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पीडीएफ

ग्रामीण कौशल विकास और प्रवासन: योजनाओं का प्रभाव अध्ययन

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • ग्रामीण विकास से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री सप्तिगिरी शंकर उलाका) ने 11 अगस्त, 2026 को 'ग्रामीण कौशल विकास और प्रवासन: दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई), दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआईज़) का प्रभाव अध्ययन' पर अपनी रिपोर्ट पेश की। डीएवाई-एनआरएलएम का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों को संगठित करके और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देकर गरीबी को कम करना है। डीडीयू-जीकेवाई ग्रामीण युवाओं को रोजगार-युक्त कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है। आरएसईटीआईज़ जिला-स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र हैं जो स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए अल्पकालिक आवासीय पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • रोजगार के अंतर को कम करना: कमिटी ने गौर किया कि मार्च 2026 तक डीडीयू-जीकेवाई के तहत प्रशिक्षित 18 लाख उम्मीदवारों में से 12 लाख को रोजगार मिला (67%)। कमिटी ने कहा कि नौकरी मिलने के बाद अपर्याप्त वेतन, नौकरी छोड़ने की उच्च दर और मजबूरी में होने वाले पलायन का एक मुख्य कारण था। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) उद्योग जगत से जुड़ाव और स्थानीय स्तर पर रोजगार अभियानों के माध्यम से लगभग 100% रोजगार सुनिश्चित किया जाए, (ii) प्रवास के बाद दी जाने वाली सहायता की अवधि को बढ़ाने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था बनाई जाए, (iii) न्यूनतम मजदूरी या उससे अधिक वेतन देने वाले रोजगार के लक्ष्य को बढ़ाया जाए, (iv) जिला स्तर पर विशेष प्लेसमेंट सेल बनाए जाएं, और (v) कार्यान्वयन एजेंसियों का मूल्यांकन शुरुआती प्लेसमेंट के बजाय इस आधार पर किया जाए कि कर्मचारी लंबे समय तक नौकरी में टिके रहते हैं या नहीं।

  • बजट का कम उपयोग: कमिटी ने गौर किया तीनों योजनाओं में धनराशि का लगातार कम उपयोग किया गया। कमिटी ने कहा कि डीडीयू-जीकेवाई के लिए वर्ष 2021-26 के स्वीकृत बजट 10,115 करोड़ रुपए को घटाकर संशोधित अनुमान में 1,162 करोड़ रुपए कर दिया गया था, और वास्तविक खर्च केवल 978 करोड़ रुपए था। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) राज्य और जिला स्तर पर आने वाली बाधाओं की व्यापक समीक्षा की जाए, (ii) प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से धनराशि का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए, (iii) बजट आवंटन को धनराशि का उपयोग करने की वास्तविक क्षमता के अनुरूप तय किया जाए, और (iv) खर्च की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। कमिटी ने ग्रामीण विकास विभाग (डीओआरडी) को यह भी सुझाव दिए कि: (i) बैंक लिंकेज को सुव्यवस्थित किया जाए ताकि बैंक ऋणों पर मिलने वाली ब्याज सबसिडी समय पर मिल सके और राज्यों पर वित्तीय बोझ कम हो, तथा (iii) कम प्रदर्शन करने वाले राज्यों से त्रैमासिक उपयोग रिपोर्ट और सुधारात्मक कार्ययोजनाएं मांगी जाएं।

  • एसएचजी ऋण और मार्केट लिंकेज: कमिटी ने गौर किया कि हालांकि डीएवाई-एनआरएलएम ने बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया है, लेकिन स्थायी उद्यम विकास को समर्थन देने के लिए प्रति समूह क्रेडिट लिंकेज अभी भी अपर्याप्त है यानी बहुत कम को ऋण मिल पा रहा है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) ऋण के प्रवाह में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि की जाए और ऋण के औसत आकार को बढ़ाया जाए, (ii) लखपति दीदी पहल में तेजी लाई जाए, (iii) कॉमन ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स एकीकरण, कॉरपोरेट भागीदारी और उत्पादों के मानकीकरण के माध्यम से मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क विकसित किए जाएं, और (iv) नियमित प्रभाव मूल्यांकनों के साथ-साथ कृषि, पशुपालन और सूक्ष्म उद्यमों में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जाए।

  • आरएसईटीआईज़ को बढ़ाना: कमिटी ने गौर किया कि आरएसईटीआईज़ का वर्तमान नेटवर्क कौशल विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। मई 2026 तक 27 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों के 623 जिलों को कवर करते हुए कुल 636 आरएसईटीआईज़ काम कर रहे हैं। कमिटी ने कहा कि प्रशिक्षण अक्सर गांवों से बहुत दूर दिया जाता है और यह स्थानीय आर्थिक अवसरों के अनुरूप नहीं है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) प्रत्येक जिले को शामिल करने के लिए सक्रिय आरएसईटीआईज़ का विस्तार किया जाए और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण उप-केंद्र स्थापित किए जाएं, (ii) स्थानीय संसाधनों, कृषि उद्योगों, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और अक्षय ऊर्जा के साथ तालमेल बैठाने के लिए कौशल पाठ्यक्रमों को नए सिरे से तैयार किया जाए, और (iii) बाजार के अनुकूल व्यवसायों, स्वरोजगार और मांग-आधारित कौशल पहचान को प्राथमिकता दी जाए।

  • महिलाओं की भागीदारी: कमिटी ने गौर किया कि डीएवाई-एनआरएलएम के तहत बड़े पैमाने पर महिलाओं को संगठित किए जाने के बावजूद, औपचारिक कौशल विकास और रोजगार कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी तुलनात्मक रूप से कम है। कमिटी ने कहा कि प्रशिक्षण केंद्रों से दूरी, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और डे-केयर/शिशुगृह की कमी जैसी बाधाओं को ठीक से दूर नहीं किया गया है। कमिटी ने केवल महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण बैच और मोबाइल ट्रेनिंग यूनिट्स शुरू करने का सुझाव दिया और यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रशिक्षण केंद्रों में क्रेश की सुविधा भी उपलब्ध हो।

  • क्षेत्रीय भेदभाव को कम करना: कमिटी ने कौशल विकास और आजीविका योजनाओं के प्रदर्शन में राज्यों के बीच बड़े अंतर पर गौर किया जिसमें कई पिछड़े और आकांक्षी जिलों में परिणाम काफी कमजोर रहे हैं। कमिटी ने एक आवश्यकता-आधारित धनराशि आवंटन फॉर्मूले को अपनाने का सुझाव दिया जो स्थानीय गरीबी के स्तर, ग्रामीण संकट और पलायन के पैटर्न को ध्यान में रखता हो। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) राज्य और निर्वाचन क्षेत्र-वार प्रदर्शन संकेतकों को संकलित और साझा किया जाए, और (ii) पिछड़े राज्यों, जिनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और पूर्वोत्तर शामिल हैं, के लिए लक्षित सहायता पैकेज दिए जाएं।

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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