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पीडीएफ

भारत-यूएस व्यापार संबंधों का मूल्यांकन

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • वाणिज्य से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: सुश्री डोला सेन) ने 6 अगस्त, 2026 को 'भारत-यूएस व्यापार संबंधों का मूल्यांकन' पर अपनी रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में इस बात की समीक्षा की गई है कि 2025 में यूएसए ने जो टैरिफ़ लगाए थे, उसका भारत के निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों पर क्या असर हुआ। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • यूएस के साथ द्विपक्षीय संबंध: कमिटी ने गौर किया कि भारत और यूएसए का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है, जिसके लिए द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत चल रही है। कमिटी ने सुझाव दिया कि सरकार भारत के हितों की रक्षा करते हुए जल्द से जल्द बीटीए को अंतिम रूप दे और निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने तथा वैश्विक आपूर्ति झटकों के मुकाबले लागत-प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना का रणनीतिक रूप से इस्तेमाल करे। कमिटी ने सुझाव दिया कि भारत को यूएस के लिए ज़रूरी सप्लाई चेन में खुद को गहराई से जोड़ना चाहिए और यूएस से भारत के मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में एफडीआई को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही, जेनेरिक दवाएं, ज़रूरी खनिजों और स्मार्टफ़ोन जैसे अहम निर्यात के लिए पूरी छूट की बातचीत भी करनी चाहिए। डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र के लिए एक खास फ़्रेमवर्क बनाया जाना चाहिए, जो क्रॉस-बॉर्डर डेटा फ़्लो और बौद्धिक संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा के बीच तालमेल बैठा सके। इसके अलावा, व्यापार में मनमाने तकनीकी अवरोधों को रोकने के लिए पेशेवर सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि मानकों के लिए पारस्परिक मान्यता समझौतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कमिटी ने व्यापारिक विवादों को बढ़ने से पहले ही सुलझाने के लिए यूएस के अधिकारियों के साथ एक त्वरित संस्थागत तंत्र बनाने और यूएस जाने वाले व्यापार के लिए समर्पित निर्यात गलियारे तथा स्वचालित सीमा शुल्क निकासी क्षेत्र विकसित करने का भी सुझाव दिया।

  • ऑटोमोटिव और इंजीनियरिंग निर्यात: कमिटी ने गौर किया कि 2024-25 में भारत ने ऑटो कम्पोनेंट्स के क्षेत्र में 453 मिलियन USD का व्यापार अधिशेष दर्ज किया। कमिटी ने कहा कि यूएसए के अतिरिक्त टैरिफ़ ने भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात, विशेष रूप से ऑटो कम्पोनेंट्स, मशीनरी और कमर्शियल वाहनों के पुर्जों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित किया है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) में इंजीनियरिंग वस्तुओं पर टैरिफ़ कटौती को प्राथमिकता दी जाए, (ii) छोटे मैन्यूफैक्चरर्स को लक्षित वित्तीय सबसिडी और निर्यात ऋण पर कम ब्याज दरें प्रदान की जाएं, और (iii) वैश्विक मानकों के अनुरूप स्थायी मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता को प्रोत्साहित किया जाए।

  • रत्न और आभूषण: कमिटी ने कहा कि यूएसए, भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए निर्यात का सबसे बड़ा बाज़ार है। कमिटी ने गौर किया कि 2025 के टैरिफ़ उपायों के कारण यूएसए को होने वाले भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात में लगभग 48% की गिरावट आई, जबकि दुनिया भर में निर्यात में लगभग 5% की कमी हुई। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) प्रतिस्पर्धियों के साथ टैरिफ़ में बराबरी पाने के लिए खास तौर पर द्विपक्षीय बातचीत करना, (ii) निर्यात ऋण और बीमा के ज़रिए इस क्षेत्र के लिए सपोर्ट पैकेज देना, (iii) किसी एक बाज़ार पर निर्भरता कम करने के लिए हांगकांग, थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम में आभूषण व्यापार और वितरण केंद्र बनाना, और (iv) टैरिफ़ और नॉन-टैरिफ़ जोखिमों पर नज़र रखने या शुरुआती चेतावनी देने वाला सिस्टम बनाना।

  • टेक्सटाइल और एपेरल (कपड़ा): कमिटी ने कहा कि टैरिफ़ की वजह से चीन, वियतनाम और बांग्लादेश के मुकाबले भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो रहा है। 2024-25 में भारत के निटवियर निर्यात में यूएसए की हिस्सेदारी 34%, कालीन निर्यात में 59% और हस्तशिल्प निर्यात में 40% थी। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) टेक्निकल टेक्सटाइल, मैन-मेड फाइबर प्रोडक्ट, सस्टेनेबल टेक्सटाइल और वैल्यू-एडेड कपड़ों के क्षेत्र में विस्तार करना, (ii) मैन-मेड फाइबर मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर बनाना, (iii) प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क, पीएलआई और समर्थ योजना को तेज़ी से लागू करना, और (iv) एमएसएमई निर्यातकों के लिए इमरजेंसी राहत देना।

  • समुद्री और कृषि उत्पाद: टैरिफ़ बढ़ने के बाद, यूएसए को होने वाला कृषि निर्यात 2024-25 में 5.8 बिलियन USD से घटकर 2025-26 में लगभग 5 बिलियन USD हो गया। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) किसी भी बीटीए में छोटे और सीमांत किसानों की सुरक्षा करना, (ii) सीमाओं पर सामानों की नामंजूरी से बचने के लिए यूएस कस्टम्स के साथ प्री-क्लियरेंस प्रोटोकॉल बनाना, और (iii) भारतीय जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) उत्पादों के लिए रणनीतिक सुरक्षा। कमिटी ने यह भी गौर किया कि टैरिफ़ और ट्रेड रेमेडीज़ की वजह से भारत के समुद्री क्षेत्र पर ड्यूटी बढ़कर 58% हो गई है, जो प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी ज़्यादा है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिया: (i) निर्यातकों, प्रोसेसर्स और झींगा पालकों के लिए एक सपोर्ट पैकेज, और (ii) एंटी-डंपिंग ड्यूटी पर उच्च-स्तरीय बातचीत।

  • रसायन और पेट्रोरसायन: कमिटी ने गौर किया कि टैरिफ़ बढ़ने के कारण यूएसए को पेट्रोकेरसायन और पॉलिमर का निर्यात लगभग 31% घट गया, जबकि कृषिरसायनों और कीटनाशकों का निर्यात लगभग 6% कम हुआ। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) भारत के सुगंधित तेल क्षेत्र के लिए एक सख्त सुरक्षा ढांचा बनाना, और (ii) विशिष्ट और प्रदर्शन रसायन के क्षेत्र में विविधता लाना।

  • धातु और खनिज: कमिटी ने कहा कि यूएसए ने: (i) भारतीय स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर पर 25-50% का टैरिफ़ लगाया है, (ii) रक्षा खरीद से भारतीय स्टेनलेस स्टील को बाहर रखा है, और (iii) कुछ स्टेनलेस-स्टील वस्तुओं पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी बढ़ाई है। भारत के तैयार स्टील निर्यात में यूएसए की हिस्सेदारी लगभग 2.7% है। इस संबंध में कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) भविष्य में रुकावट से बचने के लिए एल्युमीनियम और कॉपर स्क्रैप तक लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के पहुंच सुनिश्चित करना, और (ii) महत्वपूर्ण खनिज वैल्यू चेन में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन' और 'क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव' का लाभ उठाना।

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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