हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 21 मार्च, 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट प्रस्तुत किया।

बजट के मुख्य अंश

  • हिमाचल प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2026-27 के लिए (वर्तमान कीमतों पर) 2,77,497 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9% की वृद्धि दर्शाता है।

  • 2026-27 में व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 50,088 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 23% कम है। इसके अतिरिक्त, राज्य द्वारा 4,840 करोड़ रुपए का ऋण चुकाया जाएगा। 2025-26 में व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) बजट से 23% अधिक रहने का अनुमान है।

  • 2026-27 के लिए प्राप्तियां (ऋण को छोड़कर) 40,389 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 16% कम है। 2025-26 में, प्राप्तियां (ऋण को छोड़कर) बजट अनुमान से 13% अधिक रहने का अनुमान है।

  • 2026-27 में राजस्व घाटा जीएसडीपी का 2.4% (6,577 करोड़ रुपए) रहने का अनुमान है। 2025-26 में, राजस्व घाटा जीएसडीपी का 3.9% रहने का अनुमान है, जो बजट अनुमान (जीएसडीपी का 2.5%) से अधिक है।

  • 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3.5% (9,698 करोड़ रुपए) पर लक्षित है। 2025-26 में, संशोधित अनुमानों के अनुसार, राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 6.6% रहने की उम्मीद है, जो बजट अनुमान (जीएसडीपी का 4%) से अधिक है।

नीतिगत विशिष्टताएं

  • वित्तीय उपाय: राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन को छह महीने के लिए स्थगित किया जाएगा।

  • सामाजिक कल्याण: एक लाख गरीब परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना शुरू की जाएगी। इन परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और बेघर परिवारों के लिए आवास सहायता प्रदान की जाएगी। इन परिवारों की महिलाएं इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत प्रति माह 1,500 रुपए प्राप्त करने की पात्र होंगी।

  • कृषि: प्राकृतिक खेती से उगाई जाने वाली फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाया जाएगा। गेहूं का एमएसपी 60 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 80 रुपए, मक्का का 40 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 50 रुपए प्रति किलोग्राम, जौ का 60 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 80 रुपए प्रति किलोग्राम और हल्दी का 90 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 150 रुपए प्रति किलोग्राम किया जाएगा। गाय के दूध का क्रय मूल्य भी 51 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 61 रुपए प्रति लीटर और भैंस के दूध का क्रय मूल्य 61 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 71 रुपए प्रति लीटर किया जाएगा। पशुपालक समुदायों को सहायता प्रदान करने के लिए एक योजना शुरू की जाएगी, जिसमें पशुधन सेवाएं, डिजिटल ट्रैकिंग, बीमा और नस्ल सुधार शामिल होंगे।

  • पर्यावरण: राज्य सरकार ने 2030 तक वन क्षेत्र को 29.5% से बढ़ाकर 32% करने का लक्ष्य रखा है। हरित विकास और सतत आजीविका को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन लाइवलीहुड इनीशिएटिव लागू किया जाएगा जो औषधीय पौधों, जैव विविधता संरक्षण और सामुदायिक वृक्षारोपण के माध्यम से आय बढ़ाने में मदद करेगा।

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था

  • जीएसडीपी: वर्ष 2025-26 में हिमाचल प्रदेश की जीएसडीपी (स्थिर कीमतों पर) में पिछले वर्ष की तुलना में 8.3% की वृद्धि का अनुमान है। तुलनात्मक रूप से भारत की जीडीपी में वर्ष 2025-26 में 7.4% की वृद्धि का अनुमान है।

  • क्षेत्र: 2025-26 में कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों का हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में क्रमशः 14.3%, 39.4% और 46.3% का योगदान होने का अनुमान है (वर्तमान कीमतों पर)।

  • प्रति व्यक्ति आय: वर्ष 2025-26 में हिमाचल प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय (वर्तमान कीमतों पर) 2,83,626 रुपए होने का अनुमान है, जो 2024-25 की तुलना में 10% अधिक है। वर्ष 2025-26 में भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,19,575 रुपए होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7% अधिक है।

रेखाचित्र 1: हिमाचल प्रदेश में स्थिर मूल्यों पर जीएसडीपी की वृद्धि (2011-12)

नोट: ये आंकड़े स्थिर कीमतों (2011-12) के अनुसार हैं, जिसका अर्थ है कि विकास दर को मुद्रास्फीति के लिए समायोजित किया गया है। स्रोत: एमओएसपीआई; हिमाचल प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26; पीआरएस।

2026-27 के लिए बजट अनुमान

  • 2026-27 में कुल व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 50,088 करोड़ रुपए रहने का लक्ष्य है। यह 2025-26 के संशोधित अनुमान से 23% कम है। इस व्यय को 40,389 करोड़ रुपए की प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) और 11,965 करोड़ रुपए के शुद्ध ऋण के माध्यम से पूरा करने का प्रस्ताव है। 2026-27 के लिए कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) में पिछले वर्ष की तुलना में 16% की कमी होने की उम्मीद है।

  • राज्य सरकार ने 2026-27 में जीएसडीपी के 2.4% (6,577 करोड़ रुपए) के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी के 3.9%) से कम है। 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3.5% (9,698 करोड़ रुपए) पर लक्षित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी के 6.6%) से कम है।

  • 2025-26 में कुल व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) बजट से 23% अधिक होने का अनुमान है, जबकि कुल प्राप्तियां (उधार को छोड़कर) बजट से केवल 13% अधिक होने का अनुमान है, जिसके परिणामस्वरूप घाटा बजट से अधिक होगा। राजस्व घाटा बजट अनुमान से 54% अधिक होने का अनुमान है, और राजकोषीय घाटा बजट अनुमान से 62% अधिक होने का अनुमान है।

तालिका 1: बजट 2026-27- मुख्य आंकड़े (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

कुल व्यय

71,837

58,514

96,661

65%

54,928

-43%

(-) ऋण का पुनर्भुगतान

18,169

5,806

32,004

451%

4,840

-85%

शुद्ध व्यय (E)

53,668

52,708

64,657

23%

50,088

-23%

कुल प्राप्तियां

67,680

55,746

89,122

60%

52,355

-41%

(-) उधारियां

26,622

13,375

41,173

208%

11,965

-71%

   इसमें केंद्रीय कैपेक्स लोन

2,381

1,100

2,700

145%

0

-100%

शुद्ध प्राप्तियां (R)

41,057

42,371

47,949

13%

40,389

-16%

राजकोषीय घाटा (E-R)

12,611

10,337

16,708

62%

9,698

-42%

जीएसडीपी का %

5.5%

4.0%

6.6%

-

3.5%

-

राजस्व घाटा

6,805

6,390

9,812

54%

6,577

-33%

जीएसडीपी का %

3.0%

2.5%

3.9%

-

2.4%

-

प्राथमिक घाटा

6,350

3,598

10,014

178%

2,427

-76%

जीएसडीपी का %

2.8%

1.4%

3.9%

-

0.9%

-

जीएसडीपी

2,30,587

2,55,636

2,53,886

-1%

2,77,497

9%

नोट: बअ बजट अनुमान है; संअ संशोधित अनुमान है। *केंद्र सरकार 2020-21 से राज्य सरकारों को पूंजीगत व्यय के लिए 50-वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण प्रदान कर रही है। इन ऋणों को राज्य की उधार सीमा की गणना से बाहर रखा गया है। 2025-26 के संशोधित अनुमानों में तुलनात्मक रूप से अधिक उधारी और पुनर्भुगतान का कारण, आरबीआई से लिए गए अधिक अल्पकालिक अग्रिम और उनका पुनर्भुगतान है।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हिमाचल प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में व्यय

बिजली सबसिडी का लक्षित वितरण

16वें वित्त आयोग ने पाया कि हिमाचल प्रदेश में बिजली सबसिडी 2018-19 में 579 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 1,936 करोड़ रुपए हो गई (वार्षिक वृद्धि 22%)। आयोग ने यह भी पाया कि जिन राज्यों में अधिक से अधिक परिवारों को सबसिडी दी जाती है, वहां सबसिडी कम प्रोग्रेसिव बन जाती है और इसका लाभ असमान रूप से अधिक खपत वाले परिवारों को मिलता है। आयोग के एक अध्ययन के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक खपत वाले परिवारों में से 69.7% को मुफ्त बिजली मिली। उत्तराखंड में यह अनुपात 3.4% था।

स्रोत: 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट; पीआरएस।

  • वर्ष 2026-27 के लिए राजस्व व्यय 46,938 करोड़ रुपए प्रस्तावित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 14% कम है। इसमें वेतन, पेंशन, ब्याज, अनुदान और सबसिडी पर होने वाला व्यय शामिल है।

  • वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत परिव्यय 3,090 करोड़ रुपए प्रस्तावित है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 70% कम है। पूंजीगत परिव्यय परिसंपत्तियों के सृजन पर होने वाले व्यय को दर्शाता है। 2025-26 में पूंजीगत परिव्यय प्रारंभिक बजट अनुमान से 160% अधिक होने का अनुमान है। उदाहरण के लिए, संशोधित अनुमानों के अनुसार ऊर्जा पर पूंजीगत परव्यय 3,013 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि बजट अनुमान 14 करोड़ रुपए था। परिवहन पर पूंजीगत परिव्यय 3,106 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि बजट अनुमान 1,773 करोड़ रुपए था।

तालिका 2: बजट 2026-27 में व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राजस्व व्यय

47,677

48,733

54,349

12%

46,938

-14%

पूंजीगत परिव्यय

5,957

3,941

10,229

160%

3,090

-70%

राज्य द्वारा दिए गए ऋण

34

34

79

130%

60

-24%

शुद्ध व्यय

53,668

52,708

64,657

23%

50,088

-23%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हिमाचल प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

प्रतिबद्ध व्यय: राज्य के प्रतिबद्ध व्यय में आम तौर पर वेतन, पेंशन और ब्याज के भुगतान पर व्यय शामिल होता है। बजट के एक बड़े हिस्से को प्रतिबद्ध व्यय की मदों के लिए आवंटित करने से पूंजीगत परिव्यय जैसी अन्य व्यय प्राथमिकताओं पर फैसला लेने का राज्य का लचीलापन सीमित हो जाता है। 2026-27 में हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रतिबद्ध व्यय पर 35,641 करोड़ रुपए खर्च करने का अनुमान है जो उसकी अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का 88% है। इसमें वेतन (41%), पेंशन (29%), और ब्याज भुगतान (18%) पर खर्च शामिल है। 2024-25 में, वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, राजस्व प्राप्तियों का 80% निर्धारित व्यय मदों पर खर्च किया गया। तुलनात्मक रूप से, राज्यों ने 2025-26 में अपने राजस्व प्राप्तियों का औसतन 50% निर्धारित व्यय मदों पर खर्च करने का बजट बनाया था।

तालिका 3: 2026-27 में प्रतिबद्ध व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

वेतन

15,949

16,635

16,055

-3%

16,603

3%

पेंशन

10,536

11,577

11,415

-1%

11,766

3%

ब्याज भुगतान

6,261

6,739

6,694

-1%

7,272

9%

कुल

32,746

34,952

34,164

-2%

35,641

4%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हिमाचल प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

क्षेत्रवार व्यय: 2026-27 के दौरान राज्य के बजटीय व्यय का 55% हिस्सा निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए खर्च किया जाएगा। अनुलग्नक 1 में प्रमुख क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश के व्यय की तुलना, अन्य राज्यों से की गई है।

तालिका 4: हिमाचल प्रदेश बजट 2026-27 में क्षेत्रवार व्यय (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन

बजटीय प्रावधान
(2026-27 बअ)

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

9,090

9,965

10,033

9,806

-2%

  • समग्र शिक्षा अभियान के लिए 1,296 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

परिवहन

4,933

3,858

5,360

3,297

-38%

  • सड़कों और पुलों के लिए पूंजीगत व्यय के रूप में 1,322 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

3,662

3,332

4,137

3,203

-23%

  • चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए 879 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 485 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां

2,617

2,601

2,702

2,407

-11%

  • पशु चिकित्सा सेवाओं और पशु स्वास्थ्य के लिए 374 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सामाजिक कल्याण एवं पोषण

3,173

3,158

4,975

2,185

-56%

  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत पेंशन पर अनुमानित 645 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
  • एकीकृत बाल देखभाल सेवाओं के लिए 407 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ग्रामीण विकास

1,974

2,106

2,453

2,052

-16%

  • राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए 560 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

पुलिस

1,603

1,643

1,631

1,626

-0.3%

  • जिला पुलिस के लिए 894 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

जलापूर्ति एवं स्वच्छता

1,881

1,721

2,499

1,418

-43%

  • ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रमों पर 888 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण

799

1,023

1,302

1,130

-13%

  • सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए पूंजीगत व्यय के रूप में 748 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

ऊर्जा

2,052

823

5,358

322

-94%

  • शुल्क में कमी के कारण सबसिडी के लिए 300 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

सभी क्षेत्रों पर कुल व्यय का %

59%

57%

63%

55%

 

 

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हिमाचल प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 में प्राप्तियां

  • 2026-27 के लिए कुल राजस्व प्राप्ति 40,361 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 9% कम है। इसमें से 19,238 करोड़ रुपए (48%) राज्य अपने संसाधनों से जुटाएगा, और 21,123 करोड़ रुपए (52%) केंद्र से प्राप्त होंगे। केंद्र से प्राप्त संसाधन केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से (राजस्व प्राप्ति का 35%) और अनुदानों (राजस्व प्राप्ति का 18%) के रूप में होंगे।

  • हस्तांतरण: 2026-27 में, केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा 13,950 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 21% अधिक है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि 16वें वित्त आयोग के सुझावों के अनुसार, केंद्रीय करों में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ गई है (अधिक जानकारी के लिए अनुलग्नक 2 देखें)।

  • 2026-27 में 7,173 करोड़ रुपए के केंद्रीय अनुदान का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 48% कम है। यह कमी निम्न कारणों से हुई है: (i) राजस्व घाटे के अनुदानों को बंद करना, जिसका अनुमान 2025-26 में 3,257 करोड़ रुपए है (अधिक जानकारी के लिए इस डॉक्यूमेंट का अगला हिस्सा देखें), और (ii) केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए अनुदान में 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 1,967 करोड़ रुपए की कमी का अनुमान है।

  • राज्य का स्वयं कर राजस्व: हिमाचल प्रदेश का कुल स्वयं कर राजस्व 2026-27 में 15,290 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 10% अधिक है। जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में स्वयं कर राजस्व 2026-27 में 5.5% रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (5.5%) के समान है। 2024-25 के वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में स्वयं कर राजस्व 5.5% था।

  • गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां: 2025-26 में गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां बजट से काफी अधिक रहने का अनुमान है। यह 3,385 करोड़ रुपए की बिजली परियोजनाओं से लिए गए ऋणों और एडवांस की वसूली के कारण है।

तालिका 5: राज्य सरकार की प्राप्तियों का ब्रेकअप (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राज्य के स्वयं कर

12,772

16,101

13,948

-13%

15,290

10%

राज्य के स्वयं गैर कर

3,698

4,193

5,282

26%

3,948

-25%

केंद्रीय करों में हिस्सेदारी

10,681

11,806

11,562

-2%

13,950

21%

केंद्र से सहायतानुदान

13,722

10,243

13,746

34%

7,173

-48%

राजस्व प्राप्तियां

40,872

42,343

44,537

5%

40,361

-9%

गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

185

28

3,412

12086%

28

-99%

शुद्ध प्राप्तियां

41,057

42,371

47,949

13.2%

40,389

-16%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हिमाचल प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

राजस्व में बकाया

राजस्व बकाया तब होता है जब सरकार समय पर बकाया राशि वसूल नहीं पाती जिससे उपलब्ध आय कम हो जाती है और राजस्व घाटा प्रभावित होता है। 31 मार्च 2024 तक, कुल राजस्व बकाया 6,289 करोड़ रुपए था, जिसमें से 3,126 करोड़ रुपए (50%) पांच वर्षों से अधिक समय से लंबित थे। इन बकाया राशि का एक बड़ा हिस्सा बिक्री, व्यापार और वैट पर करों में केंद्रित था, जो कुल बकाया राशि का 4,338 करोड़ रुपए (69%) था। 2023-24 के अंत तक कर जांच के 60% मामले लंबित रहे, जिससे राजस्व वसूली में देरी हुई।

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 1 वर्ष 2025, राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट 2023-24, कैग; पीआरएस।

  • 2026-27 में राज्य जीएसटी के स्वयं कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत (43% हिस्सा) होने का अनुमान है। एसजीएसटी राजस्व में 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 10% की वृद्धि होने का अनुमान है।

  • 2026-27 में, राज्य उत्पाद शुल्क और सेल्स टैक्स/वैट से राजस्व में पिछले वर्ष की तुलना में 10% की वृद्धि होने की उम्मीद है।

  • 2025-26 में भूराजस्व में बजट लक्ष्य की तुलना में 98% की कमी होने का अनुमान है। जीएसटी और उत्पाद शुल्क राजस्व 2025-26 में बजट से 11% कम रहने का अनुमान है।

 तालिका 6: राज्य के स्वयं कर राजस्व के मुख्य स्रोत (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 वास्तविक

2025-26 बजटीय

2025-26 संशोधित

बअ 25-26 से संअ 25-26 में परिवर्तन का %

2026-27 बजटीय

संअ 25-26 से बअ 26-27 में परिवर्तन का %

राज्य जीएसटी

5,817

6,761

6,049

-11%

6,655

10%

राज्य उत्पाद शुल्क

2,698

3,250

2,892

-11%

3,174

10%

सेल्स टैक्स/वैट

1,842

2,212

2,074

-6%

2,282

10%

वाहन कर

907

978

981

0%

1,069

9%

बिजली पर टैक्स और शुल्क

495

688

812

18%

852

5%

स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क

491

638

564

-12%

650

15%

भूराजस्व

16

1,019

17

-98%

12

-28%

स्रोत: वार्षिक वित्तीय विवरण, हिमाचल प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

2026-27 के लिए घाटे और ऋण

हिमाचल प्रदेश के राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन एक्ट, 2005 में राज्य सरकार की बकाया देनदारियों, राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे को लगातार कम करने के लक्ष्यों का प्रावधान है।

राजस्व संतुलन: यह सरकार की राजस्व प्राप्तियों और राजस्व व्यय के बीच का अंतर होता है। राजस्व घाटे का यह अर्थ होता है कि सरकार को अपना व्यय पूरा करने के लिए उधार लेने की जरूरत है जोकि भविष्य में पूंजीगत परिसंपत्तियों का सृजन नहीं करेगा और न ही देनदारियों को कम करेगा। बजट में 2026-27 में 6,577 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया गया है (जो जीएसडीपी का 2.4% है)। हिमाचल प्रदेश में 2022-23 से सभी वर्षों में राजस्व घाटा देखा गया है।

राजकोषीय घाटा: यह कुल व्यय और कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है। इस अंतर को सरकार द्वारा उधार लेकर पूरा किया जाता है जिससे कुल देनदारियों में वृद्धि होती है। 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 3.5% (9,698 करोड़ रुपए) रहने का अनुमान है। 16वें वित्त आयोग ने राज्यों के लिए 2026-31 की अवधि के लिए वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा जीएसडीपी का 3% निर्धारित करने का सुझाव दिया है। ऋण सीमा निर्धारित करते समय केंद्र सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय के लिए दिए गए 50 साल के ब्याज मुक्त ऋणों को शामिल नहीं किया जाएगा। 2026-27 में राज्य सरकारों ने केंद्रीय पूंजीगत व्यय ऋणों से किसी भी प्रकार की प्राप्ति का अनुमान नहीं लगाया है। केंद्रीय बजट के अनुसार, केंद्र सरकार 2026-27 में भी ये ऋण देना जारी रखेगी।

राजस्व घाटा अनुदान

15वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश के लिए पांच वर्षों में 37,199 करोड़ रुपए के राजस्व घाटा अनुदान का सुझाव दिया था। इन अनुदानों का उद्देश्य राज्य को राजस्व घाटा दूर करने में सहायता करना है। इन अनुदानों को ध्यान में रखने के बावजूद हिमाचल प्रदेश में 2022-23 और 2025-26 के बीच राजस्व घाटा बना रहा। 16वें वित्त आयोग ने अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी राज्य को राजस्व घाटा अनुदान का सुझाव नहीं दिया। आयोग का मानना ​है कि ये अनुदान प्रतिकूल प्रोत्साहन प्रदान करते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि ऐसे अनुदानों की अपेक्षा राज्यों को राजस्व घाटे के मूल कारणों को दूर करने के बजाय फिजूलखर्ची करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

तालिका 7: केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटे के लिए दी गई अनुदान राशि (करोड़ रुपए में)

वर्ष

राशि

जीएसडीपी का %

2021-22

10,249

6.0%

2022-23

9,377

4.9%

2023-24

8,058

3.8%

2024-25

6,258

2.7%

2025-26

3,257

1.3%

स्रोत: 15वें और 16वें वित्त आयोगों की रिपोर्ट; पीआरएस।

संशोधित अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 6.6% रहने का अनुमान है। यह बजट अनुमान (जीएसडीपी का 4%) से काफी अधिक है। संशोधित अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में केंद्रीय पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) ऋण 2,700 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 1.1%) रहने का अनुमान है। ये ऋण प्रारंभिक बजट अनुमान (1,100 करोड़ रुपए, जो जीएसडीपी का 0.4% है) से अधिक रहने का अनुमान है।

बकाया देनदारिया: बकाया देनदारियां किसी वित्तीय वर्ष के अंत में कुल उधारी का संचय होता है। इसमें भविष्य निधि जैसे सार्वजनिक खातों पर बकाया देनदारियां भी शामिल हैं। 2026-27 के अंत में बकाया देनदारियां जीएसडीपी का 40.5% होने का अनुमान है जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (जीएसडीपी का 41%) से कम है।

रेखाचित्र 2: राजस्व एवं राजकोषीय संतुलन (जीएसडीपी का %)

 

नोट: *2027-28 के बाद के आंकड़े अनुमानित हैं। RE संशोधित अनुमान है; BE बजट अनुमान है। (+) अधिशेष को दर्शाता है और (-) घाटे को दर्शाता है।
स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, हिमाचल प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; रिपोर्ट संख्या 1/2025, राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट 2023-24, कैग;
पीआरएस। 

रेखाचित्र 3: बकाया देनदारियां (जीएसडीपी का %)

नोट: *2027-28 के बाद के आंकड़े अनुमानित हैं। RE संशोधित अनुमान है, BE बजट अनुमान है।  इसमें रिज़र्व फंड और डिपॉडिट जैसी कुछ अन्य देनदारियां शामिल नहीं हैं।
स्रोत: मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति, हिमाचल प्रदेश बजट दस्तावेज़ 2026-27; रिपोर्ट संख्या 1/2025, राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट 2023-24, कैग; पीआरएस।

बकाया सरकारी गारंटी: राज्यों की बकाया देनदारियों में कुछ अन्य आकस्मिक देनदारियां शामिल नहीं होती हैं जिनका भुगतान राज्यों को कुछ मामलों में करना पड़ सकता है। राज्य सरकारें वित्तीय संस्थानों से राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (एसपीएसई) के ऋणों की गारंटी देती हैं। मार्च 2025 तक राज्य की बकाया गारंटी लगभग 3,100  करोड़ रुपए (2025-26 जीएसडीपी का 1.34%) होने का अनुमान है।

 

अनुलग्नक 1: मुख्य क्षेत्रों में राज्य के व्यय की तुलना

निम्नलिखित रेखाचित्रों में हिमाचल प्रदेश द्वारा 2026-27 में छह प्रमुख क्षेत्रों पर किए गए व्यय की तुलना सभी क्षेत्रों पर किए गए कुल व्यय के अनुपात से की गई है। क्षेत्र के लिए औसत, उस क्षेत्र में 31 राज्यों (हिमाचल प्रदेश सहित) द्वारा किए जाने वाले औसत व्यय (2025-26 के बजटीय अनुमानों के आधार पर) को इंगित करता है।[1]

  • शिक्षा: हिमाचल प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 19.6% शिक्षा के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा शिक्षा के लिए आवंटित औसत राशि (14.5%) से अधिक है।

  • स्वास्थ्य: हिमाचल प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 6.4% स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा स्वास्थ्य के लिए आवंटित औसत राशि (6.2%) से थोड़ा अधिक है।

  • ग्रामीण विकास: हिमाचल प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 4.1% ग्रामीण विकास के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा ग्रामीण विकास के लिए आवंटित औसत राशि (4.9%) से कम है।

  • कृषि: हिमाचल प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 4.8% कृषि के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा कृषि के लिए आवंटित औसत राशि (5.7%) से कम है।

  • सड़कें और पुल: हिमाचल प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 5.2% सड़कों और पुलों के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा सड़कों और पुलों के लिए आवंटित औसत राशि (4.3%) से अधिक है।

  • पुलिस: हिमाचल प्रदेश ने 2026-27 में अपने व्यय का 3.3% पुलिस के लिए आवंटित किया है। यह 2025-26 में राज्यों द्वारा पुलिस के लिए आवंटित औसत राशि (4%) से कम है।

नोट: 2024-25, 2025-26 (बअ), 2025-26 (संअ), और 2026-27 (बअ) के आंकड़े हिमाचल प्रदेश के हैं।
स्रोत: वार्षिक वित्तीय वक्तव्य, हिमाचल प्रदेश बजट दस्तावेज 2026-27; विभिन्न राज्य बजट; पीआरएस।

अनुलग्नक 2: 2026-31 के लिए 16वें वित्त आयोग के सुझाव

16वें वित्त आयोग (चेयर: डॉ. अरविंद पनगढ़िया) की रिपोर्ट 1 फरवरी, 2026 को संसद में पेश की गई। उसके सुझाव 2026-27 से 2030-31 तक की पांच-वर्षीय अवधि के लिए लागू होंगे। 16वें आयोग ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों के हिस्से को 41% निर्धारित करने का सुझाव दिया है। यह हिस्सा 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-26) के समान ही अपरिवर्तित बना हुआ है। विभाज्य पूल की गणना केंद्रीय सरकार द्वारा जुटाए गए कुल कर राजस्व में से कर वसूलने की लागत, उपकर और अधिभारों को घटाने के बाद की जाती है। 16वें वित्त आयोग ने राज्यों के हिस्से के निर्धारण के लिए संशोधित मानदंड प्रस्तावित किए हैं। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का संक्षिप्त सारांश यहां देखें। 16वें वित्त आयोग के सुझावों के आधार पर, हिमाचल प्रदेश को 2026-31 की अवधि के लिए केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में 0.91% हिस्सा मिलेगा।

16वें वित्त आयोग ने पांच वर्षों की अवधि में 9.47 लाख करोड़ रुपए के अनुदानों का सुझाव दिया है। इनमें निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए अनुदान शामिल हैं: (i) शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकाय, और (ii) आपदा प्रबंधन। 16वें वित्त आयोग ने 15वें वित्त आयोग द्वारा सुझाए गए निम्नलिखित अनुदानों को बंद कर दिया है: (i) राजस्व घाटा अनुदान, (ii) शिक्षा, न्याय, सांख्यिकी और कृषि के लिए क्षेत्र-विशिष्ट अनुदान, और (iii) राज्य-विशिष्ट अनुदान। 2026-31 की अवधि के लिए हिमाचल प्रदेश के लिए प्रस्तावित अनुदानों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) शहरी स्थानीय निकायों के लिए 435 करोड़ रुपए, (ii) ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 3,744 करोड़ रुपए, और (iii) आपदा प्रबंधन अनुदान के रूप में 2,682 करोड़ रुपए। राज्यों को एक लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले आस-पास के बड़े शहरी स्थानीय निकाय में अर्ध-शहरी गांवों के विलय के लिए एकमुश्त अनुदान भी प्राप्त होगा।

तालिका 8: केंद्र द्वारा हस्तांतरित करों में प्रत्येक राज्य का हिस्सा (100 में से)

राज्य

14वां विआ (2015-2020)

15वां विआ (2021-26)

16वां विआ (2026-31)

आंध्र प्रदेश

4.31

4.05

4.22

अरुणाचल प्रदेश

1.37

1.76

1.35

असम

3.31

3.13

3.26

बिहार

9.67

10.06

9.95

छत्तीसगढ़

3.08

3.41

3.30

गोवा

0.38

0.39

0.37

गुजरात

3.08

3.48

3.76

हरियाणा

1.08

1.09

1.36

हिमाचल प्रदेश

0.71

0.83

0.91

जम्मू एवं कश्मीर

1.85

-

-

झारखंड

3.14

3.31

3.36

कर्नाटक

4.71

3.65

4.13

केरल

2.50

1.93

2.38

मध्य प्रदेश

7.55

7.85

7.35

महाराष्ट्र

5.52

6.32

6.44

मणिपुर

0.62

0.72

0.63

मेघालय

0.64

0.77

0.63

मिजोरम

0.46

0.50

0.56

नागालैंड

0.50

0.57

0.48

ओड़िशा

4.64

4.53

4.42

पंजाब

1.58

1.81

2.00

राजस्थान

5.50

6.03

5.93

सिक्किम

0.37

0.39

0.34

तमिलनाडु

4.02

4.08

4.10

तेलंगाना

2.44

2.10

2.17

त्रिपुरा

0.64

0.71

0.64

उत्तर प्रदेश

17.96

17.94

17.62

उत्तराखंड

1.05

1.12

1.14

पश्चिम बंगाल

7.32

7.52

7.22

 

तालिका 9: वर्ष 2026-31 के लिए राज्यवार अनुदान सहायता का विवरण (करोड़ रुपए में)

राज्य

ग्रामीण स्थानीय निकाय

शहरी स्थानीय निकाय

आपदा प्रबंधन

आंध्र प्रदेश

16,627

12,158

6,125

अरुणाचल प्रदेश

1,698

233

616

असम

14,580

3,249

5,243

बिहार

51,923

9,169

13,615

छत्तीसगढ़

11,664

4,990

2,481

गोवा

174

726

112

गुजरात

18,802

23,764

8,459

हरियाणा

8,270

7,834

2,922

हिमाचल प्रदेश

3,744

435

2,682

झारखंड

14,231

6,093

2,806

कर्नाटक

18,889

18,483

6,419

केरल

3,308

16,683

1,935

मध्य प्रदेश

32,033

16,016

11,697

महाराष्ट्र

32,817

46,803

29,619

मणिपुर

1,262

609

259

मेघालय

1,479

377

437

मिजोरम

567

377

284

नागालैंड

697

667

408

ओड़िशा

18,715

5,078

8,900

पंजाब

8,486

7,834

2,477

राजस्थान

31,467

12,680

9,211

सिक्किम

218

203

455

तमिलनाडु

16,930

25,069

8,486

तेलंगाना

9,968

11,548

2,774

त्रिपुरा

1,176

1,016

356

उत्तर प्रदेश

83,261

33,543

15,321

उत्तराखंड

4,047

2,497

4,954

पश्चिम बंगाल

28,203

22,023

6,869

 

स्रोत: 14वें, 15वें और 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट्स; पीआरएस।

तालिका 10: केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार राज्यों को हस्तांतरित कर (करोड़ रुपए में)

राज्य

2024-25 वास्तविक

2025-26 संशोधित

2026-27 बजटीय

आंध्र प्रदेश

51,564

56,374

64,362

अरुणाचल प्रदेश

22,386

24,475

20,665

असम

39,855

43,572

49,725

बिहार

1,28,151

1,40,105

1,51,832

छत्तीसगढ़

43,409

47,459

50,427

गोवा

4,918

5,377

5,571

गुजरात

44,314

48,448

57,311

हरियाणा

13,926

15,225

20,772

हिमाचल प्रदेश

10,575

11,562

13,950

झारखंड

42,135

46,066

51,236

कर्नाटक

46,467

50,802

63,050

केरल

24,527

26,815

36,355

मध्य प्रदेश

1,00,019

1,09,348

1,12,134

महाराष्ट्र

80,486

87,994

98,306

मणिपुर

9,123

9,974

9,554

मेघालय

9,773

10,684

9,631

मिजोरम

6,371

6,965

8,608

नागालैंड

7,250

7,926

7,341

ओड़िशा

57,692

63,074

67,460

पंजाब

23,023

25,171

30,464

राजस्थान

76,779

83,940

90,446

सिक्किम

4,944

5,405

5,113

तमिलनाडु

51,971

56,819

62,531

तेलंगाना

26,782

29,280

33,181

त्रिपुरा

9,021

9,862

9,783

उत्तर प्रदेश

2,28,565

2,49,885

2,68,911

उत्तराखंड

14,245

15,573

17,415

पश्चिम बंगाल

95,852

1,04,793

1,10,119

कुल

12,74,121

13,92,971

15,26,255

नोट: 2024-25 के वास्तविक आंकड़े और 2025-26 के संशोधित अनुमान पिछले वर्षों में हुए अतिरिक्त या कम हस्तांतरण को समायोजित करने के बाद केंद्रीय बजट में प्रस्तुत किए गए हैं।
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज 2026-27; पीआरएस।

अनुलग्नक 3: 2024-25 के बजटीय अनुमानों और वास्तविक के बीच तुलना

यहां तालिकाओं में 2024-25 के वास्तविक के साथ उस वर्ष के बजटीय अनुमानों के बीच तुलना की गई है।

तालिका 11: प्राप्तियों और व्यय की झलक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

शुद्ध प्राप्तियां (1+2)

42,181

41,057

-3%

1.  राजस्व प्राप्तियां (क+ख+ग+घ)

42,153

40,872

-3%

क.  स्वयं कर राजस्व

15,101.00

12,772

-15%

ख.  स्वयं गैर कर राजस्व

3641

3,698

2%

ग.  केंद्रीय करों में हिस्सा

10,124.00

10,681

6%

घ.  केंद्र से सहायतानुदान

13,287

13,722

3%

2.  गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां

28

185

561%

3.  उधारियां

12909

26,622

106%

शुद्ध व्यय (4+5+6)

52,965

53,668

1%

4.  राजस्व व्यय

46,667

47,677

2%

5.  पूंजीगत परिव्यय

6,270

5,957

-5%

6.  ऋण और अग्रिम

28

34

22%

7.  ऋण पुनर्भुगतान

5479

18,169

232%

राजस्व घाटा

4,514

6,805

51%

राजस्व घाटा (जीएसडीपी का %)

1.99%

2.95%

-

राजकोषीय घाटा

10,784

12,611

17%

राजकोषीय घाटा (जीएसडीपी का %)

4.75%

5.47%

-

स्रोत: हिमाचल प्रदेश के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 12: राज्य के स्वयं कर राजस्व के घटक (करोड़ रुपए में)

मद

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क

626

491

-22%

भूराजस्व

18

16

-13%

राज्य जीएसटी

6,552

5,817

-11%

सेल्स टैक्स/वैट

2,080

1,842

-11%

बिजली पर टैक्स और ड्यूटी

551

495

-10%

राज्य उत्पाद शुल्क

2,884

2,698

-6%

वाहन कर

902

907

1%

स्रोत: हिमाचल प्रदेश के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।

तालिका 13: मुख्य क्षेत्रों के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

क्षेत्र

2024-25 बअ

2024-25 वास्तविक

बअ से वास्तविक में परिवर्तन का %

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण

1,382

799

-42%

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण

100

66

-34%

ग्रामीण विकास

2,145

1,974

-8%

शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति

9,812

9,090

-7%

परिवहन

5,289

4,933

-7%

इसमें सड़कें और पुल

3,944

3,336

-15%

पुलिस

1,701

1,603

-6%

जलापूर्ति एवं स्वच्छता

1,998

1,881

-6%

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां

2,755

2,617

-5%

सामाजिक कल्याण एवं पोषण

3,051

3,173

4%

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

3,390

3,662

8%

शहरी विकास

645

760

18%

आवास

294

764

160%

ऊर्जा

566

2,052

263%

स्रोत: हिमाचल प्रदेश के विभिन्न वर्षों के बजट दस्तावेज; पीआरएस।


[1] 31 राज्यों में दिल्ली, जम्मू एवं कश्मीर और पुद्दूचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

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