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फरवरी 2026

पीडीएफ

इस अंक की झलकियां

बजट सत्र का पहला चरण समाप्त

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा हुई और केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया गया। एक बिल पेश किया गया और वह पारित हो गया। सत्र 9 मार्च, 2026 को फिर से शुरू होगा और 2 अप्रैल, 2026 को समाप्त होगा।

नई जीडीपी श्रृंखला जारी

2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए नई गणना के अनुसार, भारत की जीडीपी में 2025-26 में 7.6% की वृद्धि (स्थिर कीमतों पर) का अनुमान है। इसके अनुसार, 2025-26 में जीडीपी (वर्तमान कीमतों पर) 345 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

केंद्रीय बजट 2026-27 पेश

सरकार ने 2026-27 में 53,47,315 करोड़ रुपए के व्यय का प्रस्ताव रखा है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 7.7% अधिक है। राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3% रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (4.4%) से कम है।

रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने के लिए मतदान किया। स्टैंडिंग डिपॉजिट फेसिलिटी, मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट और बैंक रेट को भी अपरिवर्तित रखा गया है।

भारत और यूएसए ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए रूपरेखा की घोषणा की

भारत यूएसए की सभी औद्योगिक वस्तुओं और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ समाप्त करेगा या कम करेगा। यूएसए को भारतीय निर्यात पर पारस्परिक टैरिफ घटकर 18% हो जाएगा।

कैबिनेट ने वेंचर कैपिटल जुटाने के लिए स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी

फंड में 10,000 करोड़ रुपए का कॉरपस होगा। इसका लक्ष्य उन उच्च-तकनीकी क्षेत्रों को समर्थन देना है जिनमें धैर्यपूर्ण पूंजी की आवश्यकता होती है, प्रारंभिक विकास चरण के स्टार्टअप को सशक्त बनाना है और साथ ही प्रमुख महानगरों के बाहर निवेश को प्रोत्साहित करना है।

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 3.6 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी

इसमें वायुसेना के लिए राफेल लड़ाकू विमानों और युद्धक मिसाइलों की खरीद और सेना के लिए टी-72 टैंक, टैंक रोधी खदानों की खरीद और बख्तरबंद रिकवरी वाहनों के प्लेटफॉर्म के नवीनीकरण की मंजूरी शामिल है।

चार प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की गई

फ्रांस, ब्राजील, मलयेशिया और इज़राइल के साथ राष्ट्राध्यक्ष स्तर पर वार्ता आयोजित की गई। चर्चा में रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा प्रौद्योगिकी तथा एआई जैसे प्रमुख विषय शामिल थे।

कैबिनेट ने शहरी चुनौती कोष को मंजूरी दी

यह कोष एकीकृत स्थानिक और पारगमन योजना, शहरी गतिशीलता, जलवायु अनुकूलता और जलापूर्ति एवं स्वच्छता सहित निर्दिष्ट क्षेत्रों में अवसंरचना परियोजनाओं के लिए शहरी स्थानीय निकायों को केंद्रीय सहायता प्रदान करेगा।

नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाने के साथ एआई इम्पैक्ट समिट 2026 संपन्न  

इस घोषणा का 91 देशों ने समर्थन किया है और इसका उद्देश्य स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी पहलों के माध्यम से एआई में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।

 

संसद

Ruchira Sakalle (ruchira@prsindia.org)

बजट सत्र का पहला चरण समाप्त हुआ

बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी, 2026 से 13 फरवरी, 2026 तक चला। दूसरा चरण 9 मार्च, 2026 से शुरू होकर 2 अप्रैल, 2026 को समाप्त होगा।

सत्र की शुरुआत संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई। केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत किया गया। सत्र के एजेंडा के अनुसार (फाइनांस बिल, 2026 को छोड़कर) कोई भी बिल पेश या विचार के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया था। हालांकि औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में संशोधन करने वाला एक बिल पेश किया गया और दोनों सदनों में पारित कर दिया गया।

 

मैक्रोइकोनॉमिक विकास

Shania Ali (shania@prsindia.org)

जीडीपी की नई श्रृंखला जारी

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने आधार वर्ष 2011-12 की पिछली श्रृंखला को बदलकर, 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए वार्षिक और त्रैमासिक राष्ट्रीय लेखा अनुमानों की एक नई श्रृंखला जारी की है।[1] नई श्रृंखला में अनुमान विधियों को अपडेट किया गया है, कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतकों का उपयोग किया गया है, और स्थिर मूल्य श्रृंखला तक पहुंचने के लिए अपस्फीति की गणना की विधि को संशोधित किया गया है।

नई श्रृंखला पर आधारित दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (स्थिर कीमतों पर) में 2025-26 में 7.6% की वृद्धि का अनुमान है।1  2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 2024-25 (7.1%) की तुलना में अधिक रहने का अनुमान है। 2023-24 में जीडीपी 7.2% की दर से बढ़ी थी। नई श्रृंखला के तहत जीडीपी वृद्धि दर 2023-24 से पहले के वर्षों के लिए फिलहाल उपलब्ध नहीं है। पिछली श्रृंखला पर आधारित पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान था।[2]  

नई श्रृंखला के अनुसार, 2025-26 में जीडीपी (वर्तमान कीमतों पर) 345 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो पिछली श्रृंखला के 357 लाख करोड़ रुपए के अनुमान से 3.4% कम है। नई श्रृंखला के तहत 2025-26 में सांकेतिक वृद्धि 8.6% होने का अनुमान है, जबकि पिछली श्रृंखला के तहत यह 8% थी।

2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में जीडीपी (स्थिर कीमतों पर) 2024-25 की इसी अवधि की तुलना में 7.8% की दर से बढ़ी।1  2024-25 की तीसरी तिमाही में जीडीपी 7.4% बढ़ी थी। 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में जीडीपी 8.4% बढ़ने का अनुमान है (रेखाचित्र 1)।

रेखाचित्र 1: स्थिर 2022-23 कीमतों पर जीडीपी वृद्धि (प्रतिशत में, वर्ष-दर-वर्ष)

स्रोत: एमओएसपीआई; पीआरएस।

विभिन्न क्षेत्रों में जीडीपी को सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) के रूप में मापा जाता है। 2025-26 में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में सबसे अधिक वृद्धि (11.5%) दर्ज होने का अनुमान है, इसके बाद व्यापार (10.1%) और वित्तीय सेवाओं (9.9%) का स्थान है (तालिका 1)।

तालिका 1: वार्षिक क्षेत्रीय वृद्धि (स्थिर 2022-23 कीमतों पर)

क्षेत्र

2023-24

2024-25

2025-26

कृषि

2.6%

4.2%

2.4%

खनन

2.4%

11.7%

4.1%

मैन्यूफैक्चरिंग

12.7%

9.3%

11.5%

बिजली

10.7%

2.9%

1.5%

निर्माण

9.9%

7.3%

7.1%

व्यापार

10.1%

6.6%

10.1%

वित्तीय सेवाएं

5.5%

10.0%

9.9%

सार्वजनिक सेवाएं

6.8%

5.0%

5.8%

जीवीए

7.2%

7.3%

7.7%

जीडीपी

7.2%

7.1%

7.6%

स्रोत: एमओएसपीआई; पीआरएस।

मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र ने 2025-26 की तीसरी तिमाही में सबसे अधिक वृद्धि (13.3%) दर्ज की, इसके बाद वित्तीय सेवाओं (11.2%) और व्यापार (11.0%) का स्थान रहा (तालिका 2)।

तालिका 2: 2025-26 की तीसरी तिमाही में विभिन्न क्षेत्रों में जीवीए में वृद्धि (स्थिर 2022-23 कीमतों पर) (प्रतिशत में, वर्ष-दर-वर्ष)

क्षेत्र

तीसरी तिमाही

2023-24

2024-25

2025-26

कृषि

1.4%

5.8%

1.4%

खनन

1.5%

13.1%

4.7%

मैन्यूफैक्चरिंग

15.2%

10.8%

13.3%

बिजली

12.6%

0.6%

1.5%

निर्माण

8.7%

6.4%

6.6%

व्यापार

8.8%

6.7%

11.0%

वित्तीय सेवाएं

4.8%

11.1%

11.2%

सार्वजनिक सेवाएं

7.3%

4.4%

4.5%

जीवीए

6.7%

7.8%

7.8%

जीडीपी

7.1%

7.4%

7.8%

स्रोत: एमओएसपीआई; पीआरएस।

आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को अल्पावधि की जरूरतों के लिए उधार देता है) को 5.25% पर बरकरार रखा है।[3]  समिति के अन्य फैसलों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • स्टैंडिंग डिपॉजिट फेसिलिटी रेट (जिस दर पर आरबीआई कोलेट्रल दिए बिना बैंकों से उधार लेता है) को 5.0% पर बरकरार रखा गया है।

  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) भी 5.5% पर बरकरार हैं।

  • एमपीसी ने अपना तटस्थ रुख जारी रखने का निर्णय लिया।

एमओएसपीआई ने आईआईपी और सीपीआई के लिए आधार वर्ष में संशोधन किया

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार वर्ष में भी संशोधन किया गया है।[4] अब आईआईपी के लिए नया आधार वर्ष 2022-23 है और सीपीआई के लिए 2024 है।

 

वित्त

केंद्रीय बजट 2026-27 को पेश किया गया

Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2026 को 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया।[5] बजट की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • व्यय: अनुमान है कि सरकार 2026-27 में 53,47,315 करोड़ रुपए खर्च करेगी, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 7.7% अधिक है।

  • प्राप्तियां: अनुमान है कि 2026-27 में (ऋण के अतिरिक्त) प्राप्तियां 36,51,547 करोड़ रुपए होंगी, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (34,06,350 करोड़ रुपए) से 7.2% अधिक है।

  • जीडीपी: सरकार ने 2026-27 में सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर 10% (अर्थात वास्तविक वृद्धि और मुद्रास्फीति) रहने का अनुमान लगाया है।

  • घाटा: 2026-27 में राजस्व घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 1.5% रखा गया है। यह 2025-26 के संशोधित अनुमान 1.5% के समान है। 2026-27 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3% रखा गया है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान 4.4% से कम है।

  • कर प्रस्ताव: 2026-27 के लिए कर दरें पिछले वर्ष के समान ही हैं। भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करके वैश्विक क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक कर छूट दी गई है। विकल्प और वायदा पर प्रतिभूति लेनदेन कर की दरें बढ़ा दी गई हैं।

  • नीतिगत प्रस्ताव: 'विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति' का गठन किया जाएगा। विदेशी निवेश की रूपरेखा को सरल बनाने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण उपकरण) नियमों की समीक्षा की जाएगी। 200 पुराने औद्योगिक समूहों को पुनर्जीवित करने के लिए एक योजना शुरू की जाएगी। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा। जैविक उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बायोफार्मा शक्ति योजना को पांच वर्षों के लिए लागू किया जाएगा।

तालिका 3: केंद्रीय बजट की मुख्य विशेषताएं (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25

वास्तविक

2025-26

संअ

2026-27

बअ

25-26 संअ से 26-27 बअ में परिवर्तन का %

कुल व्यय

46,52,867

49,64,842

53,47,315

7.7%

कुल प्राप्तियां *

30,78,436

34,06,350

36,51,547

7.2%

राजस्व घाटा

5,64,296

5,26,764

5,92,344

12.4%

जीडीपी का %

1.7%

1.5%

1.5%

-

राजकोषीय घाटा

15,74,431

15,58,492

16,95,768

8.8%

जीडीपी का %

4.8%

4.4%

4.3%

 

नोट: *उधारियों को छोड़कर। स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज 2026-27; पीआरएस।

केंद्रीय बजट 2026-27 के विश्लेषण के लिए कृपया देखें।       

आरबीआई ने क्रेडिट डेरिवेटिव्स पर संशोधित मास्टर दिशानिर्देशों का ड्राफ्ट जारी किया

Shania Ali (shania@prsindia.org)

केंद्रीय बजट 2026-27 में कॉरपोरेट बॉन्ड पर डेरिवेटिव्स शुरू करने की घोषणा की गई थी। उसके अनुरूप, आरबीआई ने कॉरपोरेट बॉन्ड पर टोटल रिटर्न स्वैप (टीआरएस) और क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (सीडीएस) शुरू करने के लिए एक ड्राफ्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जारी किया।[6]  कॉरपोरेट बॉन्ड कंपनियों द्वारा धन जुटाने के लिए जारी की गई ऋण प्रतिभूतियां होती हैं। कॉरपोरेट बॉन्ड पर टीआरएस ऐसे अनुबंध हैं जिनमें एक पक्ष भुगतान के बदले बॉन्ड का कुल रिटर्न (ब्याज और मूल्य परिवर्तन) दूसरे पक्ष को हस्तांतरित करता है।

क्रेडिट डेरिवेटिव्स (सीडीएस) ऐसे अनुबंध होते हैं जहां एक पक्ष (संरक्षण विक्रेता) दूसरे पक्ष (संरक्षण खरीदार) को तब हर्जाना देता है, जब किसी विशिष्ट इकाई के लिए कोई क्रेडिट इवेंट घटित होता है। इसके बदले में, संरक्षण खरीदार अनुबंध की परिपक्वता अवधि या क्रेडिट इवेंट घटित होने तक समय समय पर प्रीमियम का भुगतान करता है। क्रेडिट डेरिवेटिव्स ऐसे वित्तीय साधन होते हैं जिनका मूल्य किसी सूचकांक या उनके मूल ऋण साधनों के क्रेडिट जोखिम से जुड़ा होता है।

ऐसे उत्पाद क्रेडिट जोखिमों के कुशल प्रबंधन को सुगम बना सकते हैं, कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ा सकते हैं और कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने में सहायता कर सकते हैं। आरबीआई की ड्राफ्ट रेगुलेटरी रूपरेखा क्रेडिट डेरिवेटिव बाजार में पात्र प्रतिभागियों और साधनों, ट्रेडिंग, सेटेलमेंट और हेजिंग के लिए परिचालन दिशानिर्देश, विभिन्न बाजार प्रतिभागियों की भूमिकाएं और दायित्व, ग्राहक सुरक्षा और रिपोर्टिंग आवश्यकताएं, विवेकपूर्ण आवश्यकताएं और उल्लंघन के लिए जुर्माने को निर्दिष्ट करता है।

आरबीआई ने आरईआईटी और इनविट्स को ऋण देने से संबंधित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित की

Shania Ali (shania@prsindia.org)

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटीज़) को ऋण देने के लिए ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं।[7] अब तक वाणिज्यिक बैंकों को इन संस्थाओं को ऋण देने की अनुमति नहीं थी। अब कुछ सुरक्षा उपायों के अधीन वाणिज्यिक बैंकों को आरईआईटीज़ को वित्त प्रदान करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट्स) को ऋण देने के संबंध में मौजूदा दिशानिर्देशों को भी आरईआईटीज़ से संबंधित प्रस्तावित सुरक्षा उपायों के अनुरूप बनाया जा रहा है। प्रमुख प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आरईआईटी को ऋण देना: बैंकों को अब उन आरईआईटी को ऋण देने की अनुमति है जो: (i) सूचीबद्ध हैं, (ii) एसईबीआई द्वारा पंजीकृत और रेगुलेटेड हैं, (iii) संचालन के न्यूनतम तीन वर्ष पूर कर चुके हैं और पिछले दो वित्तीय वर्षों में शुद्ध वितरण योग्य नकदी प्रवाह सकारात्मक रहा है, (iv) पिछले तीन वर्षों के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण प्रतिकूल रेगुलेटरी कार्रवाई के अधीन नहीं रहे हैं, और (v) आरईआईटी के अंतर्गत कोई भी विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) वित्तीय कठिनाई का सामना नहीं कर रहा है। विदेशी शाखाएं उन विदेशी आरईआईटीज़ को भी ऋण दे सकती हैं जहां इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी रूपरेखा मौजूद है। बैंकों को आरईआईटीज़ को दिए गए ऋण के अंतिम उपयोग पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका उपयोग भूमि अधिग्रहण जैसी निषिद्ध गतिविधियों के लिए न किया जाए।

बैंक केवल नियमित मूलधन चुकौती वाले ऋणों के माध्यम से ही आरईआईटीज़ को ऋण दे सकते हैं। किसी आरईआईटी और उसकी एसपीवी को मिलाकर बैंकों द्वारा दिया जाने वाला कुल ऋण आरईआईटीज़ के परिसंपत्ति मूल्य के 49% तक सीमित है। आरईआईटीज़ में बैंक का कुल निवेश उसकी पात्र पूंजी आधार के 10% से अधिक नहीं हो सकता। इसके अलावा, बैंकों के पास आरईआईटीज़ को ऋण देने संबंधी बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति होनी चाहिए, जिसमें मूल्यांकन तंत्र, स्वीकृति मानदंड, आंतरिक निवेश सीमाएं और उचित अनुबंधों जैसे निगरानी व्यवस्थाएं शामिल हों।

इसी तरह के निर्देश निम्नलिखित को ऋण देने के लिए प्रस्तावित किए गए हैं: (i) लघु वित्त बैंकों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों द्वारा आरईआईटी और (ii) वाणिज्यिक बैंकों द्वारा इनविट्स।

6 मार्च, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

आरबीआई ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर पर संशोधित निर्देश जारी किए

Shania Ali (shania@prsindia.org)

आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों के लिए संशोधित कैपिटल मार्केट एक्सपोजर (सीएमई) दिशानिर्देश जारी किए हैं।[8]  बैंकों के सीएमई में प्रतिभूतियों में निवेश, प्रतिभूतियों के बदले ऋण देना और स्टॉक ब्रोकर जैसे पूंजी बाजार मध्यस्थों (सीएमआई) को ऋण देना शामिल है। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य भारतीय कॉरपोरेट्स द्वारा किए जाने वाले अधिग्रहण के लिए बैंकों द्वारा वित्त पोषण को सक्षम बनाना है। साथ ही उनका लक्ष्य शेयरों और आरईआईटी एवं इनविट्स की यूनिट्स के बदले बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण की सीमा को बढ़ाना है, जबकि सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों के बदले ऋण पर लगी रेगुलेटरी सीमा को हटाना है। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य सीएमआई को ऋण देने के लिए एक अधिक सिद्धांत-आधारित रूपरेखा पेश करना है। ये संशोधन 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे। प्रमुख प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अधिग्रहण का वित्त पोषण: बैंकों को अब अधिग्रहण का वित्तपोषण करने की अनुमति है, यानी वे घरेलू या विदेशी कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए भारतीय गैर-वित्तीय कंपनियों को रणनीतिक निवेश के रूप में ऋण दे सकते हैं। इस प्रकार का वित्तपोषण उधारकर्ता के लिए वित्तीय पात्रता मानदंड, लीवरेज सीमाओं, मूल्यांकन मानकों, सुरक्षा आवश्यकताओं और बैंकों के बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के अधीन होगा।

  • प्रतिभूतियों के बदले ऋण देना: बैंक अपनी स्वीकृत नीति के अनुसार प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर कंपनियों को ऋण दे सकते हैं। कुछ प्रतिभूतियों, जैसे आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयर, स्वयं की प्रतिभूतियां और लॉक-इन शर्तों के अंतर्गत आने वाली प्रतिभूतियों के बदले ऋण देना प्रतिबंधित है। बैंक पात्र प्रतिभूतियों के बदले व्यक्तियों को ऋण दे सकते हैं, बशर्ते ऋण-मूल्य अनुपात (एलटीवी) की स्पष्ट सीमा और मूल्यांकन मानदंड लागू हों। एलटीवी किसी भी दिन बकाया ऋण राशि और प्रतिभूतियों के मूल्य का अनुपात होता है। बैंक व्यक्तियों को सार्वजनिक पेशकश के दौरान शेयरों खरीदने के लिए ऋण दे सकते हैं, बशर्ते कि ये उधारकर्ता कम से कम 25% नकद मार्जिन का योगदान दें।

  • सीएमआई को ऋण: बैंक वित्तीय क्षेत्र रेगुलेटर द्वारा पंजीकृत और रेगुलेटेड सीएमआई को ऋण सुविधाएं प्रदान कर सकते हैं। सीएमआई को दी जाने वाली सभी ऋण सुविधाएं पूर्णतः सुरक्षित आधार पर, यानी पूरी तरह से कोलेट्रल के बदले प्रदान की जाएंगी। बैंक ब्रोकरों या क्लियरिंग सदस्यों के लिए एक्सचेंज सिक्योरिटी डिपॉजिट या मार्जिन आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु गारंटी जारी कर सकते हैं, बशर्ते इन गारंटियों के बदले कम से कम 50% कोलेट्रल रखा गया हो जिसमें 25% नकद शामिल हो। बैंक सीएमआई को अपने स्वयं के व्यापार या निवेश उद्देश्यों के लिए प्रतिभूतियां खरीदने हेतु ऋण नहीं देंगे, कुछ अपवादों को छोड़कर, जैसे कि बाजार निर्माण संचालन। बाजार निर्माण संचालन बाजार में तरलता प्रदान करते हैं।

  • सीएमई सीलिंग: किसी बैंक का कुल सीएमई, चाहे वह स्वतंत्र रूप से हो या एकीकृत रूप से, उसके पात्र पूंजी आधार के 40% से अधिक नहीं होना चाहिए। बैंकों का प्रत्यक्ष सीएमई पात्र पूंजी के 20% तक सीमित है, और अधिग्रहण वित्त में कुल जोखिम 40% सीएमई सीमा के भीतर 20% तक सीमित है। प्रत्यक्ष सीएमई का तात्पर्य पूंजी बाजार प्रतिभूतियों में प्रत्यक्ष निवेश से है। इंट्रा-डे जोखिमों के लिए अलग सीमाएं लागू होती हैं।

अधिग्रहण वित्तपोषण को छोड़कर, लघु वित्त बैंकों के लिए भी इसी तरह के दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

सेबी ने आरईआईटीज़ और इनविट्स के लिए व्यापार सुगमता से संबंधित परामर्श पत्र जारी किया

Shania Ali (shania@prsindia.org)

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आरईआईटी और इनविट्स के लिए व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के उपायों से संबंधित एक परामर्श पत्र जारी किया है।[9] इन प्रस्तावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कनसेशन की अवधि समाप्त होने के बाद विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) में निरंतर निवेश: इनविट्स रेगुलेशंस के अनुसार, एसपीवी का अर्थ एक ऐसी इकाई है जो अपनी 90% संपत्ति सीधे अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश करती है। कनसेशन की अवधि समाप्त होने पर, अवसंरचना परियोजना में एसपीवी का हित समाप्त हो जाता है। हालांकि इनविट ऐसे एसपीवी को अपने पास जारी रख सकती है क्योंकि उसे तुरंत बंद करना कठिन हो सकता है। यह प्रस्ताव है कि एसपीवी की परिभाषा का विस्तार किया जाए ताकि इनविट्स कनसेशन की समाप्ति या अवधि पूरा होने के बाद भी उन कंपनियों को अपने स्वामित्व में रख सकें।

  • आरईआईटीज़ और इनविट्स द्वारा लिक्विड म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश के दायरे का विस्तार: आरईआईटीज़ और इनविट्स को अपनी परिसंपत्तियों के मूल्य के 20% तक का निवेश निर्दिष्ट लिक्विड म्यूचुअल फंड योजनाओं में करने की अनुमति है, जो उनके संभावित क्रेडिट जोखिम से जुड़ी हैं। प्रबंधित परिसंपत्ति के आधार पर शीर्ष 15 लिक्विड म्यूचुअल फंड योजनाओं में से केवल दो ही इस मानदंड को पूरा करती हैं, जिससे आरईआईटीज़ और इनविट्स के लिए उपलब्ध निवेश के अवसर सीमित हो जाते हैं। अधिक म्यूचुअल फंड योजनाओं को पात्र बनाने के लिए मानदंडों में ढील देने का प्रस्ताव है।

  • निजी और सार्वजनिक इनविट्स के लिए निवेश की शर्तों का एकीकरण: सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध इनविट्स अपनी संपत्ति के मूल्य का 10% तक पूरी तरह से ग्रीनफील्ड परियोजनाओं मे निवेश कर सकते हैं जबकि निजी तौर पर सूचीबद्ध इनविट्स को इसकी अनुमति नहीं है। अब यह प्रस्तावित है कि निजी तौर पर सूचीबद्ध इनविट्स को भी अपनी संपत्ति के मूल्य का 10% तक ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में निवेश करने की अनुमति दी जाए।

  • इनविट्स के लिए नए ऋण के अनुमत उपयोग के दायरे का विस्तार: वर्तमान में अगर किसी इनविट का कुल शुद्ध ऋण उसके परिसंपत्ति मूल्य के 49% से अधिक है, तो अतिरिक्त ऋण का उपयोग केवल अवसंरचना परियोजनाओं के अधिग्रहण या विकास के लिए किया जा सकता है। ऐसे ऋणों के अनुमत उपयोग को पूंजीगत व्यय, प्रमुख रखरखाव और ऋण पुनर्वित्त तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।

 

वाणिज्य एवं उद्योग

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

भारत और यूएसए ने अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा की घोषणा की

भारत और यूएसए ने बराबरी की शर्तों और आपसी लाभ पर आधारित एक व्यापारिक अंतरिम समझौते की रूपरेखा की घोषणा की है।[10]  यह रूपरेखा यूएसए-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की दिशा में चल रही वार्ता का हिस्सा है। समझौते की प्रमुख शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भारत द्वारा यूएसए से आयातित सभी औद्योगिक वस्तुओं और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर लगाए जाने वाले शुल्क को समाप्त करना या कम करना, (ii) अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात, जैसे कपड़ा, चमड़ा और प्लास्टिक पर 18% का पारस्परिक शुल्क लगाना, (iii) पारस्परिक हित के क्षेत्रों में तरजीही बाजार पहुंच, और (iv) गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करना। यह भी घोषणा की गई कि यूएसए फार्मास्यूटिकल्स और विमान के पुर्जों सहित कई उत्पादों पर पारस्परिक शुल्क हटा देगा। हालांकि यह अंतरिम समझौते के सफल समापन पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, भारत 2031 तक यूएसए से 500 अरब USD के ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदेगा।

भारत समेत कई देशों में आयात पर पारस्परिक शुल्क लगाने के यूएसए के फैसले के बाद ये वार्ताएं चल रही हैं। 20 फरवरी, 2026 को यूएसए के सर्वोच्च न्यायालय ने इन शुल्कों को अवैध घोषित कर दिया था।[11] हालांकि इस फैसले के बाद यूएसए सरकार ने दोबारा शुल्क लगा दिए हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि वह फैसले के प्रभावों का विश्लेषण कर रहा है।[12]

भारत और खाड़ी सहयोग परिषद ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर किए

भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर किए।[13]  जीसीसी में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। संदर्भ शर्तों का उद्देश्य एफटीए के दायरे और तौर-तरीकों को परिभाषित करके वार्ताओं का मार्गदर्शन करना है। जीसीसी के साथ भारत का व्यापार 2024-25 में लगभग 179 अरब USD था, जो भारत के वैश्विक व्यापार का 15% है। जीसीसी को भारत के प्रमुख निर्यातों में इंजीनियरिंग वस्तुएं, चावल, वस्त्र, मशीनरी और रत्न एवं आभूषण शामिल हैं। जीसीसी से भारत के प्रमुख आयातों में कच्चा तेल, एलएनजी, पेट्रोकेमिकल्स और सोना जैसी कीमती धातुएं शामिल हैं।

कैबिनेट ने वेंचर कैपिटल जुटाने के लिए स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 की स्थापना को मंजूरी दे दी है।[14]  इस फंड का उद्देश्य निम्नलिखित क्षेत्रों को सहायता प्रदान करना है: (i) उच्च प्रौद्योगिकी संचालित क्षेत्र जिन्हें दीर्घकालिक पूंजी की आवश्यकता है, (ii) शुरुआती स्तर के ऐसे उद्यमी जो नए और इनोवेटिव आइडिया पर काम कर रहे हैं, उन्हें सेफ्टी नेट देना, (iii) प्रमुख महानगरों से बाहर निवेश, (iv) प्राथमिकता वाले क्षेत्र, जो आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं, और (v) छोटे फंड्स।

 

रक्षा

Shania Ali (shania@prsindia.org)

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने सभी सेवाओं में खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी

रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने थलसेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल के लिए 36 लाख करोड़ रुपए के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी।[15] वायुसेना के लिए स्वीकृत प्रस्तावों में राफेल लड़ाकू विमानों, लड़ाकू मिसाइलों और एयर-शिप आधारित हाई-एल्टीट्यूड स्यूडो सेटेलाइट्स (एएस-एचएपीएस) की खरीद शामिल है। राफेल लड़ाकू विमानों के अधिकांश हिस्से का निर्माण घरेलू स्तर पर होने की उम्मीद है।

थलसेना के लिए, मंजूरियों में टैंक-रोधी माइन्स और बख्तरबंद रिकवरी वाहनों, टी-72 टैंकों और बीएमपी-II इन्फैंट्री कॉम्बैट वाहनों के प्लेटफार्मों का ओवरहाल शामिल था, जिसका उद्देश्य उपकरणों की सर्विस लाइफ को बढ़ाना और परिचालन की तैयारियों में सुधार करना है।

नौसेना के लिए, 4-मेगावाट के समुद्री गैस टरबाइन आधारित इलेक्ट्रिक पावर जनरेटर और अतिरिक्त पी-8आई समुद्री टोही विमानों को मंजूरी दी गई, ताकि बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके और समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को मजबूत किया जा सके। तटरक्षक बल के लिए, निगरानी में सुधार लाने के उद्देश्य से डॉर्नियर विमानों के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड सिस्टम को मंजूरी दी गई।

इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्रालय ने तटरक्षक बल के लिए आठ डोर्नियर 228 विमानों और परिचालन संबंधी उपकरणों की खरीद के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।[16] इस अनुबंध का मूल्य 2,312 करोड़ रुपए है।

 

विदेशी मामले

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

चार प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता

फरवरी के महीने में फ्रांस, ब्राजील, मलयेशिया और इज़राइल के राष्ट्राध्यक्ष स्तर पर द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की गई।

फ्रांस

फ्रांस के राष्ट्रपति श्री इमैनुएल मैक्रॉन ने द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत का दौरा किया।[17]  दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाने की घोषणा की। उन्नत साझेदारी और होराइजन 2047 रोडमैप के कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा के लिए विदेश मंत्री हर साल वार्ता करेंगे। अन्य प्रमुख परिणामों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) रक्षा सहयोग पर भारत और फ्रांस के बीच समझौते का नवीनीकरण, (ii) भारत में हैमर मिसाइलों के उत्पादन के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और फ्रांसीसी रक्षा कंपनी सैफरान के बीच एक संयुक्त उद्यम पर हस्ताक्षर, (iii) महत्वपूर्ण खनिजों और धातुओं में सहयोग के लिए संयुक्त आशय पत्र, और (iv) भारत और फ्रांस के बीच दोहरे कराधान बचाव समझौते के प्रोटोकॉल में संशोधन। सहयोग के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अक्षय ऊर्जा, (ii) डिजिटल विज्ञान और प्रौद्योगिकी, (iii) संक्रामक रोगों और वैश्विक स्वास्थ्य पर अनुसंधान और विकास, (iv) स्टार्टअप इकोसिस्टम, और (v) विमानन में कौशल विकास।17

ब्राजील

ब्राजील के राष्ट्रपति श्री लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत का दौरा किया।[18] इस दौरे के दौरान सहयोग के जिन प्रमुख क्षेत्रों पर सहमति बनी, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) दुर्लभ खनिज और महत्वपूर्ण खनिज, (ii) दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का रेगुलेशन, (iii) लघु एवं मध्यम उद्यम और हस्तशिल्प, (iv) डिजिटल साझेदारी, (v) इस्पात आपूर्ति श्रृंखला के लिए खनन, और (vi) डाक क्षेत्र।18

मलयेशिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता के लिए मलयेशिया का दौरा किया।[19]  इस दौरे के दौरान सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आपदा प्रबंधन, (ii) भ्रष्टाचार से मुकाबला और रोकथाम, (iii) सेमीकंडक्टर, (iv) व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण, (v) स्वास्थ्य और चिकित्सा, और (vi) राष्ट्रीय सुरक्षा।19

इज़राइल

प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय वार्ता के लिए इज़राइल का दौरा भी किया।20 दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को "शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी" के स्तर तक बढ़ाया। वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के नेतृत्व में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग करने पर सहमत हुए। उन्होंने निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए: (i) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, (ii) जियोफिजिकल अन्वेषण, (iii) श्रम गतिशीलता, (iv) मत्स्य पालन और कृषि, (v) गुजरात के लोथल में एक राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का विकास, (vi) कृषि के लिए भारत-इजराइल केंद्र की स्थापना, और (vii) यूपीआई के माध्यम से सीमा पार प्रेषण।[20]  दोनों देशों ने निम्नलिखित विषयों पर आशय घोषणापत्रों पर हस्ताक्षर किए: (i) होराइजन स्कैनिंग में सहयोग, और (ii) भारत-इजराइल साइबर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना।20

 

शहरी विकास

Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)

कैबिनेट ने शहरी चुनौती कोष को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2025-26 और 2030-31 के बीच की परियोजनाओं के लिए कुल एक लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता से शहरी चुनौती कोष को मंजूरी दी।[21] यह एकीकृत स्थानिक और पारगमन योजना, शहरी गतिशीलता, शहरों के रचनात्मक पुनर्विकास, जलवायु अनुकूलन और जल एवं स्वच्छता से संबंधित परियोजनाओं को वित्त पोषित करेगा। यह निम्नलिखित श्रेणियों के शहरों के लिए उपलब्ध होगा: (i) 2025 के अनुमानों के आधार पर 10 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले सभी शहर, (ii) पहली श्रेणी में शामिल न होने वाले सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियां, और (iii) एक लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले प्रमुख औद्योगिक शहर। प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • वित्त पोषण: केंद्रीय सहायता कुल परियोजना लागत का 25% वहन करेगी, बशर्ते कि कम से कम 50% वित्तपोषण बाजार स्रोतों के माध्यम से किया जाए। इन स्रोतों में नगरपालिका बांड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी शामिल हो सकते हैं। शेष हिस्सा शहरी स्थानीय निकायों या संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा वहन किया जा सकता है।

  • परियोजना का चयन: परियोजनाओं का चयन प्रतिस्पर्धी चुनौती प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। धनराशि का आवंटन सुधारों, लक्ष्यों और स्पष्ट रूप से परिभाषित परिणामों से जुड़ा होगा। धनराशि जारी करने के लिए शहरों को सुधार जारी रखने होंगे।

  • ऋण चुकौती गारंटी योजना: देश भर के छोटे स्थानीय निकाय (एक लाख से कम जनसंख्या वाले) और पूर्वोत्तर तथा पहाड़ी राज्यों के शहर इस योजना के अंतर्गत आएंगे। इनके लिए 5,000 करोड़ रुपए का एक समर्पित कोष स्थापित किया जाएगा। पहली बार लिए गए ऋणों के लिए, केंद्र सरकार 7 करोड़ रुपए तक या ऋण राशि का 70%, जो भी कम हो, की गारंटी प्रदान करेगी। पहले ऋण के पुनर्भुगतान पर, 7 करोड़ रुपए तक या ऋण राशि का 50%, जो भी कम हो, के अतिरिक्त ऋण की गारंटी प्रदान की जाएगी। इससे छोटे शहरों में पहली बार ऋण लेने वालों के लिए 20 करोड़ रुपए तक और बाद की परियोजनाओं के लिए 28 करोड़ रुपए तक की परियोजनाएं प्रभावी रूप से कवर हो जाएंगी।

 

 

श्रम एवं रोजगार

संसद ने औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) बिल, 2026 पारित किया

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

संसद ने औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) बिल, 2026 को पारित कर दिया है।[22] यह बिल 11 फरवरी, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। यह औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में संशोधन करता है।[23]  संहिता में ट्रेड यूनियनों की मान्यता, हड़ताल और तालाबंदी के लिए नोटिस अवधि और औद्योगिक विवादों के समाधान जैसे मामलों का प्रावधान है। 2020 की संहिता तीन कानूनों के स्थान पर लाई गई थी: (i) ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926, (ii) औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) एक्ट, 1946, और (iii) औद्योगिक विवाद एक्ट, 1947। यह बिल स्पष्ट करता है कि ये तीनों कानून 21 नवंबर, 2025 से निरस्त माने जाएंगे।

बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 के अंतर्गत ड्राफ्ट रेगुलेशंस पर टिप्पणियां आमंत्रित

Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति संहिता, 2020 के अंतर्गत ड़्राफ्ट रेगुलेशंस पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[24],[25],[26]  ये रेगुलेशंस (i) धातुमय खदानों और (ii) गोदी में कार्यरत श्रमिकों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा एवं कार्य स्थिति संबंधी नियमों को निर्दिष्ट करते हैं। प्रमुख विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • धातुमय खदानें: ड्राफ्ट रेगुलेशंस में खान प्रबंधन, अधिकारियों, ठेकेदारों और श्रमिकों आदि के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का स्पष्ट उल्लेख है। उदाहरण के लिए, खान के मालिक को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक पर्याप्त और प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन योजना (एसएमपी) तैयार और कार्यान्वित की जाए। एसएमपी में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) कंपनी की विस्तृत खान सुरक्षा और स्वास्थ्य नीति, (ii) सुरक्षा के उद्देश्य को कार्यान्वित करने की क्षमता विकसित करने की योजना, (iii) खनन की योजना, (iv) प्रत्येक चिन्हित खतरे के लिए जोखिम प्रबंधन योजना, (v) स्वास्थ्य जोखिम पैदा करने वाली गतिविधियों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं, और (vi) योजना को अपडेट करने के लिए एसएमपी का वार्षिक मूल्यांकन। ड्राफ्ट रेगुलेशंस में औद्योगिक या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने लगने वाली चोट, बीमारी या आपात स्थिति से निपटने के लिए एक व्यापक आपातकालीन प्रतिक्रिया और निकासी योजना की भी आवश्यकता है। ड्राफ्ट रेगुलेशंस में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था, वेंटिलेशन, सुरक्षात्मक उपकरण और विस्फोट जैसी प्रक्रियाओं के तरीके आदि से संबंधित नियमों का भी उल्लेख है।

  • गोदी श्रमिक: ड्राफ्ट रेगुलेशंस में बताया गया है कि तट, जहाजों, गोदी और अन्य स्थानों पर जहां गोदी का काम किया जाता है, वहां काम करने की जगह कैसी होनी चाहिए, वहां उपकऱण कैसे हों और उनका रखरखाव कैसे किया जाए। इनमें आग और विस्फोट की रोकथाम और सुरक्षात्मक प्रावधान और खतरनाक रसायनों के रखरखाव से संबंधित नियम भी निर्दिष्ट हैं। हर बंदरगाह के लिए यह जरूरी है कि उसके पास डूबने, बाढ़, बिजली कटने, आग लगने और गैस रिसाव जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक आपातकालीन कार्य योजना हो।

धातुमय खदानों से संबंधित रेगुलेशंस के ड्राफ्ट पर 21 मार्च, 2026 तक और गोदी से संबंधित रेगुलेशंस के ड्राफ्ट पर 26 मार्च, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

इलेक्ट्रॉनिक एवं आईटी

Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)

नई दिल्ली घोषणापत्र के साथ एआई इम्पैक्ट समिट 2026 समाप्त

एआई इम्पैक्ट पर नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाने के साथ एआई इम्पैक्ट समिट 2026 समाप्त हुआ।[27]  इस घोषणापत्र को भारत, चीन, यूके और यूएसए सहित 91 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन दिया है। इसका उद्देश्य स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी पहलों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बुनियादी एआई रिसोर्सेज़ तक किफायती पहुंच को बढ़ावा देना, (ii) वैश्विक स्तर पर एआई उपयोग के मामलों को बढ़ाने और दोहराने के लिए एक मंच, ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स का विकास करना, (iii) इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ एआई फॉर साइंस इंस्टीट्यूशंस के जरिए दुनिया भर के वैज्ञानिकों के बीच सहयोग की सुविधा प्रदान करना, (iv) एआई साक्षरता बढ़ाने के लिए व्यावसायिक और प्रशिक्षण इकोसिस्टम को बढ़ावा देना, और (v) ऊर्जा-दक्ष एआई प्रणालियों का विकास करना।

भारत पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल

एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत औपचारिक रूप से पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल हो गया।[28]  पैक्स सिलिका का उद्देश्य सिलिकॉन और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला बनाना है, जो सेमीकंडक्टर, उन्नत कंप्यूटिंग और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी प्रणालियों के लिए आवश्यक हैं। पैक्स सिलिका के अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़राइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूएई, यूके और अमेरिका शामिल हैं।[29] गैर-हस्ताक्षरकर्ता प्रतिभागियों में यूरोपीय संघ, ओईसीडी, कनाडा, नीदरलैंड्स और ताइवान शामिल हैं।29

 

खनन

Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)

अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास एवं रेगुलेशन) एक्ट के अंतर्गत नियम अधिसूचित

खान मंत्रालय ने अपतटीय क्षेत्र खनिज (अवैध खनन और परिवहन की रोकथाम) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है।[30]  ये नियम अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 2002 के अंतर्गत बनाए गए हैं।[31]  यह एक्ट भारत के समुद्री क्षेत्रों में खनन को रेगुलेट करता है। ये नियम खनिज तेलों और हाइड्रोकार्बन को छोड़कर अपतटीय क्षेत्रों के सभी खनिजों पर लागू होंगे। प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • इलेक्ट्रॉनिक निरीक्षण: परिचालन अधिकार के प्रत्येक धारक और वाहक के मालिक को एक इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली स्थापित करना अनिवार्य है। यह प्रणाली वास्तविक समय में परिचालन संबंधी जानकारी रिकॉर्ड करने में सक्षम होनी चाहिए, जैसे कि जहाजों की ट्रैकिंग, जहाज का कुल भार या वजन, और खदान से निकले खनिजों की मात्रा और घनत्व।

  • पंजीकरण: किसी भी मशीनीकृत मशीनरी या वाहक का उपयोग तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसका मालिक भारतीय खान ब्यूरो के साथ पंजीकृत न हो।

  • अपतटीय खनिजों का निर्यात: परिचालन अधिकार के किसी भी धारक या व्यापारी को अपतटीय क्षेत्रों से सीधे अपतटीय खनिजों का निर्यात करने के लिए निर्यात से कम से कम एक सप्ताह पहले केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी।

  • माल निकासी एवं परिवहन: माल निकासी से पहले, परिचालन अधिकार धारक को निर्दिष्ट पोर्टल पर मात्रा, श्रेणी, प्राप्तकर्ता, वाहक, मार्ग और वैधानिक भुगतानों का विवरण प्रस्तुत करना होगा तथा परिवहन परमिट प्राप्त करना होगा। पट्टा क्षेत्र से माल उतारने के पहले स्थान तक परिवहन केवल पंजीकृत वाहकों और अनुमत मार्ग के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। खनिजों का वजन माल भेजते समय और किनारे पर माल उतारने के पहले स्थान पर, अनुमानित वजन प्रणालियों का उपयोग करके मापा जाना चाहिए। नियमों के अनुसार वजनों का मिलान और उन्हें ड्राई बेसिस वजन में बदलना अनिवार्य है। माल प्राप्तकर्ताओं के लिए यह जरूरी है कि वे प्राप्त खनिज की मात्रा और ग्रेड का परिवहन परमिट से मिलान कर पुष्टि करें और उसका रिकॉर्ड बनाए रखें।

  • निरीक्षण और जब्ती: अधिकृत अधिकारियों को खनिज भंडार, वाहकों और रिकॉर्ड की जांच का अधिकार है, जिसमें परिवहन के दौरान निरीक्षण की जांच भी शामिल है। नियमों के उल्लंघन के मामले में जहाजों, मशीनरी या खनिजों को जब्त कर सकते हैं। जब्त की गई संपत्ति को नकद या बैंक गारंटी के रूप में जमानत देने पर छोड़ा जा सकता है। जब्त किए गए खनिजों का निपटान  सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से किया जा सकता है और उससे प्राप्त राशि को भारत की संचित निधि में जमा किया जाएगा।

 

परिवहन

Navya Sriram (navya@prsindia.org)

सड़क दुर्घटना पीड़ितों के नकद उपचार के लिए योजना शुरू की गई

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पीएम राहत योजना (सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए अस्पताल में भर्ती और सुनिश्चित उपचार) शुरू की है।[32]  इस योजना के तहत, किसी भी श्रेणी की सड़क पर दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक 1.5 लाख रुपए तक का नकद उपचार मिलेगा। जानलेवा न होने की स्थिति में 24 घंटे तक और जानलेवा स्थिति में 48 घंटे तक स्थिति नियंत्रण उपचार (स्टेबलाइजेशन ट्रीटमेंट) उपलब्ध होगा।

अस्पतालों को प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना कोष से की जाएगी। अगर दुर्घटना करने वाला वाहन बीमित है, तो भुगतान बीमा कंपनियों द्वारा दिए गए अंशदान से किया जाएगा। बिना बीमा वाले और हिट एंड रन मामलों में, भुगतान केंद्र सरकार द्वारा बजट आवंटन के माध्यम से किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा स्वीकृत दावों का भुगतान 10 दिनों के भीतर किया जाएगा।

 

फार्मास्युटिकल्स

Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)

नई औषधियां और नैदानिक ​​परीक्षण नियम, 2019 में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई औषधियां एवं नैदानिक ​​परीक्षण (क्लीनिकल ट्रायल्स) नियम, 2019 में संशोधन के ड्राफ्ट को जनता की प्रतिक्रिया के लिए जारी किया है।[33]  ये नियम नई दवाओं की स्वीकृति और नैदानिक ​​अनुसंधान (यानी क्लिनिकल रिसर्च) करने की प्रक्रिया को निर्दिष्ट करते हैं।[34] प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, किसी भी आयातित या निर्मित औषधि उत्पाद में परिवर्तन होने पर निर्माता को औषधि नियंत्रक, भारत को सूचित करना अनिवार्य होगा। इसमें निर्माण प्रक्रिया, पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ या औषधि के परीक्षण में परिवर्तन शामिल हैं। किसी भी प्रकार के बड़े या मध्यम गुणवत्ता परिवर्तन की स्थिति में, उन्हें भारत के औषधि नियंत्रक से पूर्व स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। बड़े या मध्यम परिवर्तन का तात्पर्य क्रमशः पहचान, शक्ति, गुणवत्ता, शुद्धता या प्रभावकारिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की पर्याप्त या मध्यम संभावना से है।

4 मार्च, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

[1] Press Note on New Series of GDP Estimates with Base Year 2022-23, National Statistics Office, Ministry of Statistics and Programme Implementation, February 27, 2026, https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/feb/doc2026227806501.pdf.

[2] Press Note on First Advance Estimates of Gross Domestic Product for 2025-26, National Statistics Office, Ministry of Statistics and Programme Implementation, January 7, 2026, https://www.mospi.gov.in/uploads/latestReleases/latest_release_1767 781372753_1380ce82-f5a5-440d-99e6- e6b35af0deb5_GDP_Press_Note_on_FAE_2025-26.pdf.

[3] Monetary Policy Statement, 2025-26, Resolution of the Monetary Policy Committee, February 4 to 6, 2026, Reserve Bank of India, February 6, 2026, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=62169.  

[4] Release of the new series of GDP, CPI and IIP is scheduled for 27th February 2026, 12th February 2026 and May 2026, Press Information Bureau, Ministry of Statistics & Programme Implementation, February 11, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2226269&reg=3&lang=1.

[5] Union Budget of India, 2026-27, https://www.indiabudget.gov.in/.

[6] RBI releases draft revised Master Direction – Reserve Bank of India (Credit Derivatives) Directions, 2022, Reserve Bank of India, February 6, 2026, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=62178.

[7] RBI Issues Draft Amendment Directions for instructions on ‘Lending to Real Estate Investment Trusts (REITs) and Infrastructure Investment Trusts (InvITs)’, Reserve Bank of India, February 13, 2026, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=62232.

[8] RBI issues Amendment Directions on Capital Market Exposure, Reserve Bank of India, February 13, 2026, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=62233.

[9] Consultation Paper on Measures towards Ease of Doing Business for REITs and InvITs, Securities and Exchange Board of India, February 5, 2026, https://www.sebi.gov.in/reports-and-statistics/reports/feb-2026/consultation-paper-on-measures-towards-ease-of-doing-business-for-reits-and-invits-_99545.html.

[10] “United States-India Joint Statement,” Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, February 7, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2224783&reg=3&lang=1.

[11] “Trump raises global tariffs to 15%, day after Supreme Court ruling” BBC, February 21, 2026, https://www.bbc.com/news/live/c0l9r67drg7t.

[12] Press Statement, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, February 21, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2231201&reg=3&lang=1.

[13] ‘India and Gulf Cooperation Council Sign Terms of Reference for India–GCC Free Trade Agreement,’ Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, February 5, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2223875&reg=3&lang=1.

[14] “Cabinet approves Startup India Fund of Funds 2.0 to Mobilize Venture Capital for India’s Startup Ecosystem,” Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, February 14, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2227994&reg=3&lang=1.

[15] DAC clears Rs 3.60 lakh crore worth of capital acquisition proposals to enhance the combat readiness of defence forces, Press Information Bureau, Ministry of Defence, February 12, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2227018&reg=3&lang=1.

[16] Aatmanirbhar Bharat: MoD inks Rs 2,312 crore contract with HAL for eight Dornier 228 Aircraft under Buy (Indian) category, Press Information Bureau, Ministry of Defence, February 12, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2227031&reg=3&lang=1.

[17] “List of Outcomes: Visit of the President of the French Republic to India (February 17-19, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, February 17, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40781/List_of_Outcomes_Visit_of_the_President_of_the_French_Republic_to_India_February_1719_2026.

[18] “List of Outcomes: State Visit of the President of Federative Republic of Brazil to India (February 18-22, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, February 21, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40811/List+of+Outcomes+State+Visit+of+the+President+of+Federative+Republic+of+Brazil+to+India+February+1822+2026.

[19] “List of Outcomes: Official visit of the Prime Minister to Malaysia (February 07 – 08 , 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, February 8, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40712/List_of_Outcomes_Official_visit_of_the_Prime_Minister_to_Malaysia_February_07__08__2026.

[20] “List of Outcomes: Visit of Prime Minister to Israel (February 25 - 26, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, 26 February, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40827.

[21] “Cabinet approves Rs. One Lakh Crore Urban Challenge Fund to Drive Market-Led Urban Transformation”, Press Information Bureau, Cabinet, February 14, 2026,  https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2227986&reg=3&lang=2.

[22] The Industrial Relations Code (Amendment) Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Industrial_Relations_Code_Bill_2026_text.pdf.

[23] The Industrial Relations Code, 2020, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/22040/1/aa202035.pdf.

[24] The Occupational Safety, Health, and Working Conditions Code, 2020, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/22041/1/a2020-37.pdf.

[25] Draft Occupational Safety, Health and Working Conditions (Metalliferous Mines) Regulations, G.S.R 109(E), The Gazette of India, Ministry of Labour and Employment, February 4, 2026, https://www.dgms.gov.in/writereaddata/UploadFile/MMRPrePublished_11022026.pdf.

[26] Draft Occupational Safety, Health and Working Conditions (Dock Workers) Central Regulations, G.S.R. 119(E), The Gazette of India, Ministry of Labour and Employment, February 9, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/270079.pdf.

[27] “AI Impact Summit 2026 concludes with adoption of New Delhi Declaration”, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, February 21, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2231208&reg=3&lang=1.

[28] “India Joins Pax Silica at India AI Impact Summit 2026, Deepens Strategic Technology Cooperation with United States

”, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, February 20, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2230648&reg=3&lang=1.

[29] Pax Silica, U.S. Department of State, as accessed on February 28, 2026, https://www.state.gov/pax-silica.

[30] Offshore Areas Mineral (Prevention of Illegal Mining and Transportation) Rules, 2026, G.S.R. 102(E), The Gazette of India, Ministry of Mines, February 4, 2026, https://mines.gov.in/admin/imgview?filename=6982e20cc21151770185228.pdf.

[31] The Offshore Areas Mineral (Development and Regulation) Act, 2002, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/2040/6/a2003-17.pdf.

[32] “Government Launches “PM RAHAT” – Cashless Treatment of Road Accident Victims”, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport & Highways, February 14, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2228172&reg=3&lang=1.

[33] The New Drugs and Clinical Trials (Amendment) Rules, 2026, G.S.R. 97(E), The Gazette of India, Ministry of Health and Family Welfare, February 2, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/269818.pdf.

[34] The New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019, G.S.R. 227 (E), The Gazette of India, Ministry of Health and Family Welfare, March 19, 2019, https://cdsco.gov.in/opencms/resources/UploadCDSCOWeb/2022/new_DC_rules/NDCTR_G.S.R.%20227(E)%20dt_19.03.2019_New%20Drugs%20&%20Clinical%20Trial%20Rules,%202019.pdf.

 

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