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बिजली क्षेत्र

वाइटल स्टैट्स

बिजली क्षेत्र

बिजली क्षेत्र में हाल के महीनों में कई कदम उठाए गए हैं। बिजली एक्ट, 2003 और ऊर्जा संरक्षण एक्ट, 2001 में संशोधन करने वाले बिल संसद में पेश किए गए हैं जिनमें बिजली वितरण क्षेत्र में सुधार तथा नॉन-फॉसिल एनर्जी यूज ऑब्लिगेशन और कार्बन क्रेडिट्स जैसे उपायों का प्रस्ताव रखा गया है। इस महीने केंद्रीय बिजली अथॉरिटी (सीईए) ने ड्राफ्ट राष्ट्रीय बिजली योजना को जारी किया है जिसमें अगले 10 वर्षों के लिए क्षमता में वृद्धि के लक्ष्य की रूपरेखा है। 2016 में भारत का लगभग 40% ग्रीनहाउस उत्सर्जन बिजली क्षेत्र से होता है। इसलिए जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य से हरित ऊर्जा स्रोतों में संक्रमण महत्वपूर्ण बिंदु है। इसके मद्देनजर, यह नोट भारत में बिजली क्षेत्र में उभरती कुछ मुख्य प्रवृत्तियों को पेश करता है।

अगले दशक में बिजली की मांग दोगुनी होने का अनुमान, प्रति व्यक्ति खपत फिर भी कम रहेगी

सीईए ने 2021-22 और 2031-32 के बीच भारत की बिजली की मांग में 1.8 गुना बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। इस दर पर भारत की वार्षिक प्रति व्यक्ति बिजली खपत 2031-32 में 1,700-1,800 यूनिट होगी। 2017 में भारत की प्रति व्यक्ति बिजली खपत अधिकतर विकसित देशों के मुकाबले काफी कम थी।

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नोट: *2026-27 और 2031-32 के आंकड़े सीईए द्वारा अनुमानित हैं। 

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2017-2022 के लिए उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लक्ष्य पूरे नहीं हुए

2017-22 की अवधि (मार्च 2022 तक) के लिए भारत ऊर्जा के सभी प्रमुख स्रोतों की क्षमता में वृद्धि के लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाया। सीईए ने कोविड-19 महामारी के प्रकोप, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुद्दों, कॉन्ट्रैक्टर्स के पास फंड की कमी और कॉन्ट्रैक्ट से संबंधित विवादों को चिन्हित किया जिनके कारण विलंब हुआ। पिछले पांच वर्षों के दौरान परमाणु उत्पादन क्षमता में कोई वृद्धि नहीं हुई।

भारत ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा की 175 GW की स्थापित क्षमता का लक्ष्य रखा था (बड़ी जल ऊर्जा को छोड़कर)। अगस्त 2022 तक इस लक्ष्य के विपरीत कुल अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता 116 GW थी।

2017-2022 के दौरान क्षमता में वृद्धि (GW में)

स्रोत

लक्ष्य/निर्धारित

वास्तविक

कमी

सौर

88

42

46

कोयला

48

31

17

पवन

28

8

20

जल

7

3

4

परमाणु

3

0

3

बायोमास और गैस

2

2

0

कुल

176

85

91

जलवायु से संबंधित लक्ष्य बरकरार

सीईए के अनुसार, 2022-32 के दौरान भारत कुल 472 GW की स्थापित क्षमता वृद्धि का लक्ष्य रखेगा। इसमें से लगभग 80% दो स्रोतों से होगा- सौर (279 GW) और पवन (94 GW)। ये लक्ष्य कॉप-26 शिखर सम्मेलन में भारत के वचन के अनुकूल हैं। यहां भारत ने वचन दिया था कि 2030 तक भारत की नॉन-फॉसिल उत्पादन क्षमता 500 GW होगी। इसके लिए 32 लाख करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। भारत ने 2030 तक अक्षय स्रोतों से अपनी बिजली की 50% जरूरत को पूरा करने का लक्ष्य भी रखा है। सीईए का अनुमान है कि भारत इस लक्ष्य के करीब है, अगर क्षमता में वृद्धि के उपरिलिखित लक्ष्य हासिल कर लिए जाते हैं।

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नोट: *2026-27 और 2031-32 के आंकड़े सीईए द्वारा अनुमानित हैं।

डिस्कॉम्स में वित्तीय घाटा जारी, तकनीकी और कमर्शियल घाटे उच्च स्तर पर बरकरार

वितरण इकाइयों, चाहे वे राज्य सरकार के स्वामित्व वाले उद्यम हों या सरकारी बिजली विभाग, में वित्तीय घाटा बरकरार है। यह उदय योजना (2015) जैसे सरकारी कदमों के बावजूद है जिनका उद्देश्य इन इकाइयों का वित्तीय और परिचालनगत कायाकल्प करना है। 2017-18 और 2019-20 के बीच कुल घाटा 2.2 लाख करोड़ रुपए का था। गुजरात, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में राजस्व, सप्लाई की प्रति यूनिट लागत से कम था। 

राष्ट्रीय स्तर पर कुल तकनीकी और कमर्शियल घाटा 2019-20 में 21% था जोकि यूके और यूएसए जैसे देशों से काफी अधिक था (5%-8%)। ऊर्जा हस्तांतरण में अपरिहार्य घाटों, वितरण नेटवर्क के इष्टतम से निचले स्तर पर होने के कारण नुकसान, चोरी, अपर्याप्त मीटरिंग और भुगतान में चूक के कारण यह घाटा हुआ।

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प्राप्त होने वाली वास्तविक सरकारी सबसिडी और (i) उदय योजना के तहत प्राप्त राजस्व अनुदान, और (ii) रेगुलेटरी आय को हटाने के बाद यह घाटा दर्ज किया गया है।

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नोट: एसीएस: सप्लाई की औसत लागत, एआरआर: औसत राजस्व प्राप्ति

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नोट: एटीएंडसी: कुल तकनीकी और कमर्शियल, यह ग्रिड में बिजली के इनपुट का प्रतिशत बताता है, जिसके लिए डिस्कॉम को कोई भुगतान नहीं मिला

क्रॉस-सबसिडी और सरकारी सबसिडी कुछ ग्राहकों के लिए बिजली को वहन योग्य बनाती हैं

सरकारी सबसिडी और औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ताओं से क्रॉस सबसिडी आवासीय और कृषि उपभोक्ताओं के लिए बिजली को वहन योग्य बनाने की कोशिश है। उदाहरण के लिए 2019-20 मे कृषि उपभोक्ताओं को 21% कुल बिजली सप्लाई की गई, जबकि कुल राजस्व में उनका हिस्सा सिर्फ 2% था। औद्योगिक उपभोक्ताओं ने राजस्व में लगभग 34% का योगदान दिया लेकिन बिजली की बिक्री में उनका हिस्सा 28% था।

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2015-16 और 2019-20 के बीच राज्य सरकारों की बिजली सबसिडी उनकी राजस्व प्राप्तियों का लगभग 4%-4.5% थी। 2019-20 में निम्नलिखित राज्यों ने सबसे ज्यादा सबसिडी का दावा किया (रुपए के लिहाज से): (i) मध्य प्रदेश (16,722 करोड़ रुपए), (ii) राजस्थान (12,921 करोड़ रुपए), और (iii) कर्नाटक (11,864 करोड़ रुपए)।

         

Sources: Draft National Electricity Plan September 2022, National Electricity Plan 2018, Growth Of Electricity Sector In India From 1947-2020, 

India Electricity Statistics 2021, Executive Summary reports of various months, Installed Capacity reports of various months, Central Electricity Authority; India Energy Dashboard, NITI Aayog; Reports on Performance of Power Utilities of various years, Power Finance Corporation; State Budget Documents; PRS.

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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