झारखंड के वित्त मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर ने 24 फरवरी, 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट प्रस्तुत किया।

बजट के मुख्य अंश

  • झारखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2026-27 के लिए (वर्तमान कीमतों पर) 6,24,868 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% की वृद्धि दर्शाता है।

  • 2026-27 में व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 1,50,106 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 6% अधिक है। इसके अतिरिक्त राज्य द्वारा 8,454 करोड़ रुपए का ऋण चुकाया जाएगा।

  • 2026-27 के लिए प्राप्तियां (ऋण को छोड़कर) 1,36,510 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 9% अधिक है।

  • 2026-27 के लिए प्राप्तियां (उधार को छोड़कर) 1,36,510 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 9% की वृद्धि है।

  • वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 2.2% (13,596 करोड़ रुपए) पर लक्षित है। 2025-26 में, संशोधित अनुमानों के अनुसार, राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.9% रहने की उम्मीद है जो बजट में अनुमानित 2% से अधिक है।

नीतिगत विशिष्टताएं

  • अबुआ दवाखाना: राज्य सरकार का लक्ष्य किफायती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य भर में 750 फार्मेसी खोलना है।

  • कैंसर निदान: राज्य भर के सभी पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में पीईटी और सीटी स्कैन मशीनें लगाई जाएंगी।

  • महिला किसान खुशहाली योजना: राज्य सरकार महिला किसानों को आधुनिक तकनीकी सहायता और ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्रदान करना चाहती है।

  • जे-प्रगति: राज्य के सभी 23 पॉलिटेक्निक संस्थानों का पुनरुद्धार और उन्नयन करके उन्हें झारखंड प्रौद्योगिकी संस्थानों में परिवर्तित किया जाएगा, जो आईआईटी और एनआईटी के तर्ज पर होंगे।

  • स्टेम शिक्षा: राज्य में स्टेम शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

  • विश्वविद्यालयों की स्थापना: राज्य सरकार चतरा जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना करेगी।

झारखंड की अर्थव्यवस्था

  • जीएसडीपी: 2024-25 में झारखंड की जीएसडीपी में (स्थिर कीमतों पर) पिछले वर्ष की तुलना में 7% की वृद्धि का अनुमान है। तुलनात्मक रूप से भारत की जीडीपी में 2024-25 में 6.5% की वृद्धि होने का अनुमान है।

  • क्षेत्र: 2024-25 में कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों का झारखंड की अर्थव्यवस्था में क्रमशः 23%, 32% और 45% का योगदान होने का अनुमान है (वर्तमान कीमतों पर)।

  • प्रति व्यक्ति जीएसडीपी: 2024-25 में झारखंड की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी (वर्तमान कीमतों पर) का अनुमान 1,28,253 रुपए है, जो 2023-24 की तुलना में 10% अधिक है। 2024-25 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी में 2023-24 की तुलना में 9% की वृद्धि होने का अनुमान है, जो बढ़कर 2,34,859 रुपए हो जाएगी।

 

रेखाचित्र 1: झारखंड में स्थिर मूल्यों पर जीएसडीपी की वृद्धि (2011-12)

नोट: ये आंकड़े स्थिर कीमतों (2011-12) के अनुसार हैं, जिसका अर्थ है कि विकास दर को मुद्रास्फीति के लिए समायोजित किया गया है। स्रोत: एमओएसपीआई; पीआरएस।

2026-27 के लिए बजट अनुमान

  • वर्ष 2026-27 में कुल व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 1,50,106 करोड़ रुपए रहने का लक्ष्य है। यह वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान से 6% अधिक है। इस व्यय की पूर्ति 1,36,510 करोड़ रुपए की प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) और 13,596 करोड़ रुपए के शुद्ध ऋण से प्रस्तावित है। वर्ष 2026-27 के लिए कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) में वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 9% की वृद्धि होने की उम्मीद है।

  • राज्य सरकार ने 2026-27 में जीएसडीपी के 2.5% (15,358 करोड़ रुपए) के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (जीएसडीपी का 1.7%) से अधिक है। 2025-26 में राजस्व अधिशेष प्रारंभिक बजट अनुमान से कम रहने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि राजस्व व्यय बजट अनुमान से 4% अधिक है।

  • 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 2.2% (13,596 करोड़ रुपए) पर लक्षित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (जीएसडीपी का 2.9%) से कम है। 2025-26 में राजकोषीय घाटा बजट में निर्धारित राशि (जीएसडीपी का 2%) से अधिक रहने का अनुमान है।

तालिका 1: बजट 2026-27- मुख्य आंकड़े (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

कुल व्यय

1,16,892

1,45,400

1,50,275

3%

1,58,560

6%

(-) ऋण का पुनर्भुगतान

7,680

8,747

8,747

0%

8,454

-3%

शुद्ध व्यय (E)

1,09,212

1,36,653

1,41,529

4%

1,50,106

6%

कुल प्राप्तियां

1,03,846

1,45,400

1,50,275

3%

1,58,560

6%

(-) उधारियां

9,161

20,000

24,985

25%

22,050

-12%

इनमें से कैपेक्स लोन*

2,718

4,970

7,203

45%

4,650

-35%

शुद्ध प्राप्तियां (R)

94,685

1,25,400

1,25,290

-0.1%

1,36,510

9%

राजकोषीय घाटा (E-R)

14,527

11,253

16,239

44%

13,596

-16%

जीएसडीपी का %

2.8%

2.0%

2.9%

 

2.2%

 

राजस्व अधिशेष

7,924

14,517

9,401

-35%

15,358

63%

जीएसडीपी का %

1.5%

2.6%

1.7%

 

2.5%

 

प्राथमिक घाटा

8,664

4,899

9,884

102%

7,076

-28%

जीएसडीपी का %

1.7%

0.9%

1.7%

 

1.1%

 

जीएसडीपी

5,16,255

5,56,286

5,67,897

2%

6,24,868

10%

नोट: बअ बजट अनुमान है; संअ संशोधित अनुमान है। *केंद्र सरकार 2020-21 से राज्य सरकारों को पूंजीगत व्यय के लिए 50-वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण प्रदान कर रही है। इन ऋणों को राज्य की उधार सीमा की गणना से बाहर रखा गया है।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, झारखंड बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में व्यय

स्थानीय निकायों की धनराशि का अल्प उपयोग

मार्च 2024 तक ग्रामीण स्थानीय निकाय (आरएलबी) फंड्स का क्लोजिंग बैलेंस 547 करोड़ रुपए था, जबकि शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) का क्लोजिंग बैलेंस 1,120 करोड़ रुपए था। आरएलबीज़ के पास 2023-24 में 743 करोड़ रुपए थे, लेकिन वे इसका केवल 26% ही खर्च कर सके। इसी प्रकार यूएलबीज़ के पास 1,759 करोड़ रुपए थे, लेकिन वे धनराशि का केवल 36% ही खर्च कर सके। इस धनराशि में केंद्र और राज्य सरकारों से प्राप्त अनुदान और स्थानीय निकायों द्वारा अर्जित अन्य राजस्व शामिल हैं। इनका उपयोग स्थानीय बुनियादी ढांचे और नागरिक सेवाओं की मदद के लिए किया जाता है। अनुदानों का सीमित उपयोग और इन स्थानीय निकायों में कुशल मानव संसाधन की कमी, ये कुछ प्रमुख कारण हैं।

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 2 वर्ष 2025, वर्ष 2023-24 के लिए राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट, कैग; 16वें वित्त आयोग के लिए राज्य-स्थानीय राजकोषीय हस्तांतरण का विश्लेषण, आईआईपीए; पीआरएस।

  • 2026-27 के लिए राजस्व व्यय 1,20,852 करोड़ रुपए प्रस्तावित किया गया है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 5% अधिक है। इसमें वेतन, पेंशन, ब्याज, अनुदान और सबसिडी पर होने वाला व्यय शामिल है। राजस्व व्यय का 12% हिस्सा मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना (14,066 करोड़ रुपए) के लिए आवंटित किया गया है। यह योजना राज्य में 18 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

  • 2026-27 के लिए पूंजीगत परिव्यय 24,791 करोड़ रुपए प्रस्तावित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 11% अधिक है। पूंजीगत परिव्यय से तात्पर्य परिसंपत्ति सृजन पर किए गए व्यय से है। 2026-27 में पूंजीगत परिव्यय जीएसडीपी का 4% होने का अनुमान है।

  • वर्ष 2026-27 में राज्य द्वारा दिए जाने वाले ऋण और अग्रिम 4,463 करोड़ रुपए होने की उम्मीद है जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 22% की वृद्धि है। 

तालिका 2: बजट 2026-27 में व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राजस्व व्यय

86,565

1,10,637

1,15,532

4%

1,20,852

5%

पूंजीगत परिव्यय

18,410

22,621

22,347

-1%

24,791

11%

राज्य द्वारा दिए गए ऋण

4,237

3,396

3,650

7%

4,463

22%

शुद्ध व्यय

1,09,212

1,36,653

1,41,529

4%

1,50,106

6%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, झारखंड बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

प्रतिबद्ध व्यय: राज्य के प्रतिबद्ध व्यय में आम तौर पर वेतन, पेंशन और ब्याज के भुगतान पर व्यय शामिल होता है। बजट के एक बड़े हिस्से को प्रतिबद्ध व्यय की मदों के लिए आवंटित करने से पूंजीगत परिव्यय जैसी अन्य व्यय प्राथमिकताओं पर फैसला लेने का राज्य का लचीलापन सीमित हो जाता है। 2026-27 में झारखंड द्वारा प्रतिबद्ध व्यय पर 38,456 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान है जो उसकी अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का 28% है। इसमें वेतन (राजस्व प्राप्तियों का 16%), पेंशन (7%), और ब्याज भुगतान (5%) पर खर्च शामिल है। 2024-25 में, वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, राजस्व प्राप्तियों का 34% प्रतिबद्ध व्यय पर खर्च किया गया।

तालिका 3: 2026-27 में प्रतिबद्ध व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

वेतन

16,651

20,255

19,896

-2%

21,968

10%

पेंशन

9,522

10,173

10,173

0%

9,967

-2%

ब्याज भुगतान

5,863

6,355

6,355

0%

6,520

3%

कुल

32,036

36,782

36,424

-1%

38,456

6%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, झारखंड बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

क्षेत्रवार व्यय: 2026-27 के दौरान राज्य के बजटीय व्यय का 76% हिस्सा निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए खर्च किया जाएगा। अनुलग्नक 1 में प्रमुख क्षेत्रों में झारखंड के व्यय की तुलना, अन्य राज्यों से की गई है।

तालिका 4: झारखंड बजट 2026-27 में क्षेत्रवार व्यय (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन

बजट प्रावधान 2026-27 बअ

समाज कल्याण एवं पोषण

16,037

23,914

25,694

24,900

-3%

  • मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना के लिए 14,066 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन योजना के लिए 3,517 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ग्रामीण विकास

14,093

16,538

18,129

19,687

9%

  • अबुआ आवास योजना के लिए 4,100 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • मनरेगा के लिए 2,638 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

13,377

18,076

17,926

19,320

8%

  • सर्व शिक्षा अभियान के लिए 2,093 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

पुलिस

7,292

7,396

7,602

8,291

9%

  • जिला पुलिस के लिए 4,158 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • विशेष पुलिस (जैसे पंचायत चुनावों) के लिए 2,250 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

4,162

7,481

7,692

7,997

4%

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 2,094 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ऊर्जा

7,958

6,655

6,829

7,379

8%

  • उपभोक्ताओं के लिए बिजली शुल्क सब्सिडी के लिए 5,405 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। 

परिवहन

5,818

6,241

5,633

6,994

24%

  • सड़कों और पुलों पर पूंजीगत व्यय के लिए 6,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिसमें से 5,700 करोड़ रुपए राज्य राजमार्गों के लिए आवंटित किए गए हैं।

कृषि एवं संबंधित गतिविधियां

3,704

6,007

6,448

6,468

0.3%

  • कृषि और संबद्ध गतिविधियों पर पूंजीगत व्यय के लिए 1,115 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • राज्य बागवानी विकास योजना के लिए 246 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

जलापूर्ति एवं सैनिटेशन

1,775

4,721

5,151

5,208

1%

  • जल जीवन मिशन के लिए 3,455 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

शहरी विकास

1,510

3,425

3,305

3,768

14%

  • प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी के लिए 658 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • शहरी स्थानीय निकायों को नागरिक सुविधाओं के लिए अनुदान के रूप में 220 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सभी क्षेत्र में कुल व्यय का %

72%

75%

76%

76%

 

 

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, झारखंड बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में प्राप्तियां

खनिज युक्त भूमि पर उपकर से प्राप्त राजस्व

झारखंड खनिज युक्त भूमि उपकर एक्ट, 2024 को अक्टूबर 2024 में अधिसूचित किया गया था। यह कानून खनिज युक्त भूमि पर उपकर का प्रावधान करता है। 2026-27 में राज्य ने इस उपकर से (कर और गैर-कर राजस्व मदों में दर्ज) 14,656 करोड़ रुपए राजस्व का अनुमान लगाया है। 2025-26 में इस उपकर से 13,442 करोड़ रुपए की आय का अनुमान है।

राज्य सरकार ने झारखंड बजट स्थिरीकरण कोष का भी गठन किया है। इसका उद्देश्य भविष्य में आय में संभावित कमी, विशेष रूप से खनन राजस्व में कमी, के कारण राज्य के दायित्वों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से राज्य को सुरक्षित करना है। इस कोष में निवेश का अनुमान 2025-26 में 832 करोड़ रुपए और 2026-27 में 1,209 करोड़ रुपए है।

स्रोत: राजस्व और प्राप्तियां (विस्तार से), बजट भाषण, झारखंड बजट दस्तावेज 2026-27; पीआरएस।

  • वर्ष 2026-27 के लिए कुल राजस्व प्राप्ति 1,36,210 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 9% अधिक है। इसमें से 66,699 करोड़ रुपए (49%) राज्य अपने संसाधनों से जुटाएगा, और 69,511 करोड़ रुपए (51%) केंद्र सरकार से प्राप्त होंगे। केंद्र सरकार से प्राप्त संसाधन केंद्रीय करों में राज्य सरकार के हिस्से (राजस्व प्राप्ति का 38%) और अनुदानों (राजस्व प्राप्ति का 13%) के रूप में होंगे।

  • हस्तांतरण: वर्ष 2026-27 में केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा 51,237 करोड़ रुपए होने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 11% अधिक है।

  • 2026-27 में 18,274 करोड़ रुपए का केंद्रीय अनुदान अनुमानित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 7% अधिक है। वर्ष 2026-27 में अनुदान राशि वर्ष 2024-25 की वास्तविक राशि (9,199 करोड़ रुपए) से लगभग दोगुनी है। इसका मुख्य कारण केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) के लिए अनुदान राशि में अनुमानित वृद्धि है। सीएसएस के लिए अनुदान राशि वर्ष 2026-27 में 13,671 करोड़ रुपए और वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों के अनुसार 12,862 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। 2024-25 में, वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, सीएसएस के लिए अनुदान राशि 6,714 करोड़ रुपए थी।

  • राज्य के स्वयं कर राजस्व: झारखंड का कुल स्वयं कर राजस्व 2026-27 में 45,999 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 10% अधिक है। जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में स्वयं कर राजस्व 2026-27 में 7.4% रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (7.4%) के समान है। 2024-25 के वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में स्वयं कर राजस्व 5.5% था।

  • राज्य के स्वयं गैर कर राजस्व: झारखंड का कुल स्वयं गैर कर राजस्व 2026-27 में 20,700 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (19,880 करोड़ रुपए) से 4% अधिक है। 2025-26 में स्वयं गैर-कर राजस्व बजट से 23% कम रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण खनन से होने वाले गैर कर राजस्व में अनुमानित कमी है (बजट लक्ष्य 21,900 करोड़ रुपए के मुकाबले 16,000 करोड़ रुपए)।

तालिका 5: राज्य सरकार की प्राप्तियों का ब्रेकअप (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राज्य के स्वयं कर

28,501

35,199

41,929

19%

45,999

10%

राज्य के स्वयं गैर कर

14,231

25,856

19,880

-23%

20,700

4%

केंद्रीय करों में हिस्सेदारी

42,557

47,041

46,066

-2%

51,237

11%

केंद्र से सहायतानुदान

9,199

17,057

17,057

0%

18,274

7%

राजस्व प्राप्तियां

94,489

1,25,153

1,24,932

-0.2%

1,36,210

9%

गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

197

247

357

45%

300

-16%

शुद्ध प्राप्तियां

94,685

1,25,400

1,25,290

-0.1%

1,36,510

9%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, बजट का संक्षिप्त विवरण, झारखंड बजट दस्तावेज 2026-27; पीआरएस।

  • 2026-27 में राज्य जीएसटी के स्वयं कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत (32% हिस्सा) होने का अनुमान है। राज्य के जीएसटी राजस्व में 2025-26 के संशोधित अनुमान से 9% की कमी आने का अनुमान है।

  • 2026-27 में बिक्री कर/वैट से राजस्व में 2025-26 के संशोधित अनुमान से 9% की कमी आने की उम्मीद है। 2025-26 में, इस मद के अंतर्गत राजस्व बजट से 7% कम रहने का अनुमान है।

तालिका 6: राज्य के स्वयं कर राजस्व के मुख्य स्रोत (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राज्य जीएसटी

13,980

15,500

15,977

3%

14,564

-9%

सेल्स टैक्स/वैट

6,686

9,305

8,667

-7%

7,900

-9%

राज्य उत्पाद शुल्क*

2,708

3,000

0

-

4,500

-

वाहन कर

1,912

2,400

2,400

0%

2,700

13%

भूराजस्व

543

1,800

1,800

0%

2,000

11%

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क

1,258

1,500

1,500

0%

1,800

20%

बिजली पर कर और ड्यूटी

1,367

1,600

1,608

0.5%

1,466

-9%

अन्य कर एवं शुल्क^

0

5

9,903

1,97,955%

11,002

11%

नोट: *वार्षिक वित्तीय विवरण और राजस्व एवं प्राप्तियां (विस्तार से), दोनों दस्तावेजों में राज्य उत्पाद शुल्क राजस्व का संशोधित अनुमान शून्य दिखाया गया है। ^इसमें खनिज युक्त भूमि पर उपकर से 2025-26 के संशोधित वित्तीय विवरण में 9,900 करोड़ रुपए और 2026-27 के संशोधित वित्तीय विवरण में 11,000 करोड़ रुपए की प्राप्ति शामिल है।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, झारखंड बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 के लिए घाटे और ऋण

झारखंड के राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन एक्ट, 2007 में राज्य सरकार की बकाया देनदारियों, राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे को प्रगतिशील तरीके से कम करने के लक्ष्यों का प्रावधान है।

वितरण कंपनियों के घाटा

बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का खराब वित्तीय प्रदर्शन राज्य के वित्त के लिए एक प्रमुख जोखिम बना हुआ है, क्योंकि अधिकांश डिस्कॉम राज्य के स्वामित्व में हैं और उनकी देनदारियां राज्य सरकार की आकस्मिक देनदारियां हैं। 2024-25 में झारखंड डिस्कॉम को 1,928 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। झारखंड में कुल तकनीकी और वाणिज्यिक घाटा (एटी एंड सी) 28% था, जो अखिल भारतीय स्तर (15%) से अधिक है। इसका तात्पर्य उस बिजली के अनुपात से है जिसके लिए डिस्कॉम को कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ, जबकि कुल बिजली कंपनी द्वारा खरीदी गई थी। पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार (16%) और छत्तीसगढ़ (14%) में एटी एंड सी घाटा अपेक्षाकृत कम रहा। यह घाटा ऊर्जा हस्तांतरण में अक्षमता और चोरी या अपर्याप्त मीटरिंग जैसी वाणिज्यिक हानि के कारण हो सकती हैं। आरबीआई (2024) ने राज्यों को समय पर टैरिफ संशोधन के माध्यम से घाटे को कम करने का सुझाव दिया था।

16वें वित्त आयोग के अनुसार, झारखंड ने 2018-19 और 2025-26 के बीच बिजली सबसिडी पर 36,008 करोड़ रुपए खर्च किए।

स्रोत: विद्युत इकाइयों के प्रदर्शन पर रिपोर्ट 2024-25, विद्युत वित्त निगम; राज्य वित्त: बजट 2024-25 का अध्ययन, आरबीआई; 16वां वित्त आयोग; पीआरएस।

राजस्व संतुलन: यह सरकार की राजस्व प्राप्तियों और राजस्व व्यय के बीच का अंतर होता है। राजस्व घाटे का यह अर्थ होता है कि सरकार को अपना व्यय पूरा करने के लिए उधार लेने की जरूरत है जोकि भविष्य में पूंजीगत परिसंपत्तियों का सृजन नहीं करेगा और न ही देनदारियों को कम करेगा। बजट में 2026-27 में 15,358 करोड़ रुपए (या जीडीपी का 2.5%) के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया गया है।

राजकोषीय घाटा: यह कुल व्यय और कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है। इस अंतर को सरकार द्वारा उधार लेकर पूरा किया जाता है जिससे कुल देनदारियों में वृद्धि होती है। 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.2% (13,596 करोड़ रुपए) होने का अनुमान है। 16वें वित्त आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए राज्यों के वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा जीएसडीपी का 3% निर्धारित करने का सुझाव दिया है। उधार सीमा निर्धारित करते समय केंद्र सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय के लिए दिए गए 50 वर्षों के ब्याज मुक्त ऋणों को शामिल नहीं किया जाएगा। 2026-27 में केंद्रीय पूंजीगत व्यय ऋण लगभग 4,650 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 0.7%) होने का अनुमान है।

बकाया देनदारियां: बकाया देनदारियां किसी वित्तीय वर्ष के अंत में कुल उधारी का संचय होता है। इसमें भविष्य निधि जैसे सार्वजनिक खातों पर बकाया देनदारियां भी शामिल हैं। 2026-27 के अंत में बकाया देनदारियां जीएसडीपी का 25.8% होने का अनुमान है जो 2025-26 के बजट अनुमान (जीएसडीपी का 25.7%) के लगभग बराबर है।

रेखाचित्र 2: राजस्व एवं राजकोषीय संतुलन (जीएसडीपी का %)  

 

नोट: *2027-28 के बाद के आंकड़े अनुमान हैं। RE संशोधित अनुमान है; BE बजट अनुमान है। (+) अधिशेष को दर्शाता है और (-) घाटे को दर्शाता है। वर्ष 2027-28 और 2028-29 के लिए राजस्व संतुलन के अनुमान उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, झारखंड बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

रेखाचित्र 3: बकाया देनदारियां (जीएसडीपी का %)

नोट: *2027-28 के बाद के आंकड़े अनुमान हैं। BE बजट अनुमान है।
स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, झारखंड बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करने में विलंब

कैग (2025) की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 तक 47,367 उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) लंबित थे। ये प्रमाणपत्र 2022-23 तक जारी किए गए 1,33,162 करोड़ रुपए के अनुदानों से संबंधित हैं। विभागीय अधिकारियों को प्रधान महालेखाकार को यूसी जमा करना अनिवार्य है। 2023-24 में पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए 8,549 करोड़ रुपए जारी किए गए थे। हालांकि इन अनुदानों के लिए भी यूसी जमा नहीं किए गए। लंबित यूसी का सबसे बड़ा हिस्सा ग्रामीण विकास, स्कूली शिक्षा और साक्षरता तथा शहरी विकास विभागों से संबंधित था। कैग ने पाया कि यूसी के अधिक लंबित होने से धनराशि के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है।

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 2 वर्ष 2025, राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2023-24, कैग; पीआरएस।

 

 

अनुलग्नक 1: मुख्य क्षेत्रों में राज्य के व्यय की तुलना

निम्नलिखित रेखाचित्रों में झारखंड द्वारा 2026-27 में छह प्रमुख क्षेत्रों पर किए गए व्यय की तुलना सभी क्षेत्रों पर किए गए कुल व्यय के अनुपात से की गई है। क्षेत्र के लिए औसत, उस क्षेत्र में 31 राज्यों (झारखंड सहित) द्वारा किए जाने वाले औसत व्यय (2025-26 के बजटीय अनुमानों के आधार पर) को इंगित करता है।[1]

  • शिक्षा: झारखंड ने 2026-27 में अपने व्यय का 13.3% शिक्षा के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा शिक्षा के लिए आवंटित औसत राशि (14.5%) से कम है।

  • स्वास्थ्य: झारखंड ने 2026-27 में अपने व्यय का 5.5% स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा स्वास्थ्य के लिए आवंटित औसत राशि (6.2%) से कम है।

  • ग्रामीण विकास: झारखंड ने 2026-27 में अपने व्यय का 13.5% ग्रामीण विकास हेतु आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा ग्रामीण विकास के लिए आवंटित औसत राशि (4.9%) से काफी अधिक है।

  • कृषि: झारखंड ने 2026-27 में अपने व्यय का 4.4% कृषि के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा कृषि के लिए आवंटित औसत राशि (5.7%) से कम है।

  • सड़कें और पुल: झारखंड ने 2026-27 में अपने व्यय का 4.5% सड़कों और पुलों के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा सड़कों और पुलों के लिए किए गए औसत आवंटन (4.3%) से थोड़ा ही अधिक है।

  • पुलिस: झारखंड ने 2026-27 में अपने व्यय का 5.7% पुलिस के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा पुलिस के लिए किए गए औसत आवंटन (4%) से अधिक है।

नोट: 2024-25, 2025-26 (बअ), 2025-26 (संअ), और 2026-27 (बअ) के आंकड़े झारखंड के हैं।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय वक्तव्य, झारखंड बजट दस्तावेज 2026-27; विभिन्न राज्य बजट; पीआरएस।

अनुलग्नक 2: वर्ष 2026-31 के लिए 16वें वित्त आयोग के सुझाव

16वें वित्त आयोग (चेयर: डॉ. अरविंद पनगढ़िया) की रिपोर्ट 1 फरवरी, 2026 को संसद में पेश की गई। उसके सुझाव 2026-27 से 2030-31 तक की पांच-वर्षीय अवधि के लिए लागू होंगे। 16वें आयोग (एफसी) ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों के हिस्से को 41% निर्धारित करने का सुझाव दिया है। यह हिस्सा 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-26) के समान ही अपरिवर्तित बना हुआ है। विभाज्य पूल की गणना केंद्रीय सरकार द्वारा जुटाए गए कुल कर राजस्व में से कर वसूलने की लागत, उपकर और अधिभारों को घटाने के बाद की जाती है। 16वें वित्त आयोग ने राज्यों के हिस्से के निर्धारण के लिए संशोधित मानदंड प्रस्तावित किए हैं। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का संक्षिप्त सारांश यहां देखें। 16वें वित्त आयोग के सुझावों के आधार पर, झारखंड को 2026-31 की अवधि के लिए केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में 3.36% हिस्सा मिलेगा।

16वें वित्त आयोग ने पांच वर्षों की अवधि में 9.47 लाख करोड़ रुपए के अनुदानों का सुझाव दिया है। इनमें निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए अनुदान शामिल हैं: (i) शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकाय, और (ii) आपदा प्रबंधन। 16वें वित्त आयोग ने 15वें वित्त आयोग द्वारा सुझाए गए निम्नलिखित अनुदानों को बंद कर दिया है: (i) राजस्व घाटा अनुदान, (ii) शिक्षा, न्याय, सांख्यिकी और कृषि के लिए क्षेत्र-विशिष्ट अनुदान, और (iii) राज्य-विशिष्ट अनुदान। 2026-31 की अवधि के लिए झारखंड के लिए प्रस्तावित अनुदानों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) शहरी स्थानीय निकायों के लिए 6,093 करोड़ रुपए, (ii) ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 14,231 करोड़ रुपए, और (iii) आपदा प्रबंधन अनुदान के रूप में 2,806 करोड़ रुपए। इसके अतिरिक्त, रांची और धनबाद अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली के विकास के लिए विशेष अवसंरचना अनुदान (प्रत्येक 5,000 करोड़ रुपए तक) के पात्र होंगे। राज्यों को एक लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले आस-पास के बड़े शहरी स्थानीय निकाय में अर्ध-शहरी गांवों के विलय के लिए एकमुश्त अनुदान भी प्राप्त होगा।

तालिका 7: केंद्र द्वारा हस्तांतरित करों में प्रत्येक राज्य का हिस्सा (100 में से)

राज्य

14वां विआ (2015-2020)

15वां विआ (2021-26)

16वां विआ (2026-31)

आंध्र प्रदेश

4.31

4.05

4.22

अरुणाचल प्रदेश

1.37

1.76

1.35

असम

3.31

3.13

3.26

बिहार

9.67

10.06

9.95

छत्तीसगढ़

3.08

3.41

3.30

गोवा

0.38

0.39

0.37

गुजरात

3.08

3.48

3.76

हरियाणा

1.08

1.09

1.36

हिमाचल प्रदेश

0.71

0.83

0.91

जम्मू एवं कश्मीर

1.85

-

-

झारखंड

3.14

3.31

3.36

कर्नाटक

4.71

3.65

4.13

केरल

2.50

1.93

2.38

मध्य प्रदेश

7.55

7.85

7.35

महाराष्ट्र

5.52

6.32

6.44

मणिपुर

0.62

0.72

0.63

मेघालय

0.64

0.77

0.63

मिजोरम

0.46

0.50

0.56

नागालैंड

0.50

0.57

0.48

ओड़िशा

4.64

4.53

4.42

पंजाब

1.58

1.81

2.00

राजस्थान

5.50

6.03

5.93

सिक्किम

0.37

0.39

0.34

तमिलनाडु

4.02

4.08

4.10

तेलंगाना

2.44

2.10

2.17

त्रिपुरा

0.64

0.71

0.64

उत्तर प्रदेश

17.96

17.94

17.62

उत्तराखंड

1.05

1.12

1.14

पश्चिम बंगाल

7.32

7.52

7.22

 

तालिका 8: वर्ष 2026-31 के लिए राज्यवार अनुदान सहायता का विवरण (करोड़ रुपए में)

राज्य

ग्रामीण स्थानीय निकाय

शहरी स्थानीय निकाय

आपदा प्रबंधन

आंध्र प्रदेश

16,627

12,158

6,125

अरुणाचल प्रदेश

1,698

233

616

असम

14,580

3,249

5,243

बिहार

51,923

9,169

13,615

छत्तीसगढ़

11,664

4,990

2,481

गोवा

174

726

112

गुजरात

18,802

23,764

8,459

हरियाणा

8,270

7,834

2,922

हिमाचल प्रदेश

3,744

435

2,682

झारखंड

14,231

6,093

2,806

कर्नाटक

18,889

18,483

6,419

केरल

3,308

16,683

1,935

मध्य प्रदेश

32,033

16,016

11,697

महाराष्ट्र

32,817

46,803

29,619

मणिपुर

1,262

609

259

मेघालय

1,479

377

437

मिजोरम

567

377

284

नागालैंड

697

667

408

ओड़िशा

18,715

5,078

8,900

पंजाब

8,486

7,834

2,477

राजस्थान

31,467

12,680

9,211

सिक्किम

218

203

455

तमिलनाडु

16,930

25,069

8,486

तेलंगाना

9,968

11,548

2,774

त्रिपुरा

1,176

1,016

356

उत्तर प्रदेश

83,261

33,543

15,321

उत्तराखंड

4,047

2,497

4,954

पश्चिम बंगाल

28,203

22,023

6,869

 

स्रोत: 14वें, 15वें और 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट्स; पीआरएस।

तालिका 9: केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार राज्यों को हस्तांतरित कर (करोड़ रुपए में)

राज्य

2024-25 वास्तविक

2025-26 संशोधित

2026-27 बजटीय

आंध्र प्रदेश

51,564

56,374

64,362

अरुणाचल प्रदेश

22,386

24,475

20,665

असम

39,855

43,572

49,725

बिहार

1,28,151

1,40,105

1,51,832

छत्तीसगढ़

43,409

47,459

50,427

गोवा

4,918

5,377

5,571

गुजरात

44,314

48,448

57,311

हरियाणा

13,926

15,225

20,772

हिमाचल प्रदेश

10,575

11,562

13,950

झारखंड

42,135

46,066

51,236

कर्नाटक

46,467

50,802

63,050

केरल

24,527

26,815

36,355

मध्य प्रदेश

1,00,019

1,09,348

1,12,134

महाराष्ट्र

80,486

87,994

98,306

मणिपुर

9,123

9,974

9,554

मेघालय

9,773

10,684

9,631

मिजोरम

6,371

6,965

8,608

नागालैंड

7,250

7,926

7,341

ओड़िशा

57,692

63,074

67,460

पंजाब

23,023

25,171

30,464

राजस्थान

76,779

83,940

90,446

सिक्किम

4,944

5,405

5,113

तमिलनाडु

51,971

56,819

62,531

तेलंगाना

26,782

29,280

33,181

त्रिपुरा

9,021

9,862

9,783

उत्तर प्रदेश

2,28,565

2,49,885

2,68,911

उत्तराखंड

14,245

15,573

17,415

पश्चिम बंगाल

95,852

1,04,793

1,10,119

कुल

12,74,121

13,92,971

15,26,255

नोट: 2024-25 के वास्तविक आंकड़े और 2025-26 के संशोधित अनुमान पिछले वर्षों में हुए अतिरिक्त या कम हस्तांतरण को समायोजित करने के बाद केंद्रीय बजट में प्रस्तुत किए गए हैं। स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज 2026-27; पीआरएस।

 

अनुलग्नक 3: 2024-25 के बजटीय अनुमानों और वास्तविक के बीच तुलना

यहां तालिकाओं में 2024-25 के वास्तविक के साथ उस वर्ष के बजटीय अनुमानों के बीच तुलना की गई है।

तालिका 10: प्राप्तियों और व्यय की झलक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

शुद्ध प्राप्तियां (1+2)

1,10,900

94,685

-15%

1.  राजस्व प्राप्तियां (क+ख+ग+घ)

1,10,800

94,489

-15%

क.  स्वयं कर राजस्व

34,200

28,501

-17%

ख.  स्वयं गैर कर राजस्व

19,300

14,231

-26%

ग.  केंद्रीय करों में हिस्सा

40,338

42,557

6%

घ.  केंद्र से सहायतानुदान

16,961

9,199

-46%

2.  गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

100

197

97%

3.  उधारियां

18,000

9,161

-49%

      इनमें केंद्रीय कैपेक्स लोन

4,300

2,718

-37%

शुद्ध व्यय (4+5+6)

1,20,400

1,09,212

-9%

4.  राजस्व व्यय

91,832

86,565

-6%

5.  पूंजीगत परिव्यय

23,987

18,410

-23%

6.  ऋण और अग्रिम

4,581

4,237

-8%

7.  ऋण पुनर्भुगतान

8,500

7,680

-10%

राजस्व अधिशेष

18,968

7,924

-58%

राजस्व संतुलन (जीएसडीपी का %)

4.0%

2%

 

राजकोषीय घाटा

9,500

14,527

53%

राजकोषीय घाटा (जीएसडीपी का %)

2.0%

2.8%

 

स्रोत: झारखंड के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 11: राज्य के स्वयं कर राजस्व के घटक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

भूराजस्व

1,700

543

-68%

सेल्स टैक्स/वैट

9,121

6,686

-27%

वाहन कर

2,350

1,912

-19%

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क

1,450

1,258

-13%

राज्य जीएसटी

15,375

13,980

-9%

बिजली पर टैक्स और ड्यूटी

1,413

1,367

-3%

राज्य उत्पाद शुल्क

2,700

2,708

0.3%

स्रोत: झारखंड के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 12: मुख्य क्षेत्रों के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

जलापूर्ति एवं सैनिटेशन

4,707

1,775

-62%

शहरी विकास

3,285

1,510

-54%

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

7,232

4,162

-42%

कृषि और संबंधित गतिविधियां

6,017

3,704

-38%

ग्रामीण विकास

18,473

14,093

-24%

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण

3,513

2,836

-19%

परिवहन

6,742

5,818

-14%

जिसमें सड़कें और पुल शामिल हैं

6,389

5,733

-10%

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

15,194

13,377

-12%

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण

2,226

2,176

-2%

पुलिस

7,392

7,292

-1%

आवास

330

336

2%

सामाजिक कल्याण एवं पोषण

9,694

16,037

65%

ऊर्जा

4,779

7,958

67%

स्रोत: झारखंड के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।


[1] 31 राज्यों में दिल्ली, जम्मू एवं कश्मीर और पुद्दूचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।