इस अंक की झलकियां
अवकाश के बाद बजट सत्र 2026 दोबारा शुरू
सत्र का दूसरा भाग 9 मार्च, 2026 को दोबारा शुरू हुआ और 2 अप्रैल, 2026 को समाप्त होने वाला है। सत्र के दूसरे भाग में पांच बिल पेश किए गए हैं और एक बिल पारित हो चुका है।
2025-26 की तीसरी तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी का 1.3%
भारत ने 2025-26 की तीसरी तिमाही में 13.2 अरब USD का चालू खाता घाटा दर्ज किया। पूंजी खाते से 10 अरब USD का शुद्ध बहिर्वाह हुआ और विदेशी मुद्रा भंडार में 24.4 अरब USD की कमी आई।
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 पारित
इस बिल में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा में बदलाव किया गया है, ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाणपत्र जारी करने में जिला मजिस्ट्रेट की सहायता के लिए एक प्राधिकरण बनाया गया है और 2019 के कानून में नए अपराध और दंड जोड़े गए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है, दत्तक संतान की उम्र चाहे कुछ भी हो, महिला को मातृत्व अवकाश का अधिकार
न्यायालय ने माना कि तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को ही 12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश का अधिकार देना, अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। चूंकि यह प्रावधान दत्तक माताओं के साथ असमान व्यवहार करता है।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया, अनुसूचित जाति का दर्जा कुछ विशेष धर्मों तक ही सीमित है
न्यायालय ने यह पुष्टि की कि केवल हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म को मानने वाले व्यक्ति ही अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्य माने जाते हैं। किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने से यह दर्जा समाप्त हो जाता है।
जन विश्वास बिल, 2026 लोकसभा में पेश
बिल का उद्देश्य 80 केंद्रीय कानूनों में संशोधन कर, अपराध और दंड को डीक्रिमिनलाइज करना या युक्तिसंगत बनाना है।
विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 पेश
अगर किसी संगठन का एफसीआरए प्रमाणपत्र रद्द कर दिया जाता है या नवीनीकृत नहीं किया जाता है, तो विदेशी अंशदान से निर्मित परिसंपत्तियां सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण के पास रहेंगी।
डिजिटल ट्रेड फेसिलिटेशन बिल, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया गया
इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेजों और पहचान प्रबंधन एवं विश्वास सेवा प्रदाताओं को कानूनी मान्यता देना है।
सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026 राज्यसभा में पेश
बिल में निर्दिष्ट किया गया है कि प्रत्येक वरिष्ठ स्तर के पदों का एक निश्चित अनुपात भारतीय पुलिस सेवा से डेप्यूटेशन के जरिए भरा जाएगा। इसमें महानिदेशक स्तर के सभी पद शामिल हैं।
कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2026 लोकसभा में पेश
इस बिल में कंपनी एक्ट, 2013 और सीमित देयता भागीदारी एक्ट, 2008 में संशोधन का प्रस्ताव है। बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी को भेजा गया है।
स्टैंडिंग कमिटीज़ ने विभिन्न विषयों पर रिपोर्ट पेश कीं
इन विषयों में साइबर अपराध और महिलाओं की सुरक्षा, तिलहन और दलहन उत्पादन, जल कुशल बीज, नई दिल्ली स्थित एम्स का कामकाज और एआई का प्रभाव शामिल हैं।
संसद
Ruchira Sakalle (ruchira@prsindia.org)
अवकाश के बाद बजट सत्र 2026 दोबारा शुरू
संसद का बजट सत्र 1 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ था। इसके बाद 14 फरवरी से 8 मार्च तक अवकाश रहा और फिर संसद का सत्र 9 मार्च, 2026 को दोबारा शुरू हुआ।
बजट सत्र के दूसरे भाग में अब तक पांच बिल पेश किए गए हैं। ये बिल हैं: (i) ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026; (ii) कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2026; (iii) केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (संशोधन) बिल, 2026; (iv) जन विश्वास बिल, 2026; और (v) विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) बिल, 2026। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 संसद में पारित कर दिया गया है। कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2026 को ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी को भेजा गया है।
अवकाश के बाद केंद्रीय बजट पर चर्चा हुई। रेल मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा हुई। इस दौरान फाइनांस बिल, 2026 और दो एप्रोप्रिएशन बिल पेश और पारित किए गए।
मैक्रोइकोनॉमिक विकास
Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)
2025-26 की तीसरी तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी का 1.3%
भारत ने 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 13.2 अरब USD (जीडीपी का 1.3%) का चालू खाता घाटा दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही (11.3 अरब USD या जीडीपी का 1.1%) से अधिक है।[1] 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत ने 14.1 अरब USD (जीडीपी का 1.5%) का चालू खाता घाटा दर्ज किया था। पूंजी खाते से 10 अरब USD का शुद्ध बहिर्वाह हुआ और 2025-26 की तीसरी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 24.4 अरब USD की कमी आई।
तालिका 1: भुगतान संतुलन, तीसरी तिमाही 2025-26 (अरब USD)
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मद |
ति3 |
ति2 |
ति3 |
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क. निर्यात |
109.8 |
109.0 |
111.7 |
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ख. आयात |
189.1 |
198.1 |
205.3 |
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ग. व्यापार संतुलन (क+ख) |
-79.3 |
-89.1 |
-93.6 |
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घ. शुद्ध सेवाएं |
51.2 |
50.9 |
57.5 |
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ङ अन्य हस्तांतरण |
16.8 |
24.1 |
22.9 |
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च. चालू खाता (ग+घ+ङ) |
-11.3 |
-14.1 |
-13.2 |
|
छ. पूंजी खाता |
-26.6 |
2.1 |
-10.0 |
|
ज. भूल चूक लेनी देनी |
0.3 |
1.1 |
-1.2 |
|
झ. मुद्रा भंडार में परिवर्तन (च+छ+ज) |
-37.7 |
-10.9 |
-24.4 |
स्रोत: आरबीआई: पीआरएस।
वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में औद्योगिक उत्पादन में 5.3% की वृद्धि हुई
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 5.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो वर्ष 2024-25 की इसी अवधि की तुलना में अधिक है (इसमें 4.1% की वृद्धि हुई थी)।[2],[3] उल्लेखनीय है कि आईआईपी की गणना में मैन्यूफैक्चरिंग (78%) का वेटेज सबसे अधिक है, इसके बाद खनन (14%) और बिजली (8%) का वेटेज है।
वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग में 6.3% की वृद्धि हुई। खनन में 4.1% की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि बिजली में 0.9% की कमी दर्ज की गई। वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में बिजली में 4.1% की वृद्धि हुई थी।
रेखाचित्र 2: आईआईपी में वृद्धि, तीसरी तिमाही 2025-26 (%, वर्ष-दर-वर्ष)
स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय; पीआरएस।
सामाजिक न्याय
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 पारित
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने 13 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया।[4] इस बिल को 24 मार्च, 2026 को लोकसभा में, और 25 मार्च, 2026 को राज्यसभा में पारित कर दिया गया। यह बिल ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) एक्ट, 2019 में संशोधन करता है।[5] 2019 का एक्ट ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों और उनके कल्याण से संबंधित प्रावधान करता है। कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा: एक्ट में ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका जेंडर उसके जन्म के समय निर्धारित जेंडर से मेल नहीं खाता है, और ऐसे कुछ व्यक्तियों को निर्दिष्ट करता है जिन्हें इसके तहत शामिल किया जाएगा। बिल इस परिभाषा को हटाता है। वह एक्ट की कुछ श्रेणियों को बरकरार रखता है: (i) वे व्यक्ति जिनकी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान किन्नर, हिंजड़ा, अरावनी या जोगता के रूप में है, और (ii) वे व्यक्ति जिनके जन्म के समय प्राथमिक यौन विशेषताएं, बाहरी जननांग, क्रोमोसम्स, या हारमोन पुरुष या महिला शरीर के सामान्य मानकों (नॉरमैटिव स्टैंडर्ड) से अलग हैं। बिल में निम्नलिखित को भी शामिल किया गया है: (i) नपुंसक (यूनक) और (ii) ऐसे व्यक्ति जिन्हें म्यूटिलेशन, इमैस्क्यूलेशन, सर्जिकल, रासायनिक या हारमोनल प्रक्रियाओं द्वारा जबरदस्ती ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने को मजबूर किया गया हो। बिल में एक्ट की निम्नलिखित श्रेणियों को हटा दिया गया है: (i) ट्रांस-पुरुष या ट्रांस-महिला, भले ही उस व्यक्ति ने जेंडर रीअसाइनमेंट सर्जरी, हारमोन थेरेपी, लेज़र थेरेपी या ऐसी ही कोई दूसरी थेरेपी कराई हो, अथवा नहीं कराई हो, और (ii) जेंडरक्वीर। इसके अलावा बिल में यह भी कहा गया है कि इसमें वे लोग शामिल नहीं होंगे (और न ही कभी शामिल रहे हैं) जिनका सेक्सुअल ओरिएंटेशन अलग है या जिनकी स्वयं द्वारा महसूस की गई (सेल्फ पर्सीव्ड) सेक्सुअल आइडेंटिटी अलग है।
ट्रांसजेंडर पहचान को मान्यता: एक्ट के तहत, एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति ट्रांसजेंडर के रूप में पहचान प्रमाणपत्र जारी करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन कर सकता है। बिल में यह भी कहा गया है कि जिला मजिस्ट्रेट एक नामित चिकित्सा बोर्ड के सुझावों की जांच करने के बाद प्रमाणपत्र जारी करेगा। इस बोर्ड की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी या उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी करेंगे। जिला मजिस्ट्रेट अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों की सहायता ले सकते हैं।
जेंडर में बदलाव: एक्ट में यह प्रावधान है कि अगर कोई ट्रांसजेंडर व्यक्ति जेंडर बदलने के लिए सर्जरी करवाता है, तो वह एक संशोधित पहचान प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकता है। बिल में इसके बजाय व्यक्ति के लिए संशोधित प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है। बिल में यह भी कहा गया है कि संबंधित चिकित्सा संस्थान को इस सर्जरी से संबंधित जानकारी जिला मजिस्ट्रेट को देनी होगी। ऐसे व्यक्ति को अब इस एक्ट के तहत प्राप्त अधिकार और फायदे नहीं मिलेंगे।
अपराध और सजा: इस बिल में एक्ट में निर्दिष्ट मौजूदा अपराधों में कुछ नए अपराध जोड़े गए हैं। किसी व्यक्ति को ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से उसका अपहरण करना और उसे गंभीर चोट पहुंचाना, निम्नलिखित सजा के अंतर्गत आएगा: (i) अगर पीड़ित बालिग है तो 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम दो लाख रुपए का जुर्माना, और (ii) अगर पीड़ित बच्चा है तो आजीवन कारावास और कम से कम पांच लाख रुपए का जुर्माना। किसी व्यक्ति को ट्रांसजेंडर के रूप में पेश होने और भीख मांगने, गुलामी या बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर करने पर निम्नलिखित सजा दी जाएगी: (i) अगर पीड़ित वयस्क है तो पांच से 10 वर्ष तक का कारावास और कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना, और (ii) अगर पीड़ित बच्चा है तो 10 से 14 वर्ष तक का कारावास और कम से कम तीन लाख रुपए का जुर्माना।
बिल पर पीआरएस के विश्लेषण के लिए कृपया यहां देखें।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है, गोद लिए गए बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, दत्तक माता को मातृत्व अवकाश का अधिकार मिलेगा
सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि दत्तक संतान की उम्र चाहे जो भी हो, उसे गोद लेने वाली माता को 12 सप्ताह का सवैतनिक मातृत्व अवकाश प्राप्त करने का अधिकार है।[6] सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुसार, तीन महीने से कम उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली महिलाओं को ही 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता है।[7] न्यायालय ने माना कि यह प्रावधान अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह समान परिस्थितियों वाली दत्तक माताओं के साथ असमान रूप से व्यवहार करता है, जिसके परिणामस्वरूप बिना किसी उचित कारण के भेदभाव होता है। न्यायालय ने यह भी माना कि आयु सीमा निर्धारित करके, यह प्रावधान उन दत्तक माताओं की प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार को मान्यता देने में विफल रहता है जो तीन महीने या उससे अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेती हैं। इसलिए, यह अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह ऐसी गोद लेने वाली माताओं को अनुच्छेद 21 के तहत अपने निर्णय लेने की स्वायत्तता और शारीरिक अखंडता के अधिकार का प्रयोग करने से वंचित करता है। न्यायालय ने कहा कि इस प्रावधान को इस प्रकार पढ़ा जाना चाहिए कि कानूनी रूप से बच्चे को गोद लेने वाली कोई भी महिला बच्चे को सौंपे जाने की तारीख से 12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश की हकदार होगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने 1950 के आदेश के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा कुछ निर्दिष्ट धर्मों तक सीमित रखने के फैसले को बरकरार रखा
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 24 मार्च, 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा प्राप्त करने की पात्रता की पुष्टि की।[8],[9] न्यायालय ने उच्च न्यायालय (2024) द्वारा आदेश के खंड 3 की व्याख्या को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया है कि केवल हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म को मानने वाले व्यक्तियों को ही एससी समुदाय के सदस्य के रूप में मान्यता प्राप्त है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर एससी दर्जा समाप्त हो जाता है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि खंड 3 के अंतर्गत लगाया गया प्रतिबंध पूर्णतः लागू है और एससी समुदाय को प्राप्त कोई भी वैधानिक लाभ, संरक्षण या आरक्षण उन व्यक्तियों को नहीं दिया जा सकता जो उल्लिखित धार्मिक समूहों से संबंधित नहीं हैं।
स्टैंडिंग कमिटी ने साइबर अपराध और महिलाओं की सुरक्षा पर रिपोर्ट पेश की
महिला सशक्तिकरण से संबंधित कमिटी (चेयर: डॉ. डी. पुरंदेश्वरी) ने 23 मार्च, 2026 को 'साइबर अपराध और महिलाओं की साइबर सुरक्षा' पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[10] कमिटी ने महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधों में वृद्धि की समीक्षा की, जिनमें साइबरस्टॉकिंग, सेक्सटॉर्शन, डीपफेक और ऑनलाइन उत्पीड़न शामिल हैं, साथ ही रिपोर्टिंग, जांच क्षमता और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही में कमियों का भी विश्लेषण किया। कमिटी ने पाया कि एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2017 और 2022 के बीच महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों में 239% की वृद्धि हुई है और बच्चों से जुड़े मामलों में कई गुना वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई पहल के बावजूद, कम जागरूकता, कम रिपोर्टिंग (विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में), इंटरमीडियरीज़ से डेटा एक्सेस में देरी, कुशल कर्मचारियों की कमी और एआई-आधारित अपराधों जैसे उभरते खतरों से निपटने के लिए एक व्यापक कानूनी और संस्थागत ढांचे की कमी के मद्देनजर चुनौतियां बरकरार हैं।
प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों जैसे फ्रंटलाइन वर्कर्स को 'साइबर सिक्योरिटी एंबेसेडर' के रूप में प्रशिक्षित करके जागरूकता और अभियानों को मजबूत करना, (ii) साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाओं का विस्तार करके, अंतर-राज्यीय डेटा आदान-प्रदान को मजबूत करके और महिलाओं से जुड़े अपराधों के लिए समर्पित इकाइयों को सशक्त बनाकर जांच क्षमताओं को बढ़ाना, (iii) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को कम समय सीमा में अनुपालन और सख्त एआई-संचालित डिटेक्शन टूल्स के साथ उच्च जवाबदेही मानकों के अनुरूप रखना, (iv) बच्चों और किशोरों को प्रतिकूल मनोवैज्ञानिक प्रभाव से बचाने के लिए सोशल मीडिया पर आयु-उपयुक्त नियम और उपयोग सीमाएं लागू करना, और (v) हेल्पलाइन, मनोवैज्ञानिक परामर्श, कानूनी सहायता और त्वरित निवारण तंत्र को एकीकृत करके पीड़ित-केंद्रित प्रतिक्रिया प्रणाली बनाना।
कमिटी ने फेक प्रोफाइल, इम्परसोनेशन और एनॉनिमस उत्पीड़न की समस्या को रोकने के लिए सभी सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य केवाईसी-आधारित सत्यापन लागू करने का सुझाव दिया। उसने महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच में तेजी लाने के लिए पुलिस बलों के भीतर डिजिटल फोरेंसिक क्षमता से लैस विशेष साइबर इकाइयों के गठन का भी सुझाव दिया। उसने सुझाव दिया कि सरकार एक व्यापक और लैंगिक रूप से संवेदनशील साइबर अपराध कानून बनाने के लिए समयबद्ध आकलन शुरू करे।
रिपोर्ट पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
वाणिज्य एवं उद्योग
जन विश्वास बिल, 2026 लोकसभा में पेश
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया।[11] इसका उद्देश्य 80 केंद्रीय कानूनों में संशोधन करके अपराधों और दंड को डीक्रिमिनलाइज करना या उन्हें युक्तिसंगत बनाना है। यह बिल 18 अगस्त, 2025 को पेश किए गए जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल, 2025 के स्थान पर लाया गया है। 2025 के बिल में 17 केंद्रीय कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव था और इसे लोकसभा की एक सिलेक्ट कमिटी (चेयर: श्री तेजस्वी सूर्या) को भेजा गया था। कमिटी ने 13 मार्च, 2026 को अपनी रिपोर्ट पेश की और 17 कानूनों में और बदलावों का सुझाव दिया, साथ ही 65 अन्य कानूनों में संशोधन का भी सुझाव दिया। सरकार ने सिलेक्ट कमिटी के सभी सुझावों को मंजूर कर लिया। 2025 का बिल 17 मार्च, 2026 को वापस ले लिया गया और नया बिल पेश किया गया। मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करना: इस बिल में कई अपराधों को डीक्रिमिनलाइज किया गया है। उदाहरण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग एक्ट, 1956 के तहत, राजमार्ग को दुर्गम या कम सुरक्षित बनाना पांच वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों से दंडनीय है। बिल में इसके बजाय 10 लाख रुपए से एक करोड़ रुपए तक के दीवानी दंड का प्रावधान है।
कारावास की सजा हटाना: कुछ मामलों में बिल किसी अपराध के लिए कारावास की अवधि को हटाता है। उदाहरण के लिए बिजली एक्ट, 2003 के तहत, किसी आदेश या निर्देश का पालन न करने पर तीन महीने तक का कारावास, जुर्माना या दोनों का दंड दिया जा सकता है। बिल में केवल जुर्माना लगाने का प्रावधान है और जुर्माने की अधिकतम राशि भी बढ़ा दी गई है।
अपराधों को हटाना: इस बिल में कई अपराधों को हटाया गया है। इनमें निम्नलिखित अपराध शामिल हैं: (i) दिल्ली पुलिस एक्ट, 1978 के तहत आग लगने की झूठी सूचना देना और (ii) दिल्ली नगर निगम एक्ट, 1957 के तहत जन्म और मृत्यु की सूचना न देना।
जुर्माने और आर्थिक दंड में संशोधन: बिल अनेक अपराधों के लिए जुर्माने और आर्थिक दंड के मौद्रिक मूल्य में संशोधन करता है। साथ ही यह प्रावधान करता है कि इसमें निर्दिष्ट जुर्माने और आर्थिक दंड में प्रत्येक तीन वर्ष में संबंधित न्यूनतम राशि की 10% वृद्धि होगी।
नई दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में संपत्ति कर और विज्ञापन कर: यह बिल नई दिल्ली नगर पालिका परिषद एक्ट, 1994 में संशोधन करता है। इस कानून में संपत्ति कर लगाने से संबंधित प्रावधान हैं। बिल में निर्दिष्ट किया गया है कि संपत्ति कर में भवन कर और रिक्त भूमि कर शामिल होंगे। यह रिक्त भूमि और भवनों के लिए आधार मूल्य की अनुशंसा करने और संपत्ति कर के निर्धारण एवं संशोधन के तरीके पर विचार करने के लिए एक नगर निगम मूल्यांकन कमिटी की स्थापना करता है। बिल विज्ञापन कर लगाने से संबंधित प्रावधानों को भी हटाता है।
सुधार का नोटिस: लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 के तहत, गैर-मानक बाट का उपयोग या बिक्री जैसे अपराधों के लिए पहली बार में सुधार नोटिस (सुधार की आवश्यकता) जारी किया जाएगा, और बाद के अपराधों के लिए जुर्माना लगाया जाएगा।
पहले और दूसरे अपराध पर चेतावनी: बिल कुछ कानूनों में संशोधन करता है ताकि अपराध के पहले या दूसरे मामले में केवल एडवाइजरी या चेतावनी जारी की जा सके। उदाहरण के लिए, एप्रेंटिस एक्ट, 1961 के तहत, सूचना देने से इनकार करना या किसी एप्रेंटिस को ओवरटाइम काम करने के लिए मजबूर करना जैसे अपराधों से पहले दो मामलों में एडवाइजरी और चेतावनी के माध्यम से निपटा जाएगा।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए यहां देखें। सिलेक्ट कमिटी की रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए यहां देखें। 2025 के बिल के पीआरएस विश्लेषण के लिए यहां देखें।
विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 लोकसभा में पेश
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 को 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। यह बिल विदेशी अंशदान (रेगुलेशन) एक्ट, 2010 में संशोधन करता है।[12] यह एक्ट विदेशी अंशदान की स्वीकृति और उपयोग को रेगुलेट करता है। एक्ट के तहत, कुछ व्यक्तियों को विदेशी अंशदान स्वीकार करने के लिए केंद्र सरकार के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य है। यह बिल विदेशी अंशदान और उससे निर्मित परिसंपत्तियों के प्रबंधन संबंधी मौजूदा ढांचे का स्थान लेता है। बिल में यह प्रावधान है कि पंजीकरण प्रमाणपत्र के रद्द होने, समर्पण करने या समाप्त होने की स्थिति में, विदेशी अंशदान और परिसंपत्तियां केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नामित प्राधिकारी के पास अस्थायी रूप से निहित हो जाएंगी। विदेशी अंशदान और परिसंपत्तियां नामित प्राधिकारी के पास स्थायी रूप से निहित हो जाएंगी: (i) अगर संबंधित व्यक्ति निर्धारित अवधि के भीतर नया पंजीकरण प्राप्त करने या पंजीकरण का नवीनीकरण या बहाली कराने में विफल रहता है, या (ii) जहां कोई व्यक्ति जिसे पहले विदेशी अंशदान स्वीकार करने की अनुमति थी, उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है या वह निष्क्रिय हो जाता है।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के लिए एफडीआई प्रतिबंधों में संशोधन
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों (एलबीसी) से निवेश के लिए एफडीआई दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया है।[13] एकीकृत एफडीआई नीति के तहत: (i) एलबीसी में स्थित किसी इकाई, या (ii) जहां निवेश का वास्तविक स्वामी (बेनेफिशियल ओनर) एलबीसी में स्थित है या एलबीसी का नागरिक है, उसे भारत में निवेश करने के लिए सरकारी मंजूरी प्राप्त करनी होगी।[14] पाकिस्तान का नागरिक या पाकिस्तान में निगमित इकाइयां सरकार की मंजूरी प्राप्त करने के बाद ही निवेश कर सकती हैं, और रक्षा, परमाणु ऊर्जा आदि जैसे कुछ क्षेत्रों में निवेश नहीं कर सकती हैं।
संशोधित दिशानिर्देशों में वास्तविक स्वामी के एलबीसी में स्थित होने की अनिवार्यता को हटा दिया गया है। इसमें वास्तविक स्वामित्व को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण एक्ट, 2002 और मनी लॉन्ड्रिंग निवारण (रिकॉर्ड्स का रखरखाव) नियम, 2005 के अंतर्गत परिभाषित किया गया है।[15],[16] 2005 के नियमों के अंतर्गत, एक परिभाषा यह है कि किसी कंपनी का वास्तविक स्वामी वह व्यक्ति होता है जिसके पास कंपनी के शेयरों, पूंजी या लाभ का 10% से अधिक स्वामित्व होता है।
संशोधित दिशानिर्देशों में यह भी जोड़ा गया है कि लाभकारी स्वामित्व में वे मामले शामिल होंगे जहां ऐसे देशों के नागरिक या संस्थाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से: (i) निवेशक संस्था पर नियंत्रण रख सकते हैं, या (ii) निवेशित संस्था पर किसी भी तरह से अंतिम प्रभावी नियंत्रण रख सकते हैं। संशोधित दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि जिन निवेशों के लिए सरकारी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है, वे उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा निर्दिष्ट रिपोर्टिंग के नियमों के अधीन होंगे। ये नियम वर्तमान क्षेत्रीय सीमाओं और प्रवेश मार्गों के अनुपालन के अतिरिक्त होंगे।
निर्यातकों के लिए छूट दरों पर लगी सीमा हटाई गई
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
केंद्र सरकार ने निर्यात उत्पादों पर शुल्क छूट की दरों पर लगाए गए 50% की अधिकतम सीमा को हटा दिया है जिसे फरवरी 2026 में लागू किया गया था।[17] यह संशोधन निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट योजना के तहत पहले से अधिसूचित दरों और मूल्य सीमाओं को बहाल करता है। यह योजना मैन्यूफैक्चरिंग और वितरण के दौरान लगने वाले उन शुल्कों और करों का रिफंड प्रदान करती है, जिन्हें किसी और तंत्र के तहत वापस नहीं किया जाता है।[18] इस संशोधन का उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के बीच भारतीय निर्यातकों को सहायता प्रयास करना है।
ड्राफ्ट डिजिटल ट्रेड फेसिलिटेशन बिल, 2026 सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए जारी
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
उद्योग एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संवर्धन विभाग ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए डिजिटल ट्रेड फेसिलिटेशन बिल, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।[19] इस बिल का उद्देश्य व्यापार में इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के उपयोग को सुगम बनाना है। प्रमुख प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:
इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की कानूनी मान्यता: इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेज किसी भी व्यापारिक दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ को कहा जाता है। ऐसे दस्तावेज़ पूर्ण रूप से कानूनी वैधता रखते हैं। केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप में होने के कारण इन्हें अस्वीकार नहीं किया जा सकता। इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ों को कागज़ी दस्तावेजों के समतुल्य माना जाएगा, बशर्ते: (i) उनमें संबंधित कागज़ी व्यापार दस्तावेज में निहित आवश्यक जानकारी हो, और (ii) दस्तावेज़ की पहचान करने, उसकी अखंडता बनाए रखने और दस्तावेज़ बनने से लेकर उसके समाप्त होने तक का एक सत्यापन योग्य ऑडिट ट्रेल प्रदान करने के लिए एक विश्वसनीय पद्धति का उपयोग किया गया हो।
नियंत्रण और हस्तांतरण: बिल के ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव है कि इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ पर नियंत्रण, कागज़ी दस्तावेज़ पर नियंत्रण के समतुल्य होगा। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेज़ का हस्तांतरण, पृष्ठांकन या संशोधन, कागज़ी दस्तावेज़ के समान ही प्रभावी होगा। यह व्यापार दस्तावेज़ों को कागज़ी और इलेक्ट्रॉनिक रूप के बीच बदलने की अनुमति भी देता है, बशर्ते कि एक विश्वसनीय पद्धति का उपयोग किया जाए और दस्तावेज़ के नए रूप में इस रूपांतरण के बारे में एक विवरण शामिल किया जाए।
पहचान का प्रबंधन और विश्वास सेवाएं: ड्राफ्ट बिल पहचान प्रबंधन और विश्वास सेवा प्रदाताओं को कानूनी मान्यता प्रदान करने का प्रयास करता है। ये संस्थाएं डिजिटल पहचान सत्यापन और प्रमाणीकरण में सहायता करती हैं और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रबंधन जैसी सेवाएं प्रदान करती हैं। सेवा प्रदाताओं के दायित्वों में शामिल हैं: (i) परिचालन नियमों का पालन करना, (ii) सेवा की उपलब्धता सुनिश्चित करना और (iii) ग्राहकों को सुरक्षा उल्लंघनों की रिपोर्ट करने के साधन उपलब्ध कराना। सेवा प्रदाता अपने दायित्वों का पालन न करने के कारण ग्राहक को हुई किसी भी हानि के लिए उत्तरदायी होगा।
सीमा-पारीय मान्यता: भारत के बाहर जारी होने मात्र से इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेज़ को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। विदेशी पहचान प्रबंधन सेवाओं को स्वीकार किया जाएगा, बशर्ते उनकी विश्वसनीयता का स्तर समान या उससे अधिक हो।
भारत और कनाडा ने संदर्भ शर्तों (टर्म्स ऑफ रिफ्रेंस) पर हस्ताक्षर किए
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
भारत और कनाडा ने भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के लिए संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर किए।[20] ये संदर्भ शर्तें भारत-कनाडा सीईपीए वार्ताओं के लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेंगी। वार्ताओं में वस्तुओं, सेवाओं और अन्य पारस्परिक रूप से सहमत नीति क्षेत्रों में व्यापार शामिल होगा। 2024-25 में कनाडा के साथ भारत का व्यापार $8.7 बिलियन था, जिसमें निर्यात $4.2 बिलियन और आयात $4.4 बिलियन का था। कनाडा को भारत के प्रमुख निर्यातों में दवाएं और फार्मास्यूटिकल्स, लोहा और स्टील, समुद्री भोजन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसायन शामिल हैं। कनाडा से भारत के प्रमुख आयातों में दालें, उर्वरक, कोयला, कच्चा पेट्रोलियम और अर्ध-कीमती धातुएं शामिल हैं। भारत कनाडा को दूरसंचार और कंप्यूटर एवं सूचना सेवाओं सहित सेवाएं भी निर्यात करता है।
गृह मामले
Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)
सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026 राज्यसभा में पेश
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026 को 25 मार्च, 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया। इस बिल का उद्देश्य सीएपीएफ में भर्ती, डेप्यूटेशन, पदोन्नति और सेवा शर्तों से संबंधित मामलों को रेगुलेट करना है। बिल की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
डेप्युटेशन के जरिए पदों पर भर्तियां: सीएपीएफ में निम्नलिखित पदों पर आईपीएस अधिकारी ही डेप्युटेशन पर तैनात किए जाएंगे: (i) इंस्पेक्टर जनरल रैंक के 50% पद, (ii) एडिशनल डायरेक्टर रैंक के कम से कम 67% पद, और (iii) डायरेक्टर जनरल और स्पेशल डायरेक्टर जनरल रैंक के सभी पद।
नियम बनाने की शक्तियां: यह बिल केंद्र सरकार को सीएपीएफ के अधिकारियों से जुड़े मामलों पर नियम बनाने का अधिकार देता है। यह बिल अनुसूची में सूचीबद्ध पांच सीएपीएफ पर लागू होता है। ये इस प्रकार हैं: (i) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बिल, (ii) सीमा सुरक्षा बल, (iii) केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, (iv) भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, और (v) सशस्त्र सीमा बल। बिल के तहत आने वाले अधिकारियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ग्रुप ए अधिकारी- सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी (जनरल ड्यूटी या एग्जीक्यूटिव), (ii) आईपीएस अधिकारी- भारतीय पुलिस सेवा वे अधिकारी जो डेप्युटेशन पर हैं, और (iii) भारतीय सेना के वे अधिकारी जो डेप्युटेशन पर हैं या जिन्हें फिर से नौकरी पर रखा गया है।
केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा अनुसूची में संशोधन करके बिल को अन्य सीएपीएफ पर लागू कर सकती है। वह किसी अन्य कानून, किसी न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश, या किसी सरकारी आदेश के बावजूद नियम बना सकती है।
बिल के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
वित्त
Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)
कॉरपोरेट कानूनों में संशोधन का बिल लोकसभा में पेश
कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2026 को 23 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया।[21] बिल कंपनी एक्ट, 2013 और सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) एक्ट, 2008 में संशोधन करने का प्रयास करता है। इसे एक ज्वाइंट कमिटी को भेजा गया है, जिसे मानसून सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।[22] बिल के अंतर्गत प्रमुख संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
अपराधों का डीक्रिमिनलाइजेशन: बिल दोनों कानूनों के अंतर्गत कई अपराधों को डीक्रिमिनाइज करता है। यह इन अपराधों के लिए कारावास या जुर्माने के स्थान पर नागरिक दंड (सिविल पैनेल्टी) का प्रावधान करता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) उत्पादक कंपनी के मामलों से संबंधित जानकारी देने में जानबूझकर विफल रहना, (ii) नियमों का उल्लंघन, या (iii) रजिस्ट्रार द्वारा अपेक्षित जानकारी या दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहना।
कंपनी एक्ट, 2013 में संशोधन
कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर): इस बिल में कंपनियों के लिए अनिवार्य सीएसआर (कर्मचारी संबंध) की सीमा को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए या ऐसी ही कोई अन्य निर्धारित राशि कर दिया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली कंपनियों को सीएसआर प्रावधानों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
छोटी कंपनियां: एक्ट के तहत, लघु कंपनी वह कंपनी है जिसकी: (i) चुकता शेयर पूंजी (पेड-अप शेयर कैपिटल) 50 लाख रुपए से अधिक न हो या निर्धारित सीमा 10 करोड़ रुपए से अधिक न हो, तथा (ii) कारोबार 2 करोड़ रुपए से अधिक न हो या निर्धारित सीमा 100 करोड़ रुपए से अधिक न हो। बिल में इसकी ऊपरी सीमा को बढ़ाकर: (i) शेयर पूंजी को 20 करोड़ रुपए और (ii) कारोबार को 200 करोड़ रुपए कर दिया गया है।
शेयरों का बाय-बैक: एक्ट के तहत, कोई कंपनी अपने खुद के शेयर या अन्य निर्दिष्ट प्रतिभूतियां खरीद सकती है (इसे बाय-बैक कहा जाता है)। बाय-बैक कंपनी की कुल चुकता पूंजी और फ्री रिजर्व के 25% से अधिक नहीं होना चाहिए। बिल में यह भी कहा गया है कि कंपनियों के निर्धारित वर्गों के लिए, बाय-बैक एक निर्धारित प्रतिशत तक हो सकता है।
सीमित देयता भागीदारी एक्ट, 2008 में संशोधन
ट्रस्ट को एलएलपी में बदलना: बिल कुछ खास ट्रस्ट्स को एलएलपी में बदलने का प्रावधान करता है। यह नियम उन ट्रस्ट्स पर लागू होता है, जो (i) भारतीय ट्रस्ट एक्ट, 1882 या किसी अन्य केंद्रीय या राज्य कानून के तहत बनाए गए हों, (ii) सेबी या आईएफएससी अथॉरिटी के पास रजिस्टर्ड हों, और (iii) निर्दिष्ट कार्यों में लगे हों।
आरबीआई ने लाभांश की घोषणा और लाभ के प्रेषण से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए
भारतीय रिज़र्व बैंक ने लाभांश की घोषणा और लाभ के प्रेषण पर प्रूडेंशियल मानदंड संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं।[23] ये दिशानिर्देश वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों, स्थानीय क्षेत्र बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर लागू होंगे। प्रमुख दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं:
पात्रता मानदंड: वर्तमान में किसी बैंक के लाभांश घोषित करने के लिए पात्रता की शर्तों में से एक यह है कि वर्ष के लिए उसका समायोजित कर पश्चात लाभ (पीएटी) सकारात्मक होना चाहिए। समायोजित पीएटी की गणना बैंक की शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों को घटाकर की जाती है। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि लाभांश का भुगतान करने के बाद भी बैंक की विनियामक पूंजी लागू विनियामक पूंजी की शर्तों से कम नहीं होनी चाहिए।
अधिकतम लाभांश भुगतान: निर्देशों के अनुसार, कुछ प्रूडेंशियल आवश्यकताओं को पूरा करने वाली संस्थाओं को प्रस्तावित अवधि के लिए कुल मिलाकर पीएटी के 75% तक लाभांश घोषित करने और भुगतान करने की अनुमति होगी। वर्तमान ढांचे के तहत, बैंकों को एक वित्तीय वर्ष में अपने शुद्ध लाभ के 40% तक लाभांश का भुगतान करने की अनुमति है।
पीएटी: निर्देशों में पीएटी की गणना से कुछ लेनदेन को बाहर रखने का प्रावधान है। इनमें असाधारण लाभ/आय, लेवल 3 वित्तीय साधनों के मूल्यांकन से होने वाले शुद्ध अवास्तविक लाभ और लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए लाभ (अगर वैधानिक ऑडिटर द्वारा चिह्नित किए गए हों) शामिल हैं।
विदेशी बैंकों द्वारा लाभ का प्रेषण: निर्देशों के अनुसार, भारत में शाखाओं के माध्यम से कार्यरत विदेशी बैंक अपने भारतीय संचालन से प्राप्त सामान्य शुद्ध लाभ/अधिशेष को अपने प्रधान कार्यालय में भेज सकते हैं। इसकी अनुमति तभी दी जाएगी जब उनके खातों का ऑडिट हो चुका हो।
आरबीआई ने डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों की देयता को सीमित करने के लिए ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया
आरबीआई ने डिजिटल लेनदेन में ग्राहक की देयता को सीमित करने के फ्रेमवर्क की समीक्षा के लिए संशोधन संबंधी निर्देश जारी किए हैं।[24] ये निर्देश निम्नलिखित संस्थाओं पर लागू होंगे: (i) वाणिज्यिक बैंक, (ii) लघु वित्त बैंक, (iii) भुगतान बैंक, (iv) स्थानीय क्षेत्र बैंक, (v) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और (vi) शहरी एवं ग्रामीण सहकारी बैंक।
इन निर्देशों में 50,000 रुपए तक के छोटे मूल्य के धोखाधड़ीपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के लिए मुआवजे का प्रावधान है। इस फ्रेमवर्क के तहत, धोखाधड़ीपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन को एक ऐसे अधिकृत लेनदेन के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें फर्जी तरीके से क्रेडेंशियल प्राप्त किए गए हों, जबरदस्ती मंजूरी ली गई हो, ग्राहकों को धोखे से किसी स्कैमर को पैसे भेजने के लिए मजबूर किया गया हो, या अनाधिकृत लेनदेन किए गए हों।
ग्राहक को शुद्ध हानि राशि का 85% या 25,000 रुपए (जो भी कम हो) का मुआवजा दिया जाएगा। ग्राहक अपने जीवनकाल में इस योजना के तहत केवल एक बार ही मुआवजा प्राप्त कर सकेगा।
बैंक ग्राहक के आवेदन प्राप्त होने के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी होगा। इसके अलावा, बैंक इस क्षतिपूर्ति राशि की प्रतिपूर्ति आरबीआई से त्रैमासिक आधार पर प्राप्त कर सकता है। हालांकि, ग्राहक द्वारा बैंक को धोखाधड़ी की सूचना देने के बाद होने वाले किसी भी अनाधिकृत लेनदेन के परिणामस्वरूप हानि बैंक द्वारा वहन की जाएगी।
ग्राहक की जवाबदेही साबित करने का भार बैंक पर होगा। अगर धोखाधड़ी वाला लेनदेन बैंक की लापरवाही के कारण होता है, तो ग्राहक की कोई जवाबदेही नहीं होगी और उसे लेनदेन रद्द करवाने का अधिकार होगा। यह नियम थर्ड पार्टी के उल्लंघन के मामलों में भी लागू होगा, बशर्ते ग्राहक अनाधिकृत धोखाधड़ी वाले लेनदेन होने के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर इसकी जानकारी दे।
प्रस्तावित मुआवज़ा तंत्र निर्देशों की तिथि से एक वर्ष तक लागू रहेगा।
6 अप्रैल, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
सेबी ने अपने अधिकारियों के हितों के टकराव से संबंधित उच्च स्तरीय समिति के सुझाव जारी किए
सेबी ने हितों के टकराव और सेबी के अधिकारियों द्वारा डिस्क्लोज़र से जुड़े मामलों पर उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) के सुझावों की समीक्षा की। [25] उसने एचएलसी की इन सुझावों को मंज़ूरी दी:
पदभार ग्रहण करते समय निवेश: अध्यक्ष और पूर्णकालिक सदस्य (डब्ल्यूटीएम) "इनसाइडर्स" की परिभाषा के अंतर्गत आएंगे। पदभार ग्रहण करते समय इन अधिकारियों द्वारा इक्विटी और इक्विटी-संबंधित साधनों में किए गए किसी भी निवेश को समाप्त करना, फ्रीज करना या बेचना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त वाणिज्यिक उद्यमों (गैर-सूचीबद्ध शेयरों सहित) में किए गए किसी भी निवेश को उनके कार्यकाल के दौरान पूरी तरह से समाप्त करना या फ्रीज रखना होगा।
व्यक्तिगत निवेश पर सीमा: कर्मचारियों/कार्यकारी प्रबंधक/अध्यक्ष द्वारा किसी एक सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ द्वारा प्रबंधित उत्पादों में किया गया नया निवेश उनके वित्तीय पोर्टफोलियो के 25% से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि ऐसे अधिकारी इस सीमा का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें उस मध्यस्थ से संबंधित सभी मामलों से खुद को अलग रखना होगा। बोर्ड ने हितों के टकराव से संबंधित खुलासे और स्वीकृतियों को दर्ज करने के लिए एक डिजिटल प्रणाली और खुद को अलग रखने की व्यवस्था स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।
प्रकटीकरण: कर्मचारियों, कार्यकारी महाप्रबंधकों और अध्यक्ष को सेबी को अपनी संपत्ति, देनदारियों, व्यापारिक गतिविधियों और संबंधों का प्रारंभिक, वार्षिक और घटना-आधारित प्रकटीकरण करना होगा। अध्यक्ष, कार्यकारी महाप्रबंधकों, कार्यकारी निदेशकों और मुख्य महाप्रबंधकों की अचल संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रकट किया जा सकता है। अंशकालिक सदस्यों को भी पदभार ग्रहण करते समय और उसके बाद वार्षिक आधार पर सेबी को शेयरधारिता और पिछले कार्यभार (तीन वर्ष तक) के बारे में प्रकटीकरण करना होगा। अंशकालिक सदस्यों को कोई भी सार्वजनिक प्रकटीकरण करने की आवश्यकता नहीं होगी।
परिवार के सदस्यों पर निवेश प्रतिबंध: अध्यक्ष/कर्मचारी प्रबंधन टीम/कर्मचारियों पर लागू प्रत्यक्ष निवेश (शेयरों में) प्रतिबंध उनके जीवनसाथी और आश्रित परिवार के सदस्यों पर भी लागू होंगे। ये प्रतिबंध भविष्य के निवेशों पर लागू होंगे। कुछ निवेश इन प्रतिबंधों के अंतर्गत नहीं आएंगे जिनमें गैर-सूचीबद्ध प्रतिभूतियों और कर्मचारी शेयर स्वामित्व योजनाओं में निवेश शामिल हैं।
सेबी ने विभिन्न विषयों पर परामर्श पत्र जारी किए
सेबी ने विभिन्न विषयों पर परामर्श पत्र जारी किए हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
म्यूचुअल फंड के लिए गिफ्ट कार्ड/गिफ्ट प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (पीपीआई): वर्तमान में बैंकों और गैर-बैंक संस्थाओं को आरबीआई की मंजूरी के बाद पीपीआई जारी करने की अनुमति है।[26] प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत, प्राप्तकर्ता गिफ्ट पीपीआई का उपयोग म्यूचुअल फंड की इकाइयों में निवेश करने के लिए कर सकेगा। गिफ्ट पीपीआई जारीकर्ता, खरीदार और भुगतानकर्ता के बीच धन प्रवाह को आरबीआई के जरिए रेगुलेट किया जाएगा, जबकि म्यूचुअल फंड में निवेश सेबी द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। गिफ्ट पीपीआई, ई-वॉलेट और नकद के माध्यम से किए गए निवेश प्रति म्यूचुअल फंड हाउस प्रति वित्तीय वर्ष 50,000 रुपए की मौजूदा सीमा के अधीन होंगे। प्रत्येक पीपीआई के तहत अधिकतम सीमा 10,000 रुपए होगी और यह जारी होने की तारीख से एक वर्ष की अवधि के लिए वैध होगी। गिफ्ट कार्ड का उपयोग करने वाले व्यक्ति को इसकी पूरी कीमत का उपयोग करना होगा। एक बार उपयोग हो जाने के बाद, इसमें दोबारा धनराशि नहीं डाली जा सकती। 14 अप्रैल, 2026 तक सुझाव आमंत्रित हैं।
प्रतिभूतियों के हस्तांतरण के लिए दस्तावेज़ीकरण को आसान बनाना: सेबी कानूनी वारिसों को प्रतिभूतियों के हस्तांतरण के लिए आवश्यक दस्तावेजों को सरल बनाने का प्रस्ताव कर रहा है।[27] इसमें सरलीकृत दस्तावेज़ीकरण का लाभ उठाने के लिए भौतिक प्रतिभूतियों की सीमा को पांच लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए और डीमैट प्रतिभूतियों की सीमा को 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 30 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, 10 हजार रुपए तक की भौतिक प्रतिभूतियों और 30 हजार रुपए तक की डीमैट प्रतिभूतियों को एक नए और त्वरित ढांचे के माध्यम से न्यूनतम दस्तावेज़ीकरण के साथ संसाधित किया जा सकेगा। प्रस्तावित ढांचा दावों और दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रियाओं को मानकीकृत करता है, कुछ मामलों में प्रमाणित वसीयत की आवश्यकता को समाप्त करता है और दावा निपटान की समयसीमा को सुव्यवस्थित करता है। 2 अप्रैल, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
बाजार अवसंरचना संस्थानों (एमआईआई) के लिए आईटी लचीलापन सूचकांक: सेबी ने एमआईआई के लिए एक आईटी लचीलापन सूचकांक प्रस्तावित किया है जिसकी गणना छमाही आधार पर की जाएगी।[28] एमआईआई में स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉरपोरेशन शामिल हैं। सूचकांक की गणना उपलब्धता, सुरक्षा, अखंडता, शासन, विश्वसनीयता और निगरानी तथा व्यावसायिक निरंतरता जैसे मापदंडों के आधार पर की जाएगी। उद्योग मानक मंच आधारभूत मापदंड, स्वीकार्य सीमाएं और सूचकांक की गणना के लिए मानक परिचालन विधि (स्टैंडर्ड ओपी) तैयार करने के लिए जिम्मेदार होगा। 15 अप्रैल, 2026 तक सुझाव आमंत्रित हैं।
सेबी ने स्टॉक ब्रोकर्स के लिए रिपोर्टिंग आवश्यकताओं में ढिलाई दी
सेबी ने स्टॉक ब्रोकर्स के लिए जारी मास्टर सर्कुलर में संशोधन करके कुछ रिपोर्टिंग दायित्वों में छूट दी है।[29] मौजूदा ढांचे के तहत, स्टॉक ब्रोकर द्वारा रखे गए सभी डीमैट खातों को टैग करना अनिवार्य है। हालांकि, बैंकिंग गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाने वाले खातों के लिए, बैंक के रूप में काम करने वाले ब्रोकर्स को इस नियम से छूट दी गई है। अब यह छूट उन ब्रोकर्स को भी दी जा रही है जो गैर-ब्रोकिंग गतिविधियों में उपयोग किए जाने वाले डीमैट खातों के लिए प्राथमिक डीलर भी हैं।
वर्तमान में प्रत्येक स्टॉक ब्रोकर को अपने सभी बैंक खातों की जानकारी खाता खोलने के सात कार्य दिवसों के भीतर स्टॉक एक्सचेंज को देनी होती है। जो स्टॉक ब्रोकर बैंक भी हैं, उन्हें केवल स्टॉक ब्रोकिंग गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाने वाले बैंक खातों की जानकारी देनी होती है। यह छूट अब प्राइमरी डीलर स्टॉक ब्रोकर्स को भी दी जा रही है। सेबी ने डीमैट खातों की जानकारी देने की जिम्मेदारी भी स्टॉक ब्रोकर्स से डिपॉजिटरी को सौंप दी है। ये प्रावधान 17 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।
परिवहन
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के आदेशानुसार 60% सीटें निःशुल्क आवंटित की जानी चाहिए
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सभी उड़ानों में कम से कम 60% सीटें निःशुल्क आवंटित करने के निर्देश जारी किए हैं।[30] निर्देशों में यह भी अनिवार्य किया गया है: (i) एक ही पीएनआर पर यात्रा करने वाले यात्रियों को एक साथ बैठाया जाए, (ii) खेल के सामान और संगीत वाद्य ले जाने के नियम पारदर्शी और आसान बनाएं, (iii) देरी, रद्द होने और बोर्डिंग से इनकार किए जाने की स्थिति में यात्रियों के अधिकारों का कड़ाई से पालन किया जाए, और (iv) यात्रियों के अधिकारों का प्रमुखता से प्रदर्शन किया जाए।
कैबिनेट ने संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाने के लिए संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दे दी है।[31] यह योजना 2026-27 से 2035-36 तक 10 वर्षों में लागू की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा बजटीय सहायता के माध्यम से कुल 28,840 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया जाएगा। पिछली उड़ान योजना 2016 से 2026 तक लागू की गई थी, जिसके लिए कुल 4,500 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था। इस योजना के तहत 500 से अधिक मार्ग और 75 से अधिक हवाई अड्डे शामिल हैं, जिनमें हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम भी शामिल हैं।[32] संशोधित उड़ान योजना की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
वायबिलिटी गैप फंडिंग: एयरलाइनों के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) का प्रावधान जारी रहेगा। इस योजना के तहत, 10 वर्षों की अवधि में वीजीएफ के लिए 10,043 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं।
हवाई अड्डों का विकास: मौजूदा अनुपयोगी हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डों का विकास किया जाएगा। इसके लिए अगले आठ वर्षों में 12,159 करोड़ रुपए का परिव्यय प्रस्तावित किया गया है।
हेलीपैड्स का विकास: पहाड़ी, दूरस्थ, द्वीपीय और विकासशील क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित किए जाएंगे ताकि उन क्षेत्रों में पहुंच में सुधार हो सके जहां पारंपरिक हवाई अड्डे का बुनियादी ढांचा हमेशा व्यावहारिक नहीं हो सकता है।
संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) के लिए सहायता: संशोधित योजना के तहत, ओएंडएम सहायता तीन वर्षों के लिए प्रदान की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति हवाई अड्डा 3.06 करोड़ रुपए प्रति वर्ष और प्रति हेलीपोर्ट या वॉटर एयरोड्रोम 90 लाख रुपए प्रति वर्ष होगी। इस घटक की अनुमानित लागत 2,577 करोड़ रुपए है और इससे लगभग 441 हवाई अड्डों को सहायता मिलेगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं वसूली) (दूसरा संशोधन) नियम अधिसूचित
राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं वसूली) नियम, 2008 (राष्ट्रीय राजमार्ग एक्ट, 1956 के अंतर्गत निर्मित) में संशोधन किया गया।[33],[34] ये नियम राजमार्ग अवसंरचना के निर्माण, रखरखाव और संचालन की लागत की वसूली हेतु राष्ट्रीय राजमार्गों पर उपयोगकर्ता शुल्क (टोल) लगाने, निर्धारित करने और वसूलने का प्रावधान करते हैं। संशोधन में बकाया उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली के तरीके का भी प्रावधान है। ये नियम 17 मार्च, 2026 से प्रभावी हुए।
अदा न किए गए उपयोगकर्ता शुल्क की परिभाषा: संशोधन में यह जोड़ा गया है कि अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क को उस शुल्क के रूप में परिभाषित किया जाएगा जो किसी राष्ट्रीय राजमार्ग के खंड का उपयोग करने के लिए मोटर वाहन द्वारा देय है जहां इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह अवसंरचना ने वाहन के गुजरने को रिकॉर्ड किया है लेकिन शुल्क प्राप्त नहीं हुआ है।
जुर्माना: बकाया उपयोगकर्ता शुल्क लागू टोल राशि का दोगुना होगा। हालांकि अगर ई-नोटिस जारी होने के 72 घंटों के भीतर भुगतान कर दिया जाता है, तो केवल मूल उपयोगकर्ता शुल्क का भुगतान करना होगा। वाहन मालिक ई-नोटिस जारी होने के 72 घंटों के भीतर निर्धारित पोर्टल के माध्यम से शिकायत निवारण के लिए आवेदन जमा कर सकते हैं।
यदि उपयोगकर्ता शुल्क का भुगतान 15 दिनों से अधिक समय तक नहीं किया जाता है, तो राशि को वाहन प्रणाली (राष्ट्रीय वाहन पंजीकरण डेटाबेस) में दर्ज किया जाएगा और बकाया राशि का भुगतान होने तक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
बकाया उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली का तरीका: पंजीकृत वाहन मालिकों को एक इलेक्ट्रॉनिक सूचना जारी की जाएगी जिसमें वाहन का विवरण, यात्रा की तिथि और स्थान तथा देय राशि का उल्लेख होगा। यह ई-नोटिस एसएमएस, ईमेल या मोबाइल आधारित एप्लिकेशन के माध्यम से भेजी जाएगी और साथ ही एक ऑनलाइन पोर्टल और वाहन डेटाबेस पर भी उपलब्ध होगी। केंद्र सरकार बकाया उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली और प्रवर्तन के लिए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन रजिस्ट्री के साथ एकीकृत कर सकती है।
कृषि
तिलहन और दलहन के उत्पादन और उपलब्धता पर स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट
Shrusti Singh (shrusti@prsindia.org)
कृषि, पशुपालन एवं खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: चरणजीत सिंह चन्नी) ने 27 मार्च, 2026 को 'देश में तिलहन और दलहन का उत्पादन और उपलब्धता' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के प्रमुख निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:
आयात पर निर्भरता कम करना: कमिटी ने पीएम-आशा योजना के तहत तिलहन और दलहन की खरीद को वर्तमान कुल उत्पादन के 25% से बढ़ाकर 100% करने का सुझाव दिया। कमिटी ने सुझाव दिया कि अगर वैश्विक तेल की कीमतें 800 USD प्रति टन से नीचे गिरती हैं या सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य दर से नीचे गिरती हैं, तो पाम के तेल के आयात पर 20% सुरक्षा शुल्क (या कोई अन्य दर) लगाया जाए।
नए बीज बिल की आवश्यकता: कमिटी ने पाया कि आधुनिक तिलहन और दलहन क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बीज एक्ट, 1966 की समीक्षा आवश्यक है। कमिटी ने उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की समयबद्ध उपलब्धता, अनिवार्य प्रमाणीकरण और उद्योग में उत्पादन एवं गुणवत्ता नियंत्रण के संशोधित मानकों को सुनिश्चित करने के लिए एक नया बीज बिल लाने का सुझाव दिया।
बीजों के लिए मूल्य सीमा: कमिटी ने देश में बीजों की कीमतों की अधिकतम सीमा तय करने के लिए एक राष्ट्रीय आयोग/रेगुलेटरी निकाय की स्थापना का सुझाव दिया। उसने बीजों की वास्तविक लागत को दर्शाते हुए मूल्य सीमा तय करने के लिए परामर्श और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का सुझाव दिया। इस निकाय में राज्य सरकारों, उद्योग संघों और किसानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) बीजों/खाद्य पदार्थों के आयात पर अंकुश लगाना: कमिटी ने देश में जीएम खाद्य पदार्थों के अवैध आयात और बिक्री तथा मानव स्वास्थ्य पर इसके नकारात्मक प्रभाव पर गौर किया। इस समस्या के समाधान हेतु कमिटी ने कानूनों का कड़ाई से प्रवर्तन, बंदरगाहों पर प्रयोगशाला अवसंरचना का अपग्रेडेशन, उच्च स्तरीय निगरानी और जीएम घटकों का पता लगाने हेतु खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य लेबलिंग का सुझाव दिया, ताकि उपभोक्ताओं को सही विकल्प चुनने में सहायता मिल सके।
रिपोर्ट पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
स्टैंडिंग कमिटी ने जल-कुशल बीजों से संबंधित अनुसंधान पर रिपोर्ट पेश की
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
कृषि से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री चरणजीत सिंह चन्नी) ने 27 मार्च, 2026 को 'भूजल संरक्षण हेतु जल-कुशल बीज किस्मों के विकास के लिए अनुसंधान' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी ने जल-कुशल बीज किस्मों के विकास के लिए चल रहे कार्यक्रमों का मूल्यांकन किया। कमिटी के प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) फसलों के आनुवंशिक सुधार के लिए जीन संपादन जैसे आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी उपकरणों का उपयोग, (ii) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसंधान एवं विकास तंत्र को सुदृढ़ करना, (iii) जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में किसानों को उपयुक्त फसल चयन और कृषि पद्धतियों के बारे में मार्गदर्शन देने हेतु एक तंत्र स्थापित करना, (iv) गुणवत्तापूर्ण और किफायती बीजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मौजूदा बीज उत्पादन एवं वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ करना, और (v) विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए एक सर्वोच्च निकाय या समिति का गठन करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
विदेश मामले
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च, 2026 को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन से टेलीफोन पर बातचीत की।[35] भारत ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चिंता व्यक्त की और दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान सहित इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण, ऊर्जा और वस्तुओं के निर्बाध पारगमन के साथ-साथ भारत की प्राथमिकता है।33
फिनलैंड के राष्ट्रपति की भारत यात्रा
फिनलैंड के राष्ट्रपति डॉ. अलेक्जेंडर स्टब ने 4 से 7 मार्च, 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा की।[36] इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी, (ii) जैव ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और पवन, सौर और लघु जलविद्युत ऊर्जा सहित पर्यावरण सहयोग, और (iii) आधिकारिक सांख्यिकी संकलन में सर्वोत्तम कार्य पद्धतियों का आदान-प्रदान। दोनों देशों के बीच भविष्य की कार्ययोजना से संबंधित घोषणाएं भी की गईं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) द्विपक्षीय संबंधों को "डिजिटलीकरण और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी" के स्तर तक उन्नत करना, (ii) भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और फिनिश इनोवेशन फंडिंग एजेंसी बिजनेस, फिनलैंड के बीच संयुक्त अनुसंधान के लिए आवेदन आमंत्रित करना, (iii) भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का लाभ उठाकर 2030 तक भारत और फिनलैंड के बीच वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखना, (iv) डिजिटलीकरण पर एक अंतर-क्षेत्रीय संयुक्त कार्य समूह की स्थापना करना, (v) 6G पर एक संयुक्त कार्यबल का गठन करना, (vi) भारत-फिनलैंड स्टार्टअप कॉरिडोर के माध्यम से स्टार्टअप इकोसिस्टम की बेहतर कनेक्टिविटी को सक्षम बनाना, और (vii) भारत में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच की सह-मेजबानी करना।
स्वास्थ्य
Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)
स्टैंडिंग कमिटी ने नई दिल्ली स्थित एम्स के कामकाज पर रिपोर्ट पेश की
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: प्रो. राम गोपाल यादव) ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली का कामकाज और स्वास्थ्य सेवा एवं उपचार प्राप्त करने में रोगियों को आने वाली समस्याओं पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[37]
कमिटी के प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) दिल्ली-एनसीआर और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में एक और एम्स की स्थापना, (ii) ओपीडी में मरीजों की संख्या को कम करने के लिए विशेषज्ञता केंद्रों का स्थानांतरण, (iii) नवजात केंद्रों और कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और ट्रॉमा विभागों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाना, (iv) फैकेल्टी और नॉन-फैकेल्टी पदों और विशेषज्ञता कार्यक्रमों में रिक्तियों को भरना, (v) जिला अस्पतालों में नैदानिक सेवाओं को मजबूत करना, और (vi) 15 वर्षों के अनुभव वाले परियोजना कर्मचारियों को नियमित श्रमबल में एकीकृत करना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
फार्मास्यूटिकल्स
Jahanvi Choudhary (jahanvi@prsindia.org)
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन के दो ड्राफ्ट्स सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं के लिए जारी किए हैं।[38],[39] ये नियम औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन एक्ट, 1940 के अंतर्गत जारी किए गए हैं।[40],[41] यह एक्ट भारत में औषधियों और सौंदर्य प्रसाधनों के आयात, निर्माण और बिक्री के लिए रेगुलेटरी तंत्र का प्रावधान करता है। प्रस्तावित प्रमुख संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
रक्त उत्पादों के परीक्षण संबंधी आवश्यकताओं में परिवर्तन: 1945 के नियमों के अनुसार, निर्मित रक्त उत्पादों (जैसे ह्यूमन एल्ब्यूमिन, ह्यूमन नॉर्मल इम्यूनोग्लोबुलिन) को भारतीय फार्माकोपिया में निर्दिष्ट मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है, और यदि ऐसे मानक निर्दिष्ट नहीं हैं, तो यूएसए या ब्रिटिश फार्माकोपिया में निर्दिष्ट मानकों के अनुरूप होना आवश्यक था। उत्पादों का एचआईवी I और एचआईवी II एंटीबॉडी, हेपेटाइटिस बी सरफेस एंटीजन्स और हेपेटाइटिस सी वायरस एंटीबॉडी के लिए भी परीक्षण किया जाना आवश्यक था, जिसमें परिणाम नकारात्मक आए। ड्राफ्ट नियमों में एचआईवी और हेपेटाइटिस परीक्षण संबंधी आवश्यकताओं को हटा दिया गया है।36
जानकारी देने के नियमों में परिवर्तन: ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, निर्माता को आयातित या निर्मित दवा उत्पाद में किसी भी परिवर्तन की सूचना औषधि नियंत्रक को देनी होगी। इसमें निर्माण प्रक्रिया, पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ या दवा के परीक्षण में परिवर्तन शामिल हैं। किसी भी बड़े या मध्यम गुणवत्ता परिवर्तन की स्थिति में, उन्हें औषधि नियंत्रक से पूर्व स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। बड़े या मध्यम परिवर्तन का तात्पर्य क्रमशः दवा उत्पाद की पहचान, शक्ति, गुणवत्ता, शुद्धता या प्रभावकारिता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने की पर्याप्त या मध्यम संभावना से है।
दोनों प्रकार के ड्राफ्ट नियमों पर टिप्पणियां 8 अप्रैल, 2026 तक आमंत्रित हैं।
खनन
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
ड्राफ्ट खनिज एक्सचेंज नियम को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया
खान मंत्रालय ने सार्वजनिक परमार्श के लिए खनिज एक्सचेंज नियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।[42] यह ड्राफ्ट नियम खान और खनिज (विकास एवं रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के अंतर्गत जारी किया गया है, जिसमें खनिज एक्सचेंज की स्थापना का प्रावधान है।[43] खनिज एक्सचेंज एक पंजीकृत इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच या बाज़ार होते हैं जहां खनिजों (या उनके प्रसंस्कृत रूपों जैसे धातुओं) के खरीदार और विक्रेता व्यापार कर सकते हैं। इन नियमों का उद्देश्य कोयला, लिग्नाइट और परमाणु खनिजों के अलावा अन्य खनिजों के व्यापार का प्रावधान करना है। ड्राफ्ट नियमों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
खनिज एक्सचेंज का पंजीकरण: खनिज एक्सचेंज के पंजीकरण के लिए पात्र होने के लिए, आवेदक को (i) कंपनी एक्ट, 2013 के तहत निगमित होना चाहिए, (ii) विपारस्परिक (स्वामित्व और प्रबंधन व्यापारिक अधिकारों से अलग होना चाहिए) होना चाहिए, और (iii) निर्दिष्ट स्वामित्व आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए। केवल इन नियमों के तहत पंजीकृत एक्सचेंज को ही संचालन की अनुमति होगी। नियमों के प्रारंभ होने से पहले कार्यरत किसी भी इकाई को पहले खनिज एक्सचेंज के संचालन शुरू होने के छह महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण 25 वर्षों के लिए वैध होगा।
खनिज एक्सचेंज का संचालन: खनिज एक्सचेंज के निदेशक मंडल में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) शेयरधारक निदेशक, (ii) स्वतंत्र निदेशक, और (iii) प्रबंध निदेशक। स्वतंत्र निदेशकों की संख्या कम से कम शेयरधारक निदेशकों के बराबर होनी चाहिए (इस प्रयोजन के लिए प्रबंध निदेशक को शेयरधारक निदेशक माना जाएगा)।
अथॉरिटी के कार्य: भारतीय खान ब्यूरो रेगुलेटरी अथॉरिटी होगा। इसे एक्सचेंज को पंजीकृत और रेगुलेट करने, अनुबंधों को मंजूरी देने, निरीक्षण करने, बाजार की निगरानी करने और कुछ उल्लंघनों के लिए पंजीकरण रद्द करने का अधिकार होगा। यह असामान्य मूल्य अस्थिरता या हेरफेर के मामलों में बाजार में हस्तक्षेप भी कर सकता है।
जोखिम प्रबंधन: खनिज एक्सचेंज को एक जोखिम मूल्यांकन और प्रबंधन समिति गठित करनी होगी जो समय-समय पर समीक्षा करेगी। सभी खनिज एक्सचेंज को निपटान गारंटी कोष, समाशोधन और निपटान तंत्र और चूक से निपटने की प्रक्रियाएं स्थापित करनी होंगी। एक्सचेंज को सदस्यों और ग्राहकों के लिए शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना होगा और एक पूर्व-अनुमोदित निकास योजना बनानी होगी।
18 अप्रैल, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
खनिज नीलामी नियम, 2015 में संशोधन अधिसूचित
खान मंत्रालय ने खनिज कनसेशन देने की प्रक्रिया से संबंधित खनिज नीलामी नियम, 2015 में संशोधन अधिसूचित किए हैं।[44],[45] ये नियम खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के अंतर्गत निर्धारित किए गए हैं, जो खनिजों के विकास, अन्वेषण, निष्कर्षण और प्रबंधन का प्रावधान करता है।[46] प्रमुख संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
नीलामी प्रीमियम संबंधी आवश्यकताओं में संशोधन: 2015 के नियमों में यह निर्दिष्ट किया गया है कि अगर किसी क्षेत्र की नीलामी एक से अधिक खनिजों के लिए की जा रही है, तो बोलीदाता को भेजे गए खनिजों के मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत उद्धृत करना होगा, जो ब्लॉक के सभी खनिजों पर लागू होगा। सफल बोलीदाता भेजे गए खनिजों के मूल्य का यह प्रतिशत राज्य सरकार को समय-समय पर भुगतान करेगा। संशोधन में यह भी जोड़ा गया है कि अगर किसी भी महत्वपूर्ण खनिज (ग्रेफाइट, फॉस्फेट और पोटाश को छोड़कर) का मूल्य ब्लॉक के कुल मूल्य के 10% से कम है, तो ऐसे खनिजों पर कोई नीलामी प्रीमियम देय नहीं होगा।
वन क्षेत्र को पट्टे से बाहर रखना: राज्य सरकारें किसी वरीयता प्राप्त बोलीदाता को वन भूमि में आने वाले ब्लॉक के एक हिस्से को पट्टे से बाहर रखने की अनुमति दे सकती हैं, क्योंकि ऐसे हिस्से में खनन वन, वन्यजीव गलियारा, नदी, नाला, बस्ती या बुनियादी ढांचे आदि जैसी समस्याओं के कारण संभव नहीं है। ऐसे हिस्से में कुल अनुमानित खनिज संसाधनों का 25% से कम हिस्सा होना चाहिए।
संशोधित अग्रिम भुगतान: 2015 के नियमों में यह निर्दिष्ट था कि अग्रिम भुगतान की दूसरी (20%) और तीसरी (60%) किस्तें समग्र लाइसेंस धारक द्वारा निर्दिष्ट चरणों में अदा की जाएंगी। संशोधन में ऐसे निश्चित प्रतिशत को हटा दिया गया है। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि 2026 के संशोधन के बाद की नीलामी के लिए, दूसरी किस्त आशय पत्र जारी होने की तारीख से एक वर्ष के भीतर अदा की जानी चाहिए।
खनिज पट्टे और समावेशन संबंधी नियमों में संशोधन अधिसूचित
खान मंत्रालय ने खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों के अतिरिक्त) कनसेशन नियम, 2016 में संशोधन अधिसूचित किए हैं।[47],[48] ये नियम खान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के अंतर्गत जारी किए गए हैं, जो खनिजों के विकास, अन्वेषण, निष्कर्षण और प्रबंधन का प्रावधान करता है।[49] ये नियम खनिज कनसेशंस को रेगुलेट करने की प्रक्रियाओं को निर्धारित करते हैं। प्रमुख संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
खनिजों को शामिल करने के लिए आवेदन: 2016 के नियमों में निर्दिष्ट खनिज के लिए खनन पट्टा निर्धारित किया गया है। संशोधन के अनुसार, खनन पट्टाधारक किसी भी अतिरिक्त खनिज, जिसमें लघु खनिज भी शामिल हैं, को पट्टे में शामिल करने के लिए आवेदन कर सकता है। राज्य सरकार को ऐसे आवेदन पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा।
खनन पट्टे में सन्निहित क्षेत्र का समावेश: गहरे खनिजों के लिए खनन पट्टा या मिश्रित लाइसेंस धारक सन्निहित क्षेत्र को शामिल करने के लिए राज्य सरकार से आवेदन कर सकता है। गहरे खनिजों को उन खनिजों के रूप में परिभाषित किया गया है जो सतह से 200 मीटर से अधिक की गहराई पर पाए जाते हैं। राज्य सरकार निर्धारित शर्तों के अधीन ऐसा विस्तार प्रदान कर सकती है, जिसमें यह शर्त शामिल है कि खनन पट्टे के मामले में सन्निहित क्षेत्र पट्टे के कुल क्षेत्रफल के 10% से अधिक न हो और मिश्रित लाइसेंस के मामले में 30% से अधिक न हो।
खनन पट्टे में अन्य खनिजों का समावेश: दो हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले किसी भी लघु खनिज के लिए खनन पट्टा तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक प्रारंभिक अन्वेषण पूरा न हो जाए। अगर किसी लघु खनिज पट्टे के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में कोई अन्य खनिज पाया जाता है, तो पट्टाधारक को नियमों की अधिसूचना के छह महीने के भीतर या खोज के 60 दिनों के भीतर, जो भी बाद में हो, इसकी सूचना देनी होगी। खनन पट्टाधारक ऐसे खनिजों को पट्टे में शामिल करने के लिए राज्य सरकार को आवेदन कर सकता है।
अगर अन्वेषण के दौरान कोई परमाणु खनिज पाया जाता है, और उसका ग्रेड निर्धारित सीमा मूल्य के बराबर या उससे अधिक है, तो खनन पट्टा समाप्त कर दिया जाएगा।
वित्तीय दायित्व: अगर किसी लघु खनिज पट्टे में कोई अन्य खनिज शामिल किया जाता है, तो पट्टाधारक को 1957 के एक्ट के तहत निर्दिष्ट अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। अगर पट्टा नीलाम किया गया था और नीलामी प्रीमियम प्रेषित खनिज के मूल्य से जुड़ा नहीं था, तो पट्टाधारक को शामिल खनिजों की रॉयल्टी के बराबर राशि का भुगतान करना होगा।
पर्यावरण एवं जल
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, जिसके लिए 87 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया गया है।[50] मंत्रिमंडल ने मिशन के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी। जेजेएम का उद्देश्य सभी ग्रामीण घरों को नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।
पुनर्गठित जेजेएम के तहत, प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की जाएगी और संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण किया जाएगा। ग्राम पंचायतों को कार्यों के पूर्ण होने का प्रमाणपत्र देना होगा और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे संचालन और रखरखाव कार्यों की पुष्टि करनी होगी। इसमें एक वार्षिक, समुदाय-नेतृत्व वाली रखरखाव और समीक्षा प्रक्रिया भी शामिल होगी।
मंत्रिमंडल ने 2031-35 के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्यों को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2031-35 के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को मंजूरी दे दी है।[51] एनडीसी जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के तहत देशों द्वारा प्रस्तुत जलवायु कार्रवाई लक्ष्य हैं।
नए लक्ष्यों के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2005 के स्तर से 2035 तक अपनी जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 47% तक कम करना है। जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता से तात्पर्य प्रति इकाई आर्थिक उत्पादन में उत्पादित ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) की मात्रा से है। नए लक्ष्यों का उद्देश्य 2035 तक स्थापित क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों की 60% हिस्सेदारी हासिल करना भी है। इसके अलावा, भारत का लक्ष्य 2005 के स्तर से 2035 तक वन और वृक्ष आवरण में वृद्धि के माध्यम से 3.5-4 अरब टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना है।
वाहनों के एंड-ऑफ-लाइफ संबंधी नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट जारी
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण संरक्षण (एंड-ऑफ-लाइफ वाहन) नियम, 2025 में संशोधन के ड्राफ्ट को सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए जारी किया है।[52],[53] यह ड्राफ्ट नियम पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के तहत जारी किया गया है और इनमें एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों के पर्यावरण के अनुकूल विघटन, पुनर्चक्रण और निपटान का प्रावधान है।[54] संशोधन के ड्राफ्ट में निम्नलिखित प्रमुख बदलाव प्रस्तावित हैं:
उत्पादकों की जिम्मेदारियां: 2025 के नियमों के तहत, उत्पादकों को विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) ढांचे के अंतर्गत, एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों के सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण के लिए जिम्मेदार बनाया गया है। इसमें वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं से ईपीआर प्रमाणपत्र प्राप्त करके दायित्वों को पूरा करने का विकल्प भी दिया गया है।
संशोधन के अनुसार, उत्पादक एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों से उत्पन्न अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान और प्रबंधन के लिए भी जिम्मेदार होंगे, जिसमें पुनर्चक्रण और भविष्य के उत्पादन में पुन: उपयोग शामिल है। उत्पादक पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं द्वारा जारी ईपीआर प्रमाणपत्र खरीदकर भी अपने ईपीआर दायित्वों को पूरा कर सकते हैं। उत्पादकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 2026-27 से वाहनों में उपयोग किए गए कुल स्टील का कम से कम 10% पुनर्चक्रित स्टील हो। उत्पादकों को 30 जून, 2026 तक घरेलू बाजार में 2005-06 से 2024-25 के बीच पेश किए गए वाहनों में उपयोग किए गए स्टील, टायर, तेल और प्लास्टिक की मात्रा जैसे विस्तृत आंकड़े घोषित करने होंगे।
संशोधित स्टील रिकवरी लक्ष्य: 2025 के नियमों के तहत, उत्पादकों को 2019-20 में बेचे गए सभी वाहनों में प्रयुक्त स्टील का 18% 2039-40 तक रिकवर करना अनिवार्य है। ड्राफ्ट संशोधनों में उच्च लक्ष्य प्रस्तावित किए गए हैं, जिसके तहत 2025-26 में बेचे गए वाहनों के लिए रिकवरी को लगभग 50-55% और 2035-36 में बेचे गए वाहनों के लिए 70-75% तक बढ़ाया जाएगा।
बीमा कंपनियों की जिम्मेदारियां: बीमा कंपनियों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सेवामुक्त वाहनों को पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों या निर्दिष्ट संग्रह केंद्रों पर जमा किया जाए और ऐसी जमा राशि की रिपोर्ट संबंधित बोर्ड को दी जाए। भारतीय बीमा रेगुलेटरी एवं विकास प्राधिकरण बीमा कंपनियों की जिम्मेदारियों को निर्धारित और लागू करेगा।
25 मई, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
ऊर्जा
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
उपभोक्ता अधिकार नियमों में संशोधन पर टिप्पणियां आमंत्रित
विद्युत मंत्रालय ने विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) संशोधन नियम, 2026 के ड्राफ्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[55] ये ड्राफ्ट नियम विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 में संशोधन करने का प्रयास करते हैं।[56] 2020 के नियमों में विद्युत उपभोक्ताओं के अधिकारों का निर्धारण किया गया है, जिनमें मीटरिंग, बिलिंग और विद्युत सेवाओं तक पहुंच से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। ड्राफ्ट नियमों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
समय-आधारित शुल्क: 2020 के नियमों के अनुसार, समय-आधारित शुल्क (टीओडी) 1 अप्रैल, 2024 से निर्दिष्ट वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं (सीएंडआई) पर लागू होते हैं। अन्य उपभोक्ताओं (कृषि को छोड़कर) के लिए यह 1 अप्रैल, 2025 से लागू होता है। ड्राफ्ट नियम इन प्रावधानों में संशोधन करते हुए सीएंडआई उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल, 2027 से टीओडी शुल्क अनिवार्य करते हैं। अन्य उपभोक्ताओं (कृषि को छोड़कर) के लिए, एसईआरसी समयसीमा निर्धारित करेंगे। यह समयसीमा 1 अप्रैल, 2028 से आगे नहीं हो सकती।
नेट मीटरिंग शुल्क: नियमों के ड्राफ्ट में राज्य विद्युत रेगुलेटरी आयोगों (एसईआरसी) द्वारा निर्धारित और लागू किए जाने वाले नेट मीटरिंग शुल्क का प्रावधान है। यह शुल्क एसईआरसी द्वारा निर्धारित स्टोरेज की अनुमानित लागत और नेटवर्क हानि समायोजन के आधार पर क्रमिक रूप से लगाया जाएगा। पांच किलोवाट (kW) तक की क्षमता वाले स्थापित सौर पीवी पर कोई नेट मीटरिंग शुल्क नहीं लगेगा। नेट मीटरिंग एक ऐसी सुविधा है जिसके तहत एक प्रोसुमर (उत्पादक जो उपभोक्ता भी है) द्वारा ग्रिड को निर्यात की गई सौर ऊर्जा को ग्रिड से आयातित ऊर्जा से घटाकर शुद्ध आयातित ऊर्जा प्राप्त की जाती है। बिलिंग के लिए, केवल शुद्ध आयातित ऊर्जा का ही उपयोग किया जाता है।
रूफटॉप सोलर के लिए ऊर्जा की भंडारण प्रणाली: 2026 के ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, एसईआरसी को 500 kW से अधिक क्षमता वाले इंस्टॉलेशन के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणाली की स्थापना अनिवार्य करने का अधिकार है।
बिलों की स्वचालित समीक्षा: ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, वितरण लाइसेंसधारियों को बढ़े हुए या असामान्य रूप से कम बिलों के मामलों की सक्रिय रूप से समीक्षा करनी होगी। अगर किसी उपभोक्ता की खपत किसी बिलिंग चक्र के दौरान पिछले छह बिलिंग चक्रों के औसत से पांच गुना (या एसईआरसी द्वारा निर्धारित) अधिक हो जाती है, तो लाइसेंसधारी को 30 दिनों के भीतर मामले की समीक्षा करके उसका समाधान करना होगा। इसी प्रकार, अगर किसी उपभोक्ता की खपत पिछले छह बिलिंग चक्रों के औसत खपत के एक-पांचवें (या एसईआरसी द्वारा निर्धारित) से कम हो जाती है, तो लाइसेंसधारी को मामले की समीक्षा करके 30 दिनों के भीतर उचित कार्रवाई करनी होगी।
11 अप्रैल, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
सीईआरसी ने अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्रों से संबंधित रेगुलेशंस में संशोधन की अधिसूचना जारी की
केंद्रीय विद्युत रेगुलेटरी आयोग (सीईआरसी) ने सीईआरसी (अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लिए अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्रों के नियम एवं शर्तें) (प्रथम संशोधन) रेगुलेशन, 2026 को अधिसूचित किया है।[57] इसका उद्देश्य सीईआरसी (अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लिए अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्रों के नियम एवं शर्तें) (प्रथम संशोधन) रेगुलेशन, 2022 में संशोधन करना है।[58] अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र (आरईसी) व्यापार योग्य प्रमाणपत्र हैं जो अक्षय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादित एक मेगावाट-घंटे (MWh) बिजली को दर्शाते हैं। अक्षय ऊर्जा खरीदने के बजाय अक्षय खपत दायित्वों को पूरा करने के लिए आरईसी खरीदे जा सकते हैं। इन दायित्वों के तहत संस्थाओं (जैसे वितरण कंपनियों) द्वारा खरीदी गई बिजली का एक निश्चित प्रतिशत अक्षय स्रोतों से प्राप्त होना अनिवार्य है।
अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र (आरईसी) प्रति यूनिट उत्पादित बिजली के लिए जारी किए जाते हैं, जो प्रमाणपत्र गुणक पर आधारित होते हैं। पहले, प्रमाणपत्र गुणक अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के टैरिफ पर आधारित होते थे। 2026 के रेगुलेशंस में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के टैरिफ, ऐसी परियोजनाओं की तकनीकी परिपक्वता और क्षमता ऋण के स्तर के आधार पर गुणक निर्धारण का प्रावधान है। क्षमता ऋण से तात्पर्य सौर या पवन ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा चरम मांग को पूरा करने में किए गए विश्वसनीय योगदान से है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
स्टैंडिंग कमिटी ने एआई के प्रभाव पर रिपोर्ट पेश की
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. निशिकांत दुबे) ने 30 मार्च, 2026 को ‘एआई के उभार का असर और संबंधित मुद्दे’ विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की।[59] कमिटी ने कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर एआई को अमल में लाने में कई रुकावटें हैं, जैसे कंप्यूटिंग की सीमित सुविधाएं, कौशल की कमी, और पर्याप्त डेटासेट्स की कमी। कमिटी ने यह भी कहा कि डेटा तक पहुंच और उसकी उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है। कमिटी ने एआई को अपनाने में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया जैसे बाजार में कुछ ही कंपनियों का कब्जा, एआई मॉडल की व्याख्या करने में कठिनाई, गोपनीयता और गुणवत्ता संबंधी चिंताएं। कृषि के मामले में, उसने उच्च प्रारंभिक निवेश और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गति वाले इंटरनेट की कमी जैसी चिंताओं को उजागर किया।
कमिटी ने पाया कि एआई से जुड़े जोखिमों में डीपफेक, साइबर खतरे, एआई आधारित निगरानी और एआई का उपयोग करके वित्तीय धोखाधड़ी शामिल हैं। कमिटी ने यह भी उल्लेख किया कि एआई से संबंधित रेगुलेटरी ढांचे को और मजबूत करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन के ड्राफ्ट प्रस्तावित किए गए हैं।
कमिटी के प्रमुख सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक व्यापक कानून की संभावना तलाशना, (ii) स्कूलों और कॉलेजों तथा विश्वविद्यालय अनुसंधान में एआई के पाठ्यक्रमों को प्रोत्साहित करना, (iii) आईटी नियमों में संशोधन के ड्राफ्ट के कार्यान्वयन में तेजी लाना, और (iv) लोगों को एआई के दुरुपयोग से बचाने के लिए कुछ प्लेटफार्मों के लिए आयु प्रतिबंधों की संभावना तलाशना।
रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखें।
आईटी नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरीज़ के दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) द्वितीय संशोधन नियम, 2026 के ड्राफ्ट पर टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[60] इन ड्राफ्ट नियमों का उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरीज़ के दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन करना है।[61] इंटरमीडियरीज़ ऐसी संस्थाएं होती हैं जो अन्य व्यक्तियों की ओर से डेटा स्टोर या ट्रांसमिट करती हैं, और इनमें दूरसंचार और इंटरनेट सेवा प्रदाता, ऑनलाइन बाज़ार, सर्च इंजन और सोशल मीडिया साइट्स शामिल हैं। 2021 के नियमों में इंटरमीडियरीज़ के लिए किसी भी थर्ड पार्टी इनफॉरमेशन के लिए दायित्व से छूट का दावा करने हेतु ड्यू डेलिजेंस से संबंधित नियमों को निर्दिष्ट किया गया है। प्रस्तावित प्रमुख परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
स्पष्टीकरण, सलाह और निर्देश का अनुपालन: 2026 के ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, इंटरमीडियरीज़ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए प्रत्येक स्पष्टीकरण, सलाह, आदेश, निर्देश, मानक संचालन प्रक्रिया, आचार संहिता या दिशानिर्देश का अनुपालन करना अनिवार्य है। ड्राफ्ट नियमों में कहा गया है कि ऐसे दस्तावेज लिखित रूप में जारी किए जाएंगे और उनमें उनका कानूनी आधार स्पष्ट रूप से बताया जाएगा।
डिजिटल मीडिया से संबंधित नियमों को लागू करना: 2021 के नियम ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट और न्यूज़ और करंट अफेयर्स कंटेंट (डिजिटल मीडिया) के प्रकाशकों को अलग-अलग रेगुलेट करते हैं। 2021 के नियमों के तहत, डिजिटल मीडिया से संबंधित निम्नलिखित प्रावधान इंटरमीडियरीज़ पर भी लागू होते हैं: (i) कंटेंट को हटाने, संशोधित करने या ब्लॉक करने के निर्देश जारी करने की सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की शक्तियां, और (ii) आपातकालीन स्थितियों में कुछ सूचनाओं को ब्लॉक करना जहां विलंब स्वीकार्य नहीं है। 2026 के ड्राफ्ट नियमों में यह निर्दिष्ट है कि 2021 के नियम उन न्यूज़ और करंट अफेयर्स कंटेंट पर भी लागू होंगे जो प्रकाशकों के अलावा अन्य उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रदर्शित, साझा और स्टोर किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, शिकायतों की सुनवाई के लिए अंतर-विभागीय समिति से संबंधित प्रावधान इंटरमीडियरीज़ के साथ-साथ उन उपयोगकर्ताओं के कंटेंट पर भी लागू होंगे जो प्रकाशक नहीं हैं।
14 अप्रैल, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
[1] “Developments in India’s Balance of Payments during the Third Quarter (October-December) of 2025-26”, Reserve Bank of India, March 2, 2026, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR22016B971CD8D1D8411CA7DEF94DF1EB4768.PDF.
[2] “Quick Estimate of Index of Industrial Production and Use-Based Index for the Month of January 2026”, Ministry of Statistics and Programme Implementation, March 2, 2026, https://www.mospi.gov.in/uploads/latestReleases/latest_release_1772446993082_bafbeab1-d887-4088-ad79-34bca753b231_IIP_Press_release_January_2026.pdf.
[3] “Quick Estimate of Index of Industrial Production and Use-Based Index for the Month of February 2025”, Ministry of Statistics and Programme Implementation, April 11, 2025, https://www.mospi.gov.in/sites/default/files/press_release/IIP_PR_11Apr25.pdf.
[4] The Transgender (Protection of Rights) Amendment Bill, March 13, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Transgender_Bill_2026_Text.pdf.
[5] The Transgender (Protection of Rights) Act, November 26, 2019, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2019/The%20Transgender%20Persons%20(Protection%20of%20Rights)%20Bill,%202019%20Bill%20Text.pdf.
[6] Writ Petition (Civil) No 960 of 2021, Hamsaanandini Nanduri vs Union of India and ORS, March 17, 2026, https://api.sci.gov.in/supremecourt/2021/18032/18032_2021_7_1502_69584_Judgement_17-Mar-2026.pdf.
[7]The Code on Social Security, as on November 21, 2025, https://upload.indiacode.nic.in/view-casepdf?type=act&id=AC_CEN_6_0_00036_202036_1623221080799.
[8] Criminal Appeal No 1580 of 2026, Chinthada Anand versus State of Andhra Pradesh and Others, March 24, 2026, https://api.sci.gov.in/supremecourt/2025/26891/26891_2025_16_1501_69653_Judgement_24-Mar-2026.pdf.
[9] “The Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950”, Ministry of Social Justice and Empowerment, https://socialjustice.gov.in/writereaddata/UploadFile/CONSTITUTION%20(SC)%20ORDER%201950%20dated%2010081950.pdf.
[10] Report No 4, “Cyber Crimes and Cyber Safety of Women”, Committee on the Empowerment of Women, Ministry of Home Affairs and Ministry of Electronics and Information technology, Lok Sabha, March 23, 2026, https://sansad.in/ls/committee/other-parliamentary-standing-committees/8-Empowerment%20of%20Women-nameH=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%20%E0%A4%B8%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3%20%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF.
[11] The Jan Vishwas (Amendment of Provisions) Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Jan_Vishwas_Bill_2026_Text.pdf.
[12] The Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Foreign_Contribution_Bill_2026_Text.pdf.
[13] Press Note No. 2 of 2026, Department for Promotion of Industry and Internal Trade, Ministry of Commerce and Industry, March 15, 2026, https://www.dpiit.gov.in/static/uploads/2026/03/b9da5830b052c2f2d788593e97d07c63.pdf.
[14] Consolidated FDI policy, Department for Promotion of Industry and Internal Trade, Ministry of Commerce, October 15, 2020, https://www.mofpi.gov.in/sites/default/files/fdi-policycircular-2020-28october2020.pdf.
[15] The Prevention of Money-Laundering Act, 2002, https://enforcementdirectorate.gov.in/media/pmla/d7162b8f-d022-4583-b942-d5bb85dbe796_THE%20PREVENTION%20OF%20MONEY%20LAUNDERING%20ACT,%202002.pdf.
[16] The Prevention of Money-Laundering (Maintenance of Records) Rules, 2005, https://fiuindia.gov.in/pdfs/AML_legislation/PMLA_2005.pdf.
[17] “Government Restores RoDTEP Rates and Value Caps to Support Exporters Amid West Asia Trade Disruptions,” Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, March 23, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2244147®=3&lang=1.
[18] “What is RODTEP,” Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, as accessed on March 27, 2026, https://www.dgft.gov.in/CP/?opt=RODTEPARR.
[19] Trade Notice No. 24/2025-26, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, https://content.dgft.gov.in/Website/dgftprod/cb2fc214-b604-4cb8-a924-c3a439ad7a14/Trade%20Notice%2024%20dated%2009.02.2026.pdf.
[20] ‘Terms of Reference Signed for India-Canada Comprehensive Economic Partnership Agreement,’ Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, March 2, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2234674®=3&lang=1.
[21] The Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Corporate_Laws_(A)_Bill_2026_Text.pdf.
[22] Bulletin I, Lok Sabha, March 23, 2026, https://sansad.in/bcfd8465-4477-45a1-bda5-73d35c8a8e7c.
[23] “RBI issues Directions on Prudential Norms on Declaration of Dividend and Remittance of Profit by Regulated Entities”, Reserve Bank of India, March 10, 2026, https://rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=62358.
[24] “RBI Issues Draft Amendment Directions for ‘Review of Framework of Limiting Customer Liability in Digital Transactions”, Reserve Bank of India, March 6, 2026, https://rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=62340.
[25][25] “Key decisions taken in the SEBI Board Meeting dated 23rd March, 2026”, Securities and Exchange Board of India, March 23, 2026, https://www.sebi.gov.in/media-and-notifications/press-releases/mar-2026/key-decisions-taken-in-the-sebi-board-meeting-dated-23rd-march-2026_100515.html.
[26] “Consultation Paper on introduction of Gift Card/ Gift PPI (Prepaid Payment Instrument) for Mutual Funds”, Securities and Exchange Board of India, March 24, 2026, https://www.sebi.gov.in/reports-and-statistics/reports/mar-2026/consultation-paper-on-introduction-of-gift-card-gift-ppi-prepaid-payment-instrument-for-mutual-funds-_100505.html .
[27] “Consultation Paper on Ease of investing - Simplification of documentation requirement for transmission of securities and revision in threshold limits for simplified documentation”, Securities and Exchange Board of India, March 12, 2026, https://www.sebi.gov.in/reports-and-statistics/reports/mar-2026/consultation-paper-on-ease-of-investing-simplification-of-documentation-requirement-for-transmission-of-securities-and-revision-in-threshold-limits-for-simplified-documentation-_100289.html.
[28] “Consultation Paper on Framework of IT Resilience Index for Market Infrastructure Institutions (MIIs)”, Securities and Exchange Board of India, March 25, 2026, https://www.sebi.gov.in/reports-and-statistics/reports/mar-2026/consultation-paper-on-framework-of-it-resilience-index-for-market-infrastructure-institutions-miis-_100569.html.
[29] “Ease of doing business measures - Relaxations in certain reporting requirements for certain Stock Brokers and doing away with the requirement of reporting of demat account”, Securities and Exchange Board of India, March 23, 2026, https://www.sebi.gov.in/legal/circulars/mar-2026/ease-of-doing-business-measures-relaxations-in-certain-reporting-requirements-for-certain-stock-brokers-and-doing-away-with-the-requirement-of-reporting-of-demat-account_100511.html.
[31] ‘Cabinet Approves Modified UDAN to Deepen Regional Connectivity and Expand Inclusive Air Access Across India’, Press Information Bureau, Ministry of Civil Aviation, March 25, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2245471®=3&lang=1.
[32][32] “More than 2.15 lakh UDAN flights have operated and over 1.1 crore passengers have availed the benefits in UDAN flights so far.”, Ministry of Civil Aviation, Press Release Bureau, 8 December, 2022, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1881867®=3&lang=2.
[33] G.S.R. 191(E), Notification, Ministry of Road Transport & Highways, March 18, 2026, https://egazette.gov.in/(S(ae5bwdomtojgias53q13ryos))/ViewPDF.aspx.
[34] Gazette no 641, Ministry of Road Transport and Highways, December 5, 2008, https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_CEN_30_42_00002_195648_1517807321068&type=rule&filename=g.s.r._838(e)_dt._05.12.2008.pdf
[35] “Prime Minister Shri Narendra Modi speaks with the President of Iran” Ministry of External Affairs, March 12, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/40886/Prime_Minister_Shri_Narendra_Modi_speaks_with_the_President_of_Iran.
[36] “List of Outcomes: Visit of President of Finland (March 04 - 07, 2026)”, Ministry of External Affairs, March 5, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40853/List_of_Outcomes_Visit_of_President_of_Finland_March_04__07_2026.
[37] 171st report on working of All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), New Delhi and problems faced by patients in availing healthcare and treatment, Ministry of Health and Family Welfare, Rajya Sabha, March 18, 2026, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/14/212/171_2026_3_18.pdf?source=rajyasabha.
[38] Draft 1 of the Drugs (Amendment) Rules, 2026, Ministry of Health and Family Welfare, March 9, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/270812.pdf.
[39] Draft 2 of the Drugs (Amendment) Rules, 2026, Ministry of Health and Family Welfare, March 9, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/270856.pdf.
[40] The Drugs and Cosmetics Rules, 1945, https://cdsco.gov.in/opencms/opencms/system/modules/CDSCO.WEB/elements/download_file_division.jsp?num_id=MTIwMjc=.
[41] The Drugs and Cosmetics Act, 1940, Ministry of Health and Family Welfare, April 10, 1940, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/15278/1/drug_cosmeticsa1940-23.pdf.
[42] Draft Mineral Exchange Rules, 2026, Ministry of Mines, March 19, 2026, https://mines.gov.in/admin/imgview?filename=69bbea9290e661773922962.pdf.
[43] Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, https://mines.gov.in/admin/download/68ac5fc3960e81756127171.pdf
[44] Mineral (Auction) Second Amendment Rules, 2026, Ministry of Mines, March 30, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/271424.pdf.
[45] Mineral (Auction) Rules, 2015, https://ibm.gov.in/writereaddata/files/177132228869943bb04a7b6Mineral_Auction_Rules_2015_Amended_upto_29.01.2026.pdf.
[46] Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, https://ibm.gov.in/writereaddata/files/07102014115602MMDR%20Act%201957_10052012.pdf.
[47] Minerals (Other than Atomic and Hydro Carbons Energy Minerals) Concession (Second Amendment) Rules, 2026, Ministry of Mines, March 30, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/271467.pdf.
[48] Minerals (Other than Atomic and Hydro Carbons Energy Minerals) Concession Rules, 2016, https://ibm.gov.in/writereaddata/files/10202016094948MCR_2016_18092016%20from%20SKS.pdf.
[49] Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957, https://ibm.gov.in/writereaddata/files/07102014115602MMDR%20Act%201957_10052012.pdf.
[50] “Cabinet approves extension of Jal Jeevan Mission (JJM)” Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, March 10, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2237550®=3&lang=2.
[51] “Cabinet approves India’s Nationally Determined Contribution (2031-2035) to be communicated to the United Nations Framework Convention on Climate Change” Press Information Bureau, Cabinet, March 25, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2245209®=3&lang=1.
[52] Draft Environment Protection (End-of-Life Vehicles) Amendment Rules, 2026, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, March 27, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/271354.pdf.
[53] Environment Protection (End-of-Life Vehicles) Rules, 2025, https://moef.gov.in/storage/tender/1736422173.pdf.
[54] Environment (Protection) Act, 1986, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/4316/1/ep_act_1986.pdf.
[55] The Draft Electricity (Rights of Consumers) Amendment Rules, Ministry of Power, March 12, 2026, https://powermin.gov.in/sites/default/files/webform/notices/Seeking_comments_on_Draft_Electricity_Rights_of_Consumers_Amendment_Rules_2026.pdf.
[56] “Government amends Electricity (Rights of Consumers) Rules; amended Rules will further empower consumers, says Union Power and New & Renewable Energy Minister”, Press Information Bureau, Ministry of Power, February 23, 2024, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2008289®=3&lang=2.
[57] The Central Electricity Regulatory Commission (Terms and Conditions for Renewable Energy Certificates for Renewable Energy Generation) (First Amendment) Regulations, Central Electricity Regulatory Commission, March 24, 2026, https://cercind.gov.in/regulations/207-Noti.pdf.
[58] The Central Electricity Regulatory Commission (Terms and Conditions for Renewable Energy Certificates for Renewable Energy Generation) Regulations, Central Electricity Regulatory Commission, May 9, 2022, https://cercind.gov.in/regulations/REC-Regulations-2022.pdf.
[59] Report No. 27, ‘Impact of emergence of Artificial Intelligence and related issues’, Standing Committee on Communications and Information Technology, Lok Sabha, March 30, 2026, https://sansad.in/getFile/app/lsscommittee/Communications%20and%20Information%20Technology/18_Communications_and_Information_Technology_27.pdf?source=app.
[60] The Draft Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Second Amendment Rules, Ministry of Electronics and Information Technology, March 30, 2026, https://www.meity.gov.in/static/uploads/2026/03/30591fc6e322dcbcc9dae84a0f02e9e7.pdf.
[61] The Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, Ministry of Electronics and Information Technology, February 25, 2021, https://www.meity.gov.in/static/uploads/2026/02/550681ab908f8afb135b0ad42816a1c9.pdf.
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