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पीडीएफ

एम्स, नई दिल्ली का कामकाज

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: प्रो. राम गोपाल यादव) ने 18 मार्च, 2026 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली का कामकाज और स्वास्थ्य सेवा एवं उपचार प्राप्त करने में रोगियों को आने वाली समस्याओं पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के प्रमुख निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • रिक्तियां: फैकेल्टी सदस्यों के लिए स्वीकृत 1,306 पदों में से 508 पद रिक्त हैं (39%)। नॉन-फैकेल्टी सदस्यों के लिए स्वीकृत 13,911 पदों में से 3,056 पद रिक्त हैं (22%)। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) स्पेशिलिटी सेंटर्स और नर्सिंग कैडर में कमियों को दूर करने के लिए अंतरिम संविदात्मक नियुक्तियां करना, (ii) नर्सिंग अधिकारियों के लिए साल में दो बार भर्तियां करना, (iii) फैकेल्टी की भर्ती के लिए हर साल एक नियत समय तय करना, (iv) कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए कैडर की समीक्षा करना। इसके अलावा 164 से अधिक प्रॉजेक्ट स्टाफ ऐसे हैं जो 15 वर्षों से निरंतर सेवा में हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि पात्र प्रॉजेक्ट स्टाफ को नियमित कर्मचारियों में शामिल किया जाना चाहिए।

  • कमिटी ने पाया कि वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों के पदों के लिए विज्ञापित और वास्तव में भरे गए पदों की संख्या में काफी अंतर है। उदाहरण के लिए 2024 में विज्ञापित 887 पदों में से केवल 440 पद ही भरे गए थे। कमिटी ने इस बात पर भी गौर किया कि बड़े निजी अस्पतालों के मुकाबले कम वेतन और सुविधाओं की कमी की वजह से बहुत से डॉक्टर और दूसरे कर्मचारी एम्स छोड़कर जा रहे हैं। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) लगातार खाली पड़े पदों की व्यापक समीक्षा, और (ii) अधिक उम्मीदवारों को आकर्षित करने के लिए प्रयास।

  • उपयोग न आने वाली सुविधाएं: कमिटी ने पाया कि 112 प्रमुख ऑपरेशन थिएटर्स में से 26 और 433 आईसीयू बिस्तरों में से 81 निष्क्रिय हैं। 4,178 बिस्तरों में से 843 बिस्तर भी उपयोग में नहीं हैं। मरीजों को सर्जरी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। एम्स को दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त है, फिर भी मरीज एम्स में उपचार का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। कमिटी ने पाया कि कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और ट्रॉमा विभागों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। नवजात शिशु सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए और कम से कम 50 और बिस्तर बढ़ाए जाने चाहिए। कमिटी ने मास्टर प्लान के धीमे कार्यान्वयन पर भी चिंता जताई।

  • मरीजों का भारी दबाव: कमिटी ने पाया कि नई दिल्ली स्थित एम्स में रोगियों की संख्या अनुपातहीन रूप से अधिक है। इससे सुविधाओं पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और इंतजार का समय लंबा हो जाता है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) कर्नाटक सहित प्रत्येक राज्य में एम्स जैसे संस्थान स्थापित करना और एनसीआर क्षेत्र में एक और एम्स स्थापित करना, (ii) अन्य एम्स के साथ मिलकर एक प्रभावी रेफरल सिस्टम विकसित करना, (iii) दिल्ली-एनसीआर में 100 से 150 बिस्तरों वाले आपातकालीन केंद्र स्थापित करना और (iv) टेलीमेडिसिन का अधिकतम उपयोग करना। कमिटी ने रात के समय भी ओपीडी चलाने की संभावनाएं तलाशने का सुझाव दिया। उसने इस बात भी गौर किया कि मुख्य अस्पताल में लगभग 46 विभाग स्थित हैं। कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और नेत्र विज्ञान जैसे विशिष्टता केंद्रों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना चाहिए ताकि ओपीडी के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।

  • डायग्नॉस्टिक सेवाएं: कमिटी ने गौर किया कि यहां रोजाना 3,000 से अधिक रेडियोलॉजी प्रक्रियाएं और दो लाख लैब टेस्ट किए जाते हैं। कमिटी ने लैब और जांच सेवाओं के विकेंद्रीकरण का सुझाव दिया है। इन सेवाओं को क्षेत्रीय और जिला अस्पतालों में और बेहतर किया जाना चाहिए। लैब जांच के लिए टेली-रेडियोलॉजी प्रणालियों को अपनाया जा सकता है। साथ ही निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों के साथ साझेदारी की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।

  • रिसर्च: कमिटी ने रिसर्च में लगे फैकेल्टी सदस्यों के लिए कम से कम 20% आरक्षित समय सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। इससे यह सुनिश्चित होगा कि मरीजों के इलाज की ​​जिम्मेदारियां, उनके वैज्ञानिक रिसर्च के काम में बाधा न बनें। कमिटी ने पाया कि एआई-आधारित लैब और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने की सख्त जरूरत है। इसके लिए विशेष रूप से रिसर्च पर ध्यान देने वाले फैकेल्टी और तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती की जानी चाहिए। एम्स को अपने बजट की जरूरतों का कम से कम 10% हिस्सा रिसर्च और उद्योगों के साथ साझेदारी में जुटाना चाहिए। कमिटी ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एक चिकित्सा नवाचार और उद्यमिता केंद्र स्थापित करने का भी सुझाव दिया।

  • आवास: 850 फैकेल्टी सदस्यों में से लगभग 250, नर्सिंग स्टाफ के 4% से भी कम और कर्मचारियों के 10% से भी कम को कैंपस में आवास उपलब्ध कराया गया है। रेजिडेंट डॉक्टरों, प्रशिक्षुओं और विद्यार्थियों के लिए भी हॉस्टल की कमी है। कमिटी ने आवासीय कॉलोनियों के पुनर्विकास में अत्यधिक देरी पर गौर किया। कमिटी ने आवास परियोजनाओं में तेजी लाने का सुझाव दिया।

  • संस्थान का कामकाज: कमिटी ने डीन, सब-डीन, प्रभारी प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया में संशोधन का सुझाव दिया। निर्णय लेने की शक्तियां विकेंद्रीकृत की जानी चाहिए। निदेशकों को पर्याप्त प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां प्रदान की जानी चाहिए। कई केंद्रों की मान्यता अभी लंबित है। कमिटी ने पाया कि संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा अकादमिकों के लिए एक स्कूल की स्थापना के प्रस्ताव को एम्स, नई दिल्ली द्वारा अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है, जबकि अन्य नए एम्स ने इस तरह के स्कूल पहले ही स्थापित कर लिए हैं।

 

​​​​​​​डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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