मंत्रालय: 
महिला एवं बाल कल्याण
 
  • लोकसभा में 21 दिसंबर, 2021 को बाल विवाह निषेध (संशोधन) बिल, 2021 पेश किया गया। बिल महिलाओं के विवाह की न्यूनतम आयु को बढ़ाने के लिए बाल विवाह निषेध एक्ट, 2006 में संशोधन करता है।
     
  • महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु को बढ़ाना: एक्ट में प्रावधान है कि पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष है। बिल महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु को बढ़ाकर 21 वर्ष करता है। बिल विवाह संबंधी कुछ अन्य कानूनों में भी संशोधन करता है ताकि उन कानूनों में महिलाओं की न्यूनतम आयु को बढ़ाकर 21 वर्ष किया जा सके। ये कानून हैं: (i) भारतीय ईसाई विवाह एक्ट, 1872, (ii) पारसी विवाह एवं तलाक एक्ट, 1936, (iii) विशेष विवाह एक्ट, 1954, (iv) हिंदू विवाह एक्ट, 1955, और (v) विदेश विवाह एक्ट, 1969
     
  • बाल विवाह को खत्म करने के लिए याचिका दायर करने की समय अवधिएक्ट के अंतर्गत बाल विवाह का मतलब यह है कि जिसमें विवाह का कोई भी एक पक्ष बच्चा हो (यानी विवाह की न्यूनतम आयु से कम आयु वाला)। एक्ट में प्रावधान है कि बाल विवाह को उस पक्ष द्वारा खत्म किया जा सकता है जो विवाह के समय बच्चा था। वह पक्ष विवाह को खत्म करने के आदेश के लिए जिला अदालत में याचिका दायर कर सकता है। उस पक्ष को बालिग होने के दो वर्ष के अंदर यह याचिका दायर करनी होती है (यानी 20 वर्ष का पूरा होने से पहले)। बिल इसमें संशोधन करता है और कहता है कि उस पक्ष को बालिग होने के पांच वर्ष के भीतर यह याचिका दायर करनी होगी (यानी 23 वर्ष का पूरा होने से पहले)।
     
  • महिलाओं की विवाह की न्यूनतम को आयु बढ़ाने तथा बाल विवाह को खत्म करने के लिए याचिका दायर करने की समय अवधि में संशोधन, बिल को सम्मति मिलने की तारीख से दो वर्ष बाद प्रभावी होंगे। 
     
  • विवाद की स्थिति में एक्ट ही लागू होगाबिल कहता है कि अगर किसी कानून या प्रथा, रूढ़ि (जोकि विवाह से संबंधित पक्षों को नियंत्रित करती हैं), का एक्ट से अंतर्विरोध होता है तो उस स्थिति में एक्ट ही लागू होगा। 

 

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