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पीडीएफ

अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों का विस्तार एक्ट, 1996 की समीक्षा

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री सप्तगिरि शंकर उलाका) ने 31 जुलाई, 2026 को ‘अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों का विस्तार एक्ट, 1996 की समीक्षा’ पर अपनी रिपोर्ट पेश की। यह कानून अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को कुछ बदलावों के साथ लागू करता है। अनुसूचित क्षेत्र ऐसे इलाके होते हैं जिन्हें राष्ट्रपति ने संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अधिसूचित किया है; यह अधिसूचना जनजातीय आबादी की प्रधानता और क्षेत्र के पिछड़ेपन जैसे कारकों के आधार पर की जाती है। वर्तमान में 10 राज्यों में अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र हैं। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • ग्राम सभा को मजबूत करना: कमिटी ने गौर किया कि अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों का विस्तार एक्ट (पेसा) के तहत ग्राम सभा एक बुनियादी संस्था है, जिसके पास कई मामलों में व्यापक अधिकार हैं, जैसे: (i) सामुदायिक संसाधन, (ii) पारंपरिक तरीके से विवाद समाधान, (iii) लघु वन उपज, (iv) भूमि अधिग्रहण, और (v) ग्राम विकास योजना। कमिटी ने गौर किया कि जागरूकता की कमी और कमजोर संस्थागत सहयोग के कारण इनमें से कई शक्तियों को पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है। कमिटी ने यह भी कहा कि अंग्रेज़ी-आधारित प्रशासनिक प्रणालियों पर बहुत अधिक निर्भरता जनजातीय समुदायों के बीच इसकी पहुंच को कमजोर करती है। उसने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) ग्राम सभा के सदस्यों के लिए अनिवार्य ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, (ii) स्थानीय जनजातीय भाषाओं में जागरूकता अभियान चलाए जाएं, (iii) भूमि और अन्य संसाधनों पर ग्राम सभा के प्रस्तावों को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाए और एक समर्पित राष्ट्रीय पेसा प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए इन प्रस्तावों की निगरानी की जाए, (iv) सभी प्रशिक्षण मॉड्यूल का प्रमुख जनजातीय भाषाओं में अनुवाद किया जाए, और (v) सामुदायिक रेडियो, जनजातीय भाषा के मीडिया और स्थानीय सांस्कृतिक मंचों के ज़रिए देश भर में जागरूकता अभियान चलाए जाएं।

  • ग्राम केंद्रित योजना: कमिटी ने गौर किया कि पंचायती राज मंत्रालय ने पेसा क्षेत्रों में ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (जीपीडीपी) शुरू की हैं। 2025-26 में पेसा राज्यों की 96% ग्राम पंचायतों ने ग्राम स्तर पर ऐसी योजनाएं तैयार कीं। ग्राम केंद्रित योजना को और मजबूत करने के लिए, कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) जीपीडीपी की तैयारी अनिवार्य रूप से ग्राम सभा के स्तर से शुरू होनी चाहिए, और (ii) इन योजनाओं में जनजातीय लोगों की आजीविका का संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पारंपरिक रीति-रिवाज और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को शामिल किया जाना चाहिए। उसने पेसा की प्राथमिकताओं को सतत विकास लक्ष्यों और जनजातीय विकास योजनाओं के साथ जोड़ने का भी सुझाव दिया।

  • गैरकानूनी भूमि हस्तांतरण: कमिटी ने गौर किया कि जनजातीय समुदायों को धोखाधड़ी या अप्रत्यक्ष भूमि हस्तांतरण की समस्या का सामना करना पड़ता है। उसने जनजातीय भूमि के अधिग्रहण के लिए जनजातीय पहचान के दुरुपयोग पर भी गौर किया। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) अवैध जनजातीय भूमि हस्तांतरण और मौजूदा सुरक्षात्मक कानूनों का खामियों पर एक विस्तृत अध्ययन किया जाए, (ii) सभी पेसा राज्यों में निगरानी प्रणालियों को मजबूत किया जाए, (iii) भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जाए, और (iv) जनजातीय भूमि के लेनदेन के लिए ग्राम सभा का सत्यापन अनिवार्य किया जाए।

  • भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति: कमिटी ने गौर किया कि कानून के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से पहले ग्राम सभा से अनिवार्य रूप से परामर्श करना ज़रूरी है। कमिटी ने गौर किया कि इन सुरक्षात्मक उपायों को ठीक से लागू न करने पर जनजातीय समुदायों की ज़मीन और आजीविका छिन सकती है। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) भूमि अधिग्रहण, खनन लीज़ और पुनर्वास के सभी मामलों में ग्राम सभा की अनिवार्य मंज़ूरी के लिए विस्तृत दिशानिर्देश बनाए जाएं और (ii) नियमों के उल्लंघन के मामलों में जवाबदेही तय करने के तरीके और समय-समय पर सोशल ऑडिट की व्यवस्था की जाए।

  • संस्थागत समन्वय: कमिटी ने कहा कि मंत्रालय ने एक खास पेसा सेल बनाया है लेकिन इसे लागू करने के लिए कई विभागों के बीच तालमेल की ज़रूरत है। इनमें पंचायती राज, जनजातीय मामले, वन और राजस्व विभाग शामिल हैं। कमिटी ने यह भी कहा कि पेसा का संबंध वन, भूमि और खनन से जुड़े कई अन्य कानूनों से है और इनके बीच तालमेल न होने से प्रशासनिक उलझनें पैदा होती हैं और यह ठीक से लागू नहीं हो पाता। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर समर्पित पेसा सेल बनाना जिनकी भूमिकाएं स्पष्ट हों, कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या हो और उचित बजट हो, और (ii) बेहतर तालमेल के लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय समितियां बनाना।

  • पेसा नियमों की अधिसूचना: कमिटी ने गौर किया कि ओड़िशा एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने अभी तक पेसा के नियमों को अधिसूचित नहीं किया है, जबकि नियमों का ड्राफ़्ट 2023 में ही तैयार कर लिया गया था। मंत्रालय ने कमिटी को बताया कि वह इस प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए राज्य सरकार के साथ बातचीत कर रहा है। कमिटी ने सभी पेसा राज्यों को पेसा नियमों की समय-समय पर समीक्षा और उन्हें अपडेट करने का भी सुझाव दिया।   

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

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