मंत्रालय: 
विधि एवं न्याय
  • राज्यसभा में 20 दिसंबर, 2021 को मध्यस्थता बिल, 2021 पेश किया गया। मध्यस्थता एक किस्म का वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) होता है जिसमें एक स्वतंत्रत व्यक्ति (मध्यस्थ) की सहायता से विभिन्न पक्ष अपने विवादों को निपटाने का प्रयास करते हैं (अदालत के बाहर)। बिल मध्यस्थता (ऑनलाइन मध्यस्थता सहित) को बढ़ावा देने का प्रयास करता है तथा मध्यस्थता समझौते के परिणामस्वरूप निपटारे को लागू करने का प्रावधान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
     
  • एप्लिकेबिलिटीबिल भारत में मध्यस्थता की कार्यवाहियों पर लागू होगा, जहां (i) सभी पक्ष भारत में निवास करते हैं, यहां निगमित हुए हैं, या यहां उनका व्यापार का स्थान है, (ii) मध्यस्थता समझौते में कहा गया है कि मध्यस्थता इस बिल के अनुसार होगी, या (iii)   कोई अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता है (यानी किसी कमर्शियल विवाद से संबंधित मध्यस्थता, जहां कम से कम एक पक्ष किसी दूसरे देश की सरकार, विदेशी नागरिक/निवासी, या ऐसी एंटिटी है जिसके व्यापार का स्थान भारत के बाहर है)। इन मामलों में अगर केंद्र या राज्य सरकार एक पक्ष है, तो बिल निम्नलिखित मामलों में लागू होगा: (क) कमर्शियल विवाद, और (ख) सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य विवाद।
     
  • मुकदमे से पहले मध्यस्थतासिविल या कमर्शियल विवाद के मामले में व्यक्ति को अदालत या किन्हीं ट्रिब्यूनल्स (जिन्हें अधिसूचित किया जाएगा) से संपर्क करने से पहले मध्यस्थता के जरिए विवाद को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। अगर सभी पक्ष मुकदमेबाजी से पहले मध्यस्थता के जरिए कोई समझौता नहीं कर पाते तो भी अदालत या ट्रिब्यूनल कार्यवाही के किसी भी चरण में उन पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेज सकते हैं, अगर वे पक्ष इस संबंध में कोई अनुरोध करते हैं।
     
  • मध्यस्थता के लिए अनुपयुक्त विवादजो विवाद मध्यस्थता के लिए अनुपयुक्त हैं, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) नाबालिगों या मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के खिलाफ दावों से संबंधित, (ii) क्रिमिल अपराध के प्रॉसीक्यूशन से जुड़े हुए, (iii) तीसरे पक्ष के अधिकारों को प्रभावित करने वाले, और (iv) करों की वसूली या कलेक्शन से संबंधित। केंद्र सरकार विवादों की इस सूची में संशोधन कर सकती है। 
     
  • मध्यस्थता की प्रक्रियामध्यस्थता की प्रक्रिया गोपनीय होगी। पहले दो सत्रों के बाद कोई पक्ष मध्यस्थता से हट सकता है। मध्यस्थता की प्रक्रिया 180 दिनों में खत्म होनी चाहिए (इसके बावजूद कि विभिन्न पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंचते) जोकि विभिन्न पक्षों द्वारा 180 दिनों तक और बढ़ाई जा सकती है। अदालत से जुड़ी मध्यस्थता (यानी किसी अदालत या ट्रिब्यूनल द्वारा स्थापित मध्यस्थता केंद्र में होने वाली मध्यस्थता) के मामले में इस प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के निर्देशों या निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित किया जाना चाहिए।  
     
  • मध्यस्थ: विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ विभिन्न पक्षों की सिर्फ सहायता करेंगे, और वे उन पर उस समझौते को थोप नही सकते। मध्यस्थों को निम्नलिखित द्वारा नियुक्त किया जा सकता है: (i) आपसी रजामंदी से पक्षों द्वारा, या (ii) मध्यस्थता सेवा प्रदाता (मध्यस्थता का संचालन करने वाली संस्था) द्वारा। मध्यस्थों को हितों के किसी टकराव का खुलासा करना चाहिए जोकि उनकी स्वतंत्रता पर संदेह पैदा करता हो। तब पक्ष उसे बदलने का विकल्प चुन सकते हैं। 
     
  • भारतीय मध्यस्थता परिषदकेंद्र सरकार भारतीय मध्यस्थता परिषद की स्थापना करेगी। परिषद में एक चेयरपर्सन, दो पूर्णकालिक सदस्य (मध्यस्थता या एडीआर के अनुभव वाले), तीन पदेन सदस्य (विधि एवं न्याय, तथा वित्त मंत्रालयों के सेक्रेटरीज़ सहित) और एक अल्पकालिक सदस्य (इंडस्ट्री बॉडी से जुड़ा हुआ) होंगे। परिषद के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iमध्यस्थों का पंजीकरण, और (ii) मध्यस्थता सेवा प्रदाताओं और मध्यस्थता संस्थाओं (मध्यस्थों को प्रशिक्षण, शिक्षा और सर्टिफिकेशन देने वाली) को मान्यता देना। 
     
  • मध्यस्थता समझौता करारमध्यस्थता के परिणामस्वरूप समझौते लिखित में होने चाहिए, उन पर सभी पक्षों के हस्ताक्षर होने चाहिए और मध्यस्थ द्वारा प्रमाणित होने चाहिए। ऐसे करार अंतिम, बाध्यकारी होंगे और अदालती फैसलों की तरह लागू होंगे (सिवाय सामुदायिक मध्यस्थता के तहत हुए करारों को छोड़कर)। मध्यस्थता समझौता करार (अदालत द्वारा मध्यस्थता के लिए भेजे गए मामलों पर हुए करार या लोक अदालत या स्थायी लोक अदालत द्वारा कराए गए करार) को सिर्फ निम्नलिखित आधार पर चुनौती दी जा सकती है: (i) धोखाधड़ी, (ii) भ्रष्टाचार, (iii) प्रतिरूपण (इनपर्सोनेशन), या (iv) मध्यस्थता के लिए अनुपयुक्त विवादों से संबंधित। 
     
  • सामुदायिक मध्यस्थताकिसी क्षेत्र के निवासियों के बीच शांति और सौहार्द को प्रभावित करने की आशंका वाले विवादों को हल करने के लिए सामुदायिक मध्यस्थता के प्रयास किए जा सकते हैं। यह तीन मध्यस्थों के पैनल द्वारा किया जाएगा (इनमें समुदाय के प्रतिष्ठित लोग और आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं)।
     
  • दूसरे कानूनों के साथ इंटरफेसबिल मध्यस्थता से जुड़े सभी कानूनों पर प्रभावी होगा (सिवाय कुछ कानूनों को छोड़कर, जैसे लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटीज़ एक्ट, 1987 और औद्योगिक संबंध संहिता, 2020)। बिल कुछ कानूनों में अनुवर्ती संशोधन भी करता है (जैसे भारतीय कॉन्ट्रैक्ट एक्ट, 1872, और आर्बिट्रेशन और कंसीलिएशन एक्ट, 1996)।

 

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