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पीडीएफ

खनिज और धातु क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • कोयला, खान और इस्पात से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री अनुराग ठाकुर) ने 17 दिसंबर, 2025 को 'खनिज और धातु क्षेत्र में आत्मनिर्भरता' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आयात निर्भरता: कमिटी ने कहा कि भारत ने बॉक्साइट, क्रोमाइट, लौह अयस्क, चूना पत्थर और सिलिमनाइट जैसे कई प्रमुख खनिजों की मांग को पूरा करने में आत्मनिर्भरता या लगभग आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली है। हालांकि, मैग्नेसाइट, मैंगनीज और रॉक फॉस्फेट जैसे खनिजों के लिए देश अब भी आयात पर निर्भर है, जबकि घरेलू खनिज मांग में वृद्धि होने की उम्मीद है। कमिटी ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज दुनिया के कुछ ही देशों में पाए जाते हैं और भारत लिथियम, कोबाल्ट और निकेल के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है, जबकि ग्रेफाइट, पोटाश और फास्फोरस के लिए भी आयात पर काफी हद तक निर्भर है। कमिटी ने वैश्विक आपूर्ति की बाधाओं से उत्पन्न जोखिमों को कम करने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों को शामिल करते हुए एक समन्वित राष्ट्रीय रणनीति की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • प्रसंस्करण एवं शोधन: कमिटी ने कहा कि प्रसंस्करण एवं शोधन (प्रोसेसिंग और रीफाइनिंग) खनिज मूल्य श्रृंखला के महत्वपूर्ण चरण हैं और इस क्षेत्र में घरेलू क्षमताएं सीमित हैं। कमिटी ने घरेलू प्रसंस्करण एवं शोधन क्षमताओं के विकास में तेजी लाने और उन्हें आयात के मुकाबले लागत-प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही कमिटी ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसरों की खोज करने और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के क्षेत्र में खनिज प्रसंस्करण क्षमताओं को मजबूत करने का सुझाव दिया।

  • रेगुलेशन संबंधी देरी: कमिटी ने कहा कि रेगुलेटरी मंजूरियों में लगने वाले लंबे समय, अन्वेषण चरण में वन मंजूरी की जरूरत और खदान की नीलामी और परिचालन में देरी के कारण खनिज उत्पादन धीमा हो गया है। कमिटी ने खनिज और महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं की नीलामी के बाद की प्रगति की निगरानी के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह गठित करने की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया। साथ ही उसने शीघ्र उत्पादन के लिए प्रोत्साहन और परिचालन में देरी के लिए दंड पर विचार करने का सुझाव दिया।

  • सतत विकास उपाय: कमिटी ने सतत विकास ढांचे के तहत खदानों की स्टार रेटिंग प्रक्रिया में हो रही देरी पर गौर किया और लंबित मूल्यांकनों में तेजी लाने का सुझाव दिया। इस रेटिंग में सुरक्षा, पर्यावरण, परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और श्रमिकों के कल्याण का मूल्यांकन किया जाता है। कमिटी ने सरकार को वित्तीय प्रोत्साहन जैसे उपायों के माध्यम से खनिज पुनर्चक्रण (रीसाइकलिंग) को बढ़ावा देने की पहल करने का भी सुझाव दिया। कमिटी ने ई-कचरा, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और औद्योगिक स्क्रैप से खनिजों की रिकवरी को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उसने स्क्रैप कलेक्शन की प्रणालियों को मजबूत करने और पर्यावरण के अनुकूल श्रेडिंग सुविधाओं की स्थापना करने का भी आग्रह किया ताकि नए खनिजों की निकासी पर निर्भरता कम हो और संसाधन दक्षता में सुधार हो।

  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना: कमिटी ने कहा कि खनिज उत्पादन के कुल मूल्य का 60% हिस्सा निजी क्षेत्र का है, जिसमें अलौह धातुओं और औद्योगिक खनिजों में निजी क्षेत्र की प्रमुख भूमिका है। तांबा, सोना और फॉस्फोराइट जैसे रणनीतिक खनिजों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कमिटी ने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की गुंजाइश है।

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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