्धि
2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 6.2% की वृद्धि हुई, जो 2025-26 की इसी अवधि (3.9%) से अधिक है।[2] 2026-27 की पहली तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग में 6.9% की बढ़ोतरी हुई, जो 2025-26 की इसी तिमाही में हुई 4.2% की बढ़ोतरी से ज़्यादा है। बिजली क्षेत्र में 8.8% की बढ़ोतरी हुई, जो 2025-26 की पहली तिमाही में हुई 1.4% की बढ़ोतरी से काफी ज़्यादा है। खनन में 1.2% की गिरावट आई, जबकि 2025-26 की इसी अवधि में इसमें 3.5% की बढ़ोतरी हुई थी।
उल्लेखनीय है कि आईआईपी की गणना में मैन्यूफैक्चरिंग का वेटेज सबसे ज़्यादा (76%) है, इसके बाद खनन (11%) और बिजली (10.9%) का स्थान आता है।
रेखाचित्र 2: आईआईपी में वृद्धि (%, वर्ष-दर-वर्ष)
नोट: आधार वर्ष 2022-23 के अनुसार, नई श्रृंखला।
स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; पीआरएस।
आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को अल्पावधि की जरूरतों के लिए उधार देता है) को 5.25% पर बरकरार रखा है।[3] समिति के अन्य फैसलों में निम्नलिखित शामिल हैं:
स्टैंडिंग डिपॉजिट फेसिलिटी रेट (जिस दर पर आरबीआई कोलेट्रल दिए बिना बैंकों से उधार लेता है) को 5.0% पर बरकरार रखा गया है।
मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) भी 5.5% पर बरकरार हैं।
एमपीसी ने अपना तटस्थ रुख जारी रखने का निर्णय लिया।
खनन
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
संसद ने एमएमडीआर एक्ट, 1957 में संशोधनों को पारित किया
खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 को संसद में पारित कर दिया गया।[4] बिल खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 में संशोधन करने का प्रयास करता है।[5] यह एक्ट खनन क्षेत्र को रेगुलेट करता है। मुख्य परिवर्तन निम्नलिखित हैं:
खनिज युक्त भूमि का रेगुलेशन: एक्ट केंद्र सरकार को खानों के रेगुलेशन और खनिजों के विकास को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। यह बिल केंद्र सरकार को खनिज युक्त भूमि के रेगुलेशन को नियंत्रित करने का अधिकार भी देता है। खनिज युक्त भूमि ऐसी ज़मीन होती है जिसमें केंद्र सरकार द्वारा नियमों के तहत निर्धारित मापदंडों के अनुसार खनिज मौजूद हों।
राज्यों की लेवी पर रोक: यह बिल राज्य सरकारों को निर्दिष्ट लेवी लगाने से रोकता है, जब तक कि वे केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अनुसार न हों। यह प्रतिबंध निम्नलिखित पर लगने वाले किसी भी टैक्स, सेस या ऐसी ही दूसरी लेवी पर लागू होगा: (i) खनिज अधिकारों पर, या (ii) खनिज युक्त भूमि पर, चाहे वे खनिज की मात्रा, खनिज के मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर तय की गई हों। इस संशोधन कानून के लागू होने से पहले राज्यों का जो भी टैक्स बकाया है या वसूला नहीं गया है, वह अमान्य माना जाएगा (यानी रद्द माना जाएगा)। हालांकि जो टैक्स पहले जमा या वसूला जा चुका है, उसे वापस नहीं किया जाएगा।
बिल के पीआरएस विश्लेषण के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने खनिज बिदेश भारत लिमिटेड (काबिल) पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
कोयला और खदान से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री अनुराग सिंह ठाकुर) ने "काबिल: भारत की वैश्विक खनिजों की खोज" पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[6] खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (काबिल) राष्ट्रीय एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड और मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड का एक संयुक्त उपक्रम है। काबिल का उद्देश्य देश में खनिज सुरक्षा हासिल करने के लिए विदेशों से ज़रूरी कच्चे माल को घरेलू बाज़ार में लाना है।
कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) काबिल के पूंजी आधार और मानव संसाधनों को मजबूत करना, जिसमें खास तकनीकी, वाणिज्यिक और कानूनी विशेषज्ञता शामिल है, (ii) विदेशों में खनिज हासिल करने के लिए एक तय समय-सीमा वाला रोडमैप बनाना, जिसमें मापने योग्य उपलब्धियां और समय-समय पर समीक्षा शामिल हो, (iii) एक समर्पित प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग और कोऑर्डिनेशन सेल के जरिए मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बीच तालमेल को मजबूत करना, (iv) वित्तपोषण और जोखिम कम करने वाले तरीकों के जरिए विदेशों में खोज और अधिग्रहण में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना, (v) महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग के लिए घरेलू क्षमता विकसित करना, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक कचरे और इस्तेमाल के बाद बेकार हो चुकी बैटरियों से रिकवरी शामिल है, और (vi) लंबे समय के ऑफटेक समझौतों के जरिए विदेशों में खनिज हासिल करने और घरेलू मांग के बीच मजबूत संबंध बनाना।
वाणिज्य और उद्योग
संसद ने एमएसएमई विकास (संशोधन) बिल, 2026 को पारित किया
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026 को संसद में पारित कर दिया गया।[7] बिल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास एक्ट, 2006 में संशोधन का प्रयास करता है। यह बिल केंद्र सरकार को एमएसएमई के तौर पर उद्यमों को वर्गीकृत करने के लिए सीमाएं तय करने का अधिकार देता है। ये सीमाएं (i) संयंत्र और मशीनरी या उपकरणों में निवेश और (ii) टर्नओवर पर आधारित होंगी। यह एक्ट सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधान परिषद या उनके द्वारा बताए गए मध्यस्थता सेवा प्रदाताओं को मध्यस्थता के ज़रिए भुगतान से जुड़े विवादों को सुलझाने का अधिकार देता है। बिल में यह भी कहा गया है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया पहली बार पेश होने के लिए तय तारीख से 90 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को एमएसएमई से सामान या सेवाओं की खरीद के लिए सभी इनवॉइस का निपटान 'ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम' (TReDS) पर करना होगा। TReDS एक आरबीआई-रेगुलेटेड इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है जो एमएसएमई को खरीदारों से मिलने वाले इनवॉइस के बदले फाइनेंसरों से फंड जुटाने की सुविधा देता है। यह कुछ अपराधों को अपराध की श्रेणी से भी हटाता है।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी ने कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2026 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2026 (चेयर: श्री सुधीर गुप्ता) पर ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी ने 3 अगस्त, 2026 को अपनी रिपोर्ट पेश की।[8] इस बिल का उद्देश्य कंपनी एक्ट, 2013 और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) एक्ट, 2008 में संशोधन करना है। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव इस प्रकार हैं:
कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर): यह बिल सीएसआर की ज़िम्मेदारी लागू होने के लिए शुद्ध लाभ की सीमा को पांच करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए करता है। यह केंद्र सरकार को इस सीमा में बदलाव करने का अधिकार भी देता है। कमिटी ने सीमा में बदलाव करने के अधिकार को हटाने का सुझाव दिया। बिल उन कंपनियों को सीएसआर की ज़िम्मेदारी से छूट देता है जो तय शर्तें पूरी करती हैं। कमिटी ने पाया कि इस प्रावधान में कानूनी दिशानिर्देशों की कमी है और यह अधिकारों के अत्यधिक हस्तांतरण जैसा है। इसने सरकार को सीएसआर योगदान वस्तु के रूप में करने की अनुमति देने की संभावना पर विचार करने का भी सुझाव दिया।
ऑडिटर्स की नियुक्ति: यह बिल उन कंपनियों को ऑडिटर नियुक्त करने से छूट देता है जो तय शर्तें पूरी करती हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि यह छूट सिर्फ़ निजी कंपनियों तक ही सीमित रखी जाए, ताकि आसानी से बिज़नेस किया जा सके और साथ ही जवाबदेही और स्टेकहोल्डर्स का भरोसा भी बना रहे।
राष्ट्रीय वित्तीय सूचना अथॉरिटी (एनएफआरए): कंपनी एक्ट, 2013 के तहत एनएफआरए बनाई गई है, जिसके निम्नलिखित कार्य हैं: (i) अकाउंटिंग और ऑडिटिंग स्टैंडर्ड्स बनाने पर सुझाव देना, (ii) इन स्टैंडर्ड्स का पालन करवाना, और (iii) इससे जुड़े व्यवसाय की सेवा की क्वालिटी पर नज़र रखना। यह एक्ट एनएफआरए को प्रोफेशनल या दूसरी तरह की गड़बड़ियों की जांच करने का अधिकार देता है। जांच का तरीका केंद्र सरकार के बनाए नियमों के तहत तय होता है। इसके बजाय, बिल एनएफआरए को जांच के तरीके पर नियम बनाने का अधिकार देता है। कमिटी ने इस संशोधन को हटाने का सुझाव दिया।
बिल में कहा गया है कि इन अपराधों के लिए छह महीने तक का कारावास या आपराधिक जुर्माना हो सकता है: (i) एनएफआरए के आदेश का पालन न करना, या (ii) एनएफआरए द्वारा लगाए गए जुर्माने का भुगतान न करना। कमिटी ने पाया कि ये प्रावधान अपराध को गैर-आपराधिक बनाने के बड़े उद्देश्य के अनुरूप नहीं हैं। कमिटी ने कारावास की सजा को हटाने, लेकिन आपराधिक जुर्माना बनाए रखने का सुझाव दिया।
राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी): यह एक्ट एनसीएलटी को फैसला करने वाली अथॉरिटी बनाता है। बिल एनसीएलटी के प्रेसिडेंट को कंपनियों से जुड़े कानून या इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी संहिता 2016 (आईबीसी) के तहत मामलों को निपटाने के लिए एक या ज़्यादा स्पेशल बेंच बनाने की अनुमति देता है। कमिटी ने आईबीसी से जुड़े मामलों को देखने के लिए खास बेंच बनाना अनिवार्य करने का सुझाव दिया। प्रेसिडेंट कंपनियों से जुड़े कानून के तहत मामलों को निपटाने के लिए अलग से बेंच बना सकते हैं।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
Davis Joseph (davis@prsindia.org)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026-27 से 2030-31 तक की पांच वर्ष की अवधि के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) – रसायन को मंज़ूरी दी है।[9] इस योजना के तहत, घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने, लागत के मामले में प्रतिस्पर्धी बनने और रसायन मूल्य श्रृंखला में निवेश आकर्षित करने के लिए तीन खास ग्रीनफील्ड केमिकल पार्क विकसित किए जाएंगे। इन तीन पार्कों का चयन एक स्टीयरिंग कमिटी द्वारा प्रस्तावों के व्यवस्थित मूल्यांकन के ज़रिए किया जाएगा। मूल्यांकन में रणनीतिक महत्व, वित्तीय मज़बूती और लंबे समय तक चलने की क्षमता जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
राज्य सरकारें पार्क के लिए ज़रूरी ज़मीन उपलब्ध कराएंगी और ज़मीन अधिग्रहण का खर्च भी उठाएंगी। परियोजना को लागू करने और उसके तालमेल की ज़िम्मेदारी राज्य की एजेंसियों की होगी। कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं और बुनियादी ज़रूरतों को विकसित करने के लिए हर पार्क पर अधिकतम एक हज़ार करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह इस शर्त पर होगा कि संबंधित राज्य कम से कम 500 करोड़ रुपए का इंतज़ाम करे। इस योजना के तहत अनुमानित खर्च 3,030 करोड़ रुपए है।
इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स निर्यात संरचना अधिसूचित
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स निर्यात के लिए एक फ्रेमवर्क की घोषणा की है।[10] यह फ्रेमवर्क 'एक्सपोर्टर-ऑन-रिकॉर्ड' (ईओआर) को 'सेलर-ऑन-रिकॉर्ड' (एसओआर) से खरीदे गए सामान को भारत के बाहर के खरीदारों को निर्यात करने और बेचने की सुविधा देता है। ईओआर को ऐसे काम एक अलग कानूनी इकाई के ज़रिए करने होंगे। इस फ्रेमवर्क के तहत सिर्फ़ भारत में बने सामान ही निर्यात किए जा सकते हैं। ईओआर का मतलब है, इन्वेंट्री-आधारित सीमा पारीय ई-कॉमर्स सुविधा संरचना के तहत विदेश व्यापार निदेशालय के साथ रजिस्टर्ड ई-कॉमर्स कंपनियां। एसओआर का मतलब है, ईओआर को सामान सप्लाई करने वाली रजिस्टर्ड कंपनियां।
एसओआर, ईओआर को कन्फर्म ऑर्डर मिलने पर सामान उपलब्ध कराएगा। बिना ऑर्डर के सामान का स्टॉक जमा करना मना है। ईओआर को एसओआर को भुगतान, ऑर्डर स्वीकार करने या स्वीकार मान लिए जाने के सात दिनों के भीतर करना होगा। ईओआर निर्यात पर मिलने वाली छूट और रिफंड का दावा करने का हकदार है। ईओआर को मिलने वाली ये छूट और रिफंड, निर्यात शिपमेंट में शामिल उनके सामान की वैल्यू के अनुपात में एसओआर के बीच बांटे जाने चाहिए।
ईओआर की ज़िम्मेदारी है कि वह वापस आए या रिजेक्ट हुए सभी कंसाइनमेंट को मैनेज करे। वापस आए या रिजेक्ट हुए कंसाइनमेंट को घरेलू बाज़ार में बेचा या सप्लाई नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, ईओआर के लिए ज़रूरी है कि वे निर्यात इन्वेंट्री की पहचान और ट्रेसेबिलिटी के लिए एक डिजिटल रिपॉज़िटरी बनाए।
स्टैंडिंग कमिटी ने भारत-यूएस व्यापार संबंधों पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
वाणिज्य से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: सुश्री डोला सेन) ने भारत-यूएस व्यापार संबंधों के मूल्यांकन पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[11] कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भारत के हितों की रक्षा करते हुए यूएस के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करना और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भागीदारी को मजबूत करना, (ii) जेनेरिक दवाओं, महत्वपूर्ण खनिजों और स्मार्टफोन जैसे प्रमुख निर्यात उत्पादों के लिए टैरिफ में कटौती और छूट हासिल करना तथा व्यापारिक मतभेदों को सुलझाने के लिए तंत्र स्थापित करना, (iii) निर्यात क्रेडिट और लक्षित वित्तीय सहायता के माध्यम से इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं का समर्थन करना, (iv) रत्न और आभूषण, कपड़ा, समुद्री और कृषि क्षेत्रों के लिए लक्षित सहायता प्रदान करना और बाजार में विविधता को बढ़ावा देना, (v) विशेष और प्रदर्शन रसायनों (स्पेशियलिटी और परफॉर्मेंस केमिकल्स) के निर्यात में विविधता लाना, और (vi) एल्यूमीनियम और तांबे के स्क्रैप तक दीर्घकालिक पहुंच सुनिश्चित करना तथा महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन और क्वाड महत्वपूर्ण खनिज पहल का लाभ उठाना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने व्यापार सुधार पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
वाणिज्य से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: सुश्री डोला सेन) ने ‘भारत में व्यापार: भविष्य की राह’ पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[12] कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) एक जैसे या ओवरलैप करने वाले लाइसेंस को मिलाना, (ii) नियमित वन संबंधी मंज़ूरी के अधिकार राज्यों को सौंपना, (iii) निर्माण कार्य के लिए एक ही 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (अनापत्ति प्रमाण पत्र), (iv) छोटी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में आग से सुरक्षा के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन (स्व-प्रमाणन), और (v) नेशनल बिल्डिंग कोड को एकसमान रूप से अपनाना, जिसमें अक्षय ऊर्जा साइट्स के लिए एक अलग रेगुलेटरी श्रेणी भी शामिल हो।
बिज़नेस रिफ़ॉर्म एक्शन प्लान (बीआरएपी) की प्रगति का आकलन करते हुए, कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) बीआरएपी का नया वर्जन, (ii) राज्यों द्वारा जमा किए गए कागज़ात पर निर्भर रहने के बजाय, ज़मीनी हकीकत की जांच के लिए किसी तीसरे पक्ष से अनिवार्य ऑडिट, (iii) राज्य-स्तरीय मंज़ूरियों के लिए पैन-आधारित एक ही बिज़नेस आईडी, और (iv) औद्योगिक हब और ग्रामीण इलाकों के बीच कार्यक्षमता के अंतर को कम करने के उपाय।
ई-कॉमर्स डार्क स्टोर्स में काम करने की स्थितियों पर, कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को सख्ती से लागू करना, (iii) रैंडम इंस्पेक्शन ऑडिट करना, और (iv) डिलीवरी/डार्क-स्टोर कर्मचारियों के लिए आधार से जुड़ा पोर्टेबल इंश्योरेंस सिस्टम बनाना। ग्राहकों की सुरक्षा के मामले में कमिटी ने गुमराह करने वाले विज्ञापनों और डायनामिक प्राइसिंग की सख्ती से जांच करने, और ऑनलाइन विवादों को ऑटोमैटिक तरीके से सुलझाने का सुझाव दिया।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने राष्ट्रीय पेट्रोरसायन नीति पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
रसायन और उर्वरकों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री आज़ाद कीर्ति झा) ने “राष्ट्रीय पेट्रोरसायन नीति, 2007 की समीक्षा” पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[13] कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव इस प्रकार हैं: (i) मांग/आपूर्ति में बदलाव, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए नीति की समीक्षा करना, (ii) गुजरात, आंध्र प्रदेश और ओड़िशा के तीन पेट्रोरसायन क्षेत्रों में निवेश और रोज़गार से जुड़ी मौजूदा कमियों की पहचान करना और उन्हें दूर करना, (iii) सिंथेटिक फाइबर के उत्पादन और निर्यात को बढ़ाना, (iv) प्लास्टिक प्रोसेसिंग क्षेत्र के विकास के लिए प्लास्टिक विकास परिषद का पुनर्गठन करना, और (v) सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के कामकाज की समीक्षा करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने स्टार्टअप्स के इकोसिस्टम पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
वाणिज्य से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी) ने भारत को लाभ पहुंचाने वाले स्टार्टअप इकोसिस्टम पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[14] कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव इस प्रकार हैं: (i) स्टार्टअप के लिए मदद का दायरा आईटी सेवाओं से आगे गैर-टेक और सामाजिक क्षेत्र तक बढ़ाना, (ii) कृषि-आधारित स्टार्टअप के लिए फंडिंग बढ़ाना, (iii) महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप में निवेश और आर्थिक मदद को बढ़ावा देना, (iv) टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए आउटरीच अभियान शुरू करना, और (v) स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन को आसान बनाना और नियमों का पालन करने के बोझ को और कम करना।
वित्त
Davis Joseph (davis@prsindia.org)
संसद ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2026 पारित कर दिया।[15] यह बिल 4 अगस्त, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। यह इनकम-टैक्स एक्ट, 2025, फाइनांस एक्ट, 2026 और भुगतान और निपटान प्रणाली एक्ट, 2007 में संशोधन करता है। मुख्य परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
एफआईआई और बीआईएस को छूट: बिल विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआईज़) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) को निम्नलिखित पर इनकम टैक्स से छूट देता है: (i) सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से मिलने वाला ब्याज, और (ii) ऐसी प्रतिभूतियों की बिक्री, विनिमय या हस्तांतरण से होने वाला पूंजीगत लाभ।
हीरे और इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग के कारोबार में लगी विदेशी कंपनियां: यह बिल कुछ विदेशी कंपनियों को टैक्स छूट देने के लिए इनकम-टैक्स एक्ट में और संशोधन करता है। एक अधिसूचित विशेष क्षेत्र में कच्चे हीरों (रफ़ डायमंड्स) की बिक्री से होने वाली आय पर टैक्स नहीं लगेगा। इसी तरह, कस्टम बॉन्डेड क्षेत्र के गोदाम में कलपुर्जों या घटकों के भंडारण से होने वाली आय पर भी टैक्स नहीं लगेगा।
बिजनेस ट्रस्ट के स्पेशल पर्पज़ वेहिकल: फाइनांस एक्ट, 2026 के तहत, रियायती टैक्स दरों को चुनने वाली हर घरेलू कंपनी को देय इनकम टैक्स पर 10% का सरचार्ज लगाया जाता है। यह बिल बिज़नेस ट्रस्ट के स्पेशल पर्पस वेहिकल्स के लिए सरचार्ज की दर को बढ़ाकर 25% कर देता है। बिज़नेस ट्रस्ट (जैसे REITs और InvITs) एसेट्स खरीदने और उन्हें प्रबंधित करने के लिए निवेशकों से धन जुटाते हैं। यह बिल एक बिज़नेस ट्रस्ट के यूनिट होल्डर्स को ऐसे स्पेशल पर्पस वेहिकल से लाभांश के रूप में मिलने वाली आय पर टैक्स से छूट भी देता है।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
संसद ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को पारित किया
संसद ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को पारित कर दिया।[16] इसे 3 अगस्त, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। बिल बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 को निरस्त कर, उसका स्थान लाने का प्रयास करता है। मुख्य परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की स्वीकार्यता: बिल में यह जोड़ा गया है कि बैंकर्स बुक का एक इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड कुछ शर्तों के अधीन, साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य, मान्य और कानूनी रूप से लागू करने योग्य होगा।
बैंकर्स बुक्स को पेश करने के लिए बाध्य करना: एक्ट में कहा गया है कि किसी बैंक के अधिकारी को ऐसी कानूनी कार्यवाही में किसी भी बैंकर्स बुक को पेश करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जिसमें बैंक खुद एक पक्षकार नहीं है। किसी अधिकारी को रिकॉर्ड किए गए मामलों, लेनदेन या खातों को साबित करने के लिए गवाह के तौर पर पेश होने के लिए भी बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे कदमों के लिए किसी ‘विशेष कारण’ से दिए गए न्यायालय या न्यायाधीश के आदेश की आवश्यकता होती है। बिल इन प्रावधानों को बरकरार रखता है और ‘विशेष कारण’ को भी परिभाषित करता है जिसका मतलब है कि जहां: (i) एंट्री या जानकारी की सटीकता या प्रामाणिकता संदिग्ध हो, (ii) कोई ऐसी घटना घटी हो जिससे यह संकेत मिले कि रिकॉर्ड रखने के नियमितता या सामान्य प्रकृति बाधित हुई है, या (iii) बैंक बैंकर्स बुक्स के निरीक्षण के संबंध में किसी अदालती आदेश का पालन नहीं करता है।
वित्तीय क्षेत्र की दूसरी संस्थाओं पर लागू: यह एक्ट बैंकिंग व्यवसाय में लगी संस्थाओं और किसी भी डाकघर बचत बैंक या मनी ऑर्डर कार्यालय पर लागू होता है। बिल इसे बरकरार रखता है। यह केंद्र सरकार को अधिसूचना द्वारा वित्तीय क्षेत्र में काम करने वाली किसी भी संस्था या संस्थाओं के वर्ग पर बिल के प्रावधान लागू करने के लिए और अधिक सशक्त बनाता है। सरकार अधिसूचना में विशिष्ट शर्तें, अपवाद या संशोधन भी निर्धारित कर सकती है।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
छोटे करदाताओं की अघोषित विदेशी परिसंपत्तियों के स्वैच्छिक खुलासे से संबंधित नियम अधिसूचित
वित्त मंत्रालय ने छोटे करदाताओं की विदेशी परिसंपत्ति– खुलासा योजना नियम, 2026 की घोषणा की।[17] ये नियम फाइनांस एक्ट, 2026 के तहत खुलासा योजना को लागू करते हैं।[18] यह योजना पात्र करदाताओं को एक तय टैक्स या फीस (अघोषित संपत्ति और अघोषित आय के कुल मूल्य का 60%) का भुगतान करके अपनी अघोषित विदेशी संपत्ति और आय का खुलासा करने की सुविधा देती है। यह योजना तब लागू होती है जब: (i) भारत के बाहर मौजूद अघोषित संपत्ति और अघोषित विदेशी आय का कुल मूल्य एक करोड़ रुपए से ज़्यादा न हो, या (ii) भारत के बाहर मौजूद संपत्ति का मूल्य पांच करोड़ रुपए से ज़्यादा न हो। ये नियम अलग-अलग तरह की विदेशी संपत्तियों, जैसे कि गहने, पुरातात्विक संग्रह, कलाकृतियां, शेयर और प्रतिभूतियां, अचल संपत्ति और बैंक खातों के मूल्यांकन का तरीका बताते हैं।
घोषणा इलेक्ट्रॉनिक रूप से की जा सकती है। अगर घोषित संपत्ति की कीमत और असेसिंग ऑफिसर द्वारा तय की गई कीमत में अंतर है, तो घोषणा तब भी मान्य रहेगी जब यह अंतर 20% से ज़्यादा न हो। इनकम-टैक्स अथॉरिटी द्वारा तय की गई रकम का भुगतान उस महीने के खत्म होने के दो महीने के अंदर करना होगा, जिसमें ऑर्डर मिला है। 1% मासिक ब्याज पर दो महीने तक की मोहलत दी जा सकती है।
इस योजना के तहत घोषणा करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2026 है। एसेट्स की मार्केट वैल्यू बताने के लिए वैल्यूएशन की तारीख 31 मार्च, 2026 है।
ऊर्जा
शांति एक्ट, 2025 के तहत ड्राफ्ट नियमों और रेगुलेशंस पर टिप्पणियां आमंत्रित
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
परमाणु ऊर्जा विभाग ने भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन एवं विकास (शांति) नियम, 2026 और शांति रेगुलेशन, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।[19],[20] इन्हें शांति एक्ट, 2025 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।[21] यह एक्ट परमाणु ऊर्जा को रेगुलेट करने के लिए एक ढांचा तैयार करता है जिसमें परमाणु सुविधाओं के लिए लाइसेंस देना और किसी भी परमाणु नुकसान के लिए जवाबदेही तय करना शामिल है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
परमाणु ऊर्जा संयंत्र की लाइसेंसिंग: इन नियमों के तहत परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर बनाने, उसका मालिकाना हक रखने, उसे चलाने और उसे बंद करने (डीकमीशन करने) के लिए एक ही कंबाइंड लाइसेंस का प्रावधान है। यह लाइसेंस ग्रिड को बिजली सप्लाई करने और खास उद्देश्य से कैप्टिव ऊर्जा उत्पादन (जैसे मुश्किल से डीकार्बोनाइज़ होने वाले क्षेत्र और डेटा सेंटर के लिए) जैसे कामों के लिए लिया जा सकता है। ऑपरेटर टेक्नोलॉजी देश में ही या विदेशी सप्लायर से ले सकते हैं। अगर डिज़ाइन विदेशी है, तो उसे: (i) संबंधित देश की रेगुलेटरी बॉडी से सर्टिफाइड या मंज़ूर होना चाहिए, और (ii) उसे अपने मूल देश या किसी दूसरे देश में चालू हालत में होना चाहिए। अगर लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है या इकाई को छोड़ दिया जाता है, तो केंद्र सरकार कामकाज चलाने के लिए एक एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करेगी। अगर कोई योग्य खरीदार नहीं मिलता है, तो केंद्र सरकार नियंत्रण अपने हाथ में ले लेगी और परिसंपत्ति उसके अधिकार में आ जाएंगी।
सुरक्षा संबंधी प्रावधान: इस कानून के अनुसार, रेडिएशन के संपर्क में आने वाली किसी भी गतिविधि के लिए एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) से सुरक्षा मंज़ूरी लेनी होगी। नियम अलग-अलग परियोजना चरणों जैसे कि साइट चुनना (यानी साइट की उपयुक्तता की जांच), निर्माण, कमीशनिंग, संचालन और डीकमीशनिंग के लिए मंज़ूरी की बात करते हैं। एईआरबी रेगुलेटरी होल्ड पॉइंट्स भी तय कर सकता है, जिनके आगे काम तब तक नहीं बढ़ सकता जब तक कि तय सुरक्षा ज़रूरतों की पुष्टि न हो जाए। नियम एक स्टैंडिंग कमिटी भी बनाते हैं जिसमें एटॉमिक एनर्जी विभाग और अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, जो रेडिएशन से सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को सलाह देते हैं।
ऑपरेटर की देनदारी की सीमाओं की समय-समय पर समीक्षा: केंद्र सरकार परमाणु नुकसान के लिए ऑपरेटर की सिविल देनदारी की अधिकतम सीमाओं की समीक्षा करने के लिए हर पांच साल में विशेषज्ञों का एक समूह बनाएगी।
4 सितंबर, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
कैबिनेट ने जैव उर्जा संबंधी योजना मंजूर की
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'गोवर्धन' योजना को मंज़ूरी दी है, जो एक राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना है।[22] इस योजना का उद्देश्य देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) का उत्पादन बढ़ाना है। यह योजना 2026-27 से 2035-36 तक चलेगी। योजना की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सीबीजी की स्थिर कीमत 2,110 रुपए प्रति मिलियन मीट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट तय करना, (ii) सिटी गैस वितरण कंपनियों द्वारा खास तौर पर सीबीजी की खरीद, (iii) पात्र सीबीजी प्रोजेक्ट्स के लिए हर दिन प्रति टन स्थापित सीबीजी क्षमता पर दो करोड़ रुपए तक की पूंजीगत सहायता, (iv) सीबीजी संयंत्र को सिटी गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने वाले पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सहायता, (v) पात्र एमएसएमई -आधारित सीबीजी प्रोजेक्ट्स के लिए क्रेडिट गारंटी सहायता, और (vi) फीडस्टॉक संसाधन का आकलन और टेक्नोलॉजी अपनाने जैसी गतिविधियों में मदद के लिए सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड। इस योजना का कुल अनुमानित खर्च 23,731 करोड़ रुपए है।
कैबिनेट ने घरेलू पीएनजी कनेक्शन की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना को मंज़ूरी दी।[23] इस योजना का उद्देश्य देश भर के घरों में एक्टिव पीएनजी कनेक्शन के विस्तार में तेज़ी लाना है। इस योजना के तहत, पात्र सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों को हर नए बिल वाले घरेलू पीएनजी कनेक्शन के लिए 200 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एससीएम) घरेलू स्तर पर उत्पादित, कम कीमत वाली एपीएम गैस दी जाएगी। एपीएम गैस का मतलब है, सरकार द्वारा तय कीमत के आधार पर बेची जाने वाली प्राकृतिक गैस। इस योजना का उद्देश्य सीजीडी कंपनियों के लिए गैस खरीदने की कुल लागत को कम करना है। उम्मीद है कि एपीएम गैस, सीएनजी परिवहन के लिए अभी इस्तेमाल हो रही महंगी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की जगह लेगी। यह प्रोत्साहन एक तय सीमा से ज़्यादा, प्रदर्शन अवधि के दौरान हासिल किए गए हर अतिरिक्त बिल वाले कनेक्शन से जुड़ा है। यह योजना छह महीनों में दो चरणों में लागू की जाएगी।
सार्वजनिक उपक्रम समिति ने एनएचपीसी पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
सार्वजनिक उपक्रम से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री बैजयंत पांडा) ने राष्ट्रीय हाइड्रोइलेक्ट्रिक ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनएचपीसी)’ पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[24] एनएचपीसी सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी है जो ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित और परिचालित करती है, साथ ही बिजली का व्यापार और बिक्री भी करती है। कमिटी ने एनएचपीसी के कामकाज और इस क्षेत्र पर असर डालने वाले मुद्दों की समीक्षा की जिसमें वाणिज्यिक व्यवहार्यता और परियोजना को पूरा करने का तरीका शामिल है।
कमिटी ने कई मुद्दों पर गौर किया दिया जैसे कि ग्राम सभाओं से मंज़ूरी मिलने में देरी (जो वन मंज़ूरी का हिस्सा है), मुआवज़े के तौर पर पौधरोपण (कम्पेनसेटरी एफॉरेस्टेशन) के लिए सही ज़मीन खोजने में लंबा समय लगना, व्यावसायिक रूप से फ़ायदेमंद होने से जुड़े मुद्दे और समझौते के बाद कानूनी ज़िम्मेदारियों में बदलाव।
कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ग्राम सभा के सदस्यों की मंज़ूरी की सीमा को 100% से घटाकर 70-75% करना, (ii) डिजिटल लैंड बैंक बनाना, (iii) नई हाइड्रोपावर परियोजनाओं के लिए एक व्यवस्थित वायबिलिटी गैप फ़ंडिंग फ़्रेमवर्क लाना, (iv) विवाद समाधान और कानून में परिवर्तन से सुरक्षा के प्रावधानों के साथ मॉडल कार्यान्वयन समझौता तैयार करना, और (v) तेज़ी से साइट अलॉटमेंट और मंज़ूरी को प्राथमिकता देकर पंप स्टोरेज के विकास में मदद करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
Niranjana S Menon (niranjana@prsindia.org)
एस्टिमेट्स कमिटी ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और वितरण– चुनौतियां और संभावनाओं पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[25] कमिटी ने देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और आपूर्ति से जुड़े मुद्दों की जांच की। भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस का हिस्सा 6% है, जो लगभग 24% के वैश्विक औसत से कम है। कमिटी ने इन मुद्दों पर गौर किया: (i) प्राकृतिक गैस भंडार से आकलन, खोज और उत्पादन में देरी, (ii) कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) और कोल बेड मीथेन (सीबीएम) जैसे वैकल्पिक गैस स्रोतों का अपर्याप्त इस्तेमाल, और (iii) प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमत, जिसके कारण औद्योगिक और घरेलू स्तर पर इसका इस्तेमाल कम हो रहा है।
कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) प्राकृतिक गैस एक्शन प्लान बनाना, जिसमें उत्पादन, निर्यात, खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और डीकार्बोनाइज़ेशन के लिए सालाना लक्ष्य हों, (ii) कई तरह के टैक्स से बचने के लिए प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे में लाना, (iii) और ज़्यादा सीबीजी संयंत्र शुरू करना, (iv) खोजी गई प्राकृतिक गैस और सीबीएम रिज़र्व से उत्पादन में तेज़ी लाना, (v) गैस-आधारित ऊर्जा संयंत्र के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए फ्रेमवर्क बनाना, और (vi) घरेलू इस्तेमाल करने वालों के लिए पाइप्ड प्राकृतिक गैस को ज़्यादा सस्ता बनाने के तरीके अपनाना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने तेल पीएसयूज़ में आरएंडडी गतिविधियों के परीक्षण पर रिपोर्ट सौंपी
Niranjana S Menon (niranjana@prsindia.org)
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी ने तेल क्षेत्र की सरकारी कंपनियों (पीएसयूज़) की आरएंडडी गतिविधियों की जांच पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[26] कमिटी ने तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में काम करने वाली 11 सरकारी कंपनियों (पीएसयूज़) की अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) गतिविधियों की जांच की। कमिटी ने आरएंडडी और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के बीच सीमित तालमेल, प्रदर्शन की समीक्षा के लिए किसी मानक व्यवस्था का न होना और विकसित की गई तकनीक से सीमित कमाई जैसे मुद्दों पर गौर किया।
कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) तेल पीएसयूज़ के टैक्स से पहले के मुनाफे का एक निश्चित हिस्सा आरएंडडी पर खर्च करना अनिवार्य करना, (ii) आरएंडडी लक्ष्यों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं (जैसे आयात पर निर्भरता कम करना) से जोड़ने के लिए एक नेशनल मिशन पोर्टफोलियो बनाना, (iii) तेल पीएसयूज़ के बोर्ड में आरएंडडी विभाग को प्रतिनिधित्व देना, (iv) परफॉर्मेंस रिपोर्टिंग और समीक्षा के लिए एक मानक व्यवस्था तैयार करना, (v) पीएसयूज़, एकेडेमिया और स्टार्ट-अप्स के बीच सहयोग बढ़ाना, और (vi) इस्तेमाल किए गए पेटेंट और रॉयल्टी कमाने वाली टेक्नोलॉजी के लिए वैज्ञानिकों को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन देना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
कानून और न्याय
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
संसद में ट्रिब्यूनल सुधार बिल, 2026 पारित
संसद ने ट्रिब्यूनल सुधार बिल, 2026 को पारित कर दिया। यह बिल 10 अगस्त, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था।[27] बिल ट्रिब्यूनल सुधार एक्ट, 2021 को निरस्त करने का प्रयास करता है।[28] 2021 का एक्ट अलग-अलग ट्रिब्यूनल्स में नियुक्तियों और सेवा की शर्तों का प्रावधान करता है। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग: यह बिल राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल्स आयोग की स्थापना करता है। इसके कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ट्रिब्यूनल में रिक्त पदों को भरने के लिए चयन प्रक्रिया का संचालन करना, (ii) ट्रिब्यूनल के कामकाज की समीक्षा करना, (iii) ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष या सदस्यों के आचरण के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों की जांच की निगरानी करना, और (iv) राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल्स डेटा ग्रिड का विकास और उसका रखरखाव करना।
आयोग की संरचना: आयोग में निम्नलिखित सदस्य होंगे: (i) एक अध्यक्ष, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे हों, (ii) दो न्यायिक सदस्य, जो उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहे हों, और (iii) दो तकनीकी सदस्य। आयोग में सभी नियुक्तियां केंद्र सरकार करेगी। अध्यक्ष और न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद की जाएगी।
ट्रिब्यूनल में नियुक्तियां: आयोग ट्रिब्यूनल में नियुक्तियों का सुझाव देने के लिए खोज-सह-चयन समिति का गठन करेगा। समिति हर रिक्त पद के लिए सरकार को दो विकल्प देगी- एक नाम नियुक्ति के लिए देगी, और दूसरा नाम वेटिंग लिस्ट में रखेगी। केंद्र सरकार को इस सुझाव के तीन महीने के अंदर नियुक्ति करनी होगी।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
लद्दाख में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की बेंच स्थापित करने के लिए रेगुलेशंस अधिसूचित
राष्ट्रपति ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की पीठ की बैठक) रेगुलेशन, 2026 को जारी किया है।[29] यह रेगुलेशन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय को लद्दाख में भी सुनवाई करने की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त, ये रेगुलेशन मुख्य न्यायाधीश को यह अधिकार भी देते हैं कि वे निर्देश दे सकें कि लद्दाख से उत्पन्न होने वाले किसी भी मामले या मामलों की श्रेणी की सुनवाई, स्थिति के अनुसार, श्रीनगर या जम्मू में की जानी अनिवार्य है।
स्टैंडिंग कमिटी ने ट्रिब्यूनल व्यवस्था पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
कार्मिक, जन-शिकायत, कानून और न्याय मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री बृज लाल) ने "देश में ट्रिब्यूनल प्रणाली के कामकाज की समीक्षा" पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[30] ट्रिब्यूनल न्यायिक या अर्ध-न्यायिक काम करने के लिए निर्मित एडजुडिकेटिंग निकाय होते हैं। इनका उद्देश्य न्यायपालिका पर मुकदमों का बोझ कम करना या तकनीकी मामलों के लिए विषय संबंधी विशेषज्ञता लाना होता है। कमिटी ने पांच ट्रिब्यूनल के कामकाज और क्षमताओं की समीक्षा की।
मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल और राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल में रिक्त पदों को भरना, (ii) एनसीएलटी के बढ़ते काम के बोझ को देखते हुए इसकी अतिरिक्त बेंच की ज़रूरत की समय-समय पर समीक्षा करना, (iii) रेलवे दावा ट्रिब्यूनल के मामलों में लिखित बयान और रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा कम करके लंबित मामलों को निपटाना, और (iv) सभी ट्रिब्यूनल में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
कार्मिक, जन-शिकायत, कानून और न्याय मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री बृज लाल) ने "वैकल्पिक विवाद समाधान इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए संस्थागत तंत्र के निर्माण और विकास" पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[31] वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) व्यवस्था ऐसा तरीका है जिससे मध्यस्थता, आर्बिट्रेशन या सुलह-समझौते के ज़रिए औपचारिक अदालती प्रक्रिया से बाहर विवादों को सुलझाया जाता है।
कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन केंद्र के इस्तेमाल को बेहतर बनाना, (ii) मध्यस्थता एक्ट, 2023 को पूरी तरह से लागू करना, (iii) राष्ट्रीय लीगल सेवा अथॉरिटी में रिक्त पदों को भरना और बजट की ज़रूरतों को पूरा करना, (iv) दिल्ली अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन केंद्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना और ज़्यादा कर्मचारियों को नियुक्त करना, (v) पीएसयू के कॉन्ट्रैक्ट में संस्थागत एडीआर तंत्र को शामिल करना अनिवार्य बनाना, (vi) आर्बिट्रेशन मामलों में न्यायिक दखल के दायरे को तय करने और सीमित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाना, और (vii) युवा प्रोफेशनल्स को एडीआर में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उपाय करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
शिक्षा
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
भारतीय सांख्यिकीय संस्थान एक्ट, 1959 का स्थान लेने वाला बिल पेश
भारतीय सांख्यिकीय संस्थान बिल, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया।[32] बिल भारतीय सांख्यिकीय संस्थान एक्ट, 1959 को निरस्त करता है और उसका स्थान लेता है।[33] बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
स्थापना: आईएसआई वर्तमान में पश्चिम बंगाल सोसाइटी पंजीकरण एक्ट, 1961 के तहत एक सोसाइटी के तौर पर पंजीकृत है।[34] बिल में यह प्रावधान है कि आईएसआई एक कॉरपोरेट बॉडी होगा और एक गैर लाभकारी कानूनी इकाई के रूप में काम करेगा।
विज़िटर: भारत के राष्ट्रपति इसके विज़िटर होंगे। विज़िटर एक या अधिक व्यक्तियों को निम्नलिखित कार्यों के लिए नियुक्त कर सकते हैं: (i) संस्थान के काम और प्रगति की समीक्षा करना, और (ii) इसके मामलों की जांच करना। विज़िटर जांच या समीक्षा रिपोर्ट्स के आधार पर कार्रवाई कर सकते हैं और निर्देश जारी कर सकते हैं, जो संस्थान के लिए बाध्यकारी होंगे।
बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स: आईएसआई में मुख्य नीति-निर्माता कार्यकारी निकाय के रूप पर बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स होगा। बोर्ड के अध्यक्ष शिक्षाविदों, उद्योग, शिक्षा, सार्वजनिक नीति (पब्लिक पॉलिसी), सांख्यिकीय विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे। अध्यक्ष को केंद्र सरकार के सुझाव पर विज़िटर द्वारा मनोनीत किया जाएगा। बोर्ड के अन्य सदस्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय से एक नामांकित व्यक्ति, जो संयुक्त सचिव के पद से नीचे का न हो, (ii) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के संयुक्त/अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार, (iii) सांख्यिकीय विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों के चार प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिन्हें अध्यक्ष द्वारा मनोनीत किया जाएगा, और (iv) आईएसआई के चार निर्दिष्ट प्रतिनिधि। बिल एक अकादमिक परिषद, एक वित्त समिति और एक प्रबंधन परिषद की स्थापना भी करता है।
निदेशक: बोर्ड, विज़िटर की पूर्व मंज़ूरी से एक निदेशक नियुक्त करेगा जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी (चीफ़ एग्ज़िक्यूटिव ऑफ़िसर) होगा। निदेशक इन कार्यों के लिए ज़िम्मेदार होगा: (i) बोर्ड और अकादमिक परिषद के फ़ैसलों को लागू करना, और (ii) दिन प्रति दिन का प्रशासन। बोर्ड, विज़िटर की पूर्व मंज़ूरी से निदेशक को पद से हटा सकता है।
केंद्र सरकार की शक्तियां: एक्ट केंद्र सरकार को जनहित में निर्देश जारी करने का अधिकार देता है, जिसके लिए कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना होगा। इसके बजाय, यह बिल केंद्र सरकार को तब निर्देश जारी करने का अधिकार देता है जब कानून के कुशल प्रशासन के लिए ऐसा करना ज़रूरी हो। एक्ट के तहत यह जरूरी है कि नियमों और रेगुलेशंस में संशोधन के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी ली जाए। बिल के तहत पूर्व मंजूरी सिर्फ बोर्ड द्वारा बनाए जाने वाले पहले रेगुलेशंस के लिए ही जरूरी होगी। एक्ट के तहत, केंद्र सरकार दो वर्ष के लिए आईएसआई का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकता है, अगर: (i) संस्थान उसके निर्देशों का पालन न करे, या (ii) संस्थान का प्रबंधन अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करे या हद से ज़्यादा इस्तेमाल करे। यह बिल इन शक्तियों को खत्म करता है।
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कृषि
Davis Joseph (davis@prsindia.org)
संसद ने राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (संशोधन) बिल, 2026 को पारित किया
संसद ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) बिल, 2026 को पारित कर दिया है।[35] इसे 10 अगस्त, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। यह बिल राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम एक्ट, 1962 में संशोधन का प्रयास करता है। यह एक्ट राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की स्थापना करता है। मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
निगम के कार्य: एक्ट के अनुसार, निगम निर्दिष्ट क्षेत्रों में सहकारी समितियों के ज़रिए लागू किए जाने वाले कार्यक्रम की योजना बनाता है, उन्हें बढ़ावा देता है और उनका वित्तपोषण करता है। इनमें कृषि उपज, खाद्य पदार्थों, लघु वन उत्पाद और अन्य अधिसूचित वस्तुएं और सेवाएं शामिल हैं। इसके बजाय, बिल में यह प्रावधान है कि निगम निर्दिष्ट क्षेत्रों में सहकारी विकास के कार्यक्रमों की योजना बनाएगा, उन्हें बढ़ावा देगा और उनका वित्तपोषण करेगा। सहकारी विकास का अर्थ है, सहकारी समितियों को प्रत्यक्ष या किसी मध्यस्थ के जरिए सहायता प्रदान करना।
यह बिल निगम को औद्योगिक वस्तुओं से जुड़ी गतिविधियों की भी अनुमति देता है। इस एक्ट के तहत, औद्योगिक वस्तुओं को ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित विशिष्ट संस्थाओं के उत्पादों के रूप में परिभाषित किया गया है: (i) औद्योगिक सहकारी समितियां, (ii) कुटीर और ग्रामीण उद्योग, या (iii) संबद्ध उद्योग। यह बिल ऐसी संस्थाओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होने की अनिवार्यता को समाप्त करता है।
वित्त पोषण और निवेश के लिए पात्र संस्थाएं: एक्ट के तहत, निगम निम्नलिखित कार्य कर सकता है: (i) सहकारी समितियों के वित्तपोषण के लिए राज्य सरकारों को फ़ंड देना, या (ii) राष्ट्रीय स्तर पर या एक से ज़्यादा राज्यों में काम करने वाली सहकारी समितियों को सीधे ऋण और अनुदान देना। यह बिल राज्य सरकारों को यह अनुमति भी देता है कि वे निगम से मिलने वाली फ़ंडिंग को सहकारी विकास के काम में लगी किसी भी संस्था को दे सकती हैं। इसके अलावा, निगम किसी भी सहकारी समिति या सहकारी विकास के काम में लगी संस्था को सीधे ऋण और अनुदान भी दे सकता है।
एक्ट के तहत निगम केवल राष्ट्रीय स्तर की और एक से अधिक राज्यों में काम करने वाली सहकारी समितियों की शेयर पूंजी में निवेश कर सकता है। बिल इसमें यह जोड़ता है कि निगम किसी राज्य के भीतर काम करने वाली सहकारी समितियों या सहकारी विकास में लगी संस्थाओं की शेयर पूंजी में भी निवेश कर सकता है। ऐसे निवेशों के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होगी।
सूचना जमा करना और उसे साझा करना: बिल निगम को अपने कामों को कुशलतापूर्वक करने के लिए क्रेडिट जानकारी या अन्य जानकारी जमा करने और उपलब्ध कराने का अधिकार देता है।
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स्टैंडिंग कमिटी ने उर्वरकों की आवाजाही और जबरन बंडलिंग पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
रसायन और उर्वरकों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री आज़ाद कीर्ति झा) ने 'पीक सीज़न के दौरान उर्वरकों की कुशल आवाजाही और किफायती कीमतों पर उपलब्धता के लिए लॉजिस्टिक्स को व्यवस्थित करना और ज़रूरी उर्वरकों के साथ गैर-ज़रूरी बूस्टर्स की जबरन बंडलिंग को रोकने के लिए उठाए गए कदम' पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[36] कमिटी ने गौर किया कि किसानों को सबसिडी वाले उर्वरक देने के बदले गैर जरूरी उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है जिसे जबरन बंडलिंग कहा जाता है। कमिटी ने गौर किया कि ऐसी गड़बड़ियों के बार-बार सामने आने के बावजूद सिर्फ परामर्श और सार्वजनिक अपील की व्यवस्था है। इससे पता चला कि अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी थी। उसने यह भी कहा कि मौजूदा सबसिडी के कारण दूसरे उर्वरकों की तुलना में यूरिया का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल हुआ, जिससे मिट्टी की सेहत खराब हुई और भूजल प्रदूषित हुआ।
कमिटी के मुख्य सुझाव निम्नलिखित हैं: (i) बिना सबसिडी वाले सभी उत्पादों की अलग-अलग बिलिंग अनिवार्य करना, (ii) ज़बरदस्ती बंडलिंग को रोकने और उसके लिए सज़ा तय करने के लिए उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 में संशोधन करना, (iii) केंद्र-राज्य के बीच तालमेल को मज़बूत करने के लिए एक स्थायी संयुक्त कमांड और मॉनिटरिंग सेल बनाना, और (iv) मौजूदा कीमतों और सबसिडी की व्यापक समीक्षा करना।
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स्टैंडिंग कमिटी ने उर्वरक (आवाजाही नियंत्रण) आदेश, 1973 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
रसायन और उर्वरकों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री आज़ाद कीर्ति झा) ने ‘उर्वरक (आवाजाही नियंत्रण) आदेश, 1973 के कार्यान्वयन का मूल्यांकन' पर अपनी रिपोर्ट पेश की। [37] कमिटी ने कहा कि यह आदेश मौजूदा डिजिटल सिस्टम के आने से पहले लागू किया गया था। उसने कहा कि गैर-कानूनी तरीके से दूसरे उपयोग से होने वाले आर्थिक फ़ायदे की तुलना में लगाए गए आर्थिक दंड बहुत ज़्यादा थे। उसने यह भी गौर किया कि आदेश को लागू करने के लिए प्रक्रिया का कोई केंद्रीकृत एसओपी नहीं था। उसने यह भी देखा कि कई राज्यों में प्रवर्तन अधिकारियों के पदों पर काफ़ी ज़्यादा रिक्तियां थीं। उसने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) आधुनिक प्रवर्तन आवश्यकताओं के हिसाब से आदेश की एक व्यापक और समय-सीमा वाली समीक्षा करना, (ii) दंड और प्रवर्तन के प्रावधानों को मज़बूत करना ताकि यह पक्का किया जा सके कि आर्थिक दंड उचित हों, (iii) निरीक्षण और आवाजाही की जांच के लिए एक जैसी प्रक्रिया तय करने वाला एक एसओपी बनाना, और (iv) जिन राज्यों में रिक्तियों की दर 30% से ज़्यादा है, वहां उर्वरक इंस्पेक्टर के ज़रूरी खाली पदों को भरना।
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रक्षा
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
रक्षा मंत्रालय ने डीआरडीओ-विकसित मिसाइलों के तकनीकी हस्तांतरण को मंजूरी दी
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ द्वारा विकसित पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की टेक्नोलॉजी को भारतीय रक्षा उद्योग को सौंपने की मंज़ूरी दे दी है।[38] यह देश के भीतर निर्माण के लिए लागू होगा। इस तकनीकी हस्तांतरण का उद्देश्य रक्षा इकोसिस्टम में घरेलू उद्योगों की ज़्यादा भागीदारी को बढ़ावा देना है।
छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची अधिसूचित
रक्षा मंत्रालय ने छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की है, जिसमें 405 आइटम शामिल हैं और जिनकी अनुमानित व्यापारिक क्षमता 3,070 करोड़ रुपए है।[39] इस सूची में लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स, सब-सिस्टम, सब-असेंबली, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और कच्चा माल शामिल हैं। हर आइटम के स्वदेशीकरण के लिए एक अनुमानित समय-सीमा तय की गई है। सफलतापूर्वक स्वदेशी रूप से विकसित होने के बाद, इन आइटम को भारतीय उद्योग से खरीदा जाएगा। इस सूची में भारतीय तटरक्षक गार्ड (आईसीजी) के 16 आइटम और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (डीपीएसयूज़) के 389 आइटम शामिल हैं। आईसीजी और डीपीएसयूज़ इन-हाउस डेवलपमेंट और एमएसएमईज़ व स्टार्ट-अप्स की भागीदारी सहित कई तरीकों से इनका स्वदेशीकरण करेंगे।
लोक लेखा समिति ने छोटे हथियारों के निर्माण पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
लोक लेखा समिति (चेयर: श्री के. सी. वेणुगोपाल) ने "ऑर्डनेंस फ़ैक्टरियों में छोटे हथियारों के उत्पादन" पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[40] उसने 2022 में खत्म हुए साल के लिए इसी विषय पर कैग की रिपोर्ट की समीक्षा की और कुछ अतिरिक्त इन्क्वायरी और सुझाव भी दिए। यह रिपोर्ट छोटे हथियारों की तीन फ़ैक्टरियों की जांच करती है, जो एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एडब्ल्यूईआईएल) के तहत आती हैं। एडब्ल्यूईआईएल को 2021 में तब बनाया गया था, जब ऑर्डनेंस फ़ैक्टरी बोर्ड को रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में बदला गया था। समिति ने इन फ़ैक्टरियों में कम मांग, ज़्यादा ऑपरेटिंग लागत, बार-बार क्वालिटी से जुड़ी समस्याएं और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) परियोजनाओं में विलंब पर गौर किया। मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) क्षमता को बेकार रहने से बचाने के लिए सेना, गृह मंत्रालय, राज्य पुलिस बलों और छोटे हथियारों की फ़ैक्टरियों के बीच कई सालों का रोलिंग डिमांड प्लान बनाना, (ii) मांग के पैटर्न का विस्तृत अध्ययन करना और इन पैटर्न को पूरा करने के लिए सुविधाओं को फिर से व्यवस्थित करना, (iii) राजस्व बढ़ाने के उपाय करना जैसे कि उत्पादों में विविधता लाना, (iv) सभी उत्पादों के लिए 'एंड-ऑफ-लाइन' के बजाय 'इन-प्रोसेस' क्वालिटी जांच करना, और (v) आरएंडडी के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू करना।
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संचार
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
दूरसंचार प्रयोक्ता की पहचान से संबंधित नियम अधिसूचित
दूरसंचार विभाग ने दूरसंचार (उपयोगकर्ता पहचान) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं।[41] इन नियमों का उद्देश्य दूरसंचार उपयोगकर्ताओं के लिए बायोमेट्रिक-आधारित पहचान ढांचा तैयार करना है। इनकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
अनिवार्य बायोमेट्रिक सत्यापन: अधिसूचित नियमों के तहत दूरसंचार उपयोगकर्ताओं के लिए निम्नलिखित से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन करवाना ज़रूरी है: (i) एनरोलमेंट, (ii) उपयोगकर्ता की जानकारी अपडेट करने, और (iii) सेवा बंद करने से पहले। जिन उपयोगकर्ताओं के पास आधार नंबर है, उन्हें आधार ऑथेंटिकेशन करवाना होगा। जिन उपयोगकर्ताओं के पास आधार नहीं है, या जो आधार ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं कर सकते, उन्हें एक वैकल्पिक डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया का पालन करना होगा। दोनों प्रक्रियाओं में, एक लाइव फ़ोटो या कोई अन्य तय बायोलॉजिकल जानकारी और उपयोगकर्ता की डिटेल्स सब्सक्राइबर डेटा रिकॉर्ड में स्टोर की जाएंगी। डिजिटल केवाईसी के लिए, उपयोगकर्ता को पहचान का प्रमाण और पते का प्रमाण देने वाले दस्तावेज जमा करने होंगे। व्यापार के मामले में, कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि और उस कनेक्शन का इस्तेमाल करने वाले हर उपयोगकर्ता को बायोमेट्रिक आइडेंटिफ़िकेशन करवाना होगा। हालांकि, केंद्र सरकार हर एंड-यूज़र के सत्यापन से छूट दे सकती है।
संदिग्ध कनेक्शन या अनुरोधों से जुड़े नियम: दूरसंचार कंपनियों को एनरोलमेंट के दौरान गलत जानकारी देने, नकली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करने और किसी और की पहचान का इस्तेमाल करने जैसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। ऐसी स्थितियों में कंपनियों को कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सूचित करना होगा और एफआईआर दर्ज करानी होगी। साथ ही, केंद्र सरकार को भी इसकी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा, केंद्र सरकार यह भी कह सकती है कि जब कोई उपयोगकर्ता बायोमेट्रिक पहचान की प्रक्रिया से गुज़रे, तो दूरसंचार कंपनियां उपयोगकर्ता के अनुरोध की पुष्टि करने के लिए एक अलर्ट भेजें। अगर उपयोगकर्ता उस अलर्ट का नकारात्मक जवाब देता है, तो दूरसंचार ऑपरेटर को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
दूरसंचार कनेक्शन के उपयोगकर्ता में परिवर्तन: नियमों के तहत दूरसंचार कनेक्शन या सिम का उपयोगकर्ता केवल किसी रिश्तेदार, कानूनी वारिस या अन्य तय उपयोगकर्ता के पक्ष में ही बदला जा सकता है। इस बदलाव के लिए मौजूदा और नए उपयोगकर्ता की बायोमेट्रिक पहचान और मौजूदा उपयोगकर्ता से 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (एनओसी) की ज़रूरत होती है। अगर उपयोगकर्ता की मृत्यु हो गई है, तो डेथ सर्टिफिकेट और नए उपयोगकर्ता की बायोमेट्रिक पहचान की ज़रूरत होती है। इस कनेक्शन को नया कनेक्शन माना जाएगा।
स्टैंडिंग कमिटी ने डिजिटल भारत निधि के तहत योजना की समीक्षा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
संचार औऱ सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. निशिकांत दुबे) ने "सार्वजनिक और निजी क्षेत्र द्वारा लागू डिजिटल भारत निधि के तहत योजनाओं या परियोजनाओं के प्रदर्शन की समीक्षा" पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[42] डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) का उद्देश्य उन योजनाओं या परियोजनाओं को वित्तीय सहायाता देना है जो कम सुविधा वाले इलाकों में दूरसंचार सेवाएं देते हैं। इसका उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी में आरएंडडी को समर्थन देना भी है। डीबीएन से वित्तपोषित परियोजनाओं में भारतनेट और सीमांत व दूर-दराज के इलाकों में 4जी मोबाइल टावर परियोजना शामिल हैं।
कमिटी ने भारतनेट के तहत कम इस्तेमाल पर ज़ोर दिया। कमिटी ने सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी परियोजनाओं के सामने आने वाली कई चुनौतियों का भी ज़िक्र किया, जैसे कि दुर्गम इलाका, वन विभाग से मंज़ूरी मिलने में देरी और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें। कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भारतनेट के तहत नेटवर्क के इस्तेमाल को बढ़ाना, (ii) सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में योजना लागू करने वाली एजेंसियों को लॉजिस्टिकल और सुरक्षा सहायता देना, (iii) दूर-दराज़ और बिना नेटवर्क वाले इलाकों में तय समय के भीतर टावर लगाना, और (iv) पूर्वोत्तर में दूरसंचार ऑपरेटरों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करना।
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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण
Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)
औषधि नियम, 1945 में संशोधन अधिसूचित
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधनों को अधिसूचित किया है।[43],[44],[45] ये नियम औषधि और सौन्दर्य प्रसाधन एक्ट, 1940 के तहत बनाए गए हैं।[46] यह एक्ट भारत में दवाओं और सौन्दर्य प्रसाधनों के आयात, निर्माण और वितरण को रेगुलेट करता है। नियमों में किए गए मुख्य संशोधन इस प्रकार हैं:
कुछ मामलों में रोक: संशोधनों में यह जोड़ा गया है कि लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को लाइसेंस देने वाली अथॉरिटी कुछ खास उल्लंघनों के लिए एक निश्चित समय तक रोक सकती है। ऐसी कार्रवाई तब की जा सकती है जब व्यक्ति गुमराह करने वाले, नकली या मनगढ़ंत दस्तावेज़ या जानकारी जमा करने का दोषी पाया जाए। संशोधित नियमों में 'रोक' का मतलब किसी व्यक्ति को इन गतिविधियों से रोकना, बाहर रखना या अयोग्य ठहराना है: (i) आयात करना, (ii) बिक्री या वितरण के लिए निर्माण करना, या (iii) बेचना, स्टॉक करना या वितरण करना।
रोक के लिए प्रक्रिया: लाइसेंस देने वाले अधिकारी को यह बताने का मौका देना होगा कि ऐसी कार्रवाई क्यों न की जाए। रोक लगाने के आदेश से पीड़ित व्यक्ति सरकार के सामने अपील कर सकता है। सुनवाई का मौका देने के बाद सरकार आदेश जारी कर सकती है।
स्टैंडिंग कमिटी ने स्वास्थ्य सेवाओं के किफायतीपन और उपलब्धता पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: प्रो. राम गोपाल यादव) ने 'सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की किफायती कीमत और उन तक पहुंच' पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[47] कमिटी ने कई चुनौतियों पर प्रकाश डाला, जैसे: (i) सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अपर्याप्त खर्च, (ii) द्वितियक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल पर कम खर्च, (iii) निजी स्वास्थ्य सेवाओं की अधिक और अनियमित लागत, (iv) आउटपेशेंट देखभाल के लिए सीमित बीमा कवरेज, (v) ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, और (vi) दवाओं पर जेब से होने वाला अधिक खर्च।
कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) एक तय समय-सीमा वाले रोडमैप के ज़रिए हेल्थ फ़ंडिंग को बढ़ाकर जीडीपी का 2.5% और बाद में 5% तक करना, (ii) एक विशेष स्वास्थ्य सेवा पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) फ़ंड के ज़रिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसीज़), ज़िला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सार्वजनिक पूंजी निवेश बढ़ाना, (iii) निजी अस्पतालों की दरों को मानकीकृत करने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी फ़्रेमवर्क बनाना और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट को एक जैसा लागू करना, (iv) आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाकर उसमें आउटपेशेंट कंसल्टेशन, डायग्नोस्टिक्स और दवाओं को शामिल करना और सालाना पारिवारिक कवरेज सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपए करना, (vi) अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खोलना, और (vii) जीवन रक्षक और ओवर-द-काउंटर दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करना।
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स्टैंडिंग कमिटी ने राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
रसायन और उर्वरक से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री आज़ाद कीर्ति झा) ने "देश में दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी के संदर्भ में नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) की भूमिका, कामकाज और कर्तव्यों की समीक्षा" पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[48] कमिटी ने इन मुख्य चुनौतियों पर ज़ोर दिया: (i) कोई स्थायी ट्रेड मार्जिन रैशनलाइज़ेशन (टीएमआर) फ़्रेमवर्क न होना, (ii) कानूनी विवादों के कारण ज़्यादा वसूली गई बड़ी रकम का वापस न मिल पाना, (iii) अनुसूचित और गैर-अनुसूचित दवाओं के वर्गीकरण में कमियां, (iv) कीमतों की निगरानी के लिए अधूरा डेटा, और (v) कीमतें तय करने में जनता की सीमित भागीदारी।
मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) एक तय समय-सीमा के भीतर स्थायी टीएमआर फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देना, (ii) लंबित मुकदमों के लिए विवाद सुलझाने का तेज़ तरीका और एक समर्पित लीगल सेल बनाना, (iii) कानूनी संशोधनों के ज़रिए लागत-आधारित मूल्य निर्धारण को फिर से शुरू करने की संभावना की जांच करना, (iv) कीमतों से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए दवाओं के वर्गीकरण की समीक्षा करना, (v) डेटा कवरेज को अस्पतालों की बिक्री और ग्रामीण इलाकों तक बढ़ाना, और (vi) कीमत तय करने की प्रक्रिया में लोगों की जागरूकता और भागीदारी बढ़ाना।
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स्टैंडिंग कमिटी ने किडनी की गंभीर बीमारियों पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: प्रो. राम गोपाल यादव) ने 'भारत में गंभीर किडनी रोग (सीडीके) की व्यापकता- रोकथाम, निदान, उपचार और प्रबंधन' पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[49] कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के ज़रिए ज़्यादा जोखिम वाले लोगों की घर-घर जाकर जांच करके 'रोकथाम-पहले' का तरीका अपनाना, (ii) कम सुविधा वाले राज्यों में स्पेशलिस्ट के खाली पदों को भरना और डीएम-नेफ्रोलॉजी की सीटें बढ़ाना, (iii) आयुष्मान भारत के तहत ट्रांसप्लांट के बाद मिलने वाली कवरेज को एक साल तक बढ़ाना और परिवार के लिए हेल्थ कवर को बढ़ाकर 10 लाख रुपए करना, (iv) अंग दान में जेंडर के आधार पर अंतर का अध्ययन करना और सभी राज्यों में ट्रांसप्लांट की सुविधाएं बढ़ाना, और (v) रोकथाम और निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना, साथ ही एग्रोकेमिकल रेगुलेशन और कार्यस्थल पर किडनी हेल्थ प्रोग्राम शुरू करना।
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स्टैंडिंग कमिटी ने वेक्टर जनित रोगों पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: प्रो. राम गोपाल यादव) ने 'उत्तर-पूर्व भारत में वेक्टर-जनित रोगों (वीबीडी) का अध्ययन' पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[50] कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बीमारी को खत्म करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा के साथ बीमारी के प्रबंधन के रोडमैप को मजबूत करना, (ii) वैक्सीन बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग करना और जटिल मामलों के लिए मानक इलाज के तरीकों को प्राथमिकता देना, (iii) कीट-विशेषज्ञों की भर्ती में तेज़ी लाना और उत्तर-पूर्व में वायरल रिसर्च और डायग्नोस्टिक लैब का विस्तार करना, (iv) इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म और एआई-आधारित अर्ली-वार्निंग सिस्टम जैसे उपायों के ज़रिए रियल-टाइम निगरानी को मजबूत करना, (v) इन बीमारियों पर सीमा-पार सहयोग स्थापित करना और सुअर पालन के तरीकों को रेगुलेट करना, और (vi) कीटनाशक-युक्त जाल और कॉम्बिनेशन थेरेपी की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट रणनीति विकसित करना।
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ग्रामीण विकास
Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)
वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत ऑडिट से संबंधित ड्राफ्ट नियमों पर टिप्पणियां आमंत्रित
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी के तहत योजनाओं के ऑडिट से जुड़े नियमों के ड्राफ्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[51],[52] यह कानून हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-रोज़गार की गारंटी देता है। यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी एक्ट, 2005 का स्थान लेता है।[53] ड्राफ्ट नियमों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
हर वर्ष ऑडिट: हर ज़िले के लिए इस योजना के तहत खातों और खर्चों का हर साल ऑडिट होना चाहिए। ऑडिट, डायरेक्टर (लोकल फंड ऑडिट) या चार्टर्ड अकाउंटेंट (बेहतर होगा कि वे कैग के साथ रजिस्टर्ड हों) से करवाया जाना चाहिए। खातों और ऑडिट रिपोर्ट को राज्य सरकार को सौंपना होगा। राज्य सरकार इन्हें कैग और केंद्र सरकार को भेजेगी ताकि इन्हें संसद के दोनों सदनों के सामने रखा जा सके। कैग सप्लीमेंट्री, कंप्लायंस, परफॉर्मेंस और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी जैसे ऑडिट भी कर सकता है।
सामाजिक ऑडिट: राज्य सरकारों को हर ग्राम पंचायत में सभी योजनाओं के कामों का कम से कम हर छह महीने में एक बार सामाजिक ऑडिट करवाना चाहिए। एक स्वतंत्र सामाजिक ऑडिट यूनिट (एसएयू) इन ऑडिट को करवाएगी; इसके लिए वह सोशल ऑडिटर्स को प्रशिक्षित करेगी, रिकॉर्ड और कामों की जांच करेगी, और ऑडिट के नतीजों व की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (ऐक्शन टेक्न रिपोर्ट) प्रकाशित करेगी। हर राज्य को एक एसएयू बनाना या तय करना होगा, और यह पक्का करना होगा कि वह योजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों से स्वतंत्र रहे।
समयबद्ध कार्रवाई और वसूली: सामाजिक ऑडिट के नतीजों और ग्राम सभा की कार्यवाही का विवरण सात दिनों के भीतर अपलोड किया जाना चाहिए। प्रोग्राम ऑफिसर को 30 दिनों के भीतर 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' जमा करनी होगी; ऐसा न करने पर मामला डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर के पास भेजा जाएगा। पूरी प्रक्रिया सात महीनों के भीतर पूरी होनी चाहिए। गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए फंड की वसूली पांच महीनों के भीतर की जानी चाहिए।
सार्वजनिक जानकारी: जनता के लिए उपलब्ध डैशबोर्ड पर समाजिक ऑडिट के नतीजे, की गई कार्रवाई की रिपोर्ट, सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई, वसूली, और शिकायतों व अपीलों की स्थिति की जानकारी दी जानी चाहिए। एसएयू को ऑडिट और उसके बाद की गई कार्रवाई पर तिमाही और सालाना रिपोर्ट भी प्रकाशित करनी चाहिए।
टिप्पणियां 6 सितंबर, 2026 तक आमंत्रित हैं।
स्टैंडिंग कमिटी ने संविधान के 73वें संशोधन एक्ट के कार्यान्वयन के प्रभाव पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री सप्तगिरि शंकर उलाका) ने "पंचायत की त्रि-स्तरीय प्रणाली में समन्वय के विशेष संदर्भ में संविधान के 73वें संशोधन कानून के कार्यान्वयन की प्रभावशीलता" पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[54]
कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अधिकार सौंपने के मामले में राज्यों की समय-समय पर रैंकिंग करना और अगली पीढ़ी के पीआरआई सुधारों के लिए रोडमैप तैयार करना, (ii) पंचायतों के अपने राजस्व को बढ़ाना और खुद राजस्व जुटाने को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शित आधारित प्रोत्साहन देना, (iii) यह सुनिश्चित करना कि ब्लॉक और ज़िले की योजनाएं ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में चिन्हित कमियों को दूर करें और निर्दिष्ट अनुदान साझाकरण अनुपात का पालन करें, (iv) पंचायत के लिए अलग कैडर बनाना और हर ग्राम पंचायत में एक पंचायत सचिव की व्यवस्था करना, (v) प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व के खिलाफ़ उपाय लागू करना और महिला प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण और मेंटरिंग को मज़बूत करना, और (vi) ग्राम सभाओं को फिर से सक्रिय करने और उनके कामकाज का समय-समय पर आकलन करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और जागरूकता अभियानों का इस्तेमाल करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने ग्रामीण कौशल विकास संबंधी योजनाओं के प्रभाव अध्ययन पर रिपोर्ट सौंपी
ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री सप्तगिरि शंकर उलाका) ने 'ग्रामीण कौशल विकास और प्रवासन: दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई), दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआईज़) का प्रभाव अध्ययन' पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[55] डीएवाई-एनआरएलएम का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों को संगठित करके और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देकर गरीबी को कम करना है। डीडीयू-जीकेवाई ग्रामीण युवाओं को रोजगार-युक्त कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है। आरएसईटीआईज़ जिला-स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र हैं जो स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए अल्पकालिक आवासीय पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। कमिटी ने इन चुनौतियों का उल्लेख किया: (i) कम वेतन की वजह से रोजगार में गैप और नौकरी छोड़ने की ज़्यादा दर, (ii) फंड का पूरा इस्तेमाल न होना, (iii) एसएचजीज़ के लिए क्रेडिट और मार्केट से ठीक से न जुड़ पाना, (iv) आरएसईटीआईज़ का नेटवर्क काफ़ी न होना, (v) महिलाओं की कम भागीदारी, और (vi) योजना के प्रदर्शन में राज्यों के बीच अंतर।
मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) उद्योग से जुड़ाव, स्थानीय स्तर पर प्लेसमेंट ड्राइव और न्यूनतम वेतन या उससे ज़्यादा वेतन वाली नौकरियों के लिए ऊंचे लक्ष्य तय करके लगभग 100% रोजगार सुनिश्चित करना, (ii) एसएचजीज़ को क्रेडिट फ्लो बढ़ाना और मार्केटिंग नेटवर्क को मज़बूत करना, (iii) हर ज़िले में आरएसईटीआईज़ का विस्तार करना और पाठ्यक्रम को स्थानीय आर्थिक अवसरों के हिसाब से तैयार करना, (v) सिर्फ़ महिलाओं के लिए ट्रेनिंग बैच, मोबाइल ट्रेनिंग यूनिट और प्रशिक्षण केंद्रों में क्रेच शुरू करना, और (vi) ज़रूरत के हिसाब से फंड बांटना और पिछड़े राज्यों के लिए खास मदद देना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने डीआईएलआरएमपी के कार्यान्वयन पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री सप्तगिरि शंकर उलाका) ने ‘डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड्स आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) का कार्यान्वयन’ पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[56] मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) तय समय-सीमा के भीतर लंबित कामों को पूरा करना और योजना के विस्तार में तेज़ी लाना, (ii) सभी राजस्व अदालतों को कंप्यूटरीकृत करना, मामले निपटाने के लिए समय-सीमा तय करना और पूरे देश में ऑटो-ट्रिगर्ड ऑनलाइन म्यूटेशन लागू करना, (iii) आधुनिक रिकॉर्ड रूम को प्राथमिकता देना और फिजिकल व डिजिटल ज़मीन के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए मानक बनाना, (iv) स्वायत्त जिला परिषद, राज्य सरकारों और पारंपरिक संस्थाओं के साथ मिलकर छठी अनुसूची वाले इलाकों के लिए एक खास रणनीति बनाना, (v) सहमति-आधारित आधार लिंकिंग और मोबाइल नंबर सीडिंग पूरी करना और ज़मीन के लेन-देन के लिए ऑटोमैटिक अलर्ट देना, और (vi) नक्शा पायलट का मूल्यांकन करना और इसे अन्य शहरी स्थानीय निकायों तक बढ़ाना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने स्वामित्व योजना पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री सप्तगिरि शंकर उलाका) ने "गांवों की आबादी का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर तकनीक से मैपिंग (स्वामित्व) योजना" पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[57] इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को संपत्ति के कानूनी मालिकाना हक देना है।
कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ड्रोन सर्वे पूरा करने के लिए सख्त समय-सीमा के साथ राज्य-विशिष्ट कार्य योजनाएं तैयार करना, (ii) आबादी की सीमाओं के बाहर पात्र बसावट वाले इलाकों तक कवरेज का विस्तार करना, (iii) प्रॉपर्टी कार्ड को डिजिलॉकर, भूनक्शा, बैंकिंग सिस्टम और डीआईएलआरएमपी के साथ जोड़ना, (iv) स्वामित्व जियोस्पेशियल डेटा को पीएम गतिशक्ति और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं के साथ एकीकृत करना, (v) प्रॉपर्टी रिकॉर्ड को अपडेट करने और शिकायतों के समाधान के लिए एक समान ढांचा स्थापित करना, और (vi) डेटा गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा और तकनीकी ऑडिट को मजबूत करना।
परिवहन
परिवहन परियोजनाओं के लिए मॉडल कनसेशन समझौते में संशोधन
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 'बिल्ड-ओन-ऑपरेट (बीओटी) (टोल)' प्रोजेक्ट्स के लिए 'मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट' (एमसीए) में बदलाव करते हुए एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया है।[58],[59] बीओटी परियोजनाओं के लिए एमसीए एक ऐसा टेम्प्लेट है जो 'बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर' मॉडल के तहत हाईवे बनाने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के नियम और शर्तें तय करता है। इसमें किए गए मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
निम्न यातायात के लिए राजस्व सहयोग: पुराने एमसीए के तहत, अगर यातायात लक्ष्य से 5% से कम रहता है, तो कंसेशन की अवधि को बढ़ाया जा सकता है। संशोधित एमसीए में कहा गया है कि अगर शुरुआती सात लक्ष्य तारीखों के दौरान असल यातायात लक्ष्य से 10% से कम रहता है, तो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी (एनएचएआई) राजस्व सहयोग देगी। सातवीं तारीख के बाद, कंसेशन की अवधि को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, अगर यातायात लक्ष्य से काफ़ी ज़्यादा हो जाता है (लेकिन डिज़ाइन क्षमता के अंदर रहता है), तो इस अवधि को कम भी किया जा सकता है। लक्ष्य तारीख पहले से तय तारीखें होती हैं जिन पर परियोजना के असल और अनुमानित यातायात की तुलना की जाती है।
सरकारी बायबैक: पुराने एमसीए के तहत, अगर यातायात परियोजना राजमार्ग की डिज़ाइन क्षमता से ज़्यादा हो जाता था, तो एनएचएआई अपनी मर्ज़ी से कंसेशन खत्म कर सकता था और टर्मिनेशन भुगतान कर सकता था। इसके बजाय, नए एमसीए में एनएचएआई के लिए अनिवार्य बायबैक का प्रावधान है; यह तब लागू होता है, जब लगातार तीन अकाउंटिंग वर्षों के ब्लॉक में से किन्हीं दो अकाउंटिंग वर्षों में औसत दैनिक यातायात परियोजना की डिज़ाइन क्षमता से ज़्यादा हो जाता है।
विवाद निवारण प्रक्रिया में परिवर्तन: पुराने एमसीए के तहत, विवाद सुलझाने के लिए पहले मध्यस्थता की कोशिश की जाती थी, फिर मामला विवाद समाधान बोर्ड को भेजा जाता था, और उसके बाद सुलह और आर्बिट्रेशन के लिए भेजा जाता था। संशोधित एमसीए के तहत, विवादों को उनके मूल्य के आधार पर अलग-अलग तरह से निपटाया जाता है। 10 करोड़ रुपए से कम मूल्य वाले विवादों को सुलह के लिए भेजा जाएगा, और उसके बाद आर्बिट्रेशन के लिए। 10 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य वाले विवादों को सुलह के ज़रिए सुलझाया जाएगा, और ऐसे विवादों को आर्बिट्रेशन के लिए नहीं भेजा जाएगा।
Davis Joseph (davis@prsindia.org)
परिवहन, पर्यटन और संस्कृति से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री संजय कुमार झा) ने "अगली पीढ़ी की मोबिलिटी के लिए समावेशी, डिजिटल और स्थायी बस परिवहन को सक्षम बनाना: नीति, रेगुलेशन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी" पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[60] कमिटी ने कहा कि 'ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट' (एआईटीपी) के तहत चलने वाली अंतर-राज्यीय बसों को प्रवर्तन प्राधिकरणों की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, क्योंकि 'टूरिस्ट' कौन है, इसे लेकर अलग-अलग तरह से मतलब निकाले जाते हैं। कमिटी ने यह भी गौर किया कि एआईटीपी पाने के लिए उन राज्यों में गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, जहां परमिट सस्ता मिलता है। अन्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बस टर्मिनल के मालिक और ऑपरेटर एक ही संस्था का होना और (ii) अलग-अलग राज्यों में बसों के लिए अलग-अलग टिकटिंग और ट्रैकिंग सिस्टम होना, जिनमें आपस में तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) बहुत कम है।
कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) 'ऑल-इंडिया टूरिस्ट परमिट' को 'ऑल-इंडिया पैसेंजर परमिट' में बदलना, (ii) गाड़ियों के पहले रजिस्ट्रेशन वाले राज्य से परमिट जारी करना, (iii) देश भर में बस टर्मिनलों का प्रबंधन करने के लिए 'नेशनल बस टर्मिनल्स अथॉरिटी' बनाना, और (iv) अलग-अलग टिकटिंग और ट्रैकिंग प्लैटफ़ॉर्म के लिए इंटरऑपरेबिलिटी स्टैंडर्ड्स का नेशनल फ़्रेमवर्क बनाना।
गृह मामले
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
संसद ने केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026 को पारित किया
संसद ने केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026 पारित किया।[61] यह बिल संविधान की पहली अनुसूची में केरल राज्य का नाम बदलकर "केरलम" करता है।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने आपदा प्रबंधन पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल) ने "आपदा प्रबंधन" पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[62] मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) नए कानून के अनुसार आपदा प्रबंधन के तरीकों को अपडेट करना, (ii) शहर-स्तर की योजनाओं और जोखिम के आकलन के ज़रिए शहरी आपदा प्रबंधन को मज़बूत करना, (iii) धनराशि के इस्तेमाल को बेहतर बनाना और आपदा बीमा का दायरा बढ़ाना, (iv) मानकीकृत आकलन और पुनर्निर्माण के दिशानिर्देशों के ज़रिए पुनर्वास में सुधार करना, (v) खतरे की मैपिंग, इंटीग्रेटेड डेटा और एआई-आधारित सिस्टम के ज़रिए जोखिम के आकलन को मज़बूत करना, (vi) बेहतर ड्रेनेज, मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बिल्डिंग-कोड को लागू करके बाढ़ और भूकंप के जोखिमों से निपटना, और (vii) बाढ़ की मैपिंग, बाढ़-मैदान की सुरक्षा और प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम को बहाल करके नदी-बेसिन स्तर पर बाढ़ प्रबंधन को अपनाना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की सुरक्षा और विकास पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल) "जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश में प्रशासनिक कामकाज, सामाजिक-आर्थिक विकास और आंतरिक सुरक्षा; तथा लद्दाख केंद्र-शासित प्रदेश में सीमा सुरक्षा प्रबंधन और तैयारियों की समीक्षा" पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[63]
मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) चालू सड़क और सुरंग परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करना, (ii) किसानों के लिए फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाना, (iii) श्री वैष्णो देवी मंदिर में संभावित खतरों का पहले से आकलन करके तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, (iv) सरकारी इमारतों और दूर-दराज़ के गांवों में छतों पर सोलर पैनल लगाना, (v) जल जीवन मिशन के तहत समय पर फंड जारी करना, जिसके ज़रिए सभी घरों में नल से पानी का कनेक्शन दिया जाता है, (vi) खनिजों की खोज में तेज़ी लाना और इस क्षेत्र में रोज़गार पैदा करना, (vii) दूर-दराज़ के इलाकों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भर्ती और शिक्षकों की तैनाती बढ़ाना, और (viii) कश्मीर घाटी में प्रवासियों की वापसी और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया में तेज़ी लाना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
स्टैंडिंग कमिटी ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
सामाजिक न्याय और सशक्तीकऱण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री पी.सी. मोहन) ने "राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (एनएसएफडीसी) के कामकाज की समीक्षा" पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[64]
कमिटी ने निगम में रिक्त पदों, इक्विटी में अनियमित निवेश, स्टेट चैनलाइज़िंग एजेंसियों (एससीएज़) के खराब प्रदर्शन और ऋण योजना तक पहुंच से जुड़ी समस्याओं पर गौर किया। एससीए वे एजेंसियां हैं जिन्हें राज्य एनएसएफडीसी की वित्तीय सहायता योजनाओं को लागू करने के लिए नियुक्त करते हैं। मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) निगम में रिक्त पदों को भरना, (ii) नियमित रूप से इक्विटी देना, (iii) एससीए के कामकाज में सुधार करना, (iv) ऋण के लिए पात्रता की आय सीमा बढ़ाना, और (v) ऋण योजना तक पहुंच बेहतर बनाना और उन्हें केंद्र के कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ना।
विदेशी मामले
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
द्विपक्षीय वार्ता के लिए प्रधानमंत्री की उजबेकिस्तान यात्रा
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय बातचीत के लिए उज़्बेकिस्तान का दौरा किया।[65],[66] दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाने की घोषणा की। वे 2030 तक पांच अरब USD का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य तय करने पर सहमत हुए। सहयोग के जिन प्रमुख क्षेत्रों पर सहमति बनी, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भू-विज्ञान और खनिज संसाधन, (ii) पर्यटन, (iii) पर्यावरण संरक्षण, (iv) उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान, (v) भारतीय चिकित्सा पद्धति, और (vi) संस्कृति। दोनों देशों के वित्त मंत्रालयों के बीच आर्थिक और वित्तीय बातचीत के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
आवासन और शहरी मामले
Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)
कमिटी ने अमृत के तहत सीवरेज और सेप्टेज कवरेज पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
आवासन और शहरी मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी) ने 'अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत और अमृत 2.0) के तहत शहरों में सीवरेज और सेप्टेज कवरेज की समीक्षा' पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[67] कमिटी ने कई चुनौतियों पर गौर किया, जैसे सीवरेज और सेप्टेज परियोजनाओं में धीमी प्रगति, घरों तक कम पहुंच, सीवेज ट्रीटमेंट की अपर्याप्त क्षमता, और कानूनी रोक के बावजूद सीवर की मैन्युअल सफाई। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) परियोजना की समय-सीमा को सख्त करना और माइलस्टोन-आधारित निगरानी करना, (ii) सेप्टिक टैंक के लिए बिल्डिंग उप नियमों और तकनीकी मानकों को लागू करना, (iii) सीवेज और मल-कीचड़ के उपचार की क्षमता बढ़ाने और घरों में सीवर कनेक्शन को प्राथमिकता देने के लिए समय-सीमा वाली योजनाएं बनाना, (iv) कीचड़ और सेप्टेज से संसाधनों की रिकवरी, (v) उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा इस्तेमाल के लिए नीतियां और खास नेटवर्क बनाना, और (vi) मशीनों से सीवर की सफाई को समय-सीमा के भीतर अपनाना, साथ ही सफाई कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
पर्यावरण
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
स्टैंडिंग कमिटी ने हिमालयी क्षेत्र के जंगलों में आग पर अपनी रिपोर्ट सौंपी
विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी) ने 'हिमालयी क्षेत्र के जंगलों में आग, उसके प्रतिकूल प्रभाव और शमन के उपाय' पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी ने हिमालयी क्षेत्र में आग लगने की प्रवृत्ति, क्षेत्रीय कारणों, आपदा-प्रबंधन क्षमता और वित्त पोषण की समीक्षा की। कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) क्षेत्र-विशेष के हिसाब से जलवायु और आग पर अध्ययन और जोखिम का अनुमान लगाने वाले मॉडल, (ii) आग लगने के बाद वॉटरशेड और जल-स्रोतों को फिर से जीवित करने का व्यवस्थित तरीका, (iii) चौबीसों घंटे कवरेज देने में सक्षम जियोस्टेशनरी सैटेलाइट लॉन्च करना, (iv) नोडल अधिकारियों के लिए आग की सूचनाओं को समझने और उनकी प्राथमिकता तय करने के लिए व्यवस्थित ट्रेनिंग, (v) आपदा-प्रबंधन बल की तीन अतिरिक्त टीमों को मंज़ूरी देना, (vi) बांज और देवदार के पेड़ों को फिर से उगाने के लिए खास मिशन, और (vii) आपदा प्रबंधन एक्ट, 2005 के तहत जंगल की आग को आपदा घोषित करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
[1] Press Note on Quarterly Estimates of Gross Domestic Product for the First Quarter (April-June) of 2026-27, Ministry of Statistics and Programme Implementation, August 31, 2026,
https://www.mospi.gov.in/uploads/latestreleasesfiles/1788174301107.
[2] “Quick Estimates of Index of Industrial Production and Use- Based Index for the Month of July 2026 (Base 2022-23=100)”, Ministry of Statistics and Programme Implementation, August 28, 2026, https://www.mospi.gov.in/uploads/latestreleasesfiles/1787914052327-IIP_Press_Release_July_2026.pdf.
[3] Monetary Policy Statement, 2026-27, Resolution of the Monetary Policy Committee, August 3 to 5, 2026, Reserve Bank of India, August 5, 2026, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR80907599DE5FD164918A49085C9D6270116.PDF.
[4] Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/MMDR_(Amendment)_Bill_2026.pdf.
[5] Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/1421?view_type=browse.
[6] Report No. 29: ‘KABIL: India's quest for Global Critical Minerals’, Standing Committee on Coal and Mines, August 12, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Coal,%20Mines%20and%20Steel/18_Coal_Mines_and_Steel_29.pdf?source=app.
[7] The Micro, Small and Medium Enterprises Development (Amendment) Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/MSME_Bill_2026.pdf.
[8] Report of the Joint Committee on the Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026, https://sansad.in/dcaea1aa-feeb-48b6-a8d2-8b722dd9c8e0.
[9] F. No. C-I-43012/8/2026-CHEM. II-CPC, Ministry of Chemicals and Fertilizers, August 10, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/275367.pdf.
[10] S.O. 4335(E), Introduction of inventory-based cross-border E-commerce export framework under FTP, Ministry of Commerce and Industry, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/275234.pdf.
[11] Report No. 200, Standing Committee on Commerce: ‘Evaluation of India-US Trade Relations’, Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads/committee/2026_08_06_committee_3327_934_6a74775f99c74.pdf.
[12] Report No. 201: Standing Committee on Commerce: ‘Doing Business in India’, Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads/committee/2026_08_07_committee_3363_934_6a75bd3d38b76.pdf.
[13] Report no. 31, Standing Committee on Chemicals and Fertilisers, ‘Review of National Policy on Petrochemicals 2007’, Lok Sabha, August 6, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Chemicals%20&%20Fertilizers/18_Chemicals_And_Fertilizers_31.pdf?source=app.
[14] Report No. 201, Standing Committee on Commerce: ‘Ecosystem of Startups to benefit India’, Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads/committee/2026_08_07_committee_3363_934_6a75bd3d38b76.pdf.
[15] The Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026, as passed in Lok Sabha, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Taxations_Bill_2026.pdf.
[16] The Bankers’ Books Evidence Bill, 2026, as passed in Lok Sabha, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Bankers%E2%80%99_Books_Evidence_Bill_2026.pdf.
[17] G.S.R. 732(E), Income tax, The Gazette of India, Ministry of Finance, August 14, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/275490.pdf.
[18] Finance Act, 2026, Ministry of Law and Justice, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/271439.pdf.
[19] The Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Rules, 2026, Department of Atomic Energy, August 14, 2026, https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s35b8e4fd39d9786228649a8a8bec4e008/uploads/2026/08/202608141057146106.pdf.
[20] The Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Regulations, 2026, Department of Atomic Energy, August 14, 2026, https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s35b8e4fd39d9786228649a8a8bec4e008/uploads/2026/08/202608141462949070.pdf.
[21] The Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Act, 2025, Department of Atomic Energy, December 21, 2025, https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s35b8e4fd39d9786228649a8a8bec4e008/uploads/2026/06/20260605195774330.pdf.
[22] “Cabinet approves GOBARdhan, India’s National Unified Scheme for Compressed Biogas, with an outlay of Rs.23,731 crore”, Press Information Bureau, Ministry of Petroleum and Natural Gas, August 6, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2295494®=48&lang=1.
[23] “Press Brief: Incentive Scheme for Promotion of Domestic PNG Connections”, Press Information Bureau, Ministry of Petroleum and Natural Gas, August 18, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2301012®=48&lang=1.
[24] Report No. 31, Committee on Public Undertakings: National Hydroelectric Power Corporation Limited (NHPC), Lok Sabha, August 6, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Public%20Undertakings/18_Public_Undertakings_31.pdf?source=app.
[25] Report No. 8, Committee on Estimates: ‘Supply and Distribution of Natural Gas-Challenges and Prospects’, Lok Sabha, August 7, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Estimates/18_Estimates_8.pdf?source=app.
[26] Report No. 9, Committee on Petroleum and Natural Gas: ‘Examination of R&D Activities of Oil PSUs’, Lok Sabha, August 12, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Petroleum%20&%20Natural%20Gas/18_Petroleum_And_Natural_Gas_9.pdf?source=app.
[27] The Tribunals Reforms Bill, 2026, August 10, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Tribunals_Reforms_Bill_2026.pdf.
[28] The Tribunals Reforms Act, 2021.
[29] No. 10 of 2026, Gazette of India (Extraordinary), Ministry of Law and Justice (Legislative Department), August 27, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/275842.pdf.
[30] Report no. 166, “Review of Functioning of Tribunal System in the Country”, Standing Committee on Personnel, Public Grievances, Law and Justice, Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads/committee/2026_08_07_committee_3375_803_6a75d37da1f90.pdf.
[31] Report no. 165, “Creation and Development of Institutional Mechanism to Support the Alternative Dispute Resolution Ecosystem”, Standing Committee on Personnel, Public Grievances, Law and Justice, Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads/committee/2026_08_07_committee_3372_803_6a75d28b5c576.pdf.
[32] The Indian Statistical Institute Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Indian_Statistical_Institute_Bill_2026.pdf.
[33] The Indian Statistical Institute Act, 1959, https://upload.indiacode.nic.in/view-casepdf?type=act&id=AC_CEN_40_66_00001_195957_1517807322454.
[34] The West Bengal Societies Registration Act, 1961, https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/14581.
[35] The National Co-operative Development Corporation (Amendment) Bill, 2026, as passed in Lok Sabha, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/National_Co-operative_Development_Corporation(A)_Bill_2026.pdf.
[36] Report No. 28, Standing Committee on Chemicals and Fertilizers, ‘Alignment of logistics for efficient fertilizer movement and availability at affordable prices during peak season and steps taken to curb forced Bundling of unnecessary boosters with essential fertilizers’, Lok Sabha, August 6, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Chemicals%20&%20Fertilizers/18_Chemicals_And_Fertilizers_28.pdf?source=app.
[37] Report No. 29, Standing Committee on Chemicals and Fertilizers, ‘Evaluation of Implementation of the Fertilizer (Movement Control) Order, 1973’, Lok Sabha, August 6, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Chemicals%20&%20Fertilizers/18_Chemicals_And_Fertilizers_29.pdf?source=app.
[38] “Raksha Mantri approves Transfer of Technology of DRDO-developed missile systems to Indian defence industry to bolster indigenous manufacturing”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, August 25, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2303014®=3&lang=1.
[39] “Aatmanirbhar Bharat: DDP notifies 6th Positive Indigenisation List of 405 strategically important items”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, August 18, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2300723®=48&lang=2.
[40] Report no. 54, Public Accounts Committee: ‘Production of Small Arms in Ordnance Factories’, Lok Sabha, August 12, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Public%20Accounts/18_Public_Accounts_54.pdf?source=app.
[41] G.S.R.750(E), The Gazette of India, Ministry of Communication, August 21, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/275657.pdf.
[42] Report No. 32, Standing Committee on Communication and Information Technology: ‘Review of the performance of schemes/projects under Digital Bharat Nidhi (DBN) implemented by public and private sector’, Lok Sabha, August 6, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Communications%20and%20Information%20Technology/18_Communications_and_Information_Technology_32.pdf?source=app.
[43] The Drugs Rules, 1945, https://cdsco.gov.in/opencms/opencms.
[44] G.S.R. 706(E), Ministry of Health and Family Welfare, July 30, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/275233.pdf.
[45] G.S.R. 713(E), The Gazette of India, Ministry of Health and Family Welfare, Aug 06, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/275299.pdf.
[46] The Drugs and Cosmetics Act, 1940, https://cdsco.gov.in/opencms/export/sites/CDSCO_WEB/Pdf-documents/acts_rules/2016DrugsandCosmeticsAct1940Rules1945.pdf.
[47] Report No. 176, Standing Committee on Health and Family Welfare: ‘Affordability and Accessibility of Healthcare Facilities in Public and Private Sector’, Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads/committee/2026_08_07_committee_3357_827_6a75ba41abac3.pdf.
[48] Report No. 33, Standing Committee on Chemicals and Fertilizers, 'Review of Role, Functions and Duties of National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) with specific reference to increase in prices of medicines in the Country', Lok Sabha, August 06, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Chemicals%20&%20Fertilizers/18_Chemicals_And_Fertilizers_33.pdf?source=app.
[49] Report No. 177, Standing Committee on Health and Family Welfare, 'Prevalence of Chronic Kidney Disease (CKD) in India- Prevention, Diagnosis, Treatment and Management', Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads.
[50] Report No. 175, Standing Committee on Health and Family Welfare, on 'A Study of Vector-Borne Diseases (VBD) in North-East India', Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket.
[51] S.O. 4363(E), Viksit Bharat - Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin): VB- G RAM G Audit of Schemes Rules, 2026, the Gazette of India, Ministry of Rural Development, August 7, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/275274.pdf.
[52] Viksit Bharat - Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin): VB-G RAM G Act, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Viksit_Bharat_G_RAM_G_Act_2025.pdf.
[53] The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005, https://nregaplus.nic.in/Netnrega/Data/Library/Books/1_MGNREGA_Act.pdf.
[54] Report no. 35, Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj, 'Effectiveness of the Implementation of Constitution 73rd Amendment Act with Special Reference to Coordination in Three-Tier System of Panchayat', Lok Sabha, August 05, 2026, https://sansad.in/ffc31b6e-df95-48dc-8b01-c688b34a62c8.
[55] Report no. 40, Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj, 'Rural Skilling and Migration: Impact study of DDU-GKY, DAY-NRLM and RSETIs', Lok Sabha, August 11, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/RuralSkillsandmigration.pdf..
[56] Report no. 41, Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj, 'Implementation of Digital India Land Records Modernization Programme (DILRMP)', Lok Sabha, August 11, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Rural%20Development%20and%20Panchayati%20Raj/18_Rural_Development_and_Panchayati_Raj_41.pdf?source=app.
[57] Report no. 36, Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj, 'Survey of Villages Abadi and Mapping with Improvised Technology in Village Areas (SVAMITVA) Scheme', Lok Sabha, August 05, 2026, https://sansad.in/4be975f8-4bf3-4f3a-addb-9625f01b34ba.
[58] Model Concession Agreement (MCA) of BOT (Toll) Projects, Office Memorandum, Ministry of Road Transport and Highways, August 2020, https://www.pppinindia.gov.in/report/updatedbotupdted.pdf_1685191272.pdf.
[59] Changes in the Model Concession Agreement (MCA) of BOT (Toll) Project, Office Memorandum, Ministry of Road Transport and Highways, August 10, 2026, https://morth.gov.in/backend/documents/uploaded/1786426550_6xdYvbSyZt.pdf.
[60] Report no. 392, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture: ‘Enabling inclusive, digital and sustainable bus transport: policy, regulation and public-private partnership for next-gen mobility’, Rajya Sabha, August 11, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads/committee/2026_08_11_committee_3378_776_6a7b3a55c5da4.pdf.
[61] The Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026, August 10, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Kerala_(Alteration_of_Name)_Bill_2026.pdf.
[62] Report no. 261, “Disaster Management”, Standing Committee on Home Affairs, Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads/committee/2026_08_21_committee_3339_976_6a881941b462a.pdf.
[63] Report no. 260, “Review of Administrative Governance, Socio-Economic Development and Internal Security in the UT of Jammu & Kashmir; and Border Security Management and Preparedness in the UT of Ladakh”, Standing Committee on Home Affairs, Rajya Sabha, August 7, 2026, https://bucketapi.rajyasabha.digital/public-bucket/uploads/committee/2026_08_21_committee_3336_976_6a8818b3a7f3c.pdf.
[64] Report No. 25: “Review of the functioning of the National Scheduled Castes Finance and Development Corporations (NSFDC)”, Standing Committee on Social Justice and Empowerment, Rajya Sabha, August 12, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Social%20Justice%20&%20Empowerment/18_Social_Justice_And_Empowerment_25.pdf?source=app.
[65] “Prime Minister holds official talks on his State Visit to Uzbekistan” Press Release, Ministry of External Affairs, August 30, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41713/Prime_Minister_holds_official_talks_on_his_State_Visit_to_Uzbekistan.
[66] “List of Outcomes: Prime Minister’s State Visit to Uzbekistan (August 29 – 30, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, August 30, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41712/List_of_Outcomes_Prime_Ministers_State_Visit_to_Uzbekistan_August_29__30_2026.
[67] Report no. 10, Standing Committee on Housing and Urban Affairs: 'Review of Sewerage and Septage Coverage in Cities with special reference to interventions under AMRUT & AMRUT 2.0', Lok Sabha, August 04, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Housing%20and%20Urban%20Affairs/18_Housing_and_Urban_Affairs_10.pdf?source=app.
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