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अप्रैल 2026

पीडीएफ

इस अंक की झलकियां

2026 का बजट सत्र तीन दिनों की अतिरिक्त अवधि के बाद समाप्त हुआ

31 बैठकों के बाद बजट सत्र 18 अप्रैल, 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 10 बिल पेश किए गए और छह पारित हुए। केंद्रीय बजट 2026-27 पर भी चर्चा हुई और उसे पारित किया गया।

लोकसभा के बढ़े हुए सत्र के दौरान परिसीमन बिल्स पर चर्चा हुई और उन्हें मतदान के बाद खारिज कर दिया गया

इन बिल्स का उद्देश्य लोकसभा का आकार बढ़ाना, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना और इस परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करना था। संविधान संशोधन बिल को मतदान में खारिज कर दिया गया।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति 2025-26 की चौथी तिमाही में 3.1%

2025-26 की तीसरी तिमाही में सीपीआई मुद्रास्फीति 0.8% थी। 2025-26 की चौथी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति 3.2% थी, जो 2025-26 की तीसरी तिमाही की खाद्य मुद्रास्फीति (-3.9%) से अधिक थी।

ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित नियमों की सूचना जारी

नियमों में ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी की संरचना, किसी ऑनलाइन गेम को ऑनलाइन मनी गेम के रूप में निर्धारित करने वाले मानदंड और ऑनलाइन गेम के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया निर्दिष्ट की गई है।

एसईजेड इकाइयों को एक वर्ष के लिए रियायती शुल्क दरों पर घरेलू बाजार में बिक्री करने की अनुमति

विशेष आर्थिक क्षेत्र में निर्मित वस्तुओं को अब 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2027 के बीच घरेलू बाजार में कम सीमा शुल्क पर बेचा जा सकता है।

भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए

इस मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड को होने वाले 100% निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगता है।

 

संसद

Ruchira Sakalle (ruchira@prsindia.org)

बजट सत्र 2026 समाप्त

संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से 18 अप्रैल, 2026 तक आयोजित किया गया। सत्र के दौरान 10 बिल पेश किए गए, जिनमें से छह पारित हुए। ये बिल हैं: (i) ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 (ii) केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026 (iii) जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल, 2026 (iv) इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) बिल, 2025 (v) आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 और (vi) औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) बिल, 2026। कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2026 पेश किया गया और इसे ज्वाइंट कमिटी को भेजा गया।

यह सत्र मूल रूप से 2 अप्रैल, 2026 को समाप्त होने वाला था। हालांकि इसे तीन दिनों के लिए बढ़ा दिया गया और 16 से 18 अप्रैल, 2026 तक अतिरिक्त बैठकें आयोजित की गईं। इस दौरान तीन नए बिल पेश किए गए- संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल। इन बिल का उद्देश्य लोकसभा का आकार बढ़ाना, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना और इस परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण प्रदान करना था। संविधान (131वां संशोधन) बिल लोकसभा में खारिज हो गया। परिणामस्वरूप, इससे संबंधित दोनों बिल निष्प्रभावी हो गए और उन पर विचार नहीं किया गया।

सत्र के दौरान संसद ने केंद्रीय बजट भी पारित किया और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की।

सत्र के दौरान हुए लेजिसलेटिव बिजनेस के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां देखें। संसद के कामकाज के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां देखें।

 

मैक्रोइकोनॉमिक विकास

Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)

2025-26 की चौथी तिमाही में सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति औसत 3.12% रही

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 3.12% थी, जो 2024-25 की चौथी तिमाही में 3.74% से कम है।[1] 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में सीपीआई मुद्रास्फीति औसतन 0.76% रही।

वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति औसतन 3.16% रही, जो वर्ष 2024-25 की इसी तिमाही के 4.14% से कम है। वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति काफी कम होकर -3.88% रही।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति 2025-26 की चौथी तिमाही में औसतन 2.56% रही, जो 2024-25 की इसी तिमाही के 2.40% से अधिक है।[2] 2025-26 की तीसरी तिमाही में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति -0.06% थी।

रेखाचित्र 1: वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में मासिक मुद्रास्फीति (प्रतिशत परिवर्तन, वर्ष-दर-वर्ष)

स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय; पीआरएस।

आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को अल्पावधि की जरूरतों के लिए उधार देता है) को 5.25% पर बरकरार रखा है।[3]  समिति के अन्य फैसलों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • स्टैंडिंग डिपॉजिट फेसिलिटी रेट (जिस दर पर आरबीआई कोलेट्रल दिए बिना बैंकों से उधार लेता है) को 5.0% पर बरकरार रखा गया है।

  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) भी 5.5% पर बरकरार हैं।

  • एमपीसी ने अपना तटस्थ रुख जारी रखने का निर्णय लिया।

 

कानून एवं न्याय

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

लोकसभा में परिसीमन संबंधी बिल्स पर चर्चा हुई और उन्हें खारिज कर दिया गया

16 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में तीन बिल पेश किए गए: (i) संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026, (ii) केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026, और (iii) परिसीमन बिल, 2026।[4],[5],[6] केंद्र शासित प्रदेश कानून बिल पुद्दूचेरी, दिल्ली और जम्मू एवं कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेशों में भी इसी प्रकार के प्रावधान लागू करता है। बिल्स के प्रमुख प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • जनसंख्या के अनुपात में परिसीमन: संविधान संशोधन बिल प्रत्येक राज्य में उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों के सिद्धांत पर वापस लौटता है। इसका तात्पर्य यह है कि सभी राज्यों में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या लगभग समान होगी।

  • किस जनगणना का इस्तेमाल होगा, संसद तय करेगी: संविधान में यह निर्दिष्ट है कि प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन किया जाएगा और यह परिसीमन उसी जनगणना पर आधारित होगा। संविधान संशोधन बिल संसद को यह निर्धारित करने के लिए कानून पारित करने का अधिकार देता है कि परिसीमन कब किया जाएगा और किस जनगणना का उपयोग किया जाएगा। एक अलग बिल (परिसीमन बिल, 2026) में यह प्रावधान है कि परिसीमन आयोग के गठन की तारीख तक प्रकाशित नवीनतम जनगणना का उपयोग किया जाएगा। इसका तात्पर्य यह है कि अगले परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना का उपयोग किया जाएगा।

  • लोकसभा में सीटों की अधिकतम संख्या में बढ़ोतरी: संविधान के अनुसार, लोकसभा में अधिकतम 550 सदस्य होंगे, जिनमें राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य हो सकते हैं। संविधान संशोधन बिल के तहत सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 850 कर दी गई है, जिनमें राज्यों से 815 तक सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 तक सदस्य शामिल हो सकते हैं।

  • महिलाओं के लिए आरक्षण की शुरुआत: 2023 में पारित 106वें संवैधानिक संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं। यह आरक्षण 2023 के कानून के लागू होने के बाद पहली जनगणना के आधार पर प्रभावी होगा। संविधान संशोधन बिल इस अनिवार्यता को हटाता है।

  • परिसीमन आयोग की नियुक्ति: परिसीमन बिल, 2026 केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह परिसीमन करने के लिए परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है। इसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे: (i) एक चेयरपर्सन, जो सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश हो, (ii) मुख्य चुनाव आयुक्त या मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा नामित एक चुनाव आयुक्त, और (iii) संबंधित राज्य का राज्य चुनाव आयुक्त। चेयरपर्सन की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी।

मतदान के बाद संविधान (131वां संशोधन) बिल खारिज कर दिया गया। केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 और परिसीमन बिल, 2026 निष्प्रभावी हो गए, क्योंकि वे संविधान (131वां संशोधन) बिल के पारित होने पर निर्भर थे।

इन बिल्स के पीआरएस विश्लेषण के लिए कृपया देखें।

 

वित्त

Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)

आरबीआई ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (पीपीआई), 2026 पर मास्टर दिशानिर्देशों का ड्राफ्ट जारी किया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (पीपीआईज़), 2026 पर मास्टर दिशानिर्देशों का ड्राफ्ट जारी किया है।[7]  पीपीआई ऐसे साधन होते हैं जिनसे वस्तुएं और सेवाएं खरीदी जा सकती है, वित्तीय लेनदेन किया जा सकता है और जमा पैसों से दूसरों को पैसे भेजे जा सकते हैं।[8] इनकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • सीमा पारीय लेनदेन: 2021 के मास्टर दिशानिर्देशों के अनुसार, अधिकृत यूजर्स को कुछ खास मामलों में भारतीय रुपए वाले पीपीआई के जरिए विदेश में लेनदेन करने की अनुमति थी।[9]  2026 के ड्राफ्ट में प्रस्ताव दिया गया है कि पीपीआई के जरिए सीमा पारीय लेनदेन पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाए।

  • पीपीआई के लिए कैश लोडिंग सीमा: 2021 के मास्टर दिशानिर्देशों के तहत, सभी पीपीआई के लिए अधिकतम कैश लोडिंग सीमा 50,000 रुपए प्रति माह है। 2026 के ड्राफ्ट में फुल-केवाईसी वाले पीपीआई के लिए इस सीमा को घटाकर 10,000 रुपए प्रति माह करने का प्रस्ताव है।

  • पीपीआई की श्रेणियां: 2026 के ड्राफ्ट में पीपीआई को दो व्यापक श्रेणियों– जर्नल पर्पज और स्पेशल पर्पज– में बांटने का प्रस्ताव है। जर्नल पर्पज पीपीआई में फुल-केवाईसी पीपीआई और स्मॉल पीपीआई शामिल हैं (जो वर्तमान संरचना के अंतर्गत अलग-अलग श्रेणियां हैं)। स्पेशल पर्पज पीपीआई में गिफ्ट पीपीआई, ट्रांजिट पीपीआई और विदेशी नागरिकों एवं अनिवासी भारतीयों के लिए पीपीआई शामिल हैं।

  • व्यक्ति से व्यक्ति ट्रांसफर: ड्राफ्ट दिशानिर्देशों में फुल-केवाईसी पीपीआई से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने की सीमा 25,000 रुपए प्रति माह तय करने का सुझाव दिया है। 2021 के मास्टर निर्देशों के अनुसार, पहले से रजिस्टर्ड यूजर सभी तरह के पीपीआई से हर महीने 2,00,000 रुपए तक ट्रांसफर कर सकते हैं।

सेबी ने 2016 के वैकल्पिक निवेश निधि से संबंधित रेगुलेशंस में संशोधन जारी किए

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (वैकल्पिक निवेश निधि) रेगुलेशन, 2016 में संशोधन जारी किए हैं।[10]  वैकल्पिक निवेश निधि (एआईएफ) निजी तौर पर जुटाए गए निवेश फंड्स होते हैं जो एक तय निवेश नीति के अनुसार निवेश के लिए निवेशकों (भारतीय और विदेशी) से धन जुटाते हैं।[11]  2016 के रेगुलेशंस के अनुसार, किसी सोशल इंपैक्ट फंड में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि 2,00,000 रुपए थी। ये फंड केवल गैर-लाभकारी संगठनों की प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं जो सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर रजिस्टर्ड या लिस्टेड हैं। 2026 के रेगुलेशंस ने इस न्यूनतम निवेश राशि को घटाकर प्रति व्यक्ति केवल 1,000 रुपए कर दिया है। इसके अलावा 2026 के संशोधनों में एक नया प्रावधान भी जोड़ा गया है जिसके तहत सेबी किसी एआईएफ को इनऑपरेटिव फंड का दर्जा दे सकता है।

 

वाणिज्य एवं उद्योग

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

एसईजेड इकाइयों को एक वर्ष के लिए रियायती शुल्क दरों पर घरेलू बाजार में बिक्री करने की अनुमति

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में निर्मित वस्तुओं पर संशोधित सीमा शुल्क दरों की अधिसूचना जारी की है।[12] एसईजेड एक्ट, 2005 के अनुसार, एसईजेड में निर्मित वस्तुओं पर घरेलू शुल्क क्षेत्र (डीटीए) में बिक्री पर सीमा शुल्क लागू होता है।[13]  डीटीए के मायने है, एसईजेड को छोड़कर बाकी पूरा भारत। अधिसूचना के अनुसार, एसईजेड में स्थित पात्र मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयां 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2027 के बीच रियायती शुल्क दरों पर डीटीए में अपनी वस्तुएं बेच सकती हैं। पात्रता की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं: (i) डीटीए में भेजी जाने वाली सभी वस्तुओं के लिए न्यूनतम 20% मूल्यवर्धन, और (ii) एसईजेड इकाइयों का उत्पादन 31 मार्च, 2025 को या उससे पहले शुरू हो जाना चाहिए। इसके अलावा, बिक्री पिछले तीन वित्तीय वर्षों में उनके उच्चतम वार्षिक निर्यात मूल्य के 30% की सीमा के अधीन होगी।

RELIEF योजना का कवरेज बढ़ाया गया

RELIEF योजना 19 मार्च, 2026 को निर्यात प्रोत्साहन मिशन के अंतर्गत शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को युद्ध से संबंधित निर्यात जोखिमों के बीच बीमा कवर प्रदान करना था।[14]  इस योजना के तहत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इज़राइल और कुवैत जैसे देशों को भेजे जाने वाले शिपमेंट कवर किए जाते हैं। अब मिस्र (ईजिप्ट) और जॉर्डन भी इसके दायरे में आएंगे।

भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए हैं।[15]  एफटीए वार्ता दिसंबर 2025 में संपन्न हुई।[16]  इस एफटीए के तहत न्यूजीलैंड को भारत से होने वाले सभी निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। भारत न्यूजीलैंड से आयात होने वाले लगभग 70% उत्पादों पर शुल्क कम करेगा। इसके अतिरिक्त, 30% उत्पादों पर तत्काल शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा। इनमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस और कच्ची खाल (लेदर रॉ हाइड्स) जैसे उत्पाद शामिल हैं। दुग्ध उत्पादन, शहद और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों को एफटीए से बाहर रखा गया है।

न्यूजीलैंड ने सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा सेवाओं, वित्तीय सेवाओं और पेशेवर सेवाओं सहित लगभग 118 सेवा क्षेत्रों में भारत को बाजार पहुंच प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही, उसने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब USD का निवेश करने की भी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। इसके अतिरिक्त, इस मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत कुशल व्यवसायों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के लिए एक नया अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा मार्ग बनाया गया है। 2024 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 24 लाख USD था।

 

खेल

Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)

ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित नियमों की सूचना जारी

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने ऑनलाइन गेमिंग का प्रमोशन और रेगुलेशन नियम, 2026 को अधिसूचित किया है।[17]  ये नियम ऑनलाइन गेमिंग का प्रमोशन और रेगुलेशन एक्ट, 2025 के तहत अधिसूचित किए गए हैं।[18]  एक्ट के तहत किसी को भी ऑनलाइन मनी गेम की पेशकश करने, उनका विज्ञापन करने या ऐसे गेम के लिए लेन-देन की सुविधा प्रदान करने से प्रतिबंधित किया गया है। नियमों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी की संरचना: एक्ट केंद्र सरकार को ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी बनाने का अधिकार देता है। नियमों में निर्दिष्ट है कि इस अथॉरिटी की अध्यक्षता एमईआईटीवाई में अतिरिक्त सचिव या संयुक्त सचिव से कम रैंक का अधिकारी नहीं करेगा। अन्य सदस्यों में गृह मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव शामिल होंगे। अथॉरिटी के कार्यों में ऑनलाइन मनी गेम्स की सूची प्रकाशित करना, शिकायतों की जांच करना और निर्देश जारी करना शामिल है।

  • ऑनलाइन गेम का निर्धारण: नियमों में उन मानदंडों का उल्लेख है जिनके आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि कोई ऑनलाइन गेम ऑनलाइन मनी गेम है या नहीं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) शुल्क या दांव (स्टेक) का भुगतान, (ii) मौद्रिक लाभ की अपेक्षा, (iii) गेम के राजस्व मॉडल की संरचना, यानी कमाई का तरीका, और (iv) वह तरीका जिससे पुरस्कार या इन-गेम संपत्तियों को बाहर भुनाया (रिडीम) या मुद्रीकृत (मॉनिटाइज) किया जा सकता है। इस बात का फैसला तीन तरीकों से किया जा सकता है- या तो ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी खुद इस पर कार्रवाई शुरू करे या कोई गेम कंपनी खुद इसके लिए आवेदन दे या फिर केंद्र सरकार किसी खास तरह के गेम की जांच करने का आदेश दे।

  • ऑनलाइन गेम्स का रजिस्ट्रेशन: नियमों के तहत किसी ऑनलाइन गेम का रजिस्ट्रेशन केवल तभी अनिवार्य है, जब केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर इसकी मांग करे या जब उस गेम को ई-स्पोर्ट्स के रूप में पेश करने का इरादा हो। अथॉरिटी रजिस्ट्रेशन के लिए एक डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करेगी जो 10 वर्षों के लिए मान्य होगा। रजिस्टर्ड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने गेम के इंटरफेस (ऐप या वेबसाइट) पर रजिस्ट्रेशन या निर्धारण का विवरण प्रमुखता से प्रदर्शित करें।

 

कोयला

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

भूमिगत कोयला गैसीकरण के लिए खनन योजनाओं के दिशानिर्देश जारी

कोयला मंत्रालय ने भूमिगत कोयला गैसीकरण के लिए कोयला और लिग्नाइट ब्लॉकों की खनन योजनाओं की तैयारी और अनुमोदन हेतु दिशानिर्देश जारी किए हैं।[19]  प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • एप्लिकेबिलिटी: भूमिगत गैसीकरण के लिए प्रस्तावित सभी कोयला या लिग्नाइट ब्लॉकों के लिए गैसीकरण कार्य शुरू होने से पहले कोयला नियंत्रक संगठन द्वारा अनुमोदित खनन योजना होना अनिवार्य है। अनुमोदित योजना खदान के पूरे जीवनकाल के लिए वैध है।

  • सुरक्षा संबंधी शर्तें: धंसाव, आग, तरल अपशिष्ट और भूजल संदूषण को कवर करने वाली सुरक्षा प्रबंधन योजना अनिवार्य है। मिश्रित खानों में, जहां भूमिगत गैसीकरण कार्य खुले या भूमिगत खनन के साथ-साथ चलते हैं, दोनों कार्यों के बीच कम से कम 500 मीटर की दूरी बनाए रखना आवश्यक है। भूजल स्तर, जलभृत (एक्विफर्स) और नदियों से भी पर्याप्त दूरी बनाए रखना आवश्यक है।

  • खदान बंद करने की योजनाएं: खदान बंद करने की योजनाएं अनिवार्य हैं और इनमें चरणबद्ध बंदी (इसका अर्थ है, पूरी खदान बंद होने का इंतजार किए बिना, जैसे-जैसे काम खत्म हो, उस हिस्से को ठीक करना) की प्रक्रिया (हर पांच साल में अपडेटेड) और अंतिम बंदी की प्रक्रिया दोनों शामिल होनी चाहिए। अंतिम बंदी योजना में कुओं को सील करना, कैविटी (खाली जगह) को स्थिर करना (यानी जमीन के नीचे बनी खाली जगहों को भरना या स्थिर करना ताकि जमीन धंसने का खतरा न रहे), संरचनाओं को हटाना, लैंडस्केपिंग और बंद होने के बाद तीन साल तक भूजल की निगरानी शामिल होगी। परियोजना के प्रस्तावक को आजीविका पर पड़ने वाले किसी भी प्रभाव को दूर करने के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से स्थानीय समुदायों से संपर्क करना होगा।

  • एस्क्रो खाता: खदान बंद करने की योजनाओं में एस्क्रो खातों (यह एक तीसरे पक्ष, यानी बैंक और सरकार, की देखरेख वाला खाता होता है) में जमा की जाने वाली राशि का उल्लेख होना चाहिए। ये खाते खदान बंद करने के लिए धन जमा करने और निकालने की सुविधा प्रदान करेंगे। प्रमाणित चरणबद्ध बंदी कार्यों पर हुए खर्च के आधार पर, एस्क्रो खातों में जमा कुल राशि का 75% तक हर पांच साल में परियोजना प्रस्तावक को वापस किया जा सकता है, जबकि शेष राशि खदान के पूरी तरह से बंद होने के बाद जारी की जाएगी।

 

कपड़ा

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

परिधान निर्यात पर कर वापसी योजना का विस्तार किया गया

वस्त्र मंत्रालय ने परिधान और मेड-अप्स (जैसे चादर, पर्दे) के निर्यात पर राज्य एवं केंद्रीय करों एवं शुल्कों की छूट (आरओएससीटीएल) योजना के विस्तार की अधिसूचना जारी की है।[20]  इसे 30 सितंबर, 2026 तक या 16वें वित्तीय आयोग की अवधि के लिए संबंधित अथॉरिटी द्वारा योजना को मंजूरी दिए जाने तक, जो भी पहले हो, तक बढ़ाया गया है। इस योजना के तहत, निर्यात किए गए परिधानों पर लगने वाले उन केंद्रीय एवं राज्य करों को निर्यतकों को वापस कर दिया जाता है, जिनकी प्रतिपूर्ति किसी अन्य माध्यम से नहीं होती है। इस योजना का उद्देश्य निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए।

ग्रामीण विकास

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को जारी रखने की मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है, जिसके लिए संशोधित आवंटन 83,977 करोड़ रुपए है।[21]  यह योजना जुलाई 2019 में 80,250 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य ग्रामीण बस्तियों को बाजारों और शहरी केंद्रों से जोड़ने वाली सड़कों को मजबूत करना है।

मैदानी इलाकों में सड़कों और पुलों के निर्माण की समयसीमा, तथा पहाड़ी इलाकों में सड़कों के निर्माण की समयसीमा मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है। पहाड़ी इलाकों में पुलों का निर्माण मार्च 2029 तक पूरा किया जा सकता है। मार्च 2025 से पहले स्वीकृत लेकिन अप्रैल 2025 तक आवंटित न किए गए कार्यों के लिए निविदा/आवंटन जारी किया जा सकता है। पहले से स्वीकृत सड़कों पर बने पुलों को अलग से स्वीकृत और आवंटित किया जा सकता है, भले ही वे मूल रूप से परियोजना में शामिल न हों।

 

परिवहन

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) चौथा संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन किया है। ये नियम राष्ट्रीय राजमार्ग एक्ट, 1956 के अंतर्गत जारी किए गए हैं।[22],[23]  ये नियम राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल शुल्क लगाने और वसूलने के लिए एक संरचना प्रदान करते हैं, जिसमें दर निर्धारण एवं कलेक्शन की व्यवस्था भी शामिल हैं।

पहले, ओवरलोडेड (अधिक भार वाले) वाहनों को तब तक राजमार्ग का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी, जब तक कि अतिरिक्त भार हटा न दिया जाए और वे लागू आधार टोल शुल्क का दस गुना जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी होते थे। संशोधनों के अनुसार, अतिरिक्त भार ले जाने वाले वाहनों पर ओवरलोडिंग के प्रतिशत के आधार पर शुल्क लगाया जाएगा: (i) 10% तक अतिरिक्त भार पर कोई ओवरलोडिंग शुल्क नहीं, (ii) 10% से 40% के बीच ओवरलोडिंग पर टोल शुल्क का दोगुना, (iii) 40% से अधिक ओवरलोडिंग पर टोल शुल्क का चार गुना।

टोल प्लाजा पर प्रमाणित वजन मापने वाले उपकरण लगाए जाएंगे। अगर टोल प्लाजा पर वजन मापने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो कोई ओवरलोडिंग शुल्क नहीं लिया जाएगा।

 

पर्यावरण

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

टार-बॉल प्रबंधन नियम, 2026 का ड्राफ्ट सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के अंतर्गत टार-बॉल प्रबंधन नियम, 2026 का ड्राफ्ट सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है।[24]  इन ड्राफ्ट नियमों का उद्देश्य टार-बॉल का पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन सुनिश्चित करना और समुद्री इकोसिस्टम, जन स्वास्थ्य एवं तटीय अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे जोखिमों को कम करना है। टार-बॉल अपतटीय तेल अन्वेषण, टैंकर दुर्घटनाओं, पाइपलाइन रिसाव और प्राकृतिक रिसाव के कारण होने वाले तेल रिसाव के मौसमी उप-उत्पाद हैं। नियमों के ड्राफ्ट की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • टार-बॉल के पूरे चक्र का प्रबंधन: ड्राफ्ट नियमों में टार-बॉल के पूरे चक्र को शामिल किया गया है। इसके उत्पन्न होने और एकत्र करने से लेकर भंडारण, परिवहन, उपचार, सह-प्रसंस्करण और निपटान तक। इन गतिविधियों मे शामिल प्रत्येक इकाई को संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी, जो पांच वर्षों के लिए वैध होगी और इसे रीन्यू कराया जा सकेगा। एक बहु-मंत्रालय संचालन समिति इन नियमों के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी।

  • रोकथाम: तेल संयंत्र के मालिकों को मौजूदा तेल रिसाव रोकथाम कानूनों का पालन करना अनिवार्य है, जिनमें मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025, तेलक्षेत्र (रेगुलेशन और विकास) एक्ट, 1948 और राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना शामिल हैं। तेल संयंत्र के मालिक, कब्जेदार और परिवहनकर्ता, जो पर्यावरण के अनुकूल तरीके से टार-बॉल का प्रबंधन करने में विफल रहते हैं और पर्यावरण या सार्वजनिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होगा।

  • औद्योगिक जिम्मेदारी: जिला प्रशासन, जिले की तटरेखा के किनारे टार-बॉल्स को जमा करने, उनका रखरखाव करने और परिवहन करने के लिए जिम्मेदार हैं, और उन्हें सुरक्षा उपकरणों से लैस प्रशिक्षित स्थानीय प्रतिक्रिया दल बनाने होंगे। राज्य सरकारों को तटीय क्षेत्रों में टार-बॉल्स से होने वाले प्रदूषण को राज्य आपदा घोषित करना और आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत कार्रवाई करना अनिवार्य है। एसपीसीबी को टार-बॉल्स से संबंधित मामलों का डेटाबेस बनाने रखना और अधिकृत निपटान या उपचार सुविधाओं की सूची प्रकाशित करना आवश्यक है।

  • सतत निपटान: सीमेंट संयंत्रों में सह-प्रसंस्करण, जहां 1,500 किलो कैलोरी से अधिक कैलोरी मान वाले टार-बॉल का उपयोग ईंधन या कच्चे माल के रूप में किया जाता है, उसके लिए पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है। अन्य सभी उपयोगों के लिए सीपीसीबी के दिशानिर्देशों या अनुमोदित ट्रायल रन के आधार पर एसपीसीबी की अनुमति अनिवार्य है।

2 जून, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

विदेशी मामले

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

ऑस्ट्रिया, दक्षिण कोरिया के साथ द्विपक्षीय वार्ता

ऑस्ट्रिया

ऑस्ट्रिया के चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने 14 अप्रैल, 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा की।[25] दोनों देशों ने कई समझौतों और समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) फिल्म उद्योग में ऑडियो-विजुअल सहयोग, (ii) खाद्य सुरक्षा, (iii) सड़क अवसंरचना में तकनीकी सहयोग और (iv) द्विपक्षीय अंतरिक्ष उद्योग सेमिनार का आयोजन।[26]  उन्होंने निम्नलिखित विषयों पर आशय पत्र (लेटर्स ऑफ इंटेंट) पर भी हस्ताक्षर किए: (i) सैन्य मामलों में सहयोग, (ii) आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह की स्थापना और (iii) दोहरे व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास में आदान-प्रदान का विस्तार। कई घोषणाएं भी की गईं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) निवेश को सक्षम बनाने के लिए एक त्वरित प्रक्रिया तंत्र की स्थापना, (ii) स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग बढ़ाना, (iii) संस्थागत साइबर सुरक्षा संवाद की शुरुआत, (iv) भारत के संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा केंद्र और ऑस्ट्रियाई सशस्त्र बल अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के बीच साझेदारी और (v) शिक्षा सहयोग पर एक संरचनात्मक द्विपक्षीय संवाद की शुरुआत।

दक्षिण कोरिया

दक्षिण कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति श्री ली जे म्युंग ने 19 अप्रैल, 2026 को भारत की राजकीय यात्रा की।[27]  दोनों देशों ने बंदरगाहों, उद्योग, व्यापार, वाणिज्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा संस्कृति से संबंधित 15 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।[28]  उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौतों को उन्नत करने के लिए वार्ता पुनः आरंभ करने हेतु एक संयुक्त घोषणापत्र पर भी हस्ताक्षर किए। इस यात्रा के दौरान कई घोषणाएं भी की गईं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) जलवायु परिवर्तन, आर्कटिक और समुद्री सहयोग पर विदेश मंत्रालयों के बीच संवाद का शुभारंभ, (ii) दक्षिण कोरिया गणराज्य का हिंद प्रशांत महासागर पहल और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होना। भारत ने ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट में शामिल होने की अपनी मंशा भी व्यक्त की।

 

[1] Press Release of Consumer Price Index on Base 2024=100 For March, 2026, Ministry of Statistics and Programme Implementation, April 13, 2026, https://www.mospi.gov.in/uploads/latestreleasesfiles/1776078391571-Press_Release_of_CPI_March_2026.pdf.

[2] Index Numbers of Wholesale Price in India for the Month of March, 2026 (Base Year: 2011-12), Ministry of Commerce and Industry, April 15, 2026, https://eaindustry.nic.in/pdf_files/cmonthly.pdf. 

[3] Monetary Policy Statement, 2025-26, Resolution of the Monetary Policy Committee, April 6 to 8, 2026, Reserve Bank of India, April 22, 2026, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR121405ABA7B50F645B68B30FB90F609D8C2.PDF.

[4] The Constitution (One Hundred and Thirty First) Amendment Bill, 2026, Lok Sabha, April 16, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Constitution_(131st_Amendment)_Bill,2026.pdf.  .

[5] The Delimitation Bill, 2026, Lok Sabha, April 16, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Delimitation_Bill,_2026.pdf. 

[6] The Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2026, Lok Sabha, April 16, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Union_Territories_Laws(A)_Bill_2026.pdf

[7] “RBI issues Draft Master Direction on Prepaid Payment Instruments (PPIs), 2026”, Reserve Bank of India, April 22, 2026,  https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=62602.

[8] Frequently Asked Questions - Prepaid Payment Instruments (PPIs), Reserve Bank of India, November 22, 2022, https://www.rbi.org.in/commonman/english/scripts/FAQs.aspx?Id=2812.

[9] “Master Directions on Prepaid Payment Instruments (PPIs)”, August 27, 2021, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/82MDPPIS2708202181CF0A6FCD1B47B88CAE8E92A228B160.PDF.

[10] Securities and Exchange Board of India (Alternative Investment Funds) (Amendment) Regulations, 2026, April 18, 2026, https://www.sebi.gov.in/legal/regulations/apr-2026/securities-and-exchange-board-of-india-alternative-investment-funds-amendment-regulations-2026_100989.html.

[11] Frequently Asked Questions, Sebi (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012, https://www.sebi.gov.in/sebi_data/attachdocs/1471519155273.pdf.

[12] “Government notifies Conditional Concessional Customs Duty for SEZ to Domestic Tariff Area sales to boost manufacturing capacity”, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, April 1, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2247993&reg=3&lang=1.

[13] Special Economic Zones Act, 2005, https://www.nsez.gov.in/Resources/SEZ%20Act,%202005.pdf.

[14] “Government Expands Coverage of RELIEF Scheme Amid West Asia Geopolitical Developments”, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, April 17, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2253096&reg=3&lang=1.

[15] “Union Minister of Commerce and Industry Shri Piyush Goyal and New Zealand’s Minister for Trade and Investment Hon. Todd McClay sign the landmark India–New Zealand Free Trade Agreement”, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, April 28, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2255914&reg=3&lang=1.

[16] “India and New Zealand Announce Conclusion of Landmark Free Trade Agreement Negotiations,” Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, December 18, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2207300® =3&lang=2.

[17] G.S.R. 303(E), Gazette of India, Ministry of Electronics and Information Technology, April 22, 2026, https://egazette.gov.in/(S(frfhaxnnotdvzsl4ndadqnd4))/ViewPDF.aspx.

[18] The Promotion and Regulation of Online Gaming Act, Ministry of Electronics and IT, August 22, 2025, https://www.meity.gov.in/static/uploads/2025/10/8a7f103cefc68ed8aaa2ebc9a2ed7c13.pdf. 

[19] “Guidelines for preparation and approval of Mining Plan for Coal and Lignite Blocks/Mines for Underground Gasification 2026”, Ministry of Coal, April 6, 2026, https://www.coal.nic.in/sites/default/files/2026-04/06-04-2026a-wn.pdf.

[20] “Government Notifies Extension of RoSCTL Scheme for Apparel and Made-ups Exports”, Press Information Bureau, Ministry of Textiles, April 1, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2247851&reg=3&lang=1.

[21] “Cabinet approves Continuation of Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana-III beyond March 2025 upto March 2028,” Press Information Bureau, Ministry of Rural Development, April 18, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2253248&reg=3&lang=1.

[22] Gazette no 255, Ministry of Road Transport and Highways, April 13, 2026, https://morth.gov.in/backend/documents/uploaded/1776235708_mYnzaE7AbN.pdf.

[23] Gazette no 641, Ministry of Road Transport and Highways,

December 5, 2008, https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_CEN_30_42_00002_195648_1517807321068&type=rule&filename=g.s.r._838(e)_dt._05.12.2008.pdf.

[24] Draft Tar-balls Management Rules, 2026, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, April 3, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/271565.pdf.

[25]“Visit of Federal Chancellor of Republic of Austria to India (April 14-17, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, April 9, 2026,  https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/41033/Visit_of_Federal_Chancellor_of_Republic_of_Austria_to_India__April_1417_2026. 

[26]“List of outcomes: Visit of Federal Chancellor of Austria Dr. Christian Stocker to India (April 14 – 17, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, April 16, 2026,  https://www.mea.gov.in/bilateraldocuments.htm?dtl/41046/List_of_outcomes_Visit_of_Federal_Chancellor_of_Austria_Dr_Christian_Stocker_to_India_April_14__17_2026.

[27] “State Visit of President of Republic of Korea H.E. Lee Jae Myung to India (April 19-21, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, April 16, 2026,  https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/41047/State_Visit_of_President_of_Republic_of_Korea_HE_Lee_Jae_Myung_to_India_April_1921_2026. 

[28]“List of Outcomes: State Visit of President of Republic of Korea to India (April 19-21, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, April 20, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/41062/List_of_Outcomes_State_Visit_of_President_of_Republic_of_Korea_to_India_April_1921_2026. 

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