मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने 18 फरवरी, 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट प्रस्तुत किया।

बजट के मुख्य अंश

  • मध्य प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2026-27 के लिए (वर्तमान कीमतों पर) 18,48,274 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 11% की वृद्धि दर्शाता है।

  • 2026-27 में व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 3,88,923 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 10% अधिक है। इसके अतिरिक्त, राज्य द्वारा 34,437 करोड़ रुपए का ऋण चुकाया जाएगा।

  • 2026-27 के लिए प्राप्तियां (ऋण को छोड़कर) 3,17,465 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 14% अधिक है।

  • वर्ष 2026-27 में राजस्व अधिशेष 44 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (सात करोड़ रुपए) से मामूली रूप से अधिक है। 2025-26 में राजस्व अधिशेष बजट अनुमान (618 करोड़ रुपए) से 99% कम रहने का अनुमान है।

  • 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3.9% (71,458 करोड़ रुपए) पर लक्षित है। 2025-26 में, संशोधित अनुमानों के अनुसार, राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 4.5% रहने की उम्मीद है, जो बजट अनुमान (जीएसडीपी का 4.7%) से कम है।

नीतिगत विशिष्टताएं

  • औद्योगीकरण को प्रोत्साहन: राज्य भर में औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। ग्वालियर में एक दूरसंचार मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र स्थापित किया जा रहा है। इंदौर-पीथमपुर आर्थिक गलियारे को लगभग 2,360 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है।

  • अवसंरचना विकास: शहरों में अवसंरचना विकास के लिए द्वारका योजना शुरू की जा रही है। राज्य सरकार अगले तीन वर्षों में इस योजना पर 5,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी।

  • सोशल इंपैक्ट बांड: राज्य का पहला सोशल इंपैक्ट बांड राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने जा रहा है। राज्य सरकार इस पहल के माध्यम से सामाजिक क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना चाहती है।

  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी: सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नीति 2026 को लागू करके राज्य को अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।

मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था

  • जीएसडीपी: 2024-25 में मध्य प्रदेश की जीएसडीपी में (स्थिर कीमतों पर) पिछले वर्ष की तुलना में 6% की वृद्धि का अनुमान है। तुलनात्मक रूप से, भारत की जीडीपी में 2024-25 में 6.5% की वृद्धि का अनुमान है।

  • क्षेत्र: 2024-25 में कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों का मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में क्रमशः 44%, 19% और 37% का योगदान होने का अनुमान है (वर्तमान कीमतों पर)।

  • प्रति व्यक्ति जीएसडीपी: 2024-25 में मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी का अनुमान 1,70,430 रुपए है, जो 2023-24 की तुलना में 10% अधिक है। 2024-25 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी का अनुमान 2,34,859 रुपए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9% अधिक है।

रेखाचित्र 1: मध्य प्रदेश में स्थिर मूल्यों पर जीएसडीपी की वृद्धि (2011-12)

नोट: ये आंकड़े स्थिर कीमतों (2011-12) के अनुसार हैं, जिसका अर्थ है कि विकास दर को मुद्रास्फीति के लिए समायोजित किया गया है। स्रोत: एमओएसपीआई; पीआरएस।

2026-27 में बजट अनुमान

  • वर्ष 2026-27 में कुल व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 3,88,923 करोड़ रुपए रहने का लक्ष्य है। यह 2025-26 के संशोधित अनुमान से 10% अधिक है। इस व्यय को 3,17,465 करोड़ रुपए की प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) और 71,753 करोड़ रुपए के शुद्ध ऋण से पूरा करने का प्रस्ताव है। 2026-27 के लिए कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) में 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 14% की वृद्धि होने की उम्मीद है।

  • राज्य सरकार ने 2026-27 में 44 करोड़ रुपए के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (सात करोड़ रुपए) से मामूली रूप से अधिक है। 2025-26 में राजस्व अधिशेष बजट अनुमान (618 करोड़ रुपए) से 99% कम रहने का अनुमान है।

  • 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3.9% (71,458 करोड़ रुपए) पर लक्षित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (जीएसडीपी का 4.5%) से कम है।

तालिका 1: बजट 2026-27- मुख्य आंकड़े (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

% परिवर्तन

(25-26 बअ से 25-26 संअ)

2026-27 बजटीय

% परिवर्तन (25-26 संअ से 26-27 बअ)

कुल व्यय

3,45,938

4,05,315

3,79,839

-6%

4,23,360

11%

(-) ऋण का पुनर्भुगतान

26,428

29,980

25,952

-13%

34,437

33%

शुद्ध व्यय (E)

3,19,510

3,75,335

3,53,887

-6%

3,88,923

10%

कुल प्राप्तियां

3,44,920

4,05,186

3,80,718

-6%

4,23,655

11%

(-) उधारियां

89,797

1,08,751

1,01,153

-7%

1,06,190

5%

जिनमें से कैपेक्स लोन*

12,425

11,000

13,500

23%

16,200

20%

शुद्ध प्राप्तियां (R)

2,55,123

2,96,435

2,79,565

-6%

3,17,465

14%

राजकोषीय घाटा (E-R)

64,388

78,900

74,321

-6%

71,458

-4%

जीएसडीपी का %

4.3%

4.7%

4.5%

 

3.9%

 

राजस्व अधिशेष

1,573

618

7

-99%

44

512%

जीएसडीपी का %

0.1%

0.04%

0.0004%

 

0.002%

 

प्राथमिक घाटा

38,500

50,264

43,537

-13%

37,724

-13%

जीएसडीपी का %

2.6%

3.0%

2.6%

 

2.0%

 

जीएसडीपी

15,02,428

16,94,477

16,69,750

-1%

18,48,274

11%

नोट: बअ बजट अनुमान है; संअ संशोधित अनुमान है। *केंद्र सरकार 2020-21 से राज्य सरकारों को पूंजीगत व्यय के लिए 50-वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण प्रदान कर रही है। इन ऋणों को राज्य की उधार सीमा की गणना से बाहर रखा गया है।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, मध्य प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में व्यय

  • 2026-27 के लिए राजस्व व्यय 3,08,659 करोड़ रुपए प्रस्तावित है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 11% अधिक है। इसमें वेतन, पेंशन, ब्याज, अनुदान और सबसिडी पर होने वाला व्यय शामिल है।

  • 2026-27 के लिए पूंजीगत परिव्यय 78,920 करोड़ रुपए प्रस्तावित है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 8% अधिक है। पूंजीगत परिव्यय परिसंपत्तियों के सृजन पर होने वाले व्यय को दर्शाता है। 2025-26 में पूंजीगत परिव्यय बजट से 11% कम रहने की उम्मीद है। इसका कारण जलापूर्ति और स्वच्छता (7,469 करोड़ रुपए कम) और ऊर्जा (5,414 करोड़ रुपए कम) जैसे क्षेत्रों में पूंजीगत परिव्यय पर बजट से कम खर्च होना है।

तालिका 2: बजट 2026-27 में व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

% परिवर्तन

(25-26 बअ से 25-26 संअ)

2026-27 बजटीय

% परिवर्तन (25-26 संअ से 26-27 बअ)

राजस्व व्यय

2,48,925

2,90,261

2,79,226

-4%

3,08,659

11%

पूंजीगत परिव्यय

67,441

82,513

73,232

-11%

78,920

8%

राज्य द्वारा दिए गए ऋण

3,144

2,561

1,428

-44%

1,344

-6%

शुद्ध व्यय

3,19,510

3,75,335

3,53,887

-6%

3,88,923

10%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, मध्य प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

प्रतिबद्ध व्यय: राज्य के प्रतिबद्ध व्यय में आम तौर पर वेतन, पेंशन और ब्याज के भुगतान पर व्यय शामिल होता है। बजट के एक बड़े हिस्से को प्रतिबद्ध व्यय की मदों के लिए आवंटित करने से पूंजीगत परिव्यय जैसी अन्य व्यय प्राथमिकताओं पर फैसला लेने का राज्य का लचीलापन सीमित हो जाता है। 2026-27 में मध्य प्रदेश द्वारा प्रतिबद्ध व्यय पर 1,37,826 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान है जो उसकी अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का 45% है। इसमें वेतन (राजस्व प्राप्तियों का 24.5%), पेंशन (9.2%), और ब्याज भुगतान (11.9%) पर खर्च शामिल है। 2024-25 में, वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, राजस्व प्राप्तियों का 43% प्रतिबद्ध व्यय मदों पर खर्च किया गया था।

तालिका 3: 2026-27 में प्रतिबद्ध व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

% परिवर्तन

(25-26 बअ से 25-26 संअ)

2026-27 बजटीय

% परिवर्तन (25-26 संअ से 26-27 बअ)

वेतन

56,191

70,743

65,961

-7%

75,574

15%

पेंशन

26,201

28,961

28,759

-1%

28,518

-1%

ब्याज भुगतान

25,888

28,636

30,784

7%

33,735

10%

कुल

1,08,280

1,28,340

1,25,504

-2%

1,37,826

10%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण और मध्यम अवधि का राजकोषीय नीति वक्तव्य, मध्य प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

सबसिडी और हस्तांतरण

16वें वित्त आयोग ने पाया कि मध्य प्रदेश ने 2025-26 में जीएसडीपी का 4.1% सबसिडी और हस्तांतरण पर खर्च करने का बजट बनाया था, जो राज्यों के औसत (जीएसडीपी का 2.7%) से अधिक था। अनुमान है कि मध्य प्रदेश द्वारा इन मदों पर खर्च 2018-19 और 2025-26 के बीच 15% की वार्षिक दर से बढ़ेगा। यह वृद्धि मुख्य रूप से बिजली और कृषि सबसिडी तथा नकद हस्तांतरणों के कारण है। एक प्रमुख नकद हस्तांतरण योजना मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना है जिसे जनवरी 2023 में शुरू किया गया था। शुरुआत में प्रति महिला लाभार्थी को 1,000 रुपए प्रति माह दिए गए, जिसे बाद में संशोधित करके 1,250 रुपए कर दिया गया। वर्तमान में प्रति माह 1,500 रुपए दिए जाते हैं। इस योजना के तहत 1.25 करोड़ महिलाएं पंजीकृत हैं। 2026-27 में इस योजना के लिए 23,883 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

 

तालिका 4: सबसिडी और हस्तांतरण पर व्यय (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2018-19 वास्तविक

2025-26 बअ

राशि

जीएसडीपी का %

राशि

जीएसडीपी का %

कुल

26,825

3.23%

69,407

4.10%

इसमें

 

 

 

 

ऊर्जा

9,813

1.18%

25,142

1.48%

नकद हस्तांतरण

1,735

0.21%

20,821

1.23%

कृषि

165

0.02%

7,211

0.43%

सामाजिक सुरक्षा

508

0.06%

3,346

0.20%

स्रोत: 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट खंड I; पीआरएस।

क्षेत्रवार व्यय: 2026-27 के दौरान राज्य के बजटीय व्यय का 64% हिस्सा निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए खर्च किया जाएगा। अनुलग्नक 1 में प्रमुख क्षेत्रों में मध्य प्रदेश के व्यय की तुलना, अन्य राज्यों से की गई है।

तालिका 5: मध्य प्रदेश बजट 2026-27 में क्षेत्रवार व्यय (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2024-25

वास्तविक

2025-26

बजटीय

2025-26

संशोधित

2026-27

बजटीय

2025-26 संअ से 2026-27 बअ में परिवर्तन का %

बजटीय प्रावधान

2026-27 बअ

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

44,265

51,509

46,844

52,917

13%

  • समग्र शिक्षा अभियान के लिए 5,649 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सामाजिक कल्याण एवं पोषण

31,733

34,580

32,930

40,400

23%

  • लाडली बहना योजना के लिए 23,883 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ऊर्जा

32,620

34,130

28,834

31,843

10%

  • अटल गृह ज्योति योजना के लिए 6,033 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

16,683

23,813

23,188

24,001

4%

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 4,600 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ग्रामीण विकास

11,646

15,166

14,050

23,579

68%

  • वीबी जी-आरएएम-जी योजना के लिए 10,428 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां

16,239

23,822

21,785

23,576

8%

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण

20,595

17,214

19,087

13,934

-27%

  • सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण पर पूंजीगत व्यय के लिए 11,546 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

शहरी विकास

5,672

9,439

9,512

13,178

39%

  • प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के लिए 2,301 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

परिवहन

11,313

12,941

13,013

13,103

1%

  • सड़कों और पुलों पर पूंजीगत व्यय के लिए 9,910 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

पुलिस

9,097

12,197

11,502

12,720

11%

  • जिला पुलिस के लिए 7,261 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सभी क्षेत्रों पर कुल व्यय का %

63%

63%

63%

64%

 

 

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, मध्य प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में प्राप्तियां

  • 2026-27 के लिए कुल राजस्व प्राप्ति 3,08,703 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 11% अधिक है। इसमें से 1,42,061 करोड़ रुपए (46%) राज्य अपने संसाधनों से जुटाएगा, और 1,66,642 करोड़ रुपए (54%) केंद्र से प्राप्त होंगे। केंद्र से प्राप्त संसाधन केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से (राजस्व प्राप्ति का 36%) और अनुदानों (राजस्व प्राप्ति का 18%) के रूप में होंगे।

  • हस्तांतरण: 2026-27 में केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा 1,12,137 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 3% अधिक है। केंद्रीय करों के अविभाज्य पूल में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी में गिरावट के कारण कम वृद्धि की संभावना है (तालिका 8 देखें)।

  • 2026-27 में 54,505 करोड़ रुपए का केंद्रीय अनुदान अनुमानित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 20% अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) के लिए अनुदान में अपेक्षित वृद्धि के कारण है। सीएसएस के लिए अनुदान 2026-27 में 40,120 करोड़ रुपए और 2025-26 में 32,791 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। 2024-25 में, वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, सीएसएस के लिए अनुदान 24,967 करोड़ रुपए था।

  • राज्य का स्वयं कर राजस्व: राज्य का कुल स्वयं कर राजस्व 2026-27 में 1,17,667 करोड़ रुपए होने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 18% अधिक है। जीएसडीपी के % के रूप में स्वयं कर राजस्व 2026-27 में 6.4% होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (6%) से अधिक है। 2024-25 के वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, जीएसडीपी के % के रूप में स्वयं कर राजस्व 6.3% था।

तालिका 6: राज्य सरकार की प्राप्तियों का ब्रेकअप (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

% परिवर्तन

(25-26 बअ से 25-26 संअ)

2026-27 बजटीय

% परिवर्तन (25-26 संअ से 26-27 बअ)

राज्य के स्वयं कर

94,408

1,09,157

1,00,020

-8%

1,17,667

18%

राज्य के स्वयं गैर कर

22,392

21,399

24,280

13%

24,394

0%

केंद्रीय करों में हिस्सेदारी

1,01,020

1,11,662

1,09,351

-2%

1,12,137

3%

केंद्र से सहायतानुदान

32,678

48,661

45,582

-6%

54,505

20%

राजस्व प्राप्तियां

2,50,498

2,90,879

2,79,234

-4%

3,08,703

11%

गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

4,624

5,556

332

-94%

8,761

2,540%

शुद्ध प्राप्तियां

2,55,123

2,96,435

2,79,565

-5.7%

3,17,465

14%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, मध्य प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम  

मार्च 2023 तक मध्य प्रदेश में 73 राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (एसपीएसई) थे। इनमें से 66 एसपीएसई का हिसाब किताब बकाया था। बकाया का अर्थ है कि इन कंपनियों ने अपने वित्तीय कागजात कानूनी समय सीमा के अंदर तैयार नहीं किए थे। 16वें वित्त आयोग ने कहा कि हिसाब किताब साफ न होने की वजह से इन कंपनियों में सरकारी निवेश विधानसभा की निगरानी से बाहर हो जाता है।

2022-23 के लिए जिन 32 कंपनियों ने अपना हिसाब-किताब पूरा किया, उनमें से 12 कंपनियों को कुल 1,941 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। इस भारी नुकसान का 91% हिस्सा सिर्फ तीन डिस्कॉम्स की वजह से था।

स्रोत: 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट खंड-I; वर्ष 2022-23 के लिए रिपोर्ट संख्या 4, 2025, कैग; पीआरएस।

  • 2026-27 में राज्य जीएसटी के स्वयं कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत (36% हिस्सा) होने का अनुमान है। राज्य जीएसटी राजस्व में 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 19% की वृद्धि का अनुमान है।

  • अनुमान है कि 2026-27 में स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क से होने वाली आय में पिछले वर्ष की तुलना में 37% की वृद्धि दर्ज की जाएगी।

  • संशोधित अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में एसजीएसटी, बिक्री कर/वैट और वाहनों पर लगने वाले करों से होने वाली आय बजट से कम रहने की उम्मीद है।

तालिका 7: राज्य के स्वयं कर राजस्व के मुख्य स्रोत (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

% परिवर्तन

(25-26 बअ से 25-26 संअ)

2026-27 बजटीय

% परिवर्तन (25-26 संअ से 26-27 बअ)

राज्य जीएसटी

35,837

42,140

35,560

-16%

42,311

19%

सेल्स टैक्स/वैट

19,268

22,698

20,237

-11%

22,209

10%

राज्य उत्पाद शुल्क

15,201

17,500

17,983

3%

20,279

13%

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क

11,357

13,920

13,920

0%

19,112

37%

वाहन कर

4,878

5,700

4,400

-23%

5,721

30%

बिजली पर कर और ड्यूटी

5,278

5,000

5,500

10%

5,500

0%

भूराजस्व

1,069

835

835

0%

877

5%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, मध्य प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 के लिए घाटा और ऋण

मध्य प्रदेश के राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन एक्ट, 2005 में राज्य सरकार की बकाया देनदारियों, राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे को प्रगतिशील तरीके से कम करने के लक्ष्यों का प्रावधान है।

राजस्व संतुलन: यह सरकार की राजस्व प्राप्तियों और राजस्व व्यय के बीच का अंतर होता है। राजस्व घाटे का यह अर्थ होता है कि सरकार को अपना व्यय पूरा करने के लिए उधार लेने की जरूरत है जोकि भविष्य में पूंजीगत परिसंपत्तियों का सृजन नहीं करेगा और न ही देनदारियों को कम करेगा। बजट में 2026-27 में 44 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 0.002%) के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया गया है।

राजकोषीय घाटा: यह कुल व्यय और कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है। इस अंतर को सरकार द्वारा उधार लेकर पूरा किया जाता है जिससे कुल देनदारियों में वृद्धि होती है। 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 3.9% (71,458 रुपए) रहने का अनुमान है। 16वें वित्त आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए राज्यों के वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा जीएसडीपी का 3% निर्धारित करने का सुझाव दिया है। उधार सीमा निर्धारित करते समय केंद्र सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय के लिए दिए गए 50 वर्षों के ब्याज मुक्त ऋणों को शामिल नहीं किया जाएगा।

संशोधित अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 4.5% रहने की उम्मीद है। यह बजट अनुमान (जीएसडीपी का 4.7%) से कम है।

बकाया देनदारियां: बकाया देनदारियां किसी वित्तीय वर्ष के अंत में कुल उधारी का संचय होता है। इसमें भविष्य निधि जैसे सार्वजनिक खातों पर बकाया देनदारियां भी शामिल हैं। 2026-27 के अंत में बकाया देनदारियां जीएसडीपी का 32.5% होने का अनुमान है जो 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 32.2%) से अधिक है।

रेखाचित्र 2: राजस्व एवं राजकोषीय संतुलन (जीएसडीपी का %)

  

नोट: *2027-28 के बाद के आंकड़े अनुमान हैं। RE संशोधित अनुमान है; BE बजट अनुमान है। ** (+) अधिशेष को दर्शाता है और (-) घाटे को दर्शाता है।  वर्ष 2027-28 और 2028-29 के लिए जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में राजस्व संतुलन के अनुमान उपलब्ध नहीं हैं।
स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, मध्य प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

रेखाचित्र 3: बकाया ऋण (जीएसडीपी का %)  

नोट: *2027-28 के बाद के आंकड़े अनुमान हैं। RE संशोधित अनुमान है; BE बजट अनुमान है।
स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, मध्य प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

बकाया सरकारी गारंटी: राज्यों के बकाया ऋण में कुछ अन्य देनदारियां शामिल नहीं हैं जो आकस्मिक प्रकृति की हैं और जिन्हें राज्यों को कुछ मामलों में चुकाना पड़ सकता है। राज्य सरकारें वित्तीय संस्थाओं से राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (एसपीएसई) के उधार की गारंटी देती हैं। 31 दिसंबर, 2025 तक राज्य की बकाया गारंटी लगभग 48,430 करोड़ रुपए होने का अनुमान है जो मध्य प्रदेश की जीएसडीपी का 3% है।

उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करने में देरी

राज्य विभागों को महालेखाकार को उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) प्रस्तुत करना अनिवार्य है। कैग (2025) की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 तक 19,897 उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) लंबित थे। ये 22,049 करोड़ रुपए के अनुदानों से संबंधित हैं। इनमें से 13,607 करोड़ रुपए (62%) के अनुदानों के यूसी नौ वर्षों से अधिक समय से लंबित हैं। लंबित यूसी का सबसे बड़ा हिस्सा पंचायती राज विकास, ग्रामीण विकास और शहरी विकास विभागों से संबंधित था। कैग ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में हिसाब बकाया होना चिंता की बात है क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जिस काम के लिए धनराशि दी गई थी, वह पूरा हुआ है या नहीं। इसके अलावा नौ या उससे भी अधिक पुराने मामलों में धनराशि की हेराफेरी और गबन होने का खतरा भी बना रहता है। साथ ही इस देरी की वजह से केंद्र सरकार से प्रदर्शन आधारित अनुदान मिलना भी रुक सकता है। 

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 1 वर्ष 2025, राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2023-24, कैग; पीआरएस।

अनुलग्नक 1: मुख्य क्षेत्रों में राज्य के व्यय की तुलना

निम्नलिखित रेखाचित्रों में मध्य प्रदेश द्वारा 2026-27 में छह प्रमुख क्षेत्रों पर किए गए व्यय की तुलना सभी क्षेत्रों पर किए गए कुल व्यय के अनुपात से की गई है। क्षेत्र के लिए औसत, उस क्षेत्र में 31 राज्यों (मध्य प्रदेश सहित) द्वारा किए जाने वाले औसत व्यय (2025-26 के बजटीय अनुमानों के आधार पर) को इंगित करता है:.[1]

  • शिक्षा: मध्य प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 13.7% शिक्षा के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा शिक्षा के लिए आवंटित औसत राशि (14.5%) से कम है।

  • स्वास्थ्य: मध्य प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 6.2% स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा स्वास्थ्य के लिए आवंटित औसत राशि (6.2%) के लगभग समान है।

  • ग्रामीण विकास: मध्य प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 6.1% ग्रामीण विकास के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा ग्रामीण विकास के लिए आवंटित औसत राशि (4.9%) से अधिक है।

  • कृषि: मध्य प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 6.1% कृषि के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा कृषि के लिए आवंटित औसत राशि (5.7%) से अधिक है।

  • ऊर्जा: मध्य प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 8.2% ऊर्जा के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा ऊर्जा के लिए किए गए औसत आवंटन (5.3%) से अधिक है।

  • जलापूर्ति और स्वच्छता: मध्य प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 1.7% जलापूर्ति और स्वच्छता के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा जलापूर्ति और स्वच्छता के लिए किए गए औसत आवंटन (2.8%) से कम है।

नोट: 2024-25, 2025-26 (बअ), 2025-26 (संअ), और 2026-27 (बअ) के आंकड़े मध्य प्रदेश के हैं।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय वक्तव्य, मध्य प्रदेश बजट दस्तावेज 2026-27; विभिन्न राज्य बजट; पीआरएस।

अनुलग्नक 2: वर्ष 2026-31 के लिए 16वें वित्त आयोग के सुझाव

16वें वित्त आयोग (चेयर: डॉ. अरविंद पनगढ़िया) की रिपोर्ट 1 फरवरी, 2026 को संसद में पेश की गई। उसके सुझाव 2026-27 से 2030-31 तक की पांच-वर्षीय अवधि के लिए लागू होंगे। 16वें आयोग (एफसी) ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों के हिस्से को 41% निर्धारित करने का सुझाव दिया है। यह हिस्सा 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-26) के समान ही अपरिवर्तित बना हुआ है। विभाज्य पूल की गणना केंद्रीय सरकार द्वारा जुटाए गए कुल कर राजस्व में से कर वसूलने की लागत, उपकर और अधिभारों को घटाने के बाद की जाती है। 16वें वित्त आयोग ने राज्यों के हिस्से के निर्धारण के लिए संशोधित मानदंड प्रस्तावित किए हैं। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का संक्षिप्त सारांश यहां देखें। 16वें वित्त आयोग के सुझावों के आधार पर, मध्य प्रदेश को 2026-31 की अवधि के लिए केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में 7.35% हिस्सा मिलेगा।

16वें वित्त आयोग ने पांच वर्षों की अवधि में 9.47 लाख करोड़ रुपए के अनुदानों का सुझाव दिया है। इनमें निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए अनुदान शामिल हैं: (i) शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकाय, और (ii) आपदा प्रबंधन। 16वें वित्त आयोग ने 15वें वित्त आयोग द्वारा सुझाए गए निम्नलिखित अनुदानों को बंद कर दिया है: (i) राजस्व घाटा अनुदान, (ii) शिक्षा, न्याय, सांख्यिकी और कृषि के लिए क्षेत्र-विशिष्ट अनुदान, और (iii) राज्य-विशिष्ट अनुदान। 2026-31 की अवधि के लिए मध्य प्रदेश के लिए प्रस्तावित अनुदानों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) शहरी स्थानीय निकायों के लिए 16,016 करोड़ रुपए, (ii) ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 32,033 करोड़ रुपए, और (iii) आपदा प्रबंधन अनुदान के रूप में 11,697 करोड़ रुपए। इसके अतिरिक्त, इंदौर और भोपाल अपशिष्ट जल प्रबंधन के विकास के लिए विशेष अवसंरचना अनुदान (प्रत्येक के लिए 5,000 करोड़ रुपए तक) के पात्र होंगे। राज्यों को एक लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले आस-पास के बड़े शहरी स्थानीय निकाय में अर्ध-शहरी गांवों के विलय के लिए एकमुश्त अनुदान भी प्राप्त होगा।

तालिका 8: केंद्र द्वारा हस्तांतरित करों में प्रत्येक राज्य का हिस्सा (100 में से)

राज्य

14वां विआ (2015-2020)

15वां विआ (2021-26)

16वां विआ (2026-31)

आंध्र प्रदेश

4.31

4.05

4.22

अरुणाचल प्रदेश

1.37

1.76

1.35

असम

3.31

3.13

3.26

बिहार

9.67

10.06

9.95

छत्तीसगढ़

3.08

3.41

3.30

गोवा

0.38

0.39

0.37

गुजरात

3.08

3.48

3.76

हरियाणा

1.08

1.09

1.36

हिमाचल प्रदेश

0.71

0.83

0.91

जम्मू एवं कश्मीर

1.85

-

-

झारखंड

3.14

3.31

3.36

कर्नाटक

4.71

3.65

4.13

केरल

2.50

1.93

2.38

मध्य प्रदेश

7.55

7.85

7.35

महाराष्ट्र

5.52

6.32

6.44

मणिपुर

0.62

0.72

0.63

मेघालय

0.64

0.77

0.63

मिजोरम

0.46

0.50

0.56

नागालैंड

0.50

0.57

0.48

ओड़िशा

4.64

4.53

4.42

पंजाब

1.58

1.81

2.00

राजस्थान

5.50

6.03

5.93

सिक्किम

0.37

0.39

0.34

तमिलनाडु

4.02

4.08

4.10

तेलंगाना

2.44

2.10

2.17

त्रिपुरा

0.64

0.71

0.64

उत्तर प्रदेश

17.96

17.94

17.62

उत्तराखंड

1.05

1.12

1.14

पश्चिम बंगाल

7.32

7.52

7.22

 

तालिका 9: वर्ष 2026-31 के लिए राज्यवार अनुदान सहायता का विवरण (करोड़ रुपए में)

राज्य

ग्रामीण स्थानीय निकाय

शहरी स्थानीय निकाय

आपदा प्रबंधन

आंध्र प्रदेश

16,627

12,158

6,125

अरुणाचल प्रदेश

1,698

233

616

असम

14,580

3,249

5,243

बिहार

51,923

9,169

13,615

छत्तीसगढ़

11,664

4,990

2,481

गोवा

174

726

112

गुजरात

18,802

23,764

8,459

हरियाणा

8,270

7,834

2,922

हिमाचल प्रदेश

3,744

435

2,682

झारखंड

14,231

6,093

2,806

कर्नाटक

18,889

18,483

6,419

केरल

3,308

16,683

1,935

मध्य प्रदेश

32,033

16,016

11,697

महाराष्ट्र

32,817

46,803

29,619

मणिपुर

1,262

609

259

मेघालय

1,479

377

437

मिजोरम

567

377

284

नागालैंड

697

667

408

ओड़िशा

18,715

5,078

8,900

पंजाब

8,486

7,834

2,477

राजस्थान

31,467

12,680

9,211

सिक्किम

218

203

455

तमिलनाडु

16,930

25,069

8,486

तेलंगाना

9,968

11,548

2,774

त्रिपुरा

1,176

1,016

356

उत्तर प्रदेश

83,261

33,543

15,321

उत्तराखंड

4,047

2,497

4,954

पश्चिम बंगाल

28,203

22,023

6,869

 

स्रोत: 14वें, 15वें और 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट; पीआरएस।

तालिका 10: केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार राज्यों को हस्तांतरित कर (करोड़ रुपए में)

राज्य

2024-25 वास्तविक

2025-26 संशोधित

2026-27 बजटीय

आंध्र प्रदेश

51,564

56,374

64,362

अरुणाचल प्रदेश

22,386

24,475

20,665

असम

39,855

43,572

49,725

बिहार

1,28,151

1,40,105

1,51,832

छत्तीसगढ़

43,409

47,459

50,427

गोवा

4,918

5,377

5,571

गुजरात

44,314

48,448

57,311

हरियाणा

13,926

15,225

20,772

हिमाचल प्रदेश

10,575

11,562

13,950

झारखंड

42,135

46,066

51,236

कर्नाटक

46,467

50,802

63,050

केरल

24,527

26,815

36,355

मध्य प्रदेश

1,00,019

1,09,348

1,12,134

महाराष्ट्र

80,486

87,994

98,306

मणिपुर

9,123

9,974

9,554

मेघालय

9,773

10,684

9,631

मिजोरम

6,371

6,965

8,608

नागालैंड

7,250

7,926

7,341

ओड़िशा

57,692

63,074

67,460

पंजाब

23,023

25,171

30,464

राजस्थान

76,779

83,940

90,446

सिक्किम

4,944

5,405

5,113

तमिलनाडु

51,971

56,819

62,531

तेलंगाना

26,782

29,280

33,181

त्रिपुरा

9,021

9,862

9,783

उत्तर प्रदेश

2,28,565

2,49,885

2,68,911

उत्तराखंड

14,245

15,573

17,415

पश्चिम बंगाल

95,852

1,04,793

1,10,119

कुल

12,74,121

13,92,971

15,26,255

नोट: 2024-25 के वास्तविक आंकड़े और 2025-26 के संशोधित अनुमान पिछले वर्षों में हुए अतिरिक्त या कम हस्तांतरण को समायोजित करने के बाद केंद्रीय बजट में प्रस्तुत किए गए हैं।
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज 2026-27; पीआरएस।

अनुलग्नक 3: 2024-25 के बजटीय अनुमानों और वास्तविक के बीच तुलना

यहां तालिकाओं में 2024-25 के वास्तविक के साथ उस वर्ष के बजटीय अनुमानों के बीच तुलना की गई है।

तालिका 11: प्राप्तियों और व्यय की झलक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

शुद्ध प्राप्तियां (1+2)

2,63,818

2,55,123

-3%

1.  राजस्व प्राप्तियां (क+ख+ग+घ)

2,63,344

2,50,498

-5%

क.  स्वयं कर राजस्व

1,02,097

94,408

-8%

ख.  स्वयं गैर कर राजस्व

20,603

22,392

9%

ग.  केंद्रीय करों में हिस्सा

95,753

1,01,020

6%

घ.  केंद्र से सहायतानुदान

44,892

32,678

-27%

2.  गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

474

4,624

876%

3.  उधारियां

94,431

89,797

-5%

      जिनमें केंद्रीय कैपेक्स लोन

9,500

12,425

31%

शुद्ध व्यय (4+5+6)

3,26,381

3,19,510

-2%

4.  राजस्व व्यय

2,61,644

2,48,925

-5%

5.  पूंजीगत परिव्यय

61,633

67,441

9%

6.  ऋण और अग्रिम

3,103

3,144

1%

7.  ऋण पुनर्भुगतान

29,697

26,428

-11%

राजस्व अधिशेष

1,701

1,573

-7%

राजस्व अधिशेष (जीएसडीपी का %)

0.11%

0.10%

 

राजकोषीय घाटा

62,562

64,388

3%

राजकोषीय घाटा (जीएसडीपी का %)

4.1%

4.3%

 

स्रोत: मध्य प्रदेश के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 12: राज्य के स्वयं कर राजस्व के घटक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

वाहन कर

5,500

4,878

-11%

राज्य जीएसटी

40,000

35,837

-10%

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क

12,500

11,357

-9%

सेल्स टैक्स/वैट

21,000

19,268

-8%

राज्य उत्पाद शुल्क

16,000

15,201

-5%

बिजली पर टैक्स और ड्यूटी

5,000

5,278

6%

भू राजस्व

701

1,069

53%

स्रोत: मध्य प्रदेश के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 13: मुख्य क्षेत्रों के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

शहरी विकास

8,608

5,672

-34%

ग्रामीण विकास

16,350

11,646

-29%

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां

22,193

16,239

-27%

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण

8,730

6,639

-24%

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

21,714

16,683

-23%

पुलिस

10,663

9,097

-15%

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

48,087

44,265

-8%

सामाजिक कल्याण एवं पोषण

34,049

31,733

-7%

परिवहन

9,386

11,313

21%

जिसमें सड़कें और पुल शामिल हैं

9,043

11,193

24%

आवास

5,715

7,219

26%

ऊर्जा

24,891

32,620

31%

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण

12,998

20,595

58%

जलापूर्ति एवं स्वच्छता

9,832

15,522

58%

स्रोत: मध्य प्रदेश के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।


[1] 31 राज्यों में दिल्ली, जम्मू एवं कश्मीर और पुद्दूचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

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