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जुलाई 2026

पीडीएफ

इस अंक की झलकियां

मानसून सत्र 2026 प्रारंभ

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई, 2026 को शुरू हुआ और इसमें 19 बैठकें होनी हैं। इस सत्र में अब तक पांच बिल पेश किए गए हैं और दो बिल पारित हो चुके हैं।

2026-27 की पहली तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति 3.9%

सीपीआई मुद्रास्फीति 2025-26 की इसी तिमाही (2.9%) के मुकाबले ज़्यादा थी। 2026-27 की पहली तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति 4.8% थी, जबकि थोक मुद्रास्फीति 9.3% थी।

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पारित

बिल अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर जुर्माने की राशि बढ़ाता है और स्पेशल टास्क फोर्स और स्पेशल फास्ट-ट्रैक अदालत का प्रावधान करता है। इसके तहत जांच और सुनवाई एक तय समय-सीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पेश

बिल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 33 से बढ़ाकर 37 करता है। यह सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 को रद्द करता है।

एमएसएमई एक्ट में संशोधन करने वाला बिल पेश

बिल केंद्र सरकार को एमएसएमई के ​​तौर पर उद्यमों को वर्गीकृत करने के लिए सीमाएं तय करने का अधिकार देता है, जो (i) संयंत्र और मशीनरी या उपकरणों में निवेश और (ii) टर्नओवर पर आधारित होंगी।

वीबी-जी राम जी एक्ट, 2025 के तहत नियम अधिसूचित

नियमों के तहत सभी तरह के वेतन और बेरोजगारी भत्ते के भुगतान के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण अनिवार्य है।

कैबिनेट ने Semicon 2.0 को मंजूरी दी

सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देने वाली इस योजना का बजट 1,27,500 करोड़ रुपए है।

केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना- समुद्र मंथन को मंजूरी दी

84,084 करोड़ रुपए के परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य देश के भीतर तेल और गैस की खोज एवं उत्पादन को बढ़ावा देना है।

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) बिल, 2026 पारित

बिल राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) के अपमान पर दंड का प्रावधान करता है।

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026 पेश

यह बिल लोकसभा में पारित हो गया। यह जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में दो वर्ष से ज़्यादा की देरी के मामले में प्रक्रिया को बदलता है। अब इसके लिए आदेश केवल फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ही जारी कर सकते हैं।

कैबिनेट ने कई योजनाओं को मंजूरी दी

इनमें मोबाइल फ़ोन मैन्यूफैक्चरिंग योजना और यूरिया के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति 2026 शामिल है, साथ ही पीएम-किसान (हर वर्ष 6,000 रुपए का नकद हस्तांतरण) को 2030-31 तक बढ़ाया गया है।

संसद की स्टैंडिंग कमिटीज़ ने रिपोर्ट सौंपी

इनमें खाद्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण, रक्षा ऑफसेट का प्रबंधन और वॉश्ड कोल उत्पादन बढ़ाना शामिल है।

 

संसद

Niranjana Menon (niranjana@prsindia.org)

मानसून सत्र 2026 शुरू हुआ; पांच बिल पेश, दो बिल पारित

Niranjana S Menon (niranjana@prsindia.org)

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई, 2026 को शुरू हुआ। इस सत्र में 19 बैठकें होने की उम्मीद है और यह 13 अगस्त, 2026 को समाप्त होगा।[1] 

दो लंबित बिल - एक उच्च शिक्षा संबंधी रेगुलेटर बनाने के लिए और दूसरा विदेशी अंशदान रेगुलेशन एक्ट, 2010 में संशोधन करने के लिए- इस सत्र में विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध हैं। अब तक इनमें से किसी पर भी चर्चा नहीं हुई है। पांच बिल पेश करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध हैं। इनमें से चार पेश किए जा चुके हैं: (i) सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026, (ii) राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) बिल, 2026, (iii) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026 और (iv) जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026। पांचवां बिल इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में संशोधन करने वाले एक अध्यादेश का स्थान लेगा।

इस सत्र में अब तक दो बिल पारित किए गए हैं। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) बिल, 2026 के तहत 'वंदे मातरम' गाने से रोकना एक अपराध माना जाएगा। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 में 2024 के कानून में संशोधन करके फास्ट-ट्रैक अदालत बनाने और सज़ा बढ़ाने का प्रावधान है। लोकसभा में पारित हुए जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026 के अनुसार, जन्म या मृत्यु के दो वर्ष बाद पंजीकरण कराने के लिए ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट के आदेश की ज़रूरत होगी।

मानसून सत्र 2026 के लेजिसलेटिव एजेंडा पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें। 

मानसून सत्र 2026 के दौरान विधायी गतिविधियों पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें।

मैक्रोइकोनॉमिक विकास

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

2026-27 की पहली तिमाही में सीपीआई मुद्रास्फीति औसतन 3.9% रही

2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति 3.9% थी, जो 2025-26 की इसी तिमाही (2.9%) से ज़्यादा थी।[2] 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में मुद्रास्फीति 3.1% थी।

2026-27 की पहली तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति औसतन 4.8% रही, जो 2025-26 की इसी तिमाही (0.6%) से ज़्यादा थी। 2025-26 की चौथी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति 3.1% थी।

2026-27 की पहली तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति औसतन 9.3% रही, जो 2025-26 की इसी तिमाही (0%) से ज़्यादा थी।[3] 2025-26 की पहली तिमाही के दौरान डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति निम्नलिखित थी: (i) अप्रैल में 0.6%, (ii) मई में -0.2%, और (iii) जून में -0.4%। 2025-26 की चौथी तिमाही में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति 2.4% थी।

रेखाचित्र 1: 2026-27 की पहली तिमाही में मासिक मुद्रास्फीति (% बदलाव, वर्ष-दर-वर्ष)

 

नोट: सीपीआई और खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े 2024 को आधार वर्ष मानने वाली नई श्रृंखला से हैं, जबकि डब्ल्यूपीआई के आंकड़े 2022-23 को आधार वर्ष मानने वाली नई श्रृंखला से हैं। स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय; पीआरएस।

शिक्षा

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 संसद में पारित

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 को 27 जुलाई, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया।[4]  संसद ने 30 जुलाई, 2026 को बिल को पारित कर दिया। बिल सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट, 2024 में संशोधन का प्रयास करता है। इस एक्ट का उद्देश्य निर्दिष्ट सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरणों द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकना है जैसे संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी।[5]  अनुचित साधनों में प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी लीक करना, परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों की सहायता करना, दूसरे के स्थान पर परीक्षा देना, अनाधिकृत संवाद और परीक्षा दस्तावेजों में छेड़छाड़ करना शामिल हैं। प्रमुख संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • दंड में वृद्धि: यह बिल कई तरह के अपराधों के लिए कारावास की सज़ा और जुर्माने की राशि को बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, मौजूदा कानून के तहत, किसी व्यक्ति द्वारा गलत तरीकों का इस्तेमाल करने पर तीन से पांच साल तक का कारावास और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। यह बिल इस सज़ा को बढ़ाकर पांच से 10 साल तक का कारावास और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना कर देता है। कानून में गलत तरीकों का इस्तेमाल करने वाले सेवा प्रदाता पर एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। यह बिल इस जुर्माने को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपए तक करता है।

  • सेवा प्रदाता पर रोक: यह कानून किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी लेने से उन सेवा प्रदाताओं पर चार वर्ष की रोक लगाता है जो अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। यह बिल प्रतिबंध की अवधि को बढ़ाकर आठ वर्ष करता है।

  • जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स: इस कानून के तहत केंद्र सरकार अपराधों की जांच किसी भी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप सकती है। यह बिल केंद्र सरकार को अपराधों की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार देता है। बिल में यह भी कहा गया है कि अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।

  • स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट: इस बिल के तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए एक सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के तौर पर निर्दिष्ट करना होगा। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट, भारतीय न्याय संहिता, 2023 या दूसरे कानूनों के तहत जुड़े अपराधों की सुनवाई भी उसी ट्रायल में करेंगे। चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा हो जाना चाहिए।

  • अपील: बिल में यह भी कहा गया है कि स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों, सज़ा या आदेशों के खिलाफ अपील उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों की पीठ के सामने की जाएगी। अपील को, जहां तक हो सके, स्वीकार किए जाने के तीन महीने के भीतर निपटाया जाना चाहिए।

बिल पर पीआरएस विश्लेषण के लिए कृपया यहां देखें।

क्रेडिट गारंटी फंड योजना अधिसूचित

Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)

दक्षता विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने दक्षता विकास के लिए क्रेडिट गारंटी फंड योजना की घोषणा की है।[6]  यह मूल योजना का ही एक बदला हुआ रूप है और अब यही लागू होगी। इस योजना को स्किल इंडिया मिशन के तहत एक क्रेडिट गारंटी योजना के तौर पर शुरू किया गया है, जिसका प्रबंधन राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी करती है। इसका उद्देश्य संस्थानों को दक्षता विकास कोर्स के लिए ऋण देने में मदद करना है, जिसमें ऋण न चुका पाने (डिफ़ॉल्ट) का जोखिम आपस में बांटा जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • ब्याज की दर की सीमा: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसीज़) और एनबीएफसी-सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए ब्याज दर की अधिकतम सीमा वार्षिक 21% तय की गई थी। अब इस सीमा को घटाकर 20% कर दिया गया है। अधिसूचित कमर्शियल बैंकों (जिनमें लघु वित्त बैंक भी शामिल हैं) के लिए ब्याज दर की सीमा उनके एक्सटेंडेड बेंचमार्क लेंडिंग रेट (ईबीएलआर) से 1.5% ज़्यादा तय की गई थी। अब लघु वित्त बैंकों के लिए ब्याज दर की अधिकतम सीमा वार्षिक 20% होगी।

  • दावा भुगतान की सीमा और ऋण की सीमा: इस योजना के तहत, संबंधित वित्तीय वर्ष में दिए गए कुल ऋण का अधिकतम दावा भुगतान 20% से घटाकर 15% कर दिया गया है। यह बदली हुई सीमा 2026-27 से लागू होगी। अधिकतम ऋण की सीमा 1.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 7.5 लाख रुपए कर दी गई है।

  • टियर-आधारित गारंटी कवरेज: फंड सभी पात्र दक्षता ऋण के लिए डिफ़ॉल्ट राशि का 75% एक समान गारंटी कवर देता था। परिवर्तित योजना के अनुसार, लोन स्लैब के आधार पर कवरेज टियर-आधारित होगा। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) 5,000 रुपए से 4 लाख रुपए के बीच के ऋण के लिए 75%, और (ii) 4 लाख रुपए से 7.5 लाख रुपए के बीच के ऋण के लिए 70%।

  • लचीली लॉक-इन अवधि: योजना में शुरू में किसी भी ऋण राशि के लिए 12 महीने की एक समान लॉक-इन अवधि तय की गई थी। इसे अब दो-टियर वाली व्यवस्था से बदल दिया गया है: (i) 3 लाख रुपए तक के ऋण के लिए 6 महीने, और (ii) 3 लाख रुपए से ज़्यादा के ऋण के लिए 12 महीने।

  • ऋण चुकाने की अवधि के स्लैब: परिवर्तित योजना में ऋण चुकाने की अवधि इस तरह तय की गई है: (i) 50,000 रुपए तक के ऋण के लिए तीन साल, (ii) एक लाख रुपए तक के ऋण के लिए पांच साल, और (iii) एक लाख रुपए से ज़्यादा के ऋण के लिए सात साल।

  • कवर होने वाले कोर्स को बढ़ाया गया: पुरानी योजना में कवरेज केवल नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एसएसक्यूएफ) से जुड़े कोर्स तक ही सीमित था। परिवर्तित योजना में अब स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) पर मौजूद संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे उन कोर्स को भी शामिल किया गया है जो एसएसक्यूएफ से जुड़े नहीं हैं। 

 

कानून और न्याय

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पेश

Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया।[7] यह बिल 16 मई, 2026 को जारी सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 का स्थान लेने का प्रयास करता है।[8] यह सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) एक्ट, 1956 में संशोधन करता है।[9]  बिल सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रयास करता है।

बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।

ड्राफ्ट एडवोकेट (संशोधन) बिल टिप्पणियों के लिए जारी

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

विधि एवं न्याय मंत्रालय ने एडवोकेट्स (संशोधन) बिल, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।[10]  यह एडवोकेट्स एक्ट, 1961 में संशोधन करता है।[11]  यह एक्ट वकीलों को मान्यता देता है, बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया बनाता है और अदालत में प्रैक्टिस के लिए नियम तय करता है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • विदेशी वकीलों और फर्म्स का रेगुलेशन: यह कानून विदेशी अर्हता वाले वकीलों को बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (बीसीआई) में पंजीकरण कराने की अनुमति देता है। ड्राफ्ट बिल में यह भी जोड़ा गया है कि विदेशी अर्हता वाले वकीलों को राज्य की वकीलों की सूची (रोल) में भी एडवोकेट के तौर पर शामिल किया जा सकता है।

  • ड्राफ्ट बिल के तहत विदेशी लॉ फ़र्म्स और विदेशी वकीलों को बीसीआई या स्टेट बार काउंसिल के पास रजिस्टर कराना ज़रूरी है। इन विदेशी फ़र्म्स और वकीलों के काम का दायरा केवल अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक आर्बिट्रेशन तक ही सीमित रहेगा। उन्हें किसी भी भारतीय अदालत या ट्रिब्यूनल में पेश होने की अनुमति नहीं होगी।

  • कल्याण और सामाजिक सुरक्षा: यह कानून बार काउंसिल्स को कल्याणकारी कामों के लिए फंड बनाने की अनुमति देता है। संशोधनों के ज़रिए इसका विस्तार किया गया है, ताकि बीमा, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और स्टाइपेंड के लिए ट्रस्ट और फंड बनाए जा सकें। इनमें पेशेवर विकास कार्यक्रम, जैसे कि नए कानून, एआई और अंतरराष्ट्रीय प्रैक्टिस से जुड़े प्रोग्राम्स शुरू करने का भी प्रावधान है।

  • महिला वकीलों के लिए आरक्षण: इस कानून में राज्य के आकार के आधार पर 15, 20 या 25 चुने हुए सदस्यों वाली स्टेट बार काउंसिल का प्रावधान है। संशोधन के ड्राफ्ट में कुल सदस्यों की संख्या को क्रमशः 15, 21 और 33 करने का प्रस्ताव है, जिसमें महिलाओं के लिए क्रमशः 2, 3 और 4 सीटें आरक्षित की गई हैं।

  • इलेक्शन ट्रिब्यूनल: इस ड्राफ़्ट बिल में एक इलेक्शन ट्रिब्यूनल बनाने का प्रावधान है। इसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश करेंगे। यह ट्रिब्यूनल एसबीसीज़ के चुनाव से जुड़े उन विवादों की देखरेख करेगा जिन्हें बीसीआई छह महीने के भीतर इसके पास भेजेगा।

  • दंड: इस कानून में गैर-कानूनी तरीके से वकालत करने वाले लोगों के लिए छह महीने तक के कारावास की सज़ा का प्रावधान है। ड्राफ्ट बिल में इसे बढ़ाकर तीन साल तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान किया गया है।

 

उद्योग

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

एमएसएमई एक्ट में संशोधन करने वाला बिल पेश

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया। बिल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास एक्ट, 2006 में संशोधन का प्रयास करता है। इस कानून का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईज़) को बढ़ावा देना और उनके विकास में सहायता करना है।

  • एमएसएमईज़ का वर्गीकरण: यह एक्ट उद्यमों को एमएसएमईज़ के ​​तौर पर इस आधार पर वर्गीकृत करता है कि उनमें कितना निवेश किया गया है: (i) मैन्यूफैक्चरिंग के मामले में संयंत्र और मशीनरी में, और (ii) सेवा के मामले में उपकरणों में। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के बीच वर्गीकरण के लिए निवेश की सीमाएं भी तय करता है। बिल इन सीमाओं को हटाता है और मानदंडों में बदलाव करता है। यह केंद्र सरकार को उद्यमों को एमएसएमई के ​​तौर पर वर्गीकृत करने का अधिकार देता है जो इन आधार पर होगा: (i) संयंत्र और मशीनरी या उपकरण में निवेश और (ii) टर्नओवर। इन सीमाओं को अधिसूचना के ज़रिए तय किया जाएगा।

  • सीपीएसईज़ के लिए TReDS के ज़रिए निपटान अनिवार्य: बिल में यह प्रावधान है कि प्रत्येक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (सीपीएसई) के लिए एमएसएमईज़ से वस्तुओं या सेवाओं की खरीद के सभी इनवॉयस का निपटान ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्म के ज़रिए करना अनिवार्य होगा। TReDS एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है जिसे आरबीआई रेगुलेट करता है। यह प्लेटफॉर्म एमएसएमईज़ को खरीदारों से मिलने वाले इनवॉयस के बदले फाइनांसरों से धन जुटाने की सुविधा देता है। केंद्र और राज्य सरकारें सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, प्राधिकरणों या संस्थाओं के लिए TReDS के ज़रिए चालान का निपटान अनिवार्य कर सकती हैं।

  • अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाना: बिल में कहा गया है कि रजिस्ट्रेशन के लिए जान-बूझकर गलत जानकारी देने पर निम्नलिखित सज़ा हो सकती है: (i) पहली बार ऐसा करने पर चेतावनी, (ii) इसके बाद नियम तोड़ने पर 1,000 रुपए से 50,000 रुपए तक का जुर्माना। अधिकारियों द्वारा मांगी गई जानकारी न देने पर भी यही जुर्माना लगेगा। मौजूदा कानून के तहत इस अपराध के लिए निम्नलिखित जुर्माना लगता है: (i) पहली बार दोषी पाए जाने पर 1,000 रुपए तक, और (ii) उसके बाद दोषी पाए जाने पर 1,000 रुपए से 10,000 रुपए के बीच।

  • इस कानून के तहत खरीदार को वार्षिक खातों में एमएसएमई सप्लायर्स के बकाये भुगतान की रिपोर्ट देनी होगी। इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर कम से कम 10,000 रुपए का जुर्माना लगता है। बिल में इसकी जगह ये प्रावधान किए गए हैं: (i) पहली बार उल्लंघन पर चेतावनी, (ii) दूसरी बार उल्लंघन पर 10,000 रुपए से 50,000 रुपए के बीच जुर्माना, और (iii) इसके बाद उल्लंघन करने पर 50,000 रुपए से एक लाख रुपए के बीच जुर्माना।

बिल पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए 'ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम' का उपयोग अनिवार्य

केंद्र सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसईज़) के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे सभी इनवॉइस का निपटान 'ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम' (TReDS) के ज़रिए करें।[12]  सीपीएसईज़ के ऑडिटर, कम से कम एक TReDS प्लेटफ़ॉर्म पर रजिस्ट्रेशन होने पर एक सर्टिफ़िकेट देंगे।

 

ग्रामीण विकास

Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)

वीबी-जी राम जी एक्ट, 2025 के तहत नियम अधिसूचित

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी- जी राम जी एक्ट, 2025 के तहत नियमों के दो सेट अधिसूचित किए हैं।[13],[14]  इस एक्ट को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट (मनरेगा), 2005 के स्थान पर लाया गया है।[15]  अधिसूचित नियम इस एक्ट के तहत मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते के भुगतान का प्रावधान करते हैं और मनरेगा योजना से इस नई व्यवस्था में सुचारू बदलाव के लिए नियम भी तय करते हैं। मुख्य विशेषताओं में निम्न शामिल हैं:

  • मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते का भुगतान: मज़दूरी और बेरोज़गारी भत्ते का भुगतान लाभार्थियों के बैंक या पोस्ट ऑफ़िस खातों में किया जाएगा। नकद भुगतान की मनाही है। हालांकि केंद्र सरकार विशेष स्थिति में इसमें छूट दे सकती है।

  • मनरेगा के तहत देनदारियों का निपटान: राज्य सरकारों को 30 जून, 2026 तक की मनरेगा देनदारियों की जांच करनी होगी और स्वीकार्य दावों का निपटान करना होगा। राज्यों को नियम लागू होने के 180 दिनों के भीतर ऑडिट किए गए उपयोग प्रमाण-पत्र जमा करने होंगे; इस समय-सीमा को 90 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। केंद्र सरकार मौजूदा प्रक्रियाओं के अनुसार स्वीकार्य देनदारियों के लिए अपना हिस्सा जारी करेगी।

  • ट्रांज़िशनल प्रावधान: केंद्र सरकार 30 जून, 2026 तक की मौजूदा देनदारियों सहित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के संचालन के लिए फ़ंड देना जारी रखेगी। मनरेगा के तहत चल रहे मौजूदा कार्य और ईकेवाईसी-सत्यापित जॉब कार्ड नए एक्ट के तहत भी जारी रहेंगे। जिन परिवारों ने चालू वित्तीय वर्ष में पहले ही योजना के तहत रोज़गार का लाभ उठा लिया है, वे उस वित्तीय वर्ष के शेष बचे गारंटीकृत दिनों के लिए पात्र होंगे। 2005 के एक्ट के तहत बनाई गई सभी चल और अचल संपत्तियां और फ़िज़िकल/डिजिटल रिकॉर्ड नए एक्ट के तहत अधिकारियों को सौंप दिए जाएंगे।

 

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी

Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)

कैबिनेट ने Semicon 2.0 को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1,27,500 करोड़ रुपए के बजट के साथ 'सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 2.0' (Semicon 2.0) को मंजूरी दी।[16]  यह भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन के तहत सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम का दूसरा चरण है।[17]  इसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास को बढ़ावा देना है। यह छह स्तंभों पर आधारित होगा। ये इस प्रकार हैं: (i) चिप डिज़ाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी बनाने में मदद, (ii) सेमीकंडक्टर मशीनों और मैटीरियल के अनुसंधान और मैन्यूफैक्चरिंग के लिए प्रोत्साहन, (iii) सेमीकंडक्टर फ़ैब्रिकेशन सुविधाएं लगाने में मदद, (iv) सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग क्षमताओं का विस्तार, (v) एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग तकनीक के अनुंधान और विकास में मदद, और (vi) देश में सेमीकंडक्टर शिक्षा और श्रमबल विकास को मज़बूत करना।

Semicon 1.0 के तहत 12 मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स को मंजूरी दी गई है। इनमें से तीन ने 2026 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। इसके अलावा, स्टार्ट-अप्स और एमएसएमईज़ के 24 सेमीकंडक्टर डिज़ाइन प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहयोग के लिए मंजूरी दी गई है।

कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग योजना को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपए के बजट वाली मोबाइल फ़ोन मैन्यूफैक्चरिंग योजना को मंजूरी दी है।[18] इस योजना का उद्देश्य देश में मोबाइल फ़ोन की मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाना और भारतीय ब्रांड बनाना है। इसके तहत भारत में मोबाइल फ़ोन बनाने के लिए पात्र बिक्री पर 2.25% से 5% तक का प्रोत्साहन सहयोग दिया जाएगा। मुख्य घटकों या सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग से जुड़े होने पर 1.5% तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। साथ ही, भारतीय ब्रांड बनाने के लिए उत्पाद के डिज़ाइन और अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी पात्र बिक्री पर 3% का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह योजना 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी।

 

गृह मामले

संसद ने राष्ट्रीय गीत को अपमानित करने पर दंड देने वाला बिल पारित किया

Davis Joseph (davis@prsindia.org)

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) बिल, 2026 को 24 जुलाई, 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण एक्ट, 1971 में संशोधन करना है। यह कानून राष्ट्रीय ध्वज, भारत के संविधान और राष्ट्रगान के अपमान के लिए सज़ा का प्रावधान करता है।

यह कानून निम्नलिखित पर प्रतिबंध लगाता है: (i) राष्ट्रगान (जन गण मन) के गायन को जानबूझकर रोकना. या (ii) राष्ट्रगान गाने वाली सभा में रुकावट पैदा करना। ऐसे अपराधों के लिए तीन वर्ष के कारावास, जुर्माने या दोनों सज़ा का प्रावधान है। दूसरी बार या उसके बाद जितनी बार भी अपराध साबित होगा, कम से कम एक वर्ष का कारावास होगा। यह बिल इन प्रावधानों को राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) पर भी लागू करता है।

बिल पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण एक्ट, 1969 में संशोधन करने वाला बिल पारित किया

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026 को 29 जुलाई, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया।[19]  इसे 31 जुलाई, 2026 को लोकसभा ने पारित कर दिया। बिल जन्म और मृत्यु पंजीकरण एक्ट, 1969 में संशोधन का प्रयास करता है।[20] 

इस एक्ट के तहत, अगर किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु की जानकारी, उस घटना के एक वर्ष बाद रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसे पंजीकृत करने के लिए एक आदेश की ज़रूरत होती है। यह आदेश निम्नलिखित अधिकारी जारी कर सकते हैं: (i) डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, (ii) सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट, या (iii) डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट। जानकारी की सच्चाई की जांच करने और निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद यह आदेश जारी किया जा सकता है। लेकिन बिल में यह प्रावधान है कि अगर दो वर्ष से ज़्यादा की देरी होती है, तो आदेश केवल फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ही जारी कर सकते हैं।

 

वित्त

विदेशी इक्विटी निवेश नियमों को सुव्यवस्थित करने के संबंध में टिप्पणियां आमंत्रित

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (विदेशी निवेश) नियम, 2026 के ड्राफ़्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[21],[22]  ये नियम विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर ऋण उपाय) नियम, 2019 (एनडीआई नियमों) का स्थान लेंगे।[23] एनडीआई नियम भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों द्वारा भारतीय कंपनियों में इक्विटी निवेश से संबंधित हैं। मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:  

  • एफडीआई और एफपीआई की सीमाएं: एनडीआई नियमों के तहत, एफडीआई का मतलब है: (i) किसी गैर सूचीबद्ध भारतीय कंपनी की इक्विटी में, या (ii) किसी सूचीबद्ध भारतीय कंपनी के पेड-अप इक्विटी कैपिटल के 10% या उससे ज़्यादा हिस्से में विदेशी निवेश। किसी सूचीबद्ध भारतीय कंपनी के पेड-अप इक्विटी कैपिटल के 10% से कम विदेशी निवेश को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) माना जाता है। एफडीआई और एफपीआई पर अलग-अलग रेगुलेटरी नियम लागू होते हैं, जैसे कि निवेश की सीमाएं। इसके बजाय, नियमों के ड्राफ्ट में यह प्रावधान है कि एफडीआई का मतलब किसी कंपनी या एलएलएपी की इक्विटी में 10% या उससे ज़्यादा का विदेशी निवेश होगा। किसी कंपनी या एलएलपी में इस सीमा से कम निवेश को एफपीआई माना जाएगा।

  • आरबीआई और डीपीआईआईटी की शक्तियां: एनडीआई नियम आरबीआई को इन नियमों को लागू करने का अधिकार देते हैं। ड्राफ्ट नियमों में यह प्रावधान बरकरार है। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि डिपार्टमेंट ऑफ़ प्रमोशन ऑफ़ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) विदेशी निवेश नीति की व्याख्या करने और इस संबंध में निर्देश या स्पष्टीकरण जारी करने से जुड़े अधिकारों का इस्तेमाल करेगा। आरबीआई पेमेंट का तरीका, रिपोर्टिंग की ज़रूरतें और कामकाज से जुड़े दूसरे नियमों को निर्दिष्ट करेगा।

31 अगस्त, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजर रेगुलेशंस के संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित कीं

Davis Joseph (davis@prsindia.org)

सेबी ने सेबी (पोर्टफोलियो मैनेजर्स) रेगुलेशंस, 2020 की समीक्षा पर सार्वजनिक परामर्श के लिए एक परामर्श पत्र जारी किया।[24],[25] पोर्टफोलियो मैनेजर (पीएमज़) क्लाइंट के फंड के मैनेजमेंट के बारे में सलाह देते हैं, उसे निर्देशित करते हैं या क्लाइंट की ओर से उसका मैनेजमेंट करते हैं। प्रस्तावित मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:

  • निवेश विकल्पों का विस्तार: रेगुलेशंस पीएमज़ को क्लाइंट के फंड को कुछ खास इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने की अनुमति देते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध और ट्रेड होने वाली प्रतिभूतियां, (ii) मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स, (iii) म्यूचुअल फंड, और (iv) अन्य निर्दिष्ट प्रतिभूतियां। यह परामर्श पत्र इनमें निवेश की अनुमति देने का प्रस्ताव करता है: (i) “सूचीबद्ध होने वाली” प्रतिभूतियां जैसे कि इनिशियल पब्लिक ऑफर (आईपीओ), (ii) निर्दिष्ट विदेशी प्रतिभूतियां, और (iii) गैर सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियां।

  • सिर्फ म्यूचुल फंड वाला फ्रेमवर्क: सेबी ने ऐसी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवा की मांग को पहचाना है जो केवल म्यूचुअल फंड में निवेश करती हैं। यह परामर्श पत्र ऐसी सेवा देने वाली संस्थाओं के लिए अलग पंजीकरण का प्रस्ताव देता है। इसमें ऐसी संस्थाओं के लिए पात्रता के नियमों में ढिलाई देने का भी प्रस्ताव है, जैसे: (i) क्लाइंट के निवेश की न्यूनतम को 50 लाख रुपए से घटाकर 25 लाख रुपए करना, और (ii) आवेदक की न्यूनतम नेट वर्थ को पांच करोड़ रुपए से घटाकर दो करोड़ रुपए करना। इसमें ऐसी संस्थाओं के लिए अनुपालन की ज़रूरतों में भी ढिलाई देने का प्रस्ताव है, जिसमें जानकारी देना, पात्रता और चार्ज व फीस शामिल हैं।

  • अनुपालन में सुगमता संबंधी उपाय: यह परामर्श पत्र नियमों का अनुपालन आसान बनाने के लिए कुछ उपाय सुझाता है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) पीएमज़ को क्लाइंट्स के साथ डिजिटल फ़ॉर्मेट में डिस्क्लोज़र डॉक्यूमेंट्स शेयर करने की अनुमति देना, (ii) पीएमज़ की नेट वर्थ को फिर से परिभाषित करना ताकि उसमें प्रतिभूति प्रीमियम रिज़र्व शामिल हो और दिए गए ऋण व अग्रिम को बाहर रखा जाए, और (iii) सेबी को कॉरपोरेट गवर्नेंस रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा को 30 दिन से बढ़ाकर 60 दिन करना।

  • क्लाइंट्स के लिए डीमैट खातों की पोर्टेबिलिटी की अनुमति: सेबी ने गौर किया कि पीएमज़ के बीच स्विच करते समय निवेशकों को नया डीमैट अकाउंट खोलना पड़ता है। यह पेपर डीमैट अकाउंट्स की पोर्टेबिलिटी की सुविधा देने का प्रस्ताव करता है।

  • ग्लोबल फंड मैनेजमेंट: इस परामर्श पेपर में प्रस्ताव है कि सेबी के साथ रजिस्टर्ड पात्र फंड मैनेजरों को विदेशी निवेशकों के विदेशी फंड को मैनेज करने की अनुमति दी जाए।

11 अगस्त, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

इरडाई ने बीमा कानूनों में 2025 के संशोधनों को लागू करने के लिए नियम अधिसूचित किए

Davis Joseph (davis@prsindia.org)

भारतीय बीमा रेगुलेटरी और विकास अथॉरिटी (इरडाई) ने विभिन्न विषयों पर नियम अधिसूचित किए।[26],[27],[28],[29],[30],[31],[32]  ये नियम निम्नलिखित से संबंधित हैं: (i) बीमा कंपनियों का पंजीकरण, पूंजी संरचना, शेयरों का हस्तांतरण और उनका विलय, (ii) बीमा कंपनियों के एक्चुअरी, फाइनांस और निवेश से जुड़े कार्य, (iii) इंश्योरेंस इंटरमीडियरी, (iv) पॉलिसीहोल्डर्स एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड, और (v) जुर्माना तय करना। इरडाई ने बताया कि ये नियम सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) एक्ट, 2025 के प्रावधानों को लागू करते हैं।[33] अधिसूचित नियमों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • एक्चुअरीज़: इस कानून के तहत हर बीमा कंपनी के लिए ज़रूरी है कि वह किसी एक्चुअरी से अपने बिज़नेस की आर्थिक स्थिति की जांच करवाए। नियमों में यह भी कहा गया है कि हर री-इंश्योरर को लाइफ़ री-इंश्योरेंस और जनरल री-इंश्योरेंस के लिए अलग-अलग एक्चुअरी नियुक्त करने होंगे। रेगुलेशंस में एक्चुअरी की नियुक्ति के लिए पात्रता, उनके अधिकार और कार्य, और रिपोर्टिंग के तरीके जैसे विवरण भी निर्दिष्ट हैं।

  • विलय: ये रेगुलेशंस गैर-बीमा व्यवसाय को बीमा व्यवसाय के साथ विलय या हस्तांतरित करने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करते हैं। मुख्य शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) विलय से पैदा होने वाली किसी भी देनदारी को पूरा करने के लिए पॉलिसीधारकों के फंड का इस्तेमाल करने पर रोक, (ii) ट्रांसफर लेने वाली बीमा कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे विलय से पॉलिसीधारकों के हितों पर कोई बुरा असर न पड़े।

  • पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा के लिए फंड: यह एक्ट पॉलिसीधारकों की शिक्षा, उनके हितों की सुरक्षा और अन्य तय उद्देश्यों के लिए 'पॉलिसीहोल्डर्स एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड' बनाता है। रेगुलेशंस के अनुसार, इस फंड का इस्तेमाल इन कार्यों के लिए किया जाएगा: (i) शिक्षा, जागरूकता और समावेशन, (ii) शिकायत निवारण में मदद देना, (iii) बिना दावे वाली रकम की रिकवरी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, और (iv) टेक्नोलॉजी पर आधारित पॉलिसीधारक सेवाएं।

वित्त संबंधी स्टैंडिंग कमिटी ने प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025 पर रिपोर्ट सौंपी

Davis Joseph (davis@prsindia.org)

वित्त से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री भर्तृहरि महताब) ने प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025 पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[34] यह संहिता दिसंबर 2025 में लोकसभा में पेश की गई थी। इसका उद्देश्य निम्नलिखित कानूनों को निरस्त करके उनके स्थान पर नए कानून लाना है: (i) प्रतिभूति अनुबंध (रेगुलेशन) एक्ट, 1956, (ii) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) एक्ट, 1992, और (iii) डिपॉजिटरी एक्ट, 1996।[35] संहिता को दिसंबर 2025 में लोकसभा में पेश किया गया था। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्न शामिल हैं:

  • शक्तियां सौंपना: कमिटी ने गौर किया कि बिल के कई प्रावधान सेबी को व्यापक विवेकाधीन शक्तियां प्रदान करते हैं। कमिटी ने यह भी पाया कि पर्याप्त मार्गदर्शनों के अभाव में ये शक्तियां कानूनी अनिश्चितता और असंगत व्याख्या पैदा कर सकती हैं और इससे रेगुलेटरी निश्चितता कम हो सकती है। डेलिगेटेड लेजिसलेशन (जब विधायिका कानून बनाने की अपनी कुछ शक्ति किसी सरकारी विभाग को सौंप देती है) को आवश्यक विधायी नीति या मौलिक कानूनी परिणामों के मामलों को तय नहीं करना चाहिए। कमिटी ने सुझाव दिया कि रेगुलेशन बनाने की शक्तियों से जुड़े हर प्रावधान में यह स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए कि डेलिगेशन यानी शक्तियां सौंपे जाने का दायरा, उद्देश्य और सीमाएं क्या हैं। यह संहिता सेबी को यह अधिकार भी देती है कि वह रजिस्ट्रेशन और निगरानी का काम मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (एमआईआईज़) और सेल्फ रेगुलेटरी संगठनों को सौंप सकता है। एमआईआईज़ में स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशंस और डिपॉजिटरीज़ शामिल हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि इस संहिता में निम्नलिखित बातें स्पष्ट होनी चाहिए: (i) सौंपे जाने वाली शक्तियों का स्वरूप और सीमा और उनके नियम, (ii) इन संस्थाओं की जवाबदेही का ढांचा, (iii) उनके फैसलों की समीक्षा करने का तरीका, और (iv) सेबी की निगरानी और देखरेख की शक्तियां।

  • अपराध और दंड: कमिटी के अनुसार, हालांकि संहिता का उद्देश्य आपराधिक ज़िम्मेदारी को केवल गंभीर और योजनाबद्ध कदाचार तक ही सीमित रखना है, फिर भी संहिता में बताए गए कुछ दीवानी उल्लंघन और क्रिमिनल अपराध आपस में मेल खाते (ओवरलैप करते) हैं। इससे अनिश्चित प्रवर्तन (लागू होने में अनिश्चितता) और कानूनी मुकदमों का जोखिम बढ़ सकता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि अपराधों से जुड़ी इन धाराओं का पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चर) किया जाए और इन्हें पूरी तरह दोबारा लिखा (रीड्राफ्ट किया) जाए।

  • एसएटी में अपील: कमिटी ने गौर किया कि जो आदेश खास तौर पर इसी सूची में शामिल नहीं हैं, जिनमें कुछ अंतरिम आदेश भी शामिल हैं, वे एसएटी के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो सकते हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि सेबी या एडजुडिकेटिंग अधिकारी के आदेश से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को एसएटी में अपील करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।  संहिता के पीआरएस विश्लेषण के लिए कृपया देखें।

 

परिवहन

Davis Joseph (davis@prsindia.org)

तटवर्ती और उससे जुड़ी भूमि में सुधार

केंद्रीय कैबिनेट ने बंदरगाह आधारित उद्योगों को तटवर्ती और संबद्ध भूमि आवंटन नीति, 2016 में संशोधन किया है।[36]  यह नीति पात्र संस्थाओं को प्रमुख बंदरगाहों पर समर्पित सुविधाओं को विकसित करने और उनका प्रबंधन करने की अनुमति देने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करती है। प्रमुख बंदरगाह ऐसे बंदरगाह होते हैं जिनका प्रबंधन पूरी तरह से केंद्र सरकार करती है। संशोधित नीति के मुख्य प्रस्तावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बिना नए टेंडर के, समझौतों का नवीनीकरण: 2016 की नीति में समर्पित सुविधाओं को विकसित करने के लिए बंदरगाह प्राधिकरण और पात्र संस्थाओं के बीच अधिकतम 30 साल के समझौते का प्रावधान है। समझौता खत्म होने के बाद इन सुविधाओं के लिए नया टेंडर निकालना ज़रूरी होता है। परिवर्तित नीति बंदरगाह प्राधिकरण को मौजूदा संस्थाओं के साथ समझौते को बिना नए टेंडर के 30 साल तक नवीनीकृत या बढ़ाने की अनुमति देती है। नवीनीकरण या तो मौजूदा बाजार दर पर होगा या मौजूदा समझौते के तहत देय राजस्व पर—इनमें से जो भी ज़्यादा हो।

  • प्रतिस्पर्धी नीलामी के बिना तटवर्ती और संबद्ध भूमि का आवंटन: मौजूदा नीति के तहत, सरकारी संस्थाओं समेत सभी संस्थाओं को तटवर्ती और उससे जुड़ी भूमि के आवंटन के लिए प्रतिस्पर्धी बोली में हिस्सा लेना ज़रूरी है। नई नीति में इन इलाकों को बिना प्रतिस्पर्धी बोली के पात्र सरकारी संस्थाओं को आवंटित करने की अनुमति दी गई है। कंसेशन अधिसूचित किए गए न्यूनतम मूल्य पर दिए जाएंगे। पात्र सरकारी संस्थाओं में केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, तेल और गैस जैसे क्षेत्र में सरकार द्वारा नियंत्रित संयुक्त उद्यम और पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय द्वारा अधिसूचित अन्य संस्थाएं शामिल हैं।

  • कार्गो प्रोफाइल में संशोधन: 2016 की नीति के तहत, हैंडल किए जाने वाले कार्गो के प्रकार में बदलाव करने के लिए बंदरगाह प्राधिकरण की पहले से मंजूरी लेनी ज़रूरी थी। नई नीति में तय लॉक-इन अवधि के बाद हैंडल किए जाने वाले कार्गो के प्रकार को बदलने की अनुमति है। हालांकि अगर कानून में किसी बदलाव के कारण ऐसा करना जरूरी हो जाता है तो यह बदलाव तुरंत किया जा सकता है।

रेलवे में सुधारों की घोषणा

रेल मंत्रालय ने माल ढुलाई के कामकाज, वैगन डिज़ाइन और कर्मचारियों के कौशल विकास से जुड़े आठ सुधारों की घोषणा की है।[37]  मुख्य सुधारों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ठेकेदारों से जुड़े सुधार: रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के ठेकेदारों को कॉन्ट्रैक्ट के तहत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करनी होती है। यह रकम रनिंग बिलों से कटौती करके वसूली जाती है। संशोधित प्रावधान के तहत, सिक्योरिटी की रकम कॉन्ट्रैक्ट शुरू होने के समय ही जमा करनी होगी।

  • रेलवे टेंडर के लिए कॉन्ट्रैक्टर्स को कई पात्रता शर्तें पूरी करनी होती हैं, जैसे कि आर्थिक क्षमता और अनुभव। नए नियम के अनुसार, जिन कॉन्ट्रैक्टर्स पर उनकी नेट वर्थ के 50% से ज़्यादा का कोई कानूनी मामला चल रहा है, वे रेलवे टेंडर में हिस्सा लेने के लिए पात्र नहीं होंगे।

  • वैगन डिज़ाइन: मुख्य रूप से रेल मंत्रालय का रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइज़ेशन वैगन डिज़ाइन करता है। प्रस्तावित बदलाव के तहत, डिज़ाइनर, मैन्यूफैक्चरर और उद्योग भी अपनी खास ज़रूरतों के हिसाब से वैगन डिज़ाइन विकसित कर सकेंगे और उनका प्रस्ताव दे सकेंगे।

  • फ़्लाई ऐश के परिवहन के लिए स्टैंडर्डाइज़्ड कंटेनर: फ़्लाई ऐश का परिवहन आम तौर पर खुले वैगन से किया जाता है। प्रस्तावित बदलाव के अनुसार, परिवहन के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किए गए कंटेनरों का इस्तेमाल किया जाएगा जो इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर स्टैंडर्डाइज़ेशन (आईएसओ) के मानकों को पूरा करते हों। इससे परिवहन प्रक्रिया के दौरान प्रदूषण कम करने और फ़्लाई ऐश की लोडिंग और अनलोडिंग को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

 

कृषि

Davis Joseph (davis@prsindia.org)

कैबिनेट ने यूरिया-2026 के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने यूरिया-2026 के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दी है।[38] इस नीति के तहत यूरिया बनाने वाली नई इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

2012 की नई निवेश नीति 2019 में समाप्त हो गई थी। 2012 की नीति की तुलना में इस नई नीति में मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं: (i) निश्चित और परिवर्तनशील लागतों को अलग करना, (ii) 12% न्यूनतम और 16% अधिकतम सीमा के साथ रिटर्न ऑन इक्विटी बैंड लागू करना, और (iii) चार वर्ष बाद मौजूदा एक्सचेंज रेट के आधार पर निश्चित लागत को INR में बदलना।

केंद्रीय कैबिनेट ने पीएम-किसान योजना को 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने 2026-27 से 2030-31 तक पीएम किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) को जारी रखने को मंजूरी दे दी है।[39] पीएम किसान को फरवरी 2019 में पात्र किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए शुरू किया गया था। इस योजना के तहत, हर लाभार्थी को वर्ष में तीन बराबर किस्तों में 6,000 रुपए दिए जाते हैं। इस योजना के तहत लगभग 9.5 करोड़ लाभार्थी हैं। मंजूरी की अवधि के लिए इस योजना का कुल खर्च 3.2 लाख करोड़ रुपए है।

 

उपभोक्ता मामले

कमिटी ने चीनी की मात्रा के विशेष संदर्भ के साथ पैकेटबंद उत्पादों के रेगुलेशन पर रिपोर्ट सौंपी

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: सुश्री कनिमोझी करुणानिधि) ने बेबी प्रॉडक्ट्स और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की मात्रा के विशेष संदर्भ के साथ पैकेटबंद उत्पादों का रेगुलेशन विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[40]  कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा सुझाए गए वैज्ञानिक मानकों के आधार पर चीनी के स्तर के वर्गीकरण का अनिवार्य ढांचा, (ii) सभी तरह के पैकेटबंद खाद्य के लिए एक समान जानकारी देने और लेबलिंग की ज़रूरतें, (iii) बेबी प्रॉडक्ट्स के पैकेट के सामने यह खुलासा ज़रूरी करना कि वे उस उम्र के बच्चों की रोज़ाना की ऊर्जा की ज़रूरत का कितना प्रतिशत हिस्सा पूरा करते हैं, (iv) बच्चों के पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा की समय-समय पर वैज्ञानिक संस्थाओं (जैसे एफएसएसएआई) द्वारा समीक्षा, और (v) ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म पर बिकने वाले गलत लेबल वाले पैकेटबंद खाद्य उत्पादों की निगरानी के लिए एक तंत्र बनाना।

रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

स्टैंडिंग कमिटी ने खाद्य और सार्वजनिक वितरण के आधुनिकीकरण पर रिपोर्ट सौंपी

Davis Joseph (davis@prsindia.org)

उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: सुश्री कनिमोझी करुणानिधि) ने ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का आधुनिकीकरण: टेक्निकल डेटाबेस को मजबूत करना’ पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[41]  कमिटी ने पीडीएस के आधुनिकीकरण में निम्नलिखित उपलब्धियों पर गौर किया: (i) लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों वाले 20.5 करोड़ राशन कार्ड्स का पूरी तरह से डिजिटलीकरण, (ii) 99.8% राशन कार्ड्स और 99.3% लाभार्थियों की आधार सीडिंग, (iii) 5.51 लाख उचित मूल्य की दुकानों में से लगभग 5.5 लाख दुकानों का ऑटोमेशन और (iv) देशव्यापी पोर्टेबिलिटी। उसने यह भी गौर किया कि 2013 और 2025 के बीच 6.8 करोड़ (फर्जी या अपात्र) राशन कार्ड्स को हटाया गया जिससे सबसिडी के सही लक्ष्यीकरण में सुधार हुआ।

कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) संदिग्ध लाभार्थियों की जांच करने और छूटे हुए पात्र परिवारों को शामिल करने के लिए समय-सीमा के साथ सत्यापन अभियान चलाना, (ii) परिचालनगत चुनौतियों का समाधान करना, जिसमें बुजुर्गों और शारीरिक श्रम करने वालों के मामले में बायोमेट्रिक सत्यापन का फेल होना शामिल है, (iii) चंडीगढ़, पुद्दूचेरी और दादरा एवं नगर हवेली में लागू प्रत्यक्ष लाभ अंतरण मॉडल का मूल्यांकन करना, और (iv) सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SMART-PDS का इंफ्रास्ट्रक्चर लागू करना।

रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

कैबिनेट ने पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत चावल के गुणवत्ता नियमों में संशोधन किए

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल की क्वालिटी से जुड़े नियमों में संशोधन किया है।[42] टूटे हुए दानों की मात्रा को (i) कच्चे चावल में 25% से घटाकर 10% और (ii) उसना चावल में 16% से घटाकर 5% किया जाएगा। स्वीकृत अनाजों का वितरण खरीफ़ मार्केटिंग सीज़न 2027-28 से शुरू होगा। पीएमजीकेएवाई के तहत, अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिक घरेलू लाभार्थियों को मुफ़्त खाद्यान्न प्रदान किया जाता है।

 

पर्यावरण

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्वव्यापी प्रभाव से पर्यावरण मंजूरी देने वाले ऑफिस मेमोरेंडम को रद्द किया

सर्वोच्च न्यायालय (2026) ने यह व्यवस्था दी है कि पर्यावरण संरक्षण एक्ट, 1986 के तहत पूर्व पर्यावरण मंजूरी (ईसी) अनिवार्य बनी रहेगी और पिछली तारीख से लागू होने वाली ईसी केवल असाधारण स्थिति में ही, एक वैध अधिसूचना के ज़रिए दी जा सकती है।[43],[44]  ये मंज़ूरियां पर्यावरण संरक्षण एक्ट, 1986 और पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 के तहत जारी की जाती हैं।[45],[46]  ईआईए के अनुसार, कुछ परियोजनाओं या गतिविधियों के लिए संबंधित रेगुलेटरी अथॉरिटी से पूर्व पर्यावरण मंजूरी लेना ज़रूरी होगा।

मार्च 2017 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने उन परियोजना गतिविधियों के लिए पूर्वव्यापी मंजूरी देने के लिए एक अधिसूचना जारी की जिन्होंने: (i) साइट पर काम शुरू कर दिया था, (ii) ईसी की सीमा से ज़्यादा उत्पादन बढ़ाया था, या (iii) ईसी प्राप्त किए बिना उत्पादन मिश्रण में बदलाव किया था।[47]  मई 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने फ़ैसला सुनाया कि 2017 की अधिसूचना के तहत पिछली तारीख से ईसी देने की अवधारणा गैर-कानूनी थी।[48]  अदालत ने माना था कि पूर्वव्यापी ईसी देना पर्यावरण कानूनों और 2006 की ईआईए अधिसूचना के खिलाफ है। इस फैसले को बाद में समीक्षा पर वापस ले लिया गया।[49]

सर्वोच्च न्यायालय ने अब 2017 की अधिसूचना को एक संकीर्ण रूप में तैयार किए गए और एकमुश्त उपाय के रूप में वैध माना है।73 अदालत ने स्पष्ट किया कि 2017 की अधिसूचना केवल 14 मार्च, 2017 तक मौजूद उल्लंघनों पर ही लागू की जा सकती है और केवल उन्हीं आवेदनों पर ही लागू होगी जो पहले अधिसूचित की गई समय सीमा के भीतर किए गए हैं। अब किसी भी नए आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।

अदालत ने भविष्यपरक प्रभाव (प्रॉस्पेक्टिव इफेक्ट) के साथ 2021 के उस ऑफिस मेमोरैंडम को भी रद्द कर दिया, जिसमें बिना किसी कट-ऑफ तारीख के पूर्व्यापी पर्यावरण मंजूरी की अनुमति दी गई थी। अदालत ने माना कि यह मेमोरैंडम केवल एक प्रशासनिक निर्देश था, इसलिए यह ईआईए अधिसूचना, 2006 का स्थान नहीं ले सकता और न ही उसे खारिज कर सकता है। अदालत ने कहा कि इसकी असीमित और स्थायी प्रकृति अनुचित थी और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करती थी।

 

ऊर्जा

Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)

कैबिनेट ने फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजना की विकास योजना को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5,070 करोड़ रुपए के बजट के साथ प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है।[50]  इसका उद्देश्य 5,000 मेगावाट (MW) क्षमता वाली फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (पीवी) परियोजनाओं के विकास में मदद करना है। इन परियोजनाओं में न्यूनतम दो घंटे के स्टोरेज क्षमता वाला ऊर्जा भंडारण तंत्र भी शामिल होगा। इस योजना के तहत, सफल कमीशनिंग के बाद पात्र परियोजनाओं को प्रति MW एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, व्यवहार्यता अध्ययन और अन्य प्रारंभिक गतिविधियों के लिए प्रति परियोजना 50 लाख रुपए तक की अतिरिक्त सहायता मिलेगी। इस योजना के तहत परियोजनाओं को 2026-27 से 2030-31 के बीच मंजूरी दी जाएगी और आर्थिक सहायता 2032-33 तक दी जाएगी। जुलाई 2026 तक, देश में कुल सोलर PV क्षमता 700 MW है।

कैबिनेट ने अपतटीय तेल और गैस अन्वेषण को बढ़ावा देने वाली योजना को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 84,084 करोड़ रुपए के बजट के साथ 'समुद्र मंथन' नामक राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी है।[51]  यह योजना 2030-31 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए देश में ही तेल और गैस की खोज और उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसमें ये निम्नलिखित प्रावधान शामिल हैं: (i) बड़े पैमाने पर अच्छी क्वालिटी वाले भूकंपीय (सिस्मिक) डेटा को इकट्ठा करना, प्रोसेस करना और उसका विश्लेषण करना, (ii) गहरे पानी और बहुत गहरे पानी वाले इलाकों में तेज़ी से खोज के लिए ड्रिलिंग करना, (iii) नए और कम खोजे गए बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग करना, (iv) साझा अपतटीय उत्पादन और निकासी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना, और (v) तेल और गैस मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस ज़ोन बनाना। वैज्ञानिक ड्रिलिंग का मतलब है, उप सतह के बारे में भूवैज्ञानिक जानकारी पाने के लिए खोजपूर्ण कुओं (यानी जमीन या समुद्र के नीचे या प्राकृतिक गैस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए खोदे जाने वाले शुरुआती कुएं) की ड्रिलिंग करना। इस योजना में क्षमता निर्माण और स्टेकहोल्डर्स को शामिल करने के लिए भी मदद दी जाएगी।

 

 

खनन और कोयला

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

स्टैंडिंग कमिटी ने वॉश्ड कोल उत्पादन को बढ़ाने से संबंधित रिपोर्ट सौंपी

कोयला, खदान और स्टील से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री अनुराग सिंह ठाकुर) ने 'वॉश्ड कोल उत्पादन को बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास’ पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[52]  

कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) वॉशरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और आधुनिकीकरण करके कोयला शोधन को उच्च प्राथमिकता देना, (ii) घरेलू स्तर पर वॉश्ड कोल ब्लेंडिंग बढ़ाकर कोकिंग कोल के आयात पर निर्भरता कम करना, (iii) रेल-केंद्रित फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के माध्यम से कोयला परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, (iv) नई कोकिंग कोल खदानों और वॉशरी प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरण और वन संबंधी मंजूरियों में तेजी लाना, और लॉजिस्टिक्स लागत व उत्सर्जन को कम करने के लिए पिटहेड-आधारित वॉशरी की स्थापना को प्राथमिकता देना, (v) कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन की तकनीकी क्षमता और कार्यक्षेत्र का विस्तार करके तकनीकी निगरानी और ज्ञान संबंधी सहयोग को मजबूत करना, और (vi) सभी वॉशरीज़ में पानी की रीसाइकलिंग, जीरो-डिस्चार्ज और रिजेक्ट-उपयोग के नियमों को सख्ती से लागू करना।

रिपोर्ट पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

स्टैंडिंग कमिटी ने स्टील क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर रिपोर्ट सौंपी

कोयला, खदान और स्टील से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री अनुराग सिंह ठाकुर) ने 'स्टील क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेड इन इंडिया’ स्टील उत्पादन के लिए रोडमैप' पर रिपोर्ट पेश की।[53] 

कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) तेज़ी से मंजूरियों, तकनीक हस्तांतरण के लिए अधिक सहायता और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को मज़बूत करके स्पेशलिटी स्टील के उत्पादन को बढ़ावा देना, (ii) रेल फ्रेट (माल ढुलाई) को सुव्यवस्थित करके, मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट और बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के ज़रिए लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना, (iii) लौह अयस्क खदानों को तेज़ी से चालू करके और बेनिफिसिएशन क्षमता (अयस्क से अशुद्धियों को हटाने की प्रक्रिया) को बढ़ाकर लंबे समय के लिए कच्चे माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना, और (iv) स्टील क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मज़बूत करने के लिए स्वदेशी तकनीक और घरेलू खरीद को बढ़ावा देना।

रिपोर्ट पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

 

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण

Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)

ड्राफ़्ट राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग बिल, 2026 जारी

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग बिल, 2026 का ड्राफ़्ट जारी किया है।[54]  इस ड्राफ़्ट बिल का उद्देश्य फार्मेसी एक्ट, 1948 को निरस्त करना है।[55]  इसमें राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग के गठन का प्रस्ताव है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • आयोग के कार्य: आयोग इनके संबंध में रेगुलेशंस बनाएगा: (i) फार्मेसी शिक्षा से जुड़ी नीति और मानक तय करना, (ii) फार्मेसी संस्थानों और अनुसंधान को रेगुलेट करना, (iii) शिक्षा, सुविधाओं, परीक्षा और ट्यूशन फ़ीस के बुनियादी मानक तय करना, और (iv) फार्मेसी संस्थानों में दाखिले के लिए एक समान तंत्र बनाना।

  • आयोग के तहत बोर्ड: आयोग के चार बोर्ड होंगे: (i) आधुनिक मेडिसिन के लिए फार्मेसी शिक्षा बोर्ड, (ii) भारतीय चिकित्सा पद्धतियों और होम्योपैथी के लिए फार्मेसी शिक्षा बोर्ड, (iii) फ़ार्मेसी मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड, और (iv) फ़ार्मेसी एथिक्स और रजिस्ट्रेशन बोर्ड। मूल्यांकन बोर्ड नए फार्मेसी संस्थानों और कोर्स को मंजूरी देगा। एथिक्स बोर्ड फार्मेसी प्रोफेशनल्स का राष्ट्रीय रजिस्टर मेनटेन करेगा और शिकायतों का निपटारा करेगा।

  • नेशनल एग्जिट टेस्ट: आयोग एक कॉमन एग्जिट एग्ज़ाम आयोजित करेगा, जिसके ज़रिए: (i) फार्मेसी प्रैक्टिस का लाइसेंस दिया जाएगा, (ii) राष्ट्रीय या राज्य रजिस्टर में नामांकन किया जाएगा, और (iii) पोस्ट-ग्रेजुएट फार्मेसी शिक्षा में प्रवेश दिया जाएगा।

  • राज्य फार्मेसी परिषद: हर राज्य को बिल लागू होने के एक साल के अंदर अपनी फार्मेसी परिषद का पुनर्गठन करना होगा। ये परिषद प्रोफ़ेशनल आचरण को लागू करेंगी और राज्य-स्तर के रजिस्टर मेनटेन करेंगी। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक सलाहकार निकाय बनाया जाएगा जो फार्मेसी शिक्षा और प्रशिक्षण नीति से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखेगा।

ड्रग नियम, 1945 में संशोधन

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स नियम 1945 में संशोधनों की अधिसूचना जारी की है।[56],[57],[58]  आयुष मंत्रालय ने भी ड्रग्स नियम, 1945 में और संशोधन किए हैं।[59]  ये नियम ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत जारी किए गए हैं, जो दवाओं और कॉस्मेटिक्स के आयात, निर्माण और वितरण को रेगुलेट करता है।[60]  मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • लाइसेंस से छूट खत्म करना: 1945 के नियमों के तहत कुछ निर्दिष्ट दवाओं के फ़ॉर्मूलेशन को मैन्यूफैक्चरिंग लाइसेंस लेने से छूट दी गई थी। ऐसे फ़ॉर्मूलेशन में इलायची, अदरक और दूसरी खुशबूदार चीज़ों से बनी दवाएं (टिंचर) शामिल हैं; इनमें से कुछ में वॉल्यूम के हिसाब से 80-90% तक एथिल अल्कोहल होता है। संशोधन में कहा गया है कि जिन फ़ॉर्मूलेशन में वॉल्यूम के हिसाब से 12% से ज़्यादा एथिल अल्कोहल होगा और जिनकी मात्रा 30 मिलीलीटर से ज़्यादा होगी, उन्हें लाइसेंस से छूट नहीं मिलेगी। ज़्यादा अल्कोहल वाले फ़ॉर्मूलेशन के लिए मैन्यूफैक्चरिंग और बिक्री का लाइसेंस लेना ज़रूरी होगा। इन्हें केवल रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की सलाह (प्रिस्क्रिप्शन) पर ही बेचा जा सकेगा।

  • रेगुलेटरी दिशानिर्देश: 1945 के नियमों के तहत, सभी मैन्यूफैक्चरिंग लाइसेंस का समय-समय पर नवीनीकरण कराना ज़रूरी था। साथ ही, अगर सामग्री की सूची लेबल पर नहीं आ पाती थी, तो उसे पैकेज के अंदर अलग से रखा जा सकता था और लेबल पर उसका ज़िक्र किया जा सकता था। यह संशोधन होम्योपैथिक और आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (एएसयू) दवाओं के लिए इन दिशानिर्देशों को बदलता है। इसमें निर्दिष्ट हैं: (i) इन मैन्यूफैक्चरिंग लाइसेंस की स्थायी वैधता, (ii) मानकीकृत उत्पाद कोड, और (iii) अगर सामग्री की सूची पैकेजिंग की लंबाई से ज़्यादा हो, तो उसके लिए QR कोड लेबलिंग।

  • क्वालिटी की निगरानी के नियम: एएसयू के मामले में, संशोधन में निम्नलिखित प्रावधान हैं: (i) लाइसेंस की शर्तों और एक्ट के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच करने वाले इंस्पेक्टरों की योग्यता में बदलाव किया गया है—अब उनके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित एएसयू सिस्टम या फार्मेसी में डिग्री होनी चाहिए, और (ii) एएसयूस दवाओं की शेल्फ़ लाइफ़ के लिए वैज्ञानिक डेटा का होना ज़रूरी है।

  • मैन्यूफैक्चरिंग के मानक: यह संशोधन होम्योपैथिक और एएसयू दवाओं की मैन्यूफैक्चरिंग के तरीकों में बदलाव करता है। नियमों में मैन्यूफैक्चरिंग कारखानों के लिए सामान्य स्वच्छता और उस स्थान से जुड़े नियमों को निर्दिष्ट किया गया है। संशोधन में इन क्षेत्रों से जुड़े नियमों को तय किया गया है: (i) मैन्यूफैक्चरिंग का परिसर, (ii) पर्यावरण नियंत्रण, (iii) पानी की आपूर्ति, (iv) कचरा प्रबंधन, और (v) गुणवत्ता नियंत्रण। यह कारखाने से जुड़े सामान्य नियमों की जगह जोखिम-आधारित गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली लागू करता है। इसमें रसौषधि (जड़ी-बूटी और खनिज वाली) दवाओं के उत्पादन मानक भी शामिल हैं।

  • दवाओं के आयात के लिए नए बंदरगाह: संशोधन नवी मुंबई हवाईअड्डे के माध्यम से दवाओं के आयात की अनुमति देते हैं। इस नए जुड़ाव के साथ, देश में कुल अधिसूचित बंदरगाहों (सड़क, रेल, जहाज और हवाई मार्ग) की संख्या बढ़कर 42 हो गई है।

नए मेडिकल संस्थान की स्थापना संबंधी रेगुलेशंस, 2023 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी

राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (एनएमसी) ने नए मेडिकल संस्थान की स्थापना, मूल्यांकन और रेटिंग (संशोधन) रेगुलशंस, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।[61]  इसमें नए मेडिकल संस्थान की स्थापना, मूल्यांकन और रेटिंग रेगुलेशंस, 2023 में संशोधन का प्रस्ताव है।[62]  2023 के रेगुलेशंस राष्ट्रीय मेडिकल आयोग एक्ट, 2019 के तहत अधिसूचित किए गए थे।[63]  यह एक्ट मेडिकल शिक्षा प्रणाली को रेगुलेट करता है और राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (एनएमसी) की स्थापना करता है। मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पात्र आवेदक: 2023 के रेगुलेशंस में मेडिकल संस्थान शुरू करने के लिए केंद्र सरकार को एक पात्र आवेदक के तौर पर शामिल किया गया है, और कंपनियों के मामले में केवल कंपनी एक्ट, 2013 के तहत आने वाली 'सेक्शन 8' कंपनियों को ही पात्र माना गया है। ड्राफ़्ट में केंद्र सरकार को पात्र आवेदकों की सूची से हटा दिया गया है और कंपनी की श्रेणी का दायरा बढ़ाकर कंपनी एक्ट, 2013 के तहत बनी किसी भी कंपनी को इसमें शामिल कर लिया गया है। साथ ही, इसमें रजिस्टर्ड ट्रस्ट को भी एक नई पात्र श्रेणी के तौर पर जोड़ा गया है।

  • नए मेडिकल संस्थान स्थापित करने का आवेदन: आवेदन के समय, 2023 के रेगुलेशंस के अनुसार ये ज़रूरी हैं: (i) केंद्र और राज्य सरकारों से मंजूरी का एसेंशियलिटी सर्टिफ़िकेट, और (ii) कॉर्पस फ़ंड का सबूत। ड्राफ़्ट में इस चरण पर एसेंशियलिटी सर्टिफ़िकेट और कॉर्पस फ़ंड के दस्तावेज़ की ज़रूरत को हटा दिया गया है। अब मंजूरी के चरण पर कॉर्पस फ़ंड के लिए अंडरटेकिंग (लिखित वचन) की ज़रूरत होती है। इसमें आवेदन आवेदक, मेडिकल कॉलेज या संस्था के नाम पर किया जा सकता है।

  • कॉर्पस फंड की जरूरत: इस ड्राफ़्ट में सभी मौजूदा कॉलेजों के लिए फंड की ज़रूरत को लागू किया गया है। अभी चल रहे सभी मेडिकल कॉलेजों को अपने कामकाज के लिए एक कॉर्पस फंड रखना होगा। इस फंड की राशि मेडिकल मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) तय करेगा और इसमें बदलाव भी किया जा सकता है।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत: ड्राफ़्ट में एक शर्त जोड़ी गई है कि आवेदन के समय सभी इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी ज़रूरतें पूरी होनी चाहिए। अस्पताल/कॉलेज की इमारतों के लिए अस्थायी इंतज़ाम और ‘वर्क इन प्रोग्रेस’ वाले संस्थानों को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

  • अधूरे आवेदनों पर कार्रवाई: रेगुलेशंस आवेदकों को कमियों वाले आवेदनों को ठीक करने के लिए 15 दिन का समय देते हैं। ड्राफ्ट इस मौके को खत्म करता है और अधूरे आवेदनों को खारिज करता है। ज़रूरी दस्तावेज़ों की कमी वाले आवेदनों को अब औपचारिक रूप से अमान्य घोषित कर दिया जाता है। एमएआरबी या एनएमसी पर दबाव बनाने की कोशिश करने पर भी आवेदन या अनुरोध को तुरंत खारिज कर दिया जाता है।

टिप्पणियां 7 अगस्त, 2026 तक आमंत्रित हैं।

 

युवा मामले और खेल

Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)

पुनर्गठित खेलो इंडिया योजना को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'खेलो इंडिया' योजना के विस्तार और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एएनएसएफज़) को सहायता देने को मंजूरी दी।[64]  यह योजना स्कूल स्तर पर नए खेल केंद्र स्थापित करती है। इसका उद्देश्य खेलों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • परिव्यय में वृद्धि: इस विस्तारित योजना के लिए 2026-27 से 2030-31 तक कुल 36,441 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। यह पहले के बजट आवंटन से आठ गुना ज़्यादा है।

  • नए संस्थान: इस विस्तारित योजना के तहत कई नए खेल संस्थान बनाए जा रहे हैं: (i) नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस, (ii) खेलो इंडिया सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस, (iii) स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ट्रेनिंग सेंटर, और (iv) खेलो इंडिया से मान्यता प्राप्त अकादमियां और सेंटर। इसमें स्कूल स्तर के दो नए कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं: (i) फीडर स्कूल, और (ii) उत्कृष्ट विद्यालय। इसमें स्कूली एथलीटों के लिए एक नई श्रेणी भी शुरू की जा रही है: उभरते हुए खेलो इंडिया एथलीट (इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स)।

  • प्रतिभा की पहचान: इस विस्तारित योजना के तहत प्रतिभा की पहचान करने का एक नया ढांचा तैयार किया गया है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) प्रतिभा पहचान और विकास समितियां, (ii) ज़ोनल समितियां, (iii) टैलेंट स्काउट्स, (iv) हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर, और (v) हाई-परफॉर्मेंस मैनेजर। स्कूल, विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर घरेलू प्रतियोगिताओं का विस्तार किया जाएगा, जिसमें महिला एथलीटों, पैरा-एथलीटों और पारंपरिक खेलों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

  • कोचिंग और फंडिंग: इस योजना के तहत एक नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड बनाया जाएगा। यह बोर्ड कोचिंग से जुड़ी योग्यताओं के लिए मानक तय करेगा और एथलीटों के डेटा, प्रतियोगिताओं, कोचिंग से जुड़े संसाधनों और फंडिंग के प्रबंधन के लिए एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तैयार करेगा। एएनएसएफ की फंडिंग में कोचिंग, खेल विज्ञान, उपकरण, विदेशी एक्सपर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का खर्च शामिल होगा।

राष्ट्रीय एंटी डोपिंग नियम, 2026 अधिसूचित

मंत्रालय ने राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एक्ट, 2022 के तहत राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग नियम, 2026 को अधिसूचित किया।[65], [66]  यह एक्ट खेलों में एंटी-डोपिंग गतिविधियों को रेगुलेट करने का प्रावधान करता है। 2026 के नियम, राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग नियम, 2021 का स्थान लेंगे।[67]  मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • लैब रेगुलेशन: 2021 के नियमों में कहा गया था कि नाडा की टेस्टिंग लैब को विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी से मान्यता मिलेगी। 2026 के नियम केंद्र सरकार को और लैब को मान्यता देने या उन्हें स्थापित करने की अनुमति देते हैं। सभी लैब को टेस्टिंग लैब के निष्पक्ष और एक जैसे कामकाज के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना होगा। लैब सीधे एथलीट से सैंपल नहीं ले सकतीं। वे एथलीट को ऐसी जानकारी भी नहीं दे सकतीं जिससे उन्हें पकड़े जाने से बचने में मदद मिले।

  • विशिष्ट प्रावधान: 2026 के नियमों में एथलीटों की तीन श्रेणियों के लिए खास प्रावधान शामिल हैं: (i) नाबालिग, (ii) सुरक्षित व्यक्ति, और (iii) मनोरंजन के लिए खेलने वाले एथलीट। सुरक्षित व्यक्तियों को इस तरह परिभाषित किया गया है: (i) 18 साल से कम उम्र का एथलीट, (ii) जो रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल (नाडा द्वारा रेगुलर आउट-ऑफ-कंपटीशन डोपिंग टेस्टिंग के लिए चुने गए एथलीटों का ग्रुप) का हिस्सा नहीं है, (iii) जिसने कभी किसी इंटरनेशनल ओपन-कैटेगरी इवेंट में हिस्सा नहीं लिया है, और (iv) वे लोग जो कानूनी रूप से अक्षम हैं। ऐसे लोगों द्वारा सैंपल कलेक्शन से बचने, मना करने या उसमें छेड़छाड़ करने जैसे उल्लंघनों के लिए सज़ा को चार साल से घटाकर दो साल कर दिया गया है। नाडा के पास उनके लिए पुनर्वास दिशानिर्देश जारी करने का अधिकार होगा। उन पर उल्लंघनों की अनिवार्य सार्वजनिक जानकारी देने का नियम अब लागू नहीं होगा।

रक्षा

Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)

पब्लिक एकाउंट्स कमिटी ने रक्षा ऑफसेट्स के प्रबंधन पर अपन रिपोर्ट सौंपी

पब्लिक एकाउंट्स कमिटी (चेयर: श्री के. सी. वेणुगोपाल) ने रक्षा ऑफ़सेट्स का प्रबंधन पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी ने रक्षा अनुबंधों के तहत ऑफ़सेट दायित्वों के कार्यान्वयन की समीक्षा की। अनुबंध में मौजूद ऑफ़सेट प्रावधान के तहत, विक्रेता (विदेशी वेंडर) के लिए खरीदार को प्रतिपूर्ति करना जरूरी होता है। यह काम रिवर्स परचेज़, स्थानीय उद्योग में निवेश या खरीदार देश में अनुसंधान एवं विकास के ज़रिए किया जा सकता है।

मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) हर पूंजीगत खरीद के लिए डिफेंस ऑफसेट के नियम को लागू करना, (ii) ऑफसेट का 50% दायित्व एफडीआई या तकनीकी हस्तांतरण के ज़रिए पूरा करना ज़रूरी बनाना, (iii) उन तकनीक और उत्पादों की लिस्ट को सही ढंग से तय करना जिनका इस्तेमाल विदेशी वेंडर ऑफसेट दायित्व को पूरा करने के लिए कर सकें, (iv) ऑफसेट का दायित्व पूरा करने के लिए समय-सीमा तय करना, और (v) नीति में हर्जाना जैसे उपाय शामिल करना ताकि ऑफसेट दायित्वों का उल्लंघन करने से रोका जा सके।

रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

 

विदेशी मामले

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

अनेक द्वपक्षीय दौरे आयोजित

जापान

जापान की प्रधानमंत्री सुश्री सनाए तकाइची ने द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत का दौरा किया।[68], [69]  दोनों देशों ने इन विषयों पर सहयोग के लिए मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए: (i) भारत में बायोगैस और जैविक खाद संयंत्र लगाना और डेयरी सहकारी समितियों का लाभ उठाना, (ii) बैटरी और फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन में निवेश, (iii) महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, (iv) एआई नीति, और (v) परिवहन क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश। उन्होंने इन विषयों पर भी समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए: (i) स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण, (ii) बायोलॉजिकल और न्यूरोसाइंस रिसर्च, (iii) एलएलएमऔर एआई फ्रेमवर्क विकसित करना, और (iv) इंटरनेट सुरक्षा और गवर्नेंस। इन विषयों पर संयुक्त बयानों पर हस्ताक्षर किए गए: (i) कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक जमा करना, और (ii) समुद्री परिवहन अनुसंधान।

दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा पर एक संयुक्त घोषणापत्र पर भी हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों, एआई, स्वच्छ ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में परियोजना-आधारित सहयोग को बढ़ावा देना है।

इंडोनेशिया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के प्रधानमंत्री श्री प्राबोवो सुबियांतो से द्विपक्षीय बातचीत की।[70], [71]  दोनों देशों ने निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग समझौतों को आगे बढ़ाया: (i) बाहरी अंतरिक्ष का शांतिपूर्ण उपयोग, और (ii) समुद्री सुरक्षा। उन्होंने इन विषयों पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए: (i) मेडिकल उत्पादों का रेगुलेशन, (ii) खनिज और स्टील सप्लाई चेन, (iii) कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र, (iv) आपदा प्रबंधन, (v) टेलीकम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी और सेवाएं, (vi) इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन टेक्नोलॉजी पर दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच सहयोग, और (vii) रेयर अर्थ मैग्नेट का विकास।

दोनों देश इन मामलों में सहयोग करने पर भी सहमत हुए: (i) ब्रह्मोस और अन्य एयर-टू-एयर मिसाइल सिस्टम, (ii) इंडोनेशिया में स्टेनलेस-स्टील स्लैब बनाने की सुविधा स्थापित करना।

ऑस्ट्रेलिया

प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री श्री एंथनी अल्बानीज़ से भेंट की।[72], [73]  दोनों देशों ने इन विषयों पर संयुक्त घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए: (i) समुद्री सुरक्षा और रक्षा, (ii) ऊर्जा सुरक्षा, (iii) साइबर और महत्वपूर्ण तकनीकें, और (iv) खेल। उन्होंने इन विषयों पर भी समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए: (i) समुद्री कानून का पालन करवाना, (ii) माइनिंग ऑपरेशन में कौशल विकास, (iii) उभरती तकनीकों पर अनुसंधान और कौशल विकास, और (iv) सिनेमा और उससे जुड़े क्षेत्र।

न्यूजीलैंड

प्रधानमंत्री ने न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफर लक्सन से भेंट की।[74],[75]  दोनों देशों ने इन विषयों पर समझौतों पर हस्ताक्षर किए: (i) समुद्री क्षेत्र, (ii) पर्यटन और संस्कृति, (iii) हाइड्रोग्राफिक डेटा साझा करना, (iv) दोनों देशों की सेनाओं के बीच लॉजिस्टिक्स सहायता, (v) आतंकवाद-रोधी मामलों पर एक संयुक्त कार्य समूह का गठन, और (vi) गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का विकास। उन्होंने इन विषयों पर भी सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए: (i) आपदा जोखिम प्रबंधन, और (ii) पशुपालन और डेयरी; और इन विषयों पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए: (i) अंटार्कटिक अनुसंधान, और (ii) शैक्षणिक आदान-प्रदान और विद्यार्थियों की आवाजाही।

अन्य घोषणाओं में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य, (ii) समुद्री सुरक्षा संवाद स्थापित करना, और (iii) कृषि उत्पादकता बढ़ाना।


[1] Bulletin 2, Lok Sabha, July 4, 2026, https://sansad.in/getFile/dms/fetch/ddd42deb-2e66-40a6-9950-fe31cc7bfa16?source=dsp2.

[2] Press Release of Consumer Price Index on Base 2024=100 for June, 2026, Ministry of Statistics and Programme Implementation, July 13, 2026, https://www.mospi.gov.in/uploads/latestreleasesfiles/1783939158764-Press%20Release%20of%20CPI%20for%20June%202026.pdf.

[3] Provisional Estimates of Wholesale Price Index (Base Year 2022-23) for the month of June 2026, Ministry of Commerce and Industry, July 14, 2026, https://eaindustry.nic.in/press_release/press_release_202607.pdf.

[4] The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Public_Examinations_Bill_2026.pdf.

[5] The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024, https://upload.indiacode.nic.in/view-casepdf?type=act&id=AC_CEN_26_36_00009_A2024-01_1719556801892.

[6] No. SL-11/01/2023- T&P, Ministry of Skill Development and Research, July 9, 2026,  https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/274551.pdf.

[7] The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Supreme_Court_(Number_of_Judges)_(A)_Bill_2026.pdf

[8] The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Ordinance, 2026, https://www.legislative.gov.in/static/uploads/2026/05/43403bd5a664399763a253a82fdc9377.pdf

[9] The Supreme Court (Number of Judges) Act, 1956, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1676/3/a1956-55.pdf.

[10] Draft Advocates Act, 1961 proposed amendments of 2026., Bar Council of India, July 18, 2026, https://www.barcouncilofindia.org/info/req-for-su-ch2hbe.

[11] The Advocates Act, 1961.

[12] S.O. 3507 (E)., Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, June 30, 2026, https://egazette.gov.in/(S(ifbtyl5k0uzloaxmkirnjpc4))/ViewPDF.aspx.

[13] G.S.R. 548(E), Viksit Bharat- Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (GRAMIN): VB – G RAM G, manner of Payment of Wages and Unemployment Allowance Rules, 2026, Ministry of Rural Development, July 1, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/273989.pdf

[14] G.S.R. 547(E), Transitional Provisions under Viksit Bharat — Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin): VB – G RAM G Rules, 2026, Ministry of Rural Development, July 1, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/273988.pdf

[15] The Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act, 2025 (36 of 2025).

[16] “Cabinet approves Semicon 2.0 - Government delivers on its commitment for a long-term policy support to Semiconductors in India”, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and IT, July 15, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2284796&reg=48&lang=1.

[17] “About Semicon India”, Semicon India Programme, India Semiconductor Mission, July 21, 2026, https://ism.gov.in/about-semiconindia. 

[18] “Cabinet approves Mobile Phone Manufacturing Scheme”, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and IT, July 15, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2284792&reg=48&lang=1.

[19] The Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026, Ministry of Home Affairs, July 29, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Registration_of_Births_and_Deaths_(A)_Bill_2026.pdf.

[20] The Registration of Births and Deaths Act, 1969.

[21] Rationalisation of Foreign Exchange Management (Non-Debt Instruments) Rules, 2019 – Draft Rules for Comments”, Reserve Bank of India, July 21, 2026,https://www.rbi.org.in/scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=63204.

[22] G.S.R. (E)., Foreign Exchange Management (Foreign Investment) Rules, 2026, Department of Economic Affairs, Ministry of Finance, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/Content/PDFs/DRAFTFRULES21072026A745983B20174E018AAEEC1ED26D36FE.PDF.

[23] S.O. 3732 (E), Foreign Exchange Management (Non-debt Instruments) Rules, 2019, Department of Economic Affairs, Ministry of Finance, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/Content/PDFs/FEMNDIR19D1806268CE66379BD3E4D1DB9E961521538A2A9.PDF.

[24] Consultation Paper on Comprehensive Review of SEBI (Portfolio Managers) Regulations, 2020, Securities and Exchange Board of India, July 23, 2026, https://www.sebi.gov.in/reports-and-statistics/reports/jul-2026/consultation-paper-on-comprehensive-review-of-sebi-portfolio-managers-regulations-2020_103029.html.

[25] Securities and Exchange Board of India (Portfolio Managers) Regulations, 2020, Securities and Exchange Board of India, September 3, 2025, https://www.sebi.gov.in/legal/regulations/sep-2025/securities-and-exchange-board-of-india-portfolio-managers-regulations-2020-last-amended-on-september-03-2025-_96560.html.

[26] F. No. IRDAI/Reg/ 9/223/2026, The IRDAI (Registration, Capital Structure, Transfer of Shares and Amalgamation of Insurers) (Amendment) Regulations, 2026, The Gazette of India, IRDAI, July 30, 2026, https://irdai.gov.in/web/guest/document-detail?documentId=9700541.

[27] F. No. IRDAI/Reg/8/222/2026, IRDAI (Insurance Intermediaries) (Amendment) Regulations, 2026, The Gazette of India, IRDAI, July 30, 2026, https://irdai.gov.in/web/guest/document-detail?documentId=9697675.

[28] F. No. IRDAI/Reg/6/220/2026, The IRDAI (Actuarial, Finance and Investment Functions of Insurers) (Second Amendment) Regulations, 2026, The Gazette of India, IRDAI, July 30, 2026, https://irdai.gov.in/web/guest/document-detail?documentId=9696173.

[29] F. No. IRDAI/Reg/12/226/2026, The IRDAI (Third Party Administrators – Health Services) (Amendment) Regulations, 2026, The Gazette of India, IRDAI, July 30, 2026, https://irdai.gov.in/web/guest/document-detail?documentId=9703888.

[30] F. No. IRDAI/Reg/7/221/2026, The IRDAI (Insurance Surveyors and Loss Assessors) (Amendment) Regulations, 2026, The Gazette of India, IRDAI, July 30, 2026, https://irdai.gov.in/web/guest/document-detail?documentId=9698013.

[31] F. No. IRDAI/Reg/10/224/2026, The IRDAI (Policyholders’ Education and Protection Fund) Regulations, 2026, The Gazette of India, IRDAI, July 30, 2026, https://irdai.gov.in/web/guest/document-detail?documentId=9698497.

[32] F. No. IRDAI/Reg/11/225/2026, The IRDAI (Manner and Procedure for Imposition of Penalties) Regulations, 2026, The Gazette of India, IRDAI, July 30, 2026, https://irdai.gov.in/web/guest/document-detail?documentId=9697862.

[33] The Sabka Bima Sabki Raksha (Amendment of Insurance Laws) Act, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Sabka_Bima_Sabki_Raksha_(Amendment_of_Insurance_Laws)_Act_2025.pdf.

[34] Report no. 36, Standing Committee on Finance: ‘The Securities Markets Code, 2025’, Lok Sabha, July 23, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Finance/18_Finance_36.pdf?source=app.

[35] The Securities Markets Code, 2025, as introduced in Lok Sabha on December 18, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Securities_Markets_Code,2025.pdf.

[36] Cabinet Approved Revised Policy for Award of Waterfront and Associated Land to Port Dependent Industries (PDI) in Major Ports, Press Information Bureau, Ministry of Ports, Shipping and Waterways, July 31, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2292692&reg=48&lang=2

[37] Railway Minister Ashwini Vaishnaw Unveils Eight More Structural Reforms under ‘Reform Express’ to Strengthen India's Freight Operations, Press Information Bureau, Ministry of Railways, July 14, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2284535&reg=48&lang=2.  

[38] Cabinet approves National Investment Policy for Urea-2026 for Atmanirbhar Bharat (NIPU-2026), Press Information Bureau, Ministry of Chemicals and Fertilizers, July 15, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2284801&reg=48&lang=2

[39] “Cabinet approves continuation of the PM-KISAN Scheme from 2026-27 to 2030-31 with a Financial Outlay of Rs.3.15 lakh crore”, Press information Bureau, Union Cabinet, July 31, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2292437&reg=48&lang=1.

[40] Report no. 15, Standing Committee on Consumer Affairs, Food and Public Distribution, ‘Regulation of Packaged Commodities with Specific Reference to Sugar Content in Baby Products and Other Food Products’, Lok Sabha, July 23, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Consumer%20Affairs,%20Food%20and%20Public%20Distribution/18_Consumer_Affairs_Food_and_Public_Distribution_15.pdf?source=app. 

[41] 16th Report on ‘Modernisation of Public Distribution System: Strengthening Technical Data base’ pertaining to the Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution (Department of Food and Public Distribution), Ministry of Consumer Affairs, Food
and Public Distribution
(Department of Food and Public Distribution), July 23, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Consumer%20Affairs,%20Food%20and%20Public%20Distribution/18_Consumer_Affairs_Food_and_Public_Distribution_16.pdf?source=app

[42] “Government approves supply of improved-quality rice under PMGKAY,” Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution, Press Information Bureau, July 2, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2280307&reg=48&lang=2.

[43] Review Petition, Confederation of Real Estate Developers of India v Vanashakti, Supreme Court of India, November 18, 2025, https://api.sci.gov.in/supremecourt/2025/41929/41929_2025_1_1501 _66095_Judgement_18-Nov-2025.pdf.

[44] Writ Petition No. 1394 of 2023, Vanashakti vs Union of India, Supreme Court, July 29, 2026, https://api.sci.gov.in/supremecourt/2023/50009/50009_2023_1_1501_72722_Judgement_29-Jul-2026.pdf.

[45] The Environment Protection Act, 1986, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/4316/1/ep_act_19 86.pdf.

[46] Environmental Impact Assessment (EIA) Notification, Ministry of Environment, Forest, and Climate Change, September 14, 2006, https://environmentclearance.nic.in/writereaddata/EIA_notifications/ 2006_09_14_EIA.pdf . 

[47] S.O.804(E) Ministry of Environment, Forest and Climate Change, March 14, 2017, https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_CEN_16_18_00011_198629_1517807327582&type=notification&filename=101%20SO804E%2014032017.pdf.

[48] Writ Petition No. 1394 of 2023, Vanashakti vs Union of India, Supreme Court, May 16, 2025, https://api.sci.gov.in/supremecourt/2023/50009/50009_2023 _3_1502_61809.

[49] Review Petition, Confederation of Real Estate Developers of India v Vanashakti, Supreme Court of India, November 18, 2025, https://api.sci.gov.in/supremecourt/2025/41929/41929_2025_1_1501 _66095_Judgement_18-Nov-2025.pdf.

[50] “Cabinet approves 'Pradhan Mantri Surya Sarovar Yojana (PM-SSY)' for Development of Floating Solar Photovoltaic Projects with Energy Storage Systems with a total outlay of Rs.5,070 crore”, Press Information Bureau, Cabinet, July 31, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2292433&reg=48&lang=1.

[51] “Cabinet approves 'Samudra Manthan' (National Offshore Exploration Scheme) with an outlay of Rs.84,084 crore”, Press Information Bureau, Cabinet, July 31, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2292445&reg=48&lang=1. 

[52] 7th Report of the Departmentally Related Standing Committee on Coal, Mines and Steel, July 29, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Coal,%20Mines%20and%20Steel/18_Coal_Mines_and_Steel_27.pdf?source=app.

[53] 24th Report of the Departmentally Related Standing Committee on Coal, Mine, and Steel, July 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Coal,%20Mines%20and%20Steel/18_Coal_Mines_and_Steel_24.pdf?source=app.

[54] No. Z-28020/27/2023, Ministry of Health and Family Welfare, July 1, 2026,  https://www.mohfw-dohfw.gov.in/static/uploads/2026/07/e09761311aa45a6e996226aa33b2d87f.pdf. 

[55] The Pharmacy Act, 1948, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/6838/1/pharmacy_act_1948.pdf. 

[56] G.S.R. 561(E), Ministry of Health and Family Welfare, July 2, 2026, https://cdsco.gov.in/opencms/opencms/system/modules/CDSCO.WEB/elements/download_file_division.jsp?num_id=MTQ0NTM=. 

[57] G.S.R. 607(E), Ministry of Health and Family Welfare, July 8, 2026, https://cdsco.gov.in/opencms/opencms/system/modules/CDSCO.WEB/elements/download_file_division.jsp?num_id=MTQ0NTc=.

[58] The Drugs Rules, 1945, https://cdsco.gov.in/opencms/opencms/system/modules/CDSCO.WEB/elements/download_file_division.jsp?num_id=MTIwMjc=. 

[59] G.S.R 657(E), Ministry of Ayush, July 24, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/274789.pdf.

[60] The Drugs and Cosmetics Act, 1940, https://cdsco.gov.in/opencms/export/sites/CDSCO_WEB/Pdf-, /acts_rules/2016DrugsandCosmeticsAct1940Rules1945.pdf.

[61] No. M-27011/01/2025, Ministry of Health and Family Welfare, July 8, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/274346.pdf.

[62] M- 27011/01/2023-MARB, National Medical Commission, Ministry of Health and Family Welfare, https://www.nmc.org.in/MCIRest/open/getDocument?path=/Documents/Public/Portal/LatestNews/246253.pdf.

[63] The National Medical Commission Act, 2019. 

[64] “Cabinet approves revamped Khelo India Scheme and enhanced Assistance to National Sports Federations (ANSFs)”, Press Release, Ministry of Youth Affairs and Sports, July 31, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2292439&reg=48&lang=1.

[65] G.S.R. 641(E), Ministry of Youth Affairs and Sports, July 17, 2026, https://egazette.gov.in/(S(icshqo03mlxvpm1l3pbd5wyi))/ViewPDF.aspx.

[66] The National Anti-Doping Act, 2022.

[67] National Anti-Doping Rules, 2021, https://nadaindia.yas.gov.in/wp-content/uploads/Amendment-to-NADA-Rules-2021.pdf.

[68] “16th India Japan Annual Summit (1-3 July 2026; New Delhi)”, Press Release, Ministry of External Affairs, June 26, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41361/16th_India_Japan_Annual_Summit_13_July_2026_New_Delhi. 

[69] “List of Outcomes: Prime Minister of Japan’s visit to India for the 16th India-Japan Annual Summit (July 02, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, July 2, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41394/List_of_Outcomes_Prime_Minister_of_Japans_visit_to_India_for_the_16th_IndiaJapan_Annual_Summit_July_02_2026. 

[70] “Prime Minister holds official talks with President of Indonesia (July 07, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, July 7, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41409/Prime_Minister_holds_official_talks_with_President_of_Indonesia_July_07_2026. 

[71] “List of Outcomes: Prime Minister’s visit to Indonesia (July 06 – 08, 2026) “, Press Release, Ministry of External Affairs, July 7, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41408/List_of_Outcomes_Prime_Ministers_visit_to_Indonesia_July_06__08_2026.

[72] “Prime Minister meets with the Prime Minister of Australia at the 3rd India - Australia Annual Summit (July 09, 2026) “, Press Release, Ministry of External Affairs, July 9, 2026,  https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41433/Prime_Minister_meets_with_the_Prime_Minister_of_Australia_at_the_3rd_India__Australia_Annual_Summit_July_09_2026. 

[73] “List of Outcomes: Visit of Prime Minister Shri Narendra Modi to Australia (July 08 – 10, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, July 9, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41431/List_of_Outcomes__Visit_of_Prime_Minister_Shri_Narendra_Modi_to_Australia_July_08__10_2026. 

[74] “Prime Minister holds official talks with Prime Minister of New Zealand (July 11, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, July 11, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41448/Prime_Minister_holds_official_talks_with_Prime_Minister_of_New_Zealand_July_11_2026.

[75] “List of Outcomes: Official Visit of Prime Minister to New Zealand (July 10-11, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, July 11, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41447/List_of_Outcomes_Official_Visit_of_Prime_Minister_to_New_Zealand_July_1011_2026.

 

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