मुख्य बिंदु

  • मंत्रालय के अंतर्गत पुलिस के लिए आवंटित राशि सबसे अधिक (68%) है। पुलिस आवंटन का 67% हिस्सा सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) को दिया गया है, और व्यय का 98% हिस्सा राजस्व पर खर्च किया गया है। 2024 में सीएपीएफ में 8% रिक्तियां थीं।
  • फोरेंसिक संबंधी योजनाओं के अंतर्गत बजट का उपयोग कम रहा है।
  • केंद्र शासित प्रदेशों को हस्तांतरित की गई कुल राशि का 62% हिस्सा जम्मू-कश्मीर को दिया गया है।
  • जनगणना और रजिस्ट्रार जनरल के लिए 2027 की जनगणना हेतु 6,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

गृह मंत्रालय (एमएचए) आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, केंद्रीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों का प्रशासन करने, सीमा प्रबंधन, केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) का प्रशासन करने, आपदा प्रबंधन करने और राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए जिम्मेदार है।[1]  संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत केंद्र सरकार का यह दायित्व है कि वह प्रत्येक राज्य को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाए। मंत्रालय शांति और सुरक्षा को बरकरार रखने में सहायता हेतु राज्य सरकारों को श्रमशक्ति, वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और विशेषज्ञता प्रदान करता है। मंत्रालय केंद्र शासित प्रदेशों को धनराशि का हस्तांतरण भी करता है (क्योंकि उन्हें केंद्रीय करों में हिस्सा नहीं मिलता), और उन केंद्र शासित प्रदेशों का प्रत्यक्ष प्रशासन करता है जिनमें विधानसभा नहीं है।1

इस नोट में गृह मंत्रालय के 2026-27 के व्यय के रुझानों और बजट प्रस्तावों का विश्लेषण किया गया है, और मंत्रालय के प्रशासन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न क्षेत्रों के समस्याओं पर चर्चा की गई है।

वित्तीय स्थिति

2026-27 में गृह मंत्रालय को 2,55,234 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।[2]  यह 2025-26 के संशोधित अनुमानों (2,41,485 करोड़ रुपए) से 9.4% अधिक है। 2026-27 में गृह मंत्रालय को आवंटित राशि केंद्रीय बजट का 5% है।2

2026-27 में मंत्रालय के बजट का 68% हिस्सा पुलिस के लिए आवंटित किया गया है।[3]  केंद्र शासित प्रदेशों को किया जाने वाला हस्तांतरण दूसरा सबसे बड़ा आवंटन (27%) है, जिसमें इन हस्तांतरणों का 62% हिस्सा अकेले जम्मू-कश्मीर का है। जनगणना और सांख्यिकी के लिए आवंटन 2025-26 के संशोधित अनुमानों में 1,040 करोड़ रुपए से बढ़कर 6,000 करोड़ रुपए हो गया है। गृह मंत्रालय की अन्य व्यय मदों में आपदा प्रबंधन, शरणार्थियों और प्रवासियों का पुनर्वास और प्रशासनिक मामले शामिल हैं। इनके लिए 5,491 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

2021-22 से लेकर अब तक सभी वर्षों में मंत्रालय का व्यय बजट में निर्धारित व्यय से अधिक रहा है। अनुमान है कि 2025-26 में मंत्रालय आवंटित बजट का 104% उपयोग करेगा।

तालिका 1: मंत्रालय को मुख्य आवंटन, 2026-27 (करोड़ रुपए में)

मद

राजस्व

पूंजी

कुल

पुलिस

1,52,530

21,272

1,73,803

जनगणना

5,782

218

6,000

अन्य

5.090

401

5,490

केंद्र शासित प्रदेशों को हस्तांतरण

जम्मू-कश्मीर

43,290

उपलब्ध नहीं

43,290

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

6,083

598

6,681

चंडीगढ़

5,275

445

5,720

लद्दाख

2,542

2,327

4,869

पुद्दूचेरी

3,518

0

3,518

दादरा नगर हवेली और दमन दीव

1,733

1,100

2,833

लक्षद्वीप

1,336

346

1,682

दिल्ली

968

380

1,348

कुल

2,28,147

27,087

2,55,234

नोट: पुलिस में केंद्रीय सशस्त्र बलों, दिल्ली पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर और खुफिया ब्यूरो के लिए आवंटित राशि शामिल है। अन्य मदों में प्रशासनिक व्यय, कैबिनेट व्यय और कई केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं शामिल हैं। स्रोत: मांग संख्या 49 से 59, गृह मंत्रालय, 2026-27; पीआरएस।

रेखाचित्र 1: गृह मंत्रालय के बजट का उपयोग (करोड़ रुपए में)

नोट: वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित अनुमानों को वास्तविक माना गया है। वर्ष 2026-27 के लिए बजट अनुमान।
स्रोत: संबंधित वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

विचारणीय मुद्दे

पुलिस

2026-27 में पुलिस के लिए 1,73,803 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), दिल्ली पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस, पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर और खुफिया ब्यूरो के लिए आवंटन शामिल है (तालिका 2)। 2026-27 में कुल बजट का 67% सीएपीएफ के लिए आवंटित किया गया है, इसके बाद दिल्ली पुलिस (7%) और जम्मू-कश्मीर पुलिस (6%) का स्थान है।

इंटेलिजेंस ब्यूरो के बजट आवंटन में, 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में सबसे अधिक (63%) वृद्धि देखी गई है। पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटन में भी 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 46% की वृद्धि हुई है।

तालिका 2: पुलिस के अंतर्गत प्रमुख व्यय मदें (करोड़ रुपए में)

विभाग

2024-25

2025-

26 संअ

2026-

27 बअ

% परिवर्तन

सीएपीएफ

1,04,824

1,12,636

1,16,789

4%

दिल्ली पुलिस

12,133

12,406

12,504

1%

जम्मू-कश्मीर पुलिस

8,553

9,097

9,926

9%

आईबी

4,013

4,159

6,782

63%

सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर

3,954

5,472

5,577

2%

पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर

2,133

3,684

5,393

46%

एमओपी

2,903

3,280

4,061

24%

अन्य

8,122

11,549

12,771

11%

कुल

1,46,635

1,62,283

1,73,803

7%

नोट: आईबी इंटेलिजेंस ब्यूरो है। एमओपी पुलिस आधुनिकीकरण योजना है। प्रतिशत परिवर्तन 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 2026-27 के बजट अनुमानों में हुए परिवर्तन को दर्शाता है। अन्य योजनाओं में महिलाओं की सुरक्षा और भारतीय भूमि बंदरगाह प्राधिकरण जैसी योजनाएं शामिल हैं। बअ- बजट अनुमान, संअ- संशोधित अनुमान।
स्रोत: मांग संख्या 51, गृह मंत्रालय, 2026-27; पीआरएस।

जनवरी 2024 तक भारत में प्रति एक लाख लोगों पर 155 पुलिसकर्मी थे।[4]  हालांकि यह आंकड़ा राज्यों के अनुसार भिन्न-भिन्न है। बिहार (80), पश्चिम बंगाल (106) और राजस्थान (119) में पुलिस की संख्या सबसे कम थी, जबकि नागालैंड (1,124), मणिपुर (916) और सिक्किम (831) में यह संख्या सबसे अधिक है (अधिक जानकारी के लिए परिशिष्ट में तालिका 22 देखें)।4

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीपीएएफ)

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं और सीमाओं की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और विशेष सुरक्षा अभियानों के लिए तैनात किए जाते हैं।[5] सीएपीएफ सात बलों से मिलकर बना है: (i) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), (ii) सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), (iii) केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), (iv) भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), (v) सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), (vi) असम राइफल्स (एआर), और (vii) राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी)।

तालिका 3: सीएपीएफ के अंतर्गत सात बलों के बीच आवंटन (करोड़ रुपए में)

बल

2024-25

2025-26 संअ

2026-27 बअ

% परिवर्तन

सीआरपीएफ

34,021

37,251

38,518

3%

बीएसएफ

27,939

29,568

29,568

-

सीआईएसएफ

14,690

15,622

15,973

2%

आईटीबीपी

9,337

9,869

11,324

15%

एसएसबी

9,594

10,496

10,985

5%

एआर

7,977

8,376

8,797

5%

एनएसजी

1,096

1,266

1,422

12%

कुल*

1,04,653

1,12,448

1,16,586

4%

नोट: *कुल राशि में 2026-27 के बजट में शामिल 202 करोड़ रुपए की "विभागीय लेखांकन" राशि शामिल नहीं है। बअ- बजट अनुमान, संअ- संशोधित अनुमान।
स्रोत: मांग संख्या 51, गृह मंत्रालय, 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में सीआरपीएफ को 38,518 करोड़ रुपए (सीएपीएफ के लिए आवंटन का 33%) और सीमा सुरक्षा बलों को 29,568 करोड़ रुपए (सीएपीएफ के लिए आवंटन का 25%) आवंटित किए गए हैं।

2026-27 में सीएपीएफ के कुल आवंटन का 98% राजस्व व्यय के लिए और 2% पूंजीगत व्यय के लिए है, जो पिछले कुछ वर्षों के रुझानों के समान है। पूंजीगत व्यय में मशीनरी, उपकरण और वाहनों की खरीद पर होने वाला खर्च शामिल है, जबकि राजस्व व्यय में वेतन, कपड़ों और हथियार पर होने वाला खर्च शामिल है।

रिक्तियां

जुलाई 2024 तक सीएपीएफ की कुल स्वीकृत संख्या लगभग 10.5 लाख कर्मियों की थी, जिनमें से लगभग 8% पद रिक्त थे।[6]  रिक्तियों का स्तर विभिन्न बलों में भिन्न था, जिसमें सीआईएसएफ में सबसे अधिक रिक्तियां (लगभग 19%) थीं, उसके बाद सीआरपीएफ (10%) का स्थान था।4

तालिका 4: जनवरी 2024 तक सीएपीएफ में रिक्तियां

सीएपीएफ

स्वीकृत संख्या

वास्तविक संख्या

रिक्ति की दर (%)

सीआईएसएफ

1,76,132

1,50,523

19%

सीआरपीएफ

3,25,201

3,00,223

10%

आईटीबीपी

96,030

88,863

9%

एसएसबी

97,774

90,312

6%

एआर

66,411

64,217

5%

बीएसएफ

2,65,331

2,58,626

4%

स्रोत: पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो 2024; पीआरएस।

पिछले छह वर्षों में सीएपीएफ के कम से कम 8% पद रिक्त रहे हैं (रेखाचित्र 2)। गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने पाया कि लगातार रिक्तियों के कारण मौजूदा कर्मियों पर काम का बोझ बढ़ता है और परिचालन दक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।[7] रिक्तियों की समस्या को दूर करने के लिए, सरकार ने सीएपीएफ में कांस्टेबल और राइफलमैन स्तर के 10% पद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित किए हैं और आयु एवं शारीरिक दक्षता संबंधी आवश्यकताओं में छूट प्रदान की है।5

रेखाचित्र 2: सीएपीएफ में रिक्तियों की दर, 2019-2024

स्रोत: पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो, विभिन्न वर्ष; पीआरएस।

राज्यों में तैनाती और उनकी निर्भरता

एस्टिमेट्स कमिटी (2018) ने पाया कि राज्य सरकारें कानून व्यवस्था को बहाल करने के लिए लगातार सीएपीएफ की तैनाती की मांग कर रही हैं, खास तौर से लंबे समय से चलने वाली आंतरिक सुरक्षा से संबंधित समस्याओं के कारण।[8] निरंतर तैनाती के कारण सीएपीएफ कर्मियों को आराम और प्रशिक्षण के सीमित अवसर मिलते हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि राज्य सीएपीएफ पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए अपने स्वयं के पुलिस बलों को मजबूत करें।8

राज्यों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने अनुरोध पर तैनात किए गए सीएपीएफ के खर्च का भुगतान केंद्र सरकार को करें। अक्टूबर 2022 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लगभग 50,000 करोड़ रुपए का बकाया था, जिसमें से अधिकांश राशि सीआरपीएफ तैनाती से संबंधित थी।[9] 

काम करने की स्थितियां

गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2018) ने पाया कि सीएपीएफ कर्मी अक्सर कठिन भूभाग और प्रतिकूल परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करते हैं।[10]  कमिटी ने यह भी पाया कि कुछ बलों के कर्मी नियमित रूप से प्रतिदिन 12-14 घंटे काम करते हैं और उन्हें साप्ताहिक रूप से बहुत कम आराम मिलता है।10  हाल के वर्षों में काम से संबंधित अत्यधिक तनाव के कारण नौकरी छोड़ने की दर बढ़ी है।10 कमिटी ने जवानों के लिए रोटेशनल तैनाती नीति, आराम की पर्याप्त अवधि और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या त्यागपत्र का विकल्प चुनने वाले कर्मियों के लिए व्यवस्थित एग्जिट इंटरव्यू का सुझाव दिया है।10

सीएपीएफ कर्मियों में आत्महत्या की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक बताई गई है।[11]  मंत्रालय (2022) ने इसके कई कारण बताए हैं जैसे परिवारों से लंबे समय तक अलग रहना, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, वित्तीय तनाव और पारस्परिक संघर्ष।[12]

तालिका 5: सीएपीएफ कर्मियों द्वारा आत्महत्याएं

बल

2023

2024

2025

कुल

सीआरपीएफ

57

46

56

159

बीएसएफ

43

52

25

120

सीआईएसएफ

25

15

20

60

एसएसबी

11

12

12

35

आईटीबीपी

8

12

12

32

एआर

12

8

8

28

एनएसजी

1

3

0

4

कुल

157

148

133

438

स्रोत: अतारांकित प्रश्न संख्या 2,647, लोकसभा, गृह मंत्रालय, 16 दिसंबर, 2025; पीआरएस।

पुलिस में महिलाएं

जनवरी 2024 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कुल कर्मियों में महिलाओं की संख्या 5% (47,760) थी।सीएपीएफ में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए, सरकार ने जनवरी 2016 में आरक्षण लागू किया, जिसमें सीआरपीएफ और सीआईएसएफ में कांस्टेबल पदों में 33% और बीएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी में 14-15% आरक्षण का प्रावधान किया गया।5,7  गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने उल्लेख किया कि महिलाओं की भर्ती को प्रोत्साहित करने में सहायक उपायों में लक्षित संपर्क, आवेदन शुल्क में छूट, शारीरिक जांच में ढिलाई और मातृत्व एवं शिशु देखभाल अवकाश जैसे सेवा लाभ शामिल हैं।7  सीएपीएफ ने क्रेश और डे-केयर केंद्र स्थापित किए हैं, यौन उत्पीड़न की शिकायतों के समाधान के लिए समितियां गठित की हैं, और पदोन्नति और वरिष्ठता के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए हैं।7  गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने सुझाव दिया है कि महिला कर्मियों की सेवा बहाली में सुधार के लिए जीवन के विशिष्ट चरणों के दौरान लचीली तैनाती या सुगम पोस्टिंग संभावना तलाशी जाए।7

आवास और रिहाइश

गृह मंत्रालय सीएपीएफ कर्मियों को आवास उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार है। दिसंबर 2022 तक, सीएपीएफ के लिए अधिकृत आवास इकाइयों में से केवल 48% ही उपलब्ध थीं।7  विभिन्न बलों में आवास संतुष्टि दर में व्यापक भिन्नता पाई गई, विशेष रूप से एसएसबी में इसकी उपलब्धता कम (29%) थी।गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने कहा है कि कर्मी दूर दराज के इलाकों में सरकारी क्वार्टरों में इसलिए रहना नहीं चाहते क्योंकि वहां स्कूल और अस्पताल जैसी आवश्यक सुविधाएं पास नहीं होतीं। इसी वजह से सरकारी आवासों से संतुष्टि का स्तर कम है।7  उसने सुझाव दिया कि गृह मंत्रालय निर्माण कार्य में तेजी लाए ताकि आवास संतुष्टि के स्तर को समय के साथ बढ़ाकर कम से कम 70-80% किया जा सके।7

2026-27 में सीएपीएफ और केंद्रीय पुलिस संगठन की भवन निर्माण परियोजनाओं के लिए 5,041 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह 2025-26 के संशोधित अनुमानों (3,508 करोड़ रुपए) की तुलना में 44% की वृद्धि है।

तालिका 6: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अंतर्गत आवास संतुष्टि दर, दिसंबर 2022 तक

सीएपीएफ

स्वीकृत इकाइयां

संतुष्टि दर

निर्माणाधीन इकाइयां

सीआरपीएफ

88,523

56%

4,483

बीएसएफ

78,164

45%

3,208

एसएसबी

29,331

29%

2,220

आईटीबीपी

28,568

51%

3,959

एआर

25,480

54%

304

सीआईएसएफ

14,690

47%

1,737

एनएसजी

3,614

82%

40

कुल

2,68,370

48%

15,951

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 242, गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी, 17 मार्च, 2023; पीआरएस।

सीएपीएफ कर्मियों का कल्याण और पुनर्वास

कल्याण एवं पुनर्वास बोर्ड सेवानिवृत्त सीएपीएफ कर्मियों, उनके परिवारों और मृतक या विकलांग कर्मियों के आश्रितों के कल्याण एवं पुनर्वास की देखरेख करता है।7  वित्तीय सहायता अनुग्रह राशि, पेंशन और बीमा लाभ जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रदान की जाती है।

2025-26 के लिए सीएपीएफ कर्मियों को अनुग्रह राशि के रूप में एकमुश्त मुआवजे के लिए 50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।7 इसमें सक्रिय ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले प्रत्येक कर्मी के लिए 35 लाख रुपए और प्रामाणिक सरकारी ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर 25 लाख रुपए की अनुग्रह राशि शामिल है।

पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर

सीएपीएफ के लिए आधुनिकीकरण योजना IV

सीएपीएफ की आधुनिकीकरण योजना IV, जिसे 2022 से 2026 तक कार्यान्वित किया जा रहा है, का उद्देश्य हथियारों, निगरानी प्रणालियों, वाहनों और सुरक्षा उपकरणों को अपग्रेड करना है। हालांकि, हाल के वर्षों में इस योजना के तहत धनराशि का उपयोग आवंटन से कम रहा है (तालिका 7)। मंत्रालय ने इसका कारण खरीद में देरी, तकनीकी जटिलताएं और टेंडर संबंधी समस्याएं बताया है।7

तालिका 7: आधुनिकीकरण योजना IV के अंतर्गत बजट का उपयोग कम रहा है (करोड़ रुपए में)

वर्ष

आवंटित

उपयोग

उपयोग का %

2021-22

100

31

31%

2022-23

248

78

31%

2023-24

202

98

48%

2024-25

181

119

66%

2025-26*

353

610

173%

2026-27

344

-

-

नोट: 2025-26 के वास्तविक आंकड़ों के लिए संशोधित अनुमान लिए गए हैं।
स्रोत: मांग संख्या 51, 2026-27, गृह मंत्रालय; पीआरएस।

2025-26 में इस योजना के तहत बजट का उपयोग आवंटित राशि से 73% अधिक था। गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने गौर किया कि पहले मोटर वाहनों, हथियारों और उपकरणों की कम खरीद के कारण आवंटन कम था, लेकिन 2025-26 में हुई भारी वृद्धि का मुख्य कारण इन क्षेत्रों में बढ़ी हुई खरीद योजनाएं हैं।7

जनवरी 2024 तक भारत में 18,224 पुलिस स्टेशन थे।इनमें से कई स्टेशनों में वाहन, लैंडलाइन टेलीफोन और मोबाइल फोन नहीं थे।

तालिका 1: कुछ राज्यों के पुलिस स्टेशनों का इंफ्रास्ट्रक्चर, जनवरी, 2024 तक

   

जिन स्टेशनों में निम्नलिखित नहीं

राज्य

कुल स्टेशन

वाहन

फोन

वायरलेस/मोबाइल

बिहार

1,096

0

187

0

छत्तीसगढ़

498

0

23

0

झारखंड

571

47

211

31

महाराष्ट्र

1,193

0

11

55

मणिपुर

94

8

74

0

मेघालय

81

1

76

0

नागालैंड

84

0

39

13

ओड़िशा

684

0

3

3

पंजाब

434

2

56

12

स्रोत: पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो, 2024; पीआरएस।

गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2022) ने पाया कि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी वाले कई पुलिस स्टेशन सीमावर्ती राज्यों और संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित हैं।[13]  इनमें अरुणाचल प्रदेश, झारखंड और मणिपुर जैसे राज्य शामिल हैं।स्टैंडिंग कमिटी (2022) ने पुलिस बलों के लिए आधुनिक उपकरणों, जिनमें गैर-घातक हथियार और सुरक्षात्मक गियर शामिल हैं, की उपलब्धता में भी कमियों पर गौर किया।[14] कमिटी ने यह भी पाया कि कर्मियों के पास अक्सर पर्याप्त दंगा-रोधी उपकरण और हल्के सुरक्षात्मक वस्त्रों की कमी होती है, जो कानून और व्यवस्था की बहाली के दौरान चोटों को कम करने के लिए आवश्यक हैं।14

गृह मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित पुलिस बलों की आधुनिकीकरण योजना का उद्देश्य हथियारों, उपकरणों, वाहनों, संचार प्रणालियों की खरीद और इंफ्रास्ट्रक्चर के अपग्रेडेशन के जरिए राज्य पुलिस की कार्य करने की क्षमता में सुधार करना है।7  इस योजना में अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीएनटीएस), वामपंथी अतिवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर योजना (एसआरई और एलडब्ल्यूई), मादक पदार्थों के नियंत्रण के लिए सहायता और फोरेंसिक क्षमताओं के अपग्रेडेशन जैसे घटक भी शामिल हैं।

तालिका 9: पुलिस बलों के आधुनिकीकरण योजना के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25

2025-26 बअ

2025-26 संअ

2026-27 बअ

सीटीएनएस/राज्य पुलिस आधुनिकीकरण

115

588

273

451

एसआरई और एलडब्ल्यूई इंफ्रास्ट्रक्चर

2,788

3,481

3,007

3,611

कुल पुलिस बलों का आधुनिकीकरण

2,903

4,069

3,280

4,061

स्रोत: मांग संख्या 51, गृह मंत्रालय, 2026-27; पीआरएस।

फोरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अपग्रेडेशन

आपराधिक मामलों में फोरेंसिक विश्लेषण करके फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं जांच और अभियोजन में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती हैं।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत, सात साल से अधिक कारावास की सजा वाले अपराधों के लिए फोरेंसिक जांच अनिवार्य कर दी गई है।[15] गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने कहा है कि इससे फोरेंसिक प्रयोगशालाओं पर काम का बोझ बढ़ने की उम्मीद है और सुझाव दिया है कि देश के प्रत्येक जिले में एक फोरेंसिक प्रयोगशाला होनी चाहिए।7

अक्टूबर 2024 तक सात केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में लगभग 4,000 मामले लंबित थे।[16]  

जुलाई 2024 में कैबिनेट ने 2024-25 से 2028-29 तक 2,254 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय फोरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर संवर्धन योजना को मंजूरी दी।5 इस योजना का उद्देश्य नई राष्ट्रीय फोरेंसिक प्रयोगशालाओं और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के लिए ऑफ-कैपस (बाहरी परिसरों) की स्थापना करना है।5  

फोरेंसिक क्षमताओं का आधुनिकीकरण योजना के तहत धनराशि का उपयोग कम रहा है। 2024-25 में इस योजना के लिए 700 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, जिनमें से केवल 149 करोड़ रुपए (21.3%) का ही उपयोग हुआ। 2025-26 में इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, जिनमें से संशोधित अनुमानों के अनुसार 350 करोड़ रुपए (70%) का उपयोग हुआ है।

तालिका 10: फोरेंसिक संबंधी योजनाओं के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

योजना

2024-25

2025-26 बअ

2025-26 संअ

2026-27 बअ

फोरेंसिक क्षमताओं का आधुनिकीकरण

149

500

350

500

केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं का अपग्रेडेशन

8

80

19

14

राष्ट्रीय फोरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर संवर्धन योजना

22

250

98

130

कुल

179

830

467

644

स्रोत: मांग संख्या 51, गृह मंत्रालय, 2026-27; पीआरएस।

दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करती है।यह दिल्ली में कानून व्यवस्था, अपराध रोकथाम, जांच और वीवीआईपी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है।

2026-27 के लिए दिल्ली पुलिस को 12,504 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसमें से 11,882 करोड़ रुपए (95%) राजस्व व्यय के लिए और 622 करोड़ रुपए (5%) पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं।

तालिका 11: दिल्ली पुलिस के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

 

2024-25

2025-26 बअ

2025-26 संअ

2026-27 बअ

राजस्व

11,596

11,316

11,761

11,882

पूंजी

537

616

644

622

कुल

12,133

11,932

12,405

12,504

स्रोत: मांग संख्या 51, गृह मंत्रालय, 2026-27; पीआरएस

कर्मचारी एवं रिक्तियां

गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने पाया कि दिल्ली पुलिस में 94,257 कर्मी होने चाहिए (यह स्वीकृत संख्या है) लेकिन वहां कर्मियों की वास्तविक संख्या 85,690 है। इस हिसाब से दिल्ली पुलिस में लगभग 8,567 रिक्तियां (9%) हैं।कैग (2020) की एक रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्रालय ने 2019 में 12,518 नई भर्तियां निकालीं।[17] योजना यह थी कि पहले 3,139 पदों को भरा जाएगा, लेकिन इन पदों पर भर्तियां नहीं हो पाईं। इसके कारण बाकी बचे हुए पदों पर काम रुक गया।17  दिल्ली पुलिस में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 2019 में 33% के लक्ष्य के मुकाबले 11.8% था।17  जांचे गए पुलिस स्टेशनों में 35% कर्मचारियों की कमी थी, और 72 पुलिस स्टेशनों में से केवल एक ही पुलिस स्टेशन कर्मचारियों की संख्या के मानदंडों को पूरा करता था।17 2016-2019 में विशेष प्रशिक्षणों में औसतन 42% की कमी थी।17  

स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने हथियारों और सुरक्षा उपकरणों का नियमित प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया। साथ ही और फोरेंसिक, के-9 और बम निरोधक दस्तों को और ज्यादा मजबूत बनाने का सुझाव दिया।7

2023-24 में दिल्ली पुलिस के पास 83,484 पात्र कर्मियों के लिए 16,344 आवास थे, जिसके परिणामस्वरूप आवास संतुष्टि का स्तर 19.6% रहा।

तकनीक और आधुनिकीकरण

निर्भया कोष के तहत वित्त पोषित सेफ सिटी प्रोजेक्ट का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा में सुधार करना है।7 हालांकि, पारंपरिक वायरलेस सेटों की संख्या 9,638 (2009) से घटकर 6,172 (2019) हो गई, और 20 साल पुरानी ट्रंकिंग प्रणाली का उपयोग किया जा रहा था, जो कि इसकी सामान्य जीवन अवधि से 10 साल अधिक है।17  3,800 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनमें से काफी बड़ा हिस्सा काम नहीं कर रहा। इनमें से 31-44% कैमरे बाद में खराब या बंद हो गए थे।17

केंद्रीय पुलिस संगठन

2026-27 के लिए केंद्रीय पुलिस संगठनों को 2,185 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (1,957 करोड़ रुपए) से 11.7% अधिक है।

तालिका 12: केंद्रीय पुलिस संगठनों के लिए आवंटन, 2022-23 से 2025-26 तक (करोड़ रुपए में)

संगठन

2022-23

2023-24

2024-25 संअ

2025-26 बअ

आव्रजन ब्यूरो

434

566

576

820

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो

141

169

136

194

राष्ट्रीय जांच एजेंसी

202

275

141

360

समन्वय और पुलिस वायरलेस निदेशालय

72

73

66

101

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो

48

70

44

70

आंसू गैस इकाई

49

50

44

67

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र

19

28

27

143

नोट: बअ- बजट अनुमान, संअ- संशोधित अनुमान।
स्रोत: रिपोर्ट संख्या 252, गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी, 2025; पीआरएस।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की स्थापना राष्ट्रीय जांच एजेंसी एक्ट, 2008 के तहत एक केंद्रीय आतंकवाद-विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में की गई थी।[18] इसे भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता, राज्यों की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों और अंतरराष्ट्रीय संधियों और दायित्वों से संबंधित मामलों को प्रभावित करने वाले अपराधों की जांच और अभियोजन करने का दायित्व सौंपा गया है।

वर्तमान में एनआईए में विभिन्न रैंकों में 1,901 पदों की स्वीकृत संख्या है जिनमें से 769 पद पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वीकृत किए गए थे।[19]  जून 2025 तक 541 पद रिक्त थे (29%)।19

स्थापना के बाद से, एजेंसी ने 692 मामले दर्ज किए हैं।18 172 मामलों में फैसले सुनाए जा चुके हैं, जिनमें दोषसिद्धि दर 92% है। पिछले तीन वर्षों (2022 से) के दौरान, 78 मामलों में फैसले सुनाए गए, जिनमें दोषसिद्धि दर 97% रही।18 

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की स्थापना नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थ एक्ट, 1985 के तहत की गई थी। इसका मुख्य काम नशीली दवाओं के सेवन को रोकना और नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ लड़ना है।5  ब्यूरो कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैसे सीमा पार से होने वाली तस्करी, ड्रग्स के अवैध व्यापार के लिए डार्क वेब का इस्तेमाल और नशीले पदार्थों की डिलिवरी के लिए कूरियर और लॉजिस्टिक सेवाओं का बढ़ता उपयोग।5

नशीले पदार्थों पर नियंत्रण के प्रयासों को मजबूत करने के लिए, 2004 में मादक पदार्थ नियंत्रण योजना शुरू की गई थी।5 अब इस योजना का विस्तार किया गया है और इसके तहत सात संबंधित योजनाओं को पुलिस आधुनिकीकरण की बड़ी योजना के दायरे में शामिल कर दिया गया है।

तालिका 13: वर्ष 2019 से 2023 तक जब्त की गई मादक पदार्थों की मात्रा

वर्ष

जब्त की गई मात्रा (टन में)

जब्त की गई मात्रा (करोड़ संख्या में)

जब्त की गई मात्रा (किलोलीटर में)

2019

1,112

2.1

11,736

2020

1,317

5.9

1,104

2021

1,137

4.8

896

2022

2,081

1.7

4,641

2023

1,035.5

2.1

1,970

स्रोत: भारत में अपराध, 2023, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो; पीआरएस।

साइबर सुरक्षा

साइबर अपराध ऐसे किसी भी गैरकानूनी कृत्य को कहा जाता है जिसमें कंप्यूटर, कंप्यूटर नेटवर्क या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग हथियार या निशाने के रूप में किया जाता है।[20] इनमें चोरी, धोखाधड़ी, जालसाजी, मानहानि और शरारत के साथ-साथ हैकिंग, फ़िशिंग, मैलवेयर हमले, सर्विस ठप्प करना (डीओसी) और साइबर आतंकवाद शामिल हैं।20

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पाया कि भारतीय नागरिकों की विदेशों में तस्करी की गई है और उन्हें साइबर अपराध की 'स्कैम फैक्ट्रियों' को चलाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, खासकर दक्षिण पूर्व एशिया में।20 इन घोटालों में फर्जी ऋण आवेदन, कॉल सेंटर आधारित जबरन वसूली और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करके वित्तीय धोखाधड़ी शामिल है। गृह मंत्रालय ने आगे चेतावनी दी है कि भविष्य के साइबर खतरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित होंगे जिसमें डीपफेक जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए गंभीर खतरा पैदा करेंगे।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र

गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए समन्वित प्रतिक्रिया प्रदान करने हेतु भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की है।20 I4C के अंतर्गत, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर नागरिक साइबर अपराधों की रिपोर्ट कर सकते हैं। अगस्त 2019 से नवंबर 2024 के बीच, पोर्टल को 54 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें 31,594 करोड़ रुपए के वित्तीय नुकसान शामिल हैं।20 रिपोर्ट किए गए मामलों में से लगभग 85% साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित हैं। इसके अतिरिक्त, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली ने 23 लाख से अधिक शिकायतों के माध्यम से 7,130 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान को रोकने में मदद की है।20

राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाएं राज्य पुलिस को प्रारंभिक चरण में फोरेंसिक सहायता प्रदान करती हैं। अक्टूबर 2025 तक, नई दिल्ली स्थित प्रयोगशाला ने लगभग 12,952 साइबर अपराध मामलों में सहायता प्रदान की, जिससे जांच की गुणवत्ता और गति में सुधार हुआ।[21]

गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने पाया कि मौजूदा मानदंडों के बावजूद, म्यूल एकाउंट्स के जरिए लगातार वित्तीय धोखाधड़ी की जा रही है।20 इसे रोकने के लिए, I4C ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से सितंबर 2024 में एक सस्पेक्ट रजिस्ट्री शुरू की। अक्टूबर 2025 तक, 18.4 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं और 24.7 लाख म्यूल एकाउंट्स की जानकारी सहभागी संस्थाओं के साथ साझा की गई, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 8,031 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी वाले लेनदेन को नामंजूर किया गया।21

गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने यह कहा कि साइबर अपराध से संबंधित प्रावधान वर्तमान में कई कानूनों में फैले हुए हैं, जिससे प्रवर्तन और न्यायिक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।20  उसने एक समर्पित साइबर अपराध कानून बनाने का सुझाव दिया जो अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता हो, उभरती तकनीक को संबोधित करता हो और मजबूत दंडात्मक प्रावधान प्रदान करता हो, साथ ही विशेष जांच के लिए एक एकीकृत साइबर अपराध कार्य बल की स्थापना करता हो।20 दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना एक्ट, 1946 के तहत, जिसके द्वारा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की स्थापना की गई थी, के तहत राज्यों को सीबीआई द्वारा राज्य के भीतरी मामलों की जांच के लिए सामान्य सहमति प्रदान करनी होती है। कमिटी ने कहा कि कई राज्य सहमति वापस ले लेते हैं जिससे जांच में बाधाएं उत्पन्न होती हैं।20

गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने एआई जनरेटेड कंटेंट के कानूनी उपाय में मौजूद कमियों को भी उजागर किया। उसने कहा कि डीपफेक और एआई टूल्स के बढ़ते दुरुपयोग के बावजूद, मौजूदा कानून यूजर जनरेटेड और सिंथेटिकली जनरेटेड कंटेंट के बीच स्पष्ट रूप से अंतर नहीं कर पाते हैं।20 उसने ऐसे कंटेंट से निपटने के लिए स्पष्ट प्रावधानों के साथ कानूनी ढांचे को मजबूत करने का सुझाव दिया।20  

आंतरिक सुरक्षा

भारत में आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था बहाल रखने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है। उसमें वामपंथी अतिवाद (एलडब्ल्यूई), पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद और सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करना शामिल है।

उत्तर पूर्वी राज्यों में उग्रवाद

2023 में मणिपुर में कुकी और मैते समुदायों के बीच जातीय हिंसा देखी गई। 2023 में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में हिंसा की 243 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 187 (77%) घटनाएं मणिपुर में हुईं।5

सितंबर 2024 में गृह मंत्रालय ने सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) एक्ट (आफ्स्पा) के तहत मणिपुर राज्य (19 पुलिस स्टेशनों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर) को "अशांत क्षेत्र" घोषित कर दिया।[22]  नवंबर 2024 में छह और पुलिस स्टेशनों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में आफ्स्पा को लागू किया गया। 13 फरवरी 2025 को संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा की गई। संसद ने एक के बाद एक, राष्ट्रपति शासन के विस्तार को मंजूरी दी, जिसमें सबसे हालिया विस्तार अगस्त 2025 में किया गया था। इसके तहत इसे फरवरी 2026 के मध्य तक बढ़ा दिया गया।

8 मार्च 2025 को गृह मंत्रालय ने मणिपुर की सभी सड़कों पर लोगों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।[23] 4 फरवरी 2026 को राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया।[24]

गृह मंत्रालय ने 2026-26 के संशोधित अनुमानों में मणिपुर को विकास अनुदान के रूप में 2,198 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।

वामपंथी अतिवाद

गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़, झारखंड और ओड़िशा जैसे उग्रवादी हिंसा से प्रभावित राज्यों में सुरक्षा और विकास योजनाओं को लागू करने के लिए "उग्रवादी हिंसा प्रभाग" की स्थापना की।5  इस प्रभाग की भूमिका और कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) उग्रवादी हिंसा से प्रभावित राज्यों में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा करना, (ii) उग्रवादी हिंसा से निपटने के लिए राज्य की क्षमता में सुधार करना, और (iii) उग्रवादी हिंसा से प्रभावित राज्यों में सीएपीएफ की तैनाती करना।5

वामपंथी अतिवाद (एलडब्ल्यूई) से संबंधित घटनाओं की संख्या 2010 में 1,936 से घटकर 2025 में 234 रह गईं, जिसमें 88% की गिरावट है।[25] इसी प्रकार, नागरिकों और सुरक्षा बलों की मौतों में भी 91% की कमी आई है, जो 2010 में 1,005 से घटकर 2025 में 100 रह गईं।25

प्रभावित जिलों की संख्या 2018 में 10 राज्यों के 126 जिलों से घटकर 2025 में तीन राज्यों के आठ जिले रह गई है।25 इनमें से केवल तीन जिलों को वर्तमान में सबसे अधिक एलडब्ल्यूई-प्रभावित जिलों की श्रेणी में रखा गया है।25  सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत, 30 जिलों को लीगेसी एंड थ्रस्ट डिस्ट्रिक्स्ट्स (पुराने और प्रमुख प्रभाव वाले जिले) के रूप में चुना गया है ताकि वहां वामपंथी अतिवाद को फिर से उभरने से रोका जा सके।25

तालिका 14: एलडब्ल्यूई अभियान के तहत प्रगति

वर्ष

मारे गए एलडब्ल्यूई

गिरफ्तार किए गए एलडब्ल्यूई

आत्मसमर्पण करने वाले एलडब्ल्यूई

2020

103

1,110

475

2021

126

1,153

736

2022

57

816

496

2023

50

924

376

2024

290

1,090

881

2025*

364

1,022

2,337

*1 दिसंबर 2025 तक के आंकड़े।
स्रोत: अतारांकित प्रश्न संख्या 2682, लोकसभा, गृह मंत्रालय, 16 दिसंबर 2025; अतारांकित प्रश्न संख्या 481, लोकसभा, गृह मंत्रालय, 3 फरवरी 2026; पीआरएस।

2025 में सुरक्षा बलों ने 364 नक्सलियों को ढेर किया, 1,022 को गिरफ्तार किया और 2,337 नक्सलियों का आत्मसमर्पण कराया।25  वामपंथी अतिवाद से संबंधित हिंसा दर्ज करने वाले थानों की संख्या 2010 के 465 से घटकर 2025 में 119 रह गई है।25

गृह मंत्रालय, वामंथी अतिवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास संबंधी कार्यों को सहयोग देने के लिए कई योजनाएं लागू कर रहा है। सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत, केंद्र सरकार वामंथी अतिवाद प्रभावित राज्यों को सुरक्षा अभियानों पर किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति करती है, जिसमें प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स, नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों को अनुग्रह राशि का भुगतान और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास शामिल है।5

2017 में शुरू की गई विशेष केंद्रीय सहायता योजना, सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं में महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने के लिए सबसे अधिक प्रभावित जिलों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है।विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर योजना का उद्देश्य एलडब्ल्यूई क्षेत्रों में सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है, जिसमें किलेबंद पुलिस स्टेशनों का निर्माण, जिला पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर का अपग्रेडेशन और खुफिया क्षमताओं को मजबूत करना शामिल है।5

इसके अलावा, वामपंथी अतिवाद प्रबंधन के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएम) योजना के तहत सीएपीएफ और भारतीय वायुसेना सहित केंद्रीय एजेंसियों को फंड दिया जाता है। इस धनराशि का उपयोग नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशंस के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स, जैसे हेलीकॉप्टर और अन्य सहायक सुविधाओं के लिए किया जाता है।5

जनगणना

जून 2025 में जनगणना-2027 की घोषणा की गई।[26]  यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें जातियों की गणना भी शामिल होगी। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 होगी।26 लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के हिम-आच्छादित क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 होगी।26  संदर्भ तिथि का अर्थ है, वह विशिष्ट तिथि और समय, जब विवरण एकत्र किए जाते हैं। भारत की पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। केंद्र सरकार ने कहा है कि कोविड महामारी के कारण जनगणना में देरी हुई है।[27]

2026-27 में जनगणना, सर्वेक्षण और सांख्यिकी/भारत के रजिस्ट्रार जनरल के लिए कुल मिलाकर 6,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जबकि 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान 1,040 करोड़ रुपए था। 11वीं जनगणना की कुल लागत 2,200 करोड़ रुपए थी।[28]

परिसीमन लोकसभा और विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करने की प्रक्रिया होती है। वर्तमान में सदस्यों की संख्या 1971 और 2001 की जनसंख्या के आंकड़ों पर आधारित है।[29]  अगला परिसीमन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना पर आधारित होगा। इससे लोकसभा में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ेगा।   

सीमा प्रबंधन 

सीमा प्रबंधन विभाग निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित करता है: (i) अंतरराष्ट्रीय भूमि और तटीय सीमाओं का प्रबंधन, (ii) सीमाओं की पुलिसिंग और सुरक्षा को सुदृढ़ करना, (iii) सड़कों, बाड़ और सीमा चौकियों जैसे बुनियादी ढांचे का निर्माण और (iv) सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम का कार्यान्वयन।सीमा प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य वैध व्यापार और वाणिज्य को सुगम बनाते हुए शत्रुतापूर्ण हितों के विरुद्ध भारत की सीमाओं को सुरक्षित करना है।5

तालिका 15: सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर एवं प्रबंधन के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

वर्ष

2024-25

2025-26 बअ

2025-26 संअ

2026-27

रखरखाव एवं सीमा चौकी

304

359

322

310

पूंजीगत व्यय

3,650

5,238

5,150

5,267

कुल

3,954

5,597

5,472

5,577

स्रोत: मांग संख्या 51, गृह मंत्रालय, 2026-27; पीआरएस।

भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई 4,096 किलोमीटर है, जिसमें से 3,240 किलोमीटर (79%) पर भौतिक रूप से बाड़ लगाई जा चुकी है।[30]  भारत-पाकिस्तान सीमा की लंबाई 2,290 किलोमीटर है, जिसमें से 2,135 किलोमीटर (93%) पर भौतिक रूप से बाड़ लगाई जा चुकी है और 155 किलोमीटर (75%) पर बाड़ नहीं लगी है। 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा के 9 किलोमीटर हिस्से पर भी भौतिक रूप से बाड़ लगाने का काम पूरा हो चुका है।30

भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा भी साझा करता है। गृह मंत्रालय (2025) के अनुसार, भारत-चीन सीमा पर घुसपैठ का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था।30

तालिका 16: सीमा पार घुसपैठ के पकड़े गए प्रयासों की संख्या

वर्ष

भारत-बांग्लादेश

भारत-पाकिस्तान

भारत-म्यांमार

भारत-नेपाल-भूटान

2014

855

45

20

0

2015

874

42

16

3

2016

654

46

12

4

2017

456

42

9

3

2018

420

40

21

4

2019

500

38

25

38

2020

486

20

34

11

2021

703

32

38

18

2022

857

49

46

15

2023

746

30

40

38

2024

977

41

37

23

स्रोत: अतारांकित प्रश्न संख्या 2550, गृह मंत्रालय, लोकसभा, 16 दिसंबर 2025; पीआरएस।

गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने मंत्रालय से आग्रह किया कि वह प्रवासियों की आवक पर डेटा तैयार करे। इसमें बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य देशों से आने वाले लोगों की जानकारी शामिल करने को कहा गया है।7  कमिटी ने रोहिंग्या लोगों के देश में प्रवेश करने और भारत के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से बसने के उदाहरणों का भी उल्लेख किया गया।7  कमिटी ने गृह मंत्रालय को अवैध रूप से बसे रोहिंग्या लोगों की पहचान करने और उन्हें उनके मूल देशों में वापस भेजने के लिए प्रभावी कदम उठाने का सुझाव दिया।7

वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम

अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमाओं से सटे ब्लॉकों में स्थित गांवों के व्यापक विकास के लिए वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (वीवीपी) फरवरी 2023 में शुरू किया गया था।[31] इसका उद्देश्य भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार लाना, आजीविका के अवसर सृजित करना, रणनीतिक एकीकरण को बढ़ावा देना और सुरक्षा को मजबूत करना है।31

वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम-I (वीवीपी-I) के तहत, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के 19 जिलों के 46 ब्लॉकों में स्थित गांवों का चयन किया गया था।5

अप्रैल 2025 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम-II (वीवीपी-II) को केंद्र से 100% वित्त पोषण के साथ एक केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में मंजूरी दी।31  वीवीपी-II के कार्यान्वयन के लिए 2028-29 तक 6,839 करोड़ रुपए का परिव्यय निर्धारित किया गया है।31 वीवीपी-II का लक्ष्य वीवीपी-I के अंतर्गत आने वाली उत्तरी सीमा से परे अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे ब्लॉकों में स्थित चुनिंदा रणनीतिक गांवों को लक्षित करना है। 2026-27 में, वीवीपी-I के लिए 350 करोड़ रुपए और वीवीपी-II के लिए 300 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

प्रवासियों को राहत और उनका पुनर्वास

गृह मंत्रालय प्रवासियों और स्वदेश लौटने वालों के लिए राहत एवं पुनर्वास योजना लागू करता है। इसका उद्देश्य संघर्ष, विस्थापन और सीमा समझौतों से प्रभावित विस्थापित व्यक्तियों, प्रवासियों और शरणार्थियों को वित्तीय सहायता और पुनर्वास सहायता प्रदान करना है।7  इस योजना में विस्थापित व्यक्तियों और शरणार्थियों का पुनर्वास, त्रिपुरा और मणिपुर को राहत और पुनर्वास सहायता, जम्मू-कश्मीर में पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों को वित्तीय सहायता, 1984 के दंगों के पीड़ितों को बढ़ी हुई क्षतिपूर्ति और भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते से संबंधित खर्च शामिल है।7

गृह मंत्रालय (2025) ने स्टैंडिंग कमिटी को जानकारी दी कि कश्मीरी प्रवासियों की राहत और पुनर्वास के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं।7  इनमें 6,000 सरकारी नौकरियों का सृजन शामिल है, जिनमें से 5,724 नियुक्तियां की जा चुकी हैं, जबकि शेष प्रक्रियाधीन हैं।7 इसके अतिरिक्त, 6,000 ट्रांजिट आवास (अस्थायी घर) इकाइयों को स्वीकृत किया गया है, जिनमें से 3,120 इकाइयां पूरी हो चुकी हैं और शेष निर्माणाधीन हैं।7

मंत्रालय (2025) ने यह भी बताया कि कल्याणकारी लाभों तक पहुंच में सुधार के लिए, प्रवासी राशन कार्डों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट, 2013 के साथ एकीकृत किया जा रहा है।7  इस एकीकरण का उद्देश्य प्रवासी परिवारों को खाद्य सुरक्षा और अन्य सरकारी योजनाओं तक पहुंच प्रदान करना है।7

तालिका 17: प्रवासियों और स्वदेश लौटे लोगों के लिए राहत और पुनर्वास हेतु आवंटन (करोड़ रुपए में)

वर्ष

2024-25

2025-26 संअ

2026-27 बअ

आवंटन

591

124

93

स्रोत: मांग संख्या 49, गृह मंत्रालय, 2026-27; पीआरएस।

जेल

जेल संविधान की राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं।[32]  इस प्रकार जेल और कैदियों का प्रबंधन प्राथमिक रूप से राज्यों की जिम्मेदारी है। कारागार एक्ट, 1894 राज्यों में जेलों को रेगुलेट करता है।[33]  राज्यों ने भी इसके लिए कानून बनाए हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए मॉडल कानून जारी किए हैं, जैसे कि मॉडल कारागार और सुधार सेवा एक्ट, 2023।[34]

जेलों में कैदियों की अत्यधिक संख्या और क्षमता संबंधी मुद्दे

देश भर की जेलों में कैदियों की अत्यधिक संख्या है। दिसंबर 2023 तक, जेलों में कैदियों की औसत दर (ऑक्यूपेंसी दर) 121% थी।[35]  यह 2021-22 में 131% से घटकर 121% हो गई है।35 कई राज्यों में कैदियों की संख्या राष्ट्रीय औसत से भी कहीं अधिक दर्ज की गई है (तालिका 18)।

बंद जेलों के विकल्पों (जैसे खुली जेलों) का भी बहुत कम इस्तेमाल हो रहा है। खुली जेलें, जिन्हें कैदियों की भीड़ को कम करने और उनके सुधार के लिए बनाया गया था, उनमें केवल 74% कैदी ही हैं।[36] इसके अलावा, कई राज्यों में एक भी खुली जेल नहीं है।[37]

तालिका 18: दिसंबर 2023 तक सबसे अधिक ऑक्यूपेंसी दर वाले राज्य

राज्य/यूटी

ऑक्यूपेंसी दर

दिल्ली

200%

मेघालय

189%

उत्तराखंड

183%

महाराष्ट्र

155%

मध्य प्रदेश

152%

उत्तर प्रदेश

150%

भारत

121%

स्रोत: जेल सांख्यिकी भारत, 2023; पीआरएस।

वर्ष 2021-22 में मंत्रालय ने 2025-26 तक के लिए जेल आधुनिकीकरण योजनाओं को 950 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ मंजूरी दी।[38]  इस योजना का उद्देश्य सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और सुधारात्मक प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करना है। इस योजना के लिए 2026-27 के लिए 300 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 19% अधिक है।

अंतरसंचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली, जिसका उद्देश्य पुलिस, अदालतों, अभियोजन पक्ष, जेलों और फोरेंसिक एजेंसियों के बीच निर्बाध डेटा साझाकरण को सक्षम करने के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों को एकीकृत करना है, के लिए 2025-26 (संशोधित अनुमानों) में 300 करोड़ रुपए की तुलना में 550 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

विचाराधीन कैदी और जमानत

2023 तक कुल कैदियों में विचाराधीन कैदियों की एक बड़ी संख्या मौजूद है। ये कुल कैदियों में 74% तक हैं।35  विचाराधीन कैदियों की संख्या 2022 में 4.3 लाख से घटकर 2023 में 3.9 लाख हो गई, जो 10% की कमी है।35  सर्वोच्च न्यायालय के अनुसंधान एवं योजना केंद्र (2025) ने कहा है कि जेलों में विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्या के कारण कैदियों की भीड़ बढ़ती है। इसकी वजह से जेल प्रशासन का खर्च भी काफी बढ़ जाता है।36

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसंधान एवं योजना केंद्र (2025) ने भी यह भी कहा कि जिला न्यायालयों जमानत देने में हिचकिचाती हैं।36 उसने यह भी कहा कि सत्र न्यायालयों में जमानत को खारिज करने की दर 32.3% और मजिस्ट्रेट न्यायालयों में 16.2% है।36 दिसंबर 2023 तक, 24,879 आरोपी व्यक्ति जिन्हें जमानत दी गई थी, जमानत बांड जमा नहीं कर पाए जिसके कारण वे जेल में ही बंद रहे।36  

2023 में एक वर्ष से अधिक समय से हिरासत में रहे आरोपी व्यक्तियों के मामले गवाही (53%), अदालत में पेशी (37%), और बहस (6%) के चरणों में लंबित थे।36

गृह मंत्रालय ने उन कैदियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक योजना शुरू की है जिन्हें जमानत आदेश के सात दिनों के भीतर या जुर्माने का भुगतान न करने के कारण रिहा नहीं किया जाता है।[39] 2026-27 में इस योजना के लिए दो करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

जेल की स्थितियां

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसंधान एवं योजना केंद्र (2025) का कहना है कि मॉडल कारागार नियमावली, 2016 के तहत निषेध के बावजूद, कुछ राज्य कारागार कानूनों ने कैदियों को सामाजिक स्थिति और जीवनशैली के आधार पर श्रेष्ठ या विशेष वर्गों और सामान्य वर्गों में वर्गीकृत करना जारी रखा है।36 इसके अलावा, कुछ राज्यों में कारागार नियमावली में जातिगत पहचान के आधार पर जेल का कार्य सौंपने और 'गुड कास्ट', 'सूटेबल कास्ट' और 'हाई कास्ट' जैसे शब्दों का उपयोग करने वाले प्रावधान बरकरार हैं।36  सर्वोच्च न्यायालय ने सुकन्या शांता बनाम भारत संघ मामले में ऐसी पद्धतियों को असंवैधानिक घोषित किया है।[40]

इसके अलावा, कुछ जेलों में मशीनीकृत सफाई विकल्पों के न होने के कारण हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध के बावजूद, नालियों और सीवरों की सफाई अभी भी दस्ताने पहनकर मैन्युअल रूप से की जाती है।36

वेतन, स्वास्थ्य और कल्याण

विभिन्न राज्यों के बीच कैदियों को मिलने वाली मजदूरी में बहुत बड़ा अंतर है। कुशल काम के लिए मिजोरम में जहां केवल 20 रुपए प्रति दिन मिलते हैं, वहीं कर्नाटक में 615 रुपए तक।35 हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में अकुशल कैदियों की मजदूरी राज्य की न्यूनतम मजदूरी के बराबर है।36 कई अन्य राज्यों में कैदियों को मिलने वाली मजदूरी न्यूनतम मजदूरी के 19वें हिस्से के बराबर है।36

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसंधान एवं योजना केंद्र (2025) ने यह भी उल्लेख किया कि अधिकांश राज्य जेल चिकित्सा अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल एक्ट, 2017 के तहत अनिवार्य बुनियादी और आपातकालीन मानसिक स्वास्थ्य देखभाल प्रशिक्षण प्रदान नहीं करते हैं।36

जेलों में सुधार और मॉडल फ्रेमवर्क

मॉडल कारागार और सुधारात्मक सेवा एक्ट, 2023, को कारागार एक्ट, 1894, कैदी एक्ट, 1900 और कैदी स्थानांतरण एक्ट, 1950 के स्थान पर लाया गया है।[41]  यह कानून खुली और अर्ध-खुली जेलों की स्थापना, जेल प्रशासन में तकनीक का उपयोग, कैदियों के कौशल विकास और उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में ऱखने का प्रावधान करता है। इसमें पैरोल की शर्तों को स्पष्ट किया गया है और जेल से छूटने के बाद की सहायता पर जोर दिया गया है। राज्य स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कानून में संशोधन कर सकते हैं। हालांकि अगस्त 2025 तक किसी भी राज्य ने इस मॉडल एक्ट को पूरी तरह से अपनाने की पुष्टि नहीं की है।[42]

2024 की मॉडल कारागार नियमावली का उद्देश्य जेलों और सुधार गृहों को चलाने वाले बुनियादी सिद्धांतों में एकरूपता लाना है।[43] इसे 21 राज्यों और सभी आठ केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाया जा चुका है।42

केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन

ऐसे केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) जहां विधानसभा नहीं होती, वे सीधे केंद्र सरकार के प्रशासन के अधीन होते हैं। ऐसे केंद्र शासित प्रदेशों को संविधान के अनुच्छेद 239ए और 239एए के तहत सीमित स्वायत्तता प्राप्त है।

2026-27 में केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 69,940 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसमें से 43,290 करोड़ रुपए जम्मू-कश्मीर को आवंटित किए गए हैं (कुल आवंटन का 62%)। लद्दाख के लिए आवंटन में 52% की कमी की गई है, जो 2025-26 के संशोधित बजट में 7,377 करोड़ रुपए से घटकर 2026-27 के लिए 4,869 करोड़ रुपए हो गया है।

तालिका 19: वर्ष 2026-27 में केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित धनराशि (करोड़ रुपए में)

यूटी

2024-25

2025-26 संअ

2026-27 बअ

संअ से बअ में परिवर्तन का %

जम्मू-कश्मीर

46,000

41,340

43,290

5%

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

5,941

7,388

6,680

-11%

चंडीगढ़

5,859

5,556

5,720

3%

लद्दाख

4,857

7,377

4,869

-52%

पुद्दूचेरी

3,302

3,518

3,518

0%

दादरा नगर हवेली तथा दमन दीव

2,636

2,741

2,833

3%

लक्षद्वीप

1,613

1,581

1,682

6%

दिल्ली

1,108

1,242

1,348

8%

कुल

71,316

70,743

69,940

-1%

स्रोत: मांग संख्या 52 से 59, गृह मंत्रालय, 2026-27; पीआरएस।

जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के लिए 2026-26 में 43,290 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (41,340 करोड़ रुपए) से 5% अधिक है। इसमें से 42,650 करोड़ रुपए केंद्र शासित प्रदेश को केंद्रीय सहायता के लिए, 279 करोड़ रुपए आपदा राहत कोष के लिए और 259 करोड़ रुपए झेलम-तावी बाढ़ राहत परियोजना के लिए आवंटित किए गए हैं।

दिल्ली

2026-27 में दिल्ली के लिए 1,348 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 8% अधिक है। इसमें से 951 करोड़ रुपए केंद्र शासित प्रदेश को केंद्रीय सहायता के लिए और 380 करोड़ रुपए चंद्रावल जल शोधन संयंत्र के लिए आवंटित किए गए हैं। 15 करोड़ रुपए केंद्र शासित प्रदेश आपदा प्रतिक्रिया कोष के लिए आवंटित किए गए हैं।

आपदा प्रबंधन

गृह मंत्रालय सूखा और महामारी के अलावा अन्य आपदाओं से निपटने के लिए नोडल मंत्रालय है।5  आपदा प्रबंधन में निम्नलिखित के लिए उपाय करना शामिल है: (i) आपदा के खतरे की रोकथाम, (ii) आपदा जोखिम और गंभीरता को कम करना, (iii) आपदाओं के प्रबंधन के लिए क्षमता विकास, (iv) त्वरित प्रतिक्रिया, निकासी, बचाव और राहत के लिए तैयारी करना, और (v) बहाली, पुनर्निर्माण और पुनर्वास सुनिश्चित करना।

आपदा वित्तपोषण तंत्र

15वें वित्त आयोग के सुझावों के आधार पर, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए दो कोषों का गठन किया गया है: राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (एसडीआरएमएफ) और राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (एनडीआरएमएफ)।7

तालिका 20: वर्ष 2021-26 के लिए आपदा प्रबंधन हेतु आवंटित धनराशि

घटक

आवंटन (%)

राशि (करोड़ रुपए में)

राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष

राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष

80%

1,28,122

  • प्रतिक्रिया एवं राहत

40%

27,385

  • बहाली एवं पुनर्निर्माण

30%

20,539

  • तैयारी एवं क्षमता निर्माण

10%

6,846

राज्य आपदा शमन कोष

20%

32,031

कुल एसडीआरएमएफ

100%

1,60,153

राष्ट्रीय आपदा राहत प्रबंधन कोष

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष

80%

54,770

राष्ट्रीय आपदा शमन कोष

20%

13,693

कुल एनडीआरएमएफ

100%

68,463

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 252, गृह मामलों पर विभाग संबंधित स्टैंडिंग कमिटी, 2025; पीआरएस।

2021-26 के लिए 15वें वित्त आयोग ने सतत विकास कोष (एसडीआरएमएफ) के तहत कुल 1,60,153 करोड़ रुपए के आवंटन का सुझाव दिया था। इसमें से केंद्र सरकार का हिस्सा 1,22,601 करोड़ रुपए है, जबकि राज्यों को 37,552 करोड़ रुपए का योगदान देना आवश्यक है।7

2026-27 से 2030-31 के लिए 16वें वित्त आयोग ने राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के लिए 2,04,401 करोड़ रुपए का सुझाव दिया है जो पिछली अवधि की तुलना में 27.6% की वृद्धि है।[44]  यह धनराशि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष के बीच 80:20 के अनुपात में साझा की जाएगी।44 राज्यवार आवंटन परिशिष्ट में दिया गया है।

2020-21 और जुलाई 2025 के बीच एनडीआरएफ और एनडीएमएफ से धनराशि जारी होने की दर कम रही है।44 कुल 68,463 करोड़ रुपए का सुझाव दिया गया था लेकिन 2022-24 के बीच सिर्फ 10,385 करोड़ रुपए जारी किए गए।44  इसमें सबसे अधिक धनराशि (53%) प्रतिक्रिया और राहत कार्यों के लिए जारी की गई (परिशिष्ट में तालिका 27)।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के लिए कुल 79,406 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।44 गंभीर आपदाओं की स्थिति में एनडीआरएमएफ से मिलने वाली सहायता एसडीआरएमएफ के संसाधनों को बढ़ाने या उनकी कमी को पूरा करने का काम करती हैं।

तालिका 21: राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

वर्ष

आवंटन

2026-27

14,370

2027-28

15,089

2028-29

15,843

2029-30

16,637

2030-31

17,467

कुल

79,406

स्रोत: 2026-2031 के लिए 16वीं वित्त आयोग की रिपोर्ट; पीआरएस।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) आपदा प्रबंधन और राहत से निपटने के लिए एक विशेष बल है।2026-27 के लिए, एनडीआरएफ को 2,002 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (1,928 करोड़ रुपए) से 3.8% की वृद्धि है।

स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एनडीआरएफ पूरी तरह से सीएपीएफ से डेप्युटेशन पर निर्भर है। वर्तमान में एनडीआरएफ में लगभग 21% पद खाली हैं जबकि खुद उन केंद्रीय बलों में भी कर्मचारियों की भारी कमी है।7  उसने डेप्युटेशन की नीतियों की समीक्षा करने का सुझाव दिया जिसमें सात साल के कार्यकाल के मूल्यांकन का सुझाव भी शामिल है।7 कमिटी ने एनडीआरएफ में शामिल होने के लिए कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने हेतु लचीली शर्तों और बेहतर भत्तों जैसे लाभ देने का सुझाव दिया।इसके अलावा, उसने नामांकन प्रक्रिया को सरल बनाने और एनडीआरएफ और सीएपीएफ के बीच तालमेल का सुझाव दिया।7

दमकल सेवा

दमकल सेवाओं को मजबूत करने के लिए, गृह मंत्रालय ने जुलाई 2023 में 'राज्यों में दमकल सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण की योजना' शुरू की।[45]  यह योजना एनडीआरएफ के तैयारी और क्षमता निर्माण विभाग के माध्यम से वित्त पोषित है और इसमें कुल 5,000 करोड़ रुपए का केंद्रीय परिव्यय है।45 फरवरी 2026 तक राज्यों को 1,798 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं।[46]  इसका उद्देश्य राज्य स्तर पर दमकल सेवाओं के बुनियादी ढांचे, उपकरणों और समग्र क्षमता में सुधार करना है। मार्च 2025 तक योजना के तहत वित्तीय सहायता के लिए 20 राज्यों के प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है।[47]  पहली किस्त के रूप में 18 राज्यों को 757 करोड़ रुपए पहले ही जारी किए जा चुके हैं।47

अनुलग्नक

तालिका 22: जनवरी 2024 तक राज्यों में प्रति लाख जनसंख्या पर पुलिसकर्मियों की संख्या

राज्य/यूटी

स्वीकृत

वास्तविक

 

राज्य/यूटी

स्वीकृत

वास्तविक

आंध्र प्रदेश

207

166

 

पंजाब

277

233

अरुणाचल प्रदेश

959

707

 

राजस्थान

143

119

असम

194

167

 

सिक्किम

991

831

बिहार*

133

80

 

तमिलनाडु

172

160

छत्तीसगढ़

270

214

 

तेलंगाना

225

161

गोवा

686

564

 

त्रिपुरा

713

540

गुजरात

172

132

 

उत्तर प्रदेश

181

134

हरियाणा

292

212

 

उत्तराखंड

198

174

हिमाचल प्रदेश

261

234

 

पश्चिम बंगाल

167

106

झारखंड

209

152

 

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

1,260

1,043

कर्नाटक

166

141

 

चंडीगढ़

566

532

केरल

172

153

 

दादरा नगर हवेली और दमन दीव

108

85

मध्य प्रदेश

144

123

 

दिल्ली

437

370

महाराष्ट्र

187

163

 

जम्मू-कश्मीर

676

489

मणिपुर

1,084

916

 

लद्दाख

1,182

851

मेघालय

487

393

 

लक्षद्वीप

465

361

मिजोरम

902

576

 

पुद्दूचेरी

268

218

नागालैंड

1,191

1,124

 

अखिल भारतीय

197

155

ओड़िशा

150

127

 

 

 

 

स्रोत: पुलिस संगठनों पर डेटा, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो, 2024; पीआरएस।

तालिका 23: सीएपीएफ बलों में इस्तीफे

वर्ष

एआर

बीएसएफ

सीआईएसएफ

सीआरपीएफ

आईटीबीपी

एसएसबी

कुल

2014

35

516

268

897

174

143

2,033

2015

25

398

318

972

230

127

2,070

2016

29

319

269

492

161

93

1,363

2017

33

414

380

671

153

90

1,741

2018

23

328

517

583

116

129

1,696

2019

19

436

378

451

152

113

1,549

2020

7

211

247

256

156

82

959

2021

17

478

212

548

207

203

1,665

2022

14

408

337

363

180

139

1,441

2023

16

1,025

399

535

242

254

2,471

2024

54

1,804

364

692

120

261

3,295

2025

99

1,156

448

996

76

302

3,077

कुल

371

7,493

4,137

7,456

1,967

1,936

23,360

स्रोत: अतारांकित प्रश्न संख्या 2647, लोकसभा, गृह मंत्रालय, 16 दिसंबर 2025; पीआरएस।

तालिका 24: राज्यों की जेलों में कैदियों की ऑक्यूपेंसी दर, 2023 (प्रतिशत में)

राज्य/यूटी

ऑक्यूपेंसी की दर (%)

 

राज्य/यूटी

ऑक्यूपेंसी की दर (%)

आंध्र प्रदेश

89

 

पंजाब

126

अरुणाचल प्रदेश

94

 

राजस्थान

98

असम

118

 

सिक्किम

91

बिहार

119

 

तमिलनाडु

81

छत्तीसगढ़

128

 

तेलंगाना

73

गोवा

91

 

त्रिपुरा

57

गुजरात

107

 

उत्तर प्रदेश

150

हरियाणा

117

 

उत्तराखंड

183

हिमाचल प्रदेश

127

 

पश्चिम बंगाल

110

झारखंड

133

 

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

127

कर्नाटक

107

 

चंडीगढ़

95

केरल

128

 

दमन दीव

85

मध्य प्रदेश

152

 

दिल्ली

200

महाराष्ट्र

155

 

जम्मू-कश्मीर

149

मणिपुर

46

 

लद्दाख

30

मेघालय

189

 

लक्षद्वीप

5

मिजोरम

141

 

पुद्दूचेरी

102

नागालैंड

40

 

अखिल भारतीय

121

ओड़िशा

74

 

   

नोट: जेल में कैदियों की संख्या की गणना, यानी ऑक्यूपेंसी की गणना, कैदियों की कुल संख्या/कुल क्षमता के आधार पर की जाती है और इसे प्रतिशत में दर्शाया जाता है।
स्रोत: जेल सांख्यिकी भारत 2023, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, 2024; पीआरएस।

तालिका 25: वर्ष 2026-27 से 2030-31 के लिए राज्यवार आपदा प्रतिक्रिया कोष का आवंटन (करोड़ रुपए में)

राज्य

2026-27

2027-28

2028-29

2029-30

2030-31

कुल

आंध्र प्रदेश

1,182

1,241

1,303

1,368

1,439

6,533

अरुणाचल प्रदेश

99

104

109

114

121

547

असम

843

885

929

975

1,028

4,660

बिहार

2,628

2,759

2,897

3,042

3,196

14,522

छत्तीसगढ़

479

503

528

554

582

2,646

गोवा

22

23

24

25

25

119

गुजरात

1,633

1,715

1,801

1,891

1,982

9,022

हरियाणा

564

592

622

653

686

3,117

हिमाचल प्रदेश

431

453

476

500

524

2,384

झारखंड

542

569

597

627

658

2,993

कर्नाटक

1,239

1,301

1,366

1,434

1,507

6,847

केरल

374

393

413

434

450

2,064

मध्य प्रदेश

2,258

2,371

2,490

2,615

2,743

12,477

महाराष्ट्र

5,718

6,004

6,304

6,619

6,952

31,597

मणिपुर

42

44

46

48

50

230

मेघालय

70

74

78

82

84

388

मिजोरम

46

48

50

53

55

252

नागालैंड

66

69

72

76

79

362

ओड़िशा

1,718

1,804

1,894

1,989

2,088

9,493

पंजाब

478

502

527

553

582

2,642

राजस्थान

1,778

1,867

1,960

2,058

2,162

9,825

सिक्किम

73

77

81

85

88

404

तमिलनाडु

1,638

1,720

1,806

1,896

1,991

9,051

तेलंगाना

536

563

591

621

648

2,959

त्रिपुरा

57

60

63

66

70

316

उत्तर प्रदेश

2,957

3,105

3,260

3,423

3,597

16,342

उत्तराखंड

797

837

879

923

967

4,403

पश्चिम बंगाल

1,326

1,392

1,462

1,535

1,611

7,326

कुल

29,594

31,075

32,628

34,259

35,965

1,63,521

स्रोत: 2026-27 से 2030-31 के लिए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट; पीआरएस।

तालिका 26: वर्ष 2026-26 से 2030-31 के लिए राज्यवार आपदा प्रबंधन कोष (करोड़ रुपए में)

राज्य

2026-27

2027-28

2028-29

2029-30

2030-31

कुल

आंध्र प्रदेश

296

311

327

343

356

1,633

अरुणाचल प्रदेश

25

26

27

28

31

137

असम

211

222

233

245

254

1,165

बिहार

657

690

725

761

798

3,631

छत्तीसगढ़

120

126

132

139

145

662

गोवा

5

5

6

7

7

30

गुजरात

408

428

449

471

500

2,256

हरियाणा

141

148

155

163

172

779

हिमाचल प्रदेश

108

113

119

125

131

596

झारखंड

135

142

149

156

166

748

कर्नाटक

310

326

342

359

375

1,712

केरल

93

98

103

108

114

516

मध्य प्रदेश

564

592

622

653

688

3,119

महाराष्ट्र

1,429

1,500

1,575

1,654

1,737

7,895

मणिपुर

10

11

12

12

13

58

मेघालय

18

19

19

20

21

97

मिजोरम

11

12

13

13

14

63

नागालैंड

16

17

18

19

21

91

ओड़िशा

429

450

473

497

524

2,373

पंजाब

120

126

132

139

144

661

राजस्थान

444

466

489

513

544

2,456

सिक्किम

18

19

20

21

23

101

तमिलनाडु

410

431

453

476

493

2,263

तेलंगाना

134

141

148

155

162

740

त्रिपुरा

14

15

16

17

17

79

उत्तर प्रदेश

739

776

815

856

900

4,086

उत्तराखंड

199

209

219

230

244

1,101

पश्चिम बंगाल

332

349

366

384

401

1,832

कुल

7,396

7,768

8,157

8,564

8,995

40,880

स्रोत: 2026-27 से 2030-31 के लिए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट; पीआरएस।

तालिका 27: 15वें वित्त आयोग के अनुसार आवंटन और जुलाई 2025 तक एनडीआरएमएफ से जारी की गई राशि (करोड़ रुपए में)

निर्धारित धनराशि

आवंटन

जारी

प्रतिक्रिया एवं राहत

27,385

14,855

तैयारी एवं क्षमता निर्माण

6,846

2,779

अग्निशमन सेवाओं का आधुनिकीकरण - तैयारी और क्षमता निर्माण

5,000

1,215

बहाली और पुनर्निर्माण

20,539

819

सात सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में बाढ़ के जोखिम का शमन

2,500

710

बारह सबसे अधिक सूखाग्रस्त राज्यों को उत्प्रेरक सहायता

1,200

350

राष्ट्रीय हिमनद झील विस्फोट बाढ़ जोखिम निवारण कार्यक्रम

150

28

भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण एवं शमन परियोजना

1,000

5

भूस्खलन से प्रभावित विस्थापित लोगों का पुनर्वास

1,000

-

दस राज्यों में भूकंप और भूस्खलन के जोखिम का प्रबंधन

750

-

मिट्टी के कटाव को रोकने के उपाय

1,500

-

वन अग्नि शमन परियोजना

819

-

आकाशीय बिजली सुरक्षा हेतु शमन परियोजना

187

-

पंचायती राज संस्थानों में समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण पहल को मजबूत करने की राष्ट्रीय परियोजना

163

-

स्रोत: 2026-2031 के लिए 16वीं वित्त आयोग की रिपोर्ट; पीआरएस।

 

[1] “About the Ministry” Ministry of Home Affairs, as accessed on January 31, 2026, https://www.mha.gov.in/en/page/about-ministry.

[3] Demand No 51, Police, Ministry of Home Affairs, 2026-27, https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/sbe51.pdf.

[4] Data on Police Organisations, 2024, Bureau of Police Research and Development, Ministry of Home Affairs, https://bprd.nic.in/uploads/pdf/Data%20on%20Police%20Organizations%20(2024)_%20(14-07-25)%20All.pdf.

[5] Annual Report 2023-24, Ministry of Home Affairs, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/AnnualReport_27122024.pdf.

[6] “Vacancies In Central Armed Police Forces” Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, July 24, 2024,

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2036391&reg=3&lang=2#:~:text=The%20number%20of%20vacancies%20as,at%20different%20stages%20of%20recruitment.

[7] Report No 252, Demand for Grants, Ministry of Home Affairs, 2025-26, Departmentally Related Standing Committee on Home Affairs, March 10, 2025, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/15/197/252_2025_5_14.pdf?source=rajyasabha.

[8] “Central Armed Police Forces and Internal Security Challenges – Evaluation and Response Mechanism” Committee on Estimates, March 2018, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/762531/1/16_Estimates_28.pdf.pdf.

[9] Report No 242, Demands for Grants, Ministry of Home Affair, Standing Committee on Home Affairs, Rajya Sabha, March 17, 2023, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/15/169/242_2023_6_17.pdf?source=rajyasabha.

[10] Report No 215, “Working Conditions in Non-Border Guarding Central Armed Police Forces” Standing Committee on Home Affairs, December 2018,  https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/15/107/215_2019_11_14.pdf?source=rajyasabha.

[11] “Accidental Deaths and Suicides in India” National Crime Records Bureau, Ministry of Home Affairs, 2022, https://www.ncrb.gov.in/uploads/files/AccidentalDeathsSuicidesinIndia2022v2.pdf.

[12] Unstarred Question No 58, Rajya Sabha, Ministry of Home Affairs, December 7, 2022, https://rsdebate.nic.in/bitstream/123456789/735464/2/IQ_258_07122022_U58_p211_p213.pdf.

[13] “Police - Training, Modernisation and Reforms”, Report No 237, Standing Committee on Home Affairs, February 10, 2022, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/15/161/237_2022_2_17.pdf?source=rajyasabha.

[14] Report No 244, ‘Action Taken By Government On The Recommendations/Observations Contained In The Two Hundred Thirty Seventh Report On Police - Training, Modernisation And Reforms’, Standing Committee on Home Affairs, March 17, 2023, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/15/169/244_2023_6_10.pdf?source=rajyasabha

[15] Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023, Ministry of Home Affairs, December 25, 2023, https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/20099.

[16] Unstarred Question No. 3452, Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, December 17, 2024, https://www.mha.gov.in/MHA1/Par2017/pdfs/par2024-pdfs/LS17122024/3452.pdf.

[17] Report of the Comptroller and Auditor General of India on Performance Audit of “Manpower and Logistics management in Delhi Police, 2020, https://cag.gov.in/uploads/download_audit_report/2020/Report%20No.%2015%20of%202020_English_Police-05f809de4527eb8.68338874.pdf.

[18] Unstarred Question No 239, Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, December 2, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU239_xnef1g.pdf?source=pqals

[19] Unstarred Question No 1479, Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, July 19, 2025,  https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU1479_ErnSPO.pdf?source=pqals.

[20] “Cyber Crime - Ramifications, Protection and Prevention” Report No 254, Department Related Parliamentary Standing Committee on Home Affairs, Rajya Sabha, August 20, 2025, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/15/213/254_2025_10_16.pdf?source=rajyasabha

[21] Unstarred Question No 2729, Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, December 16, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU2729_ztGHlY.pdf?source=pqals

[22] Gazette of India, Notification, Ministry of Home Affairs, November 14, 2024, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/ManipurPS_19112024.pdf.

[23] “Union Home Minister and Minister of Cooperation, Shri Amit Shah, chairs high-level review meeting on the security situation of Manipur in New Delhi” Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, March 1, 2025,  https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2107226.

[24] “Manipur: Yumnam Khemchand Singh stakes claim to form government, set to be CM” The Hindu, as accessed on February 5, 2026, https://www.thehindu.com/news/national/manipur/yumnam-khemchand-singh-stakes-claim-to-form-government-in-manipur-set-to-be-cm/article70590961.ece.

[25] Unstarred Question No 481, Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, February 3, 2026, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU481_9GFTtH.pdf?source=pqals.

[26] “Population Census-2027 to be conducted in two phases along with enumeration of castes”, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, June 4, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2133845.

[27] Unstarred Question No 592, Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, February 6, 2024, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/2974846/1/AU592.pdf.

[28] “Census 2011 Provisional Population Totals” Office of the Registrar General and Census Commissioner, India Ministry of Home Affairs, March 31, 2011, https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/42611/download/46274/Census%20of%20India%202011-Provisional%20Population%20Totals.pdf.

[30] Unstarred Question No 2550, Ministry of Home Affairs, Lok Sabha, December 16, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU2550_2288dn.pdf?source=pqals&utm.

[31] “Cabinet approves “Vibrant Villages Programme-II (VVP-II) for financial years 2024-25 to 2028-29” PMIndia website, as accessed on January 31, 2026, https://www.pmindia.gov.in/en/news_updates/cabinet-approves-vibrant-villages-programme-ii-vvp-ii-for-financial-years-2024-25-to-2028-29/.

[32] Entry No. 4, List II – State List, Constitution of India https://legislative.gov.in/constitution-of-india/.

[34] Advisory V-17013/22/2023-PR, “Adoption of ‘Model Prisons and Correctional Services Act, 2023’ by the States and Union Territories (UTs)”, Ministry of Home Affairs, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/advisory_10112023.pdf

[35] Prison Statistics India, 2023, National Crime Records Bureau, Ministry of Home Affairs, September 26, 2023, https://www.ncrb.gov.in/uploads/files/PSI-20231.pdf

[36] Prisons in India, Centre for Research and Planning, Supreme Court of India, November 2025, https://cdn.s3waas.gov.in/s3ec0490f1f4972d133619a60c30f3559e/uploads/2025/11/2025112244-1.pdf

[37] Report on Prisons in India, Centre for Research and Planning, Supreme Court of India, October 2024, https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3ec0490f1f4972d133619a60c30f3559e/uploads/2024/11/2024110677.pdf.

[38] “Implementation of the 'Modernisation of Prisons' project in Prisons States and Union Territories” Ministry of Home Affairs, April 5, 2022, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/2024-09/GuidelinesModernisationPrisons_13092024.pdf

[40] Sukanya Shantha vs Union of India, Supreme Court of India, October 3, 2024, https://api.sci.gov.in/supremecourt/2023/51059/51059_2023_1_1502_56228_Order_03-Oct-2024.pdf.

[41] Model Prisons and Correctional Services Act, 2023, Ministry of Home Affairs, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/2024-12/ModelPrisonsCorrectionalServicesAct_20122024.pdf.

[42] Unstarred Question No 2004, Rajya Sabha, Ministry of Home Affairs, August 6, 2025, https://sansad.in/getFile/annex/268/AU2004_QZ3PlI.pdf?source=pqars.

[44] Report of the sixteenth Finance Commission for 2026-31, Ministry of Finance, https://www.indiabudget.gov.in/doc/16fcvol1.pdf.

[45] Unstarred Question No 3986, Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, March 25, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/184/AU3986_OfUPuc.pdf?source=pqals.

[46] Unstarred Question No 610, Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, February 3, 2026, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU610_foremg.pdf?source=pqals.

[47] Unstarred Question No 1996, Lok Sabha, Ministry of Home Affairs, March 11, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/184/AU1996_ydlweg.pdf?source=pqals.

 

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