india-map

अपने सांसद को खोजें

Switch to English
  • सांसद और विधायक
    संसद राज्य 2024 चुनाव
  • विधान मंडल
    संसद
    प्राइमर वाइटल स्टैट्स
    राज्यों
    विधानमंडल ट्रैक वाइटल स्टैट्स
    चर्चा पत्र
  • बिल
    संसद राज्य स्टेट लेजिस्लेटिव ब्रीफ
  • बजट
    संसद राज्य चर्चा पत्र
  • नीति
    चर्चा पत्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति मंथली पॉलिसी रिव्यू कमिटी की रिपोर्ट राष्ट्रपति का अभिभाषण वाइटल स्टैट्स COVID-19
  • करियर

अपने सांसद को खोजें

संसद राज्य 2024 चुनाव
प्राइमर वाइटल स्टैट्स
विधानमंडल ट्रैक वाइटल स्टैट्स
चर्चा पत्र
संसद राज्य स्टेट लेजिस्लेटिव ब्रीफ
संसद राज्य चर्चा पत्र
चर्चा पत्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति मंथली पॉलिसी रिव्यू कमिटी कीरिपोर्ट राष्ट्रपति का अभिभाषण वाइटल स्टैट्स COVID-19
  • नीति
  • मंथली पॉलिसी रिव्यू
  • जून 2026

नीति

  • चर्चा पत्र
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति
  • कमिटी की रिपोर्ट
  • राष्ट्रपति का अभिभाषण
  • मंथली पॉलिसी रिव्यू
  • वाइटल स्टैट्स

जून 2026

पीडीएफ

इस अंक की झलकियां

2025-26 में जीडीपी में 7.7% की वृद्धि का अनुमान

2024-25 (7.1%) की तुलना में 2025-26 में जीडीपी की वृद्धि दर अधिक रहने का अनुमान है। 2025-26 की चौथी तिमाही में जीडीपी के 7.8% की दर से बढ़ने का अनुमान है।

रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखने का फैसला किया। स्टैंडिंग डिपॉजिट फेसिलिटी रेट, मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट और बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया गया।

2025-26 की चौथी तिमाही में चालू खाता अधिशेष जीडीपी का 0.7%

2025-26 की चौथी तिमाही में पूंजी खाते में 1.1 अरब USD का शुद्ध बहिर्वाह दर्ज किया गया। विदेशी मुद्रा भंडार में 7.2 अरब USD की बढ़ोतरी हुई।

एफआईआई और बीआईएस को सरकारी प्रतिभूतियों पर आयकर से छूट देने वाला अध्यादेश जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स (बीआईएस) को सरकारी प्रतिभूतियों से अर्जित ब्याज और ऐसी प्रतिभूतियों में व्यापार से होने वाले पूंजीगत लाभ पर आय कर से छूट दी गई है।

विदेशी योगदान (रेगुलेशन) संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित

इस संशोधन में उन स्वीकृत कार्यों की सूची दी गई है जिनके लिए विदेशी योगदान लिया जा सकता है। साथ ही, इसमें इस्तेमाल की एक सीमा भी तय की गई है, जिसे संगठनों को अगली किश्त लेने से पहले पूरा करना होगा।

आरबीआई ने जिम्मेदार कारोबारी आचरण से संबंधित निर्देशों में संशोधन किए

ये संशोधन वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की पेशकश में डार्क पैटर्न्स को प्रतिबंधित करते हैं और अनिवार्य बंडलिंग पर रोक लगाते हैं। इसके साथ ही, ये धोखाधड़ी वाले लेनदेन के लिए दायित्व के ढांचे में भी बदलाव पेश करते हैं।

कैबिनेट ने भारतीय एयरलाइन्स के लिए ईंधन मूल्य स्थिरीकरण फंड को मंजूरी दी

इस फंड का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट की वजह से कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में मदद करना है। इस फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट में ड्राफ्ट संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित

इस कानून के तहत, अंत्योदय अन्न योजना में शामिल परिवार को हर महीने 35 किलो अनाज पाने का अधिकार है। संशोधन के ड्राफ्ट में ऐसे परिवारों के लिए यह अधिकार बदलकर प्रति व्यक्ति हर महीने 7 किलो करने का प्रस्ताव है।

कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 अधिसूचित

नियम एक इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म को संचालित करते हैं, जहां कोयले के खरीदार और विक्रेता व्यापार कर सकते हैं।

 

मैक्रोइकोनॉमिक विकास

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

2025-26 में जीडीपी में 7.7% की वृद्धि का अनुमान

भारत की जीडीपी (2022-23 की स्थिर कीमतों पर) में 2025-26 में 7.7% की वृद्धि का अनुमान है, जो 2024-25 (7.1%) से ज्यादा है। 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में जीडीपी 7.8% बढ़ने का अनुमान है, जो 2024-25 की इसी तिमाही में दर्ज वृद्धि (7%) से ज्यादा है।[1]  2025-26 की तीसरी तिमाही में जीडीपी में 8% की बढ़ोतरी हुई थी।  

रेखाचित्र 1: जीडीपी में वृद्धि (%, वर्ष दर वर्ष)

स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; पीआरएस।

सभी आर्थिक क्षेत्रों की जीडीपी को सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के हिसाब से मापा जाता है। 2025-26 में व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और ब्रॉडकास्टिंग, और स्टोरेज क्षेत्र में सबसे ज्यादा वृद्धि (11.0%) होने का अनुमान है, इसके बाद मैन्यूफैक्चरिंग (10.7%), और वित्तीय क्षेत्र, रियल एस्टेट, आईटी और पेशेवर सेवा क्षेत्र (10.4%) का स्थान आता है।

तालिका 1: विभिन्न क्षेत्रों में स्थिर मूल्यों पर जीवीए में वृद्धि (%, वर्ष दर वर्ष)

क्षेत्र

2023-24

2024-25

2025-26

कृषि

2.6%

4.2%

3.0%

खनन

2.4%

11.7%

5.2%

मैन्यूफैक्चरिंग

12.7%

9.3%

10.7%

बिजली

10.7%

2.9%

1.7%

निर्माण

9.9%

7.3%

7.4%

व्यापार

10.1%

6.6%

11.0%

वित्तीय सेवाएं

5.5%

10.0%

10.4%

सार्वजनिक सेवाएं

6.8%

5.0%

5.0%

जीवीए

7.2%

7.3%

7.9%

जीडीपी

7.2%

7.1%

7.7%

नोट: जीडीपी की गणना जीवीए में शुद्ध करों को जोड़कर की जाती है। शुद्ध करों का अर्थ है, करों में से सबसिडी को घटाना।
स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; पीआरएस

रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को अल्पावधि की जरूरतों के लिए उधार देता है) को 5.25% पर बरकरार रखा है।[2]  समिति के अन्य फैसलों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • स्टैंडिंग डिपॉजिट फेसिलिटी रेट (जिस दर पर आरबीआई कोलेट्रल दिए बिना बैंकों से उधार लेता है) को 5% पर बरकरार रखा गया है।

  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) भी 5.5% पर बरकरार हैं।

  • एमपीसी ने अपना तटस्थ रुख जारी रखने का निर्णय लिया।

2025-26 की चौथी तिमाही में जीडीपी का 0.7% चालू खाता अधिशेष दर्ज

भारत ने 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 7.1 बिलियन USD (जीडीपी का 0.7%) का चालू खाता अधिशेष दर्ज किया, जबकि 2024-25 की इसी तिमाही में यह अधिशेष 13.6 बिलियन USD (जीडीपी का 1.4%) था।[3] 

2025-26 की चौथी तिमाही में पूंजीगत खाते से 1.1 बिलियन USD का शुद्ध बहिर्वाह दर्ज किया गया है, जबकि 2024-25 की चौथी तिमाही में 5.6 बिलियन USD का शुद्ध बहिर्वाह हुआ था। इसके अतिरिक्त 2025-26 की तीसरी तिमाही में पूंजीगत खाते से शुद्ध बहिर्वाह 7.7 बिलियन USD रहा था।

2025-26 की चौथी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 7.2 बिलियन USD की वृद्धि हुई, जो 2024-25 की चौथी तिमाही में (8.8 बिलियन USD) की तुलना में कम है। इसके विपरीत, 2025-26 की तीसरी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 24.4 बिलियन USD की गिरावट आई थी।

तालिका 2: भुगतान संतुलन, चौथी तिमाही 2025-26 (बिलियन USD)

 

ति4

2024-25

ति3
2025-26

ति4
2025-26

क. निर्यात

116.4

111.3

113.1

ख. आयात

175.8

207.2

196.6

ग. व्यापार संतुलन (क+ख)

-59.3

-95.9

-83.4

घ. शुद्ध सेवाएं

53.3

57.5

60.4

ङ अन्य हस्तांतरण

19.6

22.9

30.1

च. चालू खाता (ग+घ+ङ)

13.6

-15.5

7.1

छ. पूंजी खाता

-5.6

-7.7

-1.1

ज. भूल चूक लेनी देनी

0.8

-1.2

1.3

झ. मुद्रा भंडार में परिवर्तन (च+छ+ज)

8.8

-24.4

7.2

स्रोत: आरबीआई: पीआरएस।

 

वित्त

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर एफआईआई और बीआईएस को कर छूट देने के लिए अध्यादेश जारी

राष्ट्रपति ने 5 जून, 2026 को आय कर (संशोधन) अध्यादेश 2026 जारी किया।[4]  यह विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स (बीआईएस) को निम्नलिखित पर आय कर भुगतान से छूट देता है: (i) सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर अर्जित ब्याज, और (ii) ऐसी प्रतिभूतियों की बिक्री बिक्री, विनिमय या हस्तांतरण से होने वाले पूंजीगत लाभ। यह छूट 1 अप्रैल 2026 को या उसके बाद होने वाली आय पर लागू होगी।

विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण उपकरण) नियम, 2019 में संशोधन

वित्त मंत्रालय ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर ऋण उपकरण) (तीसरा संशोधन) नियम 2026 को अधिसूचित किया है।[5] यह विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर ऋण उपकरण) नियम, 2019 में संशोधन करता है ताकि भारत के बाहर के लोगों द्वारा इक्विटी और दूसरे उपकरणों में निवेश के फ्रेमवर्क में बदलाव किया जा सके।[6]  इससे पहले केवल अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) या भारत के प्रवासी नागरिकों (ओसीआई) को ही सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों की इक्विटी और अन्य प्रतिभूतियों में निवेश करने की अनुमति थी। यह संशोधन इसका दायरा बढ़ाता है ताकि भारत के बाहर रहने वाले अन्य निवासी व्यक्तियों को भी इस तरह के निवेश करने की अनुमति मिल सके।

यह संशोधन निवेश सीमा में भी बदलाव करता है। इससे पहले, एक व्यक्तिगत एनआरआई या ओसीआई को किसी सूचीबद्ध कंपनी की चुकता इक्विटी पूंजी का अधिकतम 5% तक रखने की अनुमति थी। इसके अलावा, ऐसे निवेशकों का कुल निवेश किसी सूचीबद्ध कंपनी की चुकता इक्विटी पूंजी के 10% से अधिक नहीं हो सकता था। यह संशोधन भारत के बाहर रहने वाले सभी व्यक्तियों (एनआरआई और ओसीआई सहित) के लिए इस सीमा को बढ़ाकर: (i) किसी एक व्यक्ति के निवेश के लिए 10% से कम, और (ii) कुल निवेश के लिए 24% करता है।

आरबीआई ने जिम्मेदार कारोबारी आचरण के संबंध में निर्देशों में संशोधन किया

आरबीआई ने जिम्मेदार कारोबारी आचरण और वित्तीय सेवाएं देने से संबंधित निर्देशों में संशोधन जारी किए हैं।[7],[8] ये निर्देश अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और गैर बैंकिंग कंपनियों जैसी रेगुलेटेड संस्थाओं द्वारा उत्पादों और सेवाओं की पेशकश पर लागू होते हैं। मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ग्राहकों की अनिवार्य सहमति: रेगुलेटेड संस्थाओं को अपने या तीसरे पक्ष के उत्पाद बेचने से पहले ग्राहकों की स्पष्ट अनिवार्य सहमति लेनी होगी। यूजर इंटरफेस को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि शर्तों और नियमों को पढ़े बिना कंटेंट हासिल नहीं किया जा सकता। सहमति लेने के लिए डिफ़ॉल्ट विकल्प 'नहीं'/ 'मैं सहमत नहीं हूं' होगा।

  • अनिवार्य बंडलिंग पर प्रतिबंध: किसी भी बैंक को तीसरे पक्ष के उत्पादों या सेवाओं की अनिवार्य बंडलिंग का सहारा नहीं लेना चाहिए। अगर जोखिम कम करने के उपाय के रूप में कोई बैंकिंग सेवा किसी तीसरे पक्ष के उत्पाद या सेवा पर निर्भर है, तो ग्राहकों को किसी भी प्रदाता से उसे खरीदने का विकल्प दिया जाना चाहिए।

  • डार्क पैटर्न्स पर प्रतिबंध: एक रेगुलेटेड संस्था और उसकी प्रत्यक्ष बिक्री और मार्केटिंग एजेंटों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके यूजर इंटरफेस में 'डार्क पैटर्न्स' का उपयोग न हो। डार्क पैटर्न्स को उपयोगकर्ताओं को गुमराह करके कुछ ऐसा कराने के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे करने का उनका मूल इरादा नहीं था। कुछ उदाहरणों में उपयोगकर्ताओं को तुरंत खरीदारी करने के लिए प्रेरित करने हेतु झूठी तात्कालिकता या कमी पैदा करना, योजना का लाभ न लेने पर ब्याज दर में संभावित वृद्धि का संकेत देना, और 'अभी कदम उठाएं', 'जल्दी करें' तथा 'केवल सीमित समय के लिए' जैसे वाक्यांशों का उपयोग करना शामिल है।

  • धोखाधड़ी वाले लेनदेन के लिए दायित्व: ग्राहक की जिम्मेदारी या दायित्व साबित करने का भार बैंक पर होगा। ग्राहक का दायित्व शून्य होगा, और लेनदेन की राशि वापस कर दी जाएगी, अगर: (i) धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही के कारण हुई हो या (ii) किसी तीसरे पक्ष द्वारा सुरक्षा उल्लंघन की रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर की गई हो। अगर धोखाधड़ी ग्राहक की लापरवाही के कारण होती है, तो नुकसान ग्राहक को उठाना होगा

  • छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के लिए मुआवजा: ग्राहक की लापरवाही के मामलों में अगर किसी धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में कुल नुकसान (किसी भी रिकवरी से पहले) 50,000 रुपए तक का होता है तो बैंक पीड़ित को मुआवजा देगा। एक व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक बार इस मुआवजे के लिए पात्र होगा। यह मुआवजा शुद्ध नुकसान की राशि (रिकवरी घटाने के बाद) का 85% या 25,000 रुपए, जो भी कम हो, होगा। 

सेबी में मार्जिन ट्रेडिंग फेसिलिटी की संरचना में संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित कीं

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मार्जिन ट्रेडिंग फेसिलिटी (एमटीएफ) के ढांचे की समीक्षा करते हुए एक परमार्श पत्र जारी किया।[9] एमटीएफ एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत निवेशक कुल कीमत का सिर्फ़ एक हिस्सा चुकाकर स्टॉक खरीद सकते हैं। बाकी रकम ब्रोकर से उधार ली जाती है। मुख्य प्रस्तावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ब्रोकरों के लिए पात्रता का मानदंड: इस पत्र में स्टॉक ब्रोकरों के लिए एमटीएफ की सुविधा देने के लिए न्यूनतम नेट वर्थ की सीमा को तीन करोड़ रुपए से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है। इसमें लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) के तौर पर काम करने वाले ब्रोकरों को भी अपने ग्राहकों को एमटीएफ की सुविधा देने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

  • फ़ंड्स के स्रोत: एमटीएफ देने के लिए फ़ंड्स के स्रोतों को बढ़ाया जा सकता है, जिसमें ब्रोकर द्वारा नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर या किसी अन्य ऋण उपकरणों के ज़रिए उधार लेना शामिल हो सकता है। एनसीडी ऐसे उपकरण होते हैं जिनके ज़रिए कंपनियां निवेशकों से पैसा उधार लेती हैं; वे नियमित रूप से ब्याज देती हैं और परिपक्वता पर मूलधन वापस करती हैं।

9 जुलाई, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

आईबीबीआई ने आईबीसी के तहत लिक्विडेशन प्रक्रिया से संबंधित रेगुलेशंस में संशोधन किए

भारतीय इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी बोर्ड (आईबीबीआई) ने आईबीबीआई (लिक्विडेशन की प्रक्रिया) (चौथा संशोधन) रेगुलेशन, 2026 को अधिसूचित किया है।[10] ये रेगुलेशन इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 (आईबीसी) के तहत लिक्विडेशन की प्रक्रिया को रेगुलेट करते हैं।[11] यह संहिता कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया (सीआईआरपी) का प्रावधान करती है। सीआईआरपी को कॉरपोरेट देनदार या उसके लेनदार शुरू कर सकते हैं। रेज़ोल्यूशन पर फैसला लेने के लिए लेनदारों की एक कमिटी (सीओसी) बनाई जाती है। देनदार का लिक्विडेशन तब होता है, जब: (i) तय समय के अंदर कोई रेज़ोल्यूशन प्लान नहीं बन पाता है, या (ii) सीओसी देनदार के लिक्विडेशन के लिए वोट करती है। लिक्विडेशन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक लिक्विडेटर नियुक्त किया जाता है। 2026 के रेगुलेशन की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • लिक्विडेशन के मामले में सीओसी की शक्तियां: अप्रैल 2026 में संहिता में संशोधन करके यह जोड़ा गया कि सीओसी लिक्विडेशन प्रक्रिया के संचालन की निगरानी करेगा।[12] 2026 के नियम निगरानी के तरीके को बताते हैं। लिक्विडेटर सीओसी की पूर्व मंजूरी के बिना कुछ खास काम नहीं कर सकता। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) कॉरपोरेट देनदार द्वारा या उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी रखना या शुरू करना, (ii) संपत्ति की बिक्री, और उससे जुड़ी मार्केटिंग रणनीति और नीलामी प्रक्रिया, (iii) कुछ प्रोफेशनल्स की नियुक्ति और उनका पारिश्रमिक, और (iv) नया मूल्यांकन। हर बैठक में, लिक्विडेटर को सीओसी के सामने ये बातें रखनी होंगी: (i) वास्तविक लिक्विडेशन की लागत, (ii) कानूनी कार्यवाही की स्थिति, और (iii) लिक्विडेशन प्रक्रिया में हुई प्रगति।

  • लिक्विडेशन से जुड़ी समय-सीमा: 2026 के नियम कई कामों के लिए समय-सीमा को कम करते हैं। उदाहरण के लिए, पहले नियमों के तहत लिक्विडेशन की प्रक्रिया एक साल के अंदर पूरी करनी होती थी। अप्रैल 2026 में लागू हुए संहिता में किए गए बदलावों के अनुसार, 2026 के नियम इस समय-सीमा को घटाकर 180 दिन कर देते हैं। पहले, लिक्विडेटर को लिक्विडेशन से मिली रकम को स्टेकहोल्डर्स के बीच रकम मिलने के 90 दिनों के अंदर बांटना होता था। 2026 के नियम इस समय-सीमा को घटाकर 15 दिन कर देते हैं।

 

गृह मामले

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

विदेशी योगदान (रेगुलेशन) नियम, 2011 में संशोधन अधिसूचित

गृह मंत्रालय ने विदेशी योगदान (रेगुलेशन) नियम, 2011 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है।[13],[14]  ये नियम विदेशी योगदान (रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के तहत जारी किए गए हैं, जो संगठनों द्वारा विदेशी योगदान को स्वीकार करने और उसके इस्तेमाल को रेगुलेट करते हैं।[15]  2011 के नियमों में किए गए मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • स्वीकृत कार्यों की सूची: नियमों के तहत संगठनों को अपनी गतिविधियों को इन पांच श्रेणियों में से किसी एक में बांटना होगा: धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक या सामाजिक। संशोधनों में इन श्रेणियों के तहत मंजूर किए गए कार्यों की एक सूची दी गई है। जिन कार्यों की अनुमति है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) धार्मिक शिक्षा या आदिवासी आस्थाओं और रीति-रिवाजों का दस्तावेज़ीकरण (धर्म परिवर्तन को छोड़कर), (ii) भारतीय समकालीन कला को बढ़ावा देना (राजनीतिक/विचारधारा से जुड़े कंटेंट को छोड़कर), और (iii) गरीब परिवारों के लिए लघुवित्त और सामुदायिक बचत संस्थान।

  • अगली किस्त पाने की शर्तें: इन संशोधनों में किसी संगठन के लिए विदेशी योगदान की अगली किस्तें पाने के लिए कुछ शर्तें बताई गई हैं। इसके लिए ज़रूरी है कि संगठन मिली हुई धनराशि का गतिविधि-वार ब्यौरा दे, पिछली किस्त में मिले विदेशी योगदान का कम से कम 75% इस्तेमाल दिखाए, और इस इस्तेमाल की फील्ड जांच के बाद ही आगे की धनराशि मिल सकती है।

  • उचित गतिविधि की परिभाषा: इस कानून के तहत, अगर कोई संगठन "उचित गतिविधि" नहीं करता है, तो उसका सर्टिफ़िकेट रद्द किया जा सकता है। संशोधनों में उचित गतिविधि को पिछले दो वित्तीय वर्षों में कम से कम 10 लाख रुपए के विदेशी योगदान का इस्तेमाल करने के तौर पर परिभाषित किया गया है।

  • मुख्य पदाधिकारी: इन संशोधनों में 'मुख्य पदाधिकारी' के दायरे में कंपनी के डायरेक्टर, फर्म के पार्टनर, ट्रस्ट के ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता और संगठन के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार अन्य पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। ये संशोधन इन मुख्य अधिकारियों की कई जिम्मेदारियां तय करते हैं। ये जिम्मेदारियां विदेशी योगदान प्राप्त करने के लिए रजिस्ट्रेशन हेतु ज़रूरी प्रशासनिक और जानकारी के खुलासे से संबंधित हैं।

  • रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म में बदलाव: नियमों के तहत, रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करते समय संगठनों को कई तरह की प्रशासनिक और वित्तीय जानकारी देनी होती है। इन बदलावों के तहत कुछ अतिरिक्त जानकारी भी देनी होगी, जैसे कि संगठन के सोशल मीडिया अकाउंट और उनके द्वारा प्रकाशित सामग्री।

 

परिवहन

Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)

कैबिनेट ने भारतीय एयरलाइंस के लिए ईंधन मूल्य स्थिरीकरण फंड को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तेल विपणन कंपनियों (ओएमसीज़) के लिए 10,000 करोड़ रुपए के फंड को मंजूरी दी है।[16]  इस फंड का उद्देश्य तय कीमतों वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के लिए भारतीय एयरलाइंस को मदद देना है। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट की वजह से कीमतों में उतार-चढ़ाव के बाद ये कीमतें तय की गई थीं। मार्च 2026 और मई 2026 के बीच अंतरराष्ट्रीय एटीएफ की कीमतें लगभग 2.5 गुना बढ़ गईं। फंड से ओएमसीज़ को बिना ब्याज वाले एडवांस के तौर पर मदद दी जाएगी। जब अंतरराष्ट्रीय एटीएफ की कीमतें सरकार द्वारा तय बेंचमार्क से ऊपर चली जाएंगी, तो यह रकम ओएमसीज़ को हुए नुकसान की भरपाई करेगी। जब अंतरराष्ट्रीय एटीएफ की कीमतें सामान्य हो जाएंगी, तो अंतर वाली राशि को ओएमसीज़ से वसूल कर भारत के कंसोलिडेटेड फंड में वापस जमा कर दी जाएगी।

यह व्यवस्था इसमें शामिल भारतीय एयरलाइंस और ओएमसीज़ के बीच एक समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) के ज़रिए लागू की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत, शामिल एयरलाइंस सालाना समीक्षा के आधार पर, तीन साल तक सिर्फ़ ओएमसीज़ से ही एटीएफ खरीदेंगी। एटीएफ की कीमत को स्थिर रखने में मदद देने वाली यह व्यवस्था 36 महीनों तक लागू रहेगी (जिसमें सालाना समीक्षा का प्रावधान होगा) या तब तक जब तक कि एडवांस रकम पूरी तरह वसूल न हो जाए—इनमें से जो भी पहले हो। नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और व्यय विभाग के प्रतिनिधियों से बनी एक निगरानी समिति सभी दावों और वसूली की देखरेख करेगी।

 

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट, 2013 में ड्राफ्ट संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने खाद्य सुरक्षा एक्ट, 2013 में संशोधन का ड्राफ्ट सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है।[17],[18]  यह एक्ट पात्र परिवारों को सबसिडी वाले अनाज उपलब्ध कराता है। इसमें अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के लाभार्थी शामिल हैं, जिन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से सबसे गरीब परिवारों को सबसिडी वाला अनाज मिलता है। एक्ट के तहत, एएवाई में आने वाले परिवार हर महीने 35 किलोग्राम अनाज पाने के हकदार हैं। संशोधन के ड्राफ्ट में ऐसे परिवारों के लिए अनाज की मात्रा को प्रति व्यक्ति प्रति माह सात किलोग्राम करने का प्रस्ताव है। संशोधनों में यह भी कहा गया है कि प्रति एएवाई परिवार अनाज की अधिकतम मात्रा 35 किलोग्राम प्रति माह होगी।

13 जुलाई, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

स्वास्थ्य

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

मेडिकल उपकरण नियम, 2017 में ड्राफ्ट संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मेडिकल उपकरण नियम, 2017 में संशोधन के लिए ड्राफ्ट जारी किया है, जिस पर सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं मांगी गई हैं।[19],[20]  2017 के नियम ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत जारी किए गए थे, जो भारत में दवाओं और कॉस्मेटिक्स के आयात, मैन्यूफैक्चरिंग, वितरण और बिक्री को रेगुलेट करते हैं।[21]  ये नियम उपकरणों को जोखिम की श्रेणी के आधार पर मैन्यूफैक्चरिंग लाइसेंस देने के लिए समय-सीमा तय करते हैं। उपकरणों को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है: (i) श्रेणी ए (जैसे बैंडेज और बेसिक सर्जिकल उपकरण), (ii) श्रेणी बी (जैसे हाइपोडर्मिक सुई और सक्शन उपकरण), (iii) श्रेणी सी (जैसे वेंटिलेटर), और (iv) श्रेणी डी (जैसे कार्डियक उपकरण)। ये नियम हर श्रेणी के लिए मैन्यूफैक्चरिंग लाइसेंस के आवेदनों पर कार्रवाई करने की समय-सीमा भी तय करते हैं। ड्राफ्ट में श्रेणी बी, सी और डी उपकरण के लिए लाइसेंसिंग की समय-सीमा कम करने और लाइसेंसिंग प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के लिए समय-सीमा को 10-15 दिन कम करने का प्रस्ताव है।

23 जुलाई, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

ड्रग्स नियम, 1945 में ड्राफ्ट संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स नियम, 1945 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। ये नियम ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत जारी किए गए हैं।[22]  यह एक्ट भारत में दवाओं और कॉस्मेटिक्स के आयात, मैन्यूफैक्चरिंग, वितरण और बिक्री को रेगुलेट करता है।21 मौजूदा नियमों के अनुसार, आयात की जाने वाली दवाओं की शेल्फ-लाइफ आयात के समय 60% से ज्यादा बची होनी चाहिए।[23]  संशोधन के ड्राफ्ट में इस नियम को बदलकर सभी दवाओं के लिए कम से कम एक साल की बची हुई शेल्फ-लाइफ की शर्त रखी गई है, जबकि बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स (जैसे वैक्सीन या इंसुलिन) और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स (जैसे कैंसर का पता लगाने में इस्तेमाल होने वाले इमेजिंग एजेंट) के लिए मौजूदा 60% वाली शर्त को बरकरार रखा गया है।

22 जुलाई, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवाओं के लिए ऑपरेशनल दिशानिर्देश जारी

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवाओं के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।[24]  ये दिशानिर्देश पूरे देश में एम्बुलेंस सेवाओं और इमरजेंसी मेडिकल सहायता को मानकीकृत करने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करते हैं। इसमें एम्बुलेंस सेवाओं और उनके वर्गीकरण, स्टाफिंग, उपकरणों, दवाओं, प्रशिक्षण, गुणवत्ता आश्वासन, वाहनों के रखरखाव और शिकायतों के समाधान जैसी बातें शामिल हैं।

इन दिशानिर्देशों में एकीकृत कमांड और डिस्पैच सेंटर बनाने की बात कही गई है, जिनमें जीपीएस-इनेबल्ड ट्रैकिंग, डिजिटल डिस्पैच सिस्टम, व्यवस्थित ट्राइएज प्रोटोकॉल और 112 इमरजेंसी हेल्पलाइन के साथ एकीकरण जैसी सुविधाएं होंगी। इसके अलावा रिस्पॉन्स टाइम और इमरजेंसी केयर कवरेज को बेहतर बनाने के लिए, ये दिशानिर्देश जीआईएस-आधारित प्लानिंग और एम्बुलेंस की तैनाती के लिए डेटा-आधारित तरीके अपनाने का सुझाव देते हैं। इसमें आबादी, बेड की उपलब्धता, क्रिटिकल केयर की तैयारी, इमरजेंसी की मांग और दुर्घटना वाले हॉटस्पॉट जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाएगा।  

 

खनन

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 अधिसूचित

कोयला मंत्रालय ने कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की है।[25]  ये नियम खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत अधिसूचित किए गए हैं, जिसमें खनिज एक्सचेंज स्थापित करने का प्रावधान है।[26] कोयला एक्सचेंज एक रजिस्टर्ड इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या मार्केटप्लेस है, जहां कोयले के खरीदार और विक्रेता व्यापार कर सकते हैं। इन नियमों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • अथॉरिटी के कार्य: कोयला नियंत्रक संगठन एक रेगुलेटरी अथॉरिटी होगी। इसके पास एक्सचेंज को रजिस्टर और रेगुलेट करने, कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी देने, निरीक्षण करने, मार्केट पर नज़र रखने और कुछ नियमों के उल्लंघन पर रजिस्ट्रेशन रद्द करने की शक्ति होगी। कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव या हेरफेर के मामलों में यह मार्केट में दखल भी दे सकती है।

  • कोयला एक्सचेंज का रजिस्ट्रेशन: ये नियम आवेदकों के लिए कोयला एक्सचेंज के तौर पर रजिस्टर होने की योग्यता की शर्तें तय करते हैं। अन्य शर्तों के अलावा, आवेदक का डीम्युचुअलाइज्ड (यानी मालिकाना हक और मैनेजमेंट, ट्रेडिंग अधिकारों से अलग) होना ज़रूरी है। रजिस्ट्रेशन 25 साल के लिए मान्य होगा। इन नियमों के लागू होने से पहले काम कर रही किसी भी संस्था को पहले खनिज एक्सचेंज के शुरू होने के छह महीने के अंदर रजिस्टर कराना होगा।

  • जोखिम प्रबंधन और शिकायत निवारण: कोयला एक्सचेंजों को जोखिम का आकलन और प्रबंधन करने वाली एक समिति बनानी होगी, जो समय-समय पर समीक्षा करेगी। सभी कोयला एक्सचेंजों को सेटलमेंट गारंटी फंड, क्लियरिंग और सेटलमेंट सिस्टम, और डिफॉल्ट से निपटने की प्रक्रियाएं तैयार करनी होंगी। एक्सचेंजों को सदस्यों और ग्राहकों के लिए शिकायत निवारण सिस्टम भी बनाना होगा और पहले से मंजूर एग्ज़िट प्लान भी रखना होगा।

खनन कानूनों के तहत ड्राफ्ट नियम जारी

खान मंत्रालय ने सार्वजनिक परामर्श के लिए खनिज (पूछताछ और अपील करने का तरीका) नियम, 2026 और अपतटीय क्षेत्र खनिज (पूछताछ और अपील करने का तरीका) नियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। ये नियम खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 और अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 2002 के तहत बनाए गए हैं।26,[27],[28]   जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) एक्ट, 2026 ने इन दोनों कानूनों के तहत शर्तों के उल्लंघन को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था और जेल को सज़ा की जगह सिविल जुर्माना लागू किया। नियमों के ड्राफ्ट में ऐसे उल्लंघनों के संबंध में पूछताछ, निर्णय और अपील की प्रक्रिया बताई गई है। मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अधिनिर्णय की प्रक्रिया: अंडर सेक्रेटरी या उससे ऊपर के पद का कोई अधिकारी, अधिनिर्णय अधिकारी के पास इन मामलों के संबंध में शिकायत दर्ज करा सकता है: (i) एक्ट के तहत बने नियमों का उल्लंघन, और (ii) एक्ट के तहत दिए गए मिनरल कंसेशन की शर्तों का उल्लंघन। अधिनिर्णय अधिकारी को उस व्यक्ति को 'कारण बताओ नोटिस' जारी करना होगा जिस पर उल्लंघन का आरोप है (जवाब देने के लिए कम से कम सात दिन का समय देना होगा)। अगर अधिकारी को लगता है कि जांच ज़रूरी है, तो उसे पेश होने का नोटिस जारी करना होगा। जांच का काम 'कारण बताओ नोटिस' जारी होने के छह महीने के अंदर पूरा हो जाना चाहिए। जुर्माना तय करते समय, अधिनिर्णय अधिकारी को इन बातों का ध्यान रखना होगा: (i) उल्लंघन का दायरा, (ii) अनुचित फ़ायदा, (iii) उल्लंघन कितनी बार और कितने समय तक हुआ, और (iv) नियमों के पालन का पिछला रिकॉर्ड।

  • संक्षिप्त निपटान: दोनों ड्राफ्ट नियम किसी व्यक्ति को न्यूनतम जुर्माना भरने और उल्लंघन को सुधारने की अनुमति देते हैं, बशर्ते वही उल्लंघन तीन बार से ज्यादा न हुआ हो।

11 जुलाई, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

विदेशी मामले

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

अनेक द्विपक्षीय वार्ताएं आयोजित

फ्रांस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस का दौरा किया।[29]  दोनों देशों ने महत्वपूर्ण तकनीक, नवाचार, अनुसंधान और टैलेंट मोबिलिटी में सहयोग के लिए एक रोडमैप को स्वीकृत किया है।[30] उन्होंने एयरोनॉटिक्स और उससे जुड़े क्षेत्र में दक्षता के लिए एक 'नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस' बनाने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए। अन्य अन्य पहलों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) एआई पर एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप, (ii) डिजिटल साइंस में सहयोग, (iii) फ्रांस में यूपीआई के लिए और संभावनाएं, (iv) फ्रांस में 10 और भारतीय स्टार्टअप्स का इनक्यूबेशन, (v) पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की व्यवस्था, (vi) आर्थिक सुरक्षा संवाद, (vii) हाई-स्पीड रेलवे सहयोग, और (viii) क्लासिफाइड जानकारी से जुड़ी सामान्य सुरक्षा समझौता।

म्यांमार

म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने द्विपक्षीय बातचीत के लिए भारत का दौरा किया।[31]  दोनों देश व्यापार, कनेक्टिविटी, रक्षा और सीमा सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए। भारत ने म्यांमार की संप्रभुता के प्रति अपना समर्थन दोहराया और दोनों देशों ने सीमा-पार खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प लिया।

मॉरीशस

प्रधानमंत्री ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की।[32]  दोनों देशों ने भारत समर्थित विशेष आर्थिक पैकेज के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की और बेहतर रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

सेशेल्स

प्रधानमंत्री की सेशेल्स यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में पांच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए: (i) राजनयिक प्रशिक्षण, (ii) डिजिटल भुगतान, (iii) कृषि अनुसंधान और शिक्षा, (iv) समुद्री कर्मियों के प्रशिक्षण और प्रमाणन को मान्यता देना, और (v) अंतरिक्ष सहयोग।[33] दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 'अम्ब्रेला लाइन ऑफ़ क्रेडिट' समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।

स्लोवाकिया

प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में छह समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए: (i) श्रमिक प्रवास, (ii) डिजिटल टेक्नोलॉजी, (iii) उच्च शिक्षा और अनुसंधान, (iv) ऑडियो-विजुअल क्रिएशन, (v) क्वांटम कम्युनिकेशन और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, और (vi) प्राकृतिक चिकित्सा।[34] अन्य समझौतों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) रक्षा सहयोग, (ii) स्टूडेंट एक्सचेंज और एकेडमिक सहयोग, और (iii) पर्यटन सहयोग। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक व्यापक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया और आतंकवाद-विरोधी संयुक्त कार्य समूह और कांसुलर डायलॉग मैकेनिज्म बनाने की घोषणा की।

 

कानून एवं न्याय

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

दिशा योजना 2030-31 तक बढ़ाई गई

कानून एवं न्याय मंत्रालय ने डिज़ाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (दिशा) योजना को 2030-31 तक, यानी पांच साल और जारी रखने की मंजूरी दे दी है।[35] यह योजना 2021 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य समाज के कमज़ोर वर्गों को मुफ़्त कानूनी सेवाएं देना है। नए सिरे से तैयार दिशा 2.0 के लिए 255 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। 2021-2026 के दौरान इस योजना का बजट 250 करोड़ रुपए था।


[1] Press note on provisional estimates of annual gross domestic product for 2025-26, Ministry of Statistics and Programme Implementation, June 5, 2026, https://www.mospi.gov.in/uploads/latestReleases/latest_release_1780655857536_5ac01869-ca4a-422d-b7a7-57b81da60932_Press_Note_on_GDP_Estimates_for_Q4_2025-26_and_PE_FY_2025-26_F.pdf.

[2] Monetary Policy Statement, 2025-26, Resolution of the Monetary Policy Committee, June 3 to 5, 2026, Reserve Bank of India, June 19, 2026, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR497566069F4A9384411AA35701E2062F1B2.PDF.

[3] Developments in India’s Balance of Payments during the Fourth Quarter (January-March) of 2025-26, Reserve Bank of India, June 8, 2026, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR41240BBD8F4D26044A4870F1BB7333DF7F9.PDF.

[4] The Income-Tax (Amendment) Ordinance, 2026, Ministry of Law and Justice, June 5, 2026,  https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/jun/doc202665883801.pdf.

[5] S.O 3030(E), Foreign Exchange Management (Non-debt Instruments) (Third Amendment) Rules, 2026, Ministry of Finance, June 12, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/273406.pdf.

[6] S.O.3732(E), Foreign Exchange Management (Non-debt Instruments) Rules, 2019, Ministry of Finance, October 17, 2019,  https://www.enforcementdirectorate.gov.in/media/fema/ab93a739-71e4-4db5-977d-d6652850de2d_Foreign%20Exchange%20Management%20(Non-Debt%20Instrument)%20Rules,%202019%20-%20without%20amendment_2.pdf.

[7] RBI Issues Amendment Directions on ‘Advertising, Marketing and Sale of Financial Products and Services by Regulated Entities’, Reserve Bank of India, June 15, 2026, https://rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=62938.

[8] RBI Issues Amendment Directions on ‘Review of Framework of Limiting Customer Liability in Digital Transactions’, Reserve Bank of India, June 24, 2026, https://www.rbi.org.in/scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=63011. 

[9] https://www.sebi.gov.in/reports-and-statistics/reports/jun-2026/consultation-paper-on-review-of-margin-trading-facility-mtf-framework_102211.html

[10] The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/15479/1/the_insolvency_and_bankruptcy_code%2C_2016.pdf.

[11]Insolvency and Bankruptcy Code, 2016, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/15479/1/the_insolvency_and_bankruptcy_code%2C_2016.pdf .

[12]  The IBC (Amendment) Act, 2026, https://ibbi.gov.in/uploads/legalframwork/2026-04-07-115842-i5nsk-7ed69ef2a4d23a8b0d472cc0fcd55e79.pdf.

[13] S.O. 3272(E), Foreign Contribution (Regulation) Amendment Rules, 2026, Ministry of Home Affairs, June 22, 2026,  https://fcraonline.nic.in/home/PDF_Doc/fc_gaz_23062026.pdf. 

[14] G.S.R. 348(E), Foreign Contribution (Regulation) Rules, 2011, Ministry of Home Affairs, April 29, 2011, https://fcraonline.nic.in/home/PDF_Doc/FC-rules2011.pdf.

[15] Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010, https://fcraonline.nic.in/home/PDF_Doc/FC-RegulationAct-2010-C.pdf.

[16] “Cabinet approves Price Stabilization Fund for Scheduled Indian Airlines towards ATF pricing”, Press Information Bureau, Ministry of Civil Aviation, June 3, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2268338&reg=48&lang=1.

[17] Draft National Food Security (Amendment) Bill, 2026, Department of Food and Public Distribution, June 23, 2026, 87b4c79f-0200-4a16-b6c4-1b841d8cb1bb_Inviting comments on NFS (Amendment) Bill, 2026.pdf.

[18] Food Safety and Standards Act, 2006, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/7800/1/200634_food_safety_and_standards_act,_2006.pdf.

[19] G.S.R. 515(E), Department of Health and Family Welfare, Ministry of Health and Family Welfare, June 23, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/273896.pdf.

[20] G.S.R. 78(E), Department of Health and Family Welfare, Ministry of Health and Family Welfare, January 31, 2017, https://cdsco.gov.in/opencms/resources/UploadCDSCOWeb/2022/m_device/Medical%20Devices%20Rules,%202017.pdf.

[21] The Drugs and Cosmetics Act, 1940, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/15278/1/drug_cosmeticsa1940-23.pdf.

[22] GSR 505(E), Ministry of Health and Family Welfare, June 22, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/273833.pdf. 

[23] The Drugs Rules, 1945, https://cdsco.gov.in/opencms/opencms/system/modules/CDSCO.WEB/elements/download_file_division.jsp?num_id=MTIwMjc=. 

[24] “Union Health Minister Shri Jagat Prakash Nadda Unveils Operational Guidelines on National Ambulance Services (NAS), 2026”, Ministry of Health and Family Welfare, Press Information Bureau, June 29, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2279073&reg=48&lang=2.

[25] Coal Exchange Rules, 2026, Ministry of Coal, June 4, 2026, https://www.coal.nic.in/sites/default/files/2026-06/09-06-2026a-wn.pdf.

[26] Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, https://mines.gov.in/admin/download/68ac5fc3960e81756127171.pdf.

[27] “Draft rules pursuant to the Jan Vishwas (Amendment of Provisions) Act, 2026”, Ministry of Mines, June 11, 2026, https://mines.gov.in/admin/download/6a2a7d55b84431781169493.pdf.

[28] Offshore Areas Mineral. (Development and Regulation) Act, 2002, https://mines.gov.in/admin/download/642d05c52d8361680672197.pdf.

[29] “List of outcomes: Visit of the Prime Minister to France”, Press Release, Ministry of External Affairs, June 14, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41305/List_of_outcomes_Visit_of_the_Prime_Minister_to_France.  

[30] “India-France Innovation Roadmap 2030 (June 14, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, June 15, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41306/IndiaFrance_Innovation_Roadmap_2030_June_14_2026.

[31]“India - Myanmar Joint Statement during the Official Visit of the President of Myanmar to India (May 30 – June 03, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, June 1, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41250/India__Myanmar_Joint_Statement_during_the_Official_Visit_of_the_President_of_Myanmar_to_India_May_30__June_03_2026.  

[32] “Prime Minister meets with the Prime Minister of Mauritius (June 28, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, June 28, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41372/Prime_Minister_meets_with_the_Prime_Minister_of_Mauritius_June_28_2026.  

[33] “List of Outcomes: State Visit of Prime Minister to Seychelles (June 27 – 29, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, June 28, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41370/List_of_Outcomes_State_Visit_of_Prime_Minister_to_Seychelles_June_27__29_2026.  

[34] “List of Outcomes during the visit of Hon’ble Prime Minister to Slovakia (June 14 - 15, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, June 15, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41309/List_of_Outcomes_during_the_visit_of_Honble_Prime_Minister_to_Slovakia_June_14__15_2026.  

[35] “Central Sector Scheme ‘Designing Innovative Solutions for Holistic Access to Justice’ (DISHA) 2.0 to Strengthen Holistic Access to Justice approved by Union Minister of State (I/C) for Law and Justice Shri Arjun Ram Meghwal” Press Information Bureau, Ministry of Law and Justice, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2276525&reg=3&lang=1.

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

हमें फॉलो करें

Copyright © 2026    prsindia.org    All Rights Reserved.