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जनवरी 2026

पीडीएफ

इस अंक की झलकियां

संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक संचालित किया जाएगा

बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ, जिसमें 30 बैठकें निर्धारित हैं। केंद्रीय बजट 1 फरवरी को प्रस्तुत किया गया। 14 फरवरी से 8 मार्च तक अवकाश रहेगा।

राष्ट्रपति ने संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित किया

भाषण में निवेश में वृद्धि, परिवहन नेटवर्क के विस्तार और स्वास्थ्य एवं सामाजिक न्याय योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला गया। साथ ही चार नई श्रम संहिताओं का भी उल्लेख किया गया जिनमें पुराने श्रम कानून शामिल हैं।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को संसद में पेश किया गया

सर्वेक्षण में 2026-27 में जीडीपी में 6.8% से 7.2% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। मुद्रास्फीति में धीरे-धीरे वृद्धि की उम्मीद है लेकिन यह 2% से 6% के दायरे में ही रहेगी। इसमें कहा गया है कि एफडीआई प्रवाह क्षमता से कम है।

2025-26 में जीडीपी में 7.4% की वृद्धि का अनुमान

मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में 7%, वित्तीय और सार्वजनिक सेवाओं में 9.9%, कृषि में 3.1% और निर्माण क्षेत्र में 7% की वृद्धि होने की उम्मीद है। कुल वृद्धि 2024-25 में दर्ज की गई 6.5% की वृद्धि से अधिक है।

भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए

इस समझौते का उद्देश्य व्यापार मूल्य के हिसाब से ईयू को होने वाले भारतीय निर्यात के 99% हिस्से को बाजार तक पहुंच प्रदान करना और व्यापार एवं विद्यार्थियों के आवागमन के लिए एक ढांचा तैयार करना है।

यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) के नियम अधिसूचित

इन नियमों के तहत प्रत्येक संस्थान में एक समान अवसर केंद्र स्थापित किया जाएगा। यूजीसी एक निगरानी समिति भी गठित करेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने इन नियमों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है।

कीटनाशक प्रबंधन बिल, 2025 का ड्राफ्ट टिप्पणियों के लिए जारी

बिल के ड्राफ्ट में केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति की स्थापना का प्रस्ताव है। इसमें कीटनाशकों के पंजीकरण, उनके उपयोग पर प्रतिबंध, कीटनाशक विषाक्तता से संबंधित प्रक्रिया, अपराधों और दंडों का प्रावधान है।

खान एवं खनिज एक्ट में संशोधन का ड्राफ्ट जारी

इस बिल का उद्देश्य अन्वेषण परमिट, अन्वेषण लाइसेंस और खनन पट्टे के लिए क्षेत्र सीमा को हटाना और अन्वेषण लाइसेंस की अवधि को युक्तिसंगत बनाना है।

वायु एवं जल कानूनों के अंतर्गत संशोधित समान सहमति दिशानिर्देश

नए दिशानिर्देश सहमतियों की वैधता को बढ़ाते हैं और पंजीकृत पर्यावरण ऑडिटर्स को अनुपालन सत्यापित करने की अनुमति देते हैं।

राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026 जारी

इन नियमों में राष्ट्रीय खेल निकायों में उत्कृष्ट प्रतिभा वाले खिलाड़ियों की नियुक्ति शामिल है। इनमें पात्रता मानदंड, चुनाव पैनल के सदस्यों की सूची और अयोग्यता के आधार भी निर्दिष्ट हैं।

 
 

संसद

Ruchira Sakalle (ruchira@prsindia.org)

संसद का बजट सत्र शुरू हुआ

संसद का बजट सत्र 28 जनवरी, 2026 को प्रारंभ हुआ।[1]  सत्र में 30 बैठकें होंगी और यह दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण 28 जनवरी, 2026 से 13 फरवरी, 2026 तक और दूसरा चरण 9 मार्च, 2026 से 2 अप्रैल, 2026 तक चलेगा। राष्ट्रपति ने 28 जनवरी, 2026 को संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को 29 जनवरी, 2026 को प्रस्तुत किया गया। केंद्रीय बजट 2026-27 को 1 फरवरी, 2026 को प्रस्तुत किया गया। सिर्फ फाइनांस बिल, 2026 को ही प्रस्तुत, विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

राष्ट्रपति ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

भारत की राष्ट्रपति सुश्री द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया।[2] उन्होंने अपने संबोधन में सरकार की प्रमुख नीतिगत उपलब्धियों और उद्देश्यों को स्पष्ट किया। संबोधन के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:

  • उद्योग और वाणिज्य: उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना ने लगभग दो लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है। 17 लाख करोड़ रुपए से अधिक का उत्पादन हासिल किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन 11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो पिछले 11 वर्षों में छह गुना बढ़ गया है। शिपिंग क्षेत्र के लिए 70,000 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की गई है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन: पिछले वर्ष लगभग 18,000 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण हुआ। भारत का मेट्रो नेटवर्क 1,000 किलोमीटर का आंकड़ा पार कर विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया है। पिछले एक दशक में गरीबों के लिए चार करोड़ से अधिक पक्के मकान बनाए गए हैं। जल जीवन मिशन के पांच वर्षों में 12.5 करोड़ परिवारों को पाइप से पानी का कनेक्शन दिया गया है।

  • श्रम, कौशल विकास और रोजगार सृजन: श्रमिकों के संरक्षण और कल्याण के लिए दर्जनों श्रम कानूनों को चार संहिताओं में शामिल किया गया है। विकसित भारत जी राम जी एक्ट (जिसने मनरेगा का स्थान लिया है) गांवों में 125 दिनों के गारंटीकृत रोजगार को सुनिश्चित करेगा। मुद्रा योजना के तहत लघु उद्यमियों को 38 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत 3.5 करोड़ से अधिक नए रोजगार सृजित किए जा रहे हैं।

  • स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत योजना के तहत, 2025 तक 11 करोड़ से अधिक निःशुल्क चिकित्सा उपचार प्रदान किए जा चुके हैं। देश भर में लगभग 1.8 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं।

  • कृषि: पिछले वर्ष 35 करोड़ टन से अधिक खाद्यान्न का उत्पादन हुआ। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को चार लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि दी गई है।

  • सामाजिक न्याय: पिछले एक दशक में 25 करोड़ नागरिकों ने गरीबी से मुक्ति पाई है। पिछले वर्ष प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से लाभार्थियों को 67 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई। लगभग 95 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण का सारांश देखने के लिए यहां देखें। पिछले वर्ष के अभिभाषण में की गई घोषणाओं की प्रगति के बारे में जानने के लिए यहां देखें।

 

अर्थव्यवस्था

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को संसद में पेश किया गया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 जनवरी, 2026 को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया।[3]  सर्वेक्षण की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी): वर्ष 2026-27 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। 2025-26 में जीडीपी में 7.4% की वृद्धि का अनुमान है, जो मुख्य रूप से घरेलू मांग से प्रेरित है। घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए निम्नलिखित कारक अनुकूल हैं: (i) परिवारों, फर्मों और बैंकों की बेहतर बैलेंस शीट, (ii) सार्वजनिक निवेश से मदद, (iii) उपभोग की मजबूत मांग और (iv) निजी कंपनियों के निवेश के बेहतर इरादे।

  • मुद्रास्फीति: खुदरा मुद्रास्फीति 2024-25 में 4.6% से घटकर 2025-26 (अप्रैल-दिसंबर) में 1.7% हो गई। इससे वास्तविक क्रय शक्ति में सुधार हुआ है और उपभोग को मदद मिली है। मुद्रास्फीति में गिरावट सब्जियों, दालों और मसालों जैसी खाद्य वस्तुओं की कम कीमतों के कारण हुई। यह अनुकूल मौसम और उच्च उत्पादन के कारण संभव हुआ। आरबीआई और आईएमएफ का अनुमान है कि 2026-27 में शीर्ष मुद्रास्फीति में 4% (±2%) के लक्ष्य सीमा के भीतर धीरे-धीरे वृद्धि होगी।

  • बाहरी क्षेत्र: 2025-26 की पहली छमाही में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 0.8% था, जो 2024-25 की पहली छमाही (जीडीपी का 1.3%) से कम है। 2025 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह 81 अरब USD था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13% अधिक है। सर्वेक्षण में पाया गया कि अनुकूल व्यापक आर्थिक आधारभूत कारकों के बावजूद, एफडीआई प्रवाह अपनी क्षमता से कम बना हुआ है।

  • सरकारी वित्त: केंद्र सरकार द्वारा 2025-26 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.5% से नीचे रखने का अनुमान है। केंद्र की राजस्व प्राप्ति में मजबूती आई है, जो 2016-20 के दौरान जीडीपी के 8.5% से बढ़कर 2022-25 के दौरान जीडीपी के 9.1% हो गई है। व्यय के मामले में सबसिडी में कमी के कारण राजस्व व्यय में कमी आई है। साथ ही, केंद्र सरकार का प्रभावी पूंजीगत व्यय (पूंजीगत परिसंपत्तियों के लिए अनुदान सहित) जीडीपी के औसत 2.7% से बढ़कर 2024-25 में जीडीपी के 4% हो गया है। राज्यों का कुल राजकोषीय घाटा 2024-25 में जीडीपी के 3.2% तक बढ़ गया। केवल 11 राज्यों ने 2024-25 में राजस्व अधिशेष दर्ज किया। राज्यों में नकद हस्तांतरण पर बढ़ती निर्भरता व्यय संबंधी लचीलेपन को लेकर चिंताएं पैदा करती है।

आर्थिक सर्वेक्षण के सारांश के लिए कृपया देखें।

 

मैक्रोइकोनॉमिक विकास

Shania Ali (shania@prsindia.org)

भारत की जीडीपी में 2025-26 में 7.4% की वृद्धि का अनुमान

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार, भारत की जीडीपी में 2025-26 में 7.4% (स्थिर कीमतों पर) की वृद्धि होने का अनुमान है।[4]  2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 2024-25 (6.5%) की तुलना में अधिक रहने का अनुमान है।

रेखाचित्र 1: वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर (2011-12 की स्थिर कीमतों पर)

स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; पीआरएस।

विभिन्न क्षेत्रों की जीडीपी को सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) के रूप में मापा जाता है। 2025-26 में वित्तीय और सार्वजनिक सेवाओं में सबसे अधिक वृद्धि (प्रत्येक में 9.9%) दर्ज होने का अनुमान है, इसके बाद व्यापार (7.5%) और निर्माण और मैन्यूफैक्चरिंग (प्रत्येक में 7.0%) का स्थान रहेगा।

 

तालिका 1: वार्षिक क्षेत्रीय वृद्धि (स्थिर मूल्य पर 2011-12)

क्षेत्र

2023-24

2024-25

2025-26

कृषि

2.7%

4.6%

3.1%

खनन

3.2%

2.7%

-0.7%

मैन्यूफैक्चरिंग

12.3%

4.5%

7.0%

बिजली

8.6%

5.9%

2.1%

निर्माण

10.4%

9.4%

7.0%

व्यापार

7.5%

6.1%

7.5%

वित्तीय सेवाएं

10.3%

7.2%

9.9%

सार्वजनिक सेवाएं

8.8%

8.9%

9.9%

जीवीए

8.6%

6.4%

7.3%

जीडीपी

9.2%

6.5%

7.4%

स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; पीआरएस।

2025-26 की तीसरी तिमाही में सीपीआई मुद्रास्फीति औसतन 0.76% रही

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 0.76% रही, जो 2024-25 की तीसरी तिमाही में 5.64% थी।[5] 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में सीपीआई मुद्रास्फीति 1.71% थी।

2025-26 की तीसरी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति -3.88% रही, जो 2024-25 की इसी तिमाही में 9.43% की तुलना में काफी कम है। 2025-26 की दूसरी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति -1.58% थी।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति 2025-26 की तीसरी तिमाही में -0.17% रही, जो 2024-25 की इसी तिमाही में 2.43% थी।[6]  2025-26 की दूसरी तिमाही में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति 0.04% थी।

रेखाचित्र 2: वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में मासिक मुद्रास्फीति (प्रतिशत परिवर्तन, वर्ष-दर-वर्ष)

स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय; पीआरएस।

वाणिज्य एवं उद्योग

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है।[7] इस समझौते के तहत भारत के 99% निर्यात (मूल्य के हिसाब से) को यूरोपीय संघ में बाज़ार पहुंच प्राप्त होगी। समझौते की प्रमुख विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) वस्त्र और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भारत के लगभग 33 अरब USD के निर्यात पर यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए टैरिफ को हटाना, (ii) भारत को यूरोपीय संघ के 144 उपक्षेत्रों जैसे आईटी, व्यवसाय और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच प्रदान करना, (iii) व्यापार और विद्यार्थियों के आवागमन के लिए सुगम ढांचा प्रदान करना, और (iv) यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में, जहां पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को रेगुलेट नहीं किया जाता है, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को स्वदेशी स्वामित्व के तहत पहुंच प्रदान करना।

इस मुक्त व्यापार समझौते का उद्देश्य वित्तीय सेवाओं में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना भी है।[8] इसमें सीमा पार डिजिटल भुगतान, फिनटेक इनोवेशन (रेगुलेटरी और सुपरवाइजरी तकनीक सहित), भेदभावपूर्ण क्रेडिट रेटिंग पद्धतियों के खिलाफ सुरक्षा उपाय और बीमा और बैंकिंग क्षेत्रों में बेहतर मार्केट एक्सेस प्रतिबद्धताओं पर सहयोग शामिल है। 2024-25 तक यूरोपीय संघ के साथ भारत का द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 137 अरब USD था। 2024 में भारत-यूरोपीय संघ का सेवा व्यापार 83 अरब USD था।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति की भारत की राजकीय यात्रा

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 19 जनवरी, 2026 को भारत की राजकीय यात्रा की। इस यात्रा के दौरान, भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने कई क्षेत्रों में अनेक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और आशय पत्रों (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए।[9] 

प्रमुख समझौतों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सामरिक रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क समझौते की स्थापना के लिए एक सूचना पत्र (एलओआई), (ii) 2028 से शुरू होने वाली 10 वर्षों की अवधि के लिए अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा द्रवीकृत प्राकृतिक गैस की खरीद के लिए एक समझौता, (iii) खाद्य क्षेत्र में व्यापार के लिए गुणवत्ता मानकों हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू), (iv) गुजरात के धोलेरा में विशेष निवेश क्षेत्र के विकास के लिए यूएई द्वारा निवेश सहयोग हेतु एक सूचना पत्र (एलओआई), और (v) अंतरिक्ष अवसंरचना के विकास में सहयोग को बढ़ावा देने हेतु एक सूचना पत्र (एलओआई)। अन्य घोषणाओं में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर की स्थापना, (ii) 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 अरब USD से अधिक करना, और (iii) नागरिक परमाणु ऊर्जा में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना।9

जर्मनी के चांसलर की भारत की राजकीय यात्रा

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने 12-13 जनवरी, 2026 को भारत की राजकीय यात्रा की।[10]  इस यात्रा के दौरान भारत और जर्मनी ने 12 संयुक्त आशय घोषणापत्रों (डीओआई), 5 समझौता ज्ञापनों और दो अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रमुख समझौतों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) औद्योगिक रक्षा, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और महत्वपूर्ण खनिजों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए संयुक्त आशय घोषणापत्र, और (ii) ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में विभिन्न भारतीय और जर्मन संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन।[11]  प्रमुख घोषणाओं में जर्मनी से होकर गुजरने वाले भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा मुक्त पारगमन और विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद की स्थापना शामिल है।

डिजाइन एक्ट, 2000 में संशोधन के प्रस्ताव पर टिप्पणियां आमंत्रित

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने डिजाइन एक्ट, 2000 में संशोधन के प्रस्ताव वाले एक कॉन्सेप्ट नोट पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[12],[13]  यह एक्ट भौतिक वस्तुओं और मैन्यूफैक्चरिंग प्रक्रियाओं के डिजाइन की सुरक्षा के लिए लागू किया गया था। संशोधनों का उद्देश्य भारत के डिजाइन संरक्षण फ्रेमवर्क का आधुनिकीकरण करना है और इसमें ग्राफिक और एनिमेटेड डिजाइन भी शामिल हैं। इस प्रस्ताव में प्रमुख टिप्पणियां और संशोधन इस प्रकार हैं:

  • वर्चुअल डिज़ाइनों का संरक्षण: वर्तमान में डिज़ाइन एक्ट डिज़ाइन और वस्तु की परिभाषा को मूर्त वस्तुओं और उन पर लागू दृश्य विशेषताओं तक सीमित रखता है। यह प्रस्ताव 'डिज़ाइन' की परिभाषा का विस्तार करके उसमें वर्चुअल डिज़ाइन को शामिल करने और 'वस्तु' की परिभाषा में गैर-भौतिक वस्तुओं जैसे कि ग्राफिकल यूजर इंटरफेस, टाइपफेस, आइकन और एनिमेटेड कैरेक्टर को शामिल करने का सुझाव देता है।

  • डिज़ाइन-कॉपीराइट इंटरफेस: डिज़ाइन एक्ट, 2000 और कॉपीराइट एक्ट, 1957 के डिज़ाइन संबंधी प्रावधानों के अतिव्यापी होने के कारण कानूनी अस्पष्टता और परस्पर विरोधी व्याख्याएं उत्पन्न हुई हैं। वर्तमान में, डिज़ाइन एक्ट, 2000 के अंतर्गत पंजीकृत सभी डिज़ाइन कॉपीराइट एक्ट, 1957 के अंतर्गत कॉपीराइट संरक्षण से वंचित हैं। ऐसे कार्यों के लिए जिन्हें डिज़ाइन एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत किया जा सकता है लेकिन वे अपंजीकृत हैं, ऐसे अपंजीकृत डिज़ाइनों के 50 से अधिक बार पुनरुत्पादन के बाद कॉपीराइट संरक्षण समाप्त हो जाता है। इस नोट में कॉपीराइट एक्ट, 1957 में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि उन डिज़ाइनों को कॉपीराइट संरक्षण प्रदान किया जा सके जो पंजीकरण योग्य हैं लेकिन अपंजीकृत हैं। यह संरक्षण 15 वर्षों तक सीमित रहेगा।

  • रियाद डिज़ाइन विधि संधि: भारत ने 2024 में रियाद डिज़ाइन विधि संधि (डीएलटी) पर हस्ताक्षर किए। डीएलटी कागजी कार्रवाई और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को कम करके डिज़ाइन पंजीकरण को सरल बनाती है। इस नोट में व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए संधि में शामिल होने का प्रस्ताव है।

  • हेग समझौता: इसमें हेग समझौते (1999) में शामिल होने का भी प्रस्ताव है। इससे डिज़ाइनरों और व्यवसायों को एक ही अंतरराष्ट्रीय आवेदन के माध्यम से कई देशों में अपने डिज़ाइनों को संरक्षित करने की सुविधा मिलेगी। इसके निम्नलिखित उद्देश्य हैं: (i) स्टार्टअप और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए प्रशासनिक लागत को कम करना, और (ii) विदेशी आवेदकों के लिए भारत में डिज़ाइन संरक्षण प्राप्त करना आसान बनाना।

  • प्रकाशन में देरी और हर्जाना: वर्तमान में डिज़ाइन एक्ट आवेदकों को प्रकाशन में देरी का विकल्प प्रदान नहीं करता है। डिज़ाइन पंजीकरण के तुरंत बाद प्रकाशित हो जाते हैं। इस नोट में आवेदक के अनुरोध पर पंजीकृत डिज़ाइनों के प्रकाशन में देरी के लिए एक तंत्र शुरू करने का प्रस्ताव है। नोट में अधिकतम 30 महीने की देरी का प्रस्ताव है।

22 फरवरी, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।   

 

शिक्षा

Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)

यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी) रेगुलेशन, 2026 जारी; सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाने का आदेश दिया

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) रेगुलेशंस, 2026 जारी किए।[14]  ये रेगुलेशन यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) रेगुलेशंस, 2012 का स्थान लेते हैं।[15]  2026 के रेगुलेशंस के जारी होने के दो सप्ताह बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इसके कार्यान्वयन पर रोक लगा दी और कहा कि 2012 के रेगुलेशन ही लागू रहेंगे।[16]  न्यायालय ने कहा कि 2026 रेगुलेशंस के कुछ प्रावधानों में अस्पष्टता है और इनका दुरुपयोग किया जा सकता है।

2026 के रेगुलेशंस की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

    •  
  • समानता को बढ़ावा देना: सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) का यह कर्तव्य होगा कि वे भेदभाव को समाप्त करें और सभी हितधारकों के बीच समानता को बढ़ावा दें। सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को जाति, पंथ, धर्म, भाषा, जातीयता, लिंग या विकलांगता के आधार पर भेदभाव को रोकने के लिए उपाय करने होंगे।

  • समान अवसर केंद्र: सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को एक समान अवसर केंद्र (ईओसी) स्थापित करना अनिवार्य होगा। यह केंद्र वंचित समूहों के लिए नीतियां और कार्यक्रम लागू करेगा। इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए यह राज्य और जिला स्तरीय कानूनी सेवा प्राधिकरणों, नागरिक समाज, मीडिया और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करेगा। उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा नियुक्त एक प्रोफेसर या वरिष्ठ संकाय सदस्य समन्वयक होंगे। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजनों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना अनिवार्य है।

  • समानता समिति: ईओसी के संचालन के प्रबंधन के लिए एक समानता समिति होगी। इसमें नौ सदस्य होंगे, जिनकी अध्यक्षता संस्थान के प्रमुख करेंगे। इसमें शिक्षण और गैर-शिक्षण संकाय, विद्यार्थियों के प्रतिनिधि और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि सदस्य होंगे।

  • समानता समिति के कार्य: समिति निम्नलिखित कार्य करेगी: (i) सामाजिक समावेशन के संबंध में जागरूकता पैदा करना, (ii) भेदभाव माने जाने वाले कृत्यों की सूची तैयार करना, (iii) भेदभाव की घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाना, और (iv) वंचित समूहों से संबंधित विद्यार्थियों के प्रवेश के लिए समावेशी प्रक्रिया तैयार करना।

  • समिति को भेदभाव की शिकायत दर्ज होने के 24 घंटों के भीतर कार्रवाई करनी होगी। उसे 15 दिनों के भीतर संस्था प्रमुख को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। समिति की रिपोर्ट के विरुद्ध यूजीसी ओम्बड्सपर्सन के समक्ष 30 दिनों के भीतर अपील की जा सकती है।

  • निगरानी समिति: यूजीसी रेगुलेशंस के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय समिति का गठन करेगा। इस समिति में वैधानिक व्यावसायिक परिषदों और नागरिक समाजों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। रेगुलेशंस का अनुपालन न करने की स्थिति में, यूजीसी उच्च शिक्षा संस्थान को निम्नलिखित से वंचित कर सकता है: (i) डिग्री और ऑनलाइन प्रोग्राम पेश करना, (ii) यूजीसी योजनाओं में भाग लेना, या (iii) यूजीसी मान्यता प्राप्त करना।

उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर समान नीति संबंधी यूजीसी दिशानिर्देश प्रसारित

यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) के लिए मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर समान नीति के दिशानिर्देश जारी किए हैं।[17] यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप, उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य इकोसिस्टम के लिए एक ढांचा प्रदान करती है। इसके तहत उच्च शिक्षा संस्थानों को एक मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण सहायता केंद्र (सहायता केंद्र) और एक मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र निगरानी समिति (निगरानी समिति) स्थापित करना अनिवार्य है। यूजीसी इस नीति के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए जिम्मेदार होगा। नीति की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • सहायता केंद्र और निगरानी समिति की भूमिका: सहायता केंद्र निम्नलिखित कार्यों के लिए उत्तरदायी होगा: (i) हितधारकों के बीच मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पैदा करना, (ii) विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए शिक्षकों का क्षमता निर्माण करना, (iii) मानसिक स्वास्थ्य पर सर्वेक्षण और अनुसंधान करना। निगरानी समिति सहायता केंद्रों से डेटा एकत्र करेगी और उसे गोपनीय बनाए रखेगी। यह उच्च शिक्षा संस्थान और यूजीसी के बीच संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगी।

  • एचईआई की भूमिका: उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिकाओं में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) 1:500 विद्यार्थियों के अनुपात में संकाय सलाहकारों की नियुक्ति, (ii) 1:100 विद्यार्थियों के अनुपात में विद्यार्थी सहायता प्रदान करना, (iii) उच्च शिक्षा संस्थान की हेल्पलाइन को टेली-मानस हेल्पलाइन से जोड़ना, और (iv) कॉलेजों में परामर्श, दवा, तनाव प्रबंधन प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ सहयोग करना।

  • नीति में उच्च शिक्षा संस्थानों में तत्परता और संकट प्रबंधन स्थापित करने का प्रावधान है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आत्महत्या रोकथाम अवसंरचना, (ii) जोखिम मूल्यांकन, और (iii) संकटोत्तर सहायता।

 

कृषि

Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)

कीटनाशक प्रबंधन बिल, 2025 का ड्राफ्ट टिप्पणियों के लिए जारी

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कीटनाशक प्रबंधन बिल, 2025 का ड्राफ्ट टिप्पणियों के लिए जारी किया है।[18]  इस बिल का उद्देश्य कीटनाशकों के निर्माण, आयात, बिक्री, स्टोरेज, वितरण, उपयोग और निपटान को रेगुलेट करना है। इसका उद्देश्य कीटनाशक एक्ट, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 का स्थान लेना है।[19],[20] कीटनाशकों को रेगुलेट करने के लिए एक अन्य बिल भी पेश किया गया है जो वर्तमान में राज्यसभा में लंबित है। उसकी कृषि, पशुपालन एवं खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी द्वारा भी जांच की गई है। ड्राफ्ट बिल में प्रमुख प्रस्तावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड: ड्राफ्ट बिल में एक्ट के अंतर्गत उत्पन्न होने वाले वैज्ञानिक और तकनीकी मामलों पर केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देने के लिए एक केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड के गठन का प्रस्ताव है। यह बोर्ड निम्नलिखित कार्य भी करेगा: (i) कीटनाशकों को अनुसूची (पंजीकृत कीटनाशकों की अधिसूचित सूची) में शामिल करने की अनुशंसा करना, (ii) कीटनाशकों और उनकी सुरक्षा पर अनुसंधान करना, (iii) कीटनाशक विषाक्तता के मामलों से निपटने के लिए प्रोटोकॉल तैयार करना, और (iv) कीटनाशकों के अच्छी मैन्यूफैक्चरिंग पद्धतियों, निपटान, विज्ञापन मानकों और प्रयोगशाला परीक्षण पर केंद्र सरकार को सलाह देना।

  • पंजीकरण समिति: ड्राफ्ट बिल में पंजीकरण समिति की स्थापना का प्रस्ताव है, जिसके निम्नलिखित कार्य हैं: (i) कीटनाशकों के पंजीकरण की देखरेख करना, (ii) पंजीकृत कीटनाशकों की सुरक्षा और प्रभावशीलता की समीक्षा करना, (iii) पंजीकरण रद्द करना या उसमें संशोधन करना, और (iv) कीटनाशकों का एक राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्टर रखना।

  • कीटनाशकों का पंजीकरण: सामान्य या व्यावसायिक उपयोग के लिए कीटनाशक आयात या निर्माण करने के इच्छुक व्यक्तियों को पंजीकरण समिति से कीटनाशक का पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा। एक से अधिक कीटनाशकों के आयात या निर्माण के लिए अनेक आवेदन करने होंगे। पंजीकरण समिति को पंजीकरण प्रदान करने या अस्वीकार करने के कारणों को दर्ज करना और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

  • कुछ कीटनाशकों पर प्रतिबंध: केंद्र या राज्य सरकार किसी कीटनाशक या कीटनाशकों के समूह के वितरण, बिक्री या उपयोग पर एक वर्ष तक प्रतिबंध लगा सकती है, यदि इसके उपयोग से मानव स्वास्थ्य या अन्य जीवित प्राणियों को खतरा हो सकता है। इस प्रतिबंध में ऐसे कीटनाशक या कीटनाशकों के समूह की बिक्री, वितरण या उपयोग पर प्रतिबंध शामिल होगा।

  • लाइसेंस: कीटनाशक का निर्माण, वितरण, बिक्री के लिए प्रदर्शन, भंडारण या कीट नियंत्रण कार्य करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को लाइसेंसिंग अधिकारी से लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक होगा। बिल के अंतर्गत किसी अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

4 फरवरी, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

खनन एवं कोयला

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

खनिज रियायत नियमावलि, 1960 में संशोधन का ड्राफ्ट सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी

कोयला मंत्रालय ने खनिज रियायत नियमावलि, 1960 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है।[21]  ये नियम खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत बनाए गए हैं।[22]  इस ड्राफ्ट का उद्देश्य खनन पट्टे में अन्य खनिजों को शामिल करने को रेगुलेट करना है। प्रमुख प्रस्तावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • खनिजों को शामिल करने हेतु आवेदन एवं स्वीकृति: खनन पट्टाधारक पट्टे में किसी भी अतिरिक्त खनिज को शामिल करने के लिए आवेदन कर सकता है। राज्य सरकार को ऐसे आवेदन पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य है। यदि किसी अन्य खनिज के लिए पट्टे में कोयला या लिग्नाइट शामिल किया जाता है, या इसके विपरीत, तो पट्टाधारक को शामिल किए जाने के 30 दिनों के भीतर केंद्र सरकार को सूचित करना होगा। यदि कोयला या लिग्नाइट के पट्टे में कोयला और लिग्नाइट के अलावा अन्य खनिज शामिल किए जाते हैं, तो उन अन्य खनिजों पर लागू होने वाले नियम लागू होंगे।

  • खनन पट्टे में कोयला या लिग्नाइट का समावेश: किसी खनन पट्टे में कोयला या लिग्नाइट के समावेश की अनुमति देने से पहले, राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि: (i) संभावित खनिज क्षेत्र में कोयला और लिग्नाइट के लिए पूर्वेक्षण कार्य किए गए हों, (ii) एक भूवैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार और अनुमोदित की गई हो, और (iii) कोयला और लिग्नाइट के लिए एक खनन योजना तैयार और अनुमोदित की गई हो।

  • लघु खनिज पट्टे में कोयले या लिग्नाइट की खोज: यदि किसी लघु खनिज पट्टे के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में कोयले या लिग्नाइट की खोज होती है, तो पट्टाधारक को नियमों की अधिसूचना के छह महीने के भीतर या खोज के 60 दिनों के भीतर, जो भी बाद में हो, इसकी सूचना देनी होगी। राज्य सरकार को मौजूद खनिजों की मात्रा और प्रकार, कोयले और लिग्नाइट की मात्रा और श्रेणी, लघु खनिजों की मात्रा और गुणवत्ता तथा खनिज संसाधनों के अनुमानित मूल्य के संबंध में केंद्र सरकार से परामर्श करना आवश्यक है।

  • यदि कोयले या लिग्नाइट की अनुमानित मात्रा या मूल्य, अन्य सूक्ष्म खनिजों की अनुमानित मात्रा या मूल्य के 25% से अधिक हो, तो राज्य सरकार, केंद्र सरकार से परामर्श करके, सूक्ष्म खनिज पट्टा समाप्त कर देगी। केंद्र सरकार कोयले या लिग्नाइट पट्टा देने के लिए क्षेत्र आवंटित करेगी। यदि कोयले या लिग्नाइट का अनुमानित मूल्य 25% या उससे कम है, तो राज्य सरकार सूक्ष्म खनिज पट्टा में कोयले या लिग्नाइट को शामिल करने की अनुमति दे सकती है।

  • वित्तीय दायित्व: यदि किसी लघु खनिज पट्टे में कोयला या लिग्नाइट शामिल है, तो पट्टाधारक को 1957 के एक्ट के तहत निर्दिष्ट अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। यदि पट्टा नीलाम किया गया था और नीलामी प्रीमियम का संबंध प्रेषित खनिज के मूल्य से नहीं था, तो पट्टाधारक को शामिल खनिजों की रॉयल्टी के बराबर राशि का भुगतान करना होगा। पट्टाधारक को निकाले और प्रेषित खनिजों, उत्खनित अपशिष्ट पदार्थों, कर्मचारियों के विवरण और अनुमोदित खनन योजनाओं का लेखा-जोखा भी रखना होगा।

6 फरवरी, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

खान एवं खनिज (विकास एवं रेगुलेशन) एक्ट में संशोधन का ड्राफ्ट जारी

कोयला मंत्रालय ने खान एवं खनिज (विकास एवं रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है।[23],[24]  खान एवं खनिज (विकास एवं रेगुलेशन) एक्ट, 1957 भारत में खनिजों के रेगुलेशन, विकास और संरक्षण तथा खनन अधिकारों के अनुदान को नियंत्रित करता है।[25] प्रस्तावित संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • खनिज रियायतों पर क्षेत्रफल सीमा हटाना: एक्ट के तहत, खनिज रियायत प्राप्त करने के लिए अनुमत अधिकतम क्षेत्रफल इस प्रकार है: (i) टोही परमिट के लिए 10,000 वर्ग किलोमीटर, (ii) अन्वेषण लाइसेंस के लिए 5,000 वर्ग किलोमीटर, (iii) पूर्वेक्षण लाइसेंस के लिए 25 वर्ग किलोमीटर, और (iv) खनन पट्टा के लिए 10 वर्ग किलोमीटर। ड्राफ्ट बिल इन तीनों रियायतों के लिए इन क्षेत्रफल सीमाओं को हटाने का प्रस्ताव करता है।

  • अन्वेषण लाइसेंस की अवधि में संशोधन: एक्ट के तहत, अन्वेषण लाइसेंस या सर्वेक्षण परमिट अधिकतम तीन वर्ष के लिए प्रदान किया जा सकता है, जिसे राज्य सरकार द्वारा दो वर्ष के लिए और बढ़ाया जा सकता है। ड्राफ्ट बिल में निम्नलिखित प्रस्ताव हैं: (i) गहरे खनिजों के लिए अन्वेषण लाइसेंस की अवधि को तीन वर्ष और अन्य खनिजों के लिए दो वर्ष तक संशोधित करना, और (ii) सर्वेक्षण परमिट के लिए निर्धारित समय सीमा को हटाना, क्योंकि इस धारा में सर्वेक्षण परमिट प्रदान करने के लिए अब कोई अलग प्रावधान नहीं है।

  • केंद्र सरकार द्वारा अन्वेषण लाइसेंस की नीलामी: 1957 का एक्ट राज्य सरकारों के माध्यम से महत्वपूर्ण और गहरे भंडारों के अन्वेषण लाइसेंस प्रदान करने का प्रावधान करता है। अक्टूबर 2024 में, खान मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर केंद्र सरकार को अन्वेषण लाइसेंस की नीलामी करने का अधिकार दिया। ड्राफ्ट बिल इस आदेश के प्रावधानों को एक्ट में शामिल करने का प्रयास करता है।

  • खानों को चालू करने की अवधि कम करना: 1957 के एक्ट के तहत, यदि पट्टा निष्पादन की तिथि से दो वर्ष के भीतर उत्पादन और प्रेषण शुरू नहीं होता है या उत्पादन या प्रेषण बंद हो जाता है, तो खनन पट्टा समाप्त हो जाता है। राज्य सरकारों को इस अवधि को एक वर्ष के लिए बढ़ाने की अनुमति है। ड्राफ्ट बिल में राज्यों को इस प्रकार के विस्तार प्रदान करने की शक्ति को समाप्त करने का प्रस्ताव है।

खनिज (नीलामी) नियम, 2015 में संशोधन का ड्राफ्ट सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी

खान मंत्रालय ने खनिज नीलामी नियम, 2015 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किए हैं।[26],[27]  ये नियम खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत बनाए गए हैं।[28]  ड्राफ्ट नियमों में खानों के संचालन में तेजी लाने के लिए खनन और मिश्रित पट्टों के आंशिक निष्पादन का प्रस्ताव है। प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं:

  • वन क्षेत्र अपवर्जन: ड्राफ्ट नियमों में प्रस्ताव है कि राज्य सरकार किसी अधिमान्य बोलीदाता को वन भूमि में आने वाले ब्लॉक के हिस्से को बाहर करने की अनुमति दे सकती है, यदि: (i) वन भाग ब्लॉक के किनारे पर स्थित है, या (ii) कुल अनुमानित खनिज संसाधनों के 20% से कम है।

  • आंशिक पट्टा निष्पादन: ड्राफ्ट नियमों में प्रस्ताव है कि यदि खनिज ब्लॉक में गहरे स्तर पर खनिज भंडार नहीं है, तो अधिमान्य बोलीदाताओं को वन और गैर-वन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग खनन पट्टा निष्पादित करने की अनुमति दी जा सकती है। आंशिक पट्टा निष्पादन की स्थिति में, आवश्यक अग्रिम भुगतान में कोई कमी नहीं होगी। आंशिक पट्टा निष्पादन की स्थिति में, खदान का विकास और उत्पादन दो भागों में किया जाएगा: (i) गैर-वन भाग, और (ii) शेष भाग के लिए परमिट और अनापत्ति मंजूरी प्राप्त होने के बाद पूर्ण ब्लॉक क्षेत्र।

  • अग्रिम भुगतान में संशोधन: 2015 के नियमों के अनुसार अनुमानित खनिज संसाधन के मूल्य का 0.5% अग्रिम भुगतान अनिवार्य था। ड्राफ्ट नियमों में यह जोड़ा गया है कि महत्वपूर्ण, रणनीतिक और गहरे स्तर पर स्थित खनिजों के अलावा अन्य खनिजों वाले खनिज ब्लॉकों के लिए अग्रिम भुगतान खनिज संसाधनों के अनुमानित मूल्य का 1.5% होगा।

  • नियमों के ड्राफ्ट में यह निर्दिष्ट था कि किसी खदान विकास एवं उत्पादन समझौते के निष्पादन के लिए, समग्र लाइसेंस धारक को दूसरी किस्त के तहत अग्रिम भुगतान का 20% भुगतान करना आवश्यक था। नियमों के ड्राफ्ट में इस आवश्यकता को हटा दिया गया है।

  • ऑनलाइन पोर्टल: नियमों के ड्राफ्ट में एक एकीकृत ऑनलाइन खनन पोर्टल स्थापित करने का प्रस्ताव है। अग्रिम भुगतान और प्रदर्शन सुरक्षा प्राप्त होने पर आशय पत्र स्वतः जारी कर दिया जाएगा।

23 फरवरी, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

पर्यावरण

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

पर्यावरण (संरक्षण) निधि के नियम अधिसूचित किया

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) निधि नियम, 2026 को अधिसूचित किया है।[29]  यह निधि पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के अंतर्गत स्थापित की गई है।[30] 

वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) एक्ट, 1981, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) एक्ट, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के अंतर्गत लगाए गए सभी जुर्माने इस निधि में जमा किए जाएंगे।

इस निधि का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाएगा: (i) पर्यावरण निगरानी उपकरणों की स्थापना और रखरखाव, (ii) पर्यावरण प्रयोगशालाओं का विकास और उन्नयन, (iii) स्वच्छ प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान, (iv) पर्यावरण क्षति का आकलन और निवारण, (v) विभिन्न प्राधिकरणों की क्षमता निर्माण, (vi) प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और शमन, और (vii) निधि के प्रशासनिक व्यय (निधि के अंतर्गत उपलब्ध राशि के 5% से अधिक नहीं)।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इस निधि के प्रशासन के लिए प्राथमिक प्राधिकरण होगा और केंद्र एवं राज्य स्तर पर समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाइयां गठित की जाएंगी।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है।[31]  ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का स्थान लेते हैं।[32],[33] 2026 के नियम 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे। ये नियम ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक ढांचा निर्दिष्ट करते हैं और सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों जैसी विभिन्न संस्थाओं के कर्तव्यों को भी निर्धारित करते हैं। 2026 के नियमों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • एप्लिकेबिलिटी: 2016 के नियम शहरी स्थानीय निकायों, शहरी समूह के बाहरी क्षेत्रों, जनगणना कस्बों और औद्योगिक टाउनशिप तथा कुछ निर्दिष्ट क्षेत्रों जैसे कि कुछ धार्मिक स्थल, हवाई अड्डे और सरकारी प्रतिष्ठान पर लागू होते हैं। 2026 के नियम ग्रामीण स्थानीय निकायों पर भी लागू होते हैं।

  • थोक अपशिष्ट उत्पादक: 2016 के नियमों के तहत, थोक अपशिष्ट उत्पादकों में वे संस्थाएं शामिल थीं जिनका औसत अपशिष्ट उत्पादन प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक था (आवासीय समितियों को छोड़कर)। 2026 के नियमों ने थोक अपशिष्ट उत्पादकों की परिभाषा का विस्तार करते हुए निम्नलिखित संस्थाओं को शामिल किया है: (i) कम से कम 20,000 वर्ग मीटर का क्षेत्रफल, या (ii) कम से कम 40,000 लीटर प्रतिदिन जल की खपत। 2026 के नियम आवासीय समितियों को भी कवर करते हैं। थोक अपशिष्ट उत्पादकों के कुछ दायित्व होंगे जैसे: (i) संबंधित स्थानीय निकाय के साथ पंजीकरण कराना, (ii) अपशिष्ट पृथक्करण के लिए आवश्यक व्यवस्था करना, और (iii) गीले अपशिष्ट का विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण करना।

  • बागवानी अपशिष्ट और कृषि अवशेषों का प्रबंधन: 2026 के नियमों में यह प्रावधान जोड़ा गया है कि स्थानीय निकायों को कृषि अवशेषों के संग्रहण और भंडारण के लिए सुविधाएं स्थापित करने में सहायता करनी चाहिए। स्थानीय निकायों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे अपशिष्ट को खुले में न जलाया जाए।

वायु एवं जल कानूनों के अंतर्गत समान सहमति दिशानिर्देशों में संशोधन

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) एक्ट, 1981 और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) एक्ट, 1974 के अंतर्गत 2025 के लिए समान सहमति दिशानिर्देशों में संशोधन किया है।[34],[35],[36],[37]  ये दिशानिर्देश उन औद्योगिक संयंत्रों की स्थापना या संचालन के लिए सहमति प्राप्त करने की प्रक्रिया और मानदंड प्रदान करते हैं जो वायु या जल प्रदूषण का कारण बन सकते हैं। प्रमुख परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सहमति की वैधता: संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, संचालन की सहमति (कन्सेंट टू ऑपरेट) रद्द होने तक वैध रहेगी। पहले यह पांच वर्ष तक वैध थी। संशोधनों के तहत राज्य सरकारों को 5 से 25 वर्षों के लिए संचालन की सहमति देने हेतु एकमुश्त प्रसंस्करण शुल्क निर्धारित करने की भी अनुमति दी गई है। अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले ('रेड' श्रेणी) उद्योगों को सहमति देने की प्रक्रिया अवधि 120 दिनों से घटाकर 90 दिन कर दी गई है। अधिसूचित औद्योगिक संपदाओं या क्षेत्रों में स्थित सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए, स्व-प्रमाणित आवेदन जमा करने पर स्थापना की सहमति स्वतः ही स्वीकृत मानी जाएगी।

  • अनुपालन का सत्यापन: संशोधित दिशानिर्देशों के तहत, पर्यावरण ऑडिट नियम, 2025 के अंतर्गत प्रमाणित पंजीकृत पर्यावरण ऑडिटर्स को स्थल निरीक्षण करने और अनुपालन का सत्यापन करने की अनुमति दी जाएगी। पहले यह कार्य केवल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा किया जाता था।

  • स्थल संबंधी नियम: 2025 के दिशानिर्देशों में उद्योगों द्वारा जलाशयों और कुछ अन्य स्थलों से न्यूनतम दूरी बनाए रखने का प्रावधान था। संशोधित दिशानिर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि इन नियमों को विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति या राज्य बोर्ड द्वारा लागू किया जाएगा।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य के दायरे में चार अतिरिक्त उद्योग शामिल

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य नियम, 2025 में संशोधन किया है।[38]  ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के तहत कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना, 2023 के अनुपालन के लिए जारी किए गए हैं।30,[39] ये नियम एल्युमीनियम, सीमेंट और लुगदी एवं कागज जैसे उत्सर्जन-गहन उद्योगों के लिए अनिवार्य उत्सर्जन कटौती लक्ष्य प्रदान करते हैं। संशोधित नियमों के अंतर्गत चार अतिरिक्त उद्योगों को भी शामिल किया गया है: (i) द्वितीयक एल्युमीनियम, (ii) पेट्रोलियम रिफाइनरी, (iii) पेट्रोकेमिकल्स और (iv) वस्त्र उद्योग।

राख उपयोग अधिसूचना, 2021 में संशोधन का ड्राफ्ट परामर्श के लिए जारी

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राख उपयोग अधिसूचना, 2021 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है।[40],[41]  2021 की अधिसूचना पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के तहत जारी की गई थी। इसमें कोयला या लिग्नाइट तापीय विद्युत संयंत्रों (टीपीपी) द्वारा उड़न राख (फ्लाई ऐश) का 100% उपयोग पर्यावरण के अनुकूल तरीके से अनिवार्य किया गया है।[42]

संशोधन के ड्राफ्ट के अनुसार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सहयोग से राख अपशिष्ट के प्रबंधन की योजना तैयार करेगा। पहले यह कार्य सीईए के परामर्श से सीपीसीबी द्वारा किया जाता था।

वर्तमान में, कोयला या लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत संयंत्रों से 300 किलोमीटर (सड़क मार्ग से) के दायरे में स्थित खदानों के लिए निम्नलिखित अनिवार्य है: (i) खदान के खाली स्थानों को भरना या उनमें राख डालना, और (ii) राख को बाहरी ऊपरी परत के साथ मिलाना। खान सुरक्षा महानिदेशक के दिशानिर्देशों के अनुसार, बाहरी डंपिंग, बैकफिलिंग या स्टोइंग के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री में कम से कम 25% राख मिलाई जानी चाहिए। प्रस्तावित संशोधन 25% की सीमा की आवश्यकता को हटा देता है।

वर्तमान में उपयोगकर्ता एजेंसी द्वारा राख के उपयोग के लक्ष्यों का अनुपालन न करने पर अनुपयोगित मात्रा पर 1,500 रुपए प्रति टन का जुर्माना लगता है। संशोधन के बाद यह जुर्माना घटाकर 1,000 रुपए कर दिया गया है।

25 मार्च, 2026 के लिए टिप्पणियां आमंत्रित है।

 

फार्मास्यूटिकल

Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)

नई औषधियां और नैदानिक ​​परीक्षण नियम, 2019 में संशोधन

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई औषधियां एवं नैदानिक ​​परीक्षण नियम, 2019 में संशोधन अधिसूचित किए हैं।[43]  ये नियम नई औषधियों की स्वीकृति और नैदानिक ​​अनुसंधान के संचालन हेतु रेगुलेटरी व्यवस्था प्रदान करते हैं। प्रमुख संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ऑनलाइन सूचना जमा करना: 2019 के नियमों के तहत, निर्माताओं को अनुसंधान और परीक्षण के उद्देश्यों के लिए दवाओं के निर्माण हेतु केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से परीक्षण लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य था। संशोधित नियमों के तहत, गैर-व्यावसायिक निर्माताओं को इसी उद्देश्य के लिए सीडीएससीओ को ऑनलाइन सूचना जमा करनी होगी।

  • कुछ जैवउपलब्धता और जैवसमतुल्यता अध्ययनों के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। इन अध्ययनों को सीडीएससीओ को ऑनलाइन सूचना जमा करने के बाद शुरू किया जा सकता है।

  • संशोधित समयसीमा: निर्माताओं को कुछ उच्च जोखिम वाली दवाओं के लिए परीक्षण लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) साइटोटॉक्सिक दवाएं, (ii) मादक दवाएं, और (iii) साइकोट्रॉपिक पदार्थ। परीक्षण लाइसेंस प्राप्त करने की समयसीमा 90 दिनों से घटाकर 45 दिन कर दी गई है।

 

वित्त

Shania Ali (shania@prsindia.org)

आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) की लाइसेंसिंग पर टिप्पणियां आमंत्रित की

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने प्राथमिक सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लाइसेंसिंग दिशानिर्देशों पर एक चर्चा पत्र जारी किया है।[44]  यूसीबी सहकारी समितियां हैं जिन्हें प्राथमिक सहकारी बैंकों के रूप में लाइसेंस प्राप्त है। संख्या के हिसाब से ये बैंकों का सबसे बड़ा समूह हैं। जून 2004 में कई नई लाइसेंस प्राप्त संस्थाओं के वित्तीय रूप से अस्थिर होने के बाद आरबीआई ने यूसीबी की लाइसेंसिंग पर रोक लगा दी थी।[45] 31 मार्च, 2025 तक, 1,457 यूसीबी कार्यरत थे जिनकी कुल संपत्ति लगभग सात लाख करोड़ रुपए थी। इसके अलावा, कमजोर श्रेणी में वर्गीकृत 82 यूसीबी पर निगरानी प्रतिबंध लागू हैं। चर्चा पत्र में निम्नलिखित मुद्दों की पड़ताल की गई है:

  • शहरी सहकारी समितियों (यूसीबी) की लाइसेंसिंग को फिर शुरू करना: आरबीआई ने इस संबंध में विचार मांगे हैं कि क्या नई यूसीबी की लाइसेंसिंग को पुनः शुरू किया जाना चाहिए। लाइसेंसिंग को पुनः शुरू करने के पक्ष में तर्क इस प्रकार हैं: (i) यूसीबी वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती हैं, विशेष रूप से छोटे शहरों में, (ii) बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में संशोधन के बाद यूसीबी पर आरबीआई की रेगुलेटरी और सुपरवाइजरी शक्तियां मजबूत हुई हैं, (iii) कमजोर यूसीबी के समेकन और बंद होने के कारण यूसीबी की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है, (iv) राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम से यूसीबी को संस्थागत और तकनीकी सहायता प्रदान करने की अपेक्षा की जाती है।

लाइसेंसिंग को फिर से शुरू करने के विरोध में दिए जाने वाले तर्कों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सहकारी स्वामित्व संरचना के कारण स्थिर पूंजी जुटाने में बाधाएं, (ii) शेयरधारिता की परवाह किए बिना एक सदस्य-एक वोट की अवधारणा, और अंकित मूल्य पर निकास से निवेशकों की रुचि में कमी, (iii) सीमित प्रणालीगत महत्व, जिसमें बैंकिंग क्षेत्र में जमा का लगभग 3.1% और अग्रिम का 3.8% हिस्सा यूसीबी का है, (iv) कानूनी चुनौतियों के कारण शासन सुधारों में धीमी प्रगति, (v) बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन स्तरों पर सीमित विशेषज्ञता, और (vi) प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा में कमियां, जो प्रणालीगत जोखिम पैदा कर सकती हैं।

  • नए यूसीबी के लिए पात्रता मानदंड: इस शोधपत्र में प्रस्ताव दिया गया है कि निम्नलिखित संस्थाएं लाइसेंस के लिए पात्र हो सकती हैं: (i) वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होने वाले प्रशासन मानकों के समान मानकों को पूरा करने वाली बड़ी सहकारी ऋण समितियां, (ii) पिछले वित्तीय वर्ष के 31 मार्च तक न्यूनतम 300 करोड़ रुपए की पूंजी, (iii) कम से कम 10 वर्षों का सक्रिय संचालन और कम से कम पांच वर्षों का सुदृढ़ वित्तीय रिकॉर्ड, (iv) लाइसेंस के समय कम से कम 12% का जोखिम-भारित परिसंपत्तियों का पूंजी अनुपात (सीआरएआर) और 3% से अधिक न होने वाली शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए), और (v) बहु-राज्यीय सहकारी ऋण समितियों को प्राथमिकता, साथ ही चुनिंदा एक-राज्यीय सहकारी ऋण समितियां भी पात्र होंगी।

13 फरवरी, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

श्रम एवं रोजगार

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना को जारी रखने की मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है।[46] एपीवाई योजना मई 2015 में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को आय सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। यह योजना 60 वर्ष की आयु से शुरू होकर अंशदान के आधार पर प्रति माह 1,000-5,000 रुपए की न्यूनतम गारंटीकृत पेंशन प्रदान करती है। इसके तहत निम्नलिखित के लिए सहायता प्रदान की जाएगी: (i) श्रमिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए विकासात्मक और प्रचार गतिविधियां, और (ii) योजना को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए आवश्यक धनराशि।

 

खेल

Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)

राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026 जारी किए गए

युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026 जारी किए हैं।[47] ये नियम राष्ट्रीय खेल प्रशासन एक्ट, 2025 के तहत अधिसूचित किए गए हैं।[48]  नियमों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • उत्कृष्ट प्रतिभा वाले खिलाड़ियों की नियुक्ति: राष्ट्रीय खेल निकायों (एनएसबी) की आम सभा में कम से कम चार उत्कृष्ट प्रतिभा वाले खिलाड़ी (एसओएम) शामिल होंगे। इनमें से आधी महिलाएं होंगी।

  • पात्रता मानदंड: एसओएम की नियुक्ति सामान्य और स्तरीय पात्रता मानदंडों के अनुसार की जाएगी। सामान्य पात्रता मानदंडों के तहत, व्यक्ति को (i) भारतीय नागरिक होना चाहिए, (ii) कम से कम 25 वर्ष की आयु का होना चाहिए, और (iii) सक्रिय खेलों से सेवानिवृत्त होना चाहिए। आवेदन से एक वर्ष पूर्व तक ऐसे व्यक्ति ने किसी भी राज्य या जिले का किसी भी प्रतिस्पर्धी खेल प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व नहीं किया हो।

  • स्तरीय पात्रता मानदंडों के तहत, व्यक्ति ने ओलंपिक या पैरालंपिक में पदक, पुरस्कार प्राप्त किया हो या भारत का प्रतिनिधित्व किया हो।

  • एसओएम और चुनाव समिति के लिए रोस्टर: नियमों में एसओएम और चुनाव समिति के लिए रोस्टर का प्रावधान है। एसओएम के रोस्टर में सामान्य निकाय में आवश्यक एथलीटों की संख्या से दस गुना एथलीट शामिल होंगे। चुनाव समिति के रोस्टर में हर समय कम से कम 20 योग्य सदस्य होने चाहिए।

  • निर्वाचन अधिकारी: नियमों में आम सभा के चुनाव की प्रक्रिया का प्रावधान है। निर्वाचन अधिकारी ऐसे चुनावों के संचालन के लिए जिम्मेदार होगा। प्रमुख जिम्मेदारियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) चुनावों की प्रशासनिक प्रक्रिया की निगरानी करना, (ii) मतों की गिनती करना, (iii) परिणामों की घोषणा करना और (iv) चुनावों से संबंधित शिकायतों का समाधान करना।

  • निर्वाचन अधिकारी का शुल्क संबंधित राष्ट्रीय सुरक्षा बोर्ड (एनएसबी) के साथ आपसी समझौते के माध्यम से निर्धारित किया जाएगा, जो अधिकतम पांच लाख रुपए के अधीन होगा।

  • अयोग्यता के आधार: कोई व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएसबी) की आम सभा या किसी भी समिति का सदस्य होने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है यदि वह: (i) दिवालिया घोषित किया गया हो, (ii) न्यायालय द्वारा कारावास की सजा के साथ दोषी ठहराया गया हो, या (iii) एनएसबी की नैतिकता समिति द्वारा किसी भी पद को धारण करने से प्रतिबंधित किया गया हो।

  • राष्ट्रीय ओलंपिक समिति को छोड़कर किसी अन्य राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (एनएसबी) के सदस्य होने पर भी सदस्य को हटाया जा सकता है। जो व्यक्ति पहले किसी राष्ट्रीय ओलंपिक समिति में अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुका है, उसे किसी अन्य राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की आम सभा का सदस्य बनने से पहले एक कार्यकाल की समाप्ति अवधि पूरी करनी होगी।

राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 जारी किए गए

युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 जारी किए हैं।[49]  ये नियम राष्ट्रीय खेल प्रशासन एक्ट, 2025 के अंतर्गत जारी किए गए हैं। नियमों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • बोर्ड की संरचना: नियमों में राष्ट्रीय खेल बोर्ड की संरचना का प्रावधान है। बोर्ड में एक चेयरपर्सन और दो सदस्य होंगे।

  • समिति की संरचना: समिति की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करेंगे। सदस्यों में शामिल होंगे: (i) खेल विभाग के सचिव, (ii) खेल प्रशासन में अनुभव रखने वाला एक व्यक्ति, और (iii) केंद्र सरकार द्वारा नामित राष्ट्रीय खेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले दो व्यक्ति।

  • समिति की भूमिका: समिति निम्नलिखित कार्यों के लिए उत्तरदायी होगी: (i) बोर्ड में नियुक्ति के लिए नामों की सूची तैयार करना, और (ii) सूची में नामों के चयन की प्रक्रिया निर्धारित करना। बोर्ड में रिक्ति होने की स्थिति में, केंद्र सरकार मौजूदा नामों की सूची में से नियुक्तियां करेगी। नामों की सूची एक वर्ष के लिए वैध रहेगी।

  • पुनर्नियुक्ति: अध्यक्ष और बोर्ड के सदस्य एक कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति के पात्र हैं। पुनर्नियुक्ति के लिए आवेदन मूल नियुक्ति के समान ही चयन समिति को किया जाएगा।

 

[1] Bulletin Part-II, Lok Sabha, January 12, 2026, https://sansad.in/getFile/dms/fetch/4c6c396f-a434-438a-a2d0-430a92d349f3?source=dsp2

[2] Address by the Hon’ble President of India Smt. Droupadi Murmu to Parliament, January 28, 2026, https://presidentofindia.nic.in/sites/default/files/2023-06/sp28012026.pdf.

[3] Economic Survey 2025-26, January 29, 2026, https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/doc/echapter.pdf.

[4] Press Note on First Advance Estimates of Gross Domestic Product for 2025-26, National Statistics Office, Ministry of Statistics and Programme Implementation, January 7, 2026, https://www.mospi.gov.in/uploads/latestReleases/latest_release_1767781372753_1380ce82-f5a5-440d-99e6-e6b35af0deb5_GDP_Press_Note_on_FAE_2025-26.pdf.

[5] Consumer Price Index Numbers on Base 2012=100 for Rural, Urban and Combined for the Month of December, 2025, Ministry of Statistics and Programme Implementation, January 12, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2213736&reg=3&lang=1.

[6] Index Numbers of Wholesale Price in India for the Month of December, 2025 (Base Year: 2011-12), Ministry of Commerce and Industry, January 14, 2026, https://eaindustry.nic.in/pdf_files/cmonthly.pdf. 

[7] “India–EU Free Trade Agreement Concluded: A Strategic Breakthrough in India’s Global Trade Engagement,” Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, January 27, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219065&reg=3&lang=2.

[8] “India and the European Union Conclude Free Trade Agreement Negotiations on Financial Services,” Press Information Bureau, Ministry of Finance, January 28, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219812&reg=3&lang=1.

[9] “List of Outcomes: Visit of His Highness Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan, President of UAE to India (January 19, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, January 19, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40602/List_of_Outcomes_Visit_of_His_Highness_Sheikh_Mohamed_bin_Zayed_Al_Nahyan_President_of_UAE_to_India_January_19_2026.

[10] “ Visit of the Chancellor of the Federal Republic of Germany, H.E. Friedrich Merz to India (January 12-13, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, January 5, 2026,  https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/40569/Visit_of_the_Chancellor_of_the_Federal_Republic_of_Germany_HE_Friedrich_Merz_to_India_January_1213_2026.

[11]“List of Outcomes: Visit of the Chancellor of the Federal Republic of Germany to India (January 12-13, 2026)”. Press Release, Ministry of External Affairs, January 12, 2026,  https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40582/List_of_Outcomes_Visit_of_the_Chancellor_of_the_Federal_Republic_of_Germany_to_India_January_1213_2026. 

[12] ‘Concept note outlining proposed amendments to the Designs Act, 2000,’ Department for Promotion of Industry and Internal Trade,

Ministry of Commerce and Industry, January 23, 2026, https://www.dpiit.gov.in/static/uploads/2026/01/791a71ebde47d93b67560f7394be2fec.pdf.

[13] The Designs Act, 2000, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1917/1/200016.pdf.

[14] The University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026, https://www.ugc.gov.in/pdfnews/1881254_UGC-Promotion-of-Equity-in-HEIs-Regulations-2026.pdf.

[15] The University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2012, https://www.ugc.gov.in/pdfnews/2147890_gazetteequity-eng.pdf.

[16] Order in Diary No. 4985/2026: Mritunjay Tiwari v. Union of India & Ors., Supreme Court of India, January 29, 2026, scourtapp.sci.gov.in/supremecourt/2026/4985/4985_2026_1_34_68075_Order_29-Jan-2026.pdf. 

[17] UGC Guidelines on Uniform Policy on Mental Health and Well-Being for Higher Educational Institutions, https://www.ugc.gov.in/pdfnews/0632835_Uniform-Policy-on-Mental-Health-and-Well-Being-for-HEI.pdf.

[18] Draft Pesticide Management Bill, 2025, https://agriwelfare.gov.in/Documents/HomeWhatsNew/Inviting_Comments_on_the_draft_Pesticides_Management_Bill_2025_0.pdf.

[19] The Insecticides Act, 1968, https://ppqs.gov.in/sites/default/files/insecticides_act_1968_0.pdf.

[20] Insecticides Rules, 1971, https://ppqs.gov.in/sites/default/files/insecticides_rules_1971.pdf.

[21] Draft Amendments to Mineral Concession Rules, 1960, Ministry of Coal, January 22, 2026, https://coal.nic.in/sites/default/files/2026-01/22-01-2026a-wn.pdf.

[22] Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/13122/1/67_of_1957.pdf.

[23] Consultation on the Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026, Ministry of Mines, January 1, 2026,https://mines.gov.in/admin/download/695745232f62e1767327011.pdf.

[24] Additional proposal in the Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026, Ministry of Mines,  January 7, 2026,https://mines.gov.in/admin/download/695e6a619dfb11767795297.pdf.

[25] Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/13122/1/67_of_1957.pdf.

[26] Draft Amendments to Mineral (Auction), Rules, 2015, Ministry of Mines, January 23, 2026, https://mines.gov.in/admin/download/697259f3ce2061769101811.pdf .

[27] Mineral (Auction), Rules, 2015, Ministry of Mines, https://ibm.gov.in/writereaddata/files/11222021124835Mineral_Auction_Rules_2015%20updated%20upto%2002112021.pdf.

[28] Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/13122/1/67_of_1957.pdf.

[29] Environmental (Protection) Fund Rules, 2026, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, January 15, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/269414.pdf.

[30] Environment Protection Act, 1986, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, http://cpcb.nic.in/env-protection-act/.

[31] Solid Waste Management Rules, 2026, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, January 27, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/269620.pdf.

[32][32] Environment Protection Act, 1986, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, May 23, 1986, https://cpcb.nic.in/env-protection-act/.

[33] Solid Waste management Rules, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, April 8, 2016, https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s30f46c64b74a6c964c674853a89796c8e/uploads/2024/07/20240710555191345.pdf.

[34] Control of Air Pollution (Grant, Refusal or Cancellation of Consent) Amendment Guidelines, 2026, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, January 23, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/269608.pdf.

[35] Control of Water Pollution (Grant, Refusal or Cancellation of Consent) Amendment Guidelines, 2026, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, January 23, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/269603.pdf.

[36] Control of Water Pollution (Grant, Refusal or Cancellation of Consent) Guidelines, 2025, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, January 30, 2025, https://www.enviscecb.org/orders/Control-of-Air-Pollution-Guidelines-2025.pdf.

[37] Control of Air Pollution (Grant, Refusal or Cancellation of Consent) Guidelines, 2025, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, January 30, 2025, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/260660.pdf.

[38] Greenhouse Gases Emission Intensity Target (Amendment) Rules, 2025, Ministry of Environment, Forest and climate Change, January 13, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/269375.pdf.

[39] Carbon Credit Trading Scheme, 2023, Ministry of Power, June 28, 2023, https://powermin.gov.in/sites/default/files/uploads/4_Draft_notification_on_Carbon_Credit_Trading_Scheme_CCTS_regarding.pdf.

[40] Draft Amendments to the Ash Utilization Notification, 2021, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, January 23, 2026, https://moef.gov.in/storage/tender/1769346631.pdf.

[41] Ash Utilization Notification, 2021,  Ministry of Environment, Forest and Climate Change, December 31, 2021, https://cpcb.nic.in/uploads/flyash/Ash_Notification_dated_31.12.2021.pdf.

[42] Environment Protection Act, 1986, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, May 23, 1986, https://cpcb.nic.in/env-protection-act/.

[43] The New Drugs and Clinical Trails (Amendment) Rules, 2019, https://cdsco.gov.in/opencms/opencms/system/modules/CDSCO.WEB/elements/download_file_division.jsp?num_id=OTI4MA==.

[44] Licensing of Urban Co-operative Banks (UCBs) - A Discussion Paper, Reserve Bank of India, January 13, 2026, https://www.rbi.org.in/Scripts/PublicationsView.aspx?id=23686. 

[45] Urban Cooperative Banks, Press Information Bureau, March 15, 2013, https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=93810&reg=3&lang=2.

[46] “Cabinet approves continuation of Atal Pension Yojana (APY) and extension of funding support for promotional and developmental activities and gap funding till 2030-31,” Press Information Bureau, Cabinet, January 21, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2216718&reg=3&lang=1.

[47] The National Sports Governance (National Sports Bodies) Rules, 2026, Ministry of Youth Affairs and Sports, January 10, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/269296.pdf.

[48] The National Sports Governance Act, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Natonal_Sports_Governance_Bill_2025.pdf.

[49] National Sports Board (Search-cum-Selection Committee) Rules, 2026, Ministry of Youth Affairs and Sports, January 8, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/269206.pdf.

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