बजट की मुख्य झलकियां
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व्यय: 2026-27 में सरकार द्वारा 53,47,315 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 7.7% अधिक है। ब्याज का भुगतान कुल व्यय का 26% और कुल राजस्व प्राप्ति का 40% है।
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प्राप्तियां: 2026-27 में (ऋण को छोड़कर) प्राप्तियां 36,51,547 करोड़ रुपए होने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से लगभग 7.2% अधिक है। कर राजस्व, जो प्राप्तियों का प्रमुख हिस्सा है, में भी 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 8% की वृद्धि होने की उम्मीद है।
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जीडीपी: सरकार ने 2026-27 में सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर 10% रहने का अनुमान लगाया है (अर्थात वास्तविक वृद्धि और मुद्रास्फीति)।
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घाटा: 2026-27 में राजस्व घाटा जीडीपी के 1.5% पर लक्षित है। यह 2025-26 के संशोधित अनुमान 1.5% के समान है। 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3% पर लक्षित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान 4.4% से कम है।
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ऋण: केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च 2031 तक अपने बकाया ऋणों को जीडीपी के लगभग 50% तक कम करना है। 2026-27 में बकाया ऋण जीडीपी के 55.6% होने का अनुमान है।
फाइनांस बिल में मुख्य कर प्रस्ताव
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आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं: आकलन वर्ष 2026-27 के लिए कर संरचना पिछले वर्ष के समान ही रहेगी।
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कर छूट: भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करके वैश्विक क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक कर छूट दी गई है, बशर्ते भारतीय ग्राहकों को सेवाएं भारतीय पुनर्विक्रेता (रीसेलर) के माध्यम से प्रदान की जाएं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) और अपतटीय बैंकिंग इकाइयों के लिए कर छूट की अवधि 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष कर दी गई है। इस अवधि के बाद आईएफएससी इकाइयों की आय पर 15% कर लगेगा।
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शेयर बायबैक पर कर: सभी शेयर बायबैक पर पूंजीगत लाभ कर लगाने का प्रस्ताव है जिसमें प्रमोटर्स के लिए अतिरिक्त बायबैक कर भी शामिल होगा। इससे प्रभावी दर कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए 22% और गैर-कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए 30% हो जाती है।
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प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में वृद्धि: एसटीटी दरें निम्नानुसार बढ़ाई गई हैं: विकल्पों पर 0.1% से 0.15%, प्रयोग किए गए विकल्पों पर 0.125% से 0.15% और वायदा पर 0.02% से 0.05%।
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म्यूचुअल फंड से आय पर कटौती: लाभांश आय या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाली आय अर्जित करने के लिए किए गए ब्याज व्यय पर कोई कटौती नहीं दी जाएगी। इससे पहले सकल लाभांश या आय के 20% तक ऐसी कटौती की अनुमति थी।
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न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट): 1 अप्रैल, 2026 से मैट के लिए कोई क्रेडिट संचय उपलब्ध नहीं होगा। मैट दर 15% से घटाकर 14% की जा रही है। मैट क्रेडिट का उपयोग केवल नई कर व्यवस्था में कर देयता के अधिकतम 25% तक ही किया जा सकेगा।
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छोटे करदाताओं की विदेशी संपत्ति– प्रकटीकरण योजना, 2026: लौटने वाले अनिवासियों जैसे कुछ छोटे करदाताओं द्वारा विदेशी संपत्ति का खुलासा करने के लिए एक समयबद्ध योजना शुरू की गई है। यह अघोषित जानकारी की श्रेणी के आधार पर कर अतिरिक्त शुल्क या एक निश्चित फीस के भुगतान पर जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से छूट के साथ चरणबद्ध राहत प्रदान करती है।
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अनिवासियों के लिए छूट: इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं को पूंजीगत वस्तुओं की आपूर्ति के लिए पांच वर्ष की आयकर छूट, (ii) अधिसूचित योजनाओं के तहत भारत में पांच वर्ष तक काम करने वाले विशेषज्ञ अनिवासियों के लिए वैश्विक आय की छूट, और (iii) अनिवासियों की और अधिक श्रेणियों को मैट से छूट दे दी गई है।
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जुर्माने और कानूनी कार्रवाई को तर्कसंगत बनाना: कई अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है (डीक्रिमिनलाइज किया गया है), या उनके लिए अधिकतम दो वर्ष की कैद का प्रावधान किया गया है।
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स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस): शिक्षा या चिकित्सा उपचार के लिए 10 लाख रुपए से अधिक की राशि के प्रेषण पर टीसीएस को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। यात्रा या होटल में ठहरने के खर्च सहित विदेशी टूर पैकेज की बिक्री पर टीसीएस को 5% और 20% (राशि के आधार पर) से घटाकर 2% कर दिया गया है।
नीतियों की झलकियां
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वित्त और अर्थव्यवस्था: 'विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति' का गठन इस क्षेत्र की समीक्षा के लिए किया जाएगा। विदेशी निवेश के ढांचे को सरल बनाने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण उपकरण) नियमों की समीक्षा की जाएगी। भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तिगत निवासी (पीआरओआई) अब पोर्टफोलियो निवेश योजना के माध्यम से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी उपकरणों में निवेश कर सकेंगे। इस योजना के तहत व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए निवेश सीमा 5% से बढ़ाकर 10% की जाएगी। कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के लिए एक मार्केट मेकिंग फ्रेमवर्क (फंड्स और डेरिवेटिव्स तक पहुंच के साथ) और टोटल रिटर्न स्वैप का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही म्युनिसिपल बॉन्ड (नगर निगम बॉन्ड) को बढ़ावा देने के लिए 1,000 रुपए करोड़ रुपए से अधिक के एकल बॉन्ड जारी करने पर 100 करोड़ रुपए के प्रोत्साहन की घोषणा की गई है।
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उद्योग और वाणिज्य: आधुनिक तकनीक और अवसंरचना के माध्यम से 200 पुराने औद्योगिक समूहों को पुनर्जीवित करने के लिए एक योजना शुरू की जाएगी। वस्त्र क्षेत्र के लिए एक एकीकृत कार्यक्रम शुरू किया जाएगा जिसके पांच उप-भाग होंगे: (i) राष्ट्रीय फाइबर योजना, (ii) वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, (iii) राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प योजना, (iv) टेक्स-इको पहल, और (v) समर्थ 2.0। खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल का प्रस्ताव किया गया है। 'चैंपियन एसएमई' बनाने के लिए निम्नलिखित पहलों का प्रस्ताव है: (i) एसएमई विकास कोष, जिसका परिव्यय 10,000 करोड़ रुपए है, (ii) आत्मनिर्भर भारत कोष में वृद्धि, और (iii) तरलता सहायता।
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इंफ्रास्ट्रक्चर: सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को 11.2 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए किया जाएगा। निजी निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए एक अवसंरचना जोखिम गारंटी कोष स्थापित किया जाएगा। पूर्वोदय राज्यों में पांच पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाएगा और इस क्षेत्र के लिए 4,000 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की जाएंगी। सूरत को दानकुनी से जोड़ने वाला एक समर्पित फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा और अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को चालू किया जाएगा। निर्माण और अवसंरचना उपकरणों में सुधार और कंटेनर निर्माण के लिए योजनाएं शुरू की जाएंगी।
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शहरी विकास: विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर नगर आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) का मानचित्रण किया जाएगा, जिसके लिए प्रत्येक सीईआर को पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपए आवंटित किए जाएंगे। चयनित शहरों के बीच सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
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श्रम और रोजगार: सेवा क्षेत्र के विकास के लिए 'शिक्षा से रोजगार और उद्यम' पर एक स्थायी समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति रोजगार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव का भी आकलन करेगी।
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शिक्षा: औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर में पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाए जाएंगे। मुंबई स्थित भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान को 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।
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ऊर्जा: इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना का आवंटन 22,919 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए किया जाएगा। ओड़िशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाए जाएंगे। कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण के लिए पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपए आवंटित किए जाएंगे। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा।
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स्वास्थ्य: सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों में नए एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जहां रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और बिहेवेरियल हेल्थ जैसे विषयों की पढ़ाई होगी। चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। आयुर्वेद के तीन अखिल भारतीय संस्थान भी स्थापित किए जाएंगे।
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फार्मास्यूटिकल्स: बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बायोफार्मा शक्ति (स्ट्रैटेजी फॉर हेल्थकेयर एडवांसमेंट थ्रू नॉलेज, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन) योजना को 10,000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ पांच वर्षों के लिए लागू किया जाएगा। तीन राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान स्थापित किए जाएंगे और सात मौजूदा संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा।
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कृषि: कपास के बीज और पशु आहार की आपूर्ति करने वाली सहकारी समितियों के सदस्यों को कर छूट का लाभ मिलेगा। पशुपालन क्षेत्र को ऋण-आधारित सबसिडी कार्यक्रम के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी। नारियल उत्पादन बढ़ाने के लिए एक प्रोत्साहन योजना लागू की जाएगी।

