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पीडीएफ

राष्ट्रीय पेट्रोरसायन नीति, 2007 की समीक्षा

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

 

  • रसायन और उर्वरकों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री आज़ाद कीर्ति झा) ने 6 अगस्त, 2026 को "राष्ट्रीय पेट्रोरसायन नीति, 2007 की समीक्षा" पर अपनी रिपोर्ट पेश की। इस राष्ट्रीय नीति का उद्देश्य पेट्रोरसायन क्षेत्र में निवेश और घरेलू मांग को बढ़ाना है। पेट्रोरसायनों की घरेलू मांग 2007 में 9 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) से बढ़कर 2024 में 40 MMT हो गई है। साथ ही, उत्पादन भी 8.6 MMT से बढ़कर 28 MMT हो गया है। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
  • 2007 की नीति की समीक्षा: कमिटी ने गौर किया कि नीति लागू होने के बाद से इस क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं। विश्वव्यापी प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत लक्ष्यों को पूरा करने की ज़रूरत बढ़ रही है। कमिटी ने नीति की व्यापक समीक्षा शुरू करने का सुझाव दिया ताकि उद्योग जगत की मौजूदा ज़रूरतों को शामिल किया जा सके और भविष्य में तेज़ी से विकास के लिए ऊंचे लक्ष्य तय किए जा सकें।
  • निवेश क्षेत्रों की समीक्षा: मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए गुजरात, आंध्र प्रदेश और ओड़िशा में तीन पेट्रोलियम, केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स इन्वेस्टमेंट रीजन (पीसीपीआईआर) बनाए गए। हर क्षेत्र में एक रिफाइनरी या पेट्रोरसायन फीडस्टॉक कंपनी मुख्य कंपनी (एंकर टेनेंट) के तौर पर होनी चाहिए। कमिटी ने गौर किया कि गुजरात के पीसीपीआईआर के मुकाबले, आंध्र प्रदेश और ओड़िशा के बाकी दो क्षेत्र निवेश और रोज़गार के मामले में पीछे थे। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश पीसीपीआईआर को कोई मुख्य कंपनी (एंकर टेनेंट) नहीं मिल पाई है। कमिटी ने मौजूदा कमियों का पता लगाने और उन्हें ठीक करने के लिए नीति की पूरी समीक्षा करने की सलाह दी।
  • सिंथेटिक फाइबर के उत्पादन को बढ़ाना: कमिटी ने कहा कि भारत की सिंथेटिक फाइबर की उत्पादन क्षमता 9,700 किलो टन (KT) है। इसके मुकाबले, 2024 में वास्तविक उत्पादन और निर्यात क्रमशः 6,700 KT और 370 KT रहा। कमिटी ने कहा कि उत्पादन की तुलना में निर्यात की मात्रा कम थी। कमिटी ने सिंथेटिक फाइबर के उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के लिए कदम उठाने का सुझाव दिया।
  • प्लास्टिक विकास परिषद (पीसीडी) का पुनर्गठनः प्लास्टिक प्रोसेसिंग क्षेत्र के लगातार विकास के लिए 2007 की नीति के तहत पीडीसी को एक सलाहकार संस्था के तौर पर बनाया गया था। परिषद का कार्यकाल 2013 में खत्म हो गया और कोई नई परिषद नहीं बनाई गई। पीडीसी के दायरे में आने वाले कार्य, जैसे निर्यात को बढ़ावा देना और बाजार तक पहुंच बनाना, अब वाणिज्य मंत्रालय के तहत दूसरी परिषद कर रही हैं। कमिटी ने पाया कि यह नीति से अलग हटकर है और पीडीसी को फिर से बनाने का सुझाव दिया।
  • प्लास्टिक पार्क में देरी: प्लास्टिक प्रोसेसिंग उद्योग में इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए 2012 में प्लास्टिक पार्क बनाने की योजना शुरू की गई थी। कमिटी ने कहा कि 10 प्लास्टिक पार्कों को मंज़ूरी दी गई थी। इन मंज़ूर पार्कों में कुल 919 प्लॉट में से 322 प्लॉट आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, 50 प्लॉट चालू हालत में हैं। झारखंड, तमिलनाडु और कर्नाटक में प्लास्टिक पार्कों के लिए कोई भी प्लॉट आवंटित नहीं किया गया है। कमिटी ने अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर के काम को पूरा करने के लिए राज्य सरकारों के साथ तालमेल बिठाने की सलाह दी।
  • प्लास्टिक कचरा प्रबंधन केंद्र: कमिटी ने कहा कि बेंगलुरु, भागलपुर और वाराणसी में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के तीन केंद्र (पीडब्ल्यूएमसी) काम कर रहे हैं। ये केंद्र पर्यावरण के अनुकूल और मूल्य संवर्धित रीसाइकिलिंग जैसे समाधान देते हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि देश भर में ऐसे और केंद्र बनाए जाने चाहिए।
  • सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस (सीओईज़): कमिटी ने कहा कि देश में 18 सीओई हैं, जो देश की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए शायद काफ़ी नहीं हैं। इसके अलावा, सीओई ने 96 नए उत्पाद या तकनीक विकसित की हैं। हालांकि वे इनमें से केवल 38 को ही उद्योग को हस्तांतरित कर पाए। कमिटी ने और सीओई स्थापित करने और पेटेंट फ़ाइल करने व मंज़ूरी मिलने तथा बाकी उत्पाद और तकनीकी हस्तांतरण के संबंध में सीओई के कामकाज की समीक्षा करने का सुझाव दिया।

 

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

 

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