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बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को 3 अगस्त, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। बिल बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 को निरस्त कर, उसका स्थान लाने का प्रयास करता है। पुराने एक्ट में कानूनी कार्यवाही में बैंक रिकॉर्ड की मूल कॉपियां पेश करने की अनिवार्यता के बिना, उनकी प्रमाणित कॉपियों को साक्ष्य के रूप में उपयोग करने का प्रावधान है। नए बिल का उद्देश्य वर्तमान बैंकिंग प्रणाली की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना है। यह पुराने एक्ट के अधिकांश प्रावधानों को बरकरार रखता है। इसके मुख्य बदलावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
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इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की स्वीकार्यता: बिल में यह जोड़ा गया है कि बैंकर्स बुक का एक इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड कुछ शर्तों के अधीन, साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य, मान्य और कानूनी रूप से लागू करने योग्य होगा। इन शर्तों में शामिल हैं: (i) उक्त कॉपी ऐसी एंट्री या जानकारी की एक सच्ची कॉपी है और सही ढंग से उन रिकॉर्ड्स का प्रतिनिधित्व करती है या उचित रूप से ऐसे रिकॉर्ड से प्राप्त की गई है, (ii) डेटा में कोई अनाधिकृत बदलाव नहीं देखा या पाया गया है, और (iii) सिस्टम के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है या ऐसी कोई घटना नहीं हुई है जो अखंडता और सटीकता साबित करने के लिए ज़रूरी हो सकती है।
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बैंकर्स बुक्स को पेश करने के लिए बाध्य करना: एक्ट में कहा गया है कि किसी बैंक के अधिकारी को ऐसी कानूनी कार्यवाही में किसी भी बैंकर्स बुक को पेश करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जिसमें बैंक खुद एक पक्षकार नहीं है। किसी अधिकारी को रिकॉर्ड किए गए मामलों, लेनदेन या खातों को साबित करने के लिए गवाह के तौर पर पेश होने के लिए भी बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे कदमों के लिए किसी ‘विशेष कारण’ से दिए गए न्यायालय या न्यायाधीश के आदेश की आवश्यकता होती है। बिल इन प्रावधानों को बरकरार रखता है और ‘विशेष कारण’ को भी परिभाषित करता है जिसका मतलब है कि जहां: (i) एंट्री या जानकारी की सटीकता या प्रामाणिकता संदिग्ध हो, (ii) कोई ऐसी घटना घटी हो जिससे यह संकेत मिले कि रिकॉर्ड रखने के नियमितता या सामान्य प्रकृति बाधित हुई है, या (iii) बैंक बैंकर्स बुक्स के निरीक्षण के संबंध में किसी अदालती आदेश का पालन नहीं करता है।
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वित्तीय क्षेत्र की दूसरी संस्थाओं पर लागू: यह एक्ट बैंकिंग व्यवसाय में लगी संस्थाओं और किसी भी डाकघर बचत बैंक या मनी ऑर्डर कार्यालय पर लागू होता है। बिल इसे बरकरार रखता है। यह केंद्र सरकार को अधिसूचना द्वारा वित्तीय क्षेत्र में काम करने वाली किसी भी संस्था या संस्थाओं के वर्ग पर बिल के प्रावधान लागू करने के लिए और अधिक सशक्त बनाता है। सरकार अधिसूचना में विशिष्ट शर्तें, अपवाद या संशोधन भी निर्धारित कर सकती है।
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