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पीएम कौशल विकास योजना के तहत कौशल विकास

कैग की रिपोर्ट का सारांश

पीएम कौशल विकास योजना के तहत कौशल विकास

 

  • नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने 18 दिसंबर, 2025 को ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत कौशल विकास’ पर एक रिपोर्ट पेश की। पीएमकेवीवाई योजना जुलाई 2015 में युवाओं को उद्योग-संबंधी कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। कैग रिपोर्ट में 2015 से 2022 के बीच शुरू की गई योजना के तीन चरणों को शामिल किया गया है। इन चरणों का संयुक्त लक्ष्य लगभग 1.32 करोड़ उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करना था। इस योजना का कार्यान्वयन कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है। कैग के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
  • पीएमकेवीवाई के तहत रोजगार: योजना के अल्पकालिक प्रशिक्षण और विशेष परियोजना घटकों (एसटीटी/एसपी प्रशिक्षण) के तहत प्रमाणित 56 लाख उम्मीदवारों में से 41% (23 लाख) को रोजगार मिला। विशेष परियोजना घटक भौगोलिक स्थिति, जनसांख्यिकी और सामाजिक समूहों के संदर्भ में विशेष आवश्यकताओं के आधार पर प्रशिक्षण प्रदान करता है। कैग ने कहा कि पीएमकेवीवाई के तहत पहले तीन चरणों के दौरान दिए गए प्रशिक्षण राष्ट्रीय नीति के तहत संबंधित क्षेत्रों में कौशल अंतर की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थे। कैग ने गौर किया कि जहां राष्ट्रीय नीति आवश्यक कुशल कार्यबल का अनुमान तो प्रदान करती है, वहीं यह सूक्ष्म स्तर के कौशल अंतराल की जानकारी नहीं देती, जैसे कि वे विशेष जॉब रोल जिनमें इन कुशलताओं की जरूरत है। कौशल अंतराल का विश्लेषण और बाजार की मांग का मूल्यांकन किए बिना जॉब रोल्स को चुनना, ही पीएमकेवीवाई के तहत कम प्लेसमेंट का मुख्य कारण था। कैग ने सुझाव दिया कि प्रशिक्षण को विशेष जॉब रोल्स और मांग के आधार पर चिन्हित कौशल अंतरालों के अनुरूप बनाया जाए।
  • कौशल विकास योजनाओं की तैयारी: कैग ने गौर किया कि योजना के तीसरे चरण में राष्ट्रीय कौशल विकास योजना तैयार करने की परिकल्पना की गई थी। यह योजना राज्य और जिला स्तरीय योजनाओं को मिलाकर तैयार की जानी थी। कैग ने पाया कि राष्ट्रीय योजना तैयार नहीं की गई थी। चयनित आठ राज्यों में से केवल दो राज्यों ने राज्य स्तरीय योजनाएं तैयार की थीं। मंत्रालय ने कहा कि तीसरे चरण की कम अवधि और कोविड-19 महामारी के कारण राष्ट्रीय योजना तैयार नहीं हो सकी। कैग ने यह भी पाया कि 2024-25 के लिए 27 राज्य स्तरीय योजनाएं और 519 जिला स्तरीय योजनाएं प्राप्त हुई थीं। कैग ने राष्ट्रीय योजना की तैयारी में तेजी लाने और दिशानिर्देश एवं निरंतरता प्रदान करने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक योजना अपनाने का सुझाव दिया।
  • उम्मीदवारों का नामांकन: कैग ने गौर किया कि योजना के दिशानिर्देशों के तहत आयु, शिक्षा और कार्य अनुभव संबंधी मानदंडों की अनदेखी करते हुए उम्मीदवारों का नामांकन किया गया था। उसने स्कूल या कॉलेज छोड़ने वाले और बेरोजगार युवाओं जैसे लक्षित लाभार्थियों को शामिल करने और उनकी सत्यापन प्रक्रिया के अभाव को भी उजागर किया। इस समस्या के समाधान के लिए कैग ने शिक्षा मंत्रालय के यूडीआईएसई डेटाबेस के साथ एकीकरण में तेजी लाने का सुझाव दिया।
  • अनुपयोगी धनराशि और प्रोत्साहन राशि का भुगतान न होना: 2016-24 की अवधि के लिए राज्यों को आवंटित की गई धनराशि का लगभग 20% हिस्सा मार्च 2024 तक बिना उपयोग के पड़ा रहा। कैग ने गौर किया कि योजना के पहले चरण के लिए मंत्रालय एनएसडीसी के पास उपलब्ध धनराशि और आवश्यक फंड्स का उचित अनुमान नहीं लगा सका। मंत्रालय ने पिछली योजनाओं की अनुपयोगी धनराशि का समय पर हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप फंड्स निष्क्रिय पड़े रहे और उपयोग नहीं किए गए। योजना के पहले तीन चरणों में प्रत्येक उम्मीदवार को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से 500 रुपए का भुगतान करने का प्रावधान था। बैंक खातों के बारे में अपर्याप्त जानकारी के कारण लगभग 36% उम्मीदवारों को अभी तक यह भुगतान नहीं मिला है।
  • कार्यान्वयन और निगरानी: कैग ने कार्यान्वयन और निगरानी प्रक्रिया में अनियमितताएं पाईं। कैग ने गौर किया कि 2018 से एसटीटी/एसपी प्रशिक्षणों के तहत केवल 13% बैच ही प्रशिक्षुओं के लिए अनिवार्य आधार-आधारित उपस्थिति प्रणाली के नियम का पालन कर रहे थे। कैग द्वारा सर्वेक्षण किए गए 86 प्रशिक्षण केंद्रों में से 24 में आधार-आधारित उपस्थिति के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं था। कैग ने योजना के आरपीएल-बीआईसीई घटक में भी कुछ अनियमितताओं को उजागर किया। इस घटक के तहत बड़े नियोक्ताओं का चयन करने और उनके गैर-प्रमाणित कर्मचारियों को प्रमाणित करने का प्रावधान था। कमिटी ने पाया कि प्रशिक्षण और निगरानी के समर्थन में कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ अविश्वसनीय थे। उदाहरण के लिए अलग-अलग प्रशिक्षणों के प्रमाण के रूप में एक ही फोटो का उपयोग किया गया था। जांच में फोटो के साथ छेड़छाड़ के मामले भी मिले। यह भी पाया गया कि एक ही निरीक्षक द्वारा एक ही दिन में विभिन्न राज्यों की कई जगहों का भौतिक दौरा करने की जानकारी दी गई थी। मौके पर किए गए भौतिक निरीक्षण के 84% मामलों में जियोटैगिंग उपलब्ध नहीं थी।
  • विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय: कैग ने पाया कि पीएमकेवीवाई के तीन चरण पूरे होने के बाद भी केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों में प्रभावी तालमेल नहीं बन पाया। कैग ने सुझाव दिया कि मंत्रालय को केंद्र और राज्य सरकारों की सभी कौशल प्रशिक्षण पहलों का मानचित्रण सुनिश्चित करना चाहिए। कैग ने उनके तालमेल और डेटा एकीकरण के लिए एक रोडमैप तैयार करने का भी सुझाव दिया।

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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