स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश
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कोयला, खदान और स्टील से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री अनुराग सिंह ठाकुर) ने 29 जुलाई, 2026 को 'वॉश्ड कोल उत्पादन को बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास’ पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी ने देश में कोल वॉशिंग इकोसिस्टम और वॉशरी इंफ्रास्ट्रक्चर एवं वॉश्ड कोल के उत्पादन को बढ़ाने के रोडमैप की समीक्षा की। भारतीय घरेलू कोयले में राख की मात्रा ज़्यादा होती है। यह मात्रा 25% से 45% तक होती है। इससे दहन क्षमता, उपकरणों के प्रदर्शन और प्रदूषण के स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वॉश्ड कोल का मतलब यह है कि एक मैकेनिकल प्रक्रिया के जरिए कोयले से अशुद्धियां निकाली गई हैं। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव इस प्रकार हैं:
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वॉश्ड कोकिंग कोल में मांग-आपूर्ति का अंतर: राष्ट्रीय स्टील नीति, 2017 का लक्ष्य 2030-31 तक 300 मिलियन टन (MT) कच्चे स्टील का उत्पादन करना है। कमिटी ने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 48 MT वॉश्ड कोकिंग कोल (कोयले का एक प्रकार जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टील उद्योग में होता है) की ज़रूरत होगी। हालांकि 2030 तक घरेलू आपूर्ति 23 MT रहने का अनुमान है। कमिटी ने कोयला मंत्रालय और स्टील मंत्रालय को सलाह दी कि वे कोल वॉशरी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और स्टील क्षेत्र में घरेलू कोकिंग कोल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक समय-सीमा वाली रणनीति बनाएं।
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मौजूदा वॉशरीज़ का प्रदर्शन: कमिटी ने गौर किया कि कोल इंडिया लिमिटेड की 13 वॉशरीज़ में से केवल पांच ही निर्धारित 95% दक्षता के मानक को पूरा करती हैं। बाकी वॉशरीज़ का प्रदर्शन खराब है क्योंकि वे परिचालन अवधि पार कर चुकी हैं। कमिटी ने यह भी गौर किया कि पिछले कुछ वर्षों में निजी क्षेत्र ने नई वॉशरीज़ बनाई हैं। हालांकि निजी क्षेत्र की काफी वॉशरीज़ उपयुक्त क्रूड कोल के लिंकेज की कमी जैसे कारणों से या तो अपनी क्षमता से कम काम कर रही हैं या बिल्कुल बंद पड़ी हैं। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) वॉशरीज़ का समयबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण किया जाए जिसमें पुरानी वॉशरीज़ का मुद्रीकरण भी शामिल है, और (ii) सार्वजनिक-निजी सहयोग के ज़रिए निजी वॉशरीज़ की इस बेकार पड़ी क्षमता का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाए।
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नई तकनीक को अपनाना: कमिटी ने गौर किया कि प्रमुख कोयला उत्पादक देशों ने उन्नत कोयला संवर्धन (एडवांस कोल बेनिफिसिएशन) तकनीकों का उपयोग करना शुरू कर दिया है। कोयला संवर्धन एक मैकेनिकल प्रक्रिया है जो कच्चे कोयले से अवांछित चट्टान, राख, सल्फर और नमी को हटाकर उसे साफ़ करती है। इन तकनीकों में ड्राई वॉशिंग और एडवांस्ड डेंस-मीडिया सेपरेशन सिस्टम शामिल हैं। कमिटी ने कहा कि भारतीय वॉशरीज़ में इन तकनीकों को अपनाने की काफी गुंजाइश है। उसने यह भी कहा कि देश में इनमें से कुछ तकनीकों का इस्तेमाल करने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। उसने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) उन्नत तकनीकों को पायलट या अनुसंधान एवं विकास से आगे बढ़ाकर बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, और (ii) भारतीय वॉशरीज़ में उन्नत और अगली पीढ़ी के ड्राई बेनिफिसिएशन सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए एक तकनीक का रोडमैप तैयार किया जाए।
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पर्यावरण और वन मंजूरी में देरी: कमिटी ने कोकिंग कोल खदानों के लिए पर्यावरण और वन संबंधी मंज़ूरी की प्रक्रिया में तेज़ी लाने का सुझाव दिया। साथ ही, कमिटी ने यह भी सुझाव दिया कि मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और राज्य सरकारों के साथ मिलकर इन मामलों को तय समय-सीमा के भीतर सुलझाए।
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कोयला परिवहन और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर: कमिटी ने कोयला परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर में कई चुनौतियों पर गौर किया जैसे कि पुरानी वॉशरीज़ में मैकेनाइज्ड लोडिंग की सुविधाओं की कमी। इसके अलावा, कई मौजूदा कोल वॉशरीज़ पिटहेड्स (कोयला खदान के मुहाने) से दूर स्थित हैं, जिसके कारण लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ जाता है और रेल व सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। कमिटी ने यह भी कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड की नई वॉशरीज़ में पूरी तरह से मशीनीकृत निकासी प्रणाली (इवैक्यूएशन सिस्टम) लगाई जा रही है। साथ ही, कोयले की निकासी में मदद के लिए 33 महत्वपूर्ण रेल लाइनें विकसित करने की योजना है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) मशीनीकृत निकासी सुविधाओं का विस्तार करना (ii) चिन्हित रेल लाइनों को समय पर पूरा करना, और (iii) जहां भी संभव हो, पिटहेड्स के पास वॉशरीज़ स्थापित करना।
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वॉशरी रिजेक्ट्स (अपशिष्ट) और पानी का इस्तेमाल: वॉशरी रिजेक्ट पॉलिसी, 2021 का उद्देश्य बिजली उत्पादन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में वॉशरी रिजेक्ट (कोयला संवर्धन के उप-उत्पाद) के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। कमिटी ने गौर किया कि कोयला संवर्धन सुविधाओं के विस्तार के साथ वॉशरी रिजेक्ट की मात्रा बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, पानी की खपत भी बढ़ने की आशंका है। कमिटी ने गौर किया कि जहां नई वॉशरीज़ को पानी रीसाइकलिंग प्रणालियों के साथ डिज़ाइन किया गया है, वहीं मौजूदा वॉशरीज़ के लिए ऐसे कोई नियम तय नहीं हैं। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) नीतियों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर ऑडिट और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम बनाया जाए, और (ii) सभी वॉशरीज़ के लिए पानी रीसाइकलिंग के नियम तैयार किए जाएं।
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कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइज़ेशन (सीसीओ) की भूमिका: कमिटी ने कहा कि सीसीओ का अधिकार क्षेत्र केवल रिजेक्ट्स के निपटान को मंज़ूरी देने तक सीमित है; और वॉशरीज़ उत्पादन या कोयले की क्वालिटी की निगरानी में इसकी कोई भूमिका नहीं है। कमिटी ने तकनीकी देखरेख और सहायता के लिए सीसीओ की क्षमता को मज़बूत करने के लिए विशेष तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने का सुझाव दिया।
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