इस अंक की झलकियां
शीतकालीन सत्र 2025 समाप्त
संसद का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुआ। सत्र के दौरान 15 बैठकें हुईं। इस सत्र में नौ बिल पेश किए गए, जिनमें से सात पारित हो गए और दो कमिटीज़ को भेज दिए गए।
रेपो रेट घटाकर 5.25% की गई
आरबीआईओ की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.5% से घटाकर 5.25% करने के लिए वोट किया। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी रेट, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट में भी 0.25% की कमी की गई।
संसद ने परमाणु ऊर्जा के लिए कानूनी ढांचे में बदलाव संबंधी बिल पारित किया
बिल परमाणु ऊर्जा एक्ट, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व एक्ट, 2010 का जगह लेगा। यह संयंत्र के संचालन और ईंधन प्रबंधन में निजी भागीदारी की अनुमति देता है।
संसद ने मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत- जी राम जी बिल पारित किया
यह बिल ग्रामीण परिवारों के लिए रोज़गार के अधिकार को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करता है। फंडिंग केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में शेयर की जाएगी। राज्य तय सीमा से ज़्यादा खर्च उठाएंगे।
संसद ने बीमा कानूनों में बदलाव के लिए बिल पारित किया
यह बिल भारतीय बीमा कंपनियों में एफडीआई सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करता है। यह विदेशी री-इंश्योरेंस कंपनियों के लिए नेट-ओन्ड फंड की ज़रूरतों को कम करता है। यह इरडाई को और अधिकार भी देता है।
लोकसभा में प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025 पेश किया गया
संहिता का उद्देश्य सेबी एक्ट, 1992, डिपॉजिटरी एक्ट, 1996 और प्रतिभूति अनुबंध (रेगुलेशन) एक्ट, 1956 के प्रावधानों को समेकित करना है।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 लोकसभा में पेश किया गया
यह बिल उच्च शिक्षा के लिए एक रेगुलेटरी निकाय बनाता है जो यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई का स्थान लेगी। नए रेगुलेटरी निकाय के पास उच्च शिक्षा संस्थानों को फंडिंग देने के बारे में कोई अधिकार नहीं होंगे।
सिलेक्ट कमिटी ने आईबीसी (संशोधन) बिल, 2025 पर रिपोर्ट पेश की
मुख्य सुझावों में रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल्स को लिक्विडेटर के तौर पर नियुक्त करने पर रोक लगाना, एनसीएलएटी द्वारा अपील निपटान के लिए समय सीमा तय करना, और सीमा-पारीय इन्सॉल्वेंसी के लिए विवरण देना शामिल है।
रूस के राष्ट्रपति द्विपक्षीय बातचीत के लिए भारत आए
दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, सैन्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
भारत और ओमान ने एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए
ओमान अपनी 98% से अधिक टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क लगाएगा जिसमें अधिकांश भारतीय निर्यात शामिल हैं।
चार श्रम संहिताओं के तहत ड्राफ्ट नियमों पर टिप्पणियां आमंत्रित
इन नियमों में साप्ताहिक कार्य घंटे, सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए विस्तृत प्रक्रियाएं, न्यूनतम मजदूरी और न्यूनतम मजदूरी की गणना का तरीका और ट्रेड यूनियनों की मान्यता का तरीका जैसे विवरण निर्दिष्ट हैं।
संसद की स्थायी समितियों ने रिपोर्ट पेश की
संसद की स्थायी समितियों ने विभिन्न रिपोर्ट्स पेश कीं। इनमें इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, तथा भूमि अधिग्रहण एक्ट का कामकाज, उर्वरकों में आत्मनिर्भरता और खनिजों में आत्मनिर्भरता शामिल हैं।
संसद
Ruchira Sakalle (ruchira@prsindia.org)
शीतकालीन सत्र 2025 समाप्त
संसद का शीतकालीन सत्र 1 से 19 दिसंबर 2025 तक संचालित किया गया। सत्र के दौरान नौ बिल पेश किए गए। इनमें से दो बिल समितियों को भेजे गए। ये बिल हैं, प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025 और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 (यह बिल उच्च शिक्षा के लिए एक रेगुलेटर की स्थापना करता है)।
सात बिल पारित किए गए। इनमें परमाणु ऊर्जा के लिए कानूनी ढांचे में संशोधन करने वाला बिल और मनरेगा कानून का स्थान लेने वाला बिल शामिल हैं। बीमा कानूनों में संशोधन करने वाला एक बिल भी पारित किया गया। इसके अलावा, तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने और पान मसाला पर उपकर लगाने के लिए दो बिल पारित किए गए।
2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों पर भी चर्चा हुई और उसे पारित कर दिया गया।
इस सत्र के दौरान हुए लेजिसलेटिव बिजनेस के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए यहां देखें।
सत्र के दौरान संसद के कामकाज के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए यहां देखें।
मैक्रोइकोनॉमिक विकास
आरबीआई ने रेपो रेट को घटाकर 5.25% किया
Shania Ali (shania@prsindia.org)
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है) को 5.5% से घटाकर 5.25% करने के लिए वोट किया।[1] समिति के अन्य निर्णयों में निम्नलिखित शामिल हैं:
स्टैंडिंग डिपॉजिट फेसिलिटी रेट (जिस दर पर आरबीआई कोलेट्रल दिए बिना बैंकों से उधार लेता है) को 5.25% से घटाकर 5.0% कर दिया गया।
मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) को भी 5.75% से घटाकर 5.5% कर दिया गया है।
2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है।
एमपीसी ने अपना तटस्थ रुख जारी रखने का निर्णय लिया।
2025-26 की दूसरी तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी का 1.3%
Shania Ali (shania@prsindia.org)
भारत ने 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 12.3 अरब USD (जीडीपी का 1.3%) का चालू खाता घाटा दर्ज किया, जो 2024-25 की इसी तिमाही के 20.9 अरब USD (जीडीपी का 2.2%) से कम है।[2] 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 2.7 अरब USD (जीडीपी का 0.3%) का चालू खाता घाटा दर्ज किया गया था। 2025-26 की दूसरी तिमाही के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 10.9 अरब USD की कमी आई।
तालिका 1: भुगतान संतुलन, ति2 2025-26 (बिलियन USD)
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ति2 2024-25 |
ति1 2025-26 |
ति2 2025-26 |
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क. निर्यात |
100.6 |
112.7 |
109.4 |
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ख. आयात |
189.2 |
181.6 |
196.8 |
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ग. व्यापार संतुलन (क+ख) |
-88.5 |
-68.9 |
-87.4 |
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घ. शुद्ध सेवाएं |
44.5 |
47.9 |
50.9 |
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ङ अन्य हस्तांतरण |
23.2 |
18.2 |
24.2 |
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च. चालू खाता (ग+घ+ङ) |
-20.9 |
-2.7 |
-12.3 |
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छ. पूंजी खाता |
39.9 |
8.0 |
0.6 |
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ज. भूल चूक लेनी देनी |
-0.4 |
-0.7 |
0.8 |
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झ. मुद्रा भंडार में परिवर्तन (च+छ+ज) |
18.6 |
4.5 |
-10.9 |
स्रोत: आरबीआई: पीआरएस।
2025-26 की दूसरी तिमाही में औद्योगिक उत्पादन 4.3% बढ़ा
Shania Ali (shania@prsindia.org)
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 4.3% की वृद्धि हुई, जो वर्ष 2024-25 की इसी अवधि की तुलना में अधिक है (2.7% की वृद्धि)।[3],[4] उल्लेखनीय है कि आईआईपी की गणना में मैन्यूफैक्चरिंग (78%) का वेटेज सबसे अधिक है, इसके बाद खनन (14%) और बिजली (8%) का स्थान आता है।
2025-26 की दूसरी तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग में 5.1% की बढ़ोतरी हुई। बिजली में 3.7% की बढ़ोतरी हुई, जबकि खनन में 0.5% की कमी आई। 2024-25 की इसी तिमाही में खनन में 0.1% की कमी आई थी।
रेखाचित्र 1: आईआईपी में वृद्धि (%, वर्ष-दर-वर्ष)
स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; पीआरएस।
स्टैंडिंग कमिटी ने राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग की समीक्षा पर रिपोर्ट पेश की
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
वित्त संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री भर्तृहरि महताब) ने 'राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के प्रदर्शन की समीक्षा' पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[5] एनएससी ने जुलाई 2006 में कार्य करना शुरू किया था। इसका उद्देश्य सांख्यिकी और सांख्यिकी प्रणालियों से संबंधित मामलों के लिए एक नोडल निकाय के रूप में कार्य करना और मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना है। कमिटी के प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) पूर्ण वैधानिक सहयोग के साथ सभी सांख्यिकी गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी समिति (एनएससी) को एक स्वायत्त निकाय के रूप में स्थापित करना, (ii) सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों पर लागू होने वाले डेटा संग्रह, नमूनाकरण और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल पर एक राष्ट्रीय मानक ढांचा विकसित करना, (iii) एक सांख्यिकी लेखापरीक्षा कार्य और मानकीकृत लेखापरीक्षा दिशानिर्देश स्थापित करना, (iv) सभी आर्थिक गतिविधियों, विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के भीतर, को शामिल करने के लिए जीडीपी डेटा को परिष्कृत करना, और (v) संयुक्त अनुसंधान पहलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
ऊर्जा
संसद ने परमाणु ऊर्जा के लिए कानूनी ढांचे में बदलाव हेतु बिल पारित किया
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
संसद ने भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन एवं विकास बिल, 2025 को पारित कर दिया।[6] यह बिल परमाणु ऊर्जा एक्ट, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व एक्ट, 2010 का स्थान लेगा है। 1962 का एक्ट परमाणु ऊर्जा के विकास और उपयोग का प्रावधान करता है[7], [8] जबकि 2010 का एक्ट परमाणु दुर्घटना की स्थिति में दायित्व और मुआवजे के निर्धारण हेतु एक ढांचा प्रदान करता है। मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
गैर सरकारी संस्थाओं को लाइसेंस: 1962 के एक्ट में केवल केंद्र सरकारी संस्थाओं और कंपनियों को ही परमाणु खनिजों का खनन करने या परमाणु ऊर्जा बनाने की अनुमति थी। यह बिल केंद्र सरकार को भारतीय निजी कंपनियों या सरकारी संस्थाओं के साथ उनके संयुक्त उपक्रम को परमाणु ऊर्जा बनाने और परमाणु ईंधन के प्रबंधन के लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार देता है।
संचालक का क्षतिपूर्ति का अधिकार: 2010 का एक्ट संचालकों को भुगतान की गई क्षतिपूर्ति का कुछ हिस्सा या पूरी क्षतिपूर्ति वसूल करने का कानूनी अधिकार भी देता है। इस अधिकार का प्रयोग निम्न स्थितियों में किया जा सकता है: (i) जब ऐसे अधिकार किसी अनुबंध में दिए गए हों, (ii) जब घटना दोषपूर्ण उपकरण या सामग्री की आपूर्ति के कारण हुई हो और (iii) जब घटना जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के इरादे से की गई हो। बिल दोषपूर्ण उपकरण या सामग्री की आपूर्ति के आधार पर क्षतिपूर्ति के अधिकार को समाप्त करता है।
परमाणु क्षति के लिए दायित्व: 2010 के एक्ट में 10 मेगावाट या उससे अधिक तापीय (थर्मल) ऊर्जा क्षमता वाले परमाणु रिएक्टर के लिए अधिकतम दायित्व 1,500 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। बिल में विद्युत क्षमता के आधार पर 100 करोड़ रुपए से लेकर 3,000 करोड़ रुपए तक की दायित्व सीमा के साथ एक स्तरीय संरचना निर्दिष्ट की गई है।
परमाणु ऊर्जा रेगुलेटरी बोर्ड: बिल परमाणु ऊर्जा रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) को वैधानिक मान्यता प्रदान करता है। बोर्ड विकिरण और परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगा।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025 अधिसूचित
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम, 2025 को अधिसूचित किया है।[9] ये नियम तेलक्षेत्र (रेगुलेशन एवं विकास) एक्ट, 1948 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं।[10] एक्ट में तेलक्षेत्रों के रेगुलेशन और खनिज तेल संसाधनों के विकास का प्रावधान है। ये नियम पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम, 1959 का स्थान लेते हैं जिनमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस से संबंधित लाइसेंस और पट्टे जारी करने का तरीका तथा लाइसेंस/पट्टा धारकों के अधिकार और दायित्व निर्दिष्ट हैं।[11] 2025 के नियमों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
पेट्रोलियम पट्टा: पेट्रोलियम पट्टा (i) राज्य सरकार द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में स्थित खनिज तेल भंडार वाली भूमि के लिए, और (ii) केंद्र सरकार द्वारा अपतटीय क्षेत्रों में स्थित संसाधनों के लिए प्रदान किया जाएगा। यह पट्टा खनिज तेलों के अन्वेषण, विकास और उत्पादन का विशिष्ट अधिकार प्रदान करेगा। पहले, अन्वेषण और उत्पादन के लिए अलग-अलग कनसेशंस जारी किए जाते थे। पट्टा चार वर्ष से 30 वर्ष तक की अवधि के लिए वैध होगा। इस पट्टे को तेल क्षेत्र के आर्थिक जीवनकाल के अंत तक, एक या अधिक किस्तों में बढ़ाया जा सकता है। पट्टाधारक पट्टे वाले क्षेत्र में अक्षय़ ऊर्जा स्रोतों से अन्वेषण और उत्पादन, तथा हाइड्रोजन के अन्वेषण और उत्पादन जैसी गतिविधियां भी कर सकता है।
डेटा संबंधी अधिकार: संचालन के परिणामस्वरूप प्राप्त सभी डेटा केंद्र सरकार की संपत्ति होगी। पट्टेदार को डेटा का निःशुल्क उपयोग करने और उसे अपने उद्देश्यों के लिए रखने का अधिकार होगा। केंद्र सरकार गोपनीय डेटा को छोड़कर अन्य डेटा को सार्वजनिक कर सकती है।
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन: प्रत्येक पट्टेदार को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की निगरानी और उसे कम करना होगा। पट्टेदार केंद्र सरकार से अनुमति प्राप्त करने के बाद पट्टे पर दिए गए क्षेत्र के भीतर उत्सर्जन के भूवैज्ञानिक भंडारण के लिए परियोजनाएं शुरू कर सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करना: दो या दो से अधिक पट्टेदार आपसी सहमति से तय नियमों और शर्तों के अनुसार संयुक्त रूप से अवसंरचना सुविधाओं का विकास या उसे साझा कर सकते हैं।
सीईआरसी ने वर्चुअल बिजली खरीद समझौतों के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित किए
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
केंद्रीय बिजली रेगुलेटरी आयोग (सीईआरसी) ने वर्चुअल बिजली खरीद समझौतों (वीपीपीए) के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित किए हैं।[12] इन समझौतों का उद्देश्य नामित उपभोक्ताओं को अक्षय़ ऊर्जा खपत दायित्व (आरसीओ) को पूरा करने में सहायता करना है। यह दायित्व 2022 में ऊर्जा संरक्षण एक्ट, 2001 में संशोधन के माध्यम से लागू किया गया था। इसके तहत कुछ उपभोक्ताओं को अपनी बिजली की आवश्यकता का न्यूनतम प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करना अनिवार्य है। नामित उपभोक्ताओं में वितरण कंपनियां, ओपन एक्सेस वाले उपभोक्ता (जो सीधे उत्पादकों से बिजली खरीदते हैं) और कैप्टिव उपयोगकर्ता (जो अपने उपयोग के लिए बिजली उत्पन्न करते हैं) शामिल हैं।
वर्तमान में, आरसीओ (अक्षय़ ऊर्जा आपूर्ति अनुबंध) को निम्न तरीकों से पूरा किया जा सकता है: (i) गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली का उपयोग करके, या (ii) बिजली एक्सचेंजों पर प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से उत्पादकों से अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र (आरईसी) खरीदकर। आरईसी अक्षय स्रोतों से बिजली की आपूर्ति के लिए उत्पादकों को जारी किए जाते हैं। एक वीपीपीए दायित्व को पूरा करने का तीसरा विकल्प प्रदान करेगा। वीपीपीए एक वित्तीय अनुबंध है जिसमें अनुबंधित पक्षों के बीच बिजली का भौतिक रूप से आदान-प्रदान नहीं होता है। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
वीपीपीए का स्वरूप: वीपीपीए अक्षय ऊर्जा उत्पादक और एक नामित उपभोक्ता के बीच कम से कम एक वर्ष का द्विपक्षीय अनुबंध होगा। इस अनुबंध के तहत उत्पादक उस नामित उपभोक्ता के लिए अक्षय ऊर्जा क्षमता आरक्षित करेगा। उत्पादक आरक्षित क्षमता तक बिजली की बिक्री से अर्जित अक्षय ऊर्जा संसाधन (आरईसी) नामित उपभोक्ता को हस्तांतरित करेगा। वीपीपीए के लिए आरईसी बिजली रेगुलेशन के माध्यम से बिक्री या सीईआरसी द्वारा अधिकृत अन्य तरीकों से अर्जित किए जा सकते हैं। वीपीपीए गैर-व्यापार योग्य और गैर-हस्तांतरणीय होंगे।
भुगतान की शर्तें: उत्पादक और तय उपभोक्ता आपस में कीमत निर्धारित करेंगे। बिक्री से मिली कीमत और पहले से निर्धारित कीमत के बीच का अंतर निर्दिष्ट शर्तों के हिसाब से दोनों तरफ से तय किया जाएगा।
विवाद का निपटारा: दिशानिर्देशों में बताया गया है कि विवाद का निपटारा अनुबंध के अनुसार आपसी सहमति से किया जाएगा।
स्टैंडिंग कमिटी ने सौर उर्जा परियोजनाओं की समीक्षा पर रिपोर्ट सौंपी
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
ऊर्जा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री श्रीरंग अप्पा बार्ने) ने 'देश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रदर्शन का मूल्यांकन' पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[13] मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अनुसंधान संस्थानों को लागत कम करने के लिए सोलर स्टोरेज से जुड़े आरएंडडी के लिए अनुदान देना, (ii) पॉलीसिलिकॉन, इनगॉट और वेफर्स बनाने के लिए विशेष उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजनाएं शुरू करना, (iii) राज्यों द्वारा मार्गाधिकार के लिए एक जैसे क्षतिपूर्ति दिशानिर्देश अपनाकर ज़मीन की मंज़ूरी में देरी को कम करना, (iv) समस्याओं की आसान पहचान और समय पर समाधान के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम, और (v) पीएम सूर्य घर योजना और पीएम कुसुम जैसी सौर ऊर्जा योजनाओं में तेज़ी लाना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
एस्टिमेट्स कमिटी ने पीएम-कुसुम और पीएम सूर्यघर योजनाओं के कार्यान्वयन पर रिपोर्ट पेश की
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
एस्टिमेट्स कमिटी (चेयर: डॉ. संजय जयसवाल) ने "प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) और पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के कार्यान्वयन" पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[14] पीएम-कुसुम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को अपनाने को बढ़ावा देना है। पीएम सूर्य घर का उद्देश्य घरों में रूफटॉप सोरल पैनलों को बढ़ावा देना है।
पीएम-कुसुम योजना के संदर्भ में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) लोग ज्यादा से ज्यादा सौर ऊर्जा का उपयोग करें, इसके लिए विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता बढ़ाना, (ii) कम भूजल स्तर वाले क्षेत्रों में उच्च क्षमता के सौर पंप लगाने की अनुमति देने के लिए योजना में संशोधन करना, और (iii) कृषि-वोल्टेइक तकनीक को अपनाना जिससे एक ही भूमि पर कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन संभव हो सके। पीएम-कुसुम पर प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) वेंडर्स के पैनल में शामिल होने में अंतर-राज्यीय असमानता को दूर करना और इसे सहयोग देने के लिए प्रदर्शन बैंक गारंटी राशि को कम करना, (ii) कृषि क्षेत्रों में एकल आवासीय इकाइयों और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को भी योजना में शामिल करना, (iii) ऋण आवेदनों का शीघ्र निपटान करना, और (iv) दूरस्थ क्षेत्रों में विभिन्न घटकों की कमी को दूर करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और सौभाग्य योजना पर ऑडिट रिपोर्ट जारी
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीजीजेवाई) और प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य)’ पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट जारी की।[15] डीडीजीजेवाई योजना ग्रामीण बिजली वितरण को सुदृढ़ करने के लिए 2014 में शुरू की गई थी। वहीं सौभाग्य योजना 2017 में सभी गैर-बिजलीकृत ग्रामीण घरों तक लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और बिजली देने के लिए शुरू की गई थी।
कैग ने कहा कि दोनों योजनाओं के तहत वास्तविक व्यय स्वीकृत व्यय से कम था। डीडीजीजेवाई योजना के तहत, स्वीकृत 75,893 करोड़ रुपए के मुकाबले वास्तविक व्यय 64,495 करोड़ रुपए था। सौभाग्य योजना के तहत, स्वीकृत 14,082 करोड़ रुपए के मुकाबले वास्तविक व्यय 9,246 करोड़ रुपए था। डीडीजीजेवाई योजना के तहत, मार्च 2022 तक, स्वीकृत 9,019 कृषि फीडरों और कैबिनेट द्वारा 16,500 की स्वीकृति के मुकाबले 7,833 कृषि फीडरों को अलग किया गया था। सौभाग्य योजना के तहत, तीन करोड़ घरों के प्रारंभिक लक्ष्य के मुकाबले 1.52 करोड़ घरों में बिजलीकरण किया गया था। इन दोनों योजनाओं के तहत, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बिना फील्ड सर्वे के तैयार की गई थीं। उसने दोनों योजनाओं के तहत गुणवत्ता आश्वासन में कमियों को उजागर किया, जैसे कि निरीक्षण में देरी और निरीक्षण के दौरान चिन्हित समस्याओं का समाधान न होना।
प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) लक्ष्यों और उपलब्धियों के अंतर को खत्म करने के लिए योजना शुरू करने से पहले लाभार्थियों का सटीक डेटा एकत्र करना, (ii) क्रियान्वयन में भिन्नता को दूर करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने से पहले क्षेत्रीय सर्वेक्षण सुनिश्चित करना, (iii) सत्यापित लाभार्थी सूचियों के आधार पर धनराशि आवंटन की योजना बनाना, (iv) केवल मूल्यांकित आवश्यकताओं के अनुसार ही अतिरिक्त बजटीय उधार लेना, और (v) भविष्य की योजनाओं में गुणवत्ता आश्वासन संरचना का पालन सुनिश्चित करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
ग्रामीण विकास
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
संसद में मनरेगा का स्थान लेने वाला बिल पारित
संसद ने विकसित भारत-रोजगार की गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) बिल, 2025 को पारित कर दिया है।[16] यह बिल महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी (मनरेगा) एक्ट, 2005 का स्थान लेने का प्रयास करता है।[17] बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
गारंटीकृत रोजगार दिवसों की संख्या में वृद्धि: मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य स्वेच्छा से अकुशल शारीरिक श्रम करना चाहते हैं, एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाता है। 2015 के बिल में यह गारंटी बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। मनरेगा के तहत, अगर किसी काम की तलाश करने वाले व्यक्ति को 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार को अनिवार्य रूप से उसे बेरोजगारी भत्ता देना होगा। 2025 के बिल में इस प्रावधान को बरकरार रखा गया है।
फंड शेयरिंग पैटर्न: मनरेगा के तहत, केंद्र सरकार अकुशल शारीरिक श्रम के लिए मजदूरी की पूरी लागत, सामग्री लागत के तीन-चौथाई तक और प्रशासनिक लागत का एक हिस्सा वहन करती थी। राज्य सरकारें सामग्री लागत का एक-चौथाई, प्रशासनिक लागत, बेरोजगारी भत्ता, और मजदूरी भुगतान में देरी होने पर मुआवजा प्रदान करती थीं। 2025 के बिल में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया है कि योजना को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया जाएगा। जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें सभी राज्यों के लिए 60:40 के अनुपात में और पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 के अनुपात में सारा खर्च उठाएंगी। केंद्र सरकार हर वित्तीय वर्ष के लिए राज्य-वार मानक आवंटन तय करेगी। इस आवंटन से ज़्यादा होने वाला कोई भी अतिरिक्त खर्च राज्य सरकारें उठाएंगी।
कृषि मौसम के दौरान कार्यों पर रोक: बिल के अनुसार, राज्य सरकारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 60 दिनों तक की अवधि की अग्रिम घोषणा करनी होगी, जिसके दौरान योजना के तहत कोई कार्य नहीं किया जाएगा। 2005 के एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।
तकनीक का इस्तेमाल: बिल में योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए तकनीक के उपयोग का प्रावधान है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) लेन-देन के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, (ii) योजना की निगरानी के लिए जियोस्पेशियल तकनीक, यानी सैटेलाइट और जीपीएस का इस्तेमाल, और (iii) रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए मोबाइल एप्लिकेशन-आधारित डैशबोर्ड।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने पर रिपोर्ट पेश की
ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री सप्तगिरि शंकर उलाका) ने 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन एक्ट, 2013 (एलएआरआर एक्ट) में उचित मुआवजे और पारदर्शिता का अधिकार- कार्यान्वयन और प्रभावशीलता' पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी ने अनुसूचित क्षेत्रों में कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और पुनर्वास से संबंधित मुद्दों पर गौर किया। कमिटी ने कहा कि ग्राम सभा की सहमति अक्सर केवल औपचारिकता मात्र रह जाती है। कमिटी ने सभी भूमि अधिग्रहणों में इसे अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया, न कि केवल अनुसूचित क्षेत्रों में। पुनर्वास संबंधी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कमिटी ने सुझाव दिया कि पुनर्वास स्थल पूरी तरह से कार्यशील और सेवा के लिए तैयार होने तक किसी भी भूमि पर कब्जा नहीं दिया जाना चाहिए। समिति ने वन अधिकार एक्ट (एलएआरआर) को पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) एक्ट, 1966 के प्रावधानों के अनुरूप बनाने और मुआवजे की प्रक्रिया के लिए वन अधिकार एक्ट, 2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधन स्वामित्व को मान्यता देने पर जोर दिया।
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वित्त
सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) बिल, 2025 संसद से पारित
Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)
सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) बिल, 2025 संसद में पारित हो गया है।[18] इसका उद्देश्य बीमा एक्ट, 1938, जीवन बीमा निगम एक्ट, 1956 और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण एक्ट, 1999 में संशोधन करना है। बिल में निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:
भारतीय बीमा कंपनी में 100% एफडीआई को अनुमति: यह बिल भारतीय बीमा कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को उनकी चुकता (पेड-अप) इक्विटी पूंजी के 74% से बढ़ाकर 100% तक करता है।
विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए नेट-ओन्ड फंड की आवश्यकता को कम किया गया: इस बिल के तहत पुनर्बीमा कारोबार में लगी विदेशी संस्थाओं के लिए शुद्ध स्वामित्व निधि यानी नेट-ओन्ड फंड की आवश्यकता को 5,000 करोड़ रुपए से घटाकर 1,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है।
बीमा सहकारी समितियों के लिए न्यूनतम चुकता शेयर पूंजी: बिल जीवन, सामान्य और स्वास्थ्य बीमा व्यवसायों के लिए 100 करोड़ रुपए की न्यूनतम चुकता शेयर पूंजी की आवश्यकता को हटाने के लिए बीमा सहकारी समिति की परिभाषा में संशोधन करता है।
इरडाई की शक्तियां: बिल में इरडाई को कुछ अतिरिक्त शक्तियां प्रदान की गई हैं। इसके तहत इरडाई को बीमाकर्ता और बीमा व्यवसाय न करने वाली किसी कंपनी के बीच स्कीम ऑफ अरेंजमेंट (व्यवस्था की योजना) को मंजूरी देने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही इरडाई को बीमाकर्ता के निदेशक मंडल को हटाकर किसी प्रशासक को नियुक्त करने का अधिकार है। ऐसा तब किया जा सकता है, जब बीमाकर्ता अपने पॉलिसीधारकों के हितों के प्रतिकूल व्यवसाय कर रहा हो। इरडाई बीमा एजेंटों या मध्यस्थों को देय पारिश्रमिक, कमीशन या पुरस्कार पर नियम निर्दिष्ट कर सकता है, जिसमें सीमाएं, भुगतान का तरीका और संबंधित खुलासे शामिल हैं। बिल बीमा मध्यस्थों के निरीक्षण और जांच करने के लिए इरडाई की शक्तियों का विस्तार भी करता है।
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लोकसभा में प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025 पेश
Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)
प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025 को लोकसभा में पेश किया गया। [19] इसका उद्देश्य निम्नलिखित कानूनों को निरस्त करके उनके स्थान पर नए कानून लाना है: (i) प्रतिभूति अनुबंध (रेगुलेशन) एक्ट, 1956, (ii) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) एक्ट, 1992, और (iii) डिपॉजिटरी एक्ट, 1996। 1956 का एक्ट प्रतिभूतियों के लेनदेन और स्टॉक एक्सचेंजों के संचालन को रेगुलेट करता है। बिल को वित्त संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री भर्तृहरि महताब) को भेजा गया है। बिल के तहत मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
सेबी की संरचना: वर्तमान में सेबी में नौ सदस्य होते हैं: (i) अध्यक्ष, (ii) वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के दो अधिकारी, (iii) आरबीआई का एक अधिकारी, और (iv) केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त पांच अन्य सदस्य, जिनमें से कम से कम तीन पूर्णकालिक सदस्य होने चाहिए। बिल के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त अन्य सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 11 कर दी गई है, जिनमें से कम से कम पांच पूर्णकालिक सदस्य होने चाहिए।
बोर्ड के सदस्यों का हितों का टकराव: सेबी कानून के तहत सेबी के किसी सदस्य के लिए, जो किसी कंपनी का निदेशक है, किसी भी मामले में अपने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वित्तीय हित का खुलासा करना अनिवार्य है। उसे ऐसे मामलों पर विचार-विमर्श या निर्णय लेने में भाग नहीं लेना चाहिए। बिल में इस प्रावधान का विस्तार किया गया है। इसके तहत किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित, जिसे नियमों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, वाले सभी सदस्यों को शामिल किया गया है। इसमें परिवार के किसी सदस्य के हित भी शामिल हैं। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि केंद्र सरकार ऐसे किसी सदस्य को हटा सकती है जिसने ऐसा कोई वित्तीय या अन्य हित अर्जित किया हो जिससे उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो।
पंजीकरण की आवश्यकता: बिल में विभिन्न संस्थाओं के लिए पंजीकरण की आवश्यकता को बरकरार रखा गया है। स्टॉक ब्रोकर, परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां और निवेश सलाहकार जैसे मध्यस्थों को निवेश गतिविधि या व्यवसाय करने के लिए सेबी के साथ पंजीकरण कराना होगा। इस बिल में स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉरपोरेशन सहित मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (एमआईआईज़) का सेबी के साथ पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। बिल सेबी को निवेशकों के विशिष्ट वर्गों के पंजीकरण की आवश्यकता का अधिकार देता है। साथ ही बिल सेबी को मध्यस्थों या निवेशकों के पंजीकरण की शक्तियां एमआईआईज़ को सौंपने का अधिकार भी देता है। एमआईआईज़ बाजार दुरुपयोग को कम करने और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए उपनियम भी बना सकते हैं।
शिकायत निवारण और ओम्बड्सपर्सन: बिल में विशेष रूप से सेबी को निवेशक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने और सेवा प्रदाताओं को भी शिकायत निवारण तंत्र गठित करने का निर्देश देने का अधिकार दिया गया है। साथ ही सेबी को शिकायतों के निवारण के लिए ओम्बड्सपर्सन नियुक्त करने का भी अधिकार दिया गया है।
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संसद ने पान मसाले के उत्पादन पर उपकर लगाने के लिए बिल पारित किया
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर बिल, 2025 को संसद में पारित कर दिया गया।[20] इस बिल में पान मसाला और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य वस्तुओं के उत्पादन पर उपकर लगाने का प्रावधान है। इस उपकर का उपयोग जन स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किया जाएगा। इसकी गणना उत्पादन के लिए स्थापित प्रत्येक मशीन या पूर्णतः हस्तनिर्मित उत्पादन की प्रत्येक इकाई के हिसाब से की जाएगी।
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संसद ने तंबाकू उत्पादन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क बढ़ाने के लिए बिल पारित किया
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) बिल, 2025 को संसद में पारित कर दिया गया।[21] यह बिल केंद्रीय उत्पाद शुल्क एक्ट, 1944 में संशोधन करता है। बिल अविनिर्मित तंबाकू, निर्मित तंबाकू, तंबाकू उत्पादों और तंबाकू के विकल्प पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क बढ़ाता है।
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मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) बिल, 2025 संसद से पारित
Shania Ali (shania@prsindia.org)
मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) बिल 2025 संसद में पारित हो गया है।[22] यह बिल 7 अक्टूबर, 2025 को जारी मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (दूसरा संशोधन) अध्यादेश, 2025 का स्थान लेगा जिसे 7 अक्टूबर, 2025 को जारी किया गया था। इस अध्यादेश ने मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर एक्ट, 2017 में संशोधन किया है। यह एक्ट वस्तुओं और सेवाओं की राज्य के भीतर आपूर्ति पर राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) लगाने और संग्रह करने का प्रावधान करता है। इस अध्यादेश ने मणिपुर एक्ट को फाइनांस एक्ट, 2025 द्वारा केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर एक्ट, 2017 में किए गए संशोधनों के अनुरूप कर दिया था। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
क्रेडिट नोट जारी करना: एक आपूर्तिकर्ता वस्तुओं या सेवाओं के प्राप्तकर्ता को क्रेडिट नोट जारी कर सकता है, अगर: (i) इनवॉइस में लगाया गया कर योग्य मूल्य या कर, कर योग्य मूल्य या लगाए गए कर से अधिक हो, (ii) वस्तुओं या सेवाओं को वापस कर दिया गया हो या (iii) वस्तुओं या सेवाओं में कमी पाई गई हो। बिक्री के लिए आपूर्तिकर्ता की कर देयता को तदनुसार समायोजित किया जा सकता है। बिल में कहा गया है कि अगर प्राप्तकर्ता ने उस क्रेडिट नोट के कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठा लिया है और उसे वापस नहीं लिया है तो कर देयता में कोई कमी नहीं की जाएगी। इनपुट टैक्स क्रेडिट, खरीद यानी इनपुट पर चुकाए गए कर के लिए प्राप्त क्रेडिट को कहा जाता है, जिसका उपयोग बिक्री पर देय जीएसटी को कम करने के लिए किया जा सकता है।
विशेष आर्थिक क्षेत्रों में स्थित वस्तुओं की कुछ आपूर्ति को छूट: एक्ट की अनुसूची III में उन लेनदेन की सूची निर्दिष्ट की गई है जिन्हें वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति नहीं माना जाता है। इसलिए इन्हें एसजीएसटी से छूट प्राप्त है। बिल इस सूची को बढ़ाता है। अब विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) या मुक्त व्यापार भंडारण क्षेत्र (एफटीडब्ल्यूज़ेड) में रखे माल को निर्यात या घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) के लिए मंजूरी देने से पहले किसी व्यक्ति को उसकी आपूर्ति भी इसमें शामिल है। एसईज़ेड सरकार द्वारा स्थापित विशेष क्षेत्र होते हैं जहां व्यवसायों को निवेश आकर्षित करने और निर्यात बढ़ाने के लिए रियायतें मिलती हैं। एफटीडब्ल्यूज़ेड एक विशेष प्रकार का एसईज़ेड होते हैं जो वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स पर फोकस करते हैं। एसईज़ेड के बाहर भारत के सभी क्षेत्रों को डीटीए कहा जाता है।
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सिलेक्ट कमिटी ने इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) बिल, 2025 पर रिपोर्ट पेश की
Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)
इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) बिल, 2025 को अगस्त 2025 में लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 में बदलाव करना है। बिल को लोकसभा की सिलेक्ट कमिटी (चेयर: श्री बैजयंत पांडा) को भेजा गया था। कमिटी ने 17 दिसंबर, 2025 को अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
लिक्विडेटर की नियुक्ति: संहिता में राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा लिक्विडेटर के रूप में एक रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) की नियुक्ति का प्रावधान है। बिल में इसमें संशोधन किया गया है और कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) को आरपी या किसी अन्य इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल को लिक्विडेटर के रूप में नियुक्त करने की अनुमति दी गई है। कमिटी ने गौर किया कि आरपी के पास अतिरिक्त फीस की लालच में रेज़ोल्यूशन की बजाय लिक्विडेशन को वरीयता देने का ‘विपरीत प्रोत्साहन’ (जब किसी नियम के कारण व्यक्ति वह काम करने को प्रोत्साहित हो, जो वास्तव में गलत है) हो सकता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि हितों के टकराव को दूर करने के लिए आरपी को लिक्विडेटर के रूप में नियुक्त होने के लिए अयोग्य घोषित किया जाए। इसीलिए कमिटी ने सुझाव दिया कि इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) द्वारा एनसीएलटी को दिए गए सुझाव पर लिक्विडेटर को नियुक्त किया जाए।
लिक्विडेशन की प्रक्रिया में सीओसी की भूमिका: बिल में सीओसी को लिक्विडेशन प्रक्रिया के संचालन की निगरानी करने का अधिकार दिया गया है। कमिटी ने कहा कि यह प्रावधान सुनिश्चित करेगा कि सीओसी अपने व्यावसायिक ज्ञान का उपयोग करके लिक्विडेटर को कुशल व्यावसायिक निर्णय लेने में सहायता कर सके। हालांकि कमिटी ने सुझाव दिया कि आईबीबीआई को निगरानी के दायरे को स्पष्ट करना चाहिए। इससे लिक्विडेटर के वैधानिक कर्तव्यों के साथ किसी भी प्रकार के टकराव से बचा जा सकेगा।
प्री-पैकेज्ड इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया (पीपीआईआरपी) शुरू करने के लिए मतदान की सीमा: बिल के तहत, असंबंधित वित्तीय लेनदारों द्वारा पीपीआईआरपी शुरू करने के लिए मतदान की सीमा 66% है। कमिटी ने पीपीआईआरपी और लेनदार की तरफ से शुरू की गई इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए इस सीमा को घटाकर 51% करने का सुझाव दिया।
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स्टैंडिंग कमिटी ने आईबीसी के कामकाज की समीक्षा और उभरते मुद्दों पर रिपोर्ट पेश की
Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)
वित्त से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री भर्तृहरि महताब) ने 'इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता के कामकाज की समीक्षा और उभरते मुद्दे' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) देनदारों के लिए "कोई बकाया नहीं" प्रमाण पत्र और वैधानिक मंजूरी जारी करने के लिए एक ऑनलाइन तंत्र स्थापित करना, (ii) फालतू आवेदनों के लिए दंड बढ़ाना, (iii) परिसंपत्तियां बेचने के लिए बोली की प्रक्रिया को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना, (iv) औपचारिक अदालत प्रक्रिया के बाहर एक वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के रूप में प्रारंभिक चरण की मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू करना, और (v) मकान खरीदारों के लिए इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पात्रता मानदंडों को आसान बनाना।
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शिक्षा
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 लोकसभा में पेश किया गया
Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 को लोकसभा में पेश किया गया।[23] इस बिल का उद्देश्य उच्च शिक्षा के लिए एक रेगुलेटरी निकाय की स्थापना करना है। यह निकाय निम्नलिखित मौजूदा निकायों का स्थान लेगा: (i) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), (ii) अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), और (iii) राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई)। बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी को भेजा गया है। बिल की खास बातें इस प्रकार हैं:
वीबीएसए और परिषद की स्थापना: इस बिल के तहत उच्च शिक्षा के लिए सर्वोच्च रेगुलेटरी निकाय के रूप में वीबीएसए की स्थापना की गई है। साथ ही रेगुलेशन, प्रत्यायन और मानक निर्धारण के लिए तीन अलग-अलग परिषदों की भी स्थापना की गई है। वर्तमान में यूजीसी उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) को अनुदान भी आवंटित करता है। बिल के अनुसार, न तो वीबीएसए और न ही उसकी परिषदों को एचईआई को वित्तपोषण संबंधी कोई अधिकार प्राप्त होंगे।
सदस्यों की नियुक्ति: वीबीएसए के चेयरपर्सन और सदस्यों को केंद्र सरकार के सुझावों पर भारत के राष्ट्रपति नियुक्त करेंगे। परिषद के अध्यक्षों और पूर्णकालिक सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा एक खोज एवं चयन समिति की अनुशंसाओं के आधार पर की जाएगी।
उच्च शिक्षा संस्थानों पर दंड: कानून के उल्लंघन के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों पर 10 लाख रुपए से 70 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। रेगुलेटरी परिषद निम्नलिखित पर सुझाव दे सकती है: (i) अनुदान रोकना, (ii) स्वायत्तता की समीक्षा करना, (iii) संबद्धता रद्द करना, या (iv) उच्च शिक्षा संस्थान को बंद करने का आदेश देना।
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स्टैंडिंग कमिटी ने उच्च शिक्षा में स्वायत्त निकायों पर रिपोर्ट पेश की
Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)
शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री दिग्विजय सिंह) ने उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त निकायों एवं संस्थानों- राष्ट्रीय शिक्षा प्राधिकरण (एनटीए), एनएएसी, यूजीसी के ड्राफ्ट रेगुलेशंस, आईसीएचआर, आईसीपीआर, आईसीएसएसआर, आईआईएएस (शिमला) और ऑरोविल फाउंडेशन की समीक्षा पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[24] कमिटी ने प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में आने वाली समस्याओं, जैसे परीक्षा स्थगित होना, प्रश्नपत्र लीक होना, परिणाम में देरी और प्रश्नपत्रों में त्रुटियों को उजागर किया। कमिटी ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 को लागू करने के लिए विश्वविद्यालयों को बुनियादी ढांचे, भर्ती और पाठ्यक्रम निर्माण में सहायता की आवश्यकता है।
कमिटी के प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) परीक्षा संचालन के लिए नियुक्त न की जाने वाली फर्मों की राष्ट्रव्यापी ब्लैकलिस्ट बनाना, (ii) महत्वपूर्ण पदों पर रिक्तियों को भरना और इन पदों पर अधिकारियों को दीर्घकालिक अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपने से बचना, (iii) प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण का पुनर्मूल्यांकन करना, (iv) ग्रेड-आधारित मॉडल के बजाय उच्च शिक्षा संस्थानों की मान्यता के लिए द्विआधारी मॉडल (मान्यता प्राप्त या गैर-मान्यता प्राप्त) अपनाना, और (v) कोचिंग केंद्रों के प्रसार की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करना।
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स्टैंडिंग कमिटी ने शिक्षा ऋण योजना पर अपनी रिपोर्ट पेश की
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री दिग्विजय सिंह) ने उच्च शिक्षा में शिक्षा ऋण और वित्तीय पहुंच संबंधी योजनाओं की समीक्षा पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।[25] कमिटी के प्रमुख निष्कर्ष और सुझाव इस प्रकार हैं: (i) उच्च ब्याज दरों को कम करना, (ii) पहुंच बढ़ाने के लिए बिना गारंटी वाले ऋणों की सीमा में संशोधन करना, (iii) मुफ्त राशन प्राप्त करने वाले परिवारों को सिबिल स्कोर प्रदान करने से छूट देना, (iv) पुनर्भुगतान की मोहलत अवधि को एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष करना, और (v) प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत संस्थानों का दायरा बढ़ाना।25 प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना आठ लाख रुपए तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को ब्याज पर 3% सबसिडी के साथ बिना गारंटी वाले शिक्षा ऋण प्रदान करती है।[26] वर्तमान में यह योजना केवल निर्दिष्ट गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकित विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है।
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विदेश मंत्रालय
द्विपक्षीय वार्ता के लिए रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
रूस के राष्ट्रपति श्री व्लादिमीर पुतिन ने द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत का दौरा किया। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए अपने सहयोग की पुष्टि की।[27],[28] उन्होंने परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, सैन्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा समुद्री परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। हस्ताक्षरित प्रमुख समझौतों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) रूस में भारतीय कंपनियों द्वारा यूरिया निर्माण में एक संयुक्त उद्यम विकसित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन, (ii) भारत से रूस में कुशल श्रमिकों के प्रवास के लिए एक ढांचा स्थापित करने हेतु दो समझौते, और (iii) सीमा शुल्क नियंत्रण प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने के लिए एक प्रोटोकॉल। अन्य समझौते खाद्य सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र में सहयोग, प्रसारण, स्वास्थ्य सेवा और शैक्षणिक सहयोग से संबंधित हैं।28रूस ने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) में शामिल होने के लिए एक ढांचागत समझौते को भी अपनाया। आईबीसीए भारत के नेतृत्व वाला एक वैश्विक गठबंधन है जिसे 2023 में विश्व की सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए शुरू किया गया था। इनमें बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा शामिल हैं।[29]
भारत और ओमान ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
भारत और ओमान ने व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।[30] ओमान अपनी 98% से अधिक टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क की सुविधा देगा, जिसमें अधिकांश भारतीय निर्यात शामिल हैं। भारत अपनी लगभग 78% टैरिफ लाइनों पर शुल्क कम करेगा, जिसमें मूल्य के हिसाब से ओमान से आयातित लगभग 95% वस्तुएं शामिल हैं। यह समझौता ओमान के प्रमुख सेवा क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों द्वारा 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की भी अनुमति देता है।
भारत और न्यूज़ीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा की है।[31] इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड से भारत को निर्यात होने वाले लगभग 95% उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम किया जाएगा, और समझौते के लागू होने की तिथि से आधे से अधिक उत्पाद शुल्क-मुक्त हो जाएंगे। भारत को न्यूजीलैंड को निर्यात किए जाने वाले सभी उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त, न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब USD का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। एफटीए के तहत भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक नया वीजा रूट भी बनाया गया है, जिसके तहत एक समय में अधिकतम 5,000 वीजा जारी किए जा सकेंगे, जिनकी अधिकतम अवधि तीन वर्ष होगी।
स्टैंडिंग कमिटी ने भारत-बांग्लादेश संबंधों के भविष्य पर रिपोर्ट पेश की
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
विदेश मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. शशि थरूर) ने 'भारत-बांग्लादेश संबंधों का भविष्य' विषय पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की।[32] कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं: (i) भूमि सीमा समझौते, 2015 के तहत शेष सीमांकन में तेज़ी लाना, (ii) 689 किलोमीटर की बिना बाड़ वाली भूमि सीमा पर बाड़ लगाने में तेज़ी लाना, (iii) लंबित आव्रजन मामलों की प्रगति की निगरानी के लिए एक समर्पित द्विपक्षीय तंत्र स्थापित करना, और (iv) गंगा जल संधि (जो 2026 में समाप्त होने वाली है) पर चर्चा शुरू करना और संयुक्त नदी आयोग की नियमित बैठकें आयोजित करना।
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श्रम एवं रोजगार
चारों श्रम संहिताओं के अंतर्गत ड्राफ्ट नियमों पर टिप्पणियां आमंत्रित
Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने निम्नलिखित संहिताओं के अंतर्गत केंद्रीय नियमों के ड्राफ्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित कीं: (i) व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियां संहिता, 2020, (ii) सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020, (iii) औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, और (iv) वेतन संहिता, 2019।[33], [34], [35], [36] ये चारों संहिताएं 29 कानूनों का स्थान लेंगी। ड्राफ्ट नियमों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां: किसी भी प्रतिष्ठान में साप्ताहिक कार्य घंटे 48 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए। प्रत्येक कार्यदिवस की अवधि, अंतराल और कार्य विस्तार के साथ, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएगी। महिलाओं को शाम और रात के समय सभी प्रकार के कार्यों के लिए कुछ निर्दिष्ट शर्तों के अधीन नियोजित किया जा सकता है, जैसे: (i) कर्मचारी की लिखित सहमति, (ii) आने-जाने के लिए पर्याप्त परिवहन सुविधाएं, और (iii) सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था। किसी भी कारखाने, गोदी, खदान, भवन और अन्य निर्माण कार्य के प्रत्येक नियोक्ता को अपने कर्मचारियों के लिए वार्षिक निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करनी होगी। ड्राफ्ट नियमों में निम्नलिखित के तरीके भी निर्दिष्ट हैं: (i) पंजीकरण, (ii) रिकॉर्ड्स का रखरखाव, और (iii) सुरक्षा समितियों जैसे आवश्यक निकायों का गठन।
सामाजिक सुरक्षा: नियमों के ड्राफ्ट में बीमा, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ जैसे लाभों के प्रावधान के लिए प्रक्रियाएं निर्दिष्ट की गई हैं। इनमें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संचालन हेतु विभिन्न निकायों के गठन का तरीका भी बताया गया है। गिग वर्कर भी सामाजिक सुरक्षा लाभों के पात्र हैं, अगर उन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक एक एग्रीगेटर के साथ काम किया हो, या एकाधिक एग्रीगेटरों के मामले में कम से कम 120 दिनों तक काम किया हो। केंद्र सरकार गिग वर्कर्स को लाभ प्रदान करने के लिए अतिरिक्त पात्रता शर्तें निर्दिष्ट कर सकती है।
औद्योगिक संबंध: नियमों के ड्राफ्ट में ट्रेड यूनियनों की मान्यता, कार्य समिति जैसी संस्थाओं के गठन और तालाबंदी या हड़ताल की सूचना देने का तरीका निर्दिष्ट किया गया है। छंटनी से कम से कम 15 दिन पहले, कर्मचारियों की संख्या में कमी से 60 दिन पहले और कारखाने को बंद करने से 90 दिन पहले केंद्र सरकार से आवेदन करना अनिवार्य है। इनमें खनन, मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा जैसे क्षेत्रों के लिए आदर्श स्थायी आदेश भी निर्दिष्ट किए गए हैं।
वेतन: इन ड्राफ्ट नियमों में निम्नलिखित प्रावधान हैं: (i) तीन व्यक्तियों के परिवार के लिए न्यूनतम कैलोरी इनटेक, ईंधन और बिजली, मकान किराया और शैक्षिक एवं चिकित्सा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम मजदूरी की गणना का तरीका, (ii) महंगाई भत्ते का वर्ष में दो बार संशोधन, (iii) सामान्य कार्यदिवस में कार्य घंटों की संख्या को सामान्य या विशेष आदेश के माध्यम से निर्दिष्ट करना, और (iv) केंद्रीय सलाहकार बोर्ड के परामर्श से केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण।
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अंतर्गत नियमों के ड्राफ्ट पर 29 जनवरी, 2026 तक और अन्य तीन नियमों के ड्राफ्ट पर 13 फरवरी, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं।
कैग ने पीएम कौशल विकास योजना पर ऑडिट रिपोर्ट जारी की
Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंतर्गत कौशल विकास पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट जारी की।[37] यह योजना 2015 में युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। ऑडिट रिपोर्ट में 2015 से 2022 के बीच शुरू की गई योजना के तीन चरणों का विवरण दिया गया है। इन चरणों का संयुक्त लक्ष्य लगभग 1.32 करोड़ उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करना था।
कैग ने इस बात पर प्रकाश डाला कि योजना के अल्पकालिक प्रशिक्षण और विशेष परियोजना घटकों के तहत प्रमाणित उम्मीदवारों में से केवल 41% (56 लाख उम्मीदवारों में से 23 लाख) को ही रोजगार मिला। कैग ने बताया कि सूक्ष्म स्तर पर कौशल अंतर और बाजार की मांग का विश्लेषण किए बिना नौकरियों का चयन करना कम रोजगार मिलने का मुख्य कारण था। कैग ने यह भी बताया कि सभी राज्यों में कौशल विकास के लिए राज्य और जिला योजनाएं तैयार नहीं की गईं। राष्ट्रीय योजना भी तैयार नहीं की गई थी। कैग ने यह भी पाया कि पीएमकेवीवाई के तीन चरण पूरे होने के बाद भी केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों में प्रभावी तालमेल नहीं बन पाया।
रिपोर्ट में कार्यान्वयन और निगरानी में कई कमियों को भी उजागर किया गया। इनमें प्रशिक्षण और निगरानी से संबंधित अविश्वसनीय दस्तावेज़ और प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद के मूल्यांकन में देरी शामिल हैं। मार्च 2024 तक राज्यों को आवंटित धनराशि का लगभग 20% अप्रयुक्त रहा।
कैग के प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) जॉब रोल्स और मांग में चिन्हित कौशल अंतराल के मद्देनजर प्रशिक्षण को अनुकूल बनाना, (ii) समग्र दिशा और निरंतरता प्रदान करने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक योजना तैयार करना, और (iii) केंद्र और राज्य सरकारों की कौशल विकास पहलों के बीच कन्वर्जेंस और डेटा एकीकरण के लिए एक रोडमैप तैयार करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
खनन
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
एमएमडीआर एक्ट, 1957 में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित
कोयला मंत्रालय ने खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 (एमएमडीआर एक्ट) में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[38] यह एक्ट भारत में खनिजों के रेगुलेशन, विकास और संरक्षण तथा खनन अधिकारों के अनुदान को रेगुलेट करता है।[39] प्रस्तावित प्रमुख परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
लाइसेंस के तहत ज़्यादा से ज़्यादा क्षेत्र: एमएमडीआर एक्ट खनन और अन्वेषण लाइसेंस के तहत अधिग्रहित की जा सकने वाली अधिकतम क्षेत्रफल सीमा निर्दिष्ट करता है। मंत्रालय ने पाया कि वर्तमान क्षेत्रफल सीमाएं आधुनिक खनन परियोजनाओं के विकास को बाधित करती हैं। आधुनिक खनन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने क्षेत्रफल सीमाओं के विस्तार के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं।
माइनिंग लीज़ की अवधि: एमएमडीआर एक्ट कोयला और लिग्नाइट खनन पट्टों की अधिकतम अवधि 30 वर्ष निर्धारित करता है। इनका नवीनीकरण अधिकतम 20 वर्षों के लिए किया जा सकता है। मंत्रालय का मानना है कि इससे अनुपालन में बोझ बढ़ सकता है और देरी हो सकती है, क्योंकि आमतौर पर इन खानों का जीवनकाल 30 वर्ष से अधिक होता है। इसलिए मंत्रालय ने भविष्य के पट्टों की अवधि को बढ़ाकर 50 वर्ष करने का प्रस्ताव दिया है।
एंड-यूज़ की पाबंदी में ढील: एमएमडीआर एक्ट कैप्टिव कोयला और लिग्नाइट पट्टेदारों को अंतिम उपयोग की आवश्यकताओं को पूरा करने और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने के बाद वार्षिक उत्पादन का 50% तक खुले बाजार में बेचने की अनुमति देता है। मंत्रालय ने पाया कि इन खानों में अप्रयुक्त उत्पादन के कारण पुराने भंडार का संचय हो गया है। मंत्रालय ने 50% की सीमा को हटाने और पुराने खनिज भंडारों की बिक्री की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है।
खनन कार्यों में कोयला गैसीकरण को शामिल करना: कोयला गैसीकरण कोयले को सिंथेटिक गैस में परिवर्तित करता है, जिसका उपयोग कोयले की तुलना में स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में किया जा सकता है। खनिज विकास के कानूनी और रेगुलेटरी ढांचे के भीतर इस प्रक्रिया को एकीकृत करने के लिए खनन की परिभाषा में गैसीकरण को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है।
11 जनवरी, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
नॉन-रेगुलेटेड क्षेत्र में कोल लिंकेज की नीलामी के लिए नई विंडो शुरू की गई
कोयला मंत्रालय ने नॉन-रेगुलेटेड क्षेत्र (एनआरएस) लिंकेज नीलामी नीति, 2016 में संशोधन करके एक नई नीलामी विंडो, कोलसेटू (निर्बाध, कुशल और पारदर्शी उपयोग के लिए कोयला) की शुरुआत की है।[40] एनआरएस लिंकेज नीति के तहत सीमेंट, इस्पात, स्पंज आयरन और एल्युमीनियम जैसे नॉन-रेगुलेटेड उद्योगों को कोयला लिंकेज का आवंटन नीलामी के माध्यम से किया जाता है। नई व्यवस्था के तहत बिना किसी विशिष्ट अंतिम उपयोग की शर्त के कोयला लिंकेज की नीलामी की जा सकती है। व्यापारी इसमें भाग नहीं ले सकेंगे। एनआरएस नीति के अंतर्गत मौजूदा विशिष्ट अंतिम उपयोग वाले उप-क्षेत्रों की नीलामी नई व्यवस्था के साथ-साथ जारी रहेगी। इस व्यवस्था के तहत लिंकेज 15 वर्षों तक के लिए दिए जा सकते हैं और समूह की कंपनियों में इनका लचीला उपयोग अनुमत होगा। इस व्यवस्था के तहत कोकिंग कोयला नहीं दिया जाएगा। कोल इंडिया लिमिटेड और सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड कार्यान्वयन एजेंसियां होंगी।
कोयला एक्सचेंज नियम, 2025 के ड्राफ्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित
कोयला मंत्रालय ने कोयला एक्सचेंज नियम, 2025 के ड्राफ्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[41] नियमों का ड्राफ्ट खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत तैयार किया गया है। कोयला एक्सचेंज एक रेगुलेटेड ई-मार्केटप्लेस है जहां कोयले का व्यापार एक वस्तु के रूप में किया जा सकता है।
रेगुलेटरी अथॉरिटी: कोयला नियंत्रक संगठन को कोयला एक्सचेंजों के पंजीकरण, रेगुलेशन और पर्यवेक्षण के लिए प्राधिकरण के रूप में नामित किया गया है। इसे निम्नलिखित अधिकार प्राप्त होंगे: (i) पंजीकरण प्रदान करना, नवीनीकरण करना और निलंबित करना, (ii) उन अनुबंधों को मंजूरी देना जिनके माध्यम से कोयला लाया और बेचा जाता है, (iii) बाजार पर्यवेक्षण करना, और (iv) निरीक्षण करना।
पात्रता: कोयला एक्सचेंज स्थापित करने के लिए आवेदन करने वाली कंपनी का गैर-पारस्परिक (डीम्यूचुअलाइज्ड) होना अनिवार्य है (स्वामित्व और प्रबंधन व्यापारिक अधिकारों से अलग होते हैं) और उसकी न्यूनतम शुद्ध संपत्ति 100 करोड़ रुपए होनी चाहिए। ड्राफ्ट नियमों में कोयला एक्सचेंज में इक्विटी धारकों के लिए शेयरधारिता पैटर्न भी निर्दिष्ट किया गया है। कोयला एक्सचेंज का कोई भी सदस्य शेयर पूंजी के 5% से अधिक का मालिक नहीं हो सकता है और सभी सदस्य मिलकर शेयर पूंजी के 49% से अधिक के मालिक नहीं हो सकते हैं। कोई भी गैर-सदस्य शेयर पूंजी के 25% से अधिक का मालिक नहीं हो सकता है।
पंजीकरण: कोयला एक्सचेंज का पंजीकरण 25 वर्षों के लिए दिया जाएगा जिसे अधिकतम 25 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है। प्राधिकरण नियमों के उल्लंघन, निर्धारित सीमा से नीचे कुल संपत्ति में कमी, बाजार में हेरफेर, इनसाइडर ट्रेडिंग या निर्देशों का पालन न करने पर पंजीकरण रद्द कर सकता है।
कोयला एक्सचेंज की ज़िम्मेदारियां: कोयला एक्सचेंज इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से अनुबंध-आधारित कोयला व्यापार की सुविधा प्रदान करेंगे। प्लेटफॉर्म पर मूल्य निर्धारण दो-पक्षीय बंद बोली नीलामी तंत्र के माध्यम से किया जाएगा। बाजार जोखिम प्रबंधन के लिए, प्रत्येक कोयला एक्सचेंज एक जोखिम प्रबंधन ढांचा विकसित और लागू करेगा। यह एक जोखिम मूल्यांकन और प्रबंधन समिति का भी गठन करेगा जो ढांचे के अनुपालन की निगरानी करेगी। एक्सचेंज निपटान चूक से निपटने के लिए एक निपटान गारंटी कोष भी स्थापित करेगा। कोयला एक्सचेंजों को कार्टेलाइजेशन, इनसाइडर ट्रेडिंग और बाजार में हेरफेर का पता लगाने के लिए निगरानी प्रणाली स्थापित करनी होगी।
18 जनवरी, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
स्टैंडिंग कमिटी ने कोयला परियोजनाओं की मंज़ूरी पर रिपोर्ट पेश की
कोयला, खान और इस्पात से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री अनुराग ठाकुर) ने 'कोयला खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण और वन मंजूरी की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने' पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[42] कमिटी के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच पर्यावरण और वन संबंधी मंजूरी देने में लगने वाले औसत समय में अंतर को कम करना, (ii) खान सुरक्षा और जल प्राधिकरणों द्वारा दी गई अनुमतियों को एकल खिड़की ढांचे के अंतर्गत लाना, (iii) क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए भूमि बैंक बनाना, और (iv) भूमिगत खनन को बढ़ावा देने के लिए नीति का सरलीकरण और प्रथाओं का मानकीकरण।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने खनिज और धातु क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर रिपोर्ट पेश की
कोयला, खान और इस्पात से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री अनुराग ठाकुर) ने 'खनिज और धातु क्षेत्र में आत्मनिर्भरता' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[43] कमिटी ने कहा कि भारत मैग्नेसाइट, मैंगनीज और रॉक फॉस्फेट जैसे खनिजों के लिए आयात पर निर्भर है, जबकि इनकी घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद है। लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए भी भारत आयात पर निर्भर है। कमिटी के प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) घरेलू प्रसंस्करण और शोधन क्षमताओं का विकास करना और उन्हें लागत-प्रतिस्पर्धी बनाना, (ii) विलंब को दूर करने के लिए खनिज और महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं की नीलामी के बाद की प्रगति की निगरानी हेतु अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन करना, (iii) खनिज क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी बढ़ाना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
संचार
डाकघर एक्ट, 2023 में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
डाक विभाग ने डाकघर एक्ट, 2023 में संशोधन के ड्राफ्ट को सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए जारी किया है।[44] यह एक्ट डाकघर के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जो केंद्र सरकार का एक उपक्रम है (जिसे इंडिया पोस्ट के नाम से भी जाना जाता है)। संशोधन के ड्राफ्ट में ध्रुवा नामक एक डिजिटल एड्रेसिंग सिस्टम के लिए ढांचा प्रस्तावित किया गया है। प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
डिजिटल एड्रेसिंग सिस्टम: इस प्रणाली से उपयोगकर्ता अपने पते को मानकीकृत प्रारूप में डिजिटल रूप से दर्शा और साझा कर सकेंगे। पते की जानकारी तैयार करने, उपयोग करने, उस तक पहुंचने और उसकी पुष्टि करने के लिए उपयोगकर्ता की सहमति आवश्यक होगी। इन संशोधनों से केंद्र सरकार को वस्तुओं पर पते, पते की पहचान और पोस्टकोड के उपयोग के लिए मानक निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त होगा।
केंद्र सरकार एक नेटवर्क प्रशासक नियुक्त करेगी जो एक साझा प्रणाली स्थापित और संचालित करेगा तथा तकनीकी एवं प्रशासनिक मानक निर्धारित करेगा। प्रशासक एक या अधिक संस्थाओं को एड्रेस सर्विस प्रोवाइडर्स (एएसपी) के रूप में पंजीकृत करेगा। एएसपी अंतिम उपयोगकर्ताओं को एड़्रेस आइडेंटिफायर्स जनरेट करने की सेवाएं प्रदान करेंगे। केंद्र सरकार निर्दिष्ट व्यक्तियों को अधिकृत एड्रेस वैलिडेशन एजेंसियों के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत करेगी। ये एजेंसियां उपयोगकर्ता द्वारा प्रदान किए गए एड़्रेस आइडेंटिफायर्स से जुड़ी जानकारी को सत्यापित कर सकती हैं। इनमें केंद्र या राज्य सरकारों के विभाग, वैधानिक निकाय, निगमित कंपनियां और कोई अन्य अधिसूचित व्यक्ति शामिल हैं।
अपराध और सज़ा: संशोधन के ड्राफ्ट में बिना अनुमति के गतिविधियां करने पर दंड का प्रावधान है। इनमें एड़्रेस आइडेंटिफायर्स बनाना या पते की जानकारी सत्यापित करना शामिल है। इन अपराधों के लिए एक करोड़ रुपए तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर प्रतिदिन 10 लाख रुपए का अतिरिक्त जुर्माना लगेगा। जानकारी न देने या गलत जानकारी देने पर भी 10 लाख रुपए तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर प्रतिदिन 25,000 रुपए तक का अतिरिक्त जुर्माना लगेगा। केंद्र सरकार जुर्माने का निर्धारण करने के लिए निर्णायक अधिकारियों की नियुक्ति करेगी। साथ ही, निर्णायक अधिकारियों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए एक अपीलीय प्राधिकरण की भी नियुक्ति करेगी।
स्टैंडिंग कमिटी ने फेक न्यूज़ पर रोक लगाने के तरीके पर रिपोर्ट सौंपी
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. निशिकांत दुबे) ने “फेक न्यूज़ पर अंकुश लगाने की व्यवस्था की समीक्षा” पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[45] कमिटी के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सभी प्रकार के मीडिया के लिए मौजूदा नियामक तंत्र के तहत "फर्जी समाचार" को परिभाषित करना, (ii) क्रॉस प्लेटफॉर्म फर्जी समाचार मामलों का निपटारा करने और दंड का सुझाव देने के लिए एक स्वतंत्र निकाय का गठन करना, (iii) संपादकों, प्रकाशकों और मध्यस्थों की जवाबदेही सुनिश्चित करना, (iv) सभी प्रसारकों के लिए एक सेल्फ-रेगुलेशन तंत्र, और (v) फर्जी समाचारों के संबंध में शिकायत निवारण के लिए एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल।45
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
कानून एवं न्याय
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
संसद ने निरसन और संशोधन बिल, 2025 पारित किया
संसद ने निरसन और संशोधन बिल, 2025 को पारित कर दिया।[46] यह बिल अप्रचलित या निरर्थक 71 कानूनों को निरस्त करता है। साथ ही, यह चार कानूनों में संशोधन भी करता है। पंजीकृत डाक के लिए शब्दावली को अपडेट करने हेतु यह सामान्य खंड एक्ट, 1897 और सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में संशोधन करता है। भारतीय उत्तराधिकार एक्ट, 1925 में संशोधन करके कुछ मामलों में न्यायालयों द्वारा वसीयत के सत्यापन की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। बिल आपदा प्रबंधन एक्ट, 2005 में ड्राफ्टिंग संबंधी एक त्रुटि को सुधारने हेतु संशोधन करता है।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
जनरेटिव एआई और कॉपीराइट पर वर्किंग पेपर पर टिप्पणियां आमंत्रित
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने जनरेटिव एआई और कॉपीराइट पर एक वर्किंग पेपर पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[47] यह पेपर एआई सिस्टम को प्रशिक्षित करने में कॉपीराइट धारकों की सुरक्षा के लिए मौजूदा रेगुलेटरी ढांचे की पर्याप्तता का आकलन करता है। प्रमुख निष्कर्षों में निम्नलिखित शामिल हैं:
मौजूदा फ्रेमवर्क का रिव्यू: कॉपीराइट एक्ट, 1957 कॉपीराइट धारक को पुनरुत्पादन, भंडारण, अनुकूलन, संचार और प्रतियां जारी करने पर अनन्य अधिकार प्रदान करता है। अनुमति के बिना ऐसा कोई भी उपयोग एक्ट के अंतर्गत उल्लंघन माना जाता है, जब तक कि उसे छूट न दी गई हो। हालांकि, टेक्स्ट और डेटा माइनिंग या एआई प्रशिक्षण के लिए कोई विशिष्ट छूट नहीं है।
मौजूदा रेगुलेटरी मॉडल की समीक्षा: स्वैच्छिक लाइसेंसिंग के तहत एआई डेवलपर्स को प्रशिक्षण के लिए किसी भी कॉपीराइट धारक के कार्यों का उपयोग करने से पहले व्यक्तिगत रूप से अनुमति लेनी और लाइसेंस पर बातचीत करनी पड़ती है। हालांकि, ऑनलाइन सामग्री की विशाल मात्रा और संभावित अधिकार धारकों की संख्या इसे महंगा और अव्यावहारिक बना देती है। टेक्स्ट और डेटा माइनिंग पर एक व्यापक छूट एआई डेवलपर्स को कॉपीराइट किए गए कार्यों पर बिना अनुमति लिए प्रशिक्षण देने की अनुमति देती है, बशर्ते कि सामग्री कानूनी रूप से सुलभ हो। हालांकि इससे बाधाएं कम होती हैं, लेकिन रचनाकारों को मुआवजा नहीं मिलता। सामूहिक लाइसेंसिंग में एक सामूहिक संगठन का उपयोग कम लेनदेन लागत पर लाइसेंस कार्यों को अधिकृत करने और अधिकार धारकों को रॉयल्टी देने के लिए किया जाता है। हालांकि, लाइसेंसिंग का विरोध करने से कंपनियां उच्च रॉयल्टी की मांग करने के लिए मजबूर हो जाती हैं, जिससे प्रवेश में उच्च बाधाएं उत्पन्न होती हैं। यह मॉडल बहुआयामी डेटासेट के साथ भी संघर्ष करता है, जिससे सामूहिक लाइसेंसिंग बड़े पैमाने पर अव्यावहारिक हो जाती है।
प्रस्तावित फ्रेमवर्क: डीपीआईआईटी ने एक हाइब्रिड मॉडल प्रस्तावित किया है, जिसके तहत एआई सिस्टम किसी भी कानूनी रूप से उपलब्ध कॉपीराइटेड कार्य पर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें अनिवार्य रूप से एक व्यापक लाइसेंस के माध्यम से भुगतान करना होगा। रचनाकारों को वैधानिक पारिश्रमिक अधिकार के तहत भुगतान की गारंटी दी जाती है और वे अपने कार्य के उपयोग को रोक नहीं सकते। केंद्र सरकार द्वारा नामित एक निकाय एआई डेवलपर्स से ऐसे उपयोग के लिए भुगतान एकत्र करेगा और उसे अधिकार धारकों में समान रूप से वितरित करेगा।
7 जनवरी, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
शिपिंग
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
घरेलू जहाज निर्माण को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित किए गए
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने दो जहाज निर्माण पहलों के लिए परिचालन दिशानिर्देश अधिसूचित किए: (i) जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना और (ii) जहाज निर्माण विकास योजना।[48], [49], [50] दिशानिर्देशों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
वित्तीय सहायता योजना: इस योजना के लिए कुल 24,736 करोड़ रुपए का कोष आवंटित किया जाएगा। सरकार 100 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के जहाजों के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी, जो छोटे जहाजों के लिए 15% से लेकर विशेष जहाजों के लिए 25% तक होगी। यह योजना उन सभी जहाजों पर लागू होगी जिनके निर्माण में कम से कम 30% घरेलू सामग्री (जिसमें भारतीय मूल के घटक और श्रम शामिल हैं) का उपयोग किया गया है। कुछ जहाज, जिनमें लकड़ी के जहाज और रक्षा उद्देश्यों के लिए निर्मित जहाज शामिल हैं, इस योजना के अंतर्गत नहीं आएंगे।
रीसाइकिलिंग: इस योजना के तहत जहाजों को स्क्रैप करने और उनका रीसाइकलिंग करने को भी प्रोत्साहन दिया जाता है। जहाजों को स्क्रैप करने पर, जहाज मालिक उचित स्क्रैप मूल्य के 40% के बराबर क्रेडिट नोट प्राप्त कर सकते हैं। इन क्रेडिट नोटों का उपयोग भारतीय शिपयार्ड में निर्मित और योजना के तहत पंजीकृत जहाजों के भुगतान के दौरान किया जा सकता है। इन क्रेडिट नोटों को तीन साल के भीतर भुनाया जा सकता है और इन्हें हस्तांतरित या बेचा जा सकता है।
शिपबिल्डिंग विकास योजना: इस योजना के लिए कुल 19,989 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। इसके तहत नए जहाज निर्माण समूहों के विकास और पुराने जहाज निर्माण यार्डों के विस्तार को प्रोत्साहन दिया जाएगा। नए जहाज निर्माण समूहों को केंद्र और राज्य के 50:50 के विशेष प्रयोजन वाहन के माध्यम से 100% पूंजी सहायता प्राप्त होगी। वहीं, पुराने जहाज निर्माण यार्डों को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विस्तार और स्वचालन प्रणालियों की स्थापना के लिए 25% पूंजी सहायता मिलेगी। इन परियोजनाओं की ऋणयोग्यता को बढ़ावा देने के लिए, योजना में क्रेडिट जोखिम कवरेज ढांचा भी शामिल है। माल भेजने से पहले, माल भेजने के बाद और विक्रेता के चूक के जोखिमों को कवर करने के लिए सरकार समर्थित बीमा की पेशकश की जाएगी।
पर्यावरण
स्टैंडिंग कमिटी ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर रिपोर्ट सौंपी
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थायी समिति (अध्यक्ष: श्री भुवनेश्वर कलिता) ने 'दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण और इसके निवारण के लिए विभिन्न एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदम' विषय पर बैठक की।[51] समिति की प्रमुख टिप्पणियों और सिफारिशों में शामिल हैं: (i) सभी मैनुअल निगरानी स्टेशनों का उन्नयन और निगरानी स्टेशनों के भौगोलिक कवरेज में सुधार, (ii) नियमित अंतराल पर प्रदूषण स्रोत विभाजन अध्ययन करना, (iii) वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन तथा धूल और अपशिष्ट जलाने से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना, और (iv) चरम मांग के दौरान फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की कमी को दूर करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने दिल्ली एनसीआर में जल प्रदूषण पर रिपोर्ट पेश की
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री भुवनेश्वर कलिता) ने "दिल्ली एनसीआर में जल प्रदूषण और उसके निवारण हेतु विभिन्न एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदम" विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[52] कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) यमुना नदी में मौजूदा संदूषक निगरानी और सीवेज प्रबंधन प्रणालियों में सुधार करना, (ii) अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए शून्य तरल निर्वहन प्रौद्योगिकियों को लागू करना, (iii) यमुना नदी तट पर स्थित राज्यों के बीच भविष्य के जल बंटवारे समझौतों की समयसीमा को 30 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष करना, (iv) यमुना नदी के बाढ़ के मैदानों को पुनर्जीवित करने के लिए लक्षित गाद हटाने की योजना और (v) दस्त के उपचार और जन स्वास्थ्य अभियानों के लिए समर्पित स्वास्थ्य देखभाल इकाइयां, विशेष रूप से कम आय वाले और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में।52
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
शहरी विकास
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
स्टैंडिंग कमिटी ने मिशन अमृत की समीक्षा पर रिपोर्ट पेश की
आवास और शहरी मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री मगंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी) ने 'शहरी पेयजल पर विशेष जोर देते हुए अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) की समीक्षा' पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[53] अमृत को जून 2015 में शुरू किया गया था। अक्टूबर 2021 में इसे अमृत 2.0 में शामिल कर लिया गया। अमृत 2.0 का मुख्य उद्देश्य शहरी जल सुरक्षा में सुधार, शहरी शासन को मजबूत करना और संस्थागत एवं तकनीकी क्षमताओं का निर्माण करना है। कमिटी के प्रमुख निष्कर्ष और सुझाव इस प्रकार हैं: (i) विशेष रूप से कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों के लिए केंद्रीय धनराशि में वृद्धि करना, (ii) अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करना, (iii) डेटा निगरानी की गुणवत्ता में सुधार करना, (iv) राष्ट्रीय शहरी जलभंडार पुनर्भरण रणनीति तैयार करना और (v) अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग में सुधार करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
रेलवे
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
भारतीय रेलवे की माल ढुलाई राजस्व बढ़ाने पर रिपोर्ट पेश
रेलवे से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. सी. एम. रमेश) ने 'भारतीय रेलवे की माल ढुलाई संबंधी आय में वृद्धि और समर्पित माल ढुलाई गलियारों (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स) का विकास' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी ने कहा कि रेलवे ने आखिरी बार नवंबर 2018 में माल ढुलाई की दरों में बदलाव किया था और ऑपरेशनल लागत बढ़ने के बावजूद तब से दरें वैसी ही हैं। उसने बाजार की मांग और ऑपरेशनल लागत को ध्यान में रखते हुए माल ढुलाई की दरों का सालाना व्यापक मूल्यांकन करने का सुझाव दिया। उसने कहा कि माल ढुलाई से होने वाली कमाई रेलवे की कमाई का लगभग 65% है। माल ढुलाई से होने वाली कमाई बढ़ाने के लिए कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) कमोडिटी बास्केट में विविधता लाकर उसमें ऑटोमोबाइल और ई-कॉमर्स वस्तुओं को शामिल करना, न कि इसे सिर्फ खनिजों तक सीमित रखना, (ii) बेहतर कनेक्टिविटी के लिए फ्रेट टर्मिनल बनाना, और (iii) वैगन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और निजी वैगन स्वामित्व को बढ़ावा देना। उसने यह भी कहा कि समर्पित माल ढुलाई गलियारे उच्च परिवहन गति प्रदान करते हैं और औद्योगिक केंद्रों के एकीकरण को सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा फीडर मार्गों को बढ़ाने और नए फीडर मार्गों को विकसित करने का सुझाव दिया।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए यहां देखें।
स्वास्थ्य
Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)
दवाओं की बढ़ती कीमतों पर स्टैंडिंग कमिटी ने रिपोर्ट पेश की
रसायन एवं उर्वरक से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री आज़ाद कीर्ति झा) ने 'फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में दवाओं की बढ़ती कीमतों का आम नागरिकों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव- एक समीक्षा' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[54] कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ट्रेड मार्जिन को कम करने के लिए ड्रग (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 में बदलाव करना, (ii) गैर-अधिसूचित दवाओं और फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन को रेगुलेट करना, और (iii) ऑनलाइन दवा प्लेटफॉर्म के रेगुलेशन को मज़बूत करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
कृषि
Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)
स्टैंडिंग कमिटी ने उर्वरकों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर रिपोर्ट पेश की
रसायन एवं उर्वरक से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री आज़ाद कीर्ति झा) ने उर्वरकों के आयात पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उर्वरकों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता- इससे संबंधित बाधाओं की समीक्षा' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) राजकोषीय एवं कर प्रोत्साहनों के माध्यम से उत्पादन क्षमता का विस्तार, (ii) उर्वरक संयंत्रों की स्थापना के लिए स्वदेशी प्रक्रिया प्रौद्योगिकी का विकास, (iii) आयात पर निर्भरता कम करने के लिए प्राकृतिक गैस निष्कर्षण परियोजनाओं में तेजी लाना, (iv) पुराने यूरिया संयंत्रों के उन्नयन, आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार के लिए एक कार्यबल का गठन, और (v) नैनो उर्वरकों के छिड़काव में प्रयुक्त ड्रोन्स के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना की शुरुआत।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
सूचना प्रौद्योगिकी
Niranjana S Menon (niranjana@prsindia.org)
संचार संबंधी स्टैंडिंग कमिटी ने आईटी समझौते पर रिपोर्ट पेश की
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. निशिकांत दुबे) ने “नए युग में सूचना प्रौद्योगिकी समझौते का प्रभाव” विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी ने आईटी समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। कमिटी ने कहा कि टैरिफ हटाने से भारत का अविकसित इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग समय से पहले ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आ गया है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) इलेक्ट्रॉनिक और आईटी उत्पादों के लिए भारत की आयात निर्भरता, (ii) मैन्यूफैक्चरिंग की जगह एसेंबली में आर्थिक गतिविधियों का संकेंद्रण, और (iii) समझौते के तहत व्यापार अवरोध करने से साइबर सुरक्षा संबंधी जोखिम।
कमिटी के मुख्य सुझावों में शामिल हैं: (i) भारतीय आईटी उद्योग पर समझौते के असर की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त अंतर-मंत्रालयी समिति के गठन, (ii) डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के मौजूदा नियमों को लागू करना, और (iii) ई-वेस्ट रीसाइकिलिंग को बढ़ावा देना। उसने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में कई मुद्दों को उठाने का सुझाव दिया, जिनमें निम्न शामिल हैं: (i) आईटीए-2 के तहत 5जी उपकरण और एआई घटकों को शामिल करना, (ii) हाइब्रिड डिजिटल उत्पादों के लिए स्पष्ट वर्गीकरण, (iii) प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए तंत्र।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें।
संसद ने अपनी कुछ विभागीय स्थायी समितियों का गठन किया है। समितियों द्वारा 2025-26 में समीक्षा के लिए चिन्हित विषय निम्न हैं। पहले की घोषणाओं के लिए अक्टूबर 2025 और नवंबर 2025 के मंथली पॉलिसी रिव्यू देखें।
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परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति |
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1 |
क्षेत्रीय संपर्क का मूल्यांकन (आरसीएस-उड़ान) और अंतिम-मील संपर्कों का विस्तार |
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2 |
उभरती एविएशन टेक्नोलॉजी के लिए फ्रेमवर्क, ड्रोन इकॉनमी, एयरस्पेस मैनेजमेंट का मॉडर्नाइज़ेशन, और इंडियन एविएशन इंडस्ट्री के सामने आने वाली ज़रूरी सप्लाई-चेन चुनौतियों का समाधान |
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3 |
भारत एविएशन एमआरओ और एयरक्राफ्ट मैन्यूफैक्चरिंग के लिए ग्लोबल हब के तौर पर |
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4 |
एयरो स्पोर्ट्स और एडवेंचर को बढ़ावा देना |
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5 |
एयर क्रू और कर्मचारियों के लिए एयरोमेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ सपोर्ट सिस्टम |
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6 |
नेशनल म्यूज़ियम में सुधार और पुरानी चीज़ों को वापस लाने की रणनीति |
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7 |
एएसआई का कामकाज और हेरिटेज साइट मैनेजमेंट को मजबूत करना |
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8 |
बंदरगाह आधुनिकीकरण, शिपबिल्डिंग उद्योग और अंतर्देशीय नौवहन |
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9 |
राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास और रखरखाव |
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10 |
गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की समीक्षा: परिवहन नेटवर्क का बहु-मॉडल एकीकरण |
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11 |
सड़क सुरक्षा की समीक्षा जिसमें विज़न ज़ीरो, टायर रेटिंग, हाईवे डिज़ाइन स्टैंडर्ड, एनफोर्समेंट स्ट्रैटेजी, और वर्ल्ड बैंक-स्पॉन्सर्ड सेफ़ कॉरिडोर डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट शामिल हैं |
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12 |
हर राज्य में एक इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट बॉडी और इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगाने की ज़रूरत का मूल्यांकन |
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13 |
गाइड, हॉस्पिटैलिटी और इको-टूरिज्म के लिए औपचारिक कौशल विकास, विश्वविद्यालय स्तरीय पाठ्यक्रम और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से भारत के पर्यटन क्षेत्र का समग्र विकास |
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14 |
ब्लू इकॉनमी टूरिज्म को बढ़ावा देना |
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15 |
सतत पर्यटन स्थल विकास के लिए राष्ट्रीय पर्यटन स्थलों में पर्यटन अवसंरचना, शुल्क प्रबंधन और क्षेत्रीय परिवहन संपर्क का एकीकरण |
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कार्मिक, लोक शिकायत, कानून एवं न्याय |
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कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग |
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1 |
केंद्र सरकार में रिक्तियों को भरना |
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2 |
सूचना का अधिकार एक्ट, 2005 और केंद्रीय सूचना आयोग के कामकाज की समीक्षा |
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3 |
सतर्कता प्रशासन की प्रभावशीलता |
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4 |
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का कामकाज |
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प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग |
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1 |
लोक शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करके शिकायतों का प्रभावी निवारण |
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2 |
केंद्र सरकार में नागरिक चार्टर का कार्यान्वयन |
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3 |
अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित शिकायतों का निवारण |
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कानूनी मामलों का विभाग |
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1 |
देश में ट्रिब्यूनल सिस्टम के कामकाज की समीक्षा |
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2 |
वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को समर्थन देने के लिए संस्थागत तंत्र का निर्माण और विकास |
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न्याय विभाग |
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1 |
उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियां |
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2 |
न्यायिक अवसंरचना की समीक्षा |
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3 |
न्यायिक प्रक्रियाएं और उनमें सुधार: |
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i |
क्षेत्रीय भाषाओं में न्यायालय की कार्यवाही और निर्णय; तथा अनुसूचित भाषाओं में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्णयों की उपलब्धता |
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ii |
24x7 वर्चुअल कोर्ट और अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग |
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iii |
उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता |
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iv |
न्यायालयों के प्रबंधन के लिए न्यायालय प्रबंधक प्रणाली |
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vi |
फास्ट-ट्रैक विशेष न्यायालयों का मूल्यांकन |
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vi |
न्यायाधीशों द्वारा सेवानिवृत्ति के बाद के कार्यभारों को ग्रहण करना |
[1] Monetary Policy Statement, 2025-26, Resolution of the Monetary Policy Committee, December 3 to 5, 2025, Reserve Bank of India, December 5, 2025, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=61749.
[2] Developments in India’s Balance of Payments during the Second Quarter (July-September) of 2025-26, Reserve Bank of India, December 1, 2025, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=61714.
[3]“India's Index of industrial production records growth of 0.4% in October 2025”, Press Information Bureau, Ministry of Statistics and Programme Implementation, December 1, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2196938®=3&lang=1.
[4] “India's Index of Industrial Production recorded growth of 5.2% in November 2024”, Press Information Bureau, Ministry of Statistics and Programme Implementation, January 10, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2091785®=3&lang=1.
[5]Report no. 27, Standing Committee on Finance: ‘Performance Review of National Statistical Commission (NSC)’, Lok Sabha, December 2, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Finance/18_Finance_27.pdf?source=loksabhadocs
[6]The Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Act, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/The_SHANTI_Act_2025.pdf.
[7]The Atomic Energy Act, 1962, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1413/1/A1962-33.pdf.
[8]The Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/2084/5/A2010-38.pdf.
[9]G.S.R. 888(E), The Gazette of India, Ministry of Petroleum and Natural Gas, December 9, 2025, https://mopng.gov.in/files/Whatsnew/2025-12-19-163402-29rio-PNG-Rules,-2025.pdf.
[10]The Oilfields (Regulations and Development) Act, 1948, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1397/3/A1948-53.pdf.
[11]The Petroleum and Natural Gas Rules, 1959, https://dghindia.gov.in/assets/downloads/l2.pdf.
[12]“Guidelines for Virtual Power Purchase Agreements”, Central Electricity Regulatory Commission, December 24, 2025, https://cercind.gov.in/regulations/Guidelines-VPPA.pdf.
[13]Report no. 10, Standing Committee on Energy: ‘Performance Evaluation of Solar Power Projects in the Country’, Lok Sabha, December 8, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Energy/18_Energy_10.pdf?source=loksabhadocs.
[14], Report No. 7, Estimates Committee: . Implementation of Pradhan Mantri Kisan Urjan Suraksha Evam Utthaan Madhabhiyan (PM-KUSUM) and PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana, Lok Sabha, December 4, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Estimates/18_Estimates_7.pdf?source=loksabhadocs.
[15] Report No. 17 of 2025, Performance Audit Report on Deen Dayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojana/ Pradhan Mantri Sahaj Bijli Har Ghar Yojana, Union Government, Ministry of Power, December 18, 2025, https://cag.gov.in/en/audit-report/details/123660.
[16] The Viksit Bharat—Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Bill, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Viksit_Bharat%E2%80%93Guarantee_for_Rozgar_and_Ajeevika_Mission_(Gramin)_VB%E2%80%93G_RAM_G_Bill,2025.pdf.
[17] The National Rural Employment Guarantee Act, 2005, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/6930/1/the_mahatma_gandhi_national_rural_employment_guarantee_act%2C_2005.pdf.
[18] The Sabka Bima Sabki Raksha (Amendment of Insurance Laws) Bill, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Sabka_Bima_Sabki_Raksha(Amendment_of_Insurance_Laws)Bill,2025.pdf.
[19]The Securities Markets Code, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Securities_Markets_Code,2025.pdf.
[20]The Health Security se National Security Cess Act, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Health_Security_se_National_Security_Cess_Act_2025.pdf.
[21] The Central Excise (Amendment) Act, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Central_Excise_(A)_Act_2025.pdf.
[22]The Manipur Goods and Services Tax (Second Amendment) Bill, 2025, https://prsindia.org/billtrack/the-manipur-goods-and-services-tax-second-amendment-bill-2025.
[23]The Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025 https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Viksit_Bharat_Shiksha_Adhishthan_Bill,_2025.pdf.
[24]Review of Autonomous Bodies and Institutions- NTA, NAAC, Draft UGC regulations, ICHR, ICPR, ICSSR, IIAS (Shimla) and Auroville Foundation under the Department of Higher Education, Rajya Sabha, December 08, 2025, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/16/214/371_2025_12_12.pdf?source=rajyasabha.
[25] Report No. 372, Standing Committee on Education, Women, Children, Youth and Sports, ‘Review of Schemes for Education Loans and Financial Accessibility in Higher Education’, Rajya Sabha, December 9, 2025, https://sansad.in/rs/committees/16?departmentally-related-standing-committees.
[26]"Cabinet approves PM-Vidyalaxmi scheme to provide financial support to meritorious students so that financial constraints do not prevent any youth of India from pursuing quality higher education", Press Information Bureau, Union Cabinet, November 6, 2024, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2071131®=3&lang=2.
[27]“Joint Statement following the 23rd India - Russia Annual Summit (December 05, 2025)”, Press Release, Ministry of External Affairs, December 5, 2025, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40410.
[28]“List of Outcomes: State Visit of the President of the Russian Federation to India (December 04 – 05, 2025)”, Press Release, Ministry of External Affairs, December 5, 2025, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40409/List_of_Outcomes_State_Visit_of_the_President_of_the_Russian_Federation_to_India_December_04__05_2025.
[29]“Cabinet approves establishment of International Big Cat Alliance (IBCA)", Press Information Bureau, Union Cabinet, February 29, 2024, https://www.pib.gov.in/PressReleasePavidyage.aspx?PRID=2010122®=3&lang=2.
[30]“India and Oman sign Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA),” Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, December 18, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2205889®=3&lang=1.
[31]“India and New Zealand Announce Conclusion of Landmark Free Trade Agreement Negotiations,” Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, December 18, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2207300®=3&lang=2.
[32] Report No. 9, Standing Committee on External Affairs, ‘Future of India-Bangladesh Relationship’, Lok Sabha, December 18, 2025, https://sansad.in/ls/committee/departmentally-related-standing-committees/11-External%20Affairs-nameH=%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A5%80%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87.
[33]G.S.R. 934(E), Draft Occupational Safety, Health and Working Conditions Code (Central) Rules, 2025, The Gazette of India, Ministry of Labour and Employment, December 30, 2025, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/268944.pdf.
[34]G.S.R. 935(E), Draft Social Security Code (Central) Rules, 2025, The Gazette of India, Ministry of Labour and Employment, December 30, 2025, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/268945.pdf.
[35]G.S.R 936(E), Draft Code on Wages (Central) Rules, 2025, The Gazette of India, Ministry of Labour and Employment, December 30, 2025, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/268946.pdf.
[36]G.S.R. 930(E), Draft Industrial Relations Code (Central) Rules, 2025, The Gazette of India, Ministry of Labour and Employment, December 30, 2025, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/268942.pdf.
[37]Report no. 20 of 2025, Report on Skill Development under Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana, Ministry of Skill Development and Entrepreneurship, https://cag.gov.in/uploads/download_audit_report/2025/Report-No.-20-of-2025_PA-PMKVY_English-PDF-A-06943abec463479.68516873.pdf.
[38]Proposal for amendment of the Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, Ministry of Coal, December 12, 2025, https://coal.nic.in/sites/default/files/2025-12/12-12-2025ps1-wn.pdf.
[39]Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/13122/1/67_of_1957.pdf.
[40]“Auction of Coal Linkage for Seamless, Efficient & Transparent Utilisation (CoalSETU) by creation of new window named "CoalSETU window" in the NonRegulated Sector (NRS) Linkage Policy to utilise coal for any industrial use and export” Ministry of Coal, December 19, 2025, https://www.coal.nic.in/sites/default/files/2025-12/19-12-2025-bwn.pdf.
[41]Draft Coal Exchange Rules, 2025, Ministry of Coal, December 19, 2025, https://www.coal.nic.in/sites/default/files/2025-12/19-12-2025-a.pdf.
[42]Fifteenth Report of the Standing Committee on Coal, Mines and Steel on ‘Expediting and Simplifying the Environment and Forest Clearance Process for Coal Mining Projects’ December 10, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Coal,%20Mines%20and%20Steel/18_Coal_Mines_and_Steel_15.pdf?source=loksabhadocs.
[43] Sixteenth Report of the Standing Committee on Coal, Mines and Steel on ‘Self-Reliance in Minerals and Metals’ December 17, 2025, https://sansad.in/d81922cc-0009-4953-8ee7-07e947670c4b.
[44]“Inviting Comments on the proposed draft of the amendments to the Post Office Act, 2023”, Department of Posts, December 1, 2025,https://www.indiapost.gov.in/api/documents/file/U2FsdGVkX18xSwvvi1EQ-B9oDLv_e_chixfQ0m-E1M1FBJ6DxOfTUvhXbSuCvxAFepV5oIXiAv0uT2iUDh1Sfw.
[45] Report No. 22, Standing Committee on Communications and Information Technology, ‘Review of Mechanism to Curb Fake News’, Lok Sabha, December 2, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Communications%20and%20Information%20Technology/18_Communications_and_Information_Technology_22.pdf?source=loksabhadocs.
[46]The Repealing and Amending Act, 2025, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2025/Repealing_And_Amending_Bill,2025.pdf.
[47]“Working Paper on Generative AI and Copyright,” Department for Promotion of Industry and Internal Trade, Ministry of Commerce and Industry, December 8, 2025, https://www.dpiit.gov.in/static/uploads/2025/12/ff266bbeed10c48e3479c941484f3525.pdf.
[48] Guidelines for Shipbuilding Development Scheme, Ministry of Ports, Shipping and Waterways, December 26, 2025, https://shipmin.gov.in/sites/default/files/Annexure%202%20Credit%20risk%20coverage%20guidelines_0.pdf.
[49] Guidelines for Shipbuilding Financial Assistance Scheme, Ministry of Ports, Shipping and Waterways, December 26, 2025, https://shipmin.gov.in/sites/default/files/Annexure%201%20SBFAS%20guidelines_0.pdf.
[50] Govt notifies guidelines for shipbuilding assistance, development schemes, Press Information Bureau, December 27, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2209139®=3&lang=1.
[51]Four Hundred First Report of the Department-related Parliamentary Standing Committee on Science and Technology, Environment, Forests and Climate Change on Air Pollution in Delhi NCR and steps taken by various agencies for its mitigation, December 12, 2025, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/19/217/401_2025_12_16.pdf?source=rajyasabha.
[52] Report No. 402, Standing Committee on Science and Technology, Environment, Forest and Climate Change, ‘Water Pollution in Delhi NCR and steps taken by various agencies for its mitigation’, Rajya Sabha, December 12, 2025, https://sansad.in/rs/committees/19?departmentally-related-standing-committees.
[53]Report no. 7, Standing Committee on Housing and Urban Affairs: ‘Review of Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation (AMRUT) with special emphasis on Urban Drinking Water’, Lok Sabha, December 12, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Housing%20and%20Urban%20Affairs/18_Housing_and_Urban_Affairs_7.pdf?source=loksabhadocs.
[54]Price Rise of Medicines in the Pharmaceutical Sector- A Review, Lok Sabha, December 01, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Chemicals%20&%20Fertilizers/18_Chemicals_And_Fertilizers_14.pdf?source=loksabhadocs.
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।
