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पीडीएफ

पीएम-कुसुम और पीएम सूर्य घर का कार्यान्वयन

एस्टिमेट्स कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

पीएम-कुसुम और पीएम सूर्य घर का कार्यान्वयन

 

  • एस्टिमेट्स कमिटी (चेयर: डॉ. संजय जायसवाल) ने 4 दिसंबर, 2025 को ‘प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) और पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के कार्यान्वयन पर अपनी रिपोर्ट पेश की। पीएम-कुसुम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है। पीएम सूर्य घर रूफटॉप सोलर पैनल लगाने के लिए सहायता प्रदान करता है। कमिटी के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
  • विकेंद्रीकृत सौर संयंत्रों के लिए वित्तीय सहायता: पीएम-कुसुम योजना के तहत, 2026 तक 10,000 MW के विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। जुलाई 2025 तक 641 MW क्षमता स्थापित की जा चुकी थी। कमिटी ने कहा कि किसान इन संयंत्रों को स्थापित नहीं कर रहे हैं, इसके दो कारण हैं: (i) केंद्र सरकार से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता का अभाव है और (ii) कृषि भूमि को गैर-कृषि भूमि में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में काफी खर्च आता है। कमिटी ने लघु परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार को वित्तीय सहायता प्रदान करने का सुझाव दिया।
  • उच्च क्षमता वाले स्टैंडएलोन पंप को सहायता: पीएम-कुसुम योजना 7.5 हॉर्स पावर क्षमता तक के स्टैंडएलोन सौर कृषि पंप स्थापित करने के लिए सबसिडी प्रदान करती है। कमिटी ने गौर किया कि राजस्थान जैसे कई राज्यों में भूजल स्तर कम होने के कारण उच्च क्षमता वाले पंपों की जरूरत होती है और उनके लिए मानदंडों में संशोधन करने का सुझाव दिया।
  • ग्रिड से जुड़े पंपों का सौरीकरण: पीएम-कुसुम योजना ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सौरीकरण के लिए सहायता करती है। किसान अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली को वितरण कंपनियों को बेच भी सकते हैं। 1.5 लाख पंपों के लक्ष्य के मुकाबले 60,828 पंपों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से अधिकांश पंप नौ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तक ही सीमित रहे हैं। कमिटी ने कहा कि कुछ राज्य अपनी ओर से कोई अतिरिक्त वित्तीय सहायता नहीं देते हैं। इसके कारण किसानों को कुल लागत का लगभग 70% हिस्सा खुद वहन करना पड़ रहा है, जबकि केंद्र से सिर्फ 30% सहायता मिलती है। कमिटी ने फंडिंग बढ़ाने के तरीकों को खोजने का सुझाव दिया। कमिटी ने कहा कि निकटतम ग्रिड और किसानों द्वारा स्थापित सौर संयंत्र के बीच अधिक दूरी होने के कारण बिजली की निकासी की लागत अधिक हो सकती है। वर्तमान योजना बिजली निकासी के लिए किसानों को कोई सहायता या प्रोत्साहन नहीं प्रदान करती। कमिटी ने सुझाव दिया कि बिजली निकासी की जिम्मेदारी वितरण कंपनी को सौंपी जानी चाहिए।
  • एग्रीवोल्टेइक तकनीक को अपनाना: एग्रीवोल्टेइक तकनीक में एक ही जमीन पर खेती भी की जाती है और सौर ऊर्जा भी पैदा की जाती है। इसमें सोलर मॉड्यूल को ऊपर खंभे पर लगाया जाता है और नीचे की खाली जमीन और पैनलों की कतारों के बीच के स्थान का उपयोग फसल उगाने के लिए किया जाता है। कमिटी ने कहा कि ये अत्यधिक गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं और साथ ही किसान अतिरिक्त ऊर्जा बेचकर कमाई कर सकते हैं। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) एग्रीवोल्टेइक परियोजनाओं का फसलों और किसानों की आय पर क्या प्रभाव पड़ता है, उसका अध्ययन किया जाए, और (ii) बड़े पैमाने पर इसे अपनाने के लिए सबसिडी पर विचार किया जाए।
  • पीएम सूर्य घर के तहत प्रगति: एक करोड़ परिवारों के लक्ष्य के मुकाबले 1.38 करोड़ पंजीकरण प्राप्त हुए हैं। इनमें से 59 लाख आवेदनों पर कार्रवाई की जा चुकी है। हालांकि कमिटी ने योजना के कार्यान्वयन में अंतर-राज्यीय असमानता को काफी अधिक पाया। कमिटी ने अनुमोदन और सबसिडी वितरण में देरी जैसी बाधाओं को दूर करने का सुझाव दिया। कमिटी ने यह भी कहा कि ऋणों की अस्वीकृति दर काफी अधिक है। ऋण की स्वीकृति में घर के स्वामित्व पर स्पष्टता की कमी एक बड़ी बाधा है। कमिटी ने उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाने और ऋणों की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
  • वेंडर्स को पैनल में शामिल करना: पीएम-सूर्य घर योजना के तहत, वेंडर्स को अनुमोदन, इंस्टॉलेशन और रखरखाव संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वेंडर को वितरण कंपनी के साथ पंजीकरण कराना होगा और 2.5 लाख रुपए की परफॉर्मेंस बैंक गारंटी देनी होगी। कमिटी ने कुछ राज्यों में पर्याप्त संख्या में वेंडर्स की कमी देखी। कमिटी ने वेंडर्स की संख्या बढ़ाने के प्रोत्साहन के रूप में गारंटी राशि को कम करने का सुझाव दिया।
  • घटकों की आपूर्ति: कमिटी ने कहा कि देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए आवश्यक घटकों की आपूर्ति में कमी आ रही है। कमिटी ने आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और घटकों के स्थानीय उत्पादन में निवेश बढ़ाने का सुझाव दिया।
  • लाभार्थियों का कवरेज बढ़ाना: कमिटी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कृषि क्षेत्रों में कई एकल आवास इकाइयां (सिंगल ड्वेलिंग यूनिट्स) (यानी खेतों में बने अकेले घर) हैं। लोग कृषि कार्यों के लिए इन इकाइयों में रहते हैं। इन इकाइयों में बिजली ग्रिड से नियमित बिजली कनेक्शन नहीं है। कमिटी ने ऐसी इकाइयों के लिए रूफटॉप सोलर पर सबसिडी देने का सुझाव दिया। कमिटी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के लाभार्थी अग्रिम लागत का भुगतान करने में असमर्थता के कारण रूफटॉप सोलर सिस्टम नहीं लगा पाते। कमिटी ने प्रत्येक पीएमएवाई आवंटी को 500 वाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम देने का सुझाव दिया।  

 

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

 

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