स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश
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संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. निशिकांत दुबे) ने 2 दिसंबर, 2025 को “नए युग में सूचना प्रौद्योगिकी समझौते का प्रभाव” विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। भारत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तहत संचालित सूचना प्रौद्योगिकी समझौता-1 (आईटीए-1) का हस्ताक्षरकर्ता है। आईटीए-1 के तहत प्रत्येक भागीदार देश को समझौते में निर्दिष्ट सभी उत्पादों पर सीमा शुल्क समाप्त करना अनिवार्य है। इसमें शामिल उत्पादों में सेमीकंडक्टर, कंप्यूटर, दूरसंचार उपकरण और सॉफ्टवेयर शामिल हैं। कमिटी के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
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आईटीए के तहत दायित्वों से उत्पन्न बाधाएं: कमिटी ने कहा कि टैरिफ हटाने से भारत का अविकसित इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग समय से पहले ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आ गया है। आईटीए-1 के तहत आयात पर शून्य शुल्क से भारत की आयात निर्भरता चीन जैसे कुछ देशों पर बढ़ गई है। कमिटी ने कहा कि इसकी वजह से काम केवल एसेंबली तक ही सीमित रह गया, जबकि मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा नहीं मिला। भारत में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण भी सीमित हो गया है। कमिटी ने एक उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त अंतर-मंत्रालयी समिति के गठन का सुझाव दिया, जोकि भारतीय आईटी उद्योग पर समझौते के प्रभाव की समीक्षा करे।
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सीमित रेगुलेटरी स्वायत्तता: आईटीए-1 समझौते में बाहर निकलने या पुनर्विचार के लिए कोई तंत्र शामिल नहीं है। यह समझौता मोस्ट फेवर्ड नेशन के आधार पर लागू होता है। इसका अर्थ यह है कि किसी एक देश को दिया गया व्यापारिक लाभ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अंतर्गत सभी देशों को मिलना चाहिए। इस सिद्धांत के कारण जिन देशों ने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, वे भी इसके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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कमिटी ने कहा कि आईटीए-1 के तहत निर्दिष्ट उत्पादों पर लागू टैरिफ नीति ने रेगुलेटरी और नीतिगत निर्णयों में भारत की स्वायत्तता को सीमित कर दिया है। समझौते से बाहर निकलने पर अन्य डब्ल्यूटीओ सदस्य देशों की ओर से जवाबी कार्रवाई भी हो सकती है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) गैर-टैरिफ उपायों जैसे अंतरिम उपाय करना, (ii) डब्ल्यूटीओ में प्रीडेटरी प्राइजिंग (बाजार से दूसरों को खत्म करने के लिए जान-बूझकर घाटे में सामान बेचना) का मुद्दा उठाना, और (iii) डब्ल्यूटीओ सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते करना।
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साइबर सुरक्षा की चुनौतियां: कमिटी ने कहा कि आईटीए-1 के तहत इलेक्ट्रॉनिक और आईटी उत्पादों की सीमा पार आवाजाही आसान होने से साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन के जोखिम बढ़ सकते हैं। यह निगरानी (सर्विलांस) और डेटा चोरी (डेटा हार्वेस्टिंग) की क्षमता रखने वाले एम्बेडेड सॉफ़्टवेयर के प्रति संवेदनशीलता या खतरे को भी बढ़ा सकता है। आईटीए-1 में किसी भी साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल या डेटा गोपनीयता मानकों का उल्लेख या प्रवर्तन नहीं है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और संबंधित नियमों के मौजूदा प्रावधानों को लागू करना, और (ii) सभी आयातित उपकरणों या यंत्रों के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में अनिवार्य परीक्षण और प्रमाणीकरण के माध्यम से सख्त सुरक्षा मानकों को लागू करना।
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मौजूदा आईटीए शर्तों में संशोधन: 2015 में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौते (आईटीए) पर पुनर्विचार किया गया। भारत ने आईटीए-2 पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। कमिटी ने आईटीए-2 में कई कमियों का उल्लेख किया। समझौते में कोई बाहर निकलने का कोई विशिष्ट क्लॉज़ नहीं है। 5जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी प्रौद्योगिकियों में उपयोग किए जाने वाले उत्पाद या तो इसमें शामिल नहीं हैं या उनका वर्गीकरण अस्पष्ट है। जब समझौते को अंतिम रूप दिया गया था, तब ये प्रौद्योगिकियां पूरी तरह से विकसित नहीं थीं। कमिटी ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में कई मुद्दों को उठाने का सुझाव दिया, जिनमें निम्न शामिल हैं: (i) आईटीए-2 के तहत 5जी उपकरण और एआई घटकों को शामिल करना, (ii) हाइब्रिड डिजिटल उत्पादों के लिए स्पष्ट वर्गीकरण, (iii) नए हार्मोनाइज्ड सिस्टम (एचएस) लाइन कोड और (iv) प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए तंत्र। एचएस एक अंतरराष्ट्रीय प्रणाली है जिसका उपयोग संख्यात्मक कोड का उपयोग करके व्यापारिक वस्तुओं को वर्गीकृत करने के लिए किया जाता है।
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ई-कचरा प्रबंधन: कमिटी ने कहा कि आईटीए के कारण आईटी उत्पादों की खपत में वृद्धि से ई-कचरा उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। ई-कचरा से तात्पर्य बेकार हो चुके बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) कर छूट/सबसिडी के माध्यम से रीसाइकलिंग को प्रोत्साहित करना, (ii) ई-कचरे के सुरक्षित निपटान को सुनिश्चित करने के लिए अनौपचारिक वेस्ट कलेक्टर्स को औपचारिक प्रणालियों में एकीकृत करना, और (iii) हरित प्रौद्योगिकियों में निवेश को बढ़ावा देना।
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विकासशील देशों के साथ सहयोग: कमिटी ने कहा कि विकासशील देशों को आईटीए को लागू करने में अनूठी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उसने विकासशील देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तरों पर मुक्त व्यापार समझौते विकसित करने और विकासशील देशों के लिए विशेष एवं तरजीही व्यवहार (स्पेशनल एंड प्रिफ्रेंशियल ट्रीटमेंट) हेतु विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में बातचीत करने की सुझाव दिया।
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