राजस्थान की उप मुख्यमंत्री सुश्री दिया कुमारी ने 11 फरवरी, 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट प्रस्तुत किया।

बजट के मुख्य अंश

  • 2026-27 के लिए राजस्थान का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) (वर्तमान कीमतों पर) 21,52,100 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 15% की वृद्धि दर्शाता है।

  • 2026-27 में व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 4,05,632 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान से 13% अधिक है। इसके अतिरिक्त, राज्य द्वारा 2,05,324 करोड़ रुपए का ऋण चुकाया जाएगा।

  • 2026-27 के लिए प्राप्तियां (ऋण को छोड़कर) 3,26,140 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान से 14% अधिक है।

  • 2026-27 में राजस्व घाटा जीएसडीपी का 1.1% (24,314 करोड़ रुपए) रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 1.8%) से कम है।

  • 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3.7% (79,493 करोड़ रुपए) पर लक्षित है। संशोधित अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 3.9% रहने की उम्मीद है, जो बजट अनुमान (जीएसडीपी का 4.3%) से कम है।

नीतिगत विशिष्टताएं

  • युवाओं के लिए स्वरोजगार: मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत लगभग एक लाख युवाओं को स्वरोजगार प्रदान किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत पात्र युवा लाभार्थियों को 10 लाख रुपए तक के ऋण पर 100% ब्याज सबसिडी दी जाएगी। इस योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

  • महिला सशक्तिकरण: लखपति दीदी योजना के अंतर्गत ऋण सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए की जाएगी।

  • किसान: उपनिवेशन क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को, जिन पर ऋण की बकाया राशि और संचित ब्याज है, 100% ब्याज माफी प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ उठाने के लिए उन्हें 1 अप्रैल, 2026 से 30 सितंबर, 2026 के बीच बकाया ऋण राशि जमा करनी होगी।

  • पशुपालन: राजस्थान सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष को 1,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपए किया जाएगा।

  • कर संबंधी प्रस्ताव: वैट, कृषि विपणन, भू-राजस्व, परिवहन और खनन पर छूट योजनाएं शुरू की जाएंगी। ऋण पर स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क कम किए जाएंगे। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगने वाले हरित कर की दरों में संशोधन किया जाएगा। अन्य राज्यों से लाए गए गैर-परिवहन वाहनों पर मोटर वाहन कर में 50% तक की छूट दी जाएगी।

राजस्थान की अर्थव्यवस्था

  • जीएसडीपी: 2025-26 में राजस्थान की जीएसडीपी में (स्थिर कीमतों पर) पिछले वर्ष की तुलना में 8.7% की वृद्धि का अनुमान है। तुलनात्मक रूप से, भारत की जीडीपी में 2025-26 में 7.4% की वृद्धि का अनुमान है।

  • क्षेत्र: 2025-26 में कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों का राजस्थान की अर्थव्यवस्था में क्रमशः 25.7%, 26.5% और 47.7% का योगदान होने का अनुमान है (वर्तमान कीमतों पर)।

  • प्रति व्यक्ति जीएसडीपी: 2025-26 में राजस्थान की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी का अनुमान 2,25,200 रुपए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.1% की वृद्धि है। 2025-26 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी का अनुमान 2,51,393 रुपए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7% की वृद्धि है।

रेखाचित्र 1: राजस्थान में स्थिर मूल्यों पर जीएसडीपी की वृद्धि (2011-12)

नोट: ये आंकड़े स्थिर कीमतों (2011-12) के अनुसार हैं, जिसका अर्थ है कि विकास दर को मुद्रास्फीति के लिए समायोजित किया गया है। स्रोत: राजस्थान का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26; पीआरएस।

2026-27 के लिए बजट अनुमान

  • 2026-27 में कुल व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 4,05,632 करोड़ रुपए रहने का लक्ष्य है। यह 2025-26 के संशोधित अनुमान से 13% की वृद्धि है। इस व्यय को 3,26,140 करोड़ रुपए की प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) और 70,017 करोड़ रुपए के शुद्ध ऋण के माध्यम से पूरा करने का प्रस्ताव है। 2026-27 के लिए कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) में 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 14% की वृद्धि होने की उम्मीद है।

  • राज्य सरकार ने 2026-27 में जीएसडीपी के 1.1% (24,314 करोड़ रुपए) के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 1.8%) से कम है।

  • 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3.7% (79,493 करोड़ रुपए) पर लक्षित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 3.9%) से कम है। 2025-26 में राजकोषीय घाटा प्रारंभिक बजट अनुमान (जीएसडीपी का 4.3%) से कम रहने की उम्मीद है।

तालिका 1: बजट 2026-27- मुख्य आंकड़े (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

कुल व्यय

4,53,066

5,37,069

5,58,596

4%

6,10,956

9%

(-) ऋण का पुनर्भुगतान

1,52,872

1,57,452

1,99,124

26%

2,05,324

3%

शुद्ध व्यय (E)

3,00,194

3,79,617

3,59,472

-5%

4,05,632

13%

कुल प्राप्तियां

4,39,745

5,28,461

5,49,522

4%

6,01,480

9%

(-) उधारियां

2,11,970

2,33,488

2,62,542

12%

2,75,340

5%

केंद्रीय कैपेक्स लोन*

9,139

15,000

9,500

-37%

15,000

58%

शुद्ध प्राप्तियां (R)

2,27,774

2,94,973

2,86,980

-3%

3,26,140

14%

राजकोषीय घाटा (E-R)

72,420

84,644

72,493

-4%

79,493

10%

जीएसडीपी का %

4.3%

4.3%

3.9%

 

3.7%

 

राजस्व घाटा

41,950

31,009

32,983

6%

24,314

-26%

जीएसडीपी का %

2.5%

1.6%

1.8%

 

1.1%

 

प्राथमिक घाटा

34,075

44,585

29,532

-34%

35,817

21%

जीएसडीपी का %

2.0%

2.2%

1.6%

 

1.7%

 

जीएसडीपी

17,01,190

19,89,835

18,75,413

-6%

21,52,100

15%

नोट: बअ बजट अनुमान है; संअ संशोधित अनुमान है। *केंद्र सरकार 2020-21 से राज्य सरकारों को पूंजीगत व्यय के लिए 50-वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण प्रदान कर रही है। इन ऋणों को राज्य की उधार सीमा की गणना से बाहर रखा गया है।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, राजस्थान बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में व्यय

  • 2026-27 के लिए राजस्व व्यय 3,50,054 करोड़ रुपए प्रस्तावित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 10% अधिक है। इसमें वेतन, पेंशन, ब्याज, अनुदान और सबसिडी पर होने वाला व्यय शामिल है।

  • 2026-27 के लिए पूंजीगत परिव्यय 53,978 करोड़ रुपए प्रस्तावित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 37% अधिक है। पूंजीगत परिव्यय से तात्पर्य सड़कों और भवनों जैसी संपत्तियों के निर्माण पर होने वाले व्यय से है।

  • 2026-27 में, जिन क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय में अधिक वृद्धि हुई है, उनमें शहरी विकास (6,658 करोड़ रुपए की वृद्धि) और जलापूर्ति एवं स्वच्छता (3,231 करोड़ रुपए की वृद्धि) शामिल हैं।

पूंजीगत परिव्यय पर कम खर्च

राजस्थान का वास्तविक पूंजीगत व्यय लगातार बजट अनुमानों से कम रहा है। 2024-25 में पूंजीगत व्यय बजट से 31% कम था। 2025-26 में, संशोधित अनुमानों के अनुसार, पूंजीगत व्यय बजट अनुमान से 27% कम रहने की उम्मीद है। राजस्थान ने 2015-16 और 2023-24 के दौरान अपने पूंजीगत परिव्यय में से औसतन 23% कम खर्च किया।

राज्यों द्वारा अधिक पूंजीगत परिव्यय को बढ़ावा देने के लिए, केंद्र सरकार ने 2020-21 में राज्यों के लिए विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) शुरू की। इसके तहत, केंद्र सरकार पूंजीगत व्यय के लिए राज्यों को 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करती है। 2024-25 में राजस्थान ने अपने पूंजीगत परिव्यय का 30% एसएएससीआई ऋण के माध्यम से वित्त पोषित किया। 2026-27 में, अनुमान है कि राजस्थान को इस योजना के तहत 15,000 करोड़ रुपए (उसके पूंजीगत परिव्यय बजट का 28%) प्राप्त होंगे।

 

तालिका 2: बजट 2026-27 में व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राजस्व व्यय

2,69,200

3,25,546

3,18,516

-2%

3,50,054

10%

पूंजीगत परिव्यय

30,727

53,686

39,429

-27%

53,978

37%

राज्य द्वारा दिए गए ऋण

267

384

1,527

297%

1,600

5%

शुद्ध व्यय

3,00,194

3,79,617

3,59,472

-5%

4,05,632

13%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, राजस्थान बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

सबसिडी

कैग के अनुसार राजस्थान ने 2023-24 में सबसिडी पर 28,402 करोड़ रुपए खर्च किए जो उसके राजस्व का 14% था। यह राज्यों द्वारा सबसिडी पर किए जाने वाले औसत खर्च (राजस्व का 9%) से अधिक था।

2026-27 में राजस्थान ने किसानों को बिजली सबसिडी सहित कृषि सबसिडी पर 42,191 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान लगाया है।

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 2 वर्ष 2025, राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2023-24, कैग; पीआरएस।

प्रतिबद्ध व्यय: राज्य के प्रतिबद्ध व्यय में आम तौर पर वेतन, पेंशन और ब्याज के भुगतान पर व्यय शामिल होता है। बजट के एक बड़े हिस्से को प्रतिबद्ध व्यय की मदों के लिए आवंटित करने से पूंजीगत परिव्यय जैसी अन्य व्यय प्राथमिकताओं पर फैसला लेने का राज्य का लचीलापन सीमित हो जाता है।

2026-27 में राजस्थान द्वारा प्रतिबद्ध व्यय पर 1,68,403 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान है जो उसकी अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का 52% है। इसमें वेतन (27%), पेंशन (12%), और ब्याज भुगतान (13%) पर खर्च शामिल है। 2024-25 में, वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, राजस्व प्राप्तियों का 61% प्रतिबद्ध व्यय की मदों पर खर्च किया गया।

तालिका 3: 2026-27 में प्रतिबद्ध व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

वेतन

70,791

83,775

79,689

-5%

86,906

9%

पेंशन

29,318

33,882

35,174

4%

37,821

8%

ब्याज भुगतान

38,345

40,058

42,961

7%

43,675

2%

कुल

1,38,454

1,57,715

1,57,824

0%

1,68,403

7%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, राजस्थान बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

क्षेत्रवार व्यय: 2026-27 के दौरान राज्य के बजटीय व्यय का 70% हिस्सा निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए खर्च किया जाएगा। अनुलग्नक 1 में प्रमुख क्षेत्रों में राजस्थान के व्यय की तुलना, अन्य राज्यों से की गई है।

तालिका 4: राजस्थान बजट 2026-27 में क्षेत्रवार व्यय (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन

बजटीय प्रावधान
(2026-27 बअ)

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

54,844

68,369

65,260

68,989

6%

  • समग्र शिक्षा अभियान के लिए 13,768 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • मिड डे मील योजनाओं के लिए 2,092 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ऊर्जा

32,744

40,198

34,373

42,752

24%

  • बिजली की दरों में संशोधन न करने के बदले अनुदान के रूप में 29,432 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ग्रामीण विकास

15,167

24,587

26,501

32,948

24%

  • ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 7,481 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

25,678

31,888

30,168

32,526

8%

  • राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 4,854 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना 2021 के लिए 3,817 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सामाजिक कल्याण एवं पोषण

21,452

26,639

24,034

26,495

10%

  • मुख्यमंत्री वृद्धावस्था सम्मान पेंशन योजना के लिए राज्य निधि से 10,411 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

शहरी विकास

9,863

16,811

12,769

20,184

58%

  • अमृत मिशन 2.0 के लिए 6,766 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां

11,586

16,558

16,521

18,212

10%

  • कृषि बीमा (फसल, पशुधन आदि) के लिए 5,988 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

परिवहन

13,538

18,909

14,707

16,639

13%

  • सड़कों और पुलों पर पूंजीगत व्यय के लिए 12,038 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

जलापूर्ति एवं स्वच्छता

10,530

13,558

10,638

14,288

34%

  • ग्रामीण जलापूर्ति के लिए 5,747 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • शहरी जलापूर्ति के लिए 3,934 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

पुलिस

9,168

11,125

10,697

11,729

10%

  • जिला पुलिस को 8,526 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सभी क्षेत्रों पर कुल व्यय का %

68%

71%

69%

70%

-

 

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, राजस्थान बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में प्राप्तियां

  • वर्ष 2026-27 के लिए कुल राजस्व प्राप्ति 3,25,740 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 14% अधिक है। इसमें से 1,91,103 करोड़ रुपए (59%) राज्य अपने संसाधनों से जुटाएगा, और 1,34,637 करोड़ रुपए (41%) केंद्र से प्राप्त होंगे। केंद्र से प्राप्त संसाधन केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से (राजस्व प्राप्ति का 28%) और अनुदानों (राजस्व प्राप्ति का 14%) के रूप में होंगे।

  • हस्तांतरण: वर्ष 2026-27 में केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा 90,446 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 8% अधिक है।

  • 2026-27 में 44,191 करोड़ रुपए के केंद्रीय अनुदान का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 11% अधिक है।

  • राज्य का स्वयं कर राजस्व: राजस्थान का कुल स्वयं कर राजस्व 2026-27 में 1,62,668 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 17% अधिक है। 2026-27 में स्वयं कर राजस्व जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में 7.6% होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (जीएसडीपी का 7.4%) से अधिक है। 2024-25 के वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, स्वयं कर राजस्व जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में 6.1% था।

तालिका 5: राज्य सरकार की प्राप्तियों का ब्रेकअप (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राज्य के स्वयं कर

1,03,310

1,42,743

1,38,539

-3%

1,62,668

17%

राज्य के स्वयं गैर कर

23,503

26,883

25,143

-6%

28,435

13%

केंद्रीय करों में हिस्सेदारी

77,548

85,716

83,940

-2%

90,446

8%

केंद्र से सहायतानुदान

22,890

39,193

37,910

-3%

44,191

17%

राजस्व प्राप्तियां

2,27,250

2,94,535

2,85,533

-3%

3,25,740

14%

गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

524

436

1,446

231%

400

-73%

शुद्ध प्राप्तियां

2,27,774

2,94,973

2,86,980

-2.7%

3,26,140

14%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, राजस्थान बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

  • 2026-27 में राज्य जीएसटी के स्वयं कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत (45% हिस्सा) होने का अनुमान है। राज्य जीएसटी राजस्व में 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 18% की वृद्धि का अनुमान है।

  • बिक्री कर/वैट से राजस्व में 2026-27 में 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 21% की वृद्धि की उम्मीद है।

  • राज्य उत्पाद शुल्क से राजस्व में 2026-27 में 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 11% की वृद्धि का अनुमान है।

  • 2025-26 में संशोधित अनुमानों के अनुसार, भू-राजस्व बजट अनुमान से करीब दोगुना होने का अनुमान है।

तालिका 6: राज्य के स्वयं कर राजस्व के मुख्य स्रोत (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राज्य जीएसटी

42,518

63,600

61,700

-3%

72,500

18%

सेल्स टैक्स/वैट

23,369

30,780

28,000

-9%

33,800

21%

राज्य उत्पाद शुल्क

15,104

19,720

19,000

-4%

21,000

11%

स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क

10,542

14,350

15,000

5%

18,750

25%

वाहन कर

7,574

9,860

9,600

-3%

11,000

15%

बिजली पर टैक्स और शुल्क

3,280

3,500

3,425

-2%

3,785

11%

भूराजस्व

869

881

1,761

100%

1,781

1%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, राजस्व बजट, राजस्थान बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 के लिए घाटे और ऋण

राजस्थान के राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन एक्ट, 2005 में राज्य सरकार की बकाया देनदारियों, राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे को लगातार कम करने के लक्ष्यों का प्रावधान है।

राजस्व संतुलन: यह सरकार की राजस्व प्राप्तियों और राजस्व व्यय के बीच का अंतर होता है। राजस्व घाटे का यह अर्थ होता है कि सरकार को अपना व्यय पूरा करने के लिए उधार लेने की जरूरत है जोकि भविष्य में पूंजीगत परिसंपत्तियों का सृजन नहीं करेगा और न ही देनदारियों को कम करेगा। बजट में 2026-27 में 24,314 करोड़ रुपए (जीडीपी का 1.1%) के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया गया है, जो 2025-26 (जीडीपी का 1.8%) से कम है।

राजकोषीय घाटा: यह कुल व्यय और कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है। इस अंतर को सरकार द्वारा उधार लेकर पूरा किया जाता है जिससे कुल देनदारियों में वृद्धि होती है। 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 3.7% (40,293 करोड़ रुपए) होने का अनुमान है। 16वें वित्त आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए राज्यों के वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा जीएसडीपी का 3% निर्धारित करने का सुझाव दिया है।  उधार सीमा निर्धारित करते समय केंद्र सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय के लिए दिए गए 50 वर्षों के ब्याज मुक्त ऋणों को शामिल नहीं किया जाएगा। संशोधित अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 3.9% रहने की उम्मीद है। यह बजट अनुमान (जीएसडीपी का 4.3%) से कम है।

बजटेतर उधारियां

बजटेतर उधारियां ऐसे उधार होते हैं जो सीधे सरकार द्वारा नहीं लिए जाते, बल्कि जिनकी मूल राशि और/या ब्याज का भुगतान सरकारी बजट से किया जाता है। मार्च 2024 तक राजस्थान में कुल बजटेतर उधारियां 8,043 करोड़ रुपए थीं। इनमें से 87% उधार राजस्थान जलापूर्ति एवं सीवेज निगम (आरडब्ल्यूएसएससी) द्वारा जलापूर्ति परियोजनाओं के लिए लिए गए थे। 2023-24 में राज्य सरकार ने इन बजटेतर उधारियों के पुनर्भुगतान और ब्याज भुगतान के लिए 703 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की।

तालिका 7: बकाया बजटेतर उधारियां (करोड़ रुपए में, 31 मार्च, 2024 तक)

संस्था

राशि

आरडब्ल्यूएसएससी द्वारा हुडको और बैंक ऑफ महाराष्ट्र से

7,000

आरडब्ल्यूएसएससी द्वारा एलआईसी से

2

जिला परिषदों द्वारा हुडको से

1,041

कुल

8,043

नोट: हुडको (HUDCO) का अर्थ है आवास एवं शहरी विकास निगम। एलआईसी (LIC) का अर्थ है, जीवन बीमा निगम।

बजट दस्तावेजों के अनुसार, 2023-24 के अंत में राजस्थान की बकाया देनदारियां जीएसडीपी का 37.3% थीं। बजटेतर उधारियों को शामिल करने पर, वर्ष 2023-24 के अंत में बकाया देनदारियां 37.9% होंगी।

16वें वित्त आयोग ने सुझाव दिया है कि बजटेतर उधारियों को बंद किया जाना चाहिए। आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि  राजकोषीय घाटे और ऋण की परिभाषा में बजटेतर उधारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 2 वर्ष 2025, वर्ष 2023-24 के लिए राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट, कैग; 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट खंड-I; पीआरएस।

 

बकाया देनदारियां: बकाया देनदारियां वित्तीय वर्ष के अंत में कुल उधारी का संचय होता है। इसमें भविष्य निधि जैसे सार्वजनिक खातों पर कोई भी देनदारी भी शामिल है। 2026-27 के अंत में बकाया देनदारियां जीएसडीपी का 36.8% होने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 38%) से कम है।

 

रेखाचित्र 2: राजस्व एवं राजकोषीय संतुलन (जीएसडीपी का %)

नोट: *2027-28 के बाद के आंकड़े अनुमानित हैं। RE संशोधित अनुमान है; BE बजट अनुमान है। (+) अधिशेष को दर्शाता है और (-) घाटे को दर्शाता है।  वर्ष 2027-28 और 2028-29 के लिए जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में राजस्व संतुलन के अनुमान उपलब्ध नहीं हैं।
स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, राजस्थान बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।  

रेखाचित्र 3: बकाया देनदारियां (जीएसडीपी का %)

नोट: *2027-28 के बाद के आंकड़े अनुमानित हैं। BE बजट अनुमान है।
स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, राजस्थान बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

 

बकाया सरकारी गारंटी: राज्यों की बकाया देनदारियों में कुछ अन्य आकस्मिक देनदारियां शामिल नहीं होती हैं जिनका भुगतान राज्यों को कुछ मामलों में करना पड़ सकता है। राज्य सरकारें वित्तीय संस्थानों से राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (एसपीएसई) के ऋणों की गारंटी देती हैं। मार्च 2025 तक राज्य की बकाया गारंटी लगभग 1,27,210 करोड़ रुपए (2025-26 जीएसडीपी का 6.8%) होने का अनुमान है।

अनुलग्नक 1: मुख्य क्षेत्रों में राज्य के व्यय की तुलना

निम्नलिखित रेखाचित्रों में राजस्थान द्वारा 2026-27 में छह प्रमुख क्षेत्रों पर किए गए व्यय की तुलना सभी क्षेत्रों पर किए गए कुल व्यय के अनुपात से की गई है। क्षेत्र के लिए औसत, उस क्षेत्र में 31 राज्यों (राजस्थान सहित) द्वारा किए जाने वाले औसत व्यय (2025-26 के बजटीय अनुमानों के आधार पर) को इंगित करता है।[1]

  • शिक्षा: राजस्थान ने 2026-27 में अपने व्यय का 17.1% शिक्षा के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा शिक्षा के लिए आवंटित औसत राशि (14.5%) से अधिक है।

  • स्वास्थ्य: राजस्थान ने 2026-27 में अपने व्यय का 8.1% स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा स्वास्थ्य के लिए आवंटित औसत राशि (6.2%) से अधिक है।

  • ग्रामीण विकास: राजस्थान ने 2026-27 में अपने व्यय का 8.2% ग्रामीण विकास के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा ग्रामीण विकास के लिए आवंटित औसत राशि (4.9%) से अधिक है।

  • ऊर्जा: राजस्थान ने 2026-27 में अपने व्यय का 10.6% ऊर्जा के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा ऊर्जा के लिए आवंटित औसत राशि (5.3%) से अधिक है।

  • कृषि: राजस्थान ने 2026-27 में अपने व्यय का 4.5% कृषि के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा कृषि के लिए आवंटित औसत राशि (5.7%) से कम है।

  • सिंचाई: राजस्थान ने 2026-27 में अपने व्यय का 2.8% सिंचाई के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा सिंचाई के लिए आवंटित औसत राशि (3.4%) से कम है।

नोट: 2024-25, 2025-26 (बअ), 2025-26 (संअ), और 2026-27 (बअ) के आंकड़े राजस्थान के हैं।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय वक्तव्य, राजस्थान बजट दस्तावेज 2026-27; विभिन्न राज्य बजट; पीआरएस।

अनुलग्नक 2: 2026-31 के लिए 16वें वित्त आयोग के सुझाव

16वें वित्त आयोग (चेयर: डॉ. अरविंद पनगढ़िया) की रिपोर्ट 1 फरवरी, 2026 को संसद में पेश की गई। उसके सुझाव 2026-27 से 2030-31 तक की पांच-वर्षीय अवधि के लिए लागू होंगे। 16वें आयोग ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों के हिस्से को 41% निर्धारित करने का सुझाव दिया है। यह हिस्सा 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-26) के समान ही अपरिवर्तित बना हुआ है। विभाज्य पूल की गणना केंद्रीय सरकार द्वारा जुटाए गए कुल कर राजस्व में से कर वसूलने की लागत, उपकर और अधिभारों को घटाने के बाद की जाती है। 16वें वित्त आयोग ने राज्यों के हिस्से के निर्धारण के लिए संशोधित मानदंड प्रस्तावित किए हैं। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का संक्षिप्त सारांश यहां देखें। 16वें वित्त आयोग के सुझावों के आधार पर, राजस्थान को 2026-31 की अवधि के लिए केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में 5.93% हिस्सा मिलेगा।

16वें वित्त आयोग ने पांच वर्षों की अवधि में 9.47 लाख करोड़ रुपए के अनुदानों का सुझाव दिया है। इनमें निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए अनुदान शामिल हैं: (i) शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकाय, और (ii) आपदा प्रबंधन। 16वें वित्त आयोग ने 15वें वित्त आयोग द्वारा सुझाए गए निम्नलिखित अनुदानों को बंद कर दिया है: (i) राजस्व घाटा अनुदान, (ii) शिक्षा, न्याय, सांख्यिकी और कृषि के लिए क्षेत्र-विशिष्ट अनुदान, और (iii) राज्य-विशिष्ट अनुदान। 2026-31 की अवधि के लिए हरियाणा के लिए प्रस्तावित अनुदानों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) शहरी स्थानीय निकायों के लिए 12,680 करोड़ रुपए, (ii) ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 31,467 करोड़ रुपए, और (iii) आपदा प्रबंधन अनुदान के रूप में 9,211 करोड़ रुपए। इसके अतिरिक्त जयपुर और जोधपुर अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली के विकास के लिए विशेष अवसंरचना अनुदान (5,000 करोड़ रुपए तक) का पात्र होगा। राज्यों को एक लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले आस-पास के बड़े शहरी स्थानीय निकाय में अर्ध-शहरी गांवों के विलय के लिए एकमुश्त अनुदान भी प्राप्त होगा।

तालिका 8: केंद्र द्वारा हस्तांतरित करों में प्रत्येक राज्य का हिस्सा (100 में से)

राज्य

14वां विआ (2015-2020)

15वां विआ (2021-26)

16वां विआ (2026-31)

आंध्र प्रदेश

4.31

4.05

4.22

अरुणाचल प्रदेश

1.37

1.76

1.35

असम

3.31

3.13

3.26

बिहार

9.67

10.06

9.95

छत्तीसगढ़

3.08

3.41

3.30

गोवा

0.38

0.39

0.37

गुजरात

3.08

3.48

3.76

हरियाणा

1.08

1.09

1.36

हिमाचल प्रदेश

0.71

0.83

0.91

जम्मू और कश्मीर

1.85

-

-

झारखंड

3.14

3.31

3.36

कर्नाटक

4.71

3.65

4.13

केरल

2.5

1.93

2.38

मध्य प्रदेश

7.55

7.85

7.35

महाराष्ट्र

5.52

6.32

6.44

मणिपुर

0.62

0.72

0.63

मेघालय

0.64

0.77

0.63

मिजोरम

0.46

0.5

0.56

नागालैंड

0.5

0.57

0.48

ओड़िशा

4.64

4.53

4.42

पंजाब

1.58

1.81

2.00

राजस्थान

5.5

6.03

5.93

सिक्किम

0.37

0.39

0.34

तमिलनाडु

4.02

4.08

4.10

तेलंगाना

2.44

2.1

2.17

त्रिपुरा

0.64

0.71

0.64

उत्तर प्रदेश

17.96

17.94

17.62

उत्तराखंड

1.05

1.12

1.14

पश्चिम बंगाल

7.32

7.52

7.22

 

तालिका 9: वर्ष 2026-31 के लिए राज्यवार अनुदान सहायता का विवरण (करोड़ रुपए में)

राज्य

ग्रामीण स्थानीय निकाय

शहरी स्थानीय निकाय

आपदा प्रबंधन

आंध्र प्रदेश

16,627

12,158

6,125

अरुणाचल प्रदेश

1,698

233

616

असम

14,580

3,249

5,243

बिहार

51,923

9,169

13,615

छत्तीसगढ़

11,664

4,990

2,481

गोवा

174

726

112

गुजरात

18,802

23,764

8,459

हरियाणा

8,270

7,834

2,922

हिमाचल प्रदेश

3,744

435

2,682

झारखंड

14,231

6,093

2,806

कर्नाटक

18,889

18,483

6,419

केरल

3,308

16,683

1,935

मध्य प्रदेश

32,033

16,016

11,697

महाराष्ट्र

32,817

46,803

29,619

मणिपुर

1,262

609

259

मेघालय

1,479

377

437

मिजोरम

567

377

284

नागालैंड

697

667

408

ओड़िशा

18,715

5,078

8,900

पंजाब

8,486

7,834

2,477

राजस्थान

31,467

12,680

9,211

सिक्किम

218

203

455

तमिलनाडु

16,930

25,069

8,486

तेलंगाना

9,968

11,548

2,774

त्रिपुरा

1,176

1,016

356

उत्तर प्रदेश

83,261

33,543

15,321

उत्तराखंड

4,047

2,497

4,954

पश्चिम बंगाल

28,203

22,023

6,869

 

स्रोत: 14वें, 15वें और 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट्स; पीआरएस।

तालिका 10: केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार राज्यों को हस्तांतरित कर (करोड़ रुपए में)

राज्य

2024-25 वास्तविक

2025-26 संशोधित

2026-27 बजटीय

आंध्र प्रदेश

51,564

56,374

64,362

अरुणाचल प्रदेश

22,386

24,475

20,665

असम

39,855

43,572

49,725

बिहार

1,28,151

1,40,105

1,51,832

छत्तीसगढ़

43,409

47,459

50,427

गोवा

4,918

5,377

5,571

गुजरात

44,314

48,448

57,311

हरियाणा

13,926

15,225

20,772

हिमाचल प्रदेश

10,575

11,562

13,950

झारखंड

42,135

46,066

51,236

कर्नाटक

46,467

50,802

63,050

केरल

24,527

26,815

36,355

मध्य प्रदेश

1,00,019

1,09,348

1,12,134

महाराष्ट्र

80,486

87,994

98,306

मणिपुर

9,123

9,974

9,554

मेघालय

9,773

10,684

9,631

मिजोरम

6,371

6,965

8,608

नागालैंड

7,250

7,926

7,341

ओड़िशा

57,692

63,074

67,460

पंजाब

23,023

25,171

30,464

राजस्थान

76,779

83,940

90,446

सिक्किम

4,944

5,405

5,113

तमिलनाडु

51,971

56,819

62,531

तेलंगाना

26,782

29,280

33,181

त्रिपुरा

9,021

9,862

9,783

उत्तर प्रदेश

2,28,565

2,49,885

2,68,911

उत्तराखंड

14,245

15,573

17,415

पश्चिम बंगाल

95,852

1,04,793

1,10,119

कुल

12,74,121

13,92,971

15,26,255

नोट: 2024-25 के वास्तविक आंकड़े और 2025-26 के संशोधित अनुमान पिछले वर्षों में हुए अतिरिक्त या कम हस्तांतरण को समायोजित करने के बाद केंद्रीय बजट में प्रस्तुत किए गए हैं।
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज 2026-27; पीआरएस।

अनुलग्नक 3: 2024-25 के बजटीय अनुमानों और वास्तविक के बीच तुलना

यहां तालिकाओं में 2024-25 के वास्तविक के साथ उस वर्ष के बजटीय अनुमानों के बीच तुलना की गई है।

तालिका 11: प्राप्तियों और व्यय की झलक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

शुद्ध प्राप्तियां (1+2)

2,64,787

2,27,774

-14%

1.  राजस्व प्राप्तियां (क+ख+ग+घ)

2,64,461

2,27,250

-14%

क.  स्वयं कर राजस्व

1,25,525

1,03,310

-18%

ख.  स्वयं गैर कर राजस्व

22,665

23,503

4%

ग.  केंद्रीय करों में हिस्सा

79,587

77,548

-3%

घ.  केंद्र से सहायतानुदान

36,684

22,890

-38%

2.  गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

326

524

61%

3.  उधारियां

2,22,019

2,11,970

-5%

      इनमें केंद्रीय कैपेक्स लोन

7,800

9,139

17%

शुद्ध व्यय (4+5+6)

3,34,795

3,00,194

-10%

4.  राजस्व व्यय

2,90,219

2,69,200

-7%

5.  पूंजीगत परिव्यय

44,216

30,727

-31%

6.  ऋण और अग्रिम

360

267

-26%

7.  ऋण पुनर्भुगतान

1,60,671

1,52,872

-5%

राजस्व घाटा

25,758

41,950

63%

राजस्व घाटा (जीएसडीपी का %)

1.5%

2.5%

 

राजकोषीय घाटा

70,008

72,420

3%

राजकोषीय घाटा (जीएसडीपी का %)

3.9%

4.3%

 

जीएसडीपी

17,81,078

17,01,190

-4%

स्रोत: राजस्थान के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 12: राज्य के स्वयं कर राजस्व के घटक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

राज्य जीएसटी

55,800

42,518

-24%

सेल्स टैक्स/वैट

29,000

23,369

-19%

राज्य उत्पाद शुल्क

17,100

15,104

-12%

वाहन कर

8,100

7,574

-6%

बिजली पर टैक्स और ड्यूटी

3,500

3,280

-6%

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क

11,000

10,542

-4%

भूराजस्व

721

869

21%

स्रोत: राजस्थान के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 13: मुख्य क्षेत्रों के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

शहरी विकास

16,918

9,863

-42%

ग्रामीण विकास

20,494

15,167

-26%

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां

14,544

11,586

-20%

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

65,073

54,844

-16%

सामाजिक कल्याण एवं पोषण

24,060

21,452

-11%

पुलिस

10,203

9,168

-10%

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

27,660

25,678

-7%

जलापूर्ति एवं स्वच्छता

11,270

10,530

-7%

ऊर्जा

30,729

32,744

7%

परिवहन

13,436

13,538

1%

   इनमें से सड़कें और पुल

12,238

12,842

5%

स्रोत: राजस्थान के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।


[1] 31 राज्यों में दिल्ली, जम्मू एवं कश्मीर और पुद्दूचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।