मुख्य बिंदु

  • जल जीवन मिशन के तहत 2026-27 में 67,670 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से लगभग चार गुना अधिक है। अब तक 2025-26 में इस योजना के तहत राज्यों को कोई धनराशि जारी नहीं की गई है।
  • स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण, नमामि गंगे और पीएम कृषि सिंचाई योजना जैसी योजनाओं में धनराशि का कम उपयोग देखा गया।
  • लगभग 75% जिले जल संकट/जल की कमी से ग्रस्त हैं। हाल के वर्षों में सुधार के बावजूद, सतही और भूजल प्रदूषण बना हुआ है।

भारत में जल संसाधनों के विकास और रखरखाव के लिए जल शक्ति मंत्रालय जिम्मेदार है।[1]  इसके अलावा यह ग्रामीण भारत में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए भी जिम्मेदार है।1

मंत्रालय के दो विभाग हैं – पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) और जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन विभाग (डीओडब्ल्यूआर)।1  डीडीडब्ल्यूएस ग्रामीण भारत को पेयजल एवं स्वच्छता की सुविधा प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है।[2] डीओडब्ल्यूआर जल संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन हेतु नीतियां निर्धारित करने के लिए उत्तरदायी है। यह जल संसाधनों की निगरानी, ​​जल प्रदूषण से निपटने तथा अंतरराज्यीय एवं सीमा पारीय जल संबंधी समस्याओं को हल करने के लिए भी उत्तरदायी है।[3]

इस नोट में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किए गए व्यय और प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन का विश्लेषण किया गया है। इसमें भारत में जल संसाधनों और उनके गवर्नेंस से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई है। 

वित्तीय स्थिति

2026-27 में जल शक्ति मंत्रालय को 94,808 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जो 2025-26 के बजट आवंटन (99,503 करोड़ रुपए) से 5% कम है। 2017-18 से मंत्रालय के बजट का अधिकांश हिस्सा जल जीवन मिशन (जेजेएम) और स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण (एसबीएम-जी) को लागू करने वाले डीडीडब्ल्यूएस को आवंटित किया गया है। हालांकि 2025-26 में जेजेएम पर खर्च का संशोधित अनुमान बजट अनुमान से 75% कम है। 2025-26 में अन्य प्रमुख योजनाओं पर भी खर्च संशोधित स्तर पर कम हुआ है जैसे एसबीएम-जी (बजट अनुमान से 50% कम), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (20% कम) और नदी जोड़ो कार्यक्रम (25% कम)। इसके परिणामस्वरूप मंत्रालय के व्यय का संशोधित अनुमान बजट अनुमान से 58% कम हो गया है।

तालिका 1: जल शक्ति मंत्रालय को आवंटित बजट राशि (करोड़ रुपए में)

विभाग

2024-25 वास्तविक

2025-26 संअ

2026-27 बअ

25-26 संअ से 26-27 बअ में परिवर्तन का %

पेयजल एवं स्वच्छता

25,853

23,031

74,895

225%

  इनमें से

 

 

 

 

    जेजेएम

22,615

17,000

67,670

298%

    एसबीएम-जी

3,613

6,000

7,192

20%

जल संसाधन

20,867

18,406

19,913

8%

  इनमें से

 

 

 

 

   पीएमकेएसवाई

6,501

6,922

7,137

3%

    नमामि गंगे

2,976

2,687

3,100

15%

    नदी जोड़ो

1,955

1,808

1,906

5%

    एबीवाई

594

613

0.13

-100%

कुल

46,720

41,437

94,808

129%

नोट: बअ बजट अनुमान है और संअ संशोधित अनुमान है।
स्रोत: अनुदान मांग 2026-27, जल शक्ति मंत्रालय; पीआरएस।

व्यय के संशोधित अनुमानों में कमी के बावजूद, मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली अधिकांश योजनाओं के लिए 2026-27 का बजट आवंटन 2025-26 के बजट अनुमानों के समान है।

मुख्य योजनाएं

2022 तक भारत में 90% जल का उपयोग सिंचाई के लिए, 7% घरेलू उपभोग के लिए और शेष औद्योगिक उपयोग के लिए किया जाता था।[4] घरेलू उपभोग में पीने, खाना पकाने, कपड़े धोने और स्वच्छता के लिए पानी शामिल है। जल शक्ति मंत्रालय इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराने हेतु कई योजनाएं लागू करता है।

जल जीवन मिशन

जल जीवन मिशन (जेजेएम), जिसे 2019 में शुरू किया गया था, का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को चालू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) प्रदान करना है।[5]  शुरूआत में 2019-24 की अवधि के लिए लागू की गई इस योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है।[6]  2021-22 से जेजेएम के लिए आवंटन मंत्रालय के कुल बजट का लगभग 70% प्रति वर्ष रहा है।

जेजेएम के लिए 2026-27 में 67,670 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जो 2025-26 के बजट अनुमान से 1% अधिक है। 2026-27 में यह ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के बाद दूसरी सबसे बड़ी केंद्र प्रायोजित योजना है। 2025-26 में योजना पर खर्च का संशोधित अनुमान (17,000 करोड़ रुपए) बजट आवंटन (67,000 करोड़ रुपए) से 75% कम है। 2020-21 के बाद से किसी भी वर्ष में योजना पर यह सबसे कम व्यय है। केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार, इसे राज्य सरकारों को सहायतानुदानों की कम आवश्यकता से समझा जा सकता है।[7]  2024-25 में वास्तविक व्यय बजट से 68% कम था।

रेखाचित्र 1: वर्ष 2025-26 में जेजेएम पर होने वाले खर्च का संशोधित अनुमान बजट से 75% कम

नोट: वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान को वास्तविक आंकड़े माना गया है।
स्रोत: विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग, जल शक्ति मंत्रालय; पीआरएस।

योजना के अंतर्गत लागत में वृद्धि

जेजेएम को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया जा रहा है जिसमें परियोजनाओं के लिए धन केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच साझा किया जाता है।[8] इसे कुल (केंद्र और राज्यों सहित) 3.06 लाख करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुरू किया गया था।8  यह अनुमान लगाया गया था कि केंद्र सरकार इस योजना पर 2.09 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी और मार्च 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को एफएचटीसी प्रदान किया जाएगा।  यह अनुमान लगाया गया था कि यह व्यय 2019-2022 के दौरान बढ़ेगा और उसके बाद घटेगा (रेखाचित्र 2 देखें)।8 हालांकि, जनवरी 2025 तक केंद्र सरकार ने योजना के लिए 4.3 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए हैं और 2.06 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं।[9] इस दौरान, 100% के लक्ष्य के मुकाबले 81% ग्रामीण परिवारों को एफएचटीसी प्राप्त हुए हैं।[10] 

रेखाचित्र 2: जेजेएम के लिए केंद्रीय व्यय में 2024 के बाद कमी आने की उम्मीद थी

स्रोत: जेजेएम परिचालन दिशानिर्देश, जेजेएम डैशबोर्ड; पीआरएस।

2020 में जेजेएम के तहत प्रति परिवार औसत लागत अधिकतम 47,000 रुपए होने का अनुमान था (दूरदराज/आदिवासी बस्तियों में सौर-आधारित जलापूर्ति प्रदान करने की उप-योजना को छोड़कर)।Error! Bookmark not defined. हालांकि 2023-24 से एक परिवार को एफएचटीसी प्रदान करने की औसत लागत 50,000 रुपए से अधिक हो गई है।9,10 

राज्यों ने परियोजना के कार्यान्वयन में देरी के कई कारण बताए हैं।[11]  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) विश्वसनीय पेयजल स्रोतों का अभाव, (ii) भूजल में भूगर्भीय संदूषण, (iii) असमान भौगोलिक भूभाग, और (iv) अपर्याप्त तकनीकी क्षमता। राज्यों में कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन संकट के कारण कच्चे माल की लागत में वृद्धि भी देखी गई।[12] राज्यों ने इन लागतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता का अनुरोध किया था। जून 2022 में इसके मद्देनजर परिचालन दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया।12  इस संशोधन के जरिए टेंडर प्रीमियम को अस्वीकार्य व्यय की श्रेणी से हटा दिया गया है।[13]  इसमें यह प्रावधान भी किया गया है कि अगर टेंडर प्रक्रिया के जरिए आई लागत अनुमानित परियोजना लागत से अधिक होती है तो उसके लिए अतिरिक्त मंजूरी ली जा सकती है।13

2025-26 में योजना के अंतर्गत कोई केंद्रीय राशि जारी नहीं की गई

केंद्रीय बजट 2025-26 के तहत जेजेएम योजना को 2028 तक बढ़ा दिया गया था।6 हालांकि योजना के विस्तार के लिए कोई दिशानिर्देश प्रकाशित नहीं किए गए हैं। 3 फरवरी, 2026 तक जेजेएम सूचना प्रबंधन प्रणाली से पता चलता है कि 2025-26 में राज्यों को कोई धनराशि आवंटित या जारी नहीं की गई थी (तालिका 2 देखें)।9  2 फरवरी, 2026 को मंत्रालय ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि 2025-26 में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई थी।[14]  इस दौरान केंद्र सरकार के 232 करोड़ रुपए खर्च हुए। यह राशि पिछले वर्षों के बचे हुए बजट से ली गई थी।9 

तालिका 2: वर्ष 2025-26 में जेजेएम के तहत राज्यों को केंद्रीय आवंटन या धनराशि जारी नहीं की गई

वर्ष

केंद्रीय आवंटन

केंद्र द्वारा जारी राशि

2019-20

11,139

9,952

2020-21

23,033

10,918

2021-22

92,309

40,010

2022-23

1,00,790

54,742

2023-24

1,32,937

69,885

2024-25

69,927

22,540

2025-26

0

0

स्रोत: जेजेएम डैशबोर्ड; पीआरएस।

रेखाचित्र 3: वर्ष 2024-25 और 2025-26 में राज्य का व्यय केंद्रीय व्यय से अधिक

स्रोत: जेजेएम डैशबोर्ड; पीआरएस।

मंत्रालय ने कहा है कि पात्र राज्यों को केंद्रीय अनुदान केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा योजना के विस्तार की मंजूरी और दिशानिर्देशों के प्रकाशन के बाद ही जारी किया जाएगा।6  जेजेएम के नियमों के अनुसार, राज्यों को केंद्रीय वित्तीय सहायता मार्च 2024 तक प्रदान की जाएगी।6  मार्च 2024 के बाद स्वीकृत योजनाओं के लिए राज्यों को वित्तीय दायित्व वहन करना होगा।6  इसी के अनुरूप, 2024-25 से योजना पर राज्य का व्यय केंद्रीय व्यय से अधिक हो गया है। 

योजना के कार्यान्वयन में अनियमितताएं

जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से जेजेएम के अंतर्गत वित्तीय अनियमितताओं और कार्य की निम्न गुणवत्ता के संबंध में 17,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं।[15]  जुलाई 2025 तक जेजेएम परियोजनाओं का जमीनी निरीक्षण करने के लिए अधिकारियों द्वारा 140 जिलों का दौरा किया गया था।12 विभाग के दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ जांच, अनुशासनात्मक कार्रवाई, एफआईआर दर्ज करना और निलंबन सहित कार्रवाई की गई है।15 

जुर्माना भी लगाया गया है और वसूल किया गया है।[16] दिसंबर 2025 तक छह राज्यों ने 129 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने की जानकारी दी।16 इसमें से 9% (12 करोड़ रुपए) वसूल किए जा चुके हैं। इसमें गुजरात से 7 करोड़ रुपए, राजस्थान से 4 करोड़ रुपए और त्रिपुरा से एक करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में ठेकेदारों से 340 करोड़ रुपए हर्जाने (अनुबंध के उल्लंघन के मामले में पूर्व-निर्धारित मुआवजा) के रूप में वसूल किए गए।16

एफएचटीसी की कार्य क्षमता

जेजेएम गांवों के 2024 के आकलन में पाया गया कि 87% घरों में नल के पानी के कनेक्शन काम कर रहे थे।[17]  हालांकि 76% घरों में ही नल के कनेक्शन पूरी तरह से चालू थे।17 इसका मतलब यह है कि: (i) घर को प्रति व्यक्ति प्रति दिन कम से कम 55 लीटर पानी मिल रहा था, (ii) पानी की आपूर्ति पूर्व निर्धारित शेड्यूल के अनुसार हो रही थी, और (iii) पानी संदूषण से मुक्त था और गुणवत्ता मानकों को पूरा करता था। नल के कनेक्शन काम न करने के सबसे आम कारण पंप की खराबी, क्षतिग्रस्त पाइपलाइन और बिजली की समस्याएं थीं।17 सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि हालांकि उपयोगकर्ता संतुष्टि उच्च (80% से अधिक) थी, कुछ क्षेत्रों में पानी में सूक्ष्मजीवों का संदूषण पाया गया।17 राज्यवार आंकड़ों के लिए तालिका 9 देखें।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)

स्वच्छ भारत मिशन– ग्रामीण (एसबीएम-जी) 2014 में खुले में शौच को समाप्त (ओडीएफ) करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।[18],24 इस चरण (चरण-1) में सभी ग्रामीण परिवारों को शौचालय उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। योजना का दूसरा चरण 2020 में शुरू किया गया था, जिसे 2024-25 तक लागू किया जाना है।[19]  इसका उद्देश्य सभी गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल गांव बनाना है।24  यह प्रक्रिया तीन चरणों में आगे बढ़ती है (तालिका 3 देखें)।[20]  इस चरण के अंतर्गत नए सृजित परिवारों और पिछले चरण के शेष परिवारों के लिए शौचालयों का निर्माण प्रस्तावित है।24

एसबीएम-जी योजना के लिए 2026-27 में 7,192 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस योजना के लिए बजट आवंटन 2022-23 से हर वर्ष समान रहा है। 2018-19 से हर वर्ष इस योजना पर वास्तविक व्यय बजट आवंटन से कम रहा है। 2024-25 में वास्तविक व्यय 3,613 करोड़ रुपए था जो बजट अनुमान से 50% कम था। संशोधित अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में एसबीएम-जी पर 6,000 करोड़ रुपए (बजट से 17% कम) खर्च होने की उम्मीद है।

तालिका 3: ओडीएफ प्लस स्थिति के चरण

प्रकार

गांव के लिए नियम

ओडीएफ प्लस आकांक्षी

ओडीएफ की स्थिति बरकरार रखना और ठोस या तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था करना।

ओडीएफ प्लस उन्नत

ओडीएफ की स्थिति बरकरार रखना और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था करना।

ओडीएफ प्लस मॉडल

ओडीएफ की स्थिति बरकरार रखना, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था करना, दृश्य स्वच्छता का ध्यान रखना और ओडीएफ प्लस संदेशों को प्रदर्शित करना।

स्रोत: पीआईबी; पीआरएस।

एसबीएम-जी के अंतर्गत लक्ष्य प्राप्ति

2019 तक देश के सभी गांवों ने खुद को ओडीएफ-मुक्त घोषित कर दिया था।18 हालांकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में दर्ज किया गया कि 26% ग्रामीण परिवार खुले में शौच करते थे (2019 और 2021 के बीच)।[21] जनवरी 2026 तक, एसबीएम-जी के तहत 12 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालय बनाए जा चुके हैं।[22] 

रेखाचित्र 4: एसबीएम-जी चरण II में कम उपयोग की गई धनराशि

नोट: वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान को वास्तविक माना गया है।
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज; पीआरएस।

एसबीएम-जी के अंतर्गत 5.86 लाख गांव शामिल हैं।22  90% गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और 93% गांवों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।22  इनमें कंपोस्ट पिट्स, सामुदायिक सोक पिट्स, सीवर, बंद नालियां, मल कीचड़ प्रबंधन प्रणाली आदि शामिल हैं।[23]  व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के साथ-साथ एसबीएम-जी के अंतर्गत सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण को भी प्राथमिकता दी गई है।23 

रेखाचित्र 1: एसबीएम-जी के तहत सृजित सामुदायिक परिसंपत्तियां

परिसंपत्तियां

सृजित परिसंपत्तियों की संख्या

(जनवरी 2026 तक)

सैनिटरी कॉम्प्लेक्स

2,68,375

कंपोस्ट पिट्स

12,24,872

सोक/लीच/मैजिक पिट्स

23,12,141

जल निकासी सुविधाएं

14,43,325

बायोगैस संयंत्र (चालू)

1,116

मल कीचड़ प्रबंधन संयंत्र

2,303

प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाई

2,297

स्रोत: एसबीएम-जी डैशबोर्ड, 8 जनवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी; पीआरएस।

भौतिक मानदंडों को पूरा करने के बाद एक ग्राम सभा की बैठक में कोई गांव स्वयं को ओडीएफ प्लस घोषित कर सकता है।23  इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन को 90 दिनों के भीतर थर्ड-पार्टी वैरिफिकेशन पूरा करना होगा।23  इसके बाद गांव के लिए ओडीएफ प्लस वैरिफिकेशन हर वर्ष पूरा किया जाना चाहिए।23  जनवरी 2026 तक इन गांवों में से 97% ओडीएफ प्लस थे, और 84% ओडीएफ प्लस मॉडल गांव थे।22  मॉडल गांव दर्जे का पहला वैरिफिकेशन 72% गांवों में पूरा हो चुका है, और दूसरा वैरिफिकेशन 29% गांवों में पूरा हो चुका है।22

धनराशि मिलने में देरी

एसबीएम-जी एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें धनराशि का योगदान करती हैं।[24]  इसके अतिरिक्त, वित्त आयोग के अनुदान और राजस्व सृजन मॉडल (विशेष रूप से अपशिष्ट प्रबंधन के लिए) से भी धनराशि प्राप्त होने की उम्मीद है।24  2014-15 और 2024-25 के बीच केंद्र द्वारा राज्यों को 86,534 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।[25]  इस योजना को 2025-26 तक बढ़ाया गया था जिसका वित्तपोषण दिए गए परिव्यय के तहत शेष बचत से किया जाना था।[26]  2023-24 में आंध्र प्रदेश, हरियाणा और केरल सहित सात राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई।25 2024-25 में इस सूची में छत्तीसगढ़, झारखंड और मेघालय शामिल हो गए।25 

मई 2024 में राज्यों को समय पर धनराशि जारी करने की एक नई प्रणाली, एसएनए-स्पर्श (SNA-SPARSH) शुरू की गई।[27]  राज्यों को इस प्रणाली का उपयोग करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना और योजना कार्यान्वयन एजेंसियों को प्रशिक्षित करना आवश्यक था। इस दौरान, पिछली प्रणाली (राज्यों के एकल नोडल खातों के माध्यम से) के तहत धनराशि जारी करना भी बंद कर दिया गया था।27 सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 1 अप्रैल, 2025 से पहले स्पर्श प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित होना आवश्यक था।[28]  फरवरी 2025 तक केवल 13 राज्य ही स्पर्श पर स्थानांतरित हुए थे।27 मंत्रालय ने पात्र राज्यों को धनराशि जारी करने में देरी का कारण राज्यों द्वारा नए प्लेटफॉर्म को अपनाने में देरी को बताया।27  नई प्रणाली से अपरिचित होने के कारण स्पर्श पर स्थानांतरित हुए राज्यों में भी व्यय कम हुआ।27  

रेखाचित्र 5: 2024-25 और 2025-26 में राज्यों को जारी किए गए आरएलबी अनुदानों में कमी आई

नोट: 2025-26 के आंकड़े 2 दिसंबर, 2025 तक के हैं।
स्रोत: अतारांकित प्रश्न संख्या 1440, लोकसभा, 9 दिसंबर 2025; पीआरएस।

एसबीएम-जी के तहत राज्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) के लिए वित्त आयोग के अनुदान का उपयोग धन के एक अतिरिक्त स्रोत के रूप में करें।23  ग्राम स्तर पर ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों और सामुदायिक स्वच्छता परिसरों की लागत का 30% इस माध्यम से वित्त पोषित होने की उम्मीद है।23 हालांकि, राज्यों को आरएलबी अनुदान प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। इसका कारण कुछ अनुदानों से जुड़ी शर्तों को पूरा करने में असमर्थता हो सकती है, जैसे कि स्थानीय निकायों के ऑडिट किए गए खातों को ऑनलाइन उपलब्ध कराना।

एसबीएम-जी दिशानिर्देशों के तहत राज्य सरकार को अंडरटेकिंग देनी होगी कि स्वच्छता गतिविधियों के लिए निर्धारित धनराशि आरएलबी को हस्तांतरित की जा रही है।23  केंद्र से धनराशि जारी करना इस अंडरटेकिंग पर निर्भर है।23

शौचालय निर्माण हेतु वित्तीय सहायता में संशोधन की आवश्यकता

एसबीएम-जी के तहत, शौचालय बनाने के लिए परिवारों को 12,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है।23 जल संसाधन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी ने कई बार यह उल्लेख किया है कि यह राशि अपर्याप्त है। यह लागत एसबीएम-जी के प्रारंभिक कार्यान्वयन से पहले किए गए 2014 के आकलन के आधार पर निर्धारित की गई थी।26 कमिटी (2025) ने पाया है कि 2014 के बाद से निर्माण सामग्री और अन्य इनपुट की लागत में काफी वृद्धि हुई है।26 उसने इस प्रोत्साहन राशि को बढ़ाने का सुझाव दिया।26 

प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना

2022-23 तक अनुमान है कि भारत में कुल बोए गए क्षेत्र का 56% हिस्सा सिंचाई के अंतर्गत है।[29] शेष कृषि भूमि जल के लिए वर्षा पर निर्भर है। हालांकि देश भर में वर्षा के पैटर्न में बदलाव देखे गए हैं।[30] लगभग दो-तिहाई कृषि भूमि सूखाग्रस्त भी है।[31]  इन कारकों से सिंचाई की आवश्यकता बढ़ जाती है, ताकि खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। कृषि योग्य भूमि के सिंचाई क्षेत्र को बढ़ाने और खेतों में जल उपयोग दक्षता में सुधार करने के लिए प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) योजना शुरू की गई थी।[32] इसका दूसरा चरण 2021-22 से 2025-26 तक कार्यान्वित किया जा रहा है। योजना के चार प्रमुख घटकों में से दो का कार्यान्वयन जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। ये हैं- त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) और हर खेत को पानी (एचकेकेपी)। एआईबीपी (जिसे 1996-97 में शुरू किया गया था और 2016 में पीएमकेएसवाई के अंतर्गत लाया गया) का मुख्य उद्देश्य बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करना है।[33]  एचकेकेपी का मुख्य उद्देश्य लघु सिंचाई और जलाशयों का जीर्णोद्धार करना है।33

रेखाचित्र 6: पीएमकेएसवाई के लिए बजट आवंटन 2016-17 से अधिक, लेकिन उपयोग उम्मीद से कम (करोड़ रुपए में)

नोट: 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान को वास्तविक माना गया है। बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम, सिंचाई संगणना और महाराष्ट्र के लिए विशेष पैकेज को 2025-26 के बजट दस्तावेजों में पीएमकेएसवाई से अलग कर दिया गया है। पुराने आंकड़ों के साथ संगति बनाए रखने के लिए, 2023-24 के वास्तविक व्यय और 2024-25 के सभी आंकड़ों को इन कार्यक्रमों को शामिल करने के लिए समायोजित किया गया है। इन्हें छोड़कर, पीएमकेएसवाई के लिए 2026-27 के लिए 7,137 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
स्रोत: विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

2016-17 से 2025-26 के बीच पीएमकेएसवाई के लिए कुल 59,344 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वास्तविक व्यय इस राशि का 87% अनुमानित है। 2023-24 से इस योजना पर व्यय बजट अनुमान के 80% से अधिक रहा है।

पीएमकेएसवाई एक केंद्र प्रायोजित योजना है। अगस्त 2025 तक (2016-17 से) राज्यों को 28,743 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है।[34]

एआईबीपी और एचकेकेपी के तहत अधूरे लक्ष्य

2016-17 और 2023-24 के बीच एआईबीपी के तहत 1.2 करोड़ हेक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजित की गई है।29 सिंचाई क्षमता से तात्पर्य उस भूमि से है जिसे उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग करके सिंचित किया जा सकता है। यह एआईबीपी के सिंचाई क्षमता लक्ष्य (1.5 करोड़ हेक्टेयर) का 78% है।29 मार्च 2025 तक एआईबीपी के तहत 61% परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं (108 में से 66)।34

एचकेकेपी के अंतर्गत दो प्रमुख उप-घटक हैं- सतही लघु सिंचाई (एसएमआई) और जलाशयों की मरम्मत, नवीनीकरण और जीर्णोद्धार (आरआरआर)।[35]  एसएमआई के अंतर्गत, नवंबर 2024 तक 7,304 परियोजनाओं में से 3,160 (43%) पूरी हो चुकी हैं।33 आरआरआर के अंतर्गत 3,075 परियोजनाओं में से 1,661 (54%) पूरी हो चुकी हैं।33  इन परियोजनाओं से 14 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 5.6 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन हुआ है।

रेखाचित्र 7: एआईबीपी के तहत सृजित सिंचाई क्षमता 2017-18 के बाद घट गई

स्रोत: कृषि सांख्यिकी एक संक्षिप्त अवलोकन-2024; पीआरएस।

सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन में भूमि अधिग्रहण को एक प्रमुख बाधा के रूप में उजागर किया गया है।[36]  एआईबीपी के कैग ऑडिट में एक से 18 वर्ष तक की देरी पाई गई।[37]  वैधानिक मंजूरी प्राप्त करने में देरी और कार्य के स्वरूप में बदलाव अन्य समस्याएं हैं जिन्हें चिन्हित किया गया है।37  इन देरी के कारण लागत में वृद्धि होती है और लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाते हैं।

रेखाचित्र 8: 2015 और 2024 के बीच एचकेकेपी उप-घटकों के अंतर्गत लक्ष्य प्राप्ति का 50% से कम

स्रोत: वार्षिक रिपोर्ट 2024-25, जल संसाधन विभाग; पीआरएस।

अप्रैल 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कमांड क्षेत्र विकास तथा जल प्रबंधन (एम-कैडडब्ल्यूएम) कार्यक्रम के आधुनिकीकरण को एक वर्ष, 2025-26 के लिए मंजूरी दी।[38]  इसका उद्देश्य सिंचाई नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना और सूक्ष्म सिंचाई अवसंरचना में सुधार करना है।[39] इसका उद्देश्य कृषि स्तर पर जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना भी है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 70,000 हेक्टेयर भूमि को शामिल किए जाने की उम्मीद है। 1 दिसंबर, 2025 तक योजना के तहत राज्यों को 883 करोड़ रुपए के आवंटन के मुकाबले 44 करोड़ रुपए (5%) जारी किए जा चुके हैं।[40]

बांधों का पुनर्वास

2023 तक भारत में 6,000 से अधिक बड़े बांध थे। बांधों के कामकाज, रखरखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी बांध मालिकों और राज्यों की है। बांध सुरक्षा एक्ट, 2021 के तहत, सभी राज्यों को बांध सुरक्षा समितियां और बांध सुरक्षा संगठन (डीएसओ) स्थापित करना अनिवार्य है। दिसंबर 2025 तक सभी राज्यों ने ये व्यवस्थाएं स्थापित कर ली थीं। हालांकि सीडब्ल्यूसी ने इन संगठनों के कार्यों और प्रशासन में एकरूपता की कमी पाई है। अधिकांश मामलों में इनकी भूमिका केवल सलाहकारी है और बांधों के पुनर्वास में सक्रिय हस्तक्षेप के इनके पास बहुत कम अवसर हैं।

 2012 से चुनिंदा बांधों की सुरक्षा और कामकाज की क्षमता में सुधार के लिए बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना लागू की गई है। नवंबर 2025 तक, योजना के दूसरे चरण (2021-2026) पर 5,107 करोड़ रुपए के स्वीकृत आवंटन के मुकाबले 1,931 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। 31 बांधों पर प्रमुख पुनर्वास कार्य पूर्ण हो चुका है।

स्रोत: राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण; सीडब्ल्यूसी; अतारांकित प्रश्न संख्या 3084, लोकसभा, 18 दिसंबर 2025; पीआरएस। 

पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता

भारत को नदियों, भूजल और वर्षा (बारिश और हिमपात) से जल प्राप्त होता है।[41] उपयोग योग्य जल का 61% सतही जल स्रोतों से और 39% भूजल से प्राप्त होता है। जल संरक्षण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने पाया है कि यद्यपि भारत जल संकट वाला देश नहीं है, फिर भी जल संसाधनों की निगरानी में घोर उपेक्षा और कमी के कारण कुछ क्षेत्रों में लगातार जल संकट बना हुआ है।[42]  2011 में भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1,700 घन मीटर से नीचे गिर गई, जो जल संकट की स्थिति को दर्शाता है।

हालांकि भारत भर में जल संकट का स्तर एक समान नहीं है। जलवायु और आर्थिक सर्वेक्षण (सीडब्ल्यूसी) के अनुमानों के अनुसार, 2025 में 727 जिलों में से 59% जिले जल संकट का सामना कर रहे होंगे, और 3% जिले अत्यधिक जल संकट से जूझ रहे होंगे।[43] 2050 में 57% जिलों में जल संकट और 7% जिलों में अत्यधिक जल संकट होने की आशंका है। 

रेखाचित्र 9: प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता

स्रोत: केंद्रीय जल आयोग; पीआरएस।

तालिका 5: प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता का अनुमान (जिलों की संख्या)

स्थिति

2025

2050

कोई संकट नहीं (>1700 m3)

181

181

संकट (1000−1700 m3)

95

86

कमी (500−1000 m3)

430

411

बहुत कमी (<500 m3)

21

49

 स्रोत: भारत जलवायु और ऊर्जा डैशबोर्ड, नीति आयोग, 4 जनवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी; पीआरएस।

भूजल संकट

अनुमान है कि भारत में प्रतिवर्ष 406 अरब घन मीटर भूजल निकासी की जा सकती है।[44] 2025 तक, भूजल का औसत दोहन 61% था।44 यह आंकड़ा 1995 में 32% था।44 

रेखाचित्र 10: निकासी किए गए भूजल का लगभग 90% हिस्सा सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है

स्रोत: केंद्रीय भूजल बोर्ड, 2024-25 के आंकड़े; पीआरएस।

जल संसाधन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2023) ने पाया कि जल की बढ़ती मांग, वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन और विकेंद्रीकृत उपलब्धता के कारण भूजल पर निर्भरता बढ़ रही है।[45]  परिणामस्वरूप, भूजल भंडार में भारी कमी आई है। 2025 में 11% क्षेत्रों को अति-दोहन की श्रेणी में पाया गया।44 दिल्ली, हरियाणा और पंजाब, इन तीन राज्यों में भूजल दोहन का स्तर 100% से अधिक हो गया (रेखाचित्र 11)। इससे पता चलता है कि इन ब्लॉकों/तालुकों/मंडलों/राज्यों में साल भर में जितना पानी बारिश से जमीन के भीतर वापस जा रहा है, उससे कहीं ज्यादा पानी बाहर निकाला जा रहा है।

पानी का सही उपयोग

भारत में लगभग 90% पानी सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है, इसलिए कृषि में जल उपयोग का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत में कृषि पद्धतियां जल का कुशलतापूर्वक उपयोग नहीं करती हैं।45 भारत में चावल की खेती के लिए 1,000-1,200 मिमी पानी की आवश्यकता होती है, जबकि चीन और वियतनाम जैसे अन्य एशियाई देशों में यह 550-650 मिमी है।45 इसी प्रकार, भारत में गन्ने की खेती के लिए 1,800-2,400 मिमी पानी की आवश्यकता होती है, जबकि ब्राजील में 1,059-1,640 मिमी पानी की आवश्यकता होती है।45 

जल संसाधन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2023) ने कई ऐसी नीतियों का उल्लेख किया है जिनके कारण जल का अत्यधिक दोहन और अपव्यय हुआ।45  इनमें कृषि उपयोग के लिए मुफ्त बिजली आपूर्ति, फसलों की सरकारी खरीद और उर्वरक सबसिडी शामिल हैं।45 इन नीतियों ने देश के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में भी चावल और गन्ना जैसी जल-गहन फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया।45

रेखाचित्र 11: राज्यों में भूजल दोहन का स्तर (2025 तक)

नोट: यह मानचित्र डेटारैपर का उपयोग करके बनाया गया है।
स्रोत: भारत के गतिशील भूजल संसाधन, केंद्रीय भूजल बोर्ड; पीआरएस।

जल प्रदूषण

जल प्रदूषण: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देश भर में नदी क्षेत्रों की गुणवत्ता की निगरानी और मूल्यांकन करता है।[46]  नदी क्षेत्रों को जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) के आधार पर विभिन्न प्राथमिकताओं (I से V) में वर्गीकृत किया जाता है। बीओडी का आवश्यक मानक 3 मिलीग्राम/लीटर से अधिक है। 2022-23 में, इस मानदंड के आधार पर मूल्यांकित 2,116 नदी क्षेत्रों (लगातार क्रम में स्थित स्थान) में से 804 (38%) प्रदूषित पाए गए।46 2019-21 में निरीक्षित 1,920 नदी क्षेत्रों में से 817 इस मानदंड को पूरा नहीं करते थे।[47]

तालिका 6: नदी के विभिन्न स्थानों पर प्रदूषक तत्व (2023)

मानदंड (प्राथमिक जल गुणवत्ता मानदंडों पर आधारित)

उन स्थानों का प्रतिशत जो मानदंडों को पूरा नहीं करते थे

घुलित ऑक्सीजन (> 5 mg)

26%

pH (6.5 और 8.5 के बीच)

17%

बीओडी (< 3 mg/litre)

39%

फीकल कोलीफॉर्म (< 2,500)

23%

स्रोत: नदियों की जल गुणवत्ता 2023, राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड; पीआरएस।

भूजल संदूषण: भारत में भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट, यूरेनियम, मैंगनीज और अन्य भारी धातुएं पाई गई हैं।[48] केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में नाइट्रेट प्रदूषण सबसे अधिक व्यापक था, उसके बाद फ्लोराइड और उच्च लवणता पाए गए थे।[49]  रिपोर्ट में आयरन, आर्सेनिक और यूरेनियम जैसे प्रदूषकों से प्रभावित जिलों की संख्या में कमी का उल्लेख किया गया है, लेकिन इस कमी के कारणों का कोई विवरण नहीं दिया गया है।49 भूजल संदूषण मुख्य रूप से प्राकृतिक भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के कारण होता है और वर्षों में इसमें कोई खास बदलाव नहीं होता है।[50]  हालांकि, नाइट्रेट, फॉस्फेट और अन्य प्रदूषकों से होने वाला प्रदूषण मानवीय गतिविधियों के कारण होता है। यह उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग और घरेलू अपशिष्ट जल के निर्वहन से हो सकता है।[51]  उद्योग, सीवेज निपटान और लैंडफिल भी भूजल को प्रदूषित करते हैं।[52] अत्यधिक दोहन से जलभंडारों में लवणता और विद्युत चालकता बढ़ जाती है, और फ्लोराइड और यूरेनियम जैसे संदूषकों की मौजूदगी भी बढ़ सकती है।[53] 

तालिका 7: भूजल में दूषित पदार्थों की मौजूदगी से प्रभावित जिले और राज्य

विषाक्तता

2024

2025

जिले

राज्य

जिले

राज्य

नाइट्रेट

443

23

506

26

फ्लोराइड

263

20

261

24

आयरन

356

25

173

20

आर्सेनिक

118

20

47

10

यूरेनियम

132

13

27

5

स्रोत: वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट, 2024 और 2025, केंद्रीय भूजल बोर्ड; पीआरएस।

सीवेज उपचार: 2021 तक शहरी भारतीय घरों से 72,368 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है।[54] मौजूदा सीवेज उपचार क्षमता उत्पन्न होने वाले 44% सीवेज का उपचार कर सकती है। इसके अलावा कुल उपचार क्षमता का लगभग 15% हिस्सा अभी काम नहीं कर रहा।54  अनुपचारित सीवेज को जलाशयों में छोड़ दिया जाता है, जिससे प्रदूषण होता है। कई राज्यों ने उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग के लिए लक्ष्य निर्धारित किए हैं। गुजरात ने 2030 तक 100% पुन: उपयोग का लक्ष्य रखा है।54 कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा और तमिलनाडु में सीवेज उपचार संयंत्र की एक निश्चित सीमा के भीतर स्थित औद्योगिक क्षेत्रों को उपचारित जल का उपयोग करना अनिवार्य है।54

नमामि गंगे

नमामि गंगे कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण और पुनर्जीवन करना है।[55] इस कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाओं में नदी की सतह की सफाई, सीवेज उपचार अवसंरचना का निर्माण, नदी तट का विकास, औद्योगिक अपशिष्टों की निगरानी और जन जागरूकता शामिल हैं।55  इसका कार्यान्वयन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा किया जाता है।

रेखाचित्र 12: नमामि गंगे के लिए बजट आवंटन का लगातार कम उपयोग हो रहा है

नोट: वर्ष 2025-26 और 2014-15 के लिए संशोधित अनुमान को वास्तविक माना गया है।
स्रोत: विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

धनराशि का अल्प उपयोग जारी रहा

नमामि गंगे योजना को शुरू में 2014 से 2021 के बीच 20,000 करोड़ रुपए के बजट आवंटन के साथ मंजूरी दी गई थी।55  बाद में इसे 2021 से 2026 की अवधि के लिए 22,500 करोड़ रुपए के बजट आवंटन के साथ बढ़ाया गया।33 2014-15 और 2025-26 के बीच इस योजना के लिए 30,096 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस दौरान योजना पर वास्तविक व्यय लगभग 18,842 करोड़ रुपए था (मार्च 2025 तक)।

रेखाचित्र 13: एनएमसीजी द्वारा वितरित धनराशि (2014-26) संशोधित अनुमान के प्रतिशत के रूप में

नोट: 2022-23 तक पिछले वर्षों की खर्च न होने वाली राशि को अगले वर्षों में कैरी फॉरवर्ड किया गया और बाद के वर्षों में वितरित किया गया।
स्रोत: अतारांकित प्रश्न संख्या 1688, राज्यसभा, 15 दिसंबर, 2025; पीआरएस।

नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाएं विभिन्न केंद्रीय और राज्य विभागों द्वारा कार्यान्वित की जाती हैं, जैसे पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, स्वच्छ गंगा राज्य मिशन और राज्य वन विभाग।33,[56]  इन परियोजनाओं के लिए धनराशि एनएमसीजी द्वारा वितरित की जाती है। 2014-15 से 2025-26 तक, एनएमसीजी द्वारा 20,430 करोड़ रुपए वितरित किए गए हैं, जबकि अनुमान 26,825 करोड़ रुपए (76%) था।56 

गंगा में प्रदूषण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, गंगा नदी के किनारे स्थित सभी जांचे गए स्थानों पर पानी का पीएच और घुलित ऑक्सीजन के संबंध में अधिसूचित स्नान मानदंड पूरे होते हैं।56 हालांकि उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग के मानदंड पूरे नहीं हुए हैं, और बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में फीकल कोलीफॉर्म तय सीमा से ज्यादा पाए गए हैं।56  2018 और 2025 के बीच, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में प्रदूषित नदी क्षेत्रों की स्थिति में सुधार हुआ है। बिहार में मामूली प्रदूषण बना हुआ है।56 पब्लिक एकाउंट्स कमिटी (पीएसी) (2024) ने गंगा में प्रदूषण के मुख्य स्रोतों के रूप में औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज कचरे को चिन्हित किया।[57]  गंगा पर स्थित 2,700 से अधिक उद्योग अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग हैं।57 पीएसी (2024) ने पाया कि इनमें से 450 से अधिक उद्योग नदी में अपशिष्टों के निर्वहन से संबंधित मानदंडों का अनुपालन नहीं करते हैं।57

सीवेज उपचार क्षमता के लक्ष्य हासिल नहीं किए गए

स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक गंगा के आसपास प्रतिदिन 7,000 मिलियन लीटर की सीवेज उपचार क्षमता हासिल करना है।[58]  दिसंबर 2025 तक 138 सीवेज अवसंरचना परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनकी कुल क्षमता 3,806 एमएलडी है।56  यह लक्षित क्षमता का 58% है। उपयुक्त भूमि की पहचान, वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने में कठिनाई और असामान्य बाढ़ को परियोजना पूर्ण होने में देरी के कारणों के रूप में बताया गया है।[59],,[60]

परियोजना प्रबंधन से संबंधित मुद्दे

पीएसी ने नमामि गंगे के अंतर्गत कार्यान्वित परियोजनाओं के प्रबंधन से संबंधित कई मुद्दों पर गौर किया है।57  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) धनराशि का कम उपयोग, (ii) राज्यों द्वारा उपयोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में देरी, (iii) परियोजना रिपोर्ट्स के अनुमोदन में देरी, और (iv) रिकॉर्ड का रखरखाव सही न होना।57  कमिटी ने यह भी पाया कि विज्ञापन पर पर्याप्त धनराशि खर्च की गई थी, लेकिन अपेक्षित जनभागीदारी नहीं हो पाई। समिति ने पाया कि कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया कार्य नममि गंगे द्वारा जारी की गई धनराशि के अनुपात में नहीं था।57 

अटल भूजल योजना

अटल भूजल योजना (एबीवाई) का लक्ष्य पानी की कमी वाले सात राज्यों में स्थानीय लोगों की मदद से भूजल प्रबंधन को बेहतर बनाना है।[61]  यह योजना छह वर्षों (2020-26) के लिए 6,000 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ लागू की जा रही है।[62]  इस धनराशि का इस्तेमाल संस्थागत सुदृढ़ीकरण, कर्मचारियों के क्षमता निर्माण और राज्यों को प्रोत्साहन देने के लिए किया गया है। इसमें उन राज्यों को भी प्रोत्साहन मिलता है जो भूजल के उपयोग की स्पष्ट योजना बनाते हैं।62

2020 और 2025 के बीच एबीवाई के तहत राज्यों को कुल परिव्यय का 67% (6,000 करोड़ रुपए में से 4,044 करोड़ रुपए) जारी किया जा चुका है।62 कुल परिव्यय (3,572 करोड़ रुपए) में से 60% राज्यों द्वारा उपयोग किया जा चुका है।62  सभी राज्यों ने प्राप्त धनराशि का 70% से ज्यादा खर्च कर लिया है।62  जनवरी 2026 तक अधिकतर लक्ष्यों को पूरा कर लिया गया है, सिवाय प्रशिक्षण देने और भूजल स्तर में गिरावट की दर में सुधार के।62  एबीवाई के तहत लक्ष्यों की उपलब्धि के विवरण के लिए परिशिष्ट में तालिका 12 देखें।

2023 में स्टैंडिंग कमिटी ने सुझाव दिया था कि योजना का विस्तार देश के सभी जल संकटग्रस्त क्षेत्रों तक किया जाए।[63]  2025 में जल संसाधन विभाग ने संकेत दिया कि योजना के विस्तार के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है।59  इससे पांच अतिरिक्त राज्य शामिल हो जाएंगे, जिसके लिए 8,200 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।59 योजना को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में भी पुनर्गठित किया जा सकता है।59  योजना के लिए 2026-27 में 13 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं।

जल शक्ति अभियान

जल शक्ति अभियान (जेएसए) 2019 में जल संकटग्रस्त जिलों में जल उपलब्धता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।33  इसे मानसून से पहले और मानसून के मौसम (जुलाई-नवंबर) के दौरान कार्यान्वित किया जाता है। इसमें वर्षा जल संरचनाओं का निर्माण, जलाशयों की गणना और भू-टैगिंग, जल संरक्षण के लिए वैज्ञानिक योजनाएं तैयार करना और वृक्षारोपण शामिल हैं।33 राज्य सरकारों को प्रत्येक जिला मुख्यालय में 'जल शक्ति केंद्र' स्थापित करना भी अनिवार्य है। इस योजना के लिए अलग से धनराशि नहीं दी गई है। यह मनरेगा, पीएमकेएसवाई और अटल कायाकल्प एवं शहरी परिवर्तन मिशन जैसी अन्य योजनाओं से प्राप्त संयुक्त धनराशि पर निर्भर है। जुलाई 2025 तक 1.8 करोड़ जल संबंधी कार्यों को पूरा किया जा चुका है।[64]

नदी जोड़ो योजना

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (1980) के तहत नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं की पहचान की गई थी।[65]  इन परियोजनाओं का उद्देश्य उन नदियों के पानी को जोड़ना है जहां पानी बहुत ज्यादा है, उन नदियों के साथ, जहां पानी की बहुत कमी है। इनमें से पांच को प्राथमिकता वाली परियोजनाएं घोषित किया गया है।[66]  दिसंबर 2025 तक इनमें से केवल एक परियोजना– केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएल)– ही कार्यान्वयन के अधीन है।66  जुलाई 2025 तक इस परियोजना पर 11,380 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जिसमें से 8,612 करोड़ रुपए केंद्र सरकार द्वारा खर्च किए गए हैं।[67]  केबीएल के अंतर्गत दौधन बांध के लिए टेंडर नवंबर 2024 में जारी किए गए थे। नदी जोड़ो परियोजना के लिए 2026-27 में 1,906 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 5% अधिक है। 2025-26 में, बजट आवंटन का 75% (2,400 करोड़ रुपए) उपयोग होने का अनुमान है। यह आंकड़ा 2024-25 में 57% और 2023-24 में 40% था।

नदी जोड़ो परियोजनाओं से भारत की सिंचाई क्षमता में 35 मिलियन हेक्टेयर की वृद्धि होने और अतिरिक्त 34,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होने की उम्मीद है।[68]  अन्य अप्रत्यक्ष लाभों में बाढ़ नियंत्रण, नौवहन, बेहतर जलापूर्ति, मत्स्य पालन आदि शामिल हैं।68 हालांकि इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन ने कुछ चिंताएं जताई हैं।[69]  उदाहरण के लिए, केन-बेतवा लिंक के आकलन में कई प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख किया गया है, जैसे स्थानीय जैव विविधता और वन आवरण पर बुरा असर पड़ेगा। भूमि के जलमग्न होने और नदी की प्रकृति में बदलाव जैसे प्रभाव भी पड़ेंगे।69  आकलन में कई उपाय सुझाए गए हैं, जैसे वनीकरण, भूमि के कटाव को रोकना, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावास सुधार।69 

नदियों को जोड़ने वाली परियोजनाओं में एक और प्रमुख चुनौती राज्य की सहमति बनाना है।66 राज्यों ने अंतर-राज्य परियोजनाओं के बाद पानी के बंटवारे को लेकर चिंता जताई है।66  इससे उनकी सिंचाई और बिजली उत्पादन की क्षमता प्रभावित हो सकती है।66 

भारत में जल प्रबंधन

भारत में जल संसाधनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी सरकार के तीनों स्तरों पर साझा की जाती है।[70] स्थानीय सरकारें घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए जल उपलब्ध कराने और सामुदायिक संपत्तियों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार हैं।70 राज्य जल भंडारण संरचनाओं, सिंचाई सुविधाओं के निर्माण और जल आपूर्ति प्रबंधन के लिए जिम्मेदार हैं।70  केंद्र सरकार राष्ट्रीय संसाधन के रूप में जल के विकास के लिए जिम्मेदार है। वह जल प्रबंधन के लिए नीतियां बनाती है।3  वर्तमान में राष्ट्रीय जल नीति, 2012 लागू है।3  नदी प्रदूषण, भूजल स्तर में कमी और जल संकट जैसी बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए 2019 में नीति में संशोधन के लिए एक समिति का गठन किया गया था।[71]  हालांकि अभी तक कोई नई जल नीति नहीं अपनाई गई है।

2012 की नीति में जल प्रबंधन से संबंधित कई समस्याओं को चिन्हित किया गया था[72]  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) जल संसाधन संबंधित परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों में लागू करना, (ii) भूजल को व्यक्तिगत संपत्ति मानना, और (iii) जल प्रबंधन की वैज्ञानिक योजना के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की कमी। इसमें यह भी पाया गया कि जल संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए एक अंतर-विषयक दृष्टिकोण का अभाव था।72 इस नीति ने देश में जल प्रबंधन के लिए कुछ बुनियादी सिद्धांत स्थापित किए। उसमें सुझाव दिया गया कि जल को एक साझा सामुदायिक संसाधन के रूप में प्रबंधित किया जाए।72  सतही जल, भूजल और वर्षा सहित जल चक्र के सभी तत्व परस्पर निर्भर हैं।72 जल प्रबंधन को एक एकीकृत परिप्रेक्ष्य से देखा जाना चाहिए, जिसमें नदी बेसिन मूल इकाई हो।72 

राष्ट्रीय जल मिशन: राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम) की स्थापना 2008 में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत की गई थी।33 इसका लक्ष्य राज्यों में एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देना है।33 एनडब्ल्यूएम राज्यों को जल क्षेत्र के लिए राज्य विशिष्ट कार्य योजना (एसएसएपी) तैयार करने के लिए अनुदान प्रदान करता है।61  प्रमुख राज्यों को 50 लाख रुपए और छोटे राज्यों को 30 लाख रुपए दिए जा रहे हैं।61 दिसंबर 2025 तक तीन राज्यों ने अपनी योजनाओं को अंतिम रूप दे दिया है।61  16 राज्यों ने अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं, और अन्य सभी राज्यों ने ड्राफ्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं।61 एसएसएपी के अपेक्षित परिणामों में से एक यह है कि राज्य का वार्षिक जल बजट तैयार किया जाए।[73]  इसमें पानी की कुल आवक का हिसाब लगाया जाता है, और फिर उसकी तुलना कुल खपत से की जाती है।[74]  यह पानी की योजना बनाने और बाढ़ या सूखे जैसी समस्याओं से निपटने का एक बहुत ही जरूरी हिस्सा है। 2026-27 में राष्ट्रीय जल मिशन के अनुसंधान और विकास तथा कार्यान्वयन के लिए 243 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

दो देशों के बीच नदियों को लेकर होने वाले समझौते

भारत और उसके पड़ोसी देशों ने जल संसाधनों के पारस्परिक लाभकारी उपयोग के लिए कई संधियों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन संधियों में आंकड़े साझा करने, जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना और बाढ़ की अग्रिम चेतावनी देने के प्रावधान भी हैं। इनमें से कुछ का विवरण निम्नलिखित तालिका में दिया गया है।

तालिका 2: भारत द्वारा हस्ताक्षरित जल संधियां/समझौते

देश

संधि/समझौता

पाकिस्तान

सिंधु जल समझौता, 1960

नेपाल

कोसी समझौता, 1954, गंडक समझौता, 1959, महाकाली संधि, 1996

बांग्लादेश

गंगा जल संधि, 1996

स्रोत: पीआईबी; पीआरएस।

हालांकि इन समझौतों में कई कमियां पाई गई हैं। विदेश मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने पाया कि भारत और बांग्लादेश 54 सीमा पार नदियों को साझा करते हैं, लेकिन केवल तीन नदियों के लिए ही समझौते हुए हैं।[75]  इसके अलावा 2026 में समाप्त होने वाली गंगा जल संधि पर अभी तक चर्चा शुरू नहीं हुई है।75 ब्रह्मपुत्र और सतलुज नदियों पर चीन के साथ हस्ताक्षरित 75 समझौता ज्ञापन समाप्त हो चुके हैं और उन पर पुनर्विचार किया जा रहा है।33 

भारत और पाकिस्तान के बीच भू-राजनैतिक के कारण भारत ने मई 2025 में सिंधु जल संधि को निरस्त कर दिया।[76]  तब से यह संधि अधर में लटकी हुई है।

आपदा प्रबंधन

बाढ़

बाढ़ प्राकृतिक कारकों जैसे कि भूगोल, भारी वर्षा, बर्फ पिघलने और तटीय तूफानों के कारण हो सकती है।[77]  जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा की आवृत्ति और तीव्रता में परिवर्तन भी बाढ़ का कारण बन सकते हैं।77 वनों की कटाई, तीव्र शहरीकरण और खराब कृषि पद्धतियों जैसी मानवीय गतिविधियां भी बाढ़ की गंभीरता को बढ़ाती हैं।77  अनुमान है कि भारत का लगभग 15% भूभाग बाढ़ संभावित है।[78],77 बिहार, उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्य गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ से प्रभावित हैं।77 ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्य भी प्रभावित हैं।77 उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तथा उत्तर-पूर्वी राज्य बादल फटने और उसके बाद आने वाली बाढ़ के प्रति संवेदनशील हैं।[79]

वर्तमान में भारत में बाढ़ प्रबंधन के लिए दो स्तरीय प्रणाली है।[80]  संविधान के अनुसार, बाढ़ और भूक्षरण प्रबंधन राज्यों की जिम्मेदारी है।80 राज्य जल संसाधन विभाग, तकनीकी सलाहकार समितियां और बाढ़ नियंत्रण बोर्ड राज्य स्तरीय तंत्र का हिस्सा हैं।80  केंद्र बाढ़ प्रबंधन के लिए तकनीकी सहायता और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।33 सीडब्ल्यूसी बाढ़ पूर्वानुमान सेवाएं प्रदान करता है।33 2025 तक सीडब्ल्यूसी 1,121 स्वचालित डेटा संग्रह स्टेशनों के साथ 340 पूर्वानुमान स्टेशनों का संचालन करता है।33  राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बाढ़ प्रतिक्रिया और शमन के लिए नीतियां और दिशानिर्देश भी तैयार करता है।[81] 

2022 में जल संसाधन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों में बंटी हुई थी।[82]  कमिटी ने एक राष्ट्रीय एकीकृत बाढ़ प्रबंधन समूह के गठन का सुझाव दिया। केंद्रीय और राज्य मंत्रियों से मिलकर बना यह निकाय बाढ़ प्रबंधन के लिए जिम्मेदार सभी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करेगा।82   

बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम (एफएमबीएपी) 2017-18 में शुरू किया गया था और इसे 2025-26 तक बढ़ाया गया था।33 एफएमबीएपी योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों को आर्थिक सहायता देती है ताकि वे बाढ़ को रोकने, मिट्टी के कटाव को थामने, जल निकासी को सुधारने और नदियों के सही रखरखाव जैसे काम कर सकें।33 2026-27 में, इस योजना के लिए 797 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो पिछले चार वर्षों के बजट अनुमान (प्रत्येक वर्ष 450 करोड़ रुपए) से 77% अधिक है। 

धनराशि का अल्प उपयोग

जल संसाधन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने पाया कि 2023-24 और 2024-25 में एफएमबीएपी के बजट का कम उपयोग हुआ है।[83]  कमिटी ने कहा कि देश में बाढ़ से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को देखते हुए, बजट का कम उपयोग एफएमबीएपी के उद्देश्यों को कमजोर करेगा।83 

रेखाचित्र 14: 2026-27 में एफएमबीएपी के लिए आवंटन में 77% की वृद्धि

नोट: वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान को वास्तविक माना गया है।
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज; पीआरएस।

मंत्रालय (2025) ने उल्लेख किया कि बाढ़ प्रबंधन आमतौर पर मानसून के बाद शुरू किया जाता है।83 परिणामस्वरूप, राज्यों से केंद्रीय सहायता के लिए अनुरोध वित्तीय वर्ष के उत्तरार्ध में प्राप्त होते हैं। राज्यों से धनराशि तब मिलती है, जब वे ऐसी योजनाएं बनाकर दें जो तकनीकी रूप से सही हों और जिनमें कम खर्च में अच्छा काम हो सके। राष्ट्रीय जल नीति 2012 में सुझाव दिया गया है कि जल आपदाओं को रोकने के लिए आवश्यक उपाय करते हुए बाढ़ की तैयारी पर जोर दिया जाना चाहिए।72 2024-25 में केवल अरुणाचल प्रदेश को एफएमबीएपी के तहत धनराशि प्राप्त हुई।33  2023-24 में, पांच राज्यों को धनराशि प्राप्त हुई, जिनमें मणिपुर (62 करोड़ रुपए), हिमाचल प्रदेश (30 करोड़ रुपए) और असम (सात करोड़ रुपए) शामिल हैं।33 नागालैंड और जम्मू और कश्मीर को भी 50-80 लाख रुपए प्राप्त हुए। 

रेखाचित्र 15: एफएमबीएपी के तहत राज्यों को जारी की गई धनराशि

स्रोत: वार्षिक रिपोर्ट 2024-25, कृषि विभाग; पीआरएस।

स्टैंडिंग कमिटी (2025) और पब्लिक एकाउंट्स कमिटी (2024) ने योजना के अंतर्गत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी दर्ज की है।59,[84]  स्टैंडिंग कमिटी ने कहा कि 2007-2017 की 30 परियोजनाएं अभी तक पूरी नहीं हुई हैं।59 पीएसी ने पाया कि परियोजना रिपोर्ट्स की स्वीकृति में देरी के कारण 10 महीने से 13 वर्ष तक का विलंब हुआ है।84  पीएसी ने यह भी पाया कि इन देरी के कारण, जब तक धन जारी होता है, तकनीकी डिज़ाइन अप्रचलित हो जाते हैं।      

हिमनद विस्फोट

ग्लेशियर्स के पिघलने से मोरेन बांधों (बर्फ, रेत, कंकड़ आदि के जमाव) के पीछे पानी जमा हो जाता है, जिससे हिमनद झीलें बन जाती हैं।[85]  जब ये बांध टूटते हैं, तो पानी नीचे की ओर बह जाता है, जिससे बाढ़ आ जाती है। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं और नई हिमनद झीलें बन रही हैं।85  2024-25 में 47 बांधों के हिमनद विस्फोट से आने वाली बाढ़ से प्रभावित होने की संभावना पाई गई।33  2024-25 के बीच केंद्रीय जल आयोग ने पाया कि ऐसी 21 हिमनद झीलें हैं, जिनका आकार बहुत बढ़ गया है।[86] 

राष्ट्रीय हिमनद झील विस्फोट बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम को अगस्त 2024 में 150 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी।[87] इसका लक्ष्य चार राज्यों की मदद करना है ताकि वे पहाड़ों पर हिमनद झीलों के विस्फोट से आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए जरूरी कदम उठा सकें।[88]  इसमें हिमनद झीलों की वैज्ञानिक सूची तैयार करना और पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करना शामिल है।88  135 करोड़ रुपए राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष से प्रदान किए जाएंगे, शेष राशि राज्यों द्वारा दी जाएगी। जुलाई 2025 तक, केंद्र सरकार के हिस्से से 28 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं।88

सिक्किम में हिमनद झील फटने से आई बाढ़

2023 में सिक्किम में स्थित हिमनद झील, दक्षिण ल्होनक झील में दरार आ गई और अचानक बाढ़ आ गई।[89]  लगातार बारिश और झील के चारों ओर बर्फ से ढंके भूभाग में हिमस्खलन के कारण बाढ़ आई। तीस्ता नदी में भी बाढ़ आ गई, जिससे सिक्किम के चार जिले प्रभावित हुए।89 इसके कारण नदी पर बना चुंगथांग जल-बांध भी टूट गया। बर्फ बहुत ज्यादा पिघलने के कारण दक्षिण ल्होनक झील वर्षों से फैल रही है।89 इसके साथ-साथ क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों के कारण झील में दरार आने की आशंका बढ़ गई है।  

 

अनुलग्नक

तालिका 9: ग्रामीण घरों में नल जल कनेक्शन की कार्यक्षमता (2025)

राज्य/यूटी

एफएचटीसी वाले घरों का %

पर्याप्त मात्रा में पानी प्राप्त करने वाले घरों का %

नियमित आपूर्ति वाले घरों का %

पीने योग्य पानी वाले घरों का %

अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह

100%

71%

90%

88%

आंध्र प्रदेश

75%

87%

98%

91%

अरुणाचल प्रदेश

100%

97%

84%

69%

असम

82%

89%

69%

70%

बिहार

96%

95%

59%

85%

छत्तीसगढ़

82%

85%

87%

88%

दादर नगर हवेली और दमन दीव

100%

77%

98%

14%

गोवा

100%

99%

99%

70%

गुजरात

100%

59%

97%

47%

हरियाणा

100%

87%

96%

76%

हिमाचल प्रदेश

100%

97%

89%

93%

जम्मू एवं कश्मीर

81%

90%

94%

86%

झारखंड

55%

72%

80%

78%

कर्नाटक

86%

73%

91%

80%

केरल

55%

88%

74%

56%

लद्दाख

98%

96%

100%

99%

लक्षद्वीप

91%

46%

58%

41%

मध्य प्रदेश

73%

67%

77%

63%

महाराष्ट्र

90%

83%

88%

80%

मणिपुर

80%

87%

85%

81%

मेघालय

83%

90%

72%

68%

मिजोरम

100%

60%

95%

81%

नागालैंड

94%

82%

74%

83%

ओड़िशा

77%

91%

82%

81%

पुद्दूचेरी

100%

99%

100%

92%

पंजाब

100%

97%

93%

79%

राजस्थान

58%

60%

81%

83%

सिक्किम

92%

25%

94%

62%

तमिलनाडु

89%

92%

99%

84%

तेलंगाना

100%

83%

99%

85%

त्रिपुरा

86%

97%

79%

31%

उत्तर प्रदेश

91%

94%

72%

66%

उत्तराखंड

98%

90%

78%

89%

पश्चिम बंगाल

56%

94%

74%

88%

नोट: पानी की पर्याप्त मात्रा को प्रति व्यक्ति प्रति दिन कम से कम 55 लीटर के रूप में परिभाषित किया गया है। अगर जलापूर्ति पूर्वनिर्धारित शेड्यूल के अनुसार उपलब्ध हो तो उसे नियमित माना जाता है। जल की पीने योग्य गुणवत्ता का निर्धारण कठोरता, क्लोराइड, नाइट्रेट, आयरन, आर्सेनिक आदि सहित 11 मापदंडों के आधार पर किया जाता है।
स्रोत: जेजेएम डैशबोर्ड, 23 दिसंबर 2025 को प्राप्त जानकारी; घरेलू नल कनेक्शनों का कार्यात्मकता मूल्यांकन- 2024; पीआरएस।

 

तालिका 10: भारतीय राज्यों में भूजल निकासी के चरण (2025 तक)

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

भूजल निकास के चरण

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

भूजल निकास के चरण

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

भूजल निकास के चरण

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

2%

जम्मू एवं कश्मीर

25%

ओड़िशा

49%

आंध्र प्रदेश

32%

झारखंड

33%

पुद्दूचेरी

76%

अरुणाचल प्रदेश

0.4%

कर्नाटक

66%

पंजाब

156%

असम

14%

केरल

50%

राजस्थान

147%

बिहार

46%

लद्दाख

31%

सिक्किम

6%

छत्तीसगढ़

48%

लक्षद्वीप

58%

तमिलनाडु

74%

दादर नगर हवेली और दमन दीव

40%

मध्य प्रदेश

59%

तेलंगाना

47%

दिल्ली

92%

महाराष्ट्र

52%

त्रिपुरा

10%

गोवा

23%

मणिपुर

9%

उत्तर प्रदेश

70%

गुजरात

56%

मेघालय

5%

उत्तराखंड

54%

हरियाणा

137%

मिजोरम

4%

पश्चिम बंगाल

45%

हिमाचल प्रदेश

39%

नागालैंड

5%

 

 

स्रोत: भारत के गतिशील भूजल संसाधनों पर राष्ट्रीय संकलन 2025, केंद्रीय भूजल बोर्ड; पीआरएस।

तालिका 11: भारत में प्रदूषित नदी क्षेत्र (2025)

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

प्रदूषित जल क्षेत्र

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

प्रदूषित जल क्षेत्र

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

प्रदूषित जल क्षेत्र

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

0

जम्मू एवं कश्मीर

7

ओड़िशा

6

आंध्र प्रदेश

4

झारखंड

10

पुद्दूचेरी

2

अरुणाचल प्रदेश

4

कर्नाटक

14

पंजाब

2

असम

6

केरल

32

राजस्थान

8

बिहार

12

लद्दाख

0

सिक्किम

3

छत्तीसगढ़

6

लक्षद्वीप

0

तमिलनाडु

9

दादरा नगर हवेली और दमन दीव

1

मध्य प्रदेश

18

तेलंगाना

5

दिल्ली

1

महाराष्ट्र

54

त्रिपुरा

1

गोवा

2

मणिपुर

18

उत्तर प्रदेश

16

गुजरात

10

मेघालय

2

उत्तराखंड

12

हरियाणा

4

मिजोरम

4

पश्चिम बंगाल

11

हिमाचल प्रदेश

10

नागालैंड

2

 

 

स्रोत: जल गुणवत्ता की बहाली के लिए प्रदूषित नदी खंड-2025, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड; पीआरएस।

तालिका 12: अटल भूजल योजना के चुनिंदा घटकों में प्राप्त लक्ष्य

 

मद

उपलब्धि का %

 

मद

उपलब्धि का %

संस्थागत सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण

प्रशिक्षण

61%

प्रोत्साहन

भूजल डेटा का सार्वजनिक प्रकटीकरण– जल स्तर

96%

पीजोमीटर का निर्माण

117%

भूजल डेटा का सार्वजनिक प्रकटीकरण– जल गुणवत्ता

93%

डिजिटल जल स्तर रिकॉर्डर

101%

भूजल डेटा का सार्वजनिक प्रकटीकरण– जलभूवैज्ञानिक रिपोर्ट

2%

डिजिटल/एनालॉग जल स्तर संकेतक

100%

जल सुरक्षा योजनाएं

100%

वर्षा गेज

100%

जल सुरक्षा योजनाओं का वित्तपोषण

95%

जल प्रवाह मीटर

63%

जल के कुशल उपयोग की पद्धतियों को अपनाना

149%

जल गुणवत्ता परीक्षण किट

74%

भूजल में गिरावट की दर में सुधार

47%

नोट: आंकड़े 2020 से 2026 तक की पूरी अवधि का कुल योग हैं। स्रोत: एबीवाई डैशबोर्ड, 3 जनवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी; पीआरएस।

 

[1] Introduction, Department of Water Resources, River Development, and Ganga Rejuvenation, Ministry of Jal Shakti, accessed on January 20, 2025, https://jalshakti-dowr.gov.in/about-department/introduction/.

[2] About DDWS, Department of Drinking Water and Sanitation, Ministry of Jal Shakti, accessed on January 20, 2025, https://jalshakti-ddws.gov.in/en.

[3] About the Department, Department of Water Resources, River Development, and Ganga Rejuvenation, Ministry of Jal Shakti, accessed on January 20, 2025, https://jalshakti-dowr.gov.in/.

[4] AQUASTAT, Food and Agriculture Organisation, accessed on January 22, 2025, https://data.apps.fao.org/aquastat/?lang=en.

[5] Guidelines for Implementation of Nal Jal Mitra Programme, Jal Jeevan Mission, Ministry of Jal Shakti, October 16, 2024, https://jaljeevanmission.gov.in/sites/default/files/guideline/Nal-Jal-Mitra-Guidelines.pdf.

[6] Unstarred Question No. 88, Ministry of Jal Shakti, Rajya Sabha, December 1, 2025, https://sansad.in/getFile/annex/269/AU88_oEILd7.pdf?source=pqars.

[7] Statement of Major Variations of Expenditure between BE 2025-26 and RE 2025-26, Union Budget Expenditure Profile 2026-27, February 1, 2026, https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/stat2a.pdf.

[8] Operational Guidelines for the Implementation of Jal Jeevan Mission Har Ghar Jal, Ministry of Jal Shakti, January 1, 2020, https://jaljeevanmission.gov.in/sites/default/files/guideline/JJM_Operational_Guidelines.pdf.

[9] State wise Allocation, Release, Expenditure, Financial Progress under JJM, Jal Jeevan Mission Dashboard, accessed on January 4, 2026, https://ejalshakti.gov.in/JJM/JJMReports/Financial/JJMRep_StatewiseAllocationReleaseExpenditure.aspx.

[10] Jal Jeevan Mission Dashboard, Ministry of Jal Shakti, accessed on January 4, 2026, https://ejalshakti.gov.in/jjmreport/JJMIndia.aspx.

[11] Starred Question No. 269, Lok Sabha, Ministry of Jal Shakti, August 7, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AS269_vJ56Sl.pdf?source=pqals.

[12] Unstarred Question No. 900, Lok Sabha, Ministry of Jal Shakti, July 24, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU900_p6zGnD.pdf?source=pqals.

[13] Amendments in Operational Guidelines for the implementation of Jal Jeevan Mission – 2019, F. No. W-11016/10/2022-JJM-IV-DDWS, Department of Drinking Water and Sanitation Ministry of Jal Shakti, June 21, 2022, https://jaljeevanmission.gov.in/sites/default/files/guideline/amendments-clarifications-in-operational-guidelines-jjm.pdf.

[14] Unstarred Question No. 257, Rajya Sabha, Ministry of Jal Shakti, February 2, 2026, https://sansad.in/getFile/annex/270/AU257_acQRhu.pdf?source=pqars.

[15] Unstarred Question No. 1946, Lok Sabha, Ministry of Jal Shakti, December 11, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU1946_VQ3PeE.pdf?source=pqals.

[16] Unstarred Question No. 273, Lok Sabha, Ministry of Jal Shakti, December 18, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AS273_AwFW66.pdf?source=pqals.

[17] Functionality Assessment of Household Tap Connection, 2024, Department of Drinking Water and Sanitation, Ministry of Jal Shakti, https://jaljeevanmission.gov.in/sites/default/files/2025-12/FHTC_National%20Report%202024.pdf.

[18] ‘Year End Review – Department of Drinking Water and Sanitation’, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, January 1, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2210554&reg=3&lang=2.

[19] ‘Cabinet Approves Swachh Bharat Mission (Grameen) Phase-II’, Press Information Bureau, Cabinet, February 19, 2020, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1603628&reg=3&lang=2.

[20] ‘Criteria to Declare ODF Plus Villages’, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, July 25, 2024, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2036953.

[21] Table 2.2, National Family Health Survey-5, https://dhsprogram.com/pubs/pdf/FR375/FR375.pdf.

[22] Swachh Bharat Mission (Grameen) 2.0 Dashboard, accessed on January 8, 2026, https://sbm.gov.in/sbmgdashboard/statesdashboard.aspx.

[23] Swachh Bharat Mission (Grameen) Phase II Operational Guidelines, Ministry of Jal Shakti, 2020, http://lsba.bih.nic.in/LSBAPayment/sbmj/Notice/SBM-%20Phase-2%20Guidelines.pdf.

[24] Annual Report 2024-25, Department of Drinking Water and Sanitation, Ministry of Jal Shakti, https://master-jalshakti-ddws.digifootprint.gov.in/static/uploads/2024/02/614b0cff81f03b80d09eaadc5303cbf1.pdf.

[25] Unstarred Question No. 844, Lok Sabha, Ministry of Jal Shakti, December 4, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU884_9wdqer.pdf?source=pqals.

[26] Report No. 6, Standing Committee on Water Resources: ‘Action Taken by the Government on the Observations/Recommendations contained in the First Report (18th Lok Sabha) on Demands for Grants (2024-25) of the Ministry of Jal Shakti, August 11, 2025, https://sansad.in/c6dd3f0f-124f-44d2-9983-acc51c6188d7.

[27] Report No. 8, Standing Committee on Water Resources: ‘Action Taken by the Government on the Observations/Recommendations contained in the Third Report (18th Lok Sabha) on Demands for Grants (2025-26) of the Ministry of Jal Shakti, August 11, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Water%20Resources/18_Water_Resources_8.pdf?source=loksabhadocs.  

[28] F. No. 1(27)/PFMS/2020, PFMS Division, Department of Expenditure, Ministry of Finance, Government of India, December 17, 2024, https://doe.gov.in/files/circulars_document/OM_5.pdf.

[30] ‘Rainfall Pattern’, Press Information Bureau, Ministry of Earth Sciences, July 26, 2023, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1942905&reg=3&lang=2.

[31] Chapter 9, Agriculture and Food Management: Sector of the Future, Economic Survey 2024-25, https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/doc/eschapter/echap09.pdf.

[32] About PMKSY, Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana, accessed on January 9, 2026, https://www.pmksy.gov.in/AboutPMKSY.aspx.

[33] Annual Report 2024-25, Department of Water Resources, Ministry of Jal Shakti, https://www.jalshakti-dowr.gov.in/static/uploads/2024/05/fc00cd887135cf39b2005ccf1539e0e5.pdf.

[34] Unstarred Question No. 2808, Rajya Sabha, Ministry of Jal Shakti, August 18, 2025, https://sansad.in/getFile/annex/268/AU2808_Uj2WID.pdf?source=pqars.

[35] ‘Cabinet approves inclusion of Kosi Mechi Intra-State Link Project of Bihar under PMKSY-AIBP’, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, March 28, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2116177&reg=3&lang=2.

[36] Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, July 24, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2147696&reg=3&lang=2.

[37] Report No. 22, Report of the Comptroller and Auditor General of India on Accelerated Irrigation Benefits Programme, 2018, https://cag.gov.in/uploads/download_audit_report/2018/Report_No_22_of_2018_Accelerated_Irrigation_Benefits_Programme_Ministry_of_Water_Resources_River_Development.pdf.

[38] Starred Question No. 1, Rajya Sabha, Ministry of Jal Shakti, December 1, 2025, http://sansad.in/getFile/annex/269/AS1_QQ4T3t.pdf?source=pqars.

[39] ‘Cabinet approves Modernisation of Command Area Development and Water Management as a sub-scheme of Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana for the period 2025-26’, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, April 9, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2120362&reg=3&lang=2.

[40] “Modernisation of Command Area Development and Water Management”, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, December 1, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2197174&reg=3&lang=1.

[41] Water and Related Statistics-2021, Central Water Commission, October 2021, https://cwc.gov.in/sites/default/files/water-and-related-statistics-2021compressed-2.pdf.

[42] Reassessment of Water Availability in India using Space Inputs, Central Water Commission, 2019, https://cwc.gov.in/sites/default/files/main-report.pdf.

[43] India Climate and Energy Dashboard, NITI Aayog, accessed on January 4, 2026, https://iced.niti.gov.in/climate-and-environment/water/per-capita-water-availability.

[44] National Compilation on Dynamic Ground Water Resources of India 2025, Central Ground Water Board, December 2025, https://cgwb.gov.in/cgwbpnm/download/1741.

[45] Groundwater: A Valuable but Diminishing Resource, Report 22, Standing Committee on Water Resources, March 2023, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Water%20Resources/17_Water_Resources_22.pdf?source=loksabhadocs.

[46] Polluted River Stretches for Restoration of Water Quality, Central Pollution Control Board, October 2025, https://cpcb.nic.in/openpdffile.php?id=UmVwb3J0RmlsZXMvMTc3N18xNzYwNjgxNDA4X21lZGlhcGhvdG80MzkyLnBkZg==.

[47] Polluted River Stretches for Restoration of Water Quality - 2022, Central Pollution Control Board, November 2022, https://cpcb.nic.in/openpdffile.php?id=UmVwb3J0RmlsZXMvMTQ5NF8xNjcxNzc3ODg2X21lZGlhcGhvdG8xODc0Ni5wZGY=.

[48] Extracts from the Annual Ground Water Quality Report, Central Ground Water Board, https://cgwb.gov.in/cgwbpnm/public/uploads/documents/1764833633531847433file.pdf.

[49] Annual Ground Water Quality Report, Central Ground Water Bureau, 2025, https://cgwb.gov.in/cgwbpnm/public/uploads/documents/1762854375262680475file.pdf.

[50] ‘Ground Water Pollution’, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, December 2, 2021, https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1777262&reg=3&lang=2.

[51] Unstarred Question No. 1125, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, February 8, 2019, https://eparlib.nic.in/bitstream/123456789/807070/1/AU1125.pdf.

[52] Concept Note on Geogenic Contamination of Ground Water in India, Central Ground Water Board, February 2024, https://cgwb.gov.in/cgwbpnm/public/uploads/documents/1686055710748531399file.pdf.

[53] Annual Ground Water Quality Report, Central Ground Water Bureau, 2024, https://cgwb.gov.in/cgwbpnm/public/uploads/documents/17363272771910393216file.pdf.

[54] National Frameworks on Safe Reuse of Treated Water, Namami Gange, November 2022, 32_SRTW Framework_Final_23_11_2021 (1).pdf.

[55] Namami Gange Programme, Ministry of Jal Shakti, accessed on January 6, 2025, https://nmcg.nic.in/NamamiGanga.aspx.

[56] Unstarred Question No. 1688, Rajya Sabha, Ministry of Jal Shakti, December 15, 2025, https://sansad.in/getFile/annex/269/AU1688_AoDiMq.pdf?source=pqars.

[57] Report No. 125, Public Accounts Committee: “Rejuvenation of River Ganga (Namami Gange)”, Lok Sabha, February 23, 2024, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Public%20Accounts/17_Public_Accounts_125.pdf?source=loksabhadocs.

[58] ‘National Mission for Clean Ganga Targets Cumulative Sewerage Treatment Capacity of 7,000 MLD by December, 2026’, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, December 14, 2023, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1986271.

[59] Report No. 7: ‘Action Taken by the Government on the Observations/Recommendations contained in the Second Report (18th Lok Sabha)’, Standing Committee on Water Resources, August 11, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Water%20Resources/18_Water_Resources_7.pdf?source=loksabhadocs.

[60] ‘Targets achieved under Namami Gange Mission’, Press Information Bureau, July 31, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2150716&reg=3&lang=2.

[61] ‘Year End Review 2024: Department of Water Resources, River Development, and Ganga Rejuvenation’, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, January 25, 2025, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2096022.

[62] Atal Bhujal Yojana Dashboard, accessed on January 6, 2025, https://ataljal-mis.mowr.gov.in/Dashboard/Dashboard?clear=1724931558704.

[63] Report No. 20, Committee on Water Resources: “Action Taken by the Government on the Observations / Recommendations contained in the Twentieth Report (Seventeenth Lok Sabha) of the Standing Committee on Water Resources”, August 9, 2023, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Water%20Resources/17_Water_Resources_24.pdf?source=loksabhadocs.

[64] Unstarred Question No. 737, Lok Sabha, Ministry of Jal Shakti, July 24, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU737_cQhfL5.pdf?source=pqals.

[65] Unstarred Question No. 1098, Lok Sabha, Ministry of Jal Shakti, February 8, 2024, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/1715/AU1098.pdf?source=pqals.

[66] ‘Interlinking of rivers progress, clearances, and funding’, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, December 15, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2204097&reg=3&lang=1.

[67] Ken-Betwa Link Project, National Water Development Authority, accessed on January 15, 2026, https://nwda.gov.in/upload/Ken-Betwa%20Link%20Project%20.pdf.

[68] Note on interlinking of rivers projects in the Country Details and status, National Water Development Agency, accessed on January 28, 2025, https://nwda.gov.in/upload/uploadfiles/files/Note-on-interlinking-of-rivers-projects-in-the-Country.pdf.

[69] Starred Question No. 1, Lok Sabha, Ministry of Environment, Forest, and Climate Change, December 1, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AS1_I0oQFQ.pdf?source=pqals.

[70] Seventh Schedule and Articles 262, 243G and 243W, Constitution of India.

[71] Annual Report 2019-20, Department of Water Resources, Ministry of Jal Shakti, https://www.jalshakti-dowr.gov.in/static/uploads/2024/05/2023022089.pdf.

[72] National Water Policy 2012, Ministry of Jal Shakti, https://nwm.gov.in/sites/default/files/national%20water%20policy%202012_0.pdf.

[73] State Specific Action Plan: Introduction, National Water Mission, October 2017, https://nwm.gov.in/sites/default/files/SSAP%2029.10.2017%20with%20headnote-6-6.pdf.

[74] Water Budgeting in Aspirational Blocks, NITI Aayog, November 2025, https://niti.gov.in/sites/default/files/2025-11/Water_Budgeting.pdf.

[75] Report No. 9: ‘Future of India-Bangladesh Relationship’, Standing Committee on External Affairs, December 18, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/External%20Affairs/18_External_Affairs_9.pdf?source=loksabhadocs.

[76] ‘Operation Sindoor: India’s Strategic Clarity and Calculated Force’, Press Information Bureau, May 12, 2025, https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=154448&ModuleId=3&reg=3&lang=2.

[77] Flood Affected Area Atlas of India, Indian Space Research Organisation and National Disaster Management Authority, March 2023, https://ndma.gov.in/sites/default/files/PDF/FHA/Flood_Affected_Area_Atlas_of_India.pdf.

[78] Floods, National Disaster Management Authority, accessed on January 27, 2025, https://ndma.gov.in/Natural-Hazards/Floods.

[79] Unstarred Question No. 358, Rajya Sabha, Ministry of Earth Sciences, July 25, 2024, https://sansad.in/getFile/annex/265/AU358_bfnZRF.pdf?source=pqars.

[80] Flood Management, accessed on January 9, 2025, https://indiawris.gov.in/wiki/doku.php?id=flood_management.

[81] National Disaster Management Authority, accessed on February 6, 2025, https://ndma.gov.in/.

[82] Report No. 17, Standing Committee on Water Resources: ‘Action Taken by the Government on the Observations / Recommendations contained in the Twelfth Report (Seventeenth Lok Sabha) of the Standing Committee on Water Resources’, July 22, 2022, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Water%20Resources/17_Water_Resources_17.pdf?source=loksabhadocs

[83] Report No. 9: ‘Action Taken by the Government on the Observations/Recommendations contained in the Fourth Report (18th Lok Sabha)’, Standing Committee on Water Resources, August 11, 2025,  https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Water%20Resources/18_Water_Resources_9.pdf?source=loksabhadocs.

[84] Performance Audit on Schemes for Flood Control and Flood Forecasting, Public Accounts Committee, July 24, 2024, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Public%20Accounts/17_Public_Accounts_143.pdf?source=loksabhadocs.

[85] National Disaster Management Authority Guidelines, Management of Glacial Lake Outburst Floods (GLOFs), National Disaster Management Authority, October 2020, https://ndma.gov.in/sites/default/files/PDF/Guidelines/Guidelines-on-Management-of-GLOFs.pdf.

[86] Water Sector at a Glance – 2021, Central Water Commission, October 2022, https://cwc.gov.in/sites/default/files/water-sector-glance-2021.pdf.

[87] “Impact of Glacial Lake Outburst Floods”, Press Information Bureau, Ministry of Jal Shakti, August 8, 2024, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2042990.

[88] ‘Disaster Response in GLOF Events’, Press Information Bureau, July 30, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2150261&reg=3&lang=2.

[89] Flash Flood in Sikkim, District Pakyong, Government of Sikkim, November 1, 2023, https://pakyongdistrict.nic.in/glacial-lake-outburst-flood-glof-in-sikkim/.

 

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