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पीडीएफ

जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख में प्रशासनिक कामकाज, सामाजिक आर्थिक विकास और सुरक्षा की समीक्षा

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल) ने 7 अगस्त, 2026 को "केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक-आर्थिक विकास और आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा; तथा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सीमा सुरक्षा प्रबंधन और तैयारी" पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • परिवहन और कनेक्टिविटी: कमिटी ने सड़क परियोजनाओं को पूरा करने में देरी पर चिंता जताई और चुनिंदा महत्वपूर्ण सड़क व सुरंग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का सुझाव दिया। इसके साथ ही कमिटी ने रेलवे परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, संचालन में भू-तकनीकी व पुल-पटरियों की मजबूती की निगरानी के आधुनिक तरीकों को शामिल करने, श्रीनगर सिविल एन्क्लेव के काम में तेजी लाने और कटरा में नई हवाई सुविधा शुरू करने की संभावनाओं की जांच करने का सुझाव दिया। इसके अतिरिक्त उसने सड़क और सुरंग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का सुझाव दिया।

  • कृषि बीमा: कमिटी ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों का कवरेज कम है। यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों से होने वाले नुकसान के लिए फसल बीमा देती है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) योजना का कवरेज बढ़ाना, (ii) बीमा का फॉर्म भरने और जुड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाना और (iii) छोटे, सीमांत और बटाईदार किसानों तथा किसान उत्पादक संगठनों को ऋण की मदद को और मजबूत करना।

  • श्रद्धालुओं की सुरक्षा: कमिटी ने श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, बदलते मौसम और भूवैज्ञानिक जोखिमों को देखते हुए आपदा प्रबंधन ढांचे में बदलाव की जरूरत पर ध्यान दिया। कमिटी ने इस संबंध में निम्नलिखित सुझाव दिए, (i) जोखिम का पहले से अनुमान लगाने वाले सिस्टम का इस्तेमाल करना, (ii) नियमित प्रशिक्षण के जरिए फ्रंटलाइन कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना और (iii) कई एजेंसियों के साथ मिलकर बार-बार मॉक ड्रिल करना।

  • अक्षय ऊर्जा का इंफ्रास्ट्रक्चर: कमिटी ने गौर किया कि जम्मू एवं कश्मीर ने अपने सौरीकरण (सौर ऊर्जा अपनाने) के लक्ष्य का लगभग 35% हासिल कर लिया है और इसकी अक्षय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 276 मेगावाट है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) सरकारी इमारतों का सौरीकरण, (ii) प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना (पीएमएसजी-एमबीवाई) के तहत घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया में तेज़ी लाना, और (iii) दूर-दराज़ और कम सुविधा वाले इलाकों तक साफ़ ऊर्जा की पहुंच बढ़ाना। पीएमएसजी-एमबीवाई के तहत घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए आर्थिक सबसिडी दी जाती है।

  • पेयजल का इंफ्रास्ट्रक्चर: कमिटी ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत फिजिकल काम पूरे होने की दर 46% थी। जेजेएम का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक अलग-अलग नल कनेक्शन के ज़रिए पीने का पानी पहुंचाना है। कमिटी ने यह भी गौर किया कि कॉन्ट्रैक्टरों को 1,360 करोड़ रुपए का भुगतान अभी बाकी है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) योजना के लिए फंड समय पर जारी करना, (ii) कॉन्ट्रैक्टरों के लंबित दावों का निपटारा करना, और (iii) ग्रामीण घरों में चालू नल कनेक्शन लगाने की प्रक्रिया में तेज़ी लाना।

  • खनिज संसाधन: कमिटी ने गौर किया कि जम्मू एवं कश्मीर में लिथियम, नीलम, चूना-पत्थर, ग्रेफाइट, लिग्नाइट और संगमरमर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और रोज़गार पैदा करने की क्षमता है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) समय पर कानूनी और वन संबंधी मंज़ूरी लेकर खोज के काम में तेज़ी लाना, (ii) खोज के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना, (iii) खनिज-आधारित उद्योगों के लिए कौशल विकास को बढ़ावा देना, और (iv) स्थानीय समुदायों के लिए पर्यावरण सुरक्षा के उपाय करना।

  • स्वास्थ्य देखभाल: कमिटी ने कहा कि दूर-दराज़ के सीमावर्ती इलाकों में योग्य डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता, सभी को समान रूप से स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए बहुत ज़रूरी है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) दूर-दराज़ के ज़िलों में भर्ती प्रक्रिया तेज़ करना, (ii) ज़िला रेज़िडेंसी कार्यक्रम को मज़बूत करना, (iii) विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रोत्साहन देना, और (iv) टेलीमेडिसिन और टेली-रेडियोलॉजी नेटवर्क का विस्तार करना।

  • शिक्षाः कमिटी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2024-25 के लिए सेकेंडरी स्कूल छोड़ने वालों की दर लगभग 13% है और कुल नामांकन अनुपात प्राइमरी स्तर पर 114 से घटकर हायर-सेकेंडरी स्तर पर 54 हो गया है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) सेकेंडरी स्कूल छोड़ने वालों की संख्या कम करने के उपाय करना, (ii) डेटा के आधार पर शिक्षकों की तैनाती करना, खासकर ग्रामीण और सीमावर्ती स्कूलों में, और (iii) पर्यटन और कृषि जैसे क्षेत्रों के हिसाब से व्यावसायिक शिक्षा देना।

  • प्रवासियों का पुनर्वास: कमिटी ने गौर किया कि शुरुआत में 6,510 प्रवासी परिवारों ने लौटने की इच्छा जताई थी, लेकिन कश्मीर घाटी में केवल तीन परिवार ही स्थायी रूप से फिर से बसे हैं। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) सुरक्षा और सामाजिक चिंताओं का आकलन करना, (ii) पुनर्वास पैकेज की समीक्षा करना, और (iii) विस्थापित प्रवासी परिवारों के लिए आरक्षित 125 खाली पदों को भरना।

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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