स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश
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आवासन और शहरी मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी) ने 4 अगस्त, 2026 को 'अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत और अमृत 2.0) के तहत शहरों में सीवरेज और सेप्टेज कवरेज की समीक्षा' पर अपनी रिपोर्ट पेश की। अमृत योजना को 2015 में शुरू किया गया था। इसके बाद 2021 में अमृत 2.0 की शुरुआत हुई, जिसे मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। कमिटी ने इस योजना के तहत सीवरेज और सेप्टेज कवरेज की प्रगति का मूल्यांकन किया। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:
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सीवरेज और सेप्टेज परियोजनाओं की धीमी प्रगति: कमिटी ने कहा कि अमृत 2.0 के तहत योजनाबद्ध 594 सीवरेज और सेप्टेज परियोजनाओं में से 104 पूरी हो चुकी हैं और 398 पर अभी काम चल रहा है। केंद्रीय सहायता के रूप में स्वीकृत 66,060 करोड़ रुपए में से 22,763 करोड़ रुपए (34%) जारी किए जा चुके हैं। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) काम पूरा करने के लिए सख्त समय-सीमा तय की जाए और चरणबद्ध लक्ष्य-आधारित निगरानी की जाए, (ii) इस योजना के तहत वित्तीय प्रगति की व्यापक समीक्षा की जाए, और (iii) जिन राज्यों और शहरों को वित्तीय सहायता मिलने या उसका उपयोग करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
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सीवर और सेप्टेज कवरेज में अंतर: कमिटी ने गौर किया कि शहरी इलाकों के 11.3 करोड़ घरों में से 3.5 करोड़ घर सीवर नेटवर्क से जुड़े हैं। वहीं 2.9 करोड़ घर सेप्टिक टैंक जैसे सेप्टेज-आधारित सिस्टम पर निर्भर हैं। सर्वेक्षण में शामिल 68% सेप्टिक टैंक अंदर से ठीक तरीके से पक्के नहीं किए गए थे, जिससे भूजल के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) सेप्टिक टैंक के निर्माण पर भवन उप-नियमों और तकनीकी सीवरेज मानकों को सख्ती से लागू किया जाए, और (ii) ठेकेदारों और राजमिस्त्रियों को इस संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
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सीवेज उपचार की अपर्याप्त क्षमता: कमिटी ने अपशिष्ट जल के उत्पादन और उसके उपचार के अनुमानों में अंतर पाया। नीति आयोग की 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, केवल 28% अपशिष्ट जल का उपचार किया जाता है, जबकि मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार यह आंकड़ा 43% है। अमृत योजना के तहत, तय की गई 6,299 MLD (प्रति 10 लाख लीटर) उपचार क्षमता में से 5,396 MLD को चालू कर दिया गया है। अमृत 2.0 के तहत, शुरू की गई 6,815 MLD क्षमता में से केवल 658 MLD को ही चालू किया जा सका है। इसके अलावा, आवश्यक 409 लाख परिवारों में से 192 लाख परिवारों को सीवर कनेक्शन या सेप्टेज पुनर्वास प्रदान किया गया है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) शहरी स्थानीय निकायों द्वारा वार्षिक अपशिष्ट जल उत्पादन-उपचार बैलेंस शीट यानी वार्षिक लेखा-जोखा तैयार किया जाए, (ii) सीवेज उपचार संयंत्रों और मल कीचड़ उपचार संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए समयबद्ध कार्ययोजनाएं बनाई जाएं, (iii) देरी से चल रही परियोजनाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाए, और (iv) सीवर नेटवर्क और अंतिम छोर तक कनेक्शन देने को प्राथमिकता दी जाए।
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कीचड़ और सेप्टेज से रिसोर्स रिकवरी: कमिटी ने कहा कि लगभग 31,885 MLD की स्थापित क्षमता वाले सीवेज उपचार संयंत्र रोजाना करीब 8,000 टन सूखा कीचड़ पैदा करते हैं, जबकि मल कीचड़ उपचार संयंत्र प्रतिदिन लगभग 32 टन कीचड़ उत्पन्न करते हैं। कीचड़ यानी स्लज का मतलब, ऐसा अर्ध-ठोस अवशिष्ट कचरा है, जो अपशिष्ट जल या मल को साफ करने के बाद बच जाता है। साफ किए गए कीचड़ का उपयोग कंपोस्ट, उर्वरक, मिट्टी सुधारक, निर्माण सामग्री और ईंधन के लिए किया जा सकता है, जबकि उपचार के दौरान उत्पन्न होने वाली मीथेन गैस का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है। कमिटी ने कहा कि यह रिसोर्स रिकवरी अभी भी एक शुरुआती चरण में है और उसने एक ऐसा फ्रेमवर्क बनाने का सुझाव दिया जिसमें उपयुक्त तकनीकें, सुरक्षित पुन: उपयोग के मानक और अंतिम-उपयोग बाजारों का विकास शामिल हो।
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उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा उपयोग को बढ़ाना: 22,891 MLD की कुल उपचार क्षमता के मुकाबले, इस समय केवल 6,013 MLD उपचारित अपशिष्ट जल का ही दोबारा उपयोग (26%) किया जा रहा है। कमिटी ने उद्योगों और किसानों को इस उपचारित जल की आपूर्ति करने के लिए एक समर्पित वितरण इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर भी गौर किया। उसने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) उपचारित अपशिष्ट जल के दोबारा उपयोग की नीतियों को अधिसूचित और लागू किया जाए, (ii) शहर-वार अपशिष्ट जल के उत्पादन, उपचार, गुणवत्ता और दोबारा उपयोग का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाए, (iii) इसके लिए समर्पित वितरण नेटवर्क तैयार किया जाए, और (iv) थोक उपयोगकर्ताओं के साथ व्यावसायिक समझौते किए जाएं।
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सैनिटेशन वर्कर्स की सुरक्षा: कमिटी ने गौर किया कि सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक मैन्युअल सफाई (हाथ से सफाई करने की प्रथा) पर कानूनी प्रतिबंध होने के बावजूद, असुरक्षित तरीके से हाथ से सफाई का काम जारी है। कमिटी ने सुरक्षा उपकरणों, व्यावसायिक सुरक्षा अनुपालन और श्रमिक कल्याण पर आंकड़ों की कमी पर भी गौर किया। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) सीवर और सेप्टिक टैंक की मशीनीकृत सफाई को समयबद्ध तरीके से अपनाया जाए, (ii) सुरक्षा गियर/उपकरणों की उपलब्धता पर नज़र रखी जाए, (iii) नियमों का पालन न करने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, और (iv) सैनिटेशन वर्कर्स (सफाई कर्मचारियों) के लिए न्यूनतम मजदूरी, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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