स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश
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एस्टिमेट्स कमिटी (चेयर: डॉ. संजय जायसवाल) ने 7 अगस्त, 2026 को 'प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और वितरण- चुनौतियां और संभावनाएं' पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमिटी ने देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और आपूर्ति से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की। भारत के ऊर्जा मिश्रण (एनर्जी मिक्स) में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6% है, जो वैश्विक औसत (लगभग 24%) से कम है। सरकार ने 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 15% करने का लक्ष्य रखा है। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
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भारत में प्राकृतिक गैस के संसाधन: कमिटी ने कहा कि भारत में अनुमानित प्राकृतिक गैस भंडार 1,094 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) हैं, जिनमें से 55% भंडार समुद्र में (ऑफशोर) हैं। प्राकृतिक गैस का उत्पादन 2014-15 में 34 BCM से बढ़कर 2024-25 में 36 BCM हो गया है। कमिटी ने यह भी गौर किया कि संसाधनों के पिछले दो आकलन के बीच 20 साल का अंतर था, जिससे संसाधनों की बढ़ी हुई क्षमता का पता चलने में देरी हुई। कमिटी ने हाइड्रोकार्बन संसाधनों का समय-समय पर आकलन करने और उत्पादन, आयात, खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और डीकार्बोनाइज़ेशन के लिए वार्षिक लक्ष्यों के साथ एक प्राकृतिक गैस कार्य योजना तैयार करने का सुझाव दिया।
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आयात पर निर्भरता: कमिटी ने कहा कि प्राकृतिक गैस का आयात 2014-15 में 13 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) से बढ़कर 2024-25 में 27 MMT हो गया है। साथ ही, अनुमान है कि 2030 तक भारत में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) (LNG) की मांग 40 MMT प्रति वर्ष से अधिक हो जाएगी, जिससे अस्थिर वैश्विक गैस बाज़ार पर निर्भरता बढ़ेगी। कमिटी ने सुझाव दिया कि सरकार लंबे समय के लिए एलएनजी सोर्सिंग की व्यवस्था को मज़बूत करे और बाज़ार की बदलती स्थितियों के अनुसार स्पॉट प्रोक्योरमेंट (यानी तत्काल खरीद) करे। कमिटी ने घरेलू गैस का उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा की बचत में सुधार करने का भी सुझाव दिया।
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नए भंडार की खोज और उत्पादन में तेजी लाना: कमिटी ने गौर किया कि कई ऐसे इलाके हैं जहां प्राकृतिक गैस के भंडार तो हैं, लेकिन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू नहीं हुआ है (कैटेगरी-II बेसिन), और कुछ ऐसे इलाके हैं जिनकी अभी खोज नहीं हुई है, लेकिन वहां संभावित भंडार हो सकते हैं (कैटेगरी-III बेसिन)। इसके अलावा, कमिटी ने यह भी गौर किया कि भारत के सेडिमेंट्री बेसिन (जहां प्राकृतिक गैस मिलती है) का 39% हिस्सा गहरे पानी में है, लेकिन अभी सिर्फ़ दो डीप-वॉटर (गहरे समुद्र वाले) ब्लॉक में ही उत्पादन हो रहा है। भारत के घरेलू गैस उत्पादन में इन ब्लॉक्स का हिस्सा लगभग 31% है। कमिटी ने कैटेगरी-II और III बेसिन और डीप-वॉटर ब्लॉक में खोज और उत्पादन को तेज़ करने का सुझाव दिया। इसके लिए वित्तीय प्रोत्साहन, जोखिम बांटने की व्यवस्था और डेटा व टेक्नोलॉजी की उपलब्धता को बेहतर बनाने जैसे उपायों का सुझाव दिया।
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घरेलू गैस के स्रोतों का विविधीकरण: कमिटी ने कहा कि कम्प्रैस्ड बायो-गैस (CBG), कोल बेड मीथेन (CBM) और शेल गैस जैसे वैकल्पिक स्रोत, घरेलू स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को बढ़ा सकते हैं। हालांकि इन स्रोतों से उत्पादन सीमित है। कमिटी ने गौर किया कि 5,000 CBG संयंत्र लगाने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 78 संयंत्र ही शुरू हो पाए हैं। 2024-25 में, भारत ने 2,600 BCM के अनुमानित भंडार के मुकाबले 756 मिलियन क्यूबिक मीटर CBM का उत्पादन किया। शेल गैस या तेल का कोई वाणिज्यिक उत्पादन नहीं हो रहा है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) फीडस्टॉक की उपलब्धता और उप-उत्पादों के लिए बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा करते हुए और अधिक CBG संयंत्र शुरू करना, (ii) CBM ब्लॉक के विकास में तेज़ी लाना, (iii) शेल संसाधनों की आर्थिक लाभप्रदता का मूल्यांकन करना, और (iv) गैस की बिक्री/मार्केटिंग के लिए व्यवस्था बनाना।
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प्राकृतिक गैस पर कर: अभी प्राकृतिक गैस पर कई तरह के कर लगते हैं, क्योंकि यह जीएसटी के दायरे से बाहर है। कमिटी ने कहा कि इससे औद्योगिक और घरेलू ग्राहकों के लिए लागत बढ़ गई है। कमिटी ने सुझाव दिया कि प्राकृतिक गैस को उचित दर पर जीएसटी के दायरे में लाया जाए।
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ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग: कमिटी ने कहा कि 58 में से 39 गैस-आधारित बिजली संयंत्र राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े हैं। उसने यह भी कहा कि ईंधन की अधिक लागत के कारण बिजली क्षेत्र को होने वाली आपूर्ति सीमित हो गई थी। कमिटी ने सुझाव दिया कि गैस-आधारित बिजली संयंत्रों के उपयोग को बढ़ाने के लिए गैस आवंटन का एक लचीला ढांचा तैयार किया जाए।
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घरेल उपयोग: कमिटी ने गौर किया कि सुरक्षा के फायदों के बावजूद, इंस्टॉलेशन की ज़्यादा लागत और सबसिडी न मिलने की वजह से बहुत से परिवार पाइप आधारित प्राकृतिक गैस (PNG) को इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं। कमिटी ने कम आय वाले परिवारों के लिए PNG को ज़्यादा किफायती बनाने के उपाय करने का सुझाव दिया।
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LNG का इंफ्रास्ट्रक्चर: कमिटी ने गौर किया कि LNG टर्मिनल का इंफ्रास्ट्रक्चर मुख्य रूप से पश्चिमी तट पर ही केंद्रित है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर 23 LNG रिटेल स्टेशन बनाए गए हैं। कमिटी ने LNG टर्मिनलों के भौगोलिक रूप से संतुलित विकास को बढ़ावा देने और 1,000 स्टेशनों के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए LNG स्टेशन बनाने की गति बढ़ाने का सुझाव दिया।
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