स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश
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विदेश मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. शशि थरूर) ने 18 दिसंबर, 2025 को "भारत-बांग्लादेश संबंधों का भविष्य" विषय पर अपनी रिपोर्ट पेश की। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
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बांग्लादेश में कानून और व्यवस्था: कमिटी ने बांग्लादेश में व्याप्त अस्थिरता, हिंसा की घटनाओं और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों पर गौर किया। उसने आतंकवाद और अतिवाद के दोषी कैदियों की रिहाई और भाग निकलने की घटनाओं का भी उल्लेख किया, जो भारत के लिए सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। कमिटी ने भारत को निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का समर्थन जारी रखना, और (ii) बांग्लादेशी मीडिया में भारत विरोधी बयानों या गलत सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए कदम उठाना।
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सीमा समझौतों को लागू करना: 2015 में भारत और बांग्लादेश ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, ताकि अपनी जमीनी सीमा को सुलझाकर सीधा और साफ बनाया जा सके और और एक दूसरे के इलाकों (एन्क्लेव्स) की अदला बदली की जा सके। कमिटी ने पाया कि सीमांकन संबंधी कुछ काम अब भी बाकी हैं, विशेष रूप से सुंदरबन जैसे कठिन इलाकों में, जिन्हें बिना देरी किए जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
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सीमा प्रबंधन: भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा है जिसमें से 864 किलोमीटर पर बाड़ नहीं लगी है। कमिटी ने कहा कि इस 864 किलोमीटर में से 689 किलोमीटर पर बाड़ लगाना संभव है और सुझाव दिया कि इस काम को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए। कमिटी ने यह सुझाव भी दिया कि सरकार ड्रोन, मोशन सेंसर्स और सेटेलाइड आधारित सिस्टम्स जैसी आधुनिक निगरानी प्रणालियों को प्राथमिकता दे। साथ ही कमिटी ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए कार्यक्रम चलाने और दोनों देशों के सीमा बलों के बीच तालमेल बढ़ाने का भी सुझाव दिया।
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गैरकानूनी अवैध आप्रवास: कमिटी ने गौर किया कि संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के 2,369 मामले ऐसे हैं जिनकी राष्ट्रीयता के सत्यापन का काम बांग्लादेश के पास लंबित है। भारत में हिरासत में लिए गए बांग्लादेश नागरिकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि करने और उन्हें वापस भेजने की जिम्मेदारी विदेश मंत्रालय की है। कमिटी ने सुझाव दिया कि इन मामलों की प्रगति की निगरानी के लिए दोनों देशों के बीच एक समर्पित द्विपक्षीय तंत्र या संयुक्त कार्य समूह स्थापित किया जाए।
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व्यापार संबंध: कमिटी ने द्विपक्षीय व्यापार में कुछ प्रमुख बाधाओं का उल्लेख किया, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बांग्लादेश द्वारा आयात शुल्क, (ii) भूमि बंदरगाहों पर भीड़भाड़, (iii) सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता, और (iv) वेयरहाउसिंग और क्वारंटाइन सुविधाओं का अभाव। कमिटी ने सुझाव दिया कि एकीकृत चेक पोस्टों का विस्तार करके, परिवहन संपर्क में सुधार करके, वेयरहाउसिंग की सुविधाओं को बेहतर बनाकर और डिजिटल व्यापार सुविधा पर जोर देकर प्रमुख सीमा व्यापार बिंदुओं के बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाया जा सकता है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव भी दिए: (i) व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत 2026 तक पूरी हो जाए, और (ii) बांग्लादेश-भूटान-भारत-नेपाल मोटर वाहन समझौते के तहत लंबित प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया जाए।
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लाइन्स ऑफ क्रेडिट को सुव्यवस्थित करना: कमिटी ने गौर किया कि भारत ने बांग्लादेश को सीमा संपर्क (एलओसी) और अनुदान के रूप में लगभग 10 अरब USD की विकासात्मक सहायता प्रदान की है। कमिटी ने यह भी उल्लेख किया कि एलओसी दिए जाने के बावजूद कई परियोजनाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। जहां परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, वहां निविदा संबंधी बाधाओं, प्रक्रियागत अड़चनों और सुरक्षा चिंताओं के कारण देरी हो रही है। कमिटी ने मौजूदा एलओसी पोर्टफोलियो की व्यापक समीक्षा करने का सुझाव दिया।
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कमिटी ने बांग्लादेश की रक्षा, अवसंरचना और बंदरगाह विकास में बढ़ते चीनी प्रभाव पर भी गौर किया। उसने इन घटनाक्रमों की कड़ी निगरानी का सुझाव दिया जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
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जल सहयोग: कमिटी ने गौर किया कि दोनों देश 54 सीमा पार नदियों को साझा करते हैं, लेकिन केवल गंगा और दो अन्य नदियों से संबंधित समझौते ही हुए हैं। अन्य साझा नदियों, विशेष रूप से तीस्ता नदी पर कोई समझौता नहीं है। कमिटी ने गंगा जल संधि पर द्विपक्षीय चर्चा शुरू करने का सुझाव दिया जो 2026 में समाप्त हो जाएगी। उसने यह सुझाव भी दिया कि संयुक्त नदी आयोग (बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और चक्रवात पूर्वानुमान पर सहयोग के लिए प्राथमिक तंत्र) की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए।
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