इस अंक की झलकियां
2026-27 की पहली तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी का 0.5% रहा
2026-27 की पहली तिमाही में पूंजी खाते में 5.5 अरब USD का शुद्ध बहिर्वाह दर्ज किया गया। विदेशी मुद्रा भंडार में 8.1 अरब USD की कमी आई।
चुनिंदा यूपीआई व्यापारी लेनदेन पर शुल्क लागू होंगे
एमडीआर 2,000 रुपए से ज़्यादा के यूपीआई व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा, लेकिन कुछ लेनदेन पर इसमें छूट होगी।
ईपीएफओ ने वेतन की सीमा को बढ़ाकर 25,000 प्रति माह किया
केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की योजनाओं के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह कर दिया है।
इरडाई ने बीमा वितरण में सुधारों पर सुझाव आमंत्रित किए
इन प्रस्तावों का उद्देश्य कमीशन की सीमा तय करके, खर्च की सीमा कम करके, वितरक की श्रेणी को आसान बनाकर और गलत तरीके से बिक्री को रोकने के उपाय करके वितरण प्रोत्साहन में सुधार करना है।
कैबिनेट ने हरित ऊर्जा कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दी
135 GW अक्षय ऊर्जा को पहुंचाने के लिए बैटरी स्टोरेज के साथ एक इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम बनाया जाएगा। यह योजना 2032-33 तक चलेगी।
ई-कॉमर्स कंपनियों के दायित्वों को बढ़ाने के लिए नियमों में संशोधन
संशोधित नियमों के अनुसार, सर्च रिजल्ट्स या सर्च इंडेक्सेज़ में हेरफेर करके उपयोगकर्ताओं को गुमराह करना प्रतिबंधित है। ई-कॉमर्स कंपनियों को डार्क पैटर्न के विरुद्ध दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। उन्हें स्पांसर्ड लिस्टिंग्स को स्पष्ट रूप से पहचानना होगा।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित
11 सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणापत्र में उभरते बाज़ारों, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, और आर्थिक, तकनीकी व पर्यावरणीय सहयोग पर ब्रिक्स का रुख़ बताया गया है।
आईबीबीआई ने व्यक्तिगत गारंटर इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन के लिए सुरक्षा उपाय सुझाए
इन प्रस्तावों में अमान्य लेनदेन की जल्द पहचान करना, गारंटी देने वालों की संपत्ति का मूल्यांकन करना, संबंधित पक्षों की वोटिंग पर रोक लगाना और पुनर्भुगतान योजना के लिए लेनदारों के तर्क को रिकॉर्ड करना शामिल है।
संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों का पंजीकरण रेगुलेशन, 2026 के नियम अधिसूचित
इन रेगुलेशंस में अनिवार्य पंजीकरण, निरंतर पेशेवर विकास, केंद्रीय और राज्य रजिस्टर, मान्यता प्राप्त डिग्री और कोर्स, और विदेश से योग्यता प्राप्त पेशेवरों की योग्यताओं का प्रावधान है।
ड्राफ्ट पेट्रोलियम (संशोधन) बिल, 2026 पर टिप्पणियां आमंत्रित
इस ड्राफ्ट बिल में लाइसेंस की शर्तों और नियमों का उल्लंघन करने जैसे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। साथ ही, बिना लाइसेंस के काम करने जैसे अपराधों के लिए सज़ा भी बढ़ाई गई है।
मैक्रोइकोनॉमिक विकास
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
भारत ने 2026-27 की पहली तिमाही में जीडीपी का 0.5% चालू खाता घाटा दर्ज किया
भारत ने 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 4.2 अरब USD (जीडीपी का 0.5%) का चालू खाता घाटा दर्ज किया, जबकि 2025-26 की पहली तिमाही में यह घाटा 3.4 अरब USD (जीडीपी का का 0.4%) था।[1] 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 6.5 अरब USD का चालू खाता अधिशेष दर्ज किया गया था।
2026-27 की पहली तिमाही में पूंजी खाते में 5.5 अरब USD का शुद्ध बहिर्वाह दर्ज किया गया, जबकि 2025-26 की पहली तिमाही में 9.3 अरब USD का शुद्ध अंतर्वाह हुआ था। इसकी मुख्य वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का शुद्ध बहिर्वाह (2026-27 की पहली तिमाही में 9.6 अरब USD) था। 2025-26 की चौथी तिमाही में पूंजी खाते से शुद्ध बहिर्वाह 0.1 अरब USD था।
2026-27 की पहली तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 8.1 अरब USD की कमी आई, जबकि 2025-26 की पहली तिमाही में इसमें 4.5 अरब USD की बढ़ोतरी हुई थी। चौथी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 7.2 अरब USD की बढ़ोतरी हुई थी।
तालिका 1: भुगतान संतुलन (USD बिलियन)
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ति1 2025-26 |
ति4 2025-26 |
ति1 2026-27 |
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क. निर्यात |
112.7 |
113.1 |
132.0 |
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ख. आयात |
181.6 |
196.6 |
218.0 |
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ग. व्यापार संतुलन (क+ख) |
-68.9 |
-83.4 |
-86.1 |
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घ. शुद्ध सेवाएं |
47.9 |
60.4 |
51.6 |
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ङ अन्य हस्तांतरण |
17.6 |
29.5 |
30.2 |
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च. चालू खाता (ग+घ+ङ) |
-3.4 |
6.5 |
-4.2 |
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छ. पूंजी खाता |
9.3 |
-0.1 |
-5.5 |
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ज. भूल चूक लेनी देनी |
-1.4 |
0.9 |
1.6 |
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झ. मुद्रा भंडार में परिवर्तन (च+छ+ज) |
4.5 |
7.2 |
-8.1 |
स्रोत: भारतीय रिजर्व बैंक; पीआरएस।
वित्त
चुनींदा यूपीआई व्यापारी लेनदेन पर शुल्क लगेगा
Sumantra Sen (sumantra@prsindia.org)
भुगतान और निपटान प्रणाली एक्ट, 2007 में अगस्त 2026 में संशोधन किया गया था। यह संशोधन केंद्र सरकार को ऐसे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान तौर-तरीकों को अधिसूचित करने की अनुमति देता है, जिन पर बैंक या कोई भी सिस्टम प्रोवाइडर उपयोगकर्ताओं से किसी भी लेनदेन के लिए शुल्क नहीं ले सकते हैं।[2] इसके बाद केंद्र सरकार ने अधिसूचित किया है कि रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड लेनदेन और 2,000 रुपए तक के यूपीआई लेनदेन पर ऐसा कोई शुल्क नहीं लगेगा।[3]
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने यूपीआई लेनदेन के लिए लागू मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) और लेनदेन की सीमाओं को स्पष्ट कर दिया है।[4] इसके मुख्य विवरणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
एमडीआर शुल्क: 2,000 रुपए से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का एमडीआर शुल्क लगाया जाएगा। एनपीसीआई के अनुसार, लगभग 95% पी2एम यूपीआई लेनदेन इस सीमा से कम हैं। ये शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। 75,000 रुपए से अधिक के लेनदेन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपए निर्धारित की गई है।
कम मुनाफे वाले क्षेत्र: रेलवे, दूरसंचार सेवाओं, बीमा और ईंधन जैसे निर्दिष्ट क्षेत्रों में 2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन के लिए प्रति यूपीआई लेनदेन पांच रुपए का फ्लैट शुल्क लिया जाएगा। इसमें बीमा प्रीमियम के भुगतान के साथ-साथ बिजली और पानी जैसे सरकारी उपयोगिता बिल के भुगतानों का संग्रह भी शामिल है।
पूंजी बाजार लेनदेन: म्यूचुअल फंड भुगतान, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकर और डीलरों सहित पूंजी बाजार के लेनदेन के लिए एमडीआर, लेनदेन मूल्य का 0.02% तय किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए निर्धारित की गई है।
स्थायी निर्देश: स्वचालित आवर्ती स्थायी निर्देशों पर शून्य (0%) एमडीआर लागू रहेगा।
छूट: ग्रामीण और अर्ध-शहरी स्थानों में पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट्स (पी2पीएम) द्वारा स्वीकार किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होगा। इसके अलावा, छोटे व्यापारियों (यूपीआई क्यूआर के माध्यम से प्रति माह एक लाख रुपए तक प्राप्त करने वाले व्यापारियों) के लिए शून्य एमडीआर जारी रहेगा।
समर्पित कोष: पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित टियर 3-6 केंद्रों और टियर 1-2 केंद्रों में डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसिडी देने और उसे गति देने के लिए एक कोष स्थापित किया जाएगा। इस कोष का उपयोग व्यापारियों को जोड़ने और छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई लेनदेन के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाएगा।
इरडाई ने बीमा वितरण में सुधारों पर सुझाव आमंत्रित किए
Sumantra Sen (sumantra@prsindia.org)
भारतीय बीमा रेगुलेटरी और विकास प्राधिकरण (इरडाई) ने बीमा वितरण के अर्थशास्त्र का पुनर्गठन पर एक परामर्श पत्र जारी किया है।[5] इरडाई द्वारा रेखांकित बीमा वितरण की मुख्य चुनौतियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बीमाकर्ताओं, वितरकों और उपभोक्ताओं के बीच सूचना की विषमता, (ii) बीमाकर्ताओं, वितरण प्रणाली और अंतिम ग्राहकों के बीच प्रोत्साहनों का बेमेल होना, (iii) उपभोक्ताओं की कमजोर स्थिति, (iv) बड़े वितरकों का बाजार पर दबदबा और सीमित प्रतिस्पर्धा, और (v) उद्योग की वृद्धि दर का जीडीपी की वृद्धि दर से अधिक न होना। उसने कहा कि इस क्षेत्र के प्रोत्साहन जनता के लिए मूल्य पैदा करने के बजाय व्यावसायिक विकास के अनुकूल तय हैं, और बिक्री मूल्य निर्धारण एवं गुणवत्ता के बजाय कमीशन आधारित है। उसने आगे कहा कि 2022-23 और 2024-25 के बीच वितरकों का पारिश्रमिक प्रीमियम की तुलना में चार से पांच गुना तेजी से बढ़ा है। मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
कमीशन पर अधिकतम सीमा: प्राधिकरण ने पाया कि वर्ष 2023 में सीमाएं हटाए जाने के बाद जीवन और सामान्य बीमा दोनों व्यवसायों में कमीशन में काफी वृद्धि हुई है। इसलिए उसने अधिकतम कमीशन सीमाएं दोबारा लागू करने का प्रस्ताव दिया है। ये सीमाएं कई बातों के आधार पर अलग-अलग होंगी, जैसे कि बीमा का प्रकार, लेनदेन का स्वरूप (क्या यह पहली बार है, नवीनीकरण है, या कंपनी बदलना है), और क्या कोई वितरक केवल एक बीमा कंपनी के लिए बेचता है या कई कंपनियों के लिए। जो उत्पाद जटिल हैं और जिन्हें बेचना कठिन है, उनके लिए उच्च कमीशन सीमाएं हो सकती हैं। पिछड़े या कम सेवा वाले क्षेत्रों में उत्पादों की बिक्री के लिए तय कमीशन सीमाओं के अलावा अतिरिक्त पुरस्कार भी दिए जा सकते हैं।
प्रबंधन के खर्च: प्राधिकरण ने पांच साल की एक क्रमिक योजना के तहत बीमा कंपनियों के लिए प्रबंधन खर्च की सीमाओं को कम करने का प्रस्ताव दिया है। इसका कारण यह बताया गया कि वर्तमान सीमाएं कंपनियों को जो ढील देती हैं, उसका उपयोग वितरकों को अधिक भुगतान करने के लिए किया जा रहा है।
रेगुलेटरी अंतर का खात्मा: प्राधिकरण ने पाया कि वर्तमान में, एक जैसा काम करने वाली संस्थाएं अलग-अलग नियमों और दायित्वों से संचालित होती हैं, जिससे नियमों के अंतर का फायदा उठाने की गुंजाइश बनती है। उसने संस्था स्तर के आठ और व्यक्तिगत स्तर के नौ वितरक प्रकारों को मिलाकर केवल तीन श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव दिया है: (i) वितरण संस्थाएं, (ii) वितरण व्यक्ति, और (iii) मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस। इसमें प्रवेश और पूंजी की शर्तों को आसान बनाया जाएगा।
अनिवार्य बंडलिंग पर रोक: प्राधिकरण ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा बीमा उत्पादों को किसी अन्य सेवा या उत्पाद के साथ अनिवार्य रूप से जोड़कर बेचने पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है।
गलत तरीके से बिक्री: गलत तरीके से बीमा बेचने की घटनाओं की जानकारी संबंधित व्यक्ति के प्रदर्शन के हिस्से के रूप में सार्वजनिक की जानी चाहिए। गलत तरीके से की गई बिक्री के मामलों में बीमा कंपनियों को दिया गया कमीशन वापस ले लेना चाहिए।
सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री: प्राधिकरण ने एक सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री का भी प्रस्ताव दिया है जो एक साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में काम करेगी और इसमें सत्यापित जानकारी होगी। इससे बाजार के प्रतिभागियों और आम जनता को बीमा से जुड़ी जानकारी खोजने, जांचने और साझा करने में मदद मिलेगी।
टिप्पणियां 25 अक्टूबर, 2026 तक आमंत्रित हैं।
आईबीबीआई ने व्यक्तिगत गारंटर इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन के लिए सुरक्षा उपाय सुझाए
Sumantra Sen (sumantra@prsindia.org)
भारतीय इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी बोर्ड (आईबीबीआई) ने टिप्पणियों के लिए कॉरपोरेट देनदारों के व्यक्तिगत गारंटरों की इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया पर एक परामर्श पत्र जारी किया है।[6] यह भारतीय इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी बोर्ड (कॉरपोरेट देनदारों के व्यक्तिगत गारंटरों की इनसॉल्वेंसी रेज़ॉल्यूशन प्रक्रिया) रेगुलेशन, 2019 में संशोधनों का प्रस्ताव करता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य व्यक्तिगत गारंटरों के मामले में सुरक्षा उपायों को कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ॉल्यूशन प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत क्रेडिटर्स (लेनदारों) को मिलने वाली सुरक्षा के बराबर लाना है। मुख्य प्रस्तावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
व्यक्तिगत गारंटर से संबंधित पक्ष: अभी व्यक्तिगत गारंटर की इनसॉल्वेंसी रेज़ॉल्यूशन प्रक्रिया के तहत सिर्फ़ गारंटर के एसोसिएट्स को वोट देने से रोका गया है। यह श्रेणी संबंधित पक्ष से छोटी है; सीआईआरपी में संबंधित पक्ष को वोट देने से रोका जाता है। संशोधन में यह प्रस्ताव है कि क्रेडिटर्स की लिस्ट में यह बताया जाना चाहिए कि क्या कोई क्रेडिटर, गारंटर का संबंधित पक्ष है। इसके अलावा, गारंटर के संबंधित पक्ष का क्रेडिटर्स की मीटिंग में वोटिंग शेयर शून्य होगा। इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 के अनुसार, किसी व्यक्ति के संबंधित पक्ष में उसके रिश्तेदार, जीवनसाथी के रिश्तेदार और उस व्यक्ति के मालिकाना हक या नियंत्रण वाली कंपनियां शामिल होती हैं।
अमान्य लेनदेन की पहचान और रिपोर्टिंग: वर्तमान में बैंकरप्सी आदेश के बाद बैंकरप्सी ट्रस्टी अमान्य लेनदेन को चुनौती दे सकता है। अमान्य लेनदेन से तात्पर्य ऐसे लेनदेन से है जो परिसंपत्तियों का कम मूल्यांकन करते हैं, किसी लेनदार को प्राथमिकता देते हैं, अनुचित ऋण लेते हैं, या लेनदारों को धोखा देते हैं। सीआईआरपी में रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) को रेज़ोल्यूशन योजना के साथ क्रेडिटर्स कमिटी के सामने ऐसे लेनदेन का विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है। यह प्रस्तावित है कि आरपी यह जांच करे कि क्या गारंटर किसी अमान्य लेनदेन में शामिल रहा है, निष्कर्षों को क्रेडिटर्स की बैठक के सामने रखे, और बैंकरप्सी ट्रस्टी द्वारा (क्रेडिटर्स की स्वीकृति से) की जा सकने वाली कार्रवाई करे।
रेज़ॉल्यूशन प्रक्रिया में व्यक्तिगत गारंटर की संपत्ति का मूल्यांकन: आईआरपी नियमों में रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया के दौरान व्यक्तिगत गारंटर की संपत्ति के मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि सीआईआरपी, लिक्विडेशन और गारंटर की बैंकरप्सी प्रक्रिया में मूल्यांकन का प्रावधान है। यह प्रस्ताव है कि आरपी को गारंटर की संपत्ति का उचित और वसूली योग्य मूल्य तय करने के लिए एक रजिस्टर्ड वैल्यूअर नियुक्त करना चाहिए, और पुनर्भुगतान योजना के साथ मूल्यांकन रिपोर्ट क्रेडिटर्स के सामने रखनी चाहिए।
पुनर्भुगतान योजना पर क्रेडिटर्स की बातचीत को रिकॉर्ड करना: यह प्रस्ताव है कि आरपी क्रेडिटर्स की बातचीत और उनके फ़ैसले के कारणों को रिकॉर्ड करे, न कि मौजूदा प्रक्रिया की तरह सिर्फ़ उनके वोट को रिकॉर्ड करे। जहां प्रस्तावित भुगतान, मंज़ूर किए गए दावे या गारंटर की वसूली योग्य संपत्ति के मूल्य से काफ़ी कम हों, वहां क्रेडिटर्स को अपने कमर्शियल आधार को खास तौर पर रिकॉर्ड करना होगा।
प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां 3 अक्टूबर, 2026 तक दी जानी हैं।
आरबीआई ने बैंक खातों के संचालन और मनी म्यूल्स के बारे में सुझाव मांगे
Sumantra Sen (sumantra@prsindia.org)
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने केवाईसी निर्देश, 2025 में निर्दिष्ट बैंक खातों के संचालन और 'मनी म्यूल' से जुड़े मौजूदा निर्देशों में संशोधन के प्रस्तावों पर सार्वजनिक राय मांगी है।[7] अगस्त 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद इन निर्देशों की समीक्षा की गई, जिसमें आरबीआई को 'मनी म्यूल' गतिविधि और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े खातों पर अस्थायी रूप से डेबिट रोकने के लिए एसओपी जारी करने का निर्देश दिया गया था।[8] प्रस्तावित मुख्य बदलावों में निम्न शामिल हैं:
अस्थायी डेबिट होल्ड: बैंकों को संदिग्ध 'मनी म्यूल' लेनदेन पर, या अगर पूरा खाता ही संदिग्ध 'मनी म्यूल' खाता है तो उस पूरे खाते पर अस्थायी डेबिट होल्ड लगाना होगा। बैंकों को खाता धारक को ऐसे होल्ड के बारे में तुरंत जानकारी देनी होगी। बैंक खाता धारक से लेनदेन या खाते की असलियत के बारे में स्पष्टीकरण मांगेंगे। खाता धारक के पास जानकारी देने के लिए 20 दिन का समय होगा।
होल्ड पर फैसला: बैंक स्पष्टीकरण की जांच करेंगे और अगर कोई स्पष्टीकरण नहीं मिलता, तो ज़रूरी जांच-पड़ताल (ड्यू-डिलिजेंस) करेंगे। बैंक को स्पष्टीकरण मिलने के 10 दिनों के भीतर, या स्पष्टीकरण न मिलने की स्थिति में अस्थायी डेबिट होल्ड के 30 दिनों के भीतर फ़ैसला लेना होगा। इस फ़ैसले के आधार पर या तो डेबिट होल्ड हटा दिया जाएगा या फिर धोखाधड़ी का शक होने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों को सूचित किया जाएगा। अगर संबंधित पुलिस अधिकारी कोई निर्देश नहीं देते हैं, तो बैंक डेबिट होल्ड हटा देगा और खाता धारक को सूचित करेगा।
आंतरिक नीति: बैंकों को इस प्रक्रिया का पालन करने के लिए एक आंतरिक नीति बनानी होगी। इसमें निम्न शामिल होने चाहिए: (i) संदिग्ध 'म्यूल मनी' लेनदेन की पहचान करने वाले टेक सॉल्यूशन, (ii) रकम या खाता स्तर पर अस्थायी डेबिट होल्ड लगाने के नियम और उन्हें हटाने की स्थितियां, (iii) खाता धारक के साथ बातचीत के तरीके और टेम्प्लेट, (iv) 'सिटिज़न फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' पोर्टल से जोड़ने की प्रक्रिया, और (v) ग्राहकों की शिकायतों के समाधान की प्रणाली।
टिप्पणियां 2 अक्टूबर, 2026 तक आमंत्रित हैं।
आरबीआई की सलाहकार समिति ने राज्यों के लिए वे एंड मीन्स एडवांसेज़ पर रिपोर्ट सौंपी
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
राज्य सरकारों के लिए वेज़ एंड मीन्स एडवांसेज पर आरबीआई द्वारा गठित सलाहकार समिति (चेयर: श्री आई. एस. एन. प्रसाद) ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है।[9] आरबीआई नकद प्रवाह के अस्थायी बेमेल को दूर करने के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इन व्यवस्थाओं में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) पात्र निवेशों के बदले स्पेशल ड्रॉइंग फैसिलिटी, (ii) वेज़ एंड मीन्स एडवांसेज, और (iii) ओवरड्राफ्ट। इससे जुड़ी सीमाओं को एक सलाहकार समिति के सुझावों के आधार पर समय-समय पर संशोधित किया गया है। इन सीमाओं को पिछली बार जुलाई 2024 में संशोधित किया गया था। वर्ष 2025-26 में 19 राज्यों ने स्पेशल ड्रॉइंग फैसिलिटी के माध्यम से, 11 राज्यों ने वेज़ एंड मीन्स एडवांसेज के माध्यम से और 10 राज्यों ने ओवरड्राफ्ट के माध्यम से सहायता ली थी। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
डब्ल्यूएमए सीमा में वृद्धि: समिति ने वेज़ एंड मीन्स एडवांसेज की सीमाओं के वार्षिक संशोधन की व्यवस्था पर लौटने का सुझाव दिया है। ये सीमाएं कुछ समायोजनों के बाद किसी राज्य की राजस्व प्राप्तियों पर आधारित हो सकती हैं। वार्षिक संशोधन की अधिकतम सीमा 4% तय की जा सकती है। समिति ने राज्यों के लिए कुल वेज़ एंड मीन्स एडवांसेज सीमा को 61, 008 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 67,839 करोड़ रुपए करने का सुझाव दिया है जो कि 11.2% की वृद्धि है।
एसडीएफ सीमा में वृद्धि: आकस्मिक देनदारियों से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को कम करने के लिए आरबीआई राज्य सरकारों की ओर से कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड और गारंटी रिडेम्पशन फंड का प्रबंधन करता है। राज्य इन कोषों में अपनी इच्छा से योगदान करते हैं। राज्यों को इन फंड्स और ट्रेजरी बिलों में उनके पात्र निवेश के बदले स्पेशल ड्रॉइंग फैसिलिटी दी जाती है। समिति ने पात्र कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड निवेशों के बदले स्पेशल ड्रॉइंग फैसिलिटी की सीमा को 50% से बढ़ाकर 75% करने का सुझाव दिया है। समिति ने पाया कि इससे राज्यों को इन फंड्स में अपनी इच्छा से योगदान करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
ओडी फेसिलिटी: जब कोई राज्य अपनी एसडीएफ और डब्ल्यूएमए की सीमा को पार कर जाता है, तो वह आरबीआई से ओवरड्राफ्ट की सुविधा ले सकता है। समिति ने निम्नलिखित अवधियों को घटाने का सुझाव दिया है: (i) कोई राज्य लगातार जितने कार्य दिवसों तक ओवरड्राफ्ट में रह सकता है, उसे 14 दिनों से घटाकर 10 दिन करना, और (ii) एक कैलेंडर तिमाही में कोई राज्य अधिकतम जितने कार्य दिवसों तक ओवरड्राफ्ट में रह सकता है, उसे 36 दिनों से घटाकर 30 दिन करना।
बाजार से ऋण: समिति ने पाया कि कुछ राज्य एक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में बाजार से बहुत बड़ा कर्ज लेते हैं। इससे चौथी तिमाही के दौरान सभी राज्यों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, इसके कारण वर्ष के अंत में राज्यों के पास बिना उपयोग की नकदी जमा हो सकती है। समिति ने सुझाव दिया कि राज्यों को पूरे वर्ष के दौरान बाजार से लिए जाने वाले ऋण को समान रूप से बांटना चाहिए।
श्रम और रोजगार
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
ईपीएफओ ने वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह किया
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन की अधिकतम सीमा को 15,000 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह कर दिया है, जो कि 17 सितंबर 2026 से प्रभावी है।[10] यह वेतन सीमा यह तय करती है कि नौकरी से जुड़ने के समय किन कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से ईपीएफओ योजनाओं के तहत शामिल किया जाना चाहिए। ये योजनाएं भविष्य निधि (प्रोविडेंट फंड), पेंशन और बीमा का लाभ प्रदान करती हैं।
ऊर्जा
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
कैबिनेट ने हरित ऊर्जा कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरित ऊर्जा कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दे दी है।[11] इस योजना के तहत, केंद्र सरकार अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं से बिजली की निकासी के लिए ट्रांसमिशन लाइनें बिछाने में सहायता प्रदान करती है। हरित ऊर्जा कॉरिडोर चरण-III का उद्देश्य बैटरी स्टोरेज के साथ एक इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम स्थापित करना है ताकि वर्ष 2032-33 तक 135 GW अक्षय ऊर्जा की निकासी की जा सके। इसके तहत 50 GWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स इंस्टॉल किए जाएंगे। सभी नई (ग्रीनफील्ड) परियोजनाओं का क्रियान्वयन शुल्क-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से होगा। ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेन्टेन मॉडल पर भाग लेंगे। मौजूदा परियोजनाओं के आधुनिकीकरण (ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन) और नेटवर्क को मजबूत करने के कार्य लागत-प्लस (कॉस्ट-प्लस) के आधार पर निष्पादित किए जाएंगे। राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटीज़ इसकी क्रियान्वयन एजेंसियां होंगी। इस योजना के तहत कुल अनुमानित परिव्यय 1,86,405 करोड़ रुपए है, जिसमें 54,082 करोड़ रुपए की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है।
ड्राफ्ट पेट्रोलियम (संशोधन) बिल, 2026 पर टिप्पणियां आमंत्रित
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोलियम (संशोधन) बिल, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।[12] यह ड्राफ्ट बिल पेट्रोलियम एक्ट, 1934 में संशोधन का प्रयास करता है।[13] यह एक्ट भारत में पेट्रोलियम के आयात, परिवहन, स्टोरेज और उत्पादन को रेगुलेट करता है। इस ड्राफ्ट बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
अपराध विशिष्ट दंड: एक्ट में बिना लाइसेंस के काम करने से लेकर निरीक्षण अधिकारियों के साथ सहयोग करने से इनकार करने तक के अपराधों के लिए एक सामान्य दंड का प्रावधान है। ड्राफ्ट बिल विभिन्न अपराधों के लिए विशिष्ट दंड प्रदान करता है और साथ ही दंड की राशि को भी बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, एक्ट के तहत, बिना लाइसेंस के काम करने जैसे अपराधों के लिए पहली बार के अपराध के लिए 1 महीने तक की कैद या 1,000 रुपए का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसके विपरीत, ड्राफ्ट बिल में 3 साल तक की कैद या 25 करोड़ रुपए तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान किया गया है।
अपराधों को अपराधमुक्त करना: ड्राफ्ट बिल एक्ट में शामिल कुछ अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है। ये हैं: (i) लाइसेंस के नियमों और शर्तों का उल्लंघन, और (ii) एक्ट के उद्देश्यों के लिए किसी भी दस्तावेज़ में गलत बयान देना या महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाना। ड्राफ्ट बिल इन दोनों उल्लंघनों के लिए दीवानी दंड (सिविल पैनेल्टी) का प्रस्ताव करता है। पहले अपराध के लिए जुर्माना 2.5 करोड़ रुपए तक और बाद के अपराधों के लिए 5 करोड़ रुपए तक होगा। इसके अलावा, लाइसेंस को निलंबित, रद्द किया जा सकता है या उनकी वैधता अवधि को कम किया जा सकता है। अगर जुर्माना लगाया जाता है और उसका भुगतान नहीं किया जाता है, तो उसे भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूला जाएगा।
महत्वपूर्ण पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विशेष संरचना: ड्राफ्ट बिल केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों, रिफाइनरियों या पाइपलाइनों को 'महत्वपूर्ण पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर' घोषित करने के लिए अधिकृत करता है। ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर को किसी भी तरह की भौतिक क्षति पहुंचाने पर 10 साल तक की कैद और 25 करोड़ रुपए तक का जुर्माना या नुकसान की वास्तविक लागत, जो भी कम हो, का प्रावधान होगा।
अदालतों द्वारा जब्ती का दायरा: एक्ट दोषसिद्धि के समय पेट्रोलियम और उसके पात्रों (पेट्रोलियम रखने वाले कंटेनर) को जब्त करने का प्रावधान करता है। ड्राफ्ट बिल जब्ती के दायरे को बढ़ाने का प्रस्ताव करता है ताकि अपराध करने के लिए बनाई गई या इस्तेमाल की गई किसी भी सुविधा, उपकरण या सामग्री को इसमें शामिल किया जा सके।
30 अक्टूबर, 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।
उपभोक्ता मामले
Vedika Bhanote (vedika@prsindia.org)
मार्केटप्लेस और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के दायित्वों को बढ़ाने के लिए ई-कॉमर्स नियमों में संशोधन
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में संशोधनों को अधिसूचित किया।[14] है। इन 2020 के नियमों को उपभोक्ता संरक्षण एक्ट, 2019 के तहत अधिसूचित किया गया है।[15],[16] 2020 के नियम ई-कॉमर्स कंपनियों और ऐसी कंपनियों के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करने वाले विक्रेताओं के कर्तव्यों और देनदारियों का प्रावधान करते हैं। ये संशोधन 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
ई-कॉमर्स कंपनियों के दायित्व: ये संशोधन ई-कॉमर्स कंपनियों के दायित्वों का विस्तार करते हैं। उन्हें सर्च रिजल्ट्स या सर्च इंडेक्सेज़ में हेरफेर करके उपयोगकर्ताओं को गुमराह करने से प्रतिबंधित किया गया है। स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग्स की पहचान स्पष्ट और प्रमुख खुलासे के साथ अलग से की जानी चाहिए। कीमत में कटौती के मामलों में, घटी हुई कीमत के साथ पहले वाली कीमत का उल्लेख भी किया जाना चाहिए। उन्हें 2023 के डार्क पैटर्न की रोकथाम और रेगुलेशन संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।[17] 2023 के ये दिशानिर्देश उपयोगकर्ताओं को गुमराह करने के लिए बनाए गए भ्रामक तौर-तरीकों या पैटर्न्स का उपयोग करने पर रोक लगाते हैं। उदाहरण के लिए, किसी भी प्लेटफॉर्म को किसी उत्पाद की झूठी कमी नहीं दिखानी चाहिए जिससे उपयोगकर्ता खरीदारी करने के लिए मजबूर हों। यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्लेटफॉर्म डार्क पैटर्न से मुक्त है, वार्षिक सेल्फ ऑडिट किया जाना चाहिए।
मार्केटप्लेस द्वारा जानकारी का उपयोग: मार्केटप्लेस अपने द्वारा एकत्र की गई जानकारी का उपयोग इन कार्यों के लिए नहीं कर सकते हैं: (i) किसी ऐसे विक्रेता द्वारा वस्तुओं की बिक्री के लिए जिसका ब्रांड या नाम मार्केटप्लेस के समान हो, चाहे वे आपस में जुड़े हों या नहीं, या (ii) उपभोक्ता की सहमति के बिना किसी विक्रेता का इस रूप में प्रचार या विज्ञापन करना कि वह मार्केटप्लेस से जुड़ा हुआ है। मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म से असंबंधित सेवाओं के लिए संयुक्त शुल्क (बंडल फीस) नहीं ले सकते हैं, सिवाय लॉयल्टी या मेंबरशिप प्रोग्राम्स कार्यक्रमों के अंतर्गत।
विदेशी मामले
Navya Sriram (navya@prsindia.org)
18वां ब्रिक्स सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।[18], [19] इसमें 23 देशों के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया गया। इस घोषणापत्र में निम्नलिखित विषयों पर समझौते शामिल थे: (i) अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में उभरते बाजारों और विकासशील देशों की अधिक भागीदारी, (ii) गाजा पट्टी में संघर्ष-विराम और निर्बाध मानवीय सहायता पहुंचाने की मांग, तथा फिलिस्तीन के लिए एक अलग राज्य का समर्थन, (iii) बड़े पैमाने पर फैलने वाली संक्रामक बीमारियों के लिए एकीकृत पूर्व-चेतावनी प्रणाली, (iv) एआई, साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग, और (v) किसानों पर केंद्रित एक ऐसा नेटवर्क बनाना जो कृषि-इनपुट, आनुवंशिक संसाधनों और जानकारी के आदान-प्रदान में मदद करे, लेकिन यह नेटवर्क बाध्यकारी नहीं होगा।
सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री ने कई देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की।[20], [21], [22], [23], [24], [25], [26], [27], [28], [29], [30],[31],[32] इनमें चीन, रूस, ईरान, मलयेशिया, दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया शामिल हैं।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री का भारत दौरा
बेल्जियम के प्रधानमंत्री श्री बार्ट डी वेवर ने द्विपक्षीय बातचीत के लिए भारत का दौरा किया।[33], [34] दोनों देश इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए: (i) रक्षा, (ii) अक्षय ऊर्जा, (iii) सीमा-पार संगठित अपराध और साइबर अपराध से निपटना, और (iv) कूटनीतिक प्रशिक्षण। दोनों देशों ने इनसे संबंधित घोषणा भी की: (i) निवेश के लिए एक फास्ट ट्रैक व्यवस्था, (ii) अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य, (iii) भारत-बेल्जियम बिज़नेस फ़ोरम को संस्थागत बनाना, और (iv) कांसुलर बातचीत शुरू करना।
कृषि
Sumantra Sen (sumantra@prsindia.org)
कैबिनेट ने 2027-28 के लिए रबी फसलों की एमएसपी में वृद्धि को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विपणन सत्र 2027-28 के लिए छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंज़ूरी दी है।[35] एमएसपी का मतलब उस तय कीमत से है जिस पर केंद्र सरकार किसानों से फसलें खरीदती है। गेहूं की एमएसपी में 2026-27 की कीमतों के मुकाबले 1% की बढ़ोतरी की गई है। कुसुम की एमएसपी में सबसे ज़्यादा (10%) बढ़ोतरी हुई, इसके बाद रेपसीड और सरसों (7%) का नंबर आता है।
तालिका 2: 2027-28 के विपणन सत्र के लिए रबी फसलों की एमएसपी (रुपए प्रति क्विंटल)
|
फसल |
2026-27 |
2027-28 |
परिवर्तन |
|
गेहूं |
2,585 |
2,610 |
1% |
|
जौ |
2,150 |
2,286 |
6% |
|
चना |
5,875 |
5,958 |
1% |
|
दाल |
7,000 |
7,390 |
6% |
|
रेपसीड और सरसों |
6,200 |
6,613 |
7% |
|
कुसुम |
6,540 |
7,215 |
10% |
स्रोत: आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी; पीआरएस।
रक्षा
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 1.1 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने रक्षा बलों के कई खरीद प्रस्तावों को सैद्धांतिक प्रशासनिक मंज़ूरी दी है।[36] खरीद की कुल अनुमानित लागत लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपए है। मंज़ूर किए गए प्रस्तावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भारतीय थलसेना के लिए केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (सीबीआरएन) रीस वाहन, (ii) भारतीय नौसेना के लिए अरुध्रा रडार और मरीन गैस टर्बाइन, और (iii) भारतीय वायु सेना के लिए ज़मीन पर आधारित मल्टी-पर्पस जैमर। सीबीआरएन रीस वाहन ऐसे वाहन होते हैं जो सीबीआरएन (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर) एजेंटों से दूषित इलाकों का पता लगाने और उनकी निगरानी करने में सक्षम होते हैं। मंजूर की गई खरीद में से 98% की आपूर्ति भारतीय उद्योगों द्वारा की जाएगी।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण
Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)
संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े 2026 के नियम अधिसूचित
नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (एनसीएएचपी) ने एनसीएएचपी एक्ट, 2021 के तहत संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर पंजीकरण रेगुलेशन, 2026 को अधिसूचित किया है।[37], [38] यह कानून संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की शिक्षा और सेवाओं के मानकों को रेगुलेट करता है। इसकी मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
पंजीकरण: कोई भी व्यक्ति राज्य रजिस्टर में शामिल होने के लिए तब पात्र होगा, अगर वह: (i) किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से योग्यता प्राप्त कर चुका हो, (ii) एग्जिट एग्जाम पास कर चुका हो, और (iii) उस राज्य का निवासी हो। इसके लिए राज्य परिषद को आवेदन करना होगा। परिषद पंजीकरण का प्रमाणपत्र प्रदान करेगी और एक विशिष्ट पहचान संख्या जारी करेगी। यह पंजीकरण 5 वर्षों के लिए वैध होगा।
नवीनीकरण: पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए पात्र होने के लिए, एक पेशेवर को सालाना कम से कम 15 घंटे और 5 वर्षों में 75 घंटे का सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) पूरा करना होगा। सतत व्यावसायिक विकास में सम्मेलनों, कार्यशालाओं, सेमिनारों, प्रशिक्षण और संकाय विकास कार्यक्रमों में भाग लेना शामिल हो सकता है। सतत व्यावसायिक विकास का 50% से अधिक हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा नहीं किया जा सकता है। नवीनीकरण के लिए आवेदन वैधता समाप्त होने से 6 महीने पहले किया जाना चाहिए।
पंजीकरण से इनकार: राज्य परिषद एक तर्कसंगत आदेश के माध्यम से पंजीकरण से इनकार कर सकती है। इस इनकार के खिलाफ 1 महीने के भीतर एनसीएएचपी के समक्ष अपील दायर की जा सकती है। आयोग इस अपील पर 90 कार्य दिवसों के भीतर निर्णय लेगा।
अस्थायी पंजीकरण: एक विद्यार्थी को इंटर्नशिप या प्रशिक्षण शुरू करने से पहले राज्य परिषद से अंतरिम पंजीकरण प्राप्त करना होगा। अस्थायी पंजीकरण निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए दिया जा सकता है: (i) पोस्टग्रेजुएट अध्ययन, (ii) फेलोशिप कार्यक्रम, और (iii) क्लिनिकल रिसर्च।
विदेश से योग्य पेशेवर: भारत के बाहर से योग्यता प्राप्त करने वाला एक भारतीय नागरिक पंजीकरण के लिए तब पात्र होगा, अगर उस व्यक्ति ने: (i) आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त विदेशी योग्यता हासिल की हो या समकक्ष क्रेडेंशियल मूल्यांकन पूरा किया हो, और (ii) एग्जिट एग्जाम पास किया हो।
खाद्य सुरक्षा और मानक नियमों में संशोधन अधिसूचित
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा और मानक (प्रयोगशाला और नमूना विश्लेषण) संशोधन रेगुलेशंस, 2026 को अधिसूचित किया है।[39] ये रेगुलेशन, खाद्य सुरक्षा और मानक (प्रयोगशाला और नमूना विश्लेषण) रेगुलेशंस, 2011 में संशोधन करते हैं।[40],[41] एफएसएसएआई पूरे भारत में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को रेगुलेट और उनकी निगरानी करते हैं। 2011 के रेगुलेशंस में कुछ प्रयोगशालाओं की भूमिकाओं, नमूनों की मात्रा और विश्लेषण रिपोर्ट के प्रारूपों को निर्दिष्ट किया गया है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
विश्लेषण का तरीका: संशोधन यह भी जोड़ते हैं कि प्रयोगशालाओं को विश्लेषण की विधि के लिए एफएसएसएआई मैनुअल का उपयोग करना चाहिए। जहां किसी विशिष्ट पैरामीटर के लिए विधि उपलब्ध नहीं है, वे मान्यता प्राप्त एजेंसियों द्वारा निर्धारित विधियों का उपयोग कर सकते हैं। इनमें आईएसओ, बीआईएस, और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रेगुलेटरी निकाय शामिल हैं।
समय सीमा: संशोधन नमूनों के विश्लेषण के लिए समय सीमा जोड़ते हैं। एक खाद्य विश्लेषक को रेगुलेटरी नमूने की प्राप्ति के 14 दिनों के भीतर उस पर हस्ताक्षरित रिपोर्ट जारी करनी होगी। रेगुलेटरी नमूना विश्लेषण के लिए एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा भेजा जाता है। खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट से असंतुष्ट कोई भी खाद्य व्यवसाय संचालक नामित अधिकारी के पास अपील कर सकता है। इसके बाद नामित अधिकारी आगे की जांच के लिए नमूने को एक रेफरल प्रयोगशाला में भेज सकता है। प्रयोगशाला को नमूना प्राप्त होने के 14 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट जारी करनी होगी। इसके अलावा भारत में आयात किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के नमूने परीक्षण के लिए एफएसएसएआई द्वारा अधिसूचित प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं। ऐसी प्रयोगशाला को नमूना प्राप्त होने के पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट जारी करनी होगी। देरी के मामलों में संशोधनों के तहत खाद्य विश्लेषक या प्रयोगशाला के लिए निर्दिष्ट अधिकारियों को इसका कारण बताना अनिवार्य है।
पर्यावरण
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
पराली जलाने पर पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाने से संबंधित ड्राफ्ट नियम जनता की प्रतिक्रिया के लिए जारी
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में पराली जलाने पर पर्यावरणीय मुआवजे से संबंधित ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं।[42] यह ड्राफ्ट नियम इसी विषय पर बने 2023 के नियमों को बदलने का प्रयास करते हैं।[43] ड्राफ्ट नियमों में 2023 के नियमों के अधिकांश प्रावधानों को बरकरार रखा गया है। प्रस्तावित मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
मुआवजे का उपयोग: ड्राफ्ट नियमों में यह जोड़ा गया है कि पर्यावरणीय मुआवजे का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जा सकता है: (i) फसल अवशेष प्रबंधन प्रौद्योगिकियों को सबसिडी देने के लिए, (ii) फसल विविधीकरण कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने के लिए, (iii) बायोमास उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए, (iv) फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में आरएंडडी के लिए, (v) टिकाऊ कृषि पद्धतियों के लिए प्रशिक्षण देने हेतु, और (vi) ऐसे अन्य उपायों के लिए जो आवश्यक हो सकते हैं।
भूमि रिकॉर्ड पर मार्किंग: 2023 के नियमों में यह प्रावधान है कि जिस भूमि पर पराली जलाने की घटना पाई जाएगी, उसे राज्य सरकार के एक अधिकारी द्वारा भूमि रिकॉर्ड में मार्क किया जाएगा। ड्राफ्ट नियमों में इन प्रावधानों को बरकरार रखा गया है और यह जोड़ा गया है कि यह अंकन भूमि रिकॉर्ड में 15 महीनों तक बरकरार रहेगा। अगर उसी भूमि पर दोबारा पराली जलाने की घटना पाई जाती है या आवश्यक मुआवजा जमा नहीं किया जाता है, तो भूमि को अगले 15 महीनों के लिए और मार्क किया जा सकता है।
टिप्पणियां 7 नवंबर, 2026 तक आमंत्रित हैं।
ग्रामीण विकास
Sneha Bharti (sneha@prsindia.org)
डीआईएलआरएमपी 3.0 के लिए दिशानिर्देश जारी
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) 3.0 के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं।[44],[45] डीआईएलआरएमपी का उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण और उनका एकीकरण करना है। इसे 2016 में एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में शुरू किया गया था, और इसने पहले 2008 में शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना का स्थान लिया था। डीआईएलआरएमपी 3.0 एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में जारी रहेगा, और यह 2026-27 से 2030-31 तक संचालित होगा। पांच वर्षों में इसके लिए स्वीकृत वित्तीय परिव्यय 566 करोड़ रुपए है। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
सार्वभौमिक भू-आधार: भूमि के हर टुकड़े को 14-अंकीय एक विशिष्ट पहचान संख्या आवंटित की जाएगी।
मानचित्रों का डिजिटलीकरण और जियोरेफरेंसिंग: कैडस्ट्रल मानचित्रों को पूरी तरह से डिजिटल किया जाएगा और उन्हें सटीक भौगोलिक निर्देशांकों से जोड़ा जाएगा।
संपत्ति पंजीकरण: संपत्ति के पंजीकरण को पूरी तरह से ऑनलाइन बनाया जाएगा।
राजस्व न्यायालय: विवादों को ट्रैक करने के लिए भूमि रिकॉर्ड के साथ एक एंड-टू-एंड ऑनलाइन और पेपरलेस केस मैनेजमेंट सिस्टम को एकीकृत किया जाएगा।
कार्यान्वयन ढांचा: राज्य सरकार इस कार्यक्रम को लागू करेगी। राज्य सरकार निम्नलिखित को नामित करेगी: (i) एक राज्य नोडल अधिकारी, जो समग्र समन्वय और कार्यान्वयन के लिए सचिव/आयुक्त/निदेशक के रैंक से नीचे का नहीं होना चाहिए, और (ii) प्रत्येक संबंधित विभाग से एक सह-नोडल अधिकारी, इनमें स्टाम्प और पंजीकरण, शहरी विकास, नगर प्रशासन, तथा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग शामिल हो सकते हैं। भूमि संसाधन सचिव की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय स्तर की समिति परियोजनाओं को मंजूरी देगी और कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करेगी। एक राज्य स्तरीय निगरानी और समीक्षा समिति का भी गठन किया जाएगा। मुख्य सचिव या राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष इस समिति के प्रमुख होंगे।
संचार
Ayush Stephen Toppo (ayush@prsindia.org)
ट्राई ने टेलीविजन चैनलों पर विज्ञापन की अवधि से संबंधित रेगुलेशंस को रद्द किया
भारतीय दूरसंचार रेगुलेटरी प्राधिकरण (ट्राई) ने सेवा की गुणवत्ता के मानक (टेलीविजन चैनलों में विज्ञापनों की अवधि) रेगुलेशन, 2012 को रद्द कर दिया है।[46],[47] इन रेगुलेशंस ने एक घंटे के कार्यक्रम प्रसारण में अधिकतम 12 मिनट के विज्ञापनों की सीमा निर्धारित की थी। केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 में भी यह सीमा प्रदान की गई थी।[48] सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अगस्त 2026 में इस नियम को हटाने के लिए नियमों में संशोधन किया था।[49] इन रेगुलेशंस ने विज्ञापनों के बीच न्यूनतम समय अंतराल भी निर्धारित किया था, और यह अनिवार्य किया था कि लाइव खेल प्रसारणों में विज्ञापन केवल खेल के बीच मिलने वाले ब्रेक के दौरान ही दिखाए जा सकते हैं।
व्यावसायिक संचार से संबंधित रेगुलेशंस में संशोधन अधिसूचित
ट्राई ने दूरसंचार व्यावसायिक संचार ग्राहक वरीयता (तीसरा संशोधन) रेगुलेशन, 2026 को अधिसूचित किया है।[50] यह दूरसंचार व्यावसायिक संचार ग्राहक वरीयता रेगुलेशन, 2018 में संशोधन करता है।[51] 2018 के रेगुलेशन अवांछित व्यावसायिक संचार को रेगुलेट करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करते हैं। अवांछित व्यावसायिक संचार से तात्पर्य उन व्यावसायिक संचारों से है जो प्राप्तकर्ता की सहमति या उसकी पंजीकृत वरीयताओं के अनुसार नहीं होते हैं। इसमें कोई भी सेवा या लेनदेन संबंधी संदेश शामिल नहीं हैं। संशोधनों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
एप्लीकेशन-टू-पर्सन (ए2पी) कॉल का रेगुलेशन: इन संशोधनों के तहत ए2पी कॉल का उपयोग करने वाली प्रत्येक इकाई के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को इस उपयोग की घोषणा करें, साथ ही उन टेलीफोन नंबरों का विवरण भी दें जिनका उपयोग ऐसी कॉल करने के लिए किया जा रहा है। ए2पी कॉल से तात्पर्य उन वॉयस कॉल से है जो बिना किसी प्रत्यक्ष मानवीय डायलिंग के किसी एप्लीकेशन, सॉफ्टवेयर सिस्टम या स्वचालित प्लेटफॉर्म द्वारा शुरू की जाती हैं। ए2पी कॉल के लिए शुल्क पांच पैसे प्रति मिनट तक होगा। यह शुल्क ट्राई द्वारा व्यावसायिक संचार के लिए निर्दिष्ट नंबरिंग सीरीज़ पर लागू नहीं होगा।
ग्राहक पूछताछ से संबंधित व्यावसायिक संचार: 2018 के रेगुलेशंस के तहत, माल, उत्पादों या सेवाओं के संबंध में किसी ग्राहक द्वारा की गई पूछताछ से एक "संबंध" स्थापित हो जाता था, जिससे पूछताछ की तारीख से तीन महीने तक संदेश या कॉल भेजने की अनुमति मिलती थी। संशोधनों में यह प्रावधान किया गया है कि ऐसी पूछताछ के आधार पर व्यावसायिक संचार केवल पूछताछ की तारीख से सात दिनों की अवधि के लिए ही किया जा सकता है। इसके अलावा, ऐसी पूछताछ लिखित रूप में या डिजिटल माध्यम से होनी चाहिए और भेजने वाले के पास इसका विवरण एक सत्यापन योग्य रूप में सुरक्षित होना चाहिए।
पूर्ण प्रतिबंध या स्पैम टैगिंग पर रोक: ये संशोधन कॉल प्रबंधन एप्लीकेशंस (जैसे Truecaller आदि) को व्यावसायिक संचार के लिए ट्राई या केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट नंबर सीरीज़ से आने वाली कॉलों को सामूहिक रूप से स्पैम के रूप में टैग करने या उन्हें पूरी तरह से ब्लॉक करने जैसी कार्रवाइयों से प्रतिबंधित करते हैं। हालांकि, व्यक्तिगत उपभोक्ता अभी भी अपने स्वयं के उपकरणों पर ऐसी कॉलों को ब्लॉक या फ़िल्टर कर सकते हैं।
स्टील
Vaishali Dhariwal (vaishali@prsindia.org)
स्टील मंत्रालय, स्टील उद्योग सुरक्षा परिषद बनाएगा
स्टील मंत्रालय, स्टील उद्योग सुरक्षा परिषद (एसआईएससी) की स्थापना करेगा।[52] एसआईएससी सुरक्षा संबंधी शीर्ष निकाय होगा। मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
कार्य: परिषद निम्नलिखित कार्य करेगी: (i) स्टील उद्योग में सुरक्षा की स्थिति का आकलन, (ii) सुरक्षा पद्धतियों का अध्ययन और उनमें सुधार, (iii) उद्योग के सुरक्षा मानकों को मंजूरी और कार्य पद्धतियों का सुझाव, (iv) दुर्घटनाओं और संभावित दुर्घटनाओं की समीक्षा।
संरचना: इसकी अध्यक्षता स्टील सचिव द्वारा की जाएगी। अन्य सदस्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, (ii) इंटीग्रेटेड स्टील उत्पादकों के चीफ एग्जीक्यूटिव, और (iii) प्रमुख तकनीकी और वैधानिक संगठनों के प्रतिनिधि, जैसे कि खान सुरक्षा महानिदेशालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन।
स्टील उद्योग सुरक्षा निदेशालय (एसआईएसडी): परिषद को तकनीकी और व्यावसायिक सहायता देने के लिए एसआईएसडी बनाया जाएगा। यह: (i) परिषद के फैसलों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा, (ii) समय-समय पर सेफ्टी ऑडिट करेगा, (iii) दुर्घटनाओं और संभावित दुर्घटनाओं की जानकारी का रखरखाव और प्रसार करेगा, (iv) गंभीर सुरक्षा घटनाओं की जांच करेगा, (v) आपातकालीन तैयारियों और सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा करेगा, और (vi) उद्योग सुरक्षा मानक, अनुशंसित तरीके और दिशानिर्देश को तैयार और जारी करेगा। इसके सदस्यों में सुरक्षा, ब्लास्ट फर्नेस, स्टील पिघलाने, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल सुरक्षा, व्यावसायिक स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
[1] Developments in India’s Balance of Payments during the First Quarter (April-June) of 2026-27, Reserve Bank of India, September 1, 2026, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR101567BB18EC850443F3A88FBB19188FF0FA.PDF.
[2] The Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026, https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_parliament/2026/Taxations_Bill_2026.pdf.
[3] S.O. 5067(E), Ministry of Finance, September 14, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/276170.pdf.
[4] “Merchant Discount Rate (MDR) on Select UPI (P2M) Transactions”, Press Release, National Payments Corporation of India, September 1, 2026, https://financialservices.gov.in/sites/default/files/2026-09/FAQs---Merchant-Discount-Rate--MDR--on-Select-UPI--P2M--Transactions_0.pdf.
[5] “Recalibrating Economics of Insurance Distribution”, Press Release, Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI), September 23, 2026, https://irdai.gov.in/web/guest/document-detail?documentId=9852848.
[6] “Strengthening safeguards in the Insolvency Resolution Process for Personal Guarantors to Corporate Debtors”, Press Release, Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI), September 12, 2026, https://ibbi.gov.in/uploads/public_comments/DiscussionPaper-120926.pdf.
[7] RBI invites comments on the Draft “Reserve Bank of India (Know Your Customer) Amendment Directions, 2026”, Press Release, Reserve Bank of India, September 11, 2026, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR110975FCF246F5BC47ACB3EA34B0CB6A5303.PDF.
[8] In re: Victims of digital arrest related to forged documents, Suo moto writ petition (criminal), No(s). 3/2025, https://api.sci.gov.in/supremecourt/2025/59769/59769_2025_1_30_72575_Order_04-Aug-2026.pdf.
[9] Report of the Advisory Committee on Ways and Means Advances to State Governments, Reserve Bank of India, September 29, 2026, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR12114FD2CE8C2F894FE88E2350882A54D790.PDF.
[10] S.O. 5109 (E), Ministry of Labour and Employment, the Gazette of India, September 17, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/276299.pdf.
[11] “Cabinet approves Green Energy Corridor Phase-III scheme for Development of Intra-State Transmission System with Battery Energy Storage Systems”, Press Information Bureau, Union Cabinet, September 30, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2316948®=3&lang=1.
[12] Draft Petroleum (Amendment) Bill, Ministry of Petroleum and Natural Gas, September 30, 2026, https://mopng.gov.in/files/Whatsnew/Draft-Amendment-to-the-Petroleum-Act.pdf.
[13] The Petroleum Act, 1934, https://ppac.gov.in/download.php?file=govtnotlaws/1706764597_the_petroleum_act_1934.pdf.
[14] G.S.R. 789(E), The Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026, The Gazette of India, Department of Consumer Affairs, Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution, September 9, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/276125.pdf.
[15] G.S.R. 462(E), The Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020, The Gazette of India, Department of Consumer Affairs, Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution, July 23, 2020, https://consumeraffairs.gov.in/public/upload/files/E%20commerce%20rules_1732703966.pdf.
[16] Consumer Protection Act, 2019, https://consumeraffairs.gov.in/public/upload/files/CP%20Act%202019_1732700731.pdf.
[17] F. No. CCPA-1/1/2023-CCPA, Guidelines for Prevention and Regulation of Dark Patterns, November 30, 2023, https://consumeraffairs.gov.in/public/upload/admin/cmsfiles/whatsnews/डार्क_पैटर्न_के_निवारण_और_विनियमन_के_लिए_मार्गदर्शक_सिद्धांत_2023_whatsnews.pdf.
[18] “BRICS New Delhi Declaration: Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability (September 12, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 12, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41776/BRICS_New_Delhi_Declaration_Building_for_Resilience_Innovation_Cooperation_and_Sustainability_September_12_2026.
[19] “Prime Minister chaired the BRICS session on “Inclusive Global Governance and Strengthening Multilateralism” (September 12, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41780/Prime_Minister_chaired_the_BRICS_session_on_Inclusive_Global_Governance_and_Strengthening_Multilateralism_September_12_2026.
[20] “Prime Minister meets with the President of South Africa on the sidelines of the BRICS Summit in New Delhi”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41788.
[21] “Prime Minister meets with the Vice President of Nigeria on the sidelines of the 18th BRICS Summit in New Delhi”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41787/Prime_Minister_meets_with_the_Vice_President_of_Nigeria_on_the_sidelines_of_the_18th_BRICS_Summit_in_New_Delhi.
[22] “Prime Minister meets the Vice President of Uganda on the sidelines of the 18th BRICS Summit in New Delhi”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41786/Prime_Minister_meets_the_Vice_President_of_Uganda_on_the_sidelines_of_the_18th_BRICS_Summit_in_New_Delhi.
[23] “Prime Minister meets with the President of the Republic of the Philippines on the sidelines of the BRICS Summit in New Delhi”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41784/Prime_Minister_meets_with_the_President_of_the_Republic_of_the_Philippines_on_the_sidelines_of_the_BRICS_Summit_in_New_Delhi.
[24] “Prime Minister meets with the President of the Republic of Kazakhstan on the sidelines of the BRICS Summit in New Delhi”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41782/Prime_Minister_meets_with_the_President_of_the_Republic_of_Kazakhstan_on_the_sidelines_of_the_BRICS_Summit_in_New_Delhi.
[25] “Prime Minister meets the Chairperson of the African Union and President of Republic of Burundi on the sidelines of the BRICS Summit in New Delhi”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41789/Prime_Minister_meets_the_Chairperson_of_the_African_Union_and_President_of_Republic_of_Burundi_on_the_sidelines_of_the_BRICS_Summit_in_New_Delhi.
[26] “Prime Minister meets with the Prime Minister of the Socialist Republic of Vietnam on the sidelines of the BRICS Summit in New Delhi”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41773/Prime_Minister_meets_with_the_Prime_Minister_of_the_Socialist_Republic_of_Vietnam_on_the_sidelines_of_the_BRICS_Summit_in_New_Delhi.
[27] “Prime Minister meets with the Prime Minister of Malaysia on the sidelines of the BRICS Summit in New Delhi”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41772/Prime_Minister_meets_with_the_Prime_Minister_of_Malaysia_on_the_sidelines_of_the_BRICS_Summit_in_New_Delhi.
[28] “Prime Minister meets with the Prime Minister of the Federal Democratic Republic of Ethiopia on the sidelines of the BRICS Summit in New Delhi”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41771/Prime_Minister_meets_with_the_Prime_Minister_of_the_Federal_Democratic_Republic_of_Ethiopia_on_the_sidelines_of_the_BRICS_Summit_in_New_Delhi.
[29] “Prime Minister meets with the President of Iran on the sidelines of BRICS Summit”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41769/Prime_Minister_meets_with_the_President_of_Iran_on_the_sidelines_of_BRICS_Summit.
[30] “Prime Minister meets with the President of the Russian Federation on the sidelines of BRICS Summit”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41766/Prime_Minister_meets_with_the_President_of_the_Russian_Federation_on_the_sidelines_of_BRICS_Summit.
[31] “Prime Minister meets with UN Secretary-General on the sidelines of the BRICS Summit”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 13, 2026, https://www.mea.gov.in/press-releases?dtl/41770/Prime_Minister_meets_with_UN_SecretaryGeneral_on_the_sidelines_of_the_BRICS_Summit.
[32] “Prime Minister's bilateral meeting with Chinese President Xi Jinping”, Press Release, Prime Minister’s Office, September 12, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2309538®=48&lang=1.
[33] “India-Belgium Joint Statement on the visit of the Prime Minister of Belgium to India”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 3, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41736/IndiaBelgium_Joint_Statement_on_the_visit_of_the_Prime_Minister_of_Belgium_to_India.
[34] “List of Outcomes: Visit of the Prime Minister of the Kingdom of Belgium to India (September 03, 2026)”, Press Release, Ministry of External Affairs, September 3, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/41738/List_of_Outcomes_Visit_of_the_Prime_Minister_of_the_Kingdom_of_Belgium_to_India_September_03_2026.
[35] “Cabinet approves Minimum Support Prices (MSP) for Rabi Crops for Marketing Season 2027-28”, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, September 30, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasepage.aspx?PRID=2316941®=48&lang=1.
[36] “DAC clears capital acquisition proposal worth about Rs 1.10 lakh”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, September 7, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2307452®=48&lang=1.
[37] No. Z-1011/16/2025/NCAHP(AHS), The Gazette of India, Ministry of Health and Family Welfare, August 31, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/276186.pdf.
[38] National Commission for Allied and Healthcare Professions Act, 2021, https://prsindia.org/files/bills_acts/acts_parliament/2021/National%20Commission%20for%20Allied%20and%20Healthcare%20Professions%20Act,%202021.pdf.
[39] F. No. QA/11023/31/2022-QA-FSSAI (2), The Gazette of India, Food Safety and Standards Authority of India, September 14, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/276298.pdf.
[40] Food Safety and Standards (Laboratory and Sample Analysis) Regulations, 2011, https://fssai.gov.in/upload/uploadfiles/files/Compendium_Lab_Sample_Regulations_04_03_2021.pdf.
[41] Food Safety and Standards Rules, 2011, https://fssai.gov.in/upload/uploadfiles/files/FSS_Gazete_Rules_2011%20comendium.pdf.
[42] GSR 788(E), draft Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas (Imposition, Collection and Utilization of Environmental Compensation for Stubble Burning) Rules, 2026, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, September 8, 2026, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/276233.pdf.
[43] Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas (Imposition, Collection and Utilization of Environmental Compensation for Stubble Burning) Rules, 2023, https://parivesh.nic.in/dms/okm/downloadDocument?docTypemappingId=2211355&refId=999999&refType=LEGAL_REPO_NOTIFICATION&uuid=e49784af-1891-4525-91f5-219b493acd62&version=1.0.
[44] “Department of Land Resources to Launch Operational Guidelines for DILRMP 3.0; Set to Announce ₹565.50 Crore Digital Overhaul of Land Records”, Press Information Bureau, Ministry of Rural Development, September 09, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2308504®=48&lang=1.
[45] Operational Guidelines (2026-2031), Digital India Land Records Modernisation Programme (DILRMP) 3.0, Department of Land Resources, Ministry of Rural Development, https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3d69116f8b0140cdeb1f99a4d5096ffe4/uploads/2026/08/20260827600317271.pdf.
[46] The Standards of Quality of Service (Duration of Advertisements in Television Channels) Regulations, 2012, https://www.trai.gov.in/sites/default/files/2024-10/201205140456435681176Regulation_on_duration_of_advertisement_in_TV_channels_Final_11052012.pdf.
[47] The Standards of Quality of Service (Duration of Advertisement in Television Channels) (Repealing) Regulations, Telecom Regulatory Authority of India, September 10, 2026, https://www.trai.gov.in/sites/default/files/2026-09/Repealing_Regulation_10092026.pdf.
[48] Rule 7(11), The Cable Television Networks Rules, 1994, https://www.trai.gov.in/sites/default/files/2024-10/CableTelevisionNetworksRules1994.pdf.
[49] G.S.R. 751(E), The Cable Television Networks (Amendment) Rules, 2026, The Gazette of India, Ministry of Information and Broadcasting, https://mib.gov.in/sites/default/files/2026-09/g.s.r-751-e-cable-television-networks-amendment-rules-2026.pdf.
[50] Telecom Commercial Communication Customer Preference (Third Amendment) Regulations, Telecom Regulatory Authority of India, September 18, 2026, https://www.trai.gov.in/sites/default/files/2026-09/Regulation_18092026.pdf.
[51] Telecom Commercial Communication Customer Preference Regulations, 2018, https://www.trai.gov.in/sites/default/files/2026-05/CA_21052026.pdf.
[52] “Ministry of Steel Announces Apex Body for Strengthening Safety Standards and improve safety culture in Steel sector” Press Information Bureau, Ministry of Steel, September 28, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2316115®=48&lang=2.
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