स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश
-
रसायन एवं उर्वरक से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री आज़ाद कीर्ति झा) ने 1 दिसंबर, 2025 को 'फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में दवाओं की बढ़ती कीमतों का आम नागरिकों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव- एक समीक्षा' विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्न शामिल हैं:
-
दवाओं और मेडिकल उपकरणों की उच्च कीमतें: कमिटी ने कहा कि अक्सर लिखी जाने वाली दवाएं ऊंची कीमतों पर बेची जाती हैं। कमिटी ने कार्डिएक स्टेंट्स और एंटी कैंसर दवाओं की कीमतों में वृद्धि पर भी गौर किया। भारत में दवाओं की कीमतें औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 के तहत रेगुलेटेड हैं। डीपीसीओ राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) को अनुसूचित दवाओं के लिए मूल्य सीमा निर्धारित करने का अधिकार देता है। ये दवाएं राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल हैं।
-
गैर-अनुसूचित दवाओं का मूल्य निर्धारण: वर्तमान में एनपीपीए गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमतें निर्धारित नहीं करता है। मैन्यूफैक्चरर्स को गैर-अनुसूचित दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत में वार्षिक 10% से अधिक की वृद्धि करने की अनुमति नहीं है। हालांकि इन दवाओं की प्रारंभिक कीमत तय नहीं है। इससे गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमत मनमाने ढंग से तय की जा सकती है। कमिटी ने यह भी पाया कि निश्चित खुराक वाली संयोजन दवाएं (कॉम्बिनेशन ड्रग्स) भी एनपीपीए द्वारा निर्धारित मूल्य नियमों के दायरे से बाहर हैं। ये ऐसे उत्पाद हैं जिनमें किसी विशेष संकेत (बीमारी के इलाज) के लिए एक या अधिक सक्रिय तत्व (एक्टिव इंग्रेडिएंट्स) होते हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि एनपीपीए को गैर-अनुसूचित दवा फॉर्मूलेशन के मूल्यों पर उचित नियंत्रण लागू करने पर विचार करना चाहिए।
-
ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन: कमिटी ने कहा कि हालांकि दवाओं की कीमतों में वृद्धि मुद्रास्फीति के अनुपात में ही रही है, लेकिन कुछ दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन अभी भी बहुत बना हुआ है। ट्रेड मार्जिन सप्लायर को दी जाने वाली कीमत और दवा की खुदरा कीमत के बीच का अंतर होता है। कमिटी ने कहा कि ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाना दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने का एक व्यावहारिक साधन है। हालांकि डीपीसीओ, 2013 केवल एक सीमित समय अवधि के लिए ही ट्रेड मार्जिन की अधिकतम सीमा तय करने की अनुमति देता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि डीपीसीओ, 2013 में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि इसमें ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन की अनुमति देने वाले कानूनी प्रावधानों को शामिल किया जा सके।
-
कमिटी ने यह भी कहा कि स्टॉकिस्ट को दी जाने वाली कीमत (पीटीएस) का डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। पीटीएस से तात्पर्य उस कीमत से है जिस पर कोई कंपनी वितरकों को उत्पाद बेचती है। कमिटी ने पीटीएस और अधिकतम खुदरा मूल्य के बीच अंतर का अध्ययन करने का सुझाव दिया।
-
ऑनलाइन ड्रग प्लेटफॉर्म्स: कमिटी ने कहा कि ऑनलाइन दवा प्लेटफार्म्स पर कीमतों की निष्पक्षता या उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में कोई तंत्र मौजूद नहीं है। कमिटी ने ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए एक रेगुलेटरी ढांचा बनाने का सुझाव दिया। साथ ही कमिटी ने ऐसे प्लेटफार्म्स की कड़ी निगरानी का भी सुझाव दिया।
-
कोरोनरी स्टेंट की कीमतों का रेगुलेशन: कमिटी ने कहा कि 2017 और 2024 के बीच बेयर मेटल स्टेंट और ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट की कीमतों में क्रमशः 44% और 29% की वृद्धि हुई है। कमिटी ने स्टेंट की कीमतों को कम करने और यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय करने का सुझाव दिया कि मरीजों से स्टेंट के लिए अधिक शुल्क न लिया जाए।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

