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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल, 2026 को 25 मार्च, 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया। यह बिल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के अधिकारियों से संबंधित कुछ मामलों को रेगुलेट करने का प्रयास करता है। वर्तमान में, ऐसे मामले संबंधित कानूनों के तहत रेगुलेट किए जाते हैं। इस बिल का उद्देश्य विधायी स्पष्टता को सुनिश्चित करना, कार्यगत विशेषता को बरकरार रखना और न्यायिक निर्देशों को सरकारी और संघीय जरूरतों के साथ तालमेल में लाना है।
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नियम बनाने की शक्तियां: यह बिल केंद्र सरकार को सीएपीएफ के अधिकारियों से जुड़े मामलों पर नियम बनाने का अधिकार देता है। इनमें भर्ती, डेप्युटेशन, प्रमोशन और सेवा का शर्तें शामिल हैं। यह बिल अनुसूची में सूचीबद्ध पांच सीएपीएफ पर लागू होता है। ये इस प्रकार हैं: (i) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बिल, (ii) सीमा सुरक्षा बल, (iii) केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, (iv) भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, और (v) सशस्त्र सीमा बल। केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा अनुसूची में संशोधन करके बिल को अन्य सीएपीएफ पर लागू कर सकती है। बिल के तहत आने वाले अधिकारियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ग्रुप ए अधिकारी- सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी (जनरल ड्यूटी या एग्जीक्यूटिव), (ii) आईपीएस अधिकारी- भारतीय पुलिस सेवा वे अधिकारी जो डेप्युटेशन पर हैं, और (iii) भारतीय सेना के वे अधिकारी जो डेप्युटेशन पर हैं या जिन्हें फिर से नौकरी पर रखा गया है।
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बिल में यह प्रावधान है कि केंद्र सरकार किसी अन्य कानून, किसी न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश, या किसी सरकारी आदेश के बावजूद नियम बना सकती है। संबंधित कानूनों के अंतर्गत निर्दिष्ट नियम तब तक लागू रहेंगे, जब तक उनमें संशोधन नहीं किया जाता या उन्हें रिप्लेस नहीं किया जाता। वित्तीय लाभों से संबंधित कोई आदेश भी तब तक लागू रहेंगे, जब तक नए आदेश जारी नहीं हो जाते।
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डेप्युटेशन के जरिए पदों पर भर्तियां: सीएपीएफ में निम्नलिखित पदों पर आईपीएस अधिकारी ही डेप्युटेशन पर तैनात किए जाएंगे: (i) इंस्पेक्टर जनरल रैंक के 50% पद, (ii) एडिशनल डायरेक्टर रैंक के कम से कम 67% पद, और (iii) डायरेक्टर जनरल और स्पेशल डायरेक्टर जनरल रैंक के सभी पद।
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सर्वोपरि प्रभाव (ओवरराइडिंग इफेक्ट): अगर इस बिल और किसी दूसरे कानून के बीच कोई विरोधाभास होता है तो इस बिल के प्रावधान ही माने जाएंगे।
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