स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश
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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: श्री सुनील तटकरे) ने 12 अगस्त, 2026 को 'तेल पीएसयूज़ की आरएंडडी गतिविधियों की समीक्षा' पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमिटी ने तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में काम कर रही 11 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयूज़) की अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा की। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
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आरएंडडी का अनिवार्य न्यूनतम व्यय: कमिटी को मिले आंकड़ों से पता चला कि 2020-21 में, पेट्रोलियम क्षेत्र में आरएंडडी पर कुल खर्च देश के कुल आरएंडडी खर्च का लगभग 1.3% था। 2025-26 में, बड़ी तेल पीएसयूज़ ने टैक्स के बाद अपने कुल लाभ का लगभग 2% आरएंडडी पर खर्च किया। हालांकि हर पीएसयू का खर्च अलग-अलग था, जो 1.3% से 3.8% के बीच था। कमिटी ने सुझाव दिया कि सभी पीएसयूज़ के लिए आरएंडडी पर न्यूनतम खर्च का एक बेंचमार्क तय किया जाए। यह टैक्स से पहले उनके लाभ का एक न्यूनतम प्रतिशत होगा, जिसमें समय-समय पर बदलाव किए जा सकेंगे। कमिटी ने आरएंडडी प्रोजेक्ट्स के सह-वित्तपोषण के लिए एक विशेष फ़ंड बनाने और आरएंडडी में निजी क्षेत्र के सह-निवेश को बढ़ावा देने के उपाय करने का भी सुझाव दिया।
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आरएंडडी का प्रबंधन और निगरानी: कमिटी ने कहा कि इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं थी कि पीएसयूज़ अनुसंधान के कार्यों को कैसे प्राथमिकता देती हैं, अलग-अलग पीएसयूज़ मिलकर मिशन कैसे चुनती हैं, या एक ही जैसे परियोजना को दोबारा शुरू होने से कैसे रोकती हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ऑयल, गैस एंड एनर्जी को एक 'नेशनल मिशन पोर्टफोलियो' चलाना चाहिए, जो आरएंडडी को देश के लक्ष्यों से जोड़े। इसके साथ ही कमिटी ने सुझाव दिया कि तेल पीएसयूज़ के बोर्ड में आरएंडडी विभाग का एक प्रतिनिधि भी होना चाहिए, ताकि कंपनियों के व्यावसायिक लक्ष्यों और अनुसंधान की रणनीतियों के बीच सही तालमेल बना रहे।
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आरएंडडी का प्रदर्शन मूल्यांकन: कमिटी ने कहा कि तेल पीएसयूज़ के आरएंडडी इकोसिस्टम में देश भर में 16 आरएंडडी सेंटर और पांच क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं शामिल हैं। उसने गौर किया कि पीएसयू अनुसंधान केंद्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए कोई मानक बेंचमार्क नहीं था। कमिटी ने एक मानकीकृत बेंचमार्किंग सिस्टम और रिपोर्टिंग मैकेनिज्म बनाने का सुझाव दिया। इनमें तकनीकी हस्तांतरण की सफलता दर, बाहरी अनुसंधान सहयोग, वाणिज्यिक इस्तेमाल का स्तर और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे पैमाने शामिल होंगे। कमिटी ने एक तय समय पर होने वाली साझा समीक्षा व्यवस्था बनाने का भी सुझाव दिया। इस समीक्षा को एक टीम द्वारा किया जाएगा जिसमें सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी, साइंटिफिक एडवाइजरी कमिटी, सभी तेल पीएसयूज़ के आरएंडडी प्रमुख और स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे।
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नए उत्पादों और तकनीक की खोज: कमिटी ने कहा कि तेल पीएसयूज़ तेल की रिकवरी (पुराने कुएं से तेल निकालने), गहरे पानी से तेल निकालने और शेल तेल व गैस हाइड्रेट्स को बाहर निकालने की तकनीकों पर काम कर रही हैं। हालांकि गैस हाइड्रेट्स और शेल तेल को वाणिज्यिक स्तर पर निकालने में सीमित सफलता ही मिली है। कमिटी ने सरकार को निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) वह गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज जारी रखे, (ii) इन तकनीकों में माहिर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने के तरीकों पर विचार करे, और (iii) शुरुआती स्तर पर उत्पादन और काम को बड़े पैमाने पर करने के लिए सार्वजनिक-निजी सहभागिता की संभावनाओं को तलाशे।
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उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग: कमिटी ने कहा कि तेल पीएसयूज़ नामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर काम करती हैं। हालांकि, ये जुड़ाव ज़्यादातर कम समय के लिए होते हैं और अलग-अलग पीएसयू के साथ समझौतों के ज़रिए होते हैं। कमिटी ने यह भी गौर किया कि तेल पीएसयूज़ ने 150 से ज़्यादा स्टार्ट-अप्स का वित्तपोषण किया है। कमिटी ने सुझाव दिया कि पीएसयूज़ वैश्विक विश्वविद्यालयों, लैब और कंपनियों के साथ लंबे समय के लिए तालमेल बढ़ाएं, जिसमें दोनों पक्ष मिलकर धन लगाएं और बौद्धिक संपदा को आपस में बांटने का समझौता हो। इसके साथ ही कमिटी ने यह भी सलाह दी है कि पीएसयूज़ एक फंड बनाए, जिससे स्टार्टअप्स द्वारा विकसित तकनीकों का सरकारी संयंत्रों में बड़े पैमाने पर ट्रायल और व्यावसायिक इस्तेमाल करने के लिए वित्तपोषण किया जा सके।
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आरएंडडी का मुद्रीकरण: कमिटी ने गौर किया कि तेल और गैस पीएसयूज़ ने अंदरूनी तौर पर तकनीक विकसित कीं और उनका इस्तेमाल किया, लेकिन उनके पास उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने और उनकी मार्केटिंग के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। कमिटी ने सुझाव दिया कि पीएसयू पेटेंट को एक बिज़नेस पोर्टफोलियो के तौर पर प्रबंधित करना शुरू करें और आरएंडीडी से वाणिज्यिक परिणाम पाने के लिए रणनीतियां बनाएं।
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आरएंडडी के लिए मानव संसाधन: कमिटी ने गौर किया कि आरएंडडी के लिए सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर ही भर्ती करने से प्रतिभाशाली व्यक्तियों का निरंतर प्रवाह नहीं रह पाता। कमिटी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि मानव संसाधन को आरएंडडी लक्ष्यों से जोड़ने के लिए दीर्घावधि की योजना की ज़रूरत है। इसके लिए कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) पीएसयूज़ में आरएंडडी से जुड़े करियर के लिए एक अलग और निश्चित रास्ता बनाया जाए, (ii) इस्तेमाल में आ रहे पेटेंट और जिन तकनीकों से कमाई हो रही है, उनके लिए कर्मचारियों को काम के आधार पर बोनस या इंसेंटिव दिया जाए, और (iii) सभी पीएसयूज़ में भर्ती और प्रमोशन के नियमों को एक जैसा बनाने के लिए एक मजबूत और बेहतर एचआर ढांचा तैयार किया जाए।
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